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जंतर मंतर पर अब नहीं होगा धरना-प्रदर्शन, सरकार ने प्रोटेस्ट के लिए तय किए तीन नए स्थल

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दिल्ली में अब जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन नहीं होगा। इसके बजाय तीन नए स्थान निर्धारित किए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है। अब रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को धरना-प्रदर्शन के लिए नए स्थल के रूप में निर्धारित किया गया है। सरकार का यह फैसला तब सामने आया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए जंतर मंतर जाने की कॉकरोच जनता पार्टी मांग कर रही है।

धरना-प्रदर्शन के लिए तीन नए स्थान

आदेश के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मौजूदा निर्धारित स्थल के विकल्प के तौर पर विरोध प्रदर्शन और धरने आयोजित करने के लिए उपयुक्त स्थानों की समीक्षा करने के वास्ते एक समिति गठित की थी। आदेश में कहा गया है कि समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल के रूप में गैर अधिसूचित किया गया है। इसके अलावा रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन नए स्थानों के तौर पर तय किया गया है।

प्रदर्शन के लिए अलग से जारी होगी प्रक्रिया

दिल्ली पुलिस के आदेश में कहा गया है कि इन तीनों स्थलों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए विस्तृत और संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अलग से जारी की जाएगी। यानी प्रदर्शन आयोजित करने की प्रक्रिया और उससे जुड़े दिशा-निर्देशों की जानकारी बाद में दी जाएगी। फिलहाल आदेश में नए नियमों का पूरा विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए प्रदर्शन से जुड़ी शर्तों, अनुमति लेने की प्रक्रिया और अन्य व्यवस्थाओं के बारे में अलग आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट जानकारी मिलेगी।

विपक्ष के प्रदर्शन के बीच फैसला

दिल्ली पुलिस का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब राष्ट्रीय राजधानी में निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी इंडिया गठबंधन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी ने सोमवार को कहा कि वह जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति के लिए दिल्ली पुलिस को जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय देगी क्योंकि पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखे हुए है।

विपक्ष के मार्च पर भड़के हरीश साल्‍वे, बोले-सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल किया जा रहा

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देश के जाने-माने वकील और भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिलने की कोशिश और सुप्रीम कोर्ट तक किए जाने वाले मार्च को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्‍होंने विपक्ष के इस कदम को परम मूर्खता बताते हुए कहा कि न्‍यायपालिका को पॉलिटिकल टूल के तौर पर इस्‍तेमाल किया जा रहा है।

विपक्ष के इस कदम को बताया ‘सरासर मूर्खता’

आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में कानूनी मामलों के जानकार और देश के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्‍वे ने विपक्ष के सीजेपी से मुलाकात की कोशिश और सुप्रीम कोर्ट तक के मार्च को ‘सरासर मूर्खता’ बताते हुए आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के तौर पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान अधिकार देता है, लेकिन उनका इस्तेमाल कानून और संवैधानिक मर्यादाओं के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।

विपक्ष के रुख पर कड़ी टिप्पणी

साल्वे ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने के बजाय राजनीतिक दलों को स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष का रुख ऐसा प्रतीत होता है, मानो उसे संविधान और व्यवस्था पर भरोसा नहीं है और वह अपनी इच्छा के अनुसार काम करना चाहता है।

अधिकारों का इस्तेमाल कानून के दायरे में रहकर किया जाए-साल्वे

विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर साल्वे ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल कानून के दायरे में रहकर ही किया जा सकता है। अगर पुलिस प्रदर्शन की अनुमति नहीं देती है, तो उसके फैसले को उचित कानूनी प्रक्रिया के जरिए अदालत में चुनौती दी जा सकती है। कोई व्यक्ति खुद ही पुलिस के आदेश को गलत मानकर प्रतिबंध तोड़ नहीं सकता और फिर रोके जाने पर अपने अधिकारों के उल्लंघन का दावा नहीं कर सकता। उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार किसी को कानून से ऊपर नहीं बनाता।

विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के ऐलान पर टिप्पणी

पूर्व सॉलिसिटर जनरल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की घोषणा की है। राहुल गांधी ने विपक्षी दलों, नागरिक समाज संगठनों और आम नागरिकों से भी मार्च में शामिल होने की अपील की थी।

ओवैसी ने की सीईसी की नियुक्ति से जुड़ा कानून रद्द करने की मांग, बोले- एसआईआर भी खत्म किया जाए

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मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष के दबाव के कारण देश का सिसायी पारा चढ़ा हुआ है। इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को रद्द करने की मांग की है।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून पर एतराज

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि जब मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा नया विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था, तभी उन्होंने सरकार को आगाह किया था कि इसके प्रावधानों से आम जनता के बीच चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता कम होगी। उन्होंने कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि इस कानून में सेवानिवृत्ति के बाद चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है, जो बिल्कुल सही नहीं है। ओवैसी ने मांग की कि नियुक्ति प्रक्रिया में फिर से बदलाव किया जाना चाहिए और चयन समिति में प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता के साथ-साथ देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

एसआईआर पर भी उठाए सवाल

ओवैसी ने एसआईआर पर भी सवाल उठाया है। एसआईआर के मुद्दे पर बोलते हुए ओवैसी ने कहा कि आखिर यह प्रक्रिया कहां से आई। उन्होंने दावा किया कि 10 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं। इसके बावजूद फॉर्म-6 के आवेदनों की प्रक्रिया के दौरान आवेदकों की मैपिंग पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने एसआईआर को भी बंद करने की मांग की। उन्होंने मांग की कि इस पूरी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाना चाहिए।

‘इंडिया’ ब्लॉक का हिस्सा नहीं-ओवैसी

एआईएमआईएम प्रमुख ने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक के विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए ओवैसी ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में विरोध जताना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और देश की सर्वोच्च अदालत भी इस बात की पुष्टि कर चुकी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह खुद ‘इंडिया’ ब्लॉक का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए वे इस गठबंधन के आंतरिक कार्यक्रमों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं।

इंडिया गठबंधन का सुप्रीम कोर्ट मार्च आज, छह मेट्रो स्टेशन बंद

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चुनाव आयोग में कथित अनियमितता को लेकर विपक्ष लामबंद दिख रहा है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ दिल्ली में आंदोलन हो रहा है। विपक्षी दलों का इंडिया गठबंधन अपनी मांग को लेकर लगातार सड़कों पर है। आज फिर दिल्ली में इंडिया ब्लॉक का सुप्रीम कोर्ट तक विरोध मार्च प्रस्तावित है।

राहुल गांधी की युवाओं से प्रोटेस्ट में भाग लेने की अपील

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बड़ी संख्या में देश के लोगों और युवाओं से इस प्रोटेस्ट में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि यह किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है। राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवा, तमाम विपक्षी दल, सिविल सोसाइटी और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले सभी लोग इस मार्च में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि संविधान के साथ खड़े सभी लोग इस पहल का हिस्सा बनेंगे।

राहुल गांधी ने डरो मत का नारा भी दिया

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि ये लोग भारत की आवाज को दबा नहीं सकते। उन्होंने कहा कि विपक्ष डरने वाला नहीं है और सरकार को पीछे हटना होगा। राहुल गांधी ने लिखा कि सभी लोग मोहब्बत, भाईचारे और देशभक्ति की भावना के साथ एक साथ मार्च करेंगे। राहुल गांधी ने अपने संदेश में 'डरो मत' का नारा भी दिया और कहा कि सोमवार को पूरा भारत सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेगा।

इंडिया ब्लॉक के मार्च में कौन-कौन से नेता होंगे शामिल?

प्रस्तावित मार्च में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हो सकते हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में यह मार्च सुप्रीम कोर्ट तक निकाला जाना है। इसमें तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वाम दलों, आरजेडी, एनसीपी (एसपी), नेशनल कॉन्फ्रेंस, वीसीके और आईयूएमएल के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। केरल के कुछ क्षेत्रीय दल भी मार्च में हिस्सा ले सकते हैं। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है।

मार्च से पहले सुरक्षाबल मुस्तैद

दिल्ली में आज सुप्रीम कोर्ट तक इंडिया ब्लॉक के प्रस्तावित विरोध मार्च से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बाराखंभा रोड और मंडी हाउस के पास सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। यहां दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कर्मी भी तैनात हैं। प्रस्तावित मार्च को देखते हुए इन इलाकों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ाई गई है। हालांकि, विरोध मार्च में शामिल होने वाले नेताओं की संख्या, मार्च के निर्धारित मार्ग और यातायात व्यवस्था को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

दिल्ली के 6 मेट्रो स्टेशन आज रहेंगे बंद

विपक्षी दलों के मार्च को देखते हुए आज सुबह 6 बजे से लेकर शाम के 4 बजे तक पटेल चौक, जनपथ, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन, मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन, बाराखंभा रोड मेट्रो स्टेशन बंद रहेंगे।

विपक्षी नेताओं से मिलने से सीजेआई सूर्यकांत का इनकार, अब होगा राहुल गांधी का अगला कदम?

#cjisuryakantdeclinesrahulgandhimeeting

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक बड़ा झटका लगा है। खबर है कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने राहुल गांधी के मुलाकात के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया है। बता दें कि राहुल गांधी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मसले पर चर्चा के लिए सोमवार को मुलाकात का समय मांगा था।

सीजेआ ने बताई मुलाकात से इनकार की वजह

जानकारी के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत ने ईमेल के जरिए विपक्षी नेताओं को अपना जवाब भेजा है। इसमें उन्होंने मुलाकात से इनकार करने की वजहें भी बताई हैं। सीजेआई सूर्यकांत ने कांग्रेस को भेजे अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट अपने प्रशासनिक पक्ष से सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप करने के लिए निर्देश जारी नहीं कर सकता। बता दें कि कांग्रेस नेता जिन मुद्दों को उठाना चाहते थे, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।

विपक्षी दलों के सुप्रीम कोर्ट मार्च का ऐलान

इससे पहले रविवार को राहुल गांधी ने कहा था कि विपक्षी दल सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। वे सीजेआई को एक ज्ञापन सौंपेंगे। इसमें एसआईआर प्रक्रिया वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जाएगी। राहुल गांधी ने कहा था, "कल दिल्ली में देश का युवा शांतिपूर्ण विरोध के लिए सड़कों पर उतरा। उनके दिलों में नफरत या गुस्सा नहीं, मोहब्बत थी। लेकिन उन्हें पुलिस और BJP के गुंडों, दोनों ने पीटा। ऐसा भारत हम नहीं चाहते। कल, सोमवार 12 अक्टूबर को, हम भारतीय होने के नाते सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। पार्टी, महिला-पुरुष, जाति, समुदाय और राज्य की हर दीवार से ऊपर उठकर, हम सब एक साथ चलेंगे।"

Jharkhand
माता स्व. रूपी सोरेन के श्राद्ध व भोज की तैयारियों का सीएम हेमंत सोरेन ने लिया जायजा
नेमरा में सीएम हेमंत सोरेन से 3 विधायकों ने की मुलाकात, स्व. रूपी सोरेन को दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से आज उनके रामगढ़ जिले के नेमरा स्थित पैतृक आवास पर विधायक श्री प्रदीप प्रसाद, विधायक श्री शत्रुघ्न महतो एवं विधायक श्री रोशन लाल चौधरी ने मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की।

विधायकों ने मुख्यमंत्री की पूजनीय माता स्व० रूपी सोरेन जी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

इस दौरान विधायकों ने मुख्यमंत्री एवं उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी सहानुभूति प्रकट करते हुए दु:ख की इस घड़ी में संबल प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।

पूरी दिल्ली से हटाए जाएंगे बैरिकेड्स, इंटरनेट भी होगा बहाल, सीजेपी प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

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राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी और विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। प्रोटेस्ट को लेकर लगाई गई पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक में मेट्रो, इंटरनेट से लेकर आम जनता की स्वतंत्र आवाजाही पर जवाब दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने और भी कई सारे निर्देश जारी किए हैं।

दिल्ली में 10 अक्तूबर को हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की हिरासत, मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध से जुड़े मामलों की सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान मेट्रो सेवाओं की स्थिति, नागरिकों की आवाजाही और इंटरनेट कनेक्टिविटी से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर टिप्पणी की। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से बंद किए गए मेट्रो स्टेशनों का विवरण और उनकी भौगोलिक स्थिति दर्शाने वाला नक्शा पेश करने को कहा। पीठ का कहना था कि इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि प्रतिबंधों का लोगों की आवाजाही और सार्वजनिक परिवहन तक पहुंच पर क्या प्रभाव पड़ा।

दिल्ली पुलिस कमिश्नर समेत अन्य को कारण बताओ नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर समेत अन्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और कहा कि हम संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हैं कि वे संक्षिप्त हलफनामा दाखिल कर यह बताएं कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए। कथित अवमाननाकर्ताओं को नोटिस जारी किया जाए। वे अवमानना याचिका के जवाब में हलफनामा दाखिल करें और साथ ही ऊपर उल्लिखित आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट भी प्रस्तुत करें।

मेट्रो सेवा पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि मेट्रो सेवाएं सामान्य समय सारणी के मुताबिक चलनी चाहिए और शहर में लोगों की आवाजाही पूरी तरह बहाल की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह अंतरिम आदेश पारित करेगा, जिसके तहत मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलेंगी, जब तक कानून-व्यवस्था की ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो, जिसमें प्रतिबंध आवश्यक हो जाएं। आम जनता की स्वतंत्र आवाजाही बहाल की जाएगी।

इंटरनेट बहाली पर अदालत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान दिल्ली में इंटरनेट सेवाओं का मुद्दा भी उठा। पीठ ने शहर में इंटरनेट सुविधा बहाल करने की बात कही। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि इंटरनेट सेवाएं पिछली रात से ही बहाल हैं। अदालत ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेने की बात कही।

सीजेपी नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका रिहा, जंतर-मंतर पर जाने की इजाजत नहीं

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दिल्ली में सीजेपी से जुड़े अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को एहतियाती कार्रवाई के तहत हिरासत में लिए जाने के बाद दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। अधिकारियों की प्रक्रिया के तहत तीनों को मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया। सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह के अनुसार, अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, कोर्ट ने तीनों को जंतर-मंतर पर जाने की इजाजत नहीं दी है।

दिपके, सौरव, रांका को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने किया रिहा

सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह के अनुसार, अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने रिहा करने का आदेश दिया।उन्होंने बताया कि BNSS की धारा 126/170 के तहत तीनों नेताओं को पुलिस ने पकड़ा है। उन्हें दिल्ली पुलिस ने प्रिवेंटिव अरेस्ट किया था। हालांकि, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें छोड़ने का आदेश दिया है।

प्रोटेस्ट से पहले पुलिस ने किया था डिटेन

अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष को शनिवार को इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उस समय हिरासत में लिया गया था, जब वे भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। यह घटनाक्रम सीजेपी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जो मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर किया जाना था।

सीजेपी का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी

इधर, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने आंदोलन दूसरे दिन भी जारी है। आज चार प्रदर्शनकारियों को डीडीयू मार्ग से और दो-तीन को अशोक रोड से हिरासत में लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आसपास भी भीड़ जुटने की इजाजत नहीं है, भगवान दास रोड पर बड़ी संख्या में पुलिस तैनात है।

यूट्यूबर ध्रुव राठी को हिरासत से छोड़ा गया, फिर हो सकते हैं गिरफ्तार, पुलिस ने चेताया

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जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में शामिल होने जर्मनी से आए यूट्यूबर ध्रुव राठी को देर रात दिल्ली पुलिस ने छोड़ दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी के शनिवार को हुए प्रदर्शन से पहले ही उन्हें गुरुग्राम में उनके घर से हिरासत में ले लिया गया था। कल ही देर रात ध्रुव राठी को रिहा कर दिया गया। हालांकि, पुलिस सूत्रों का कहना है कि यदि ध्रुव राठी ने फिर से जंतर-मंतर जाने की कोशिश की तो उनके खिलाफ फिर से एक्‍शन लिया जाएगा।

शनिवार देर रात रिहा किए गए राठी

पुलिस ने साफ किया है कि अगर ध्रुव राठी प्रतिबंधात्मक आदेशों के बावजूद जंतर-मंतर जाने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें दोबारा हिरासत में लिया जा सकता है या उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। दिल्ली में कॉकरोचत जनता पार्टी के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले राठी को हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस ने उन्हें हरियाणा के गुरुग्राम स्थित सेक्टर-56 में उनके घर से हिरासत में लिया था। यूट्यूबर ध्रुव राठी को शनिवार देर रात रिहा कर दिया गया।

इंस्टाग्राम पर जारी किया था वीडियो

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से एक दिन पहले शुक्रवार को इंस्टाग्राम पर ध्रुव राठी ने एक वीडियो भी जारी किया था। शेयर किए गए एक वीडियो में ध्रुव राठी ने विरोध प्रदर्शन से पहले राष्ट्रीय राजधानी में लगाई गई भारी सुरक्षा और परिवहन पाबंदियों पर सवाल उठाए थे। राठी ने कहा था,'मैं दिल्ली पहुंच गया हूं। और मैंने देखा कि हमारे प्रधानमंत्री ने यहां क्या व्यवस्था की है। 50 से ज्यादा मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं। ट्रेनें बंद कर दी गई हैं। बसें रद्द कर दी गई हैं। और हमारे विरोध प्रदर्शन के कारण वे लगभग दिल्ली को लॉकडाउन में डाल रहे हैं।' ध्रुव राठी ने इतनी कड़ी पाबंदियों की जरूरत पर भी सवाल उठाते हुए कहा था कि भाजपा से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स दावा कर रहे हैं कि विरोध प्रदर्शन में बहुत कम भीड़ आएगी।