न्यू स्टार्ट के बाद परमाणु हथियारों की नई होड़, दुनिया पर बढ़ता परमाणु खतरा

- अमरेश द्विवेदी

हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने के 81 साल बाद दुनिया एक बार फिर परमाणु खतरे के दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। परमाणु हथियारों पर नियंत्रण के लिए बनाए गए कई महत्वपूर्ण समझौते या तो समाप्त हो चुके हैं या कमजोर पड़ गए हैं। इसी बीच अमेरिका, रूस और चीन समेत प्रमुख परमाणु शक्तियां अपने परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण और विस्तार में जुटी हैं। इससे परमाणु हथियारों की नई होड़ और गलतफहमी के कारण परमाणु संघर्ष का जोखिम बढ़ने की चिंता सामने आ रही है।

जनवरी में ‘बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स’ ने अपनी ‘डूम्सडे क्लॉक’ को आधी रात से 85 सेकंड पहले पर रखा था। यह 1947 में घड़ी बनाए जाने के बाद से मानवता के संभावित विनाश के सबसे करीब का संकेत था। यह घड़ी किसी वास्तविक समय की गणना नहीं बल्कि परमाणु हथियारों, जलवायु परिवर्तन और अन्य वैश्विक जोखिमों के आधार पर वैज्ञानिकों की चेतावनी का प्रतीक है। इसका संदेश साफ था कि दुनिया को परमाणु खतरे को सामान्य मानने से बचना होगा।

इस चिंता को और बढ़ाने वाली सबसे बड़ी घटनाओं में से एक अमेरिका और रूस के बीच ‘न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (न्यू स्टार्ट) 5 फरवरी, 2026 को समाप्त हो गई है। यह अमेरिका और रूस के रणनीतिक परमाणु हथियारों पर सीमा लगाने वाला आखिरी प्रमुख द्विपक्षीय समझौता था। इसके तहत दोनों देशों के लिए तैनात रणनीतिक परमाणु हथियारों और उनके डिलीवरी सिस्टम पर सीमाएं तय थीं। संधि ने दोनों देशों को एक-दूसरे की परमाणु क्षमताओं के बारे में जानकारी हासिल करने और सत्यापन की व्यवस्था भी दी थी।

न्यू स्टार्ट के समाप्त होने से अमेरिका और रूस के पास अपने रणनीतिक परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने की अधिक गुंजाइश बन गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसका सबसे बड़ा खतरा केवल हथियारों की संख्या बढ़ने से नहीं बल्कि पारदर्शिता और भरोसे के कमजोर होने से है। संधि के तहत दोनों देशों के बीच डेटा साझा किया जाता था, निरीक्षण होते थे और परमाणु गतिविधियों पर बातचीत के लिए संस्थागत तंत्र मौजूद था। इन व्यवस्थाओं ने गलत अनुमान और अचानक सैन्य प्रतिक्रिया के जोखिम को कम करने में भूमिका निभाई।

हालांकि, कोविड-19 महामारी के दौरान ऑन-साइट निरीक्षण बाधित हुए और बाद में रूस ने निरीक्षणों को रोक दिया। इसके बावजूद संधि के कई प्रावधान दोनों देशों को एक-दूसरे की रणनीतिक क्षमताओं का अनुमान लगाने में मदद करते रहे। अब इसके समाप्त होने के बाद खुफिया एजेंसियों को परमाणु गतिविधियों की निगरानी में अधिक अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है। यदि किसी शुरुआती चेतावनी प्रणाली में तकनीकी समस्या या संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है तो गलत तरीके से यह माना जा सकता है कि कोई हमला शुरू हो रहा है।

दूसरी ओर, अमेरिका और रूस दोनों अपने परमाणु शस्त्रागार को आधुनिक बनाने की योजनाओं पर आगे बढ़ रहे हैं। अमेरिका अपनी परमाणु त्रयी- पनडुब्बियों, अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों और रणनीतिक बमवर्षक विमानों के आधुनिकीकरण पर भारी निवेश कर रहा है। रूस भी अपने रणनीतिक हथियारों और नई पीढ़ी की डिलीवरी प्रणालियों को विकसित कर रहा है। यदि एक देश अपनी परमाणु क्षमता बढ़ाता है तो दूसरा देश भी जवाब में ऐसा करने की कोशिश कर सकता है। यही कार्रवाई और प्रतिक्रिया का चक्र हथियारों की नई दौड़ को जन्म दे सकता है। इस बदलते परमाणु समीकरण में चीन की भूमिका भी तेजी से महत्वपूर्ण हो रही है। पिछले वर्षों में चीन ने अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार तेज किया है। अमेरिकी आकलनों के अनुसार, चीन के परमाणु हथियारों की संख्या आने वाले वर्षों में काफी बढ़ सकती है। चीन के बढ़ते सैन्य और परमाणु सामर्थ्य ने अमेरिका की रणनीतिक योजना को भी प्रभावित किया है। इससे परमाणु हथियारों की पारंपरिक अमेरिका-रूस प्रतिस्पर्धा अब तीन प्रमुख शक्तियों के बीच जटिल रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में बदल रही है।

यूरोप में भी रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच परमाणु सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हुई है। फ्रांस ने अपने परमाणु प्रतिरोधक ढांचे को यूरोपीय सहयोगियों की सुरक्षा से जोड़ने की संभावना पर जोर दिया है। फिनलैंड ने अपने कानूनों में बदलाव कर विदेशी परमाणु हथियारों की संभावित तैनाती का रास्ता खोला है, जबकि लिथुआनिया में सामूहिक विनाश के हथियारों से जुड़े कानूनी प्रावधानों में बदलाव की पहल हुई है। ये कदम यूरोप में बदलते सुरक्षा माहौल को दर्शाते हैं।

परमाणु अप्रसार की वैश्विक व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना और निरस्त्रीकरण की दिशा में आगे बढ़ना है। लेकिन परमाणु शक्तियों के बीच हथियार नियंत्रण वार्ता में रुकावट और नए हथियारों के आधुनिकीकरण ने इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध की संधि भी अस्तित्व में है, लेकिन परमाणु शक्तियां और उनके अधिकांश प्रमुख सहयोगी इसके पक्षकार नहीं हैं।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद ने भी वैश्विक अप्रसार व्यवस्था को चुनौती दी है। अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई तथा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी तनाव ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है। ऐसे माहौल में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि न्यू स्टार्ट का समाप्त होना हथियार नियंत्रण का अंत नहीं होना चाहिए। इसके बजाय अमेरिका और रूस के बीच नए समझौते की जरूरत है, जिसमें रणनीतिक परमाणु हथियारों के साथ-साथ कम दूरी और कम क्षमता वाले गैर-रणनीतिक परमाणु हथियारों को भी शामिल किया जाए। इसके अलावा डेटा एक्सचेंज, निरीक्षण, मिसाइल परीक्षणों की जानकारी और आपसी संचार के तंत्र को फिर से मजबूत करने की आवश्यकता होगी।

चीन को हथियार नियंत्रण की बातचीत में शामिल करना भी एक बड़ी चुनौती है। अमेरिका चीन की बढ़ती परमाणु क्षमता को देखते हुए भविष्य की बातचीत में उसकी भागीदारी चाहता है लेकिन चीन ने अब तक अमेरिका और रूस जैसी औपचारिक मात्रात्मक सीमाओं में सीमित रुचि दिखाई है। इसलिए भविष्य का हथियार नियंत्रण मॉडल शीत युद्ध के दौर के द्विपक्षीय समझौतों से अलग हो सकता है।

परमाणु हथियारों की प्रतिस्पर्धा महंगी भी है और जोखिमपूर्ण भी। नई मिसाइलें, पनडुब्बियां, बमवर्षक और परमाणु कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम विकसित करने में भारी संसाधन लगते हैं। इससे सैन्य बजट पर दबाव बढ़ता है और ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जिसमें सुरक्षा बढ़ाने के नाम पर उठाया गया कदम दूसरे देश के लिए खतरा बन जाए।

आज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि परमाणु हथियारों से लैस देशों के बीच भरोसा कमजोर हो रहा है और पुराने नियंत्रण तंत्र समाप्त हो रहे हैं। ऐसे समय में संवाद, पारदर्शिता और सत्यापन की व्यवस्था पहले से अधिक जरूरी हो जाती है। न्यू स्टार्ट का अंत अमेरिका और रूस के बीच हथियार नियंत्रण के एक युग का अंत जरूर है लेकिन इसे परमाणु हथियारों पर नियंत्रण की कोशिशों का अंतिम अध्याय नहीं माना जाना चाहिए। आने वाले वर्षों में नई व्यवस्थाएं बनाना इसलिए जरूरी होगा ताकि परमाणु प्रतिस्पर्धा नियंत्रण से बाहर न जाए और परमाणु युद्ध के जोखिम को यथासंभव कम रखा जा सके।

- परमाणु हथियार : एक नजर में किसके पास कितने हथियार

परमाणु हथियारों की शुरुआत 1945 में अमेरिका के पहले परमाणु परीक्षण से हुई। उसी साल हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए गए। इसके बाद सोवियत संघ ने 1949 में पहला परमाणु परीक्षण किया, जबकि ब्रिटेन, फ्रांस और चीन क्रमशः 1952, 1960 और 1964 में परमाणु शक्ति बने। परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए 1968 में परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) और बाद में व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) जैसी व्यवस्थाएं बनाई गईं।

आज दुनिया में नौ देशों के पास परमाणु हथियार होने का अनुमान है। इनमें एनपीटी द्वारा आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त पांच देश- अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन शामिल हैं। इनके अलावा भारत व पाकिस्तान परमाणु संपन्न देश हैं। इजराइल के पास आधिकारिक तौर पर परमाणु हथियार होने की पुष्टि नहीं है लेकिन उसके पास परमाणु हथियार मौजूद हैं। उत्तर कोरिया ने 2003 में एनपीटी से हटने की घोषणा की और इसके बाद कई परमाणु परीक्षण किए। जून, 2026 तक दुनिया में कुल परमाणु वॉरहेड की संख्या करीब 12,200 आंकी गई है।

- रूस और अमेरिका

रूस और अमेरिका के पास दुनिया के सबसे बड़े परमाणु शस्त्रागार हैं। दोनों देशों ने दशकों तक हथियार नियंत्रण समझौतों के जरिए अपने रणनीतिक परमाणु हथियारों की संख्या सीमित की। 2010 की न्यू स्टार्ट संधि के तहत दोनों देशों के लिए 1,550 तैनात रणनीतिक वॉरहेड की सीमा तय थी। हालांकि, यह संधि फरवरी 2026 में समाप्त हो गई। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के अनुमान के अनुसार रूस के सैन्य भंडार में लगभग 4,400 परमाणु वॉरहेड हैं। अमेरिका के सैन्य स्टॉकपाइल में करीब 3,700 वॉरहेड होने का अनुमान है। दोनों देश अपने परमाणु हथियारों और उन्हें पहुंचाने वाली मिसाइलों, पनडुब्बियों और बमवर्षक विमानों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं।

- चीन तेजी से बढ़ा रहा क्षमता

चीन के पास लगभग 600 परमाणु वॉरहेड होने का अनुमान है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, चीन इसी गति से आगे बढ़ता रहा तो 2030 तक उसके पास 1,000 तक परिचालन योग्य वॉरहेड हो सकते हैं। चीन जमीन और समुद्र से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों तथा परमाणु बमवर्षक क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।

- फ्रांस और ब्रिटेन

फ्रांस के पास लगभग 290 ऑपरेशनल परमाणु वॉरहेड का सैन्य भंडार माना जाता है। उसकी परमाणु क्षमता मुख्य रूप से बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों और एयर-लॉन्च्ड क्रूज मिसाइलों पर आधारित है। ब्रिटेन के पास करीब 225 परमाणु वॉरहेड का सैन्य स्टॉकपाइल है। उसका पूरा परमाणु प्रतिरोध समुद्र आधारित है और इसके लिए चार वैंगार्ड-क्लास परमाणु पनडुब्बियां इस्तेमाल की जाती हैं।

- भारत, पाकिस्तान और इजराइल

भारत के पास लगभग 190 परमाणु वॉरहेड होने का अनुमान है। भारत अपनी परमाणु क्षमता को जमीन, समुद्र और हवा से संचालित करने वाली त्रिस्तरीय व्यवस्था की दिशा में विकसित कर रहा है।

पाकिस्तान के पास लगभग 170 परमाणु वॉरहेड होने का अनुमान है। भारत और पाकिस्तान दोनों लगातार नई बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल क्षमताओं पर काम कर रहे हैं। इजराइल सार्वजनिक रूप से अपने परमाणु हथियारों की पुष्टि या खंडन नहीं करता लेकिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का अनुमान है कि उसके पास करीब 90 परमाणु वॉरहेड हैं।

- उत्तर कोरिया और ईरान

उत्तर कोरिया के पास करीब 60 परमाणु वॉरहेड होने का अनुमान है। वह प्लूटोनियम उत्पादन, यूरेनियम संवर्धन और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास जारी रखे हुए है।

ईरान के पास परमाणु हथियार होने का प्रमाण नहीं है, लेकिन उसके परमाणु कार्यक्रम और उच्च स्तर तक यूरेनियम संवर्धन ने उसे अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बनाया है। 2015 के जेसीपीओए समझौते के बाद अमेरिका के 2018 में उससे हटने पर विवाद और बढ़ा। ईरान लगातार परमाणु हथियार बनाने की मंशा से इनकार करता रहा है।

कुछ देशों ने परमाणु हथियार बनाए या ऐसे कार्यक्रम चलाए लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया। सोवियत संघ के विघटन के बाद यूक्रेन, बेलारूस और कजाकिस्तान के पास परमाणु हथियार आए, जिन्हें बाद में रूस को लौटा दिया गया। दक्षिण अफ्रीका ने गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित किए लेकिन 1990 के दशक में अपना कार्यक्रम समाप्त कर दिया। इराक, लीबिया और सीरिया के परमाणु कार्यक्रम भी अंतरराष्ट्रीय जांच और विवाद का विषय रहे हैं। इसके अलावा अर्जेंटीना, ब्राजील, दक्षिण कोरिया, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया और ताइवान ने भी अलग-अलग समय में परमाणु हथियारों से जुड़े कार्यक्रम चलाए थे।

(लेखक, हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)

कभी यूपी में निवेश से कतराते थे उद्योगपति, आज 50 लाख करोड़ के प्रस्ताव : योगी

- जीसीसी इनोवेशन समिट-2026 में मुख्यमंत्री योगी ने याद दिलाया दस साल पुराना दौर, जब लखनऊ आने को तैयार नहीं थे निवेशक

- 2015-16 में यूपी के लिए दिल्ली के फाइव स्टार होटल में करानी पड़ी थी इन्वेस्टर्स समिट

- 15 लाख करोड़ की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग, साढ़े सात लाख करोड़ के प्रस्ताव और तैयार

 - 2031 तक प्रदेश में 500 नए जीसीसी स्थापित करने का लक्ष्य, युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के अवसर

 - समिट में 15 निवेश समझौते और 13 शिक्षण संस्थानों से एमओयू, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स करेगी 634 करोड़ का निवेश

लखनऊ, 26 अक्टूबर। कभी उत्तर प्रदेश का नाम सुनकर उद्योगपति यहां आने से कतराते थे। निवेशकों को लखनऊ बुलाना तक मुश्किल था। हालत यह थी कि वर्ष 2015-16 में उत्तर प्रदेश के लिए आयोजित होने वाली इन्वेस्टर्स समिट दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में करानी पड़ी थी। निवेश यूपी में होना था, लेकिन निवेशकों को बुलाने के लिए दिल्ली का सहारा लेना पड़ा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को राजधानी में आयोजित जीसीसी इनोवेशन समिट-2026 में प्रदेश के उस दौर को याद करते हुए कहा कि आज तस्वीर बदल चुकी है। उत्तर प्रदेश में 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। इनमें 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है, जबकि साढ़े सात लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतरने के लिए तैयार हैं।

 लखनऊ के द सेंट्रम में आयोजित समिट में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि दस साल पहले कोई कहता कि लखनऊ में जीसीसी इनोवेशन समिट होगी तो शायद यहां मौजूद उद्योग जगत के प्रतिनिधियों में से कोई आने को तैयार नहीं होता। उस समय लखनऊ की पहचान निवेश के अनुकूल शहर के रूप में नहीं थी। निवेशकों के मन में यहां की कानून व्यवस्था को लेकर आशंकाएं थीं। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति ही सुरक्षित नहीं होगा तो उसकी पूंजी कैसे सुरक्षित रहेगी। यही वजह थी कि निवेशक उत्तर प्रदेश आने से बचते थे। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उस दौर में उत्तर प्रदेश की पहचान उपद्रव, अराजकता और माफिया प्रवृत्ति के तत्वों के वर्चस्व से होती थी। राज्य पॉलिसी पैरालिसिस का शिकार था। अकर्मण्यता और अव्यवस्था ने देश के सबसे युवा राज्य को बीमारू राज्यों की श्रेणी में पहुंचा दिया था। उत्तर प्रदेश अपनी पहचान खो चुका था। आज प्रदेश निवेश और तकनीक आधारित उद्योगों के लिए नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है।

- दिल्ली में समिट कराने के बाद भी नहीं बदली थी तस्वीर

मुख्यमंत्री योगी ने वर्ष 2015-16 के इन्वेस्टर्स समिट का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय की सरकार ने उद्योग जगत के प्रमुख लोगों को लखनऊ आने का निमंत्रण दिया था, लेकिन उन्होंने आने से मना कर दिया। निवेशकों का कहना था कि लखनऊ के बारे में उन्होंने बहुत खतरनाक शहर के रूप में सुना है। इसके बाद तत्कालीन सरकार को दिल्ली के फाइव स्टार होटल में समिट आयोजित करनी पड़ी।

उन्होंने कहा कि निवेश का स्थान उत्तर प्रदेश था, लेकिन आयोजन दिल्ली में हो रहा था। ऐसे में निवेश के जो परिणाम सामने आए, वे किसी से छिपे नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश के लिए केवल नीतियां घोषित करना पर्याप्त नहीं होता। निवेशकों को अपनी पूंजी और कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ बेहतर कारोबारी माहौल का भरोसा भी चाहिए।

- 50 लाख करोड़ के प्रस्ताव, 15 लाख करोड़ की ग्राउंड ब्रेकिंग

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश में निवेश का माहौल बदलने के लिए कानून व्यवस्था, आधारभूत ढांचे और नीतिगत सुधारों पर एक साथ काम किया गया। इसका परिणाम है कि उत्तर प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है। इसके अतिरिक्त साढ़े सात लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव ग्राउंड ब्रेकिंग के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल निवेश प्रस्ताव प्राप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें उद्योगों की स्थापना और रोजगार के अवसरों में बदलना है। प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए 36 सेक्टोरल नीतियां बनाई गई हैं। निवेशकों को आवश्यक सुविधाएं और सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

- 2031 तक 500 नए जीसीसी स्थापित करने की तैयारी

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में काम हो रहा है। वर्ष 2030-31 तक प्रदेश में 500 नए जीसीसी स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए चार करोड़ वर्ग फीट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस विकसित करने की योजना है।

समिट में प्रदर्शित लघु फिल्म में बताया गया कि प्रदेश में पहले से 200 से अधिक जीसीसी, 400 से ज्यादा एसटीपीआई-पंजीकृत आईटी एवं आईटीईएस इकाइयां और 4.3 करोड़ वर्ग फीट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस उपलब्ध है। नोएडा जीसीसी के स्थापित केंद्र के रूप में उभरा है, जबकि लखनऊ में भी इस क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है। कानपुर समेत अन्य शहरों में भी संभावनाएं विकसित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में हर वर्ष बड़ी संख्या में तकनीकी स्नातक तैयार हो रहे हैं। सरकार का लक्ष्य छह लाख एसटीईएम स्नातकों की प्रतिभा क्षमता तैयार करना है, ताकि वैश्विक कंपनियों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सके।

- पांच कंपनियों को एलओसी, 6,467 रोजगार की संभावना

समिट में मुख्यमंत्री योगी ने पांच प्रमुख जीसीसी परियोजनाओं के लिए कंपनियों के प्रतिनिधियों को लेटर ऑफ कम्फर्ट प्रदान किए। इनमें हैवेल्स, एमरी प्राइस, मेटलाइफ, एलजी और डब्ल्यूएसपी शामिल हैं। इन परियोजनाओं से 6,467 रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। इसके साथ ही जीसीसी निवेशकों के साथ 15 एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। इनमें ईवाईजीडीएस, एएमएल राइटसोर्स, कंप्यूटसेंटर, मेटलाइफ, डीएसवी, स्मार्टवर्क्स, डेमैक, एलट्रूस्ट, पेटीएम, एडब्ल्यूएस, बार्कलेज, नौकरी और आईबीएन समेत अन्य कंपनियां शामिल रहीं। तकनीकी प्रतिभा और उद्योग की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल के लिए 13 विश्वविद्यालयों तथा तकनीकी संस्थानों के साथ भी समझौते किए गए। इनमें आईआईटी कानपुर, आईआईटी बीएचयू, आईआईटी रुड़की, आईआईएम लखनऊ, आईआईआईटी लखनऊ, एकेटीयू, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय और अन्य प्रमुख संस्थान शामिल हैं।

- एलजी करेगी 634 करोड़ का निवेश

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रतिनिधि बृजेश शर्मा ने बताया कि कंपनी उत्तर प्रदेश में 634 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इसमें प्रतिभा विकास और अनुसंधान एवं विकास से जुड़े बुनियादी ढांचे पर खर्च किया जाएगा। परियोजना से 500 से अधिक उच्च-मूल्य वाली नौकरियां सृजित होने की संभावना है।

 स्मार्टवर्क्स के प्रतिनिधि हर्ष बिनानी ने बताया कि कंपनी नोएडा में 20 लाख वर्ग फीट क्षेत्र का प्रबंधन कर रही है, जहां 110 से अधिक कंपनियां मौजूद हैं। लखनऊ के बीबीडी टाइम्स स्क्वायर में भी दो लाख वर्ग फीट क्षेत्र विकसित किया गया है। उन्होंने प्रदेश में निवेश प्रक्रिया और मिले सहयोग का उल्लेख किया।

माइक्रोसॉफ्ट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर के प्रतिनिधि राजीव कुमार ने नोएडा में कंपनी के विस्तार का अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि निवेश के लिए प्रतिभा, सुरक्षा और बुनियादी ढांचा महत्वपूर्ण हैं। नोएडा में माइक्रोसॉफ्ट का केंद्र तीन वर्षों में तीन हजार कर्मचारियों तक पहुंच चुका है। एचसीएल टेक के प्रतिनिधि किरण चेरुकुरी ने बताया कि कंपनी लखनऊ में 12,500 कर्मचारियों के साथ काम कर रही है। उन्होंने एआई आधारित जीसीसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए एडब्ल्यूएस और डीप-टेक नवाचार के लिए आईआईटी कानपुर के साथ सहयोग की जानकारी दी।

- सुरक्षा, प्रतिभा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेशकों का भरोसा

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश में एक्सप्रेसवे, हवाई संपर्क, मेट्रो, औद्योगिक भूमि और तकनीकी शिक्षा के विस्तार ने निवेश की संभावनाएं बढ़ाई हैं। प्रदेश में 75 हजार एकड़ का लैंड बैंक उपलब्ध है। पांच अंतरराष्ट्रीय और 17 घरेलू हवाई अड्डों के नेटवर्क का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप की संख्या 120 से बढ़कर लगभग 25 हजार तक पहुंच चुकी है। हर वर्ष करीब दो लाख एसटीईएम स्नातक तैयार हो रहे हैं। इस प्रतिभा को तकनीक आधारित उद्योगों से जोड़ने पर सरकार का विशेष जोर है।

 कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश जीसीसी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी उद्योगों के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में एक हजार से अधिक व्यवसाय अनुकूल सुधार लागू किए गए हैं।

- कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

समिट में कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल सहित विभिन्न कंपनियों, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में अतिथियों का तुलसी के पौधे भेंट कर स्वागत किया गया।

निर्माणाधीन बाईपास के निरीक्षण के दौरान फिसले सीएम पुष्कर सिंह धामी

हल्द्वानी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हल्द्वानी में निर्माणाधीन बाईपास मार्ग का निरीक्षण करते समय अचानक फिसलकर गिर पड़े। कच्चा रास्ता होने के कारण उनका पैर फिसल गया। हालांकि, गिरने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री उठ खड़े हुए।
हल्द्वानी से कैंची धाम की ओर जाने वाले मार्ग पर यातायात को सुगम बनाने के उद्देश्य से बाईपास का निर्माण कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री इसी निर्माण कार्य का जायजा लेने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान यह घटना हुई।
बड़े मियां और छोटे मियां को घुसपैठियों से प्यार, गरीबों के हक पर डाल रहे डाका: सीएम योगी
-  महर्षि वाल्मीकि जयंती पर बिठूर में आयोजित कार्यक्रम को मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित
-  बिठूर की विरासत को मिलेगी नई पहचान, रामायण सर्किट से धार्मिक पर्यटन को मिलेगी रफ्तार
-  बिल्हौर-बिठूर को 411 करोड़ की सौगात, 48 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास
-  कहा- सपा का मतलब दंगा, भ्रष्टाचार और परिवारवाद, काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती


कानपुर, 26 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश में दो मियां हैं, एक बड़े मियां और दूसरे छोटे मियां। दोनों को बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों से प्यार है, लेकिन दलितों, वंचितों, गरीबों, किसानों और युवाओं के अधिकारों की चिंता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि घुसपैठियों को राशन कार्ड और सरकारी सुविधाएं दिलाकर गरीबों के हक पर डाका डालने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी ने सपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दलों को सबक सिखाने का समय आने वाला है। सपा का मतलब ही दंगा, भ्रष्टाचार और परिवारवाद है। विरासत में सत्ता मिल सकती है, लेकिन जनता का विश्वास विरासत में नहीं मिलता। काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती।
मुख्यमंत्री योगी सोमवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती पर बिठूर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने महर्षि वाल्मीकि आश्रम में पूजा-अर्चना और रामायण पाठ किया। इस अवसर पर बिल्हौर और बिठूर विधानसभा क्षेत्रों की 411 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 48 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें 29 परियोजनाओं का लोकार्पण और 19 का शिलान्यास शामिल है। विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाणपत्र भी वितरित किए।
-  सीएए का विरोध करने पर सपा-कांग्रेस से सवाल
मुख्यमंत्री योगी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष को बताना चाहिए कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रताड़ित होकर आए पात्र हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख समुदायों के लोगों को नागरिकता देने की व्यवस्था का विरोध क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वाले दलों को गरीबों और वंचितों के अधिकारों पर भी अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
अखिलेश यादव की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सत्ता विरासत में मिल सकती है, लेकिन उसे दोबारा हासिल करने के लिए जनता का विश्वास अर्जित करना पड़ता है। केवल पारिवारिक विरासत के भरोसे राजनीति नहीं चल सकती।
-  जवाहर बाग से मुजफ्फरनगर तक की घटनाओं का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री योगी ने सपा की पूर्ववर्ती सरकार पर दंगाइयों और भू-माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कोसी कलां, मुजफ्फरनगर और मथुरा के जवाहर बाग की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में आम लोगों के साथ पुलिसकर्मी भी सुरक्षित नहीं थे। जवाहर बाग में अवैध कब्जा हटाने पहुंचे पुलिस अधिकारी मुकुल द्विवेदी और संतोष यादव की हत्या कर दी गई थी।
मुख्यमंत्री योगी ने कानपुर में वर्ष 1931 के दंगे में पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी की हत्या और बिल्हौर विधायक राहुल बच्चा सोनकर के पिता की हत्या का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश ने दंगों और राजनीतिक हिंसा का दौर देखा है। कानून का शासन और शांतिपूर्ण वातावरण विकास की पहली आवश्यकता है।
-  रामायण और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत समेटे है बिठूर
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बिठूर महर्षि वाल्मीकि की साधना और रामायण की रचना से जुड़ी भूमि है। इसी धरती पर माता सीता को आश्रय मिला और लव-कुश के बाल्यकाल की स्मृतियां जुड़ी हैं। बिठूर नाना साहब पेशवा और तात्या टोपे जैसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की विरासत भी समेटे हुए है।
मुख्यमंत्री योगी ने महर्षि वाल्मीकि आश्रम के साथ महादेव मंदिर में जलाभिषेक और आरती की। बटुकों से मुलाकात की और साधु-संतों को अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया। इसके बाद नाना साहब धुंधूपंत पेशवा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तथा विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने बताया कि महर्षि वाल्मीकि जयंती पर प्रदेश के हजारों मंदिरों में अखंड रामायण पाठ कराया जा रहा है।
-  चार हजार स्थलों पर होंगे संरक्षण और सुंदरीकरण के कार्य
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर, संत रविदास और महर्षि वाल्मीकि से जुड़े करीब चार हजार स्थलों के विकास की योजना है। यहां चहारदीवारी, छत, कैनोपी और सुंदरीकरण के कार्य कराए जाएंगे। उन्होंने अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि मंदिर के विकास और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम उनके नाम पर रखे जाने का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री योगी ने काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या, मां विंध्यवासिनी धाम, मथुरा-वृंदावन, नैमिषारण्य और बिठूर में धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के विकास की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महापुरुषों की स्मृतियों को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
-  वीरांगनाओं के नाम पर महिला पीएसी बटालियन
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि लखनऊ में वीरांगना ऊदा देवी पासी, बदायूं में वीरांगना अवंती बाई लोधी और गोरखपुर में वीरांगना झलकारी बाई कोरी के नाम पर महिला पीएसी बटालियन गठित की गई हैं। लखनऊ में महाराजा बिजली पासी के स्मारक और किले के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि झांसी के किले में लाइट एंड साउंड कार्यक्रम के जरिए रानी लक्ष्मीबाई और प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की गाथा नई पीढ़ी तक पहुंचाई जा रही है।
-  16 करोड़ को मुफ्त राशन, 65 लाख परिवारों को आवास
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक बिना भेदभाव पहुंच रहा है। प्रदेश में करीब 16 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन और 65 लाख गरीब परिवारों को आवास मिला है। उन्होंने 10 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ तथा दो करोड़ लोगों को उज्ज्वला योजना के तहत रसोई गैस कनेक्शन मिलने की जानकारी दी। दीपावली पर पात्र उज्ज्वला लाभार्थियों को मुफ्त गैस सिलेंडर देने की बात भी कही। मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि 67 लाख विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जा रही है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत पांच लाख से अधिक बेटियों की शादी कराई गई है। पात्र लाभार्थियों को विवाह के लिए एक लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
- दस लाभार्थियों को मिले योजनाओं के प्रमाणपत्र
मुख्यमंत्री योगी ने मुख्यमंत्री आवास योजना की रीना और सौरभ यादव, स्वदेशी गोसंवर्धन योजना के आशुतोष पांडेय, लखपति दीदी योजना की सीमा और रुखसार बानो, नंद बाबा दुग्ध मिशन के प्रियांशु, आयुष्मान योजना की सुषमा कुशवाहा तथा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना की डॉ. दीप्ति तिवारी को प्रमाणपत्र दिए। सफाईकर्मी राजपाल वाल्मीकि और शिवम वाल्मीकि को भी प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
-  सड़क, शिक्षा और पर्यटन से जुड़ी 48 परियोजनाओं की सौगात
बिल्हौर और बिठूर में लोकार्पित तथा शिलान्यास की गई परियोजनाओं में सड़क संपर्क, धार्मिक पर्यटन, शिक्षा, औद्योगिक आधारभूत सुविधाओं और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्य शामिल हैं। रामायण सर्किट के अंतर्गत घाटों के विकास, नौका सुविधा और होमस्टे को बढ़ावा देने की योजना है। मंधना-गंगा बैराज-शुक्लागंज-पुरवा-मोहनलालगंज मार्ग के चौड़ीकरण, लखनऊ-मोहान-बांगरमऊ-बिल्हौर मार्ग के सुदृढ़ीकरण और डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के कानपुर नोड में आधारभूत सुविधाओं के विकास से जुड़े कार्य भी शामिल हैं।
बिठूर में बोटैनिकल गार्डन, बिल्हौर के ग्राम बनी, चौबेपुर और बिठूर क्षेत्र में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों, न्यू कानपुर सिटी में 30 मीटर चौड़ी सड़क तथा ग्राम बर्रा खानपुर में ईसन नदी पर पुल के निर्माण से संबंधित परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। मुख्यमंत्री योगी ने कानपुर मेट्रो, एयरपोर्ट, लखनऊ से जुड़ने वाले नए एक्सप्रेसवे और ट्रांस गंगा क्षेत्र में नए पुल की स्वीकृति का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे क्षेत्र में आवागमन और विकास को गति मिलेगी।
-  जनप्रतिनिधियों ने दी क्षेत्र के विकास कार्यों की जानकारी
बिठूर विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने क्षेत्र में सड़क, बिजली और घाटों के विकास का उल्लेख किया। कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन को समता, न्याय और मानवता का संदेश देने वाला बताया। बिल्हौर विधायक राहुल बच्चा सोनकर ने सड़कों के चौड़ीकरण, खेरेश्वर मंदिर में जनसुविधाओं और मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय के निर्माण से जुड़े कार्यों की जानकारी दी।
-  कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राकेश सचान, मंत्री प्रतिभा शुक्ला, सांसद रमेश अवस्थी, महापौर प्रमिला पांडेय, जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण, विधायक अभिजीत सिंह सांगा, राहुल बच्चा सोनकर, नीलिमा कटियार, महेश त्रिवेदी और सरोज कुरील, विधान परिषद सदस्य अरुण पाठक, अविनाश सिंह चौहान और मानवेंद्र सिंह, भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष राम किशोर साहू तथा ग्रामीण जिलाध्यक्ष उपेंद्र पासवान सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
कन्नौज के बाद आजमगढ़ में बजेगा अखिलेश की विदाई का बाजा : ओपी राजभर

- 'PDA के ढकोसले का सत्यानाश देखने को तैयार रहिए', अखिलेश को ओपी राजभर की खुली चुनौती
- 'एक-एक करके ढह रहा सपा का काल्पनिक गढ़, 27 में हो जाएगा सफाया', अखिलेश यादव को राजभर की दो टूक

लखनऊ, 26 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने अखिलेश यादव के PDA पर सीधा हमला बोलते हुए आजमगढ़ में सपा का किला ढहाने की चुनौती दी है। उन्होंने ने कहा कि कन्नौज के बाद अब आजमगढ़ में भी अखिलेश यादव की विदाई का बाजा बजने वाला है।
कैबिनेट मंत्री ने दावा किया कि 29 नवंबर को सुभासपा की सामाजिक समरसता महारैली में राजभर, निषाद, चौहान, प्रजापति, पटेल, पाल समेत गैर-यादव पिछड़ों और बहुजन समाज की ताकत दिखेगी। PDA फार्मूले के नाम पर किए जा रहे ढकोसले का सच सबके सामने आएगा।
- आजमगढ़ में भी विदाई का बाजा बजने वाला है
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए कहा कि आपके 'काल्पनिक गढ़' एक के बाद एक ढह रहे हैं। कन्नौज के बाद अब आजमगढ़ में भी आपकी विदाई का बाजा बजने वाला है या यूं कहें लंका लग गई। उन्होंने दावा किया कि आजमगढ़ में गैर-यादव पिछड़ों और बहुजन समाज की असली ताकत सामने आने के बाद अखिलेश यादव का भ्रम टूट जाएगा।
- PDA के नारे पर राजभर का हमला
राजभर ने अखिलेश यादव के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक की राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि इसके नाम पर फैलाए गए ढकोसले का सच अब सामने आएगा। उन्होंने कहा कि राजभर, निषाद, चौहान, प्रजापति, पटेल, पाल और दूसरे गैर-यादव पिछड़े समाज को केवल चुनाव के समय याद करने का दौर खत्म हो गया है। राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव आजमगढ़ को अपना गढ़ बताते हैं, लेकिन अब इसी क्षेत्र में बहुजन समाज अपनी आवाज बुलंद करेगा।
- 29 नवंबर की महारैली को लेकर किया बड़ा दावा
सुभासपा प्रमुख ने बताया कि 29 नवंबर को आजमगढ़ के आईटीआई मैदान में पार्टी की विशाल सामाजिक समरसता महारैली आयोजित की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि इस रैली में पूर्वांचल के दलित, पिछड़े और खासकर गैर-यादव पिछड़े समाज की एकजुटता दिखाई देगी। राजभर ने अखिलेश यादव को रैली की वीडियो रिकॉर्डिंग देखकर अपनी राजनीतिक ताकत का आकलन करने की चुनौती भी दी।
शरद पूर्णिमा पर लखनऊ विश्वविद्यालय में सजा खगोलीय ज्ञान का मंच, दूरबीनों से दिखे चंद्रमा और शनि

- पारंपरिक भारतीय वेधयंत्रों के साथ आधुनिक दूरबीनों से सूर्य का अवलोकन, विद्यार्थियों ने जाना खगोल विज्ञान का रहस्य

लखनऊ। शरद पूर्णिमा के अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिर्विज्ञान विभाग स्थित पंडित कल्याण दत्त शर्मा वेधशाला में भारतीय खगोलीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक प्रेक्षण तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिला। उत्तर प्रदेश अमेचर एस्ट्रोनॉमर्स क्लब (यूपीएएसी) और इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला, लखनऊ के सहयोग से आयोजित विशेष खगोलीय कार्यक्रम में विद्यार्थियों को पारंपरिक भारतीय वेधयंत्रों की कार्यप्रणाली समझने के साथ आधुनिक दूरबीनों से सूर्य, चंद्रमा और शनि ग्रह के प्रत्यक्ष अवलोकन का अवसर मिला।

कार्यक्रम में इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला की ओर से विशेष सौर दूरबीनों के माध्यम से सूर्य की विभिन्न विशेषताओं का अवलोकन कराया गया। प्रतिभागियों ने सौर कलंक (सनस्पॉट्स), सौर प्रोमिनेंस, सौर कणिकाओं और फिलामेंट्स जैसी संरचनाओं को समझा। वहीं, रात्रिकालीन आकाश दर्शन के दौरान बड़ी दूरबीनों की सहायता से शरद पूर्णिमा के चंद्रमा और शनि ग्रह को देखने का अवसर मिला। इस गतिविधि ने विद्यार्थियों की खगोलीय जिज्ञासा को नया आयाम दिया।

- प्राचीन वेधयंत्रों की कार्यप्रणाली से हुए परिचित

लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिर्विज्ञान विभाग के डॉ. बिपिन शास्त्री ने प्रतिभागियों को सम्राट-पलभा यंत्र, याम्योत्तर तुरिय, भित्तीय यंत्र और शंकु यंत्र सहित विभिन्न पारंपरिक भारतीय वेधयंत्रों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन यंत्रों के माध्यम से प्राचीन काल में समय निर्धारण, छाया के अध्ययन, दिशाओं की पहचान और खगोलीय कोणों की गणना जैसे कार्य किए जाते थे। इन उपकरणों के जरिए प्रतिभागियों को भारतीय गणितीय परंपरा और प्रेक्षण आधारित खगोल विज्ञान की समृद्ध विरासत को समझने का अवसर मिला।

कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला की ओर से दो आठ इंच के डॉबसोनियन टेलीस्कोप, दो आठ इंच के स्काई-वॉचर टेलीस्कोप और दो विशेष सौर दूरबीनों की व्यवस्था की गई थी। पारंपरिक वेधयंत्रों और आधुनिक उपकरणों के एक साथ प्रदर्शन ने विद्यार्थियों को प्राचीन वैज्ञानिक विधियों तथा आधुनिक खगोलीय तकनीक के बीच समानताओं और अंतर को समझने का अवसर दिया।

- व्याख्यान और क्विज ने बढ़ाई वैज्ञानिक जिज्ञासा

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण संकल्प मोहन का व्याख्यान रहा। उन्होंने खगोल विज्ञान के रोचक विषयों और निहारिकाओं की खोज से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। इसके साथ ही आयोजित खगोलीय क्विज में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस गतिविधि के माध्यम से उनके खगोलीय ज्ञान को परखने और विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने का प्रयास किया गया।

कार्यक्रम में ज्योतिर्विज्ञान विभाग के संयोजक डॉ. श्यामलेश कुमार तिवारी सहित विभाग के शिक्षक डॉ. अनिल कुमार पोरवाल, डॉ. बिपिन कुमार पाण्डेय, डॉ. विष्णुकान्त शुक्ल, डॉ. प्रवीण कुमार बाजपेयी, डॉ. अनुज कुमार शुक्ल, डॉ. कोमल सिंह और डॉ. प्रत्यूष चन्द्र सिंह उपस्थित रहे।

इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला की टीम में डॉ. राजेश कुमार गंगवार, डॉ. सुमित कुमार श्रीवास्तव, अनुराग अवस्थी, दीपशिखा, संकल्प मोहन, स्वप्निल रस्तोगी, मोहम्मद अनस और राघवी गुप्ता शामिल रहे। टीम ने दूरबीनों की स्थापना और संचालन के साथ सूर्य, चंद्रमा तथा अन्य खगोलीय पिंडों के अवलोकन में तकनीकी सहयोग प्रदान किया। विश्वविद्यालय के स्नातक और परास्नातक विद्यार्थियों ने सूर्य दर्शन, चंद्र दर्शन और रात्रिकालीन आकाश दर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

- भारतीय खगोलीय विरासत और आधुनिक विज्ञान का संगम

शरद पूर्णिमा की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में आयोजित इस कार्यक्रम ने भारतीय खगोलीय विरासत और आधुनिक विज्ञान के बीच सार्थक संवाद स्थापित किया। पारंपरिक वेधयंत्रों ने जहां प्राचीन भारत की गणितीय दक्षता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की झलक प्रस्तुत की, वहीं आधुनिक दूरबीनों ने खगोलीय पिंडों की विशेषताओं को करीब से समझने का अवसर उपलब्ध कराया।

इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में खगोल विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करना, वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करना और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ना रहा। प्रत्यक्ष प्रेक्षण, विशेषज्ञों के व्याख्यान और ज्ञानवर्धक गतिविधियों के माध्यम से कार्यक्रम ने विद्यार्थियों के लिए खगोल विज्ञान को कक्षा की पढ़ाई से आगे बढ़कर अनुभव आधारित सीखने का माध्यम बनाया।

‘महादेव’ कॉल साइन और ‘विश्वनाथ’ फॉर्मेशन के साथ काशी के आसमान में गरजे भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान

  • नीलकंठ’ से ‘पशुपति’ तक, काशी की पहचान से जुड़े फॉर्मेशन में दिखी वायुसेना की हवाई शक्ति
  • चिनूक हेलीकॉप्टर ने आसमान में बनाया 94 का अंक, हेलीकॉप्टरों ने गंगा पर की पुष्पवर्षा

राफेल, सुखोई और स्वदेशी तेजस के हवाई करतबों से गूंजा काशी का आसमान, सूर्यकिरण टीम ने बिखेरे तिरंगे के रंग

  • भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ पर नमो घाट में भव्य एयर शो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हुए शामिल

वाराणसी, 25 अक्टूबर। भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर वाराणसी के नमो घाट पर आयोजित भव्य एयर शो ‘विंग्स ओवर गंगा’ में काशी के आसमान में वायुसेना की हवाई शक्ति, तकनीकी क्षमता, सटीकता और पेशेवर दक्षता का प्रदर्शन किया गया। राफेल के ‘नीलकंठ’, सुखोई-30 एमकेआई के ‘विश्वनाथ’ और मिराज-2000 के ‘महादेव’ जैसे कॉल साइन और फॉर्मेशन ने एयर शो को काशी की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान से जोड़ा। लड़ाकू विमानों की गर्जना, हेलीकॉप्टरों की समन्वित उड़ान और आसमान में तिरंगे के रंगों ने उपस्थित जनसमुदाय को रोमांचित किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में हुए इस एयर शो में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सहित वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य शामिल हुए। भारतीय वायुसेना प्रत्येक वर्ष 8 अक्टूबर को अपना स्थापना दिवस मनाती है। इस वर्ष भी 8 अक्टूबर को 94वां स्थापना दिवस मनाया गया। वाराणसी में आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ इसी वर्षगांठ से जुड़े आयोजनों का हिस्सा रहा।

  • ‘महादेव’, ‘विश्वनाथ’ और ‘नीलकंठ’ फॉर्मेशन ने दिखाई हवाई ताकत

एयर शो में काशी और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े नामों वाले कई विशेष फॉर्मेशन प्रस्तुत किए गए। तीन सुखोई-30 एमकेआई विमानों ने ‘विश्वनाथ’ फॉर्मेशन बनाया, जबकि तीन राफेल विमानों ने ‘नीलकंठ’ फॉर्मेशन के साथ उड़ान भरी। मिराज-2000 ने ‘महादेव’ कॉल साइन के साथ हवाई प्रदर्शन किया। चार जगुआर विमानों ने ‘पशुपति’ फॉर्मेशन बनाया, जिसका नेतृत्व ग्रुप कैप्टन मयंक ने किया। सुखोई-30 एमकेआई ने ‘विश्वनाथ’ कॉल साइन के साथ एरियल स्प्लिट का प्रदर्शन किया, जबकि तीन राफेल विमानों ने ‘नीलकंठ’ कॉल साइन के साथ एरियल स्प्लिट प्रस्तुत किया। जगुआर और सुखोई-30 एमकेआई विमानों ने क्रमशः ‘पशुपति’ और ‘विश्वनाथ’ कॉल साइन के साथ काल्पनिक हवाई युद्ध का प्रदर्शन किया। इन करतबों के माध्यम से लड़ाकू विमानों की गति, नियंत्रण, फुर्ती और समन्वित संचालन की क्षमता दिखाई गई।

  • ‘कैलाश’, ‘त्रिलोचन’ और ‘दशाश्वमेध’ फॉर्मेशन भी बने आकर्षण

सी-295 और डीओ-228 विमानों ने विंग कमांडर अनिमेष लांबा के नेतृत्व में ‘भैरव’ फॉर्मेशन बनाया। सी-130 और एएन-32 विमानों ने विंग कमांडर रजनीश चंद्र उनियाल और विंग कमांडर विनय नायर के नेतृत्व में ‘कैलाश’ फॉर्मेशन प्रस्तुत किया। एईडब्ल्यूएंडसी और मिग-29 विमानों ने ‘त्रिलोचन’ फॉर्मेशन बनाया, जबकि पी-8आई और मिराज-2000 विमानों ने ‘नटराज’ फॉर्मेशन का प्रदर्शन किया। आईएल-78 और मिराज-2000 विमानों ने ‘महादेव’ फॉर्मेशन बनाया। इसका नेतृत्व ग्रुप कैप्टन गौरव शुक्ला और विंग कमांडर राहुल बसोया ने किया। ‘दशाश्वमेध’ फॉर्मेशन के तहत सी-17 और हॉक एमके-132 विमानों ने आसमान में करतब दिखाए। इसके अलावा ‘प्रचंड’ फॉर्मेशन में तेजस, सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, जगुआर, मिग-29 और मिराज-2000 जैसे विमानों की भागीदारी रही।

  • तेजस के ‘अस्सी’ कॉल साइन ने दिखाई स्वदेशी क्षमता

स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस एमकेआई ने ‘अस्सी’ कॉल साइन के साथ हवाई करतब दिखाए। इसे ग्रुप कैप्टन रूप ने उड़ाया। विमान ने तेज मोड़ों और नियंत्रित उड़ान के जरिए अपनी फुर्ती का प्रदर्शन किया। एयर शो में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, मिग-29 और जगुआर जैसे विमानों ने भी अपनी हवाई क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इन विमानों के अलग-अलग फॉर्मेशन ने भारतीय वायुसेना के पायलटों के प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता और आपसी तालमेल को प्रदर्शित किया। गंगा नदी और नमो घाट के ऊपर से गुजरते विमानों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

  • हेलीकॉप्टरों ने बनाए ‘ओंकार’, ‘गंगा’ और ‘भागीरथी’ फॉर्मेशन

तीन एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों ने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज और वायुसेना के ध्वज के साथ ‘ओंकार’ फॉर्मेशन बनाया। इसका नेतृत्व ग्रुप कैप्टन अनुज गुप्ता ने किया। तीन चेतक हेलीकॉप्टरों ने ग्रुप कैप्टन दीपांकर दास के नेतृत्व में ‘गंगा’ फॉर्मेशन प्रस्तुत किया। इस दौरान हेलीकॉप्टरों से मां गंगा के ऊपर पुष्पवर्षा की गई। एलसीएच और अपाचे हेलीकॉप्टरों ने ‘भागीरथी’ फॉर्मेशन बनाया। इसका नेतृत्व ग्रुप कैप्टन अनुभव महेंद्र और विंग कमांडर अतुल मिश्रा ने किया। एएलएच एमके-IV और चिनूक हेलीकॉप्टरों ने ग्रुप कैप्टन हर्ष पांडे के नेतृत्व में ‘अलकनंदा’ फॉर्मेशन प्रस्तुत किया। भारतीय नौसेना के कैप्टन द्विवेंदू शर्मा के नेतृत्व में ‘त्रिदेव’ फॉर्मेशन भी प्रदर्शित किया गया। चिनूक हेलीकॉप्टर ने अपनी उड़ान के दौरान रैंप से 94 का अंक प्रदर्शित किया। यह प्रस्तुति भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के विशेष संदर्भ में आयोजित की गई। विभिन्न हेलीकॉप्टरों के प्रदर्शन में उनकी उड़ान क्षमता, भार वहन करने की दक्षता और समन्वित संचालन को दर्शाया गया।

  • सूर्यकिरण टीम ने आसमान में बिखेरे तिरंगे के रंग

भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एयरोबैटिक टीम ने हॉक जेट विमानों के साथ सटीक फॉर्मेशन, लूप, बैरल रोल और अन्य हवाई कलाबाजियों का प्रदर्शन किया। टीम के विमानों ने आसमान में केसरिया, सफेद और हरे रंग का धुआं छोड़कर तिरंगे की छटा बिखेरी। सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम ने भी समन्वित उड़ान और आकर्षक हवाई करतबों से दर्शकों का ध्यान खींचा।

  • सुखोई और राफेल के करतब देख हैरान हुए काशीवासी

एयर शो में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, तेजस, चिनूक, एमआई-17, प्रचंड और अपाचे सहित विभिन्न विमानों एवं हेलीकॉप्टरों ने भाग लिया। सी-295, एएन-32, आईएल-76 और आईएल-78 जैसे विमानों ने भी अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनों ने भारतीय वायुसेना की तकनीकी दक्षता, प्रशिक्षण और समन्वित हवाई संचालन को सामने रखा।

  • प्रधानमंत्री ने देखा एयर शो, वायुसेना प्रमुख ने भेंट किया स्मृति चिह्न

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नमो घाट पहुंचने पर मार्ग में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। ढोल-नगाड़ों और नारों के बीच प्रधानमंत्री ने हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। इसके बाद उन्होंने एयर शो देखा। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने प्रधानमंत्री को स्मृति चिह्न भेंट किया।

  • कार्यक्रम में रहे उपस्थित

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, केंद्रीय राज्यमंत्री पंकज चौधरी और संजय सेठ, एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह, वाइस चीफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित और एयर मार्शल तरुण चौधरी सहित वायुसेना और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यूपी में ऑनलाइन फूड स्टोर्स पर यूपीएफएसडीए की बड़ी कार्रवाई, 4 के लाइसेंस निलंबित और कारोबार बंद


- ‘शुद्ध ही शुभ है’ अभियान के तहत ब्लिंकिट, जेप्टो, अमेजन, रिलायंस समेत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के वेयरहाउस और डार्क स्टोर्स की गहन जांच
- प्रदेशभर में किए गए अब तक 149 निरीक्षण, 79 मामलों में सुधार नोटिस जारी करने की संस्तुति
- 21 खाद्य नमूने जांच के लिए लिए भेजे गए, निरीक्षण अभियान जारी

लखनऊ, 24 अक्टूबर। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने प्रदेशव्यापी विशेष निरीक्षण अभियान चलाया। ‘शुद्ध ही शुभ है’ अभियान के तहत ब्लिंकिट, जेप्टो, अमेजन, रिलायंस, मेट्रो समेत विभिन्न ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े वेयरहाउस, डार्क स्टोर्स और खाद्य आपूर्ति केंद्रों की जांच की जा रही है। अभियान के दौरान अब तक चार स्टोर्स के लाइसेंस निलंबित कर खाद्य कारोबार का संचालन बंद कराया गया है। वहीं, कुल 149 निरीक्षण किए गए हैं और 21 खाद्य नमूने जांच के लिए संग्रहित किए गए हैं। निरीक्षण में खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण, परिसर की स्वच्छता, तापमान नियंत्रण, वैधता अवधि और लाइसेंस की शर्तों के अनुपालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
-  चार स्टोर्स के लाइसेंस निलंबित, खाद्य कारोबार बंद
अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन में कमियां मिलने पर चार स्टोर्स के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं और खाद्य कारोबार का संचालन बंद कराया गया है। इसके अलावा, 79 मामलों में सुधार सूचना (इंप्रूवमेंट नोटिस) जारी करने की संस्तुति की गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें विभिन्न जिलों में निरीक्षण कर रही हैं। जांच के दौरान सामने आने वाली अनियमितताओं के आधार पर संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। विभाग का जोर खाद्य कारोबारियों को निर्धारित मानकों का पालन कराने और उपभोक्ताओं तक सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचाना सुनिश्चित करने पर है।
- गाजियाबाद के जेप्टो वेयरहाउस में गंदगी और कॉकरोच मिले
गाजियाबाद में आरडीएल के निकट स्थित जेप्टो वेयरहाउस स्टोर के निरीक्षण के दौरान परिसर में अत्यधिक गंदगी, दीवारों पर जाले, क्षतिग्रस्त फर्श और खाद्य परिसर में कॉकरोच पाए गए। खाद्य परिसर में स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी गंभीर कमियों को देखते हुए प्रतिष्ठान के खाद्य लाइसेंस के निलंबन की कार्रवाई की जा रही है। वेयरहाउस और डार्क स्टोर्स में स्वच्छता की स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहीं खाद्य पदार्थों का भंडारण और ऑर्डर के अनुसार उनकी आपूर्ति की तैयारी होती है। ऐसे में गंदगी और कीटों की मौजूदगी खाद्य पदार्थों की सुरक्षित हैंडलिंग को प्रभावित कर सकती है।
- कानपुर में भंडारण व्यवस्था और लाइसेंस संबंधी खामियां
कानपुर नगर में रिलायंस मार्ट, मेट्रो और जेप्टो स्टोर्स के निरीक्षण के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि संबंधित प्रतिष्ठानों के लाइसेंस में कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर एवं कोल्ड स्टोरेज व्यवस्था का प्रावधान होने के बावजूद अपेक्षित चैंबर स्थापित नहीं किए गए थे। इसके अलावा, लाइसेंस में नामित नॉमिनी की ओर से लगभग दो वर्ष पहले त्यागपत्र दिए जाने के बावजूद उनका नाम लाइसेंस में दर्ज पाया गया। कुछ कन्फेक्शनरी उत्पादों में बेस्ट बिफोर अवधि से संबंधित निर्धारित 30 प्रतिशत की सीमा के उल्लंघन का मामला भी सामने आया। इन कमियों के मद्देनजर संबंधित प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित करने और कमियों में सुधार होने तक खाद्य कारोबार बंद कराने की कार्रवाई की गई है। लाइसेंस में दर्ज शर्तों के अनुरूप भंडारण सुविधाएं उपलब्ध कराना और आवश्यक विवरण अद्यतन रखना खाद्य कारोबारियों की जिम्मेदारी है।
- आगरा में 68 हजार रुपये के मखाने के 273 पैकेट सीज
आगरा में रिलायंस स्टोर के निरीक्षण के दौरान राय लाइज (RAI LAIES) ब्रांड के मखाने के 273 पैकेट सीज किए गए। इनकी कुल कीमत लगभग 68 हजार रुपये बताई गई है। संबंधित खाद्य पदार्थ के संबंध में नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।
- भंडारण से लेकर डिलीवरी तक हर स्तर पर जांच
विशेष अभियान के दौरान खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण, परिसर की स्वच्छता और तापमान नियंत्रण की व्यवस्था की जांच की जा रही है। खाद्य पदार्थों को निर्धारित तापमान पर रखने और आवश्यकतानुसार कोल्ड चेन बनाए रखने की स्थिति भी देखी जा रही है। इसके साथ ही खाद्य सामग्री की खरीद एवं आपूर्ति से संबंधित बिल-वाउचर और आवश्यक अभिलेखों की पड़ताल की जा रही है। खाद्य कारोबार में लगे कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता, स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड और आवश्यक प्रशिक्षण से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं।विभाग की टीमें पेस्ट कंट्रोल की व्यवस्था और उसके रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। खाद्य पदार्थों तथा अन्य सामग्रियों को निर्धारित और पृथक स्थानों पर रखने, एक्सपायर्ड, निष्क्रिय या अनुपयोगी खाद्य सामग्री की पहचान करने और उसके नियमानुसार निस्तारण की व्यवस्था भी देखी जा रही है।
- बेस्ट बिफोर अवधि और पैकेजिंग पर भी नजर
निरीक्षण के दौरान खाद्य पदार्थों की बेस्ट बिफोर अवधि की जांच की जा रही है। अभियान के निर्धारित मानकों के अनुसार 30 प्रतिशत और 45 दिन की सीमा से संबंधित प्रावधानों के अनुपालन को भी परखा जा रहा है। कन्फेक्शनरी उत्पादों में बेस्ट बिफोर अवधि संबंधी अनियमितताएं सामने आने के बाद इस पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा, खाद्य पदार्थों की पैकिंग, हैंडलिंग और डिलीवरी करने वाले कर्मचारियों से संबंधित आवश्यक विवरणों की जांच की जा रही है। उपकरणों की सफाई, स्वच्छता और सीआईपी (क्लीनिंग इन प्लेस) व्यवस्था की स्थिति भी देखी जा रही है, ताकि खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने वाली सतहों और उपकरणों की सफाई निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।
पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल की पार्टी यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर लड़ेगी चुनाव

- मिर्जापुर के चुनार में ‘जन नीति भारत पार्टी’ का ऐलान, दिव्या मित्तल बोलीं—प्रदेश में बनाना है जनता का राज
मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल की सक्रियता को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। उन्होंने अपनी पार्टी ‘जन नीति भारत पार्टी’ के माध्यम से प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। मिर्जापुर जिले के चुनार में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने पार्टी की चुनावी रणनीति को लेकर यह घोषणा की। दिव्या मित्तल ने कहा कि उनका उद्देश्य प्रदेश में जनता की भागीदारी वाली व्यवस्था स्थापित करना है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा, “हमें जनता का राज बनाना है।”
दिव्या मित्तल के इस ऐलान के बाद प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की पार्टी की मंशा सामने आई है। पार्टी का सभी 403 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का फैसला आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी प्रत्याशियों के चयन, संगठन के विस्तार और चुनावी मुद्दों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
-  सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी
चुनार में की गई घोषणा के मुताबिक, जन नीति भारत पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। इस घोषणा के साथ पार्टी ने प्रदेश की राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का संकेत दिया है। सभी सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए पार्टी को प्रदेशव्यापी संगठन, विधानसभा क्षेत्रों में सक्रिय कार्यकर्ताओं और स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क को मजबूत करना होगा।
-  ‘जनता का राज’ बनाने की बात
दिव्या मित्तल ने अपने संबोधन में जनता की भूमिका को प्रमुखता देते हुए प्रदेश में जनता का राज स्थापित करने की बात कही। उनके इस बयान को पार्टी के राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी की नीतियों, विकास संबंधी प्राथमिकताओं, उम्मीदवारों और चुनावी घोषणापत्र के बारे में विस्तृत जानकारी मिलने के बाद ही उसके राजनीतिक एजेंडे की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
- प्रदेश की राजनीति में नई दावेदारी
उत्तर प्रदेश में सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ जन नीति भारत पार्टी ने प्रदेशव्यापी राजनीतिक दावेदारी पेश की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी अपने संगठन का विस्तार किस तरह करती है और विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवारों के चयन तथा जनसमर्थन जुटाने के लिए क्या रणनीति अपनाती है।
फिलहाल, चुनार में दिव्या मित्तल की घोषणा पार्टी की चुनावी मंशा को सामने लाती है। आगामी दिनों में पार्टी की ओर से संगठनात्मक तैयारियों, चुनावी मुद्दों और अन्य राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर होने वाली घोषणाओं पर नजर रहेगी।
भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनें शहरी विकास की नीतियां: ए.के. शर्मा
**राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन-2026 में बोले नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री, तकनीक आधारित व्यवस्थाओं और बेहतर नगर प्रबंधन को प्राथमिकता देने की पैरवी**

**लखनऊ, 24 अक्टूबर।** उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने आधुनिक, स्मार्ट और नागरिक-केंद्रित शहरों के निर्माण के लिए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नीतियां तैयार करने, आधुनिक तकनीक अपनाने और शहरी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शहरी विकास का उद्देश्य केवल सड़कों, भवनों और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि नागरिकों को स्वच्छ, सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक जीवन उपलब्ध कराना भी है।
श्री शर्मा शनिवार को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित नेशनल अर्बन कॉन्क्लेव-2026 (राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन) में शामिल हुए। 24 और 25 अक्टूबर को आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘अर्बन राइजिंग: रीथिंकिंग अर्बन सिस्टम्स, सॉल्यूशंस एंड डिलीवरी’ है। सम्मेलन में तेजी से बढ़ते शहरीकरण की चुनौतियों, आधुनिक शहरी अवसंरचना, नगर प्रबंधन और नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने के उपायों पर चर्चा की जा रही है।
नगर विकास मंत्री ने शहरी विकास से जुड़े नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं से बदलती शहरी परिस्थितियों तथा नागरिकों की बढ़ती अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए दूरदर्शी नीतियां बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भविष्य के शहरों को व्यवस्थित, आधुनिक और सुविधायुक्त बनाने के लिए तकनीक आधारित व्यवस्थाओं, बेहतर शहरी नियोजन, मजबूत आधारभूत संरचना और प्रभावी सेवा वितरण को प्राथमिकता देना जरूरी है।
**नागरिकों की सुविधा हो शहरी विकास का केंद्र**
श्री शर्मा ने कहा कि शहरों की विकास योजनाएं ऐसी होनी चाहिए, जो वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में भी सक्षम हों। इसके लिए नगर निकायों की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाना आवश्यक है। शहरी विकास की सफलता का आकलन केवल निर्माण कार्यों से नहीं, बल्कि इस बात से भी होना चाहिए कि नागरिकों को बेहतर सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण जीवन कितना उपलब्ध हो रहा है।
उन्होंने शहरी सेवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक, नवाचार और बेहतर प्रबंधन प्रणालियों को अपनाने पर बल दिया। साथ ही, केंद्र और राज्य सरकारों, नगर निकायों तथा विशेषज्ञ संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय को शहरी विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के अनुभवों और सफल कार्यप्रणालियों से सीख लेकर विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
**शहरी विकास की भावी दिशा तय करने का मंच**
रष्ट्रीय शहरी सम्मेलन-2026 को शहरी प्रणालियों, समाधानों और सेवाओं के क्रियान्वयन में सुधार के लिए महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के अनुभवों को साझा करने के साथ आधुनिक, स्मार्ट, समावेशी और नागरिक-केंद्रित शहरों के निर्माण की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
कार्यक्रम में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, विभिन्न राज्यों के नगर विकास मंत्री तथा उत्तर प्रदेश के नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद सहित अन्य अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए।