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12 अक्टूबर को भाजपा महिला मोर्चा सभी जिलों में कांग्रेस कार्यालयों पर करेगी धरना-प्रदर्शन: अमर कुमार बाउरी


जेएनयू के प्रोफेसर सह कांग्रेस सांसद डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजाम पर छात्राओं के यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले को लेकर भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी ने घोषणा किया है कि 12 अक्टूबर को झारखंड के सभी जिलों में कांग्रेस कार्यालयों पर भाजपा महिला मोर्चा द्वारा धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

उन्होंने कांग्रेस पर महिला सुरक्षा के सवाल पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपी सांसद के इस्तीफे की मांग को लेकर भाजपा का आंदोलन अलग-अलग स्वरूपों में जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि 12 अक्टूबर को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में कांग्रेस कार्यालयों पर होने वाला प्रदर्शन इसी आंदोलन की महत्वपूर्ण कड़ी होगा। भाजपा महिला मोर्चा के कार्यकर्ता इस प्रदर्शन के माध्यम से महिला सम्मान, सुरक्षा और राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा उठाएंगे। जब तक आरोपी सांसद का इस्तीफा नहीं हो जाता है तब तक इस मामले को लेकर भाजपा महिला मोर्चा का चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा।

श्री बाउरी ने कहा कि इनर मणिपुर से कांग्रेस सांसद डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजाम के खिलाफ छात्राओं के यौन उत्पीड़न से संबंधित मामला सामने आने के बाद कांग्रेस नेतृत्व की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस एक ओर महिला सम्मान और सुरक्षा की बात करती है, वहीं अपने सांसद से जुड़े इस मामले पर पार्टी नेतृत्व की चुप्पी कई सवाल खड़ी कर रही है।

प्रदेश महामंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि राहुल गांधी देशभर में पितृसत्तात्मक व्यवस्था समाप्त करने की बात करते हैं, जबकि प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस के अन्य नेता भी महिला सम्मान की बात करते रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस सांसद पर इस तरह के गंभीर आरोप लगे हैं, तो पार्टी नेतृत्व की जुबान चुप क्यों है, इस मुद्दे पर वह खुलकर अपनी बात क्यों नहीं रख रहा है।

श्री बाउरी ने कहा कि भाजपा के लिए महिला सुरक्षा और उनका सम्मान महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। इस मुद्दे पर भाजपा चुप बैठने वाली नहीं है।

सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर 3000 लोगों पर कार्रवाई, ममता और केजरीवाल भी हिरासत में

#cjpprotestjantar_mantar

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में काफी बवाल देका गया। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरते ही हिरासत में ले लिया गया। वहीं टीएमसी सुप्रीम ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल सहित संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और दुर्गेश पाठक को भी विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

विरोध प्रदर्शन के दौरान 3000 से ज्यादा लोग हिरासत में

सीजेपी के बुलाए गए इस विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने 3,000 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, राजधानी के अलग-अलग इलाकों में यह कार्रवाई की गई। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध जताने के लिए जुटे थे। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की।

6 पुलिसकर्मी घायल

3000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के दौरान छह पुलिसकर्मी घायल हो गए। इनमें पिंक फोर्स की एक महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, आकाशवाणी भवन और कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर के पास पथराव की घटनाएं हुईं। महिला पुलिसकर्मी सुमन ने बताया कि हनुमान मंदिर के पास प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेते समय कुछ महिलाओं ने उनकी उंगली मोड़ दी, जिससे फ्रैक्चर हो गया। वहीं, आकाशवाणी भवन के पास इम्तियाज अली मार्ग पर प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग गिराकर पुलिस पर पत्थर फेंके। यह कार्रवाई चुनाव आयोग के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के आह्वान के बाद हुई। पुलिस ने कानून-व्यवस्था की स्थिति और निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। सुरक्षा के लिए नई दिल्ली जिले को 20 जोन में बांटा गया था और ड्रोन से निगरानी की गई।

अब कल इंडिया गठबंधन का हल्ला बोल

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी इंडिया गठबंधन का सोमवार को बड़े प्रोटेस्ट मार्च का ऐलान किया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने शनिवार शाम एक्स पर पोस्ट करके कहा, ‘हम उन सभी भारतीयों से अपील करते हैं जो भारतीय लोकतंत्र को बचाने को लेकर चिंतित हैं कि वे सोमवार को दिल्ली में होने वाले बड़े विरोध मार्च में हमारे साथ शामिल हों – यह मार्च मोदी-शाह सरकार द्वारा देश भर में किए गए ‘वोट चोरी’ के खिलाफ है।’

सोनम वांगचुक ने और क्या चेतवानी दी?

लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर भारत को ‘अघोषित आपातकाल’ की स्थिति में बताया। वांगचुक ने कहा कि उन्होंने प्रदर्शन से पहले एकता और शांति बनाए रखने की अपील की थी, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में ऐसे हालात देखने को मिलेंगे। वांगचुक ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि कई नेता आंदोलन का नेतृत्व करेंगे, लेकिन अब उन्हें पता चला है कि सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हिरासत में लिए गए लोगों को जल्द रिहा किया जाएगा। वांगचुक ने चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारियों को रविवार तक रिहा नहीं किया गया, तो वह अनशन या पदयात्रा करने पर विचार करने को मजबूर होंगे।

'मैंने 8 युद्ध समाप्त किए', नोबेल शांति पुरस्कार पर ट्रंप का रोना, बोले-यह पुरस्कार उनका हक था

#donaldtrumpnobelpeaceprize_statement

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कितनी शिद्दत से नोबेल शांति पुरस्तार हासिल करना चाहते हैं, ये बात पूरी दुनिया जानती है। पिछले साल भी ट्रंप को पूरी आशा थी कि नोबेल शांति पुरस्तार उन्हें ही मिलेगा। लेकिन, उन्हें सिवा निराशा के कुछ भी हाथ नहीं लगा। इस बार भी उनका सपना चूर-चूर हो गया है। ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने पर एक बार फिर नाराजगी जताई है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने आठ युद्ध सुलझाए हैं, इसलिए नोबेल शांति पुरस्कार पर उनका हक था।

नोबेल पीस प्राइज के फैसले को बताया शर्मनाक और निंदनीय

न्यूयॉर्क के सिरैक्यूज़ में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार के फैसले पर काफी देर तक चर्चा की और तर्क दिया कि यह सम्मान उन्हें दिया जाना चाहिए था। ट्रंप ने कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका, जिसका प्रतिनिधित्व मैं आपके राष्ट्रपति के रूप में करता हूं, को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था, लेकिन नहीं मिला। और यह नॉर्वे देश और उन लोगों पर एक अमिट धब्बा है जिन्होंने इतना शर्मनाक और निंदनीय निर्णय लिया।" उन्होंने पुरस्कार के आयोजकों की आलोचना जारी रखते हुए उन पर पुरस्कार की विश्वसनीयता को कम करने का आरोप लगाया।

नोबेल पुरस्कार की साख हमेशा के लिए खत्म हो गई-ट्रंप

ट्रंप ने कहा कि कुछ कट्टरपंथी विचारधारा वाले लोगों ने नोबेल शांति पुरस्कार की साख हमेशा के लिए खत्म कर दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका यह नहीं भूलेगा कि नॉर्वे ने उसे यह पुरस्कार नहीं दिया। ट्रंप ने अपने रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए कहा कि आठ युद्ध सुलझाने के लिए उन्हें आठ नोबेल शांति पुरस्कार मिलने चाहिए थे।

भारत-पाकिस्तान युद्ध रोकने का फिर दावा

ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाया था। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियार रखने वाले दोनों देशों को युद्ध से रोककर उन्होंने 5 करोड़ लोगों की जान बचाई। ट्रंप ने कहा कि वह ईरान और रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक, अमेरिका को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके लिए अमेरिका नॉर्वे को कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका। अगर ऐसा नहीं होता, तो पूरे मिडिल-ईस्ट के साथ यूरोप और अमेरिका तक तबाही फैल सकती थी। उन्होंने कहा, ‘मैंने इतिहास में किसी भी दूसरे व्यक्ति से ज्यादा लोगों की जान बचाई है।’

लगातार नोबेल पीस प्राइज का दावा कर रहे ट्रंप

ट्रंप पहली बार नोबेल प्राइज की मांग नहीं कर रहे हैं। पिछले कुछ सालों में वे लगातार नोबेल पीस प्राइज के लिए दावा कर चुके हैं। सबसे पहले अक्टूबर 2018 में एक कार्यक्रम में ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्हें शायद यह पुरस्कार कभी नहीं मिलेगा, भले ही ने कोरिया और सीरिया में शांति कायम करने की कोशिश कर रहे हों। इसके बाद फरवरी 2019 में उन्होंने खुलकर अपनी दावेदारी रखी। उन्होंने कहा कि जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने उन्हें नोबेल के लिए नामित किया है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इसे कभी नहीं जीत पाऊंगा। 2019 में ही एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल के जवाब में ट्रम्प ने कहा कि उन्हें लगता है कि उन्हें कई चीजों के लिए नोबेल मिलेगा, अगर पुरस्कार निष्पक्ष तरीके से दिया जाए। 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी ट्रंप ने नोबेल का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से अपनी तुलना करते हुए कहा था कि अगर ओबामा को यह पुरस्कार मिल सकता है तो उन्हें भी मिलना चाहिए।

ये सरकार जाएगी, फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत', राहुल गांधी का हमला

#congressmprahulgandhislamscecgyaneshkumarandmodigovt

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देश का सियासी पारा हाई है। विपक्ष लगातार सीईसी पर हमलावर है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच विपक्षी गठबंधन लगातार हमलावर है।इसी बीच लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए एक बार फिर ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉम एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'ज्ञानेश कुमार जाएंगे। यह सरकार जाएगी। फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत।' राहुल गांधी का यह बयान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष के जारी विरोध प्रदर्शन के बीच आया है।

मौजूदा सरकार को हटाना जरूरी-राहुल गांधी

इससे पहले शुक्रवार को राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त कुमार से भी कहीं ज़्यादा गंभीर समस्या है और इसके लिए मौजूदा सरकार को हटाना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर विपक्ष ने पिछले कुछ दिनों की तरह ही दबाव बनाना जारी रखा, तो सरकार गिर जाएगी। गांधी ने संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में इंडिया ब्लॉक के सांसदों से कहा था कि विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों ने इस सरकार की नींव हिला दी है और अब वह डरी हुई है।

राष्ट्रपति से मिला विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल

वहीं, शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका से जुड़ी अपनी चिंताओं को उठाया।

अभिजीत दीपके हिरासत में, रांका और सौरभ भी किए गए डिटेन, प्रोटेस्ट को लेकर दिल्ली पहुंचते ही एक्शन

#abhijitdipkelandedatdelhiairportdetained

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट से पहले ही दिल्ली पुलिस एक्शन मोड में है। फेमस यूट्यूबर ध्रुव राठी सहित अब तक 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा चुका है। अब दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशतोष रांका को हिरासत में ले लिया है। अहम बात यह है कि वे फ्लाइट उतर तक नहीं पाए थे और पुलिस ने डिटेन कर लिया।

एयरपोर्ट पर लैंड करते ही हिरासत में

दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके, सौरव दास और उनके साथियों को हिरासत में लिया। दिल्ली पुलिस के सूत्रों की मानें तो आईजीआई एयरपोर्ट पर अभिजीत दीपके और उनके साथियों को पहले समझाया गया कि वो नई दिल्ली के इलाके में न जाएं। मगर उन्होंने बात नहीं मानी। मजबूरन पुलिस को अभिजीत दीपके और उनके साथियों को हिरासत में लिया गया।

जंतर-मंतर जाने से रोक रही पुलिस

दिल्ली पुलिस इस बात का खासतौर पर ध्यान रख रही है कि किसी भी हालत में प्रदर्शनकारी दिल्ली के जंतर-मंतर तक न पहुंच सकें। दिल्ली से लगने वाली सभी बॉर्डर पर भी भारी तादाद में पुलिसकर्मी तैनात हैं। गाड़ियों की रोक-रोक कर तलाशी ली जा रही है, जो भी वाहनकर्मी संदिग्ध लग रहा है उसे डिटेन किया जा रहा है।

सीएम हेमंत सोरेन ने नेमरा में मां स्व. रूपी सोरेन के श्राद्ध की पारंपरिक रस्म निभाई

*मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने आज सुबह रामगढ़ जिले के नेमरा स्थित अपने पैतृक आवास पर अपनी पुजनीय माता स्व. रूपी सोरेन की स्मृति में उन्हें दातून,

पानी और भोजन परोसने की पारंपरिक संस्कार रस्म निभाई। स्थानीय परंपरा के अनुरूप यह संस्कार रस्म दिवंगत व्यक्ति की याद में सुबह और शाम में किया जाता है।

मुख्यमंत्री ने परिवारजनों के साथ यह पारिवारिक रस्म स्थानीय परंपराओं एवं रीति-रिवाजों के अनुरूप निभाई।

सीजेपी के प्रदर्शन को नहीं मिला सोनम वांगचुक का साथ, बोले-और भी गम हैं जमाने में सियासत के सिवा

#sonamwangchukisskippingcjpdelhiprotest_today

कॉकरोच जनता पार्टी आज दिल्ली की सड़कों पर है। सीजेपी का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन है। ये प्रोटेस्ट चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर है। इधर सोनम वांगचुक ने इस प्रोटेस्ट से खुद को अलग कर लिया है। पिछले सीजेपी प्रोटेस्ट का अहम चेहरा रहे सोनम वांगचुक आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे। वांगुचक ने इसको लेकर पोस्ट शेयर की है और कारण बताया है।

आज के आंदलोन से क्यों नहीं जुड़ेंगे सोनम?

पर्यावरण और एजुकेशन पर काम करने वाले एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा कि वह 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि वह आने वाली सर्दियों की तैयारियों में व्यस्त हैं। सोनम वांगचुक ने एक्स पर लिखा-'मैं दिल्ली में आप सबके साथ क्यों नहीं जुड़ पाऊंगा...! सरकार की तरफ से हमारे काम में रुकावट डालने और उसे नुकसान पहुंचाने की तमाम कोशिशों के बावजूद हम देश की सुरक्षा के लिए काम करते रहेंगे...और आने वाली सर्दियों के लिए तैयारियां कर रहे हैं। इसमें पानी की सुरक्षा के लिए कृत्रिम ग्लेशियर बनाना और GLOF (ग्लेशियर झील में बाढ़) से सुरक्षा के लिए प्रयोग करना शामिल है...ताकि ऊंचे हिमालय में मौजूद 200 से ज्यादा 'टिकिंग वॉटर बॉम्ब' (कभी भी फटने को तैयार पानी के खतरनाक भंडार) के खतरे को कम किया जा सके।'

फैज साहब के लिखे शब्दों का लिया सहारा

वांगचुक ने फैज साहब के लिखे शब्दों के माध्यम से कहा कि 'और भी गम हैं जमाने में सियासत के सिवा, राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा। मैं सभी को अपनी शुभकामनाएं देता हूं और अलग-अलग समूहों के नेताओं से एकजुट रहने और समझदारी दिखाने की अपील करता हूं। मैं GenZ के सभी दोस्तों से आग्रह करता हूं कि वे हर हाल में पूरी तरह शांति बनाए रखें। यह बापू का दिया हुआ तोहफा था, जिसे मैं जून में जंतर-मंतर ले जाने की कोशिश कर रहा था। मुझे उम्मीद है कि हम बापू को निराश नहीं करेंगे।'

नीट पेपर लीक मामले में वांगचुक ने की भी भूख हड़ताल

बता दें कि इससे पहले वांगचुक सीजेपी के जुलाई वाले विरोध प्रदर्शन का मुख्य चेहरा थे। इस आंदोलन में परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी। प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में वे जंतर-मंतर पर 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे रहे। उन्होंने 23 जुलाई को गुरुग्राम के एक अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल खत्म की। उन्होंने कहा कि कई शर्तों पर लंबी बातचीत और देश में संभावित हिंसा को देखते हुए उन्होंने अपना अनशन तोड़ा।

जंतर-मंतर पर सीजेपी का हल्लाबोल, प्रोटेस्ट से पहले ध्रुव राठी हिरासत में, 150 प्रदर्शनकारी डिटेन

#cjpjantarmantar_protest

दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन है। अभिजीत दीपके सहित कई राजनीतिक नेता भी इसमें शामिल हो रहे हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी है। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हो रहे कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। वहीं, प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और मेट्रो स्टेशनों के एंट्री-एग्जिट पर पाबंदियां लगाई गई हैं।

ध्रुव राठी हिरासत में

जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को दिल्ली पुलिस ने गुरुग्राम स्थित उनके घर से हिरासत में लिया है। जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीम सुबह करीब 7:48 बजे सेक्टर-56 स्थित केंद्रीय विहार में उनके आवास पर पहुंची। बताया जा रहा है कि ध्रुव राठी की मां के दरवाजा खोलते ही पुलिसकर्मी घर के अंदर दाखिल हो गए। सूत्रों के अनुसार, पुलिस की करीब 50 सदस्यीय टीम देर रात से ही उनके घर के बाहर मौजूद थी। इसके बाद पुलिस ध्रुव राठी को अपने साथ ले गई। हालांकि, उन्हें किस मामले में हिरासत में लिया गया है, इसकी आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

दिल्ली पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस एक्शन मोड में आ गई है। धरना स्थल की तरफ जा रहे कई प्रदर्शनकारियों को संसद मार्ग इलाके से डिटेन किया गया है। इसके अलावा कनॉट प्लेस से भी कई प्रदर्शनकारी पकड़े गए हैं। इन सबको बसों में बैठाया गया है। इससे पहले कल रात को जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों को भी हिरासत में लिया गया था। सभी को तब से लेकर अब तक जामिया पुलिस स्टेशन में बैठाया गया है।

छावनी में तब्दील दिल्ली और आस-पास के इलाके

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के हजारों जवानों की तैनाती की गई है।

दिल्ली के कुछ इलाकों को छावनी में तब्दील किया गया है। नई दिल्ली में मंडी हाउस से जंतर-मंतर की तरफ जाने वाले रास्ते पर सुरक्षा का तगड़ा पहरा है। दिल्ली पुलिस वाहनों को चेकिंग करने के बाद ही आगे जाने दे रही है। दिल्ली पुलिस ने मंडी हाउस की ओर जाने वाली फिरोज शाह रोड पर भी बैरिकेड्स लगा दिए हैं। वहीं, जनपथ गोल चक्कर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। उधर, दिल्ली पुलिस ने राजधानी से सटे दूसरे राज्यों की सीमाओं पर भी सुरक्षा बढ़ाई है।

द‍िल्‍ली के 57 मेट्रो स्‍टेशन आज रात 9 बजे से रहेंगे बंद, पुलिस के प्रस्ताव को डीएमआरसी की मंजूरी

#57metrostationsofdelhimetrowillremainclosedfrom9october9pmtoday

दिल्ली में 10 अक्तूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन से पहले 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने का फ़ैसला लिया गया है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने शुक्रवार को इस संबंध में जानकारी दी। डीएमआरसी के मुताबिक़, 9 अक्तूबर, 2026 को रात 9 बजे से इन स्टेशनों को बंद कर दिया जाएगा। ये स्टेशन अगले आदेश तक बंद रहेंगे।

सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसला

डीएमआरसी ने एक्स पर लिखा, "सुरक्षा कारणों से, इन मेट्रो स्टेशनों पर 9 अक्तूबर, 2026 को रात 09:00 बजे से एंट्री और एग्ज़िट के रास्ते बंद रहेंगे। यह रोक 10 अक्तूबर, 2026 को भी अगले आदेश तक जारी रहेगी। हालांकि, नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन को छोड़कर, सभी संबंधित मेट्रो स्टेशनों पर मेट्रो बदलने की सुविधा उपलब्ध रहेगी।" इसका मतलब है कि यात्री एक लाइन से दूसरी लाइन में बदल सकेंगे। लेकिन वे स्टेशन से बाहर नहीं निकल पाएंगे। साथ ही, इन स्टेशनों में प्रवेश भी नहीं कर पाएंगे।

10 घंटे तक दिल्ली और निज़ामुद्दीन स्टेशन बंद

इधर, भारतीय रेलवे ने शनिवार, 10 अक्टूबर को नई दिल्ली और हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने और वहाँ से रवाना होने वाली सभी ट्रेनों को 10 घंटे के लिए रद्द कर दिया है। शनिवार सुबह चार बजे से दोपहर दो बजे तक नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन से आने-जाने वाली सभी ट्रेन सेवाएं रद्द रहेंगी। विरोध प्रदर्शन के दौरान यात्रियों को होने वाली असुविधा कम करने के लिए यह फ़ैसला लिया गया है।

सीजेपी को नहीं मिली प्रदर्शन की अनुमति

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली के जंतर मंतर पर 10 अक्तूबर से आंदोलन की घोषणा की है। सीजेपी के इस आंदोलन का विपक्ष समर्थन कर रहा है लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसकी इजाज़त नहीं दी है। शुक्रवार को दिल्ली पुलिस की जॉइंट सीपी नूपुर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा, ''कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास से हमें एक आवेदन मिला है। इस आवेदन पर विचार किया गया, लेकिन पाया गया कि प्रदर्शन की सूचना बहुत कम समय पहले दी गई थी, जबकि निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रस्तावित प्रदर्शन से 10 दिन पहले सूचना देना ज़रूरी है।'' नूपुर प्रसाद ने कहा, ''यह बताना भी ज़रूरी है कि इससे पहले जब सीजेपी को वहाँ विरोध प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, तब पार्टी ने क़ानूनी निर्देशों का पालन नहीं किया था और उस समय दिए गए अपने आश्वासनों का भी उल्लंघन किया था।''

भारतीय मूल की नावी पिल्ले को मिला नोबेल शांति पुरस्कार, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को फिर निराशा लगी हाथ

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मानवाधिकारों की रक्षा और न्याय के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अमिट छाप छोड़ने वाली भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी ज्यूरिस्ट नवेनेथम 'नावी' पिल्ले को प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्ंप का नोबेल वाला सपना एक बार फिर अधूरा रह गया है।

क्यों मिला पुरस्कार?

महात्मा गांधी के नक्शेकदम पर चलने वाली नवनेथेम नावी पिल्लई को शांति का नोबल पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। यह घोषणा नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में की गई। अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति को बढ़ावा देने के उनके असाधारण प्रयासों के लिए उन्हें वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है।

विश्व में शांति के लिए कई अहम काम किए

नोबेल प्राइज़ समिति ने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा कि नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने की कोशिशों के लिए नवनेथम 'नावी' पिल्लई को 2026 का शांति का नोबेल पुरस्कार देने का फ़ैसला किया है। पिल्लई 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में काम किया है और विश्व में शांति के लिए कई अहम काम किए हैं।

कौन हैं नावी पिल्ले?

88 वर्ष की नावी पिल्ले दक्षिण अफ्रीकी नागरिक हैं। उनका परिवार 136 साल पहले तमिलनाडु से दक्षिण अफ्रीका गया था। उनका जन्म भारतीय तमिल मूल के परिवार में 23 सितंबर 1941 दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ। उन्होंने 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार हाई कमिश्नर के रूप में काम किया। उन्होंने नटाल यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर एवं डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के दौर के दौरान राजनीतिक कार्यकर्ताओं, कैदियों और मानवाधिकारों के लिए कई महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाइयां लड़ीं। नवनेथेम नावी पिल्ले दक्षिण अफ्रीका की एक प्रमुख कानूनी एक्सपर्ट और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।

ट्रंप के हाथ फिर से खाली

नोबेल सांति पुरस्कार की घोषणा के साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर निराशा ही हाथ लगी है। ट्रंप लंबे समय से नाबेल का शांति पुरस्कार मांग रहे हैं। ट्रंप ने कई बार दावा किया है कि उन्होंने कई देशों के युद्ध रुकवाए हैं। इसलिए उन्हें शांति का नोबेल मिलना चाहिए।