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केंद्र सरकार ने 23 पाकिस्तानी आतंकियों को घोषित किया आतंकवादी,
-   गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून की सूची में किए शामिल

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए 23 पाकिस्तान आधारित आतंकियों को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत आतंकवादी घोषित किया है। गृह मंत्रालय ने शनिवार को अधिसूचना जारी कर इन सभी के नाम कानून की चौथी अनुसूची में शामिल किए।
गृह मंत्रालय के अनुसार सूची में शामिल सभी आतंकी पाकिस्तान या पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सक्रिय हैं और उनका संबंध जैश-ए-मोहम्मद तथा लश्कर-ए-तैयबा जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से है। इन पर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हमलों और अन्य आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।

सरकार के इस फैसले के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी को इन आतंकियों की वित्तीय गतिविधियों पर रोक लगाने, उनकी संपत्तियां जब्त करने और हथियारों की आपूर्ति तथा अन्य सहयोगी नेटवर्क पर कार्रवाई करने का अधिकार मिलेगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून में संशोधन के बाद केंद्र सरकार को किसी व्यक्ति को भी सीधे आतंकवादी घोषित करने का अधिकार मिला था। इससे पहले केवल संगठनों को ही आतंकवादी संगठन घोषित किया जा सकता था।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी नई सूची के साथ अब इस कानून के तहत घोषित आतंकवादियों की कुल संख्या 80 हो गई है।
नई सूची में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कई प्रमुख आतंकियों के नाम शामिल हैं। इनमें कुछ ऐसे आतंकी भी हैं जिनके संबंध अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों से भी बताए गए हैं। सरकार का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई आगे भी इसी तरह जारी रहेगी।
भारत ने पाकिस्तान में छिपे 23 दुश्मनों को घोषित किया आतंकी, सूची में शामिल हैं ये प्रमुख नाम

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आतंकवाद के खिलाफ भारत सरकार ने एक बड़ा एक्शन लिया है। गृह मंत्रालय ने पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 23 दहशतगर्तों को आतंकवादी घोषित किया है। गृह मंत्रालय ने एक गजट नोटिफिकेशन के जरिए इन 23 नामों की लिस्ट जारी की है।

जैश और लश्कर के 23 दहशतगर्द आतंकवादी घोषित

भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने एक गजट अधिसूचना जारी करते हुए पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े 23 दहशतगर्तों को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (UAPA) के तहत आतंकवादी घोषित किया है। इन सभी 23 नामों को UAPA की चौथी अनुसूची में शामिल किया गया है और वर्तमान में ये सभी पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में रह रहे हैं।

सूची में शामिल हैं ये प्रमुख आतंकी

सूची में मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान और हाफिज अब्दुल शकूर जैसे नाम शामिल हैं, जो 2016 और 2022 में सुरक्षा बलों पर हुए हमले से जुड़े बताए हैं। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े अब्दुल रऊफ और हाफिज खालिद वलीद को हाफिज सईद के करीबी सहयोगी के रूप में बताया गया है। चौंकाने वाला नाम मोहम्मद शहीद फैसल उर्फ उस्ताद उर्फ जाकिर का है। उसका स्थायी पता बेंगलुरु का है, जबकि वह रावलपिंडी में रह रहा है।

भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप

गृह मंत्रालय के अनुसार सूची में शामिल सभी 23 लोग जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, जमात-उद-दावा, द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF), अल-कायदा और ISIS से जुड़े नेटवर्क के जरिए भारत विरोधी गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। इन पर आतंकियों को ट्रेनिंग देने, लॉन्चिंग पैड चलाने, फंडिंग जुटाने, हथियार उपलब्ध कराने, ड्रोन के जरिए हथियार भेजने और जम्मू-कश्मीर सहित भारत के विभिन्न हिस्सों में आतंकी साजिशों को अंजाम देने का आरोप है। सरकार का कहना है कि इन गतिविधियों के पर्याप्त इनपुट और जांच के आधार पर इन्हें UAPA के तहत व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किया गया है।

ई-रिक्शा बैटरी को हैक करने वाले एप पर एक्शन, 'बीएटी बीएमएस' को गूगल प्ले और एप्पल एप से हटाया

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केंद्र सरकार ने ई-रिक्शा चालकों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने ई-रिक्शा की बैटरी को दूर से कंट्रोल करने वाले एप को प्लेस्टोर से हटा दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (आईटी मंत्रालय) ने मोबाइल एप के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। इनका कथित तौर पर दुरुपयोग कर चलते हुए ई-रिक्शा की बैटरी बंद करने में किया जा रहा था।

इन एप्स को हटाया गया

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने ई-रिक्शा और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी को गलत तरीके से बंद करने में इस्तेमाल हो रहे एप्स को हटाने के लिए गूगल एंड्रॉयड और एप्पल आईओएस को नोटिस जारी किया है। इनमें BAT-BMS, SMART BMS और LOSSIGY जैसे एप शामिल हैं।

सरकार ने क्यों लिया एप्स को हटाने का फैसला?

सरकार के अनुसार, ये एप मूल रूप से बैटरी की जांच और सर्विसिंग के लिए बनाए गए थे, लेकिन कुछ लोग इनका दुरुपयोग कर रहे थे। ऐसे मामलों में ई-रिक्शा की बैटरी से बिना अनुमति कनेक्ट होकर वाहन की पावर सप्लाई बंद की जा सकती थी। इसी को देखते हुए केंद्र ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित एप्स को हटाने का फैसला लिया है।

कैसे करता है काम?

ई-रिक्शा में लगी लिथियम-आयन बैटरी की निगरानी और सुरक्षा के लिए बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) लगाया जाता है। यह सिस्टम ब्लूटूथ के माध्यम से मोबाइल फोन से जुड़ जाता है, जिससे चालक बैटरी का चार्ज स्तर, वोल्टेज, तापमान, करंट और अन्य तकनीकी जानकारी देख सकते हैं। हालांकि, कम कीमत वाले अधिकांश ई-रिक्शा में इस्तेमाल होने वाले चीनी बीएमएस में ब्लूटूथ कनेक्शन के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर कुछ लोग अपने मोबाइल में 'बीएटी बीएमएस' ऐप डाउनलोड कर लेते हैं।

इतनी दूरी से भी ई-रिक्शा हो सकता है कंट्रोल

ऐप डाउनलोड करने वाला व्यक्ति किसी ई-रिक्शा के लगभग 10 से 15 मीटर के दायरे में पहुंचता है, तो यह ऐप बिना चालक की अनुमति के बीएमएस से कनेक्ट हो सकता है। इसके बाद ऐप के जरिए बैटरी के डिस्चार्ज स्विच को बंद कर दिया जाता है, जिससे मोटर तक बिजली की आपूर्ति रुक जाती है और ई-रिक्शा चलना बंद हो जाता है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था वीडियो

बता दें कि इन चाइनीज एप के जरिए सड़क पर चलते ई-रिक्शा को अचानक रोकने का मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स पर वायरल वीडियो में देखा गया था कि लोग ब्लूटूथ के जरिए कम्पैटिबल ई-रिक्शा बैटरियों से जुड़कर उन्हें दूर से बंद कर रहे हैं। इन वीडियो के बाद चालकों, डीलरों और ईवी उपयोगकर्ताओं के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। जिसके बाद सरकार ने ये फैसला लिया है।

मानसून की दोहरी तस्वीर: कहीं राहत तो कहीं आफत, पहाड़ों पर बारिश का कहर, कई राज्यों में अलर्ट
-  देश के 95% हिस्से तक पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मानसून, हिमाचल में बादल फटा, मुंबई जलमग्न, दिल्ली-एनसीआर अब भी अच्छी बारिश का इंतजार

नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के लगभग 95 प्रतिशत हिस्से तक पहुंच चुका है, लेकिन इसकी चाल पूरे देश में एक जैसी नहीं है। कहीं मूसलाधार बारिश और बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं, तो कहीं लोग अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा को लेकर अलर्ट जारी किया है।
पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश जनजीवन पर भारी पड़ रही है। हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर बादल फटने की घटना सामने आई, जिसके बाद तेज बहाव के साथ आए मलबे में कई वाहन दब गए। प्रशासन राहत एवं बचाव कार्य में जुटा है। वहीं, आर्थिक राजधानी मुंबई में भी मानसून ने रौद्र रूप दिखाया। महज पांच घंटे में करीब 70 मिमी बारिश दर्ज होने से शहर के कई इलाके जलमग्न हो गए। सड़कों पर जलभराव और यातायात प्रभावित होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पूर्वी भारत के ओडिशा और पश्चिमी भारत के गुजरात में भी भारी बारिश का दौर जारी है, जिससे कई स्थानों पर जनजीवन प्रभावित हुआ है। इसके विपरीत, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही के बावजूद अब तक व्यापक बारिश नहीं हुई है। कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी जरूर हुई, लेकिन उमस से लोगों को राहत नहीं मिल सकी।
मौसम विभाग के अनुसार, आगामी दिनों में देश के कई हिस्सों में मानसून और सक्रिय हो सकता है। विशेष रूप से पहाड़ी और तटीय राज्यों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी सलाह का पालन करने की अपील की गई है।
आसाराम को अंतरिम राहत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, राजस्थान सरकार को जारी किया नोटिस

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धर्मगुरु आसाराम बापू को र नाबालिग दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने मेडिकल आधार पर मांगी गई अंतरिम जमानत देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने आसाराम की विशेष अनुमति याचिका पर नोटिस जारी करते हुए राजस्थान सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट का जमानत देने से इनकार

शीर्ष अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और कहा है कि यदि आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर होती है या जान को खतरा होता है, तभी जमानत पर विचार किया जाएगा। याचिका में उन्होंने 2013 में एक नाबालिग के रेप केस में हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी सजा और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया था।

पहले राज्य सरकार का पक्ष सुना जाएगा

सुप्रीम कोर्ट की पीठ में न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और शील नागू शामिल हैं। इस बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अभी जमानत पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। पीठ ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि पहले राज्य सरकार का पक्ष सुना जाएगा और उसके बाद ही आगे विचार किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि जमानत के मामलों में यह देखा जाता है कि क्या कोई गंभीर आवश्यकता है, जैसे जीवन पर खतरा आदि।

एसआरआई पर विपक्ष एकजुट, 23 पार्टियों ने सीजेआई सूर्यकांत को लिखी चिट्ठी

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चुनाव आयोग की तरफ से कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर विपक्ष एकजुट नजर आ रहै है। इस मामले में 23 राजनीतिक दलों और 1 निर्दलीय सांसद ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है।

सीजेआई को विपक्ष का ज्वाइंट लेटर

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है। कांग्रेस सांसद ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, '8 जून, 2026 को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में 21 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने हिस्सा लिया था। बैठक में मुख्य न्यायाधीश को एक जाइंट लेटर भेजने का फैसला किया गया था। इस लेटर को भेजने का मकसद चुनाव आयोग की 'एसआईआर' प्रक्रिया और चुनाव से जुड़े अन्य मुद्दों की तरफ ध्यान आकर्षित करना था।'

23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय उम्मीदवार के हस्ताक्षर

जयराम रमेश ने आगे लिखा, 'इसी फैसले के तहत, आज (30 जून) को मुख्य न्यायाधीश को एक संयुक्त पत्र भेज दिया गया है, जिस पर अब 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय उम्मीदवार के हस्ताक्षर हैं। विपक्ष के सभी दल एकजुटता, एकता और प्रतिरोध की भावना के साथ मजबूती से एक साथ खड़े हैं।'

इन नेताओं ने किए हस्ताक्षर

जानकारी के अनुसार सीजेआई सूर्यकांत को विपक्षी दलों की ओर से भेजी गई चिट्ठी पर दस्तखत करने वालों में, कांग्रेस से राहुल गांधी, टीएमसी से ममता बनर्जी, आरजेडी से तेजस्वी यादव, शिवसेना (यूबीटी) से संजय राउत के नाम शामिल हैं। हालांकि, विपक्ष की चिट्ठी में क्या बातें लिखी गई हैं, यह बात अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

एसआईआर के मुद्दे पर एकजुट हुआ विपक्ष

सीजेआई को चिट्ठी लिखने के मामले में विपक्ष एक बार फिर साथ आ गए हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस पर आरोप लगाकर 2025 में इंडी गठबंधन से किनारा कर लिया था। वहीं हालिया तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस जिस तरह से पाला बदलकर सीएम सी जोसेफ विजय की टीवीके के साथ जाकर सरकार में शामिल हो गई, उसके बाद डीएमके ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलकर इंडी अलायंस से दूरी बना ली थी।

जनरल धीरज सेठ बने भारत के नए आर्मी चीफ, जनरल उपेंद्र द्विवेदी पद से रिटायर

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जनरल धीरज कुमार सेठ ने मंगलवार से भारत के नए सेना प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली हैं। उन्हें जनरल उपेंद्र द्विवेदी की जगह आर्मी चीफ की जिम्मेदारी दी गई है। जनरल द्विवेदी सेना में चार दशकों से ज्यादा की सेवा देने के बाद रिटायर हुए हैं।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी हुए रिटायर

जनरल धीरज सेठ के सेनाध्यक्ष बनने के साथ ही निवर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पीवीएसएम, एवीएसएम आज ही सेवा से सेवानिवृत्त हो गए हैं। इस अवसर पर मंगलवार को उन्हें नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक लॉन्स में सेना द्वारा औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। इससे पहले सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल पर पुष्पांजलि अर्पित की।

चार दशकों के शानदार सैन्य करियर

जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं। दिसंबर 1986 में उन्होंने भारतीय सेना की बख्तरबंद कोर में कमीशन प्राप्त किया था। अपने चार दशकों के शानदार सैन्य करियर के दौरान, उन्होंने ऑपरेशनल, रणनीतिक, क्षमता विकास और संस्थागत क्षेत्रों में व्यापक अनुभव प्राप्त किया है। उनके इस अनुभव ने भारतीय सेना की युद्ध क्षमता और दीर्घकालिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

कई अहम सैन्य अभियानों की संभाल चुके हैं जिम्मेदारी

जनरल सेठ कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में विभिन्न स्तर पर कमान संभाल चुके हैं। उनके कमांड असाइनमेंट में रेगिस्तानी क्षेत्र में एक बख्तरबंद रेजिमेंट, पश्चिमी मोर्चे पर एक बख्तरबंद ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में एक आतंकवाद-विरोधी बल शामिल हैं।

उत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित

जनरल धीरज सेठ ने जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद-विरोधी बल आर्मर्ड रेजिमेंट 'स्किनर्स हॉर्स' की अगुवाई की। वहीं पश्चिमी मोर्चे पर उन्होंने एक स्ट्राइक कोर (रेगिस्तानी सेक्टर) के अलावा वे साउथ वेस्टर्न कमांड और सदर्न कमांड की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इस तरह से वे भारतीय सेना के ऐसे दुर्लभ अफसर हैं, जिन्होंने इन दोनों ऑपरेशनल कमांड की जिम्मेदारी संभाली है। जनरल सेठ को जब लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर प्रमोशन मिला तो उन्होंने 'सुदर्शन चक्र कोर' की भी जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वे दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) बने, जहां से उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्री मिलिट्री ऑपरेशन की जवाबदेही संभाली। सोमवार (29 जून, 2026) को ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ के तौर पर उन्हें उत्तम युद्ध सेवा मेडल दिया है। उन्होंने सदर्न कमांड के आर्मर्ड कोर से आर्मी चीफ का पद संभाला है।

सेना बैकग्राउंड वाले परिवार से आते हैं सेठ

आर्मी चीफ सेठ सेना के बैकग्राउंड वाले परिवार से आते हैं। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ भारतीय सेना में एडजुटेंट जनरल के पद से 1997 में रिटायर हुए थे। जनरल कृष्ण मोहन सेठ ने सेना की दो बड़ी और अहम टुकड़ियों XXI स्ट्राइक कोर और III कोर की कमान भी संभाली थी।

पीएम मोदी सेशेल्स रवाना, 11 साल में दूसरा दौरा, राष्ट्रीय दिवस समारोह में बतौर चीफ गेस्ट शामिल होंगे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार सुबह सेशेल्स की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर रवाना हो गए। 27 से 29 जून तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान वह सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में ‘गेस्ट ऑफ ऑनर’ के रूप में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री यह यात्रा सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने किया पोस्ट

सेशेल्स रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि सेशेल्स के लिए निकल रहा हूं, जहां मैं उनके नेशनल डे समारोह में हिस्सा लूंगा. इस साल, यह और भी खास है क्योंकि यह गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन है। उन्होंने आगे लिखा कि सेशेल्स एक कीमती समुद्री पड़ोसी है और हमारे विजन महासागर में एक अहम पार्टनर है। इसके साथ ही ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने में भी सहायक है। मैं अपने दोस्त, सेशेल्स रिपब्लिक के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ बातचीत का इंतजार कर रहा हूं। मुझे इस विजिट के दौरान सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने का सम्मान मिला है। मैं वहां भारतीय समुदाय से मिलने को भी उत्सुक हूं।

भारत-सेशेल्स डिप्लोमैटिक रिश्तों के लिए अहम है दौरा*

इस दौरे के दौरान, पीएम मोदी राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ बातचीत करेंगे ताकि द्विपक्षीय सहयोग के पूरे दायरे का रिव्यू किया जा सके और आपसी हितों के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया जा सके। प्रधानमंत्री सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री भी बनेंगे, इसके अलावा वे द्वीपीय देश में भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी बातचीत करेंगे। यह दौरा इसलिए अहम है क्योंकि भारत और सेशेल्स डिप्लोमैटिक रिश्तों की शुरुआत की 50वीं सालगिरह मना रहे हैं, जो आपसी भरोसे, साझा डेमोक्रेटिक मूल्यों, अलग-अलग तरह के लोगों के लिए सम्मान और लोगों के बीच गहरे रिश्तों पर आधारित हैं।

चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा, राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बीच ट्रस्ट छोड़ा

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के तीन दिन बाद ही दो बड़े इस्तीफे हो गए हैं। श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य अनिल मिश्रा ने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया है। बताया जा रहा है कि जांच की निष्पक्षता बनाए रखने और जांच पूरी होने तक यह कदम उठाया गया है।

वीएचपी और आरएसएस के दवाब में इस्तीफा

सूत्रों के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद ने चंपत राय और अनिल मिश्रा को ट्रस्ट से इस्तीफा देने की सलाह दी है। ट्रस्ट की एक बैठक नृत्य गोपालदास के घर पर हुई थी। इस दौरान चंपत राय और अनिल मिश्रा से इस्तीफा मांगा गया। इस पर दोनों ने इस्तीफा दे दिया। माना जा रहा है कि दोनों ने अपना इस्तीफा ट्रस्ट को सौंप दिया है, जिस पर आगे होने वाली ट्रस्ट की बैठक में विचार होगा। राम मंदिर ट्रस्ट ही इस पर फैसला लेगा, क्योंकि ट्रस्ट एक ऑटोनोमस बॉडी है।

चंपत राय को लेकर उठ रहे थे सवाल

बता दें कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के दायरे को विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने बढ़ाए जाने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ भी जांच हों, ये लोग जांच से बाहर नहीं हैं। वहीं विपक्ष भी लगातार सवाल कर रहा था कि आखिर चंपत राय पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। उनसे इस्तीफा क्यों नहीं मांगा जा रहा है। इस बीच, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबर सामने आई है।

एसआईटी ने सरकार को सौंपी शुरुआती रिपोर्ट

इससे पहले राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सोमवार को ही एसआईटी ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इसके बाद गुरुवार को मामले में केस दर्ज किया गया और 8 लोगों को आरोपी बनाया गया। आरोपियों में चंपत राय के करीबी और ड्राइवर टिन्नू यादव का नाम भी शामिल हैं। अन्य आरोपियों के नाम सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडे, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला और रमाशंकर मिश्र हैं।

मोदी कैबिनेट में जल्द हो सकता है बड़ा फेरबदल, TMC-शिवसेना के बागियों को मिलेगा इनाम?

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केंद्र की मोदी सरकार कैबिनेट में जल्द ही फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (28 जून) या सोमवार (29 जून) को अपने मंत्रिपरिषद में बदलाव कर सकते हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

तीसरे कार्यकाल में अब तक कोई फेरबदल नहीं

मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में अभी तक मंत्रिपरिषद में कोई फेरबदल नहीं हुआ है। जबकि तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे हो चुके हैं। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद मंत्रिपरिषद विस्तार की संभावना जताई जा रही है। सबसे बड़ा घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में हुआ, जहां तृणमूल कांग्रेस के 20 लोक सभा सांसद टूट कर अलग हो गए और उन्होंने एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया है। दूसरा बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम महाराष्ट्र में हुआ है, जहां शिवसेना यूबीटी के छह सांसद शिवसेना शिंदे में विलय कर रहे हैं। इससे पहले आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।

टीएमसी और शिवसेना के एक बागियों को मिलेगी जगह

माना जा रहा है शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल में कैबिनेट रैंक के साथ शामिल किया जा सकता है। वहीं पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों में काकोली घोष, सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी राय के नामों पर भी विचार चल रहा है। इनमें से किसी एक को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

नए चेहरों को मिल सकती है जगह

माना जा रहा है कि प्रस्तावित फेरबदल में कुछ नए चेहरों को केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव हो सकता है। भाजपा सरकार में शामिल कुछ वरिष्ठ नेताओं को संगठन में अहम जिम्मेदारी देने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके बदले सरकार में अपेक्षाकृत युवा नेताओं को अवसर देकर नेतृत्व की नई पीढ़ी तैयार करने की कोशिश की जा सकती है। सिर्फ सरकार ही नहीं, बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे में भी व्यापक बदलाव की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर कम से कम दो महिला उपाध्यक्षों की नियुक्ति कर सकती है।