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ये सरकार जाएगी, फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत', राहुल गांधी का हमला

#congressmprahulgandhislamscecgyaneshkumarandmodigovt

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देश का सियासी पारा हाई है। विपक्ष लगातार सीईसी पर हमलावर है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच विपक्षी गठबंधन लगातार हमलावर है।इसी बीच लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए एक बार फिर ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉम एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'ज्ञानेश कुमार जाएंगे। यह सरकार जाएगी। फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत।' राहुल गांधी का यह बयान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष के जारी विरोध प्रदर्शन के बीच आया है।

मौजूदा सरकार को हटाना जरूरी-राहुल गांधी

इससे पहले शुक्रवार को राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त कुमार से भी कहीं ज़्यादा गंभीर समस्या है और इसके लिए मौजूदा सरकार को हटाना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर विपक्ष ने पिछले कुछ दिनों की तरह ही दबाव बनाना जारी रखा, तो सरकार गिर जाएगी। गांधी ने संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में इंडिया ब्लॉक के सांसदों से कहा था कि विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों ने इस सरकार की नींव हिला दी है और अब वह डरी हुई है।

राष्ट्रपति से मिला विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल

वहीं, शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका से जुड़ी अपनी चिंताओं को उठाया।

अभिजीत दीपके हिरासत में, रांका और सौरभ भी किए गए डिटेन, प्रोटेस्ट को लेकर दिल्ली पहुंचते ही एक्शन

#abhijitdipkelandedatdelhiairportdetained

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट से पहले ही दिल्ली पुलिस एक्शन मोड में है। फेमस यूट्यूबर ध्रुव राठी सहित अब तक 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा चुका है। अब दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशतोष रांका को हिरासत में ले लिया है। अहम बात यह है कि वे फ्लाइट उतर तक नहीं पाए थे और पुलिस ने डिटेन कर लिया।

एयरपोर्ट पर लैंड करते ही हिरासत में

दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके, सौरव दास और उनके साथियों को हिरासत में लिया। दिल्ली पुलिस के सूत्रों की मानें तो आईजीआई एयरपोर्ट पर अभिजीत दीपके और उनके साथियों को पहले समझाया गया कि वो नई दिल्ली के इलाके में न जाएं। मगर उन्होंने बात नहीं मानी। मजबूरन पुलिस को अभिजीत दीपके और उनके साथियों को हिरासत में लिया गया।

जंतर-मंतर जाने से रोक रही पुलिस

दिल्ली पुलिस इस बात का खासतौर पर ध्यान रख रही है कि किसी भी हालत में प्रदर्शनकारी दिल्ली के जंतर-मंतर तक न पहुंच सकें। दिल्ली से लगने वाली सभी बॉर्डर पर भी भारी तादाद में पुलिसकर्मी तैनात हैं। गाड़ियों की रोक-रोक कर तलाशी ली जा रही है, जो भी वाहनकर्मी संदिग्ध लग रहा है उसे डिटेन किया जा रहा है।

सीएम हेमंत सोरेन ने नेमरा में मां स्व. रूपी सोरेन के श्राद्ध की पारंपरिक रस्म निभाई

*मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने आज सुबह रामगढ़ जिले के नेमरा स्थित अपने पैतृक आवास पर अपनी पुजनीय माता स्व. रूपी सोरेन की स्मृति में उन्हें दातून,

पानी और भोजन परोसने की पारंपरिक संस्कार रस्म निभाई। स्थानीय परंपरा के अनुरूप यह संस्कार रस्म दिवंगत व्यक्ति की याद में सुबह और शाम में किया जाता है।

मुख्यमंत्री ने परिवारजनों के साथ यह पारिवारिक रस्म स्थानीय परंपराओं एवं रीति-रिवाजों के अनुरूप निभाई।

सीजेपी के प्रदर्शन को नहीं मिला सोनम वांगचुक का साथ, बोले-और भी गम हैं जमाने में सियासत के सिवा

#sonamwangchukisskippingcjpdelhiprotest_today

कॉकरोच जनता पार्टी आज दिल्ली की सड़कों पर है। सीजेपी का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन है। ये प्रोटेस्ट चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर है। इधर सोनम वांगचुक ने इस प्रोटेस्ट से खुद को अलग कर लिया है। पिछले सीजेपी प्रोटेस्ट का अहम चेहरा रहे सोनम वांगचुक आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे। वांगुचक ने इसको लेकर पोस्ट शेयर की है और कारण बताया है।

आज के आंदलोन से क्यों नहीं जुड़ेंगे सोनम?

पर्यावरण और एजुकेशन पर काम करने वाले एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा कि वह 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि वह आने वाली सर्दियों की तैयारियों में व्यस्त हैं। सोनम वांगचुक ने एक्स पर लिखा-'मैं दिल्ली में आप सबके साथ क्यों नहीं जुड़ पाऊंगा...! सरकार की तरफ से हमारे काम में रुकावट डालने और उसे नुकसान पहुंचाने की तमाम कोशिशों के बावजूद हम देश की सुरक्षा के लिए काम करते रहेंगे...और आने वाली सर्दियों के लिए तैयारियां कर रहे हैं। इसमें पानी की सुरक्षा के लिए कृत्रिम ग्लेशियर बनाना और GLOF (ग्लेशियर झील में बाढ़) से सुरक्षा के लिए प्रयोग करना शामिल है...ताकि ऊंचे हिमालय में मौजूद 200 से ज्यादा 'टिकिंग वॉटर बॉम्ब' (कभी भी फटने को तैयार पानी के खतरनाक भंडार) के खतरे को कम किया जा सके।'

फैज साहब के लिखे शब्दों का लिया सहारा

वांगचुक ने फैज साहब के लिखे शब्दों के माध्यम से कहा कि 'और भी गम हैं जमाने में सियासत के सिवा, राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा। मैं सभी को अपनी शुभकामनाएं देता हूं और अलग-अलग समूहों के नेताओं से एकजुट रहने और समझदारी दिखाने की अपील करता हूं। मैं GenZ के सभी दोस्तों से आग्रह करता हूं कि वे हर हाल में पूरी तरह शांति बनाए रखें। यह बापू का दिया हुआ तोहफा था, जिसे मैं जून में जंतर-मंतर ले जाने की कोशिश कर रहा था। मुझे उम्मीद है कि हम बापू को निराश नहीं करेंगे।'

नीट पेपर लीक मामले में वांगचुक ने की भी भूख हड़ताल

बता दें कि इससे पहले वांगचुक सीजेपी के जुलाई वाले विरोध प्रदर्शन का मुख्य चेहरा थे। इस आंदोलन में परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी। प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में वे जंतर-मंतर पर 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे रहे। उन्होंने 23 जुलाई को गुरुग्राम के एक अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल खत्म की। उन्होंने कहा कि कई शर्तों पर लंबी बातचीत और देश में संभावित हिंसा को देखते हुए उन्होंने अपना अनशन तोड़ा।

जंतर-मंतर पर सीजेपी का हल्लाबोल, प्रोटेस्ट से पहले ध्रुव राठी हिरासत में, 150 प्रदर्शनकारी डिटेन

#cjpjantarmantar_protest

दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन है। अभिजीत दीपके सहित कई राजनीतिक नेता भी इसमें शामिल हो रहे हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी है। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हो रहे कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। वहीं, प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और मेट्रो स्टेशनों के एंट्री-एग्जिट पर पाबंदियां लगाई गई हैं।

ध्रुव राठी हिरासत में

जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को दिल्ली पुलिस ने गुरुग्राम स्थित उनके घर से हिरासत में लिया है। जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीम सुबह करीब 7:48 बजे सेक्टर-56 स्थित केंद्रीय विहार में उनके आवास पर पहुंची। बताया जा रहा है कि ध्रुव राठी की मां के दरवाजा खोलते ही पुलिसकर्मी घर के अंदर दाखिल हो गए। सूत्रों के अनुसार, पुलिस की करीब 50 सदस्यीय टीम देर रात से ही उनके घर के बाहर मौजूद थी। इसके बाद पुलिस ध्रुव राठी को अपने साथ ले गई। हालांकि, उन्हें किस मामले में हिरासत में लिया गया है, इसकी आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

दिल्ली पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस एक्शन मोड में आ गई है। धरना स्थल की तरफ जा रहे कई प्रदर्शनकारियों को संसद मार्ग इलाके से डिटेन किया गया है। इसके अलावा कनॉट प्लेस से भी कई प्रदर्शनकारी पकड़े गए हैं। इन सबको बसों में बैठाया गया है। इससे पहले कल रात को जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों को भी हिरासत में लिया गया था। सभी को तब से लेकर अब तक जामिया पुलिस स्टेशन में बैठाया गया है।

छावनी में तब्दील दिल्ली और आस-पास के इलाके

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के हजारों जवानों की तैनाती की गई है।

दिल्ली के कुछ इलाकों को छावनी में तब्दील किया गया है। नई दिल्ली में मंडी हाउस से जंतर-मंतर की तरफ जाने वाले रास्ते पर सुरक्षा का तगड़ा पहरा है। दिल्ली पुलिस वाहनों को चेकिंग करने के बाद ही आगे जाने दे रही है। दिल्ली पुलिस ने मंडी हाउस की ओर जाने वाली फिरोज शाह रोड पर भी बैरिकेड्स लगा दिए हैं। वहीं, जनपथ गोल चक्कर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। उधर, दिल्ली पुलिस ने राजधानी से सटे दूसरे राज्यों की सीमाओं पर भी सुरक्षा बढ़ाई है।

द‍िल्‍ली के 57 मेट्रो स्‍टेशन आज रात 9 बजे से रहेंगे बंद, पुलिस के प्रस्ताव को डीएमआरसी की मंजूरी

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दिल्ली में 10 अक्तूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन से पहले 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने का फ़ैसला लिया गया है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने शुक्रवार को इस संबंध में जानकारी दी। डीएमआरसी के मुताबिक़, 9 अक्तूबर, 2026 को रात 9 बजे से इन स्टेशनों को बंद कर दिया जाएगा। ये स्टेशन अगले आदेश तक बंद रहेंगे।

सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसला

डीएमआरसी ने एक्स पर लिखा, "सुरक्षा कारणों से, इन मेट्रो स्टेशनों पर 9 अक्तूबर, 2026 को रात 09:00 बजे से एंट्री और एग्ज़िट के रास्ते बंद रहेंगे। यह रोक 10 अक्तूबर, 2026 को भी अगले आदेश तक जारी रहेगी। हालांकि, नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन को छोड़कर, सभी संबंधित मेट्रो स्टेशनों पर मेट्रो बदलने की सुविधा उपलब्ध रहेगी।" इसका मतलब है कि यात्री एक लाइन से दूसरी लाइन में बदल सकेंगे। लेकिन वे स्टेशन से बाहर नहीं निकल पाएंगे। साथ ही, इन स्टेशनों में प्रवेश भी नहीं कर पाएंगे।

10 घंटे तक दिल्ली और निज़ामुद्दीन स्टेशन बंद

इधर, भारतीय रेलवे ने शनिवार, 10 अक्टूबर को नई दिल्ली और हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने और वहाँ से रवाना होने वाली सभी ट्रेनों को 10 घंटे के लिए रद्द कर दिया है। शनिवार सुबह चार बजे से दोपहर दो बजे तक नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन से आने-जाने वाली सभी ट्रेन सेवाएं रद्द रहेंगी। विरोध प्रदर्शन के दौरान यात्रियों को होने वाली असुविधा कम करने के लिए यह फ़ैसला लिया गया है।

सीजेपी को नहीं मिली प्रदर्शन की अनुमति

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली के जंतर मंतर पर 10 अक्तूबर से आंदोलन की घोषणा की है। सीजेपी के इस आंदोलन का विपक्ष समर्थन कर रहा है लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसकी इजाज़त नहीं दी है। शुक्रवार को दिल्ली पुलिस की जॉइंट सीपी नूपुर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा, ''कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास से हमें एक आवेदन मिला है। इस आवेदन पर विचार किया गया, लेकिन पाया गया कि प्रदर्शन की सूचना बहुत कम समय पहले दी गई थी, जबकि निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रस्तावित प्रदर्शन से 10 दिन पहले सूचना देना ज़रूरी है।'' नूपुर प्रसाद ने कहा, ''यह बताना भी ज़रूरी है कि इससे पहले जब सीजेपी को वहाँ विरोध प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, तब पार्टी ने क़ानूनी निर्देशों का पालन नहीं किया था और उस समय दिए गए अपने आश्वासनों का भी उल्लंघन किया था।''

भारतीय मूल की नावी पिल्ले को मिला नोबेल शांति पुरस्कार, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को फिर निराशा लगी हाथ

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मानवाधिकारों की रक्षा और न्याय के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अमिट छाप छोड़ने वाली भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी ज्यूरिस्ट नवेनेथम 'नावी' पिल्ले को प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्ंप का नोबेल वाला सपना एक बार फिर अधूरा रह गया है।

क्यों मिला पुरस्कार?

महात्मा गांधी के नक्शेकदम पर चलने वाली नवनेथेम नावी पिल्लई को शांति का नोबल पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। यह घोषणा नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में की गई। अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति को बढ़ावा देने के उनके असाधारण प्रयासों के लिए उन्हें वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है।

विश्व में शांति के लिए कई अहम काम किए

नोबेल प्राइज़ समिति ने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा कि नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने की कोशिशों के लिए नवनेथम 'नावी' पिल्लई को 2026 का शांति का नोबेल पुरस्कार देने का फ़ैसला किया है। पिल्लई 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में काम किया है और विश्व में शांति के लिए कई अहम काम किए हैं।

कौन हैं नावी पिल्ले?

88 वर्ष की नावी पिल्ले दक्षिण अफ्रीकी नागरिक हैं। उनका परिवार 136 साल पहले तमिलनाडु से दक्षिण अफ्रीका गया था। उनका जन्म भारतीय तमिल मूल के परिवार में 23 सितंबर 1941 दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ। उन्होंने 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार हाई कमिश्नर के रूप में काम किया। उन्होंने नटाल यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर एवं डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के दौर के दौरान राजनीतिक कार्यकर्ताओं, कैदियों और मानवाधिकारों के लिए कई महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाइयां लड़ीं। नवनेथेम नावी पिल्ले दक्षिण अफ्रीका की एक प्रमुख कानूनी एक्सपर्ट और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।

ट्रंप के हाथ फिर से खाली

नोबेल सांति पुरस्कार की घोषणा के साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर निराशा ही हाथ लगी है। ट्रंप लंबे समय से नाबेल का शांति पुरस्कार मांग रहे हैं। ट्रंप ने कई बार दावा किया है कि उन्होंने कई देशों के युद्ध रुकवाए हैं। इसलिए उन्हें शांति का नोबेल मिलना चाहिए।

दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशन कल हो सकते बंद, नई दिल्ली और निजामुद्दीन पहुंचने वाली ट्रेनें भी रहेंगी रद्द

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दिल्ली में 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रदर्शन के आह्वान किया है। इससे पहले दिल्ली पुलिस पूरी तरह अलर्ट है। इस बीच दिल्लीवालों के ल‍िए बड़ी खबर है। आज रात से द‍िल्‍ली मेट्रो के 57 मेट्रो स्टेशन बंद हो सकते हैं। डीएमआरसी मेट्रो स्‍टेशनों को लेकर यह बड़ा फैसला ले सकता है। वहीं, सीजेपी के प्रदर्शन के बीच रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। रेलवे ने ट्रैफिक जाम का हवाला देते हुए 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निज़ामुद्दीन पहुंचने वाली मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने का आदेश दिया है।

डीएमआरसी की ओर से अंतिम पुष्टि का इंतजार

दिल्ली पुलिस ने एहतियात के तौर पर डीएमआरसी को लेटर लिखा है और हालात को काबू में रखने के लिए कई मेट्रो स्टेशन बंद रखने का प्रस्ताव दिया है। आज रात 9 बजे से कल तक मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने का प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) के अधिकारियों को भेजा गया है। डीएमआरसी की ओर से इस पर अंतिम पुष्टि का इंतजार है।

57 मेट्रो स्टेशन हो सकते हैं बंद

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शनों और बेकाबू भीड़ के जमा होने की आशंका को देखते हुए, 9 अक्टूबर को रात 9:00 बजे से लेकर 10 अक्टूबर को हालात सामान्य होने तक दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों के एंट्री/एक्जिट गेट बंद किए जा सकते हैं। दिल्ली मेट्रो पुलिस की ओर से डीएमआरसी को लिखे गए एक पत्र के अनुसार, 10 अक्टूबर को होने वाले प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राजधानी के 57 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एक्जिट गेट बंद करने और इन स्टेशनों पर ट्रेनों की संख्या कम करने का प्रस्ताव दिया है।

रेलवे ने लिया बड़ा फैसला

इस बीच रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। ट्रैफ़िक जाम की वजह से रेलवे ने 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हज़रत निज़ामुद्दीन पहुँचने वाली मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने का आदेश दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक 10 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और हजरत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन के आस-पास के इलाक़े में सड़क पर भारी ट्रैफ़िक जाम की आशंका को देखते हुए यह फ़ैसला लिया गया है।

अमेरिका में भारतीय कंपनियों पर एक्शन, ग्रीन कार्ड प्रोग्राम को लेकर भड़के वेंस, विदेशी कर्मचारी को कहा ‘बंधुआ मजदूर

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अमेरिकी सरकार ने स्किल्ड विदेशी कर्मचारियों को स्थायी निवास हासिल करने की अनुमति देने वाले एक अहम प्रोग्राम से कई बड़ी भारतीय आईटी कंपनियों को निलंबित कर दिया है। अमेरिका ने आज (गुरुवार को) आठ बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को उस प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। ट्रंप प्रशासन ने कथित धोखाधड़ी का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि विदेशी कर्मचारियों को अमेरिकी कर्मचारियों की क़ीमत पर नौकरियां दी गईं।

इन कंपनियों पर कार्रवाई

अमेरिकी प्रशासन ने कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, HCL, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब के खिलाफ कार्रवाई की है। इन कंपनियों का 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम' से सस्पेंड कर दिया है। जिसके जरिए विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में मदद मिलती है। अमेरिकी प्रशासन ने इन कंपनियों पर आरोप लगाया है कि वे अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसरों को नुकसान पहुंचा रही हैं।

भारतीय कंपनियों के ख़िलाफ एक्शन

अमेरिका के श्रम मंत्री कीथ सॉन्डरलिंग ने कहा, "मैं दुनिया की कुछ सबसे बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों- कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी को पर्मानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से निलंबित कर रहा हूँ। ये वे कंपनियां हैं, जिन्होंने दशकों से इस दुरुपयोग को संभव बनाया है। मैं दुनिया की कुछ सबसे बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों- कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी को पर्मानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से सस्पेंड कर रहा हूँ। इसके अलावा, कई सक्रिय फेडरल जांचों के कारण लेबर मंत्रालय माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी को भी इस कार्यक्रम से निलंबित कर रहा है।''

वीजा प्रोग्राम के गलत इस्तेमाल का आरोप

वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इन कंपनियों पर वीजा प्रोग्राम का गलत इस्तेमाल करके अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों को रखने का आरोप लगाया है। उन्होंने आउटसोर्सिंग कंपनियों के जरिए देश में लाए स्किल्ड प्रोफेशनल को बंधुआ मंजदूर कहा। वेंस का यह बयान ट्रंप प्रशासन के माइक्रोसॉफ्ट और दूसरी टेक कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन सर्टिफिकेशन प्रोग्राम सस्पेंड किए जाने के बाद आया है।

विदेशी कर्मचारियों को कहा बंधुआ मजदूर

वेंस आगे कहा, "मुझे यकीन है कि यहां हर कोई उस खेल को समझता है जो खेला जा रहा है। आप देश के बाहर से बंधुआ मजदूरों को लाते हैं और अमेरिकी वर्कर को नौकरी से निकालते हैं।" अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि इन कंपनियों ने अमेरिकी वर्करों की मजदूरी कम करके उनकी जगह ऐसे लोगों को रखा जिन्हें अमेरिका में नहीं होना चाहिए था और इस तरह खूब पैसा कमाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां लेबर कॉस्ट कम करने के लिए इस सिस्टम का इस्तेमाल कर रही थीं।

भारत पर कितना असर?

अमेरिकी प्रशासन की ओर से एच-1बी वीज़ा पर काम करने वाले प्रवासियों के लिए स्थायी निवास हासिल करने की प्रक्रिया रोकने की कोशिश का भारतीय आईटी सेवा कंपनियों पर शायद ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि इस रास्ते से स्थायी निवास हासिल करने की प्रक्रिया पहले ही लगभग ठप हो चुकी थी। पीईआरएम आवेदन दाखिल करते समय नियोक्ता को नौकरी की रिक्ति का विज्ञापन देना होता है, आवेदकों पर विचार करना होता है, यह दस्तावेजी प्रमाण देना होता है कि योग्य अमेरिकी कर्मचारियों का चयन क्यों नहीं किया गया। साथ ही यह साबित करना होता है कि किसी विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन या कामकाजी हालात पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

2024 से 2025 के बीच आवेदनों दो फ़ीसदी से भी कम की कमी

अमेरिकी श्रम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अक्तूबर 2024 से सितंबर 2025 के बीच दाखिल किए गए कुल 1,17,849 पर्मानेंट लेबर सर्टिफिकेशन आवेदनों में भारतीय आईटी कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी 1,400 से कम यानी दो फ़ीसदी से भी कम रही। यह उपलब्ध आंकड़ों की सबसे हालिया अवधि है। भारत की दूसरी सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी इन्फोसिस लिमिटेड के पास 2022 के बाद से कोई पीईआरएम मामला नहीं है। अमेरिकी सरकार के वित्त वर्ष 2025 के पीईआरएम डिस्क्लोजर डेटा के मुताबिक, इस अवधि में विप्रो, टीसीएस और एचसीएलटेक को क्रमशः 523, 513 और 393 स्थायी निवास संबंधी मंज़ूरियां मिलीं। यह संख्या उन मंज़ूरियों का एक छोटा हिस्सा है, जो ग़ैर-आईटी कंपनियों को मिली थीं। वित्त वर्ष 2025 में माइक्रोसॉफ्ट देश में पीईआरएम आवेदन दाखिल करने वाली सबसे बड़ी कंपनी थी। उसके 3,161 मामलों पर फ़ैसला हुआ, जो छह आउटसोर्सिंग कंपनियों के संयुक्त आंकड़े से दोगुने से भी अधिक है।

*सीएम हेमंत सोरेन ने पैतृक गांव नेमरा में दिवंगत मां रूपी सोरेन की आत्मा शांति के लिए निभाई पारंपरिक रस्म

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने आज सुबह रामगढ़ जिले के नेमरा स्थित अपने पैतृक आवास पर परिजनों के साथ स्थानीय परंपराओं एवं रीति-रिवाजों के अनुरूप अपनी पूजनीय दिवंगत माता श्रीमती

Ptsd सोरेन के निमित्त भोजन परोसने की पारंपरिक रस्म निभाई। मौके पर उन्होंने पारिवारिक परंपराओं एवं रीति-रिवाजों का पालन करते हुए अपनी दिवंगत माता की स्मृति से जुड़े पारंपरिक संस्कारों को निभाया।*