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चित्रकूट में मंदाकिनी का जलस्तर घटा, 688 लोगों का रेस्क्यू; राहत-बचाव अभियान जारी

- 36 गांवों में 13,906 प्रभावितों तक पहुंची मदद, 28,803 लंच पैकेट और 2,065 राहत किट बांटी गईं; गाजीपुर में 12 चरवाहों समेत 2 हजार से अधिक भेड़ों को बचाया

लखनऊ। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर अब तेजी से घट रहा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन की निगरानी और राहत-बचाव अभियान जारी है। 29 अगस्त को नदी का जलस्तर 135.20 मीटर के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया था, जो अब घटकर 128 मीटर रह गया है। राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार बाढ़ की स्थिति में अब तक 688 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जिले में बाढ़ से किसी व्यक्ति या पशु की मौत की सूचना नहीं है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय बचाव दलों को तैनात रखा है। एनडीआरएफ के 30 और एसडीआरएफ की दो टीमों के 27 सदस्य राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं।

- 36 गांवों में 13,906 लोग प्रभावित
मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने से कर्वी क्षेत्र के रामघाट समेत 19 गांव, राजापुर के 7 और मानिकपुर के 10 गांव प्रभावित हुए। कुल 36 गांवों में 13,906 लोगों तक राहत पहुंचाई गई है। प्रशासन की ओर से भोजन, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था लगातार की जा रही है।

- करीब 29 हजार लंच पैकेट बांटे
बाढ़ प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए अब तक 28,803 लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। इनमें कर्वी में 24,530, राजापुर में 4,043 और मानिकपुर में 230 पैकेट शामिल हैं।
जरूरी घरेलू सामग्री के लिए 2,065 राहत किट भी बांटी गई हैं। कर्वी में 1,073, राजापुर में 796 और मानिकपुर में 196 राहत किट वितरित की गईं। प्रभावित लोगों के लिए जिले में 18 बाढ़ शरणालय सक्रिय हैं।

- मकान क्षति पर 8.72 लाख की सहायता
बाढ़ के कारण जिले में 653 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें 188 मामलों में प्रभावित परिवारों के खातों में 7.52 लाख रुपये की सहायता भेजी जा चुकी है। पूरी तरह क्षतिग्रस्त एक मकान के लिए 1.20 लाख रुपये की सहायता दी गई है। बाकी मामलों में भी भुगतान की प्रक्रिया चल रही है।

- 28 मेडिकल टीमें तैनात
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बीमारी और संक्रमण की आशंका को देखते हुए 28 मेडिकल टीमें एंबुलेंस और दवाओं के साथ तैनात हैं। टीमें प्रभावित लोगों की स्वास्थ्य जांच और दवा वितरण कर रही हैं। वहीं किसानों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए फसल क्षति का सर्वे भी कराया जा रहा है।

-  गाजीपुर में टला बड़ा हादसा, 12 चरवाहे और 2 हजार से अधिक भेड़ें बचाईं
गाजीपुर में गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद डूहिया सरैया के पास नदी के एक टापू पर फंसे 12 चरवाहों और दो हजार से अधिक भेड़ों को पुलिस-प्रशासन की टीम ने सुरक्षित निकाल लिया। करीब छह घंटे चले रेस्क्यू अभियान में नाइट विजन ड्रोन की मदद से पहले फंसे लोगों और पशुओं की लोकेशन चिन्हित की गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस, प्रशासन, पीएसी की फ्लड कंपनी और स्थानीय नाविकों की संयुक्त टीम ने ददरी घाट से अभियान शुरू किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद सभी चरवाहों और भेड़ों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस अभियान में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।
शिक्षक दिवस पर ‘एक पेड़ गुरु के नाम’, यूपी के सभी वन प्रभागों में होगा पौधरोपण

- गुरुजनों के सम्मान में लगाए जाएंगे पौधे, लखनऊ में चंद्रिका देवी मंदिर के पास होगा विशेष आयोजन; गोरखपुर में सीएम योगी के पौधरोपण की संभावना


लखनऊ। शिक्षक दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के सभी वन प्रभागों में ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण किया जाएगा। पौधरोपण महायज्ञ-2026 के तहत शुरू की गई विशिष्ट वनों की श्रृंखला में इस कार्यक्रम को शामिल किया गया है। वन विभाग ने सभी प्रभागों में आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली हैं।
लखनऊ में ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ कार्यक्रम चंद्रिका देवी मंदिर के आसपास आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों को स्मृति चिह्न के तौर पर पौधे भी दिए जाएंगे। वहीं, गोरखपुर में शिक्षक दिवस के मुख्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पौधरोपण करने की संभावना है।

- महर्षि चरक औषधि वन से शुरू हुई विशिष्ट वनों की पहल
वन विभाग के अनुसार, विशिष्ट वनों की श्रृंखला में महर्षि चरक औषधि वन से शुरुआत हुई थी। इसके बाद अलग-अलग विषयों और उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए अन्य विशिष्ट वन विकसित किए गए। इसी क्रम में अब शिक्षक दिवस पर गुरुजनों के सम्मान में ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
मुख्य वन संरक्षक (प्रचार-प्रसार) अदिति शर्मा के मुताबिक, प्रदेश के सभी वन प्रभागों को शिक्षक दिवस के आयोजन के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्यक्रम के जरिए पौधरोपण के साथ शिक्षकों के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का प्रयास किया जाएगा।
आबकारी राजस्व में यूपी ने बनाया नया रिकॉर्ड, पांच माह में जुटाए 24,795 करोड़

- पिछले साल की तुलना में 11 फीसदी बढ़ी आय, अगस्त में भी 3,933 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती पांच महीनों में राजस्व संग्रह के मामले में नया रिकॉर्ड कायम किया है। अप्रैल से अगस्त तक विभाग ने 24,795.52 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि में मिले 22,337.62 करोड़ रुपये की तुलना में 2,457.90 करोड़ रुपये अधिक, यानी करीब 11 फीसदी की वृद्धि है।
अगस्त में भी आबकारी राजस्व में बढ़ोतरी दर्ज की गई। विभाग के मुताबिक, इस महीने 3,933.10 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 3,754.43 करोड़ रुपये था। इस तरह सालाना आधार पर अगस्त के राजस्व में 4.76 फीसदी की वृद्धि हुई है।

- पिछले वित्तीय वर्ष में भी रहा रिकॉर्ड प्रदर्शन
आबकारी विभाग का राजस्व संग्रह पिछले वित्तीय वर्ष में भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। वर्ष 2025-26 में विभाग ने कुल 57,722.26 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया था। यह वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्राप्त 52,573.07 करोड़ रुपये से 5,149.19 करोड़ रुपये अधिक था। इसमें करीब 9.79 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी। आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विभाग राजस्व संग्रह बढ़ाने के साथ अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चला रहा है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आबकारी विभाग को 71,278 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य दिया है।

- पांच माह में 49,569 मुकदमे, 7,899 गिरफ्तार
अवैध शराब के खिलाफ चलाए गए प्रवर्तन अभियान के दौरान अप्रैल से अगस्त 2026 तक 49,569 अभियोग दर्ज किए गए। कार्रवाई के दौरान 13.83 लाख लीटर अवैध मदिरा और मादक द्रव्य बरामद किया गया। अवैध शराब के कारोबार में शामिल 7,899 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 1,327 लोगों को जेल भेजा गया। तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे 50 वाहनों को भी जब्त किया गया।

- अगस्त में भी चला व्यापक अभियान
अगस्त महीने में अवैध शराब के खिलाफ विभाग की कार्रवाई और तेज रही। इस दौरान 10,479 अभियोग दर्ज किए गए और 2.48 लाख लीटर अवैध मदिरा/मादक द्रव्य बरामद किया गया। कार्रवाई में 1,639 लोगों की गिरफ्तारी हुई, जबकि 228 लोगों को जेल भेजा गया। इसके अलावा अवैध शराब की तस्करी में इस्तेमाल सात वाहन जब्त किए गए।
मंत्री नितिन अग्रवाल के मुताबिक, विभाग का लक्ष्य केवल सरकारी राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि अवैध और जहरीली शराब के निर्माण तथा कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण के जरिए लोगों को इसके दुष्प्रभावों से बचाना भी है। उनका दावा है कि पिछले साढ़े चार वर्षों में अवैध और जहरीली शराब के सेवन से प्रदेश में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है।
जलभराव वाले इलाकों में युद्धस्तर पर हो जल निकासी: ए.के. शर्मा

- आशियाना के नाले का औचक निरीक्षण, नगर विकास मंत्री ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश; लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी

लखनऊ। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने रविवार को आशियाना स्थित नाले का औचक निरीक्षण कर शहर में जल निकासी की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को बारिश के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से जल निकासी सुनिश्चित करने और नालों-नालियों की नियमित सफाई कराने के निर्देश दिए।
मंत्री ने कहा कि बारिश के कारण जलभराव से आमजन को आवागमन और दैनिक कार्यों में किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए नगर निगम और संबंधित विभागों के अधिकारी लगातार क्षेत्र का निरीक्षण करें और जहां भी जल निकासी में बाधा सामने आए, वहां तत्काल कार्रवाई करें।

- लापरवाही पर तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही
ए.के. शर्मा ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि जलभराव की समस्या के समाधान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि वह स्वयं दोबारा इन क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगे। यदि अगले निरीक्षण में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं मिली या लापरवाही सामने आई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाएगी।

-  स्थायी समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश
मंत्री ने वर्षा काल में बार-बार होने वाले जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए आवश्यक कार्यवाही तत्काल शुरू करने को कहा। उन्होंने नालों और नालियों की सफाई के साथ जल निकासी के रास्तों में आने वाली बाधाओं को दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नगरीय क्षेत्रों में नागरिकों को सुचारु और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। जलभराव, गंदगी और जल निकासी जैसी समस्याओं पर अधिकारी लगातार नजर रखें और जरूरत पड़ने पर बिना देरी प्रभावी कार्रवाई करें।
UPTET-2026 परिणाम पर आपत्ति अब सिर्फ ई-मेल से होगी दर्ज

- 10 सितंबर तक भेजना होगा प्रत्यावेदन, आयोग कार्यालय में ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं होंगे

प्रयागराज/लखनऊ। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने UPTET-2026 के घोषित परिणाम को लेकर अभ्यर्थियों के प्रत्यावेदन पर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अब परिणाम से संबंधित अनुतोष या आपत्ति के लिए अभ्यर्थियों को अपना प्रत्यावेदन केवल ई-मेल के माध्यम से भेजना होगा। आयोग कार्यालय में ऑफलाइन प्रत्यावेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि 26 अगस्त को घोषित UPTET-2026 के परिणाम के संबंध में प्रत्यावेदन प्रस्तुत करने के इच्छुक अभ्यर्थी 10 सितंबर 2026 तक अपना आवेदन आयोग के ई-मेल पते पर भेज सकते हैं।
अभ्यर्थियों को अपना प्रत्यावेदन पर निर्धारित समयसीमा के भीतर भेजना होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 3 सितंबर से इस संबंध में कार्यालय में किसी भी प्रकार का ऑफलाइन प्रत्यावेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा का पालन करते हुए अपने प्रत्यावेदन ई-मेल के माध्यम से भेजें, ताकि प्राप्त मामलों पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
मायावती की अध्यक्षता में बसपा की ऑल इंडिया बैठक खत्म, संगठन और बहुजन मिशन पर जोर

- वरिष्ठ नेताओं के साथ पार्टी कार्यों की समीक्षा, पदाधिकारियों को दिए वार्षिक कार्यक्रमों के लिए दिशा-निर्देश

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय स्तर की ऑल इंडिया बैठक बसपा सुप्रीमो मायावती की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा, प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। स्वर्गीय बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के पुत्र प्रिंस युकेश सिंह भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक में मायावती ने पार्टी और बहुजन आंदोलन से जुड़े पिछले कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने संगठन में सामने आई कमियों को दूर करने और आगामी कार्ययोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। पार्टी के छोटे-बड़े सभी पदाधिकारियों को वार्षिक कार्यक्रमों और संगठनात्मक कार्यों के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पूरी गंभीरता और ईमानदारी से पालन करने की हिदायत दी गई।

- बहुजन समाज का हित और अस्मिता सर्वोपरि: मायावती
मायावती ने कहा कि बहुजन समाज का हित, कल्याण और अस्मिता उनके लिए सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि मान्यवर कांशीराम के त्याग, तपस्या और समर्पण से जिस बहुजन मिशन को आगे बढ़ाया गया, उसी भावना के साथ पार्टी को अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना है।उन्होंने कहा कि शोषित और वंचित वर्ग को शासक वर्ग के रूप में स्थापित करना बसपा का मूल मिशन है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सत्ता में भागीदारी को भी उन्होंने जरूरी बताया।

- RSS को लेकर मायावती ने उठाए सवाल
बैठक में मायावती ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए बयानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है और इसी वजह से संगठन की विश्वसनीयता को लेकर लोगों में सवाल बने हुए हैं। मायावती ने कहा कि आरएसएस को बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी और समतामूलक संविधान की भावना के अनुरूप पूरी ईमानदारी से कार्य करना चाहिए।

- देश-दुनिया के मुद्दों पर कार्यकर्ताओं का ध्यान खींचा
बैठक के दौरान मायावती ने देश और दुनिया के मौजूदा ज्वलंत मुद्दों पर भी पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने संगठन को मजबूत करने और बहुजन मिशन को आगे बढ़ाने के लिए कार्यकर्ताओं से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
गांवों में हाईटेक डिजिटल लाइब्रेरी से युवाओं को मिल रही नई उड़ान
-  11,350 ग्राम पंचायतों में आधुनिक अध्ययन केंद्र, 80 हजार से अधिक डिजिटल कंटेंट से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मिलेगी मदद
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण युवाओं और विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षिक संसाधनों से जोड़ने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर हाईटेक डिजिटल लाइब्रेरियां विकसित कर रही है। पंचायती राज विभाग की इस पहल के तहत प्रदेश की 11,350 ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध तरीके से डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं। इसका उद्देश्य गांवों में ही प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास और डिजिटल शिक्षा के लिए बेहतर अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

योजना के प्रथम चरण में 75 जिलों में पुस्तकों और 72 जिलों में फर्नीचर की आपूर्ति पूरी हो चुकी है। अब तक 11,350 ग्राम पंचायतों में पुस्तकों और 11,321 ग्राम पंचायतों में आधुनिक फर्नीचर की व्यवस्था की जा चुकी है। प्रत्येक डिजिटल लाइब्रेरी पर करीब चार लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें पुस्तकें, आईटी उपकरण और आधुनिक फर्नीचर शामिल हैं।

- ई-बुक से वीडियो लेक्चर तक उपलब्ध होंगे संसाधन
डिजिटल लाइब्रेरियों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों और युवाओं के लिए 80 हजार से अधिक डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें ई-बुक्स, वीडियो लेक्चर, ऑडियो कंटेंट, डिजिटल लर्निंग मॉड्यूल और इंटरैक्टिव क्विज जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।

- डिजिटल लाइब्रेरी से निकली सफलता की कहानी
इस पहल के सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे हैं। मथुरा की ग्राम पंचायत अडिंग स्थित डिजिटल लाइब्रेरी ‘ज्ञानम् ज्योतिः’ में अध्ययन करने वाले टिटू शर्मा और मनीष यादव का उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक पद पर चयन हुआ है। दोनों युवाओं को मुख्य विकास अधिकारी ने सम्मानित भी किया। यह सफलता ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर अध्ययन संसाधनों की उपयोगिता को दर्शाती है। सरकार का लक्ष्य है कि संसाधनों की कमी के कारण गांवों की प्रतिभाएं आगे बढ़ने से वंचित न रहें।

- गांव में ही मिलेगा आधुनिक पढ़ाई का माहौल
पंचायती राज विभाग के अनुसार, डिजिटल लाइब्रेरी को केवल पुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय इसे ग्रामीण युवाओं के लिए आधुनिक अध्ययन और डिजिटल शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके जरिए विद्यार्थियों को गांव में ही गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने का प्रयास है। सरकार का मानना है कि आधुनिक शैक्षिक सुविधाओं की पहुंच गांव तक बढ़ने से ग्रामीण युवाओं को शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और वे अधिक आत्मनिर्भर तथा प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना ने पकड़ी रफ्तार, 17,758 जोड़ों का विवाह

- 2026-27 में 72,448 शादियों का लक्ष्य; पीलीभीत 1,271 विवाह के साथ प्रदेश में अव्वल, शाहजहांपुर दूसरे स्थान पर
लखनऊ। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत उत्तर प्रदेश में विवाह कार्यक्रमों की रफ्तार बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 17,758 जोड़ों का विवाह कराया जा चुका है। सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में कुल 72,448 सामूहिक विवाह कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

समाज कल्याण विभाग के अनुसार योजना के लिए अब तक 72,787 आवेदन प्राप्त हुए हैं। जांच के बाद 20,042 आवेदन स्वीकृत किए गए, जबकि 7,245 आवेदन अपात्र पाए गए। विभाग का कहना है कि पात्र लाभार्थियों तक योजना का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया को तकनीक आधारित बनाया जा रहा है।

- पीलीभीत में सबसे ज्यादा विवाह
सामूहिक विवाह कराने के मामले में पीलीभीत प्रदेश में सबसे आगे है। जिले में अब तक 1,271 जोड़ों का विवाह कराया जा चुका है। 1,063 विवाहों के साथ शाहजहांपुर दूसरे स्थान पर है। इसके बाद सुल्तानपुर में 1,040 और रामपुर में 1,031 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया है।

- ई-केवाईसी और डिजिटल सत्यापन से बढ़ेगी पारदर्शिता
समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक कठिनाई किसी बेटी के सम्मानजनक विवाह में बाधा न बने। उन्होंने कहा कि योजना का लाभ वास्तविक और पात्र परिवारों तक पहुंचाने के लिए तकनीक आधारित सत्यापन व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। योजना में आवेदकों के सत्यापन के लिए ई-केवाईसी और आय व जाति प्रमाणपत्रों के लिए ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से डिजिटल सत्यापन की व्यवस्था लागू की गई है। जल्द ही आधार आधारित भुगतान व्यवस्था भी शुरू किए जाने की तैयारी है। इसके बाद अनुदान की राशि पात्र लाभार्थी के आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधे भेजी जा सकेगी।

- हर जोड़े को एक लाख रुपये की सहायता
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रत्येक जोड़े को कुल एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसमें 64 हजार रुपये गृहस्थी बसाने के लिए, 21 हजार रुपये वैवाहिक उपहार सामग्री के लिए और 15 हजार रुपये विवाह समारोह से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए निर्धारित हैं।सरकार के अनुसार, योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बेटियों के विवाह में आर्थिक सहारा देना और उन्हें सम्मानजनक ढंग से विवाह संपन्न कराने में मदद करना है।
एलआईसी बीमा सखी योजना से ग्रामीण महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का नया मंच

- प्रदेश में 1,000 से अधिक स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बनीं बीमा सखी, छह महीने में अर्जित किया ₹2.3 करोड़ से अधिक का कमीशन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एलआईसी बीमा सखी कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में संचालित इस पहल के तहत ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण देकर बीमा सेवाओं से जोड़ा जा रहा है। इससे महिलाओं को अतिरिक्त आय के साथ सम्मानजनक स्वरोजगार का अवसर भी मिल रहा है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अनुसार, कार्यक्रम के लिए अब तक 5,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से 1,000 से अधिक स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सफलतापूर्वक बीमा सखी के रूप में कार्य कर रही हैं। कार्यक्रम में बीसी सखी, बैंक सखी और अन्य सामुदायिक कैडरों से जुड़ी महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है। इन महिलाओं के स्थानीय स्तर पर मजबूत जुड़ाव और लोगों के बीच भरोसे का लाभ गांवों तक बीमा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में मिल रहा है।

- छह महीने में ₹2.3 करोड़ से ज्यादा कमीशन
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के मुताबिक, बीमा सखियों ने अपने कार्य और प्रयासों के दम पर महज छह महीने में ₹2.3 करोड़ से अधिक का सामूहिक कमीशन अर्जित किया है। इसे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक क्षमता और स्वरोजगार के अवसरों का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बीमा सखी कार्यक्रम से महिलाओं को अतिरिक्त आमदनी और सम्मानजनक रोजगार का अवसर मिलने के साथ ग्रामीण परिवारों तक बीमा और वित्तीय सुरक्षा की जानकारी भी पहुंच रही है। बीमा सखियां अपने गांवों में वित्तीय जागरूकता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी भूमिका निभा रही हैं।

- महिलाओं को लाभार्थी नहीं, विकास की भागीदार बनाने पर जोर
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकार का लक्ष्य महिलाओं को केवल सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाला वर्ग बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें आर्थिक विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार और नेतृत्वकर्ता बनाना है। उनके अनुसार, एलआईसी बीमा सखी कार्यक्रम इसी सोच के तहत ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने का माध्यम बन रहा है। सरकार का मानना है कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से न केवल ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि गांवों में वित्तीय जागरूकता और सामाजिक आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।
हेजिंग डोम से,मुशहर से खटवे से अपनी बहन बेटियो की शादी करके दिखाओ दलितो के ठेकेदार जबकि वह  सभी दलित है :सूरज प्रसाद चौबे राष्ट्रीय अध्यक्ष

लखनऊ । प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में वाराणसी में शास्त्रीय घाट पर सवर्ण समाज का यूजीसी रेगुलेशन वापस हो, रिजर्वेशन रिफॉर्म करने एससीएसटी एक्ट का दुरुपयोग बंद करने हेतु धरने का आज छठा दिन है धरने पर आशुतोष उपाध्याय राष्ट्रीय अध्यक्ष आर्दश ब्राह्मण फाउंडेशन ,ब्रजेश मिश्र के साथ सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे धरने पर बैठे धरने पर बैठे लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि दलित के ठीकेदार कहते हैं कि बेटी रोटी का सम्बन्ध कायम करने पर आरक्षण समाप्त होगा चौबे ने कहा कि डोम से मुशहर,से खटवे से अपनी बहन बेटियो की शादी करके दिखाओ दलितो के ठीकेदार जबकि वह सभी  दलित है आगे कहा कि ब्राह्मण पत्नी से शादी करने और 9 बार सासद रहने के बाद भी बेचारे  राम विलास पासवान मरते दम तक दलित ही रहे,ब्राह्मण माता से जन्म लेकर और 3 बार सांसद रहने के बाद भी बेचारे  चिराग़ पासवान 6 कंपनियों के मालिक  दलित ही बने रहेंगे ये दलित के नाम पर धब्बा है कि नहीं सच्चाई यही है कि जाति का ठप्पा नेताओं के लिए चिपका है अब समय आ गया है कि जागो सोचो और अधिकार के लिए संगठित हो  अपना नेता खुद बनाओ अपना हक खुद पाओ वही जबकि सवर्णो का सभी जातियों से खान पान संस्कृत आदि का बहुत गहरा संबंध है,लेकिन केन्द्र एवं राज्य सरकार सवर्ण समाज के अस्तित्व को मिटाने का प्रयास कर रही है खुले मंच से  कह रहे हैं कि सवर्ण समाज देश के आजादी में अपने प्राणों की आहुति दी है आज उन्हीं के वंशज अपने अस्तित्व को लड़ाई लड़ रहा है सवर्ण सरकार बना सकता है तो गिरा भी सकता है सरकार को खुले शब्दों में कहना चाहते हैं कि यूजीसी काला कानून वापस ले रिजर्वेशन रिफॉर्म करे सवर्ण आयोग की स्थापना किया जाय तथा एससीएसटी एक्ट का दुरुपयोग बंद किया जाए।