अपराधी कितना भी डीपफेक का आवरण ओढ़े, उसे खोज निकालेंगे: योगी आदित्यनाथ

- एआई मददगार हो, निर्णायक नहीं, तकनीक का संचालन मानव विवेक से होना चाहिए: मुख्यमंत्री
- अंतरराष्ट्रीय ‘टेक संगम 2026’ के दूसरे दिन का मुख्यमंत्री योगी ने किया शुभारंभ
- देश के पहले 'LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' का शुभारंभ, क्वांटम तकनीक और कानून के समन्वय को मिलेगी गति
लखनऊ, 24 अक्टूबर 2026।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीपफेक जैसी तकनीकों के दौर में अपराधी कितना भी तकनीक का आवरण ओढ़ ले, उत्तर प्रदेश की वैज्ञानिक और विधिक क्षमता उसे खोज निकालेगी। एआई हमारे लिए मददगार हो सकता है, लेकिन उसे निर्णायक नहीं बनना चाहिए। तकनीक का संचालन मानव विवेक से होना चाहिए, न कि मनुष्य तकनीक के विवेक पर निर्भर हो जाए। पूरी तरह एआई पर निर्भरता भविष्य में संकट बन सकती है। वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच और आधुनिक तकनीक के समन्वय से अपराध अनुसंधान को प्रभावी बनाने के साथ न्याय मिलने में होने वाली देरी को भी कम किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री शनिवार को लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'टेक संगम 2026' के दूसरे दिन के कार्यक्रम का उद्घाटन कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने क्वांटम फॉरेंसिक्स और विधिक अनुपालन के क्षेत्र में कार्य करने वाले 'LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' का शुभारंभ किया। साथ ही कंसेंट मैनेजमेंट पोर्टल लॉन्च किया, 'अभेद्य' परियोजना की आधारशिला रखी और 'एआई इन कंस्ट्रक्शन' पुस्तक का अनावरण किया। सम्मेलन में साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्ष्य, क्वांटम तकनीक, फॉरेंसिक विज्ञान और एआई के न्यायिक व प्रशासनिक उपयोग पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
- भू-माफिया से मुक्त कराई गई जमीन पर बना विश्वस्तरीय संस्थान
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए बताया कि जिस करीब 100 एकड़ जमीन पर आज विश्वस्तरीय फॉरेंसिक संस्थान खड़ा है, उस पर कभी लखनऊ के एक बड़े भू-माफिया का कब्जा था। उस समय पुलिस भी इस मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रही थी। वर्ष 2017 में पुलिस अधिकारियों से इसकी जानकारी मिलने के बाद जांच कराई गई और भू-माफिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। दूसरी एफआईआर दर्ज होते ही उसने आत्मसमर्पण कर जमीन छोड़ दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक दशक पहले लखनऊ में साइबर फॉरेंसिक और क्वांटम तकनीक जैसे विषयों पर चर्चा करना भी सपने जैसा लगता था। आज उसी जमीन पर बना संस्थान प्रदेश में वैज्ञानिक जांच, आधुनिक अपराध अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा को नई दिशा दे रहा है।
- 'सीआईडी' सीरियल की ‘रील लाइफ’ अब यूपी में रियल लाइफ
फॉरेंसिक विज्ञान की उपयोगिता समझाते हुए मुख्यमंत्री ने लोकप्रिय टीवी सीरियल 'सीआईडी' का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पहले लोग टेलीविजन पर देखते थे कि एक बाल या फिंगरप्रिंट के आधार पर अपराधी तक कैसे पहुंचा जाता है। अब फॉरेंसिक विज्ञान और आधुनिक तकनीक की मदद से ऐसी जांच वास्तविक जीवन में संभव हो रही है। न्याय मिलने में देरी का उल्लेख करते हुए उन्होंने एक माफिया के मामले का जिक्र किया, जिसने वर्ष 1980 में पहला अपराध किया था, लेकिन साक्ष्यों के अभाव और डीएनए सैंपल नष्ट होने के कारण उसे वर्ष 2022 में, यानी 42 साल बाद सजा मिल सकी। यह उदाहरण बताता है कि अपराध की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्य कितने महत्त्वपूर्ण हैं और समय पर साक्ष्य जुटाना न्याय प्रक्रिया के लिए क्यों जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नए आपराधिक कानूनों के तहत सात वर्ष से अधिक की सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की सभी 18 पुलिस रेंजों में फॉरेंसिक लैब विकसित की जा रही हैं। इनमें 12 लैब तैयार हो चुकी हैं, जबकि छह अन्य अंतिम चरण में हैं। इसके अतिरिक्त 150 से अधिक फॉरेंसिक वैन तैनात की गई हैं, जिससे घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाने और जांच को गति देने में मदद मिलेगी। उद्देश्य है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर विवेचना मजबूत हो और न्यायालयों में मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी कम हो।
- 'लॉ विद लैब्स' की अवधारणा को आगे बढ़ाएगा LEXQ सेंटर
मुख्यमंत्री ने UPSIFS की 'लॉ विद लैब्स' यानी कानून और प्रयोगशाला के समन्वय की अवधारणा को महत्त्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विज्ञान और कानून को एक-दूसरे का पूरक बनना होगा। वैज्ञानिक जांच की विश्वसनीयता और विधिक प्रक्रिया के अनुरूप साक्ष्यों का उपयोग न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाता है। इसी उद्देश्य से शुरू किया गया LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्वांटम तकनीक को कानून, सुरक्षा और फॉरेंसिक विज्ञान से जोड़ेगा। इसमें 'LEX' का संबंध कानून और 'Q' का संबंध क्वांटम से है। सेंटर के माध्यम से क्वांटम फॉरेंसिक्स, विधिक अनुपालन, अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे कानून और आधुनिक विज्ञान के बीच सहयोग के नए अवसर विकसित होंगे।
- 2030 तक पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान दौर में डेटा और तकनीक विकास के प्रमुख आधार बन चुके हैं। उन्होंने डेटा को नया तेल बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश एआई और डेटा सेंटर के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्रदेश में पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना है। इसके लिए पांच बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। उन्होंने नोएडा में उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब यूनिट स्थापित किए जाने का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और एआई जैसे क्षेत्रों में निवेश से प्रदेश की तकनीकी क्षमता बढ़ेगी और नए अवसर पैदा होंगे।
- 2017 के बाद प्रदेश में लगे 35 हजार नए उद्योग
औद्योगिक विकास और निवेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 से 2017 तक उत्तर प्रदेश में करीब 14 हजार उद्योग स्थापित हुए थे, जबकि 2017 के बाद 35 हजार नए उद्योग लगे हैं। उन्होंने इस बदलाव का संबंध बेहतर कानून-व्यवस्था और निवेश के अनुकूल माहौल से जोड़ा। मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश के पास करीब 75 हजार एकड़ का लैंड बैंक है और 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। लखनऊ स्थित एचसीएल सेंटर का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में वहां करीब 100 कर्मचारी काम करते थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 12,600 हो गई है। उन्होंने कहा कि महिलाएं भी रात की शिफ्ट में काम कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने इसे सुरक्षा के माहौल में आए बदलाव और महिलाओं की बढ़ती कार्यभागीदारी के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

- अयोध्या से एक्सप्रेसवे नेटवर्क तक विकास का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत और शहर में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में वहां बिजली की उपलब्धता सीमित थी। अब अयोध्या को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है और वहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा है। प्रदेश में पांच अंतरराष्ट्रीय और 17 घरेलू हवाई अड्डे होने का भी उन्होंने उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, बुनियादी ढांचे के विस्तार और निवेश के अनुकूल वातावरण से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और उत्तर प्रदेश देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है।
- संस्थान ने पांच हजार से अधिक अधिकारियों को दिया प्रशिक्षण
UPSIFS के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने संस्थान की स्थापना और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक अगस्त 2021 को संस्थान की आधारशिला रखी थी। संस्थान में डीएनए, साइबर और डिजिटल फॉरेंसिक्स सहित आधुनिक तकनीकी प्रयोगशालाएं विकसित की गई हैं। यहां एआई, रोबोटिक्स और अन्य उभरती तकनीकों के माध्यम से अपराध अनुसंधान को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। डॉ. गोस्वामी के अनुसार, संस्थान अब तक पुलिस, रक्षा बलों और प्रशासन से जुड़े पांच हजार से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दे चुका है। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने सम्मेलन में साइबर बुलिंग और डिजिटल एविडेंस जैसे विषयों पर हो रहे विमर्श का उल्लेख किया। उन्होंने अपराध स्थल प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों के प्रशिक्षण और आधुनिक फॉरेंसिक क्षमता विकसित करने में संस्थान की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
- 'यूपी के छात्र भारत का भविष्य लिखेंगे': प्रो. तनुजा सिंह
यूनिवर्सिटी ऑफ इंडियानापोलिस, अमेरिका की प्रेसिडेंट प्रो. तनुजा सिंह ने उत्तर प्रदेश में एआई और साइबर तकनीक के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश इन क्षेत्रों में केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर नेतृत्व करने की क्षमता विकसित कर रहा है। प्रदेश के छात्र देश के भविष्य को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
- राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ शिक्षा, तकनीक और फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में एमओयू
टेक संगम 2026 के दौरान शिक्षा, तकनीक, फॉरेंसिक विज्ञान एवं कौशल विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें यूनिवर्सिटी ऑफ इंडियानापोलिस (अमेरिका), जीवाजी यूनिवर्सिटी (ग्वालियर, मध्य प्रदेश), सैन्स इंस्टीट्यूट (अमेरिका), उत्तर प्रदेश स्किल डेवलपमेंट मिशन (लखनऊ), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (नई दिल्ली), डायरेक्टरेट ऑफ फॉरेंसिक साइंस सर्विसेज (नई दिल्ली), डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (नई दिल्ली), सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (नई दिल्ली) और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक, नई दिल्ली) शामिल हैं।
- कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित
नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर, यूनिवर्सिटी ऑफ इंडियानापोलिस की प्रेसिडेंट प्रो. तनुजा सिंह, रक्षा साइबर एजेंसी के महानिदेशक रियर एडमिरल संजय सचदेवा, प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, सरोजनी नगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह और उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी सहित देश-विदेश से आए साइबर एवं फॉरेंसिक विशेषज्ञ, शिक्षाविद और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
Oct 25 2026, 18:51
राफेल, सुखोई और स्वदेशी तेजस के हवाई करतबों से गूंजा काशी का आसमान, सूर्यकिरण टीम ने बिखेरे तिरंगे के रंग
वाराणसी, 25 अक्टूबर। भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर वाराणसी के नमो घाट पर आयोजित भव्य एयर शो ‘विंग्स ओवर गंगा’ में काशी के आसमान में वायुसेना की हवाई शक्ति, तकनीकी क्षमता, सटीकता और पेशेवर दक्षता का प्रदर्शन किया गया। राफेल के ‘नीलकंठ’, सुखोई-30 एमकेआई के ‘विश्वनाथ’ और मिराज-2000 के ‘महादेव’ जैसे कॉल साइन और फॉर्मेशन ने एयर शो को काशी की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान से जोड़ा। लड़ाकू विमानों की गर्जना, हेलीकॉप्टरों की समन्वित उड़ान और आसमान में तिरंगे के रंगों ने उपस्थित जनसमुदाय को रोमांचित किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में हुए इस एयर शो में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सहित वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य शामिल हुए। भारतीय वायुसेना प्रत्येक वर्ष 8 अक्टूबर को अपना स्थापना दिवस मनाती है। इस वर्ष भी 8 अक्टूबर को 94वां स्थापना दिवस मनाया गया। वाराणसी में आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ इसी वर्षगांठ से जुड़े आयोजनों का हिस्सा रहा।
एयर शो में काशी और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े नामों वाले कई विशेष फॉर्मेशन प्रस्तुत किए गए। तीन सुखोई-30 एमकेआई विमानों ने ‘विश्वनाथ’ फॉर्मेशन बनाया, जबकि तीन राफेल विमानों ने ‘नीलकंठ’ फॉर्मेशन के साथ उड़ान भरी। मिराज-2000 ने ‘महादेव’ कॉल साइन के साथ हवाई प्रदर्शन किया। चार जगुआर विमानों ने ‘पशुपति’ फॉर्मेशन बनाया, जिसका नेतृत्व ग्रुप कैप्टन मयंक ने किया। सुखोई-30 एमकेआई ने ‘विश्वनाथ’ कॉल साइन के साथ एरियल स्प्लिट का प्रदर्शन किया, जबकि तीन राफेल विमानों ने ‘नीलकंठ’ कॉल साइन के साथ एरियल स्प्लिट प्रस्तुत किया। जगुआर और सुखोई-30 एमकेआई विमानों ने क्रमशः ‘पशुपति’ और ‘विश्वनाथ’ कॉल साइन के साथ काल्पनिक हवाई युद्ध का प्रदर्शन किया। इन करतबों के माध्यम से लड़ाकू विमानों की गति, नियंत्रण, फुर्ती और समन्वित संचालन की क्षमता दिखाई गई।
सी-295 और डीओ-228 विमानों ने विंग कमांडर अनिमेष लांबा के नेतृत्व में ‘भैरव’ फॉर्मेशन बनाया। सी-130 और एएन-32 विमानों ने विंग कमांडर रजनीश चंद्र उनियाल और विंग कमांडर विनय नायर के नेतृत्व में ‘कैलाश’ फॉर्मेशन प्रस्तुत किया। एईडब्ल्यूएंडसी और मिग-29 विमानों ने ‘त्रिलोचन’ फॉर्मेशन बनाया, जबकि पी-8आई और मिराज-2000 विमानों ने ‘नटराज’ फॉर्मेशन का प्रदर्शन किया। आईएल-78 और मिराज-2000 विमानों ने ‘महादेव’ फॉर्मेशन बनाया। इसका नेतृत्व ग्रुप कैप्टन गौरव शुक्ला और विंग कमांडर राहुल बसोया ने किया। ‘दशाश्वमेध’ फॉर्मेशन के तहत सी-17 और हॉक एमके-132 विमानों ने आसमान में करतब दिखाए। इसके अलावा ‘प्रचंड’ फॉर्मेशन में तेजस, सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, जगुआर, मिग-29 और मिराज-2000 जैसे विमानों की भागीदारी रही।
स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस एमकेआई ने ‘अस्सी’ कॉल साइन के साथ हवाई करतब दिखाए। इसे ग्रुप कैप्टन रूप ने उड़ाया। विमान ने तेज मोड़ों और नियंत्रित उड़ान के जरिए अपनी फुर्ती का प्रदर्शन किया। एयर शो में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, मिग-29 और जगुआर जैसे विमानों ने भी अपनी हवाई क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इन विमानों के अलग-अलग फॉर्मेशन ने भारतीय वायुसेना के पायलटों के प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता और आपसी तालमेल को प्रदर्शित किया। गंगा नदी और नमो घाट के ऊपर से गुजरते विमानों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
तीन एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों ने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज और वायुसेना के ध्वज के साथ ‘ओंकार’ फॉर्मेशन बनाया। इसका नेतृत्व ग्रुप कैप्टन अनुज गुप्ता ने किया। तीन चेतक हेलीकॉप्टरों ने ग्रुप कैप्टन दीपांकर दास के नेतृत्व में ‘गंगा’ फॉर्मेशन प्रस्तुत किया। इस दौरान हेलीकॉप्टरों से मां गंगा के ऊपर पुष्पवर्षा की गई। एलसीएच और अपाचे हेलीकॉप्टरों ने ‘भागीरथी’ फॉर्मेशन बनाया। इसका नेतृत्व ग्रुप कैप्टन अनुभव महेंद्र और विंग कमांडर अतुल मिश्रा ने किया। एएलएच एमके-IV और चिनूक हेलीकॉप्टरों ने ग्रुप कैप्टन हर्ष पांडे के नेतृत्व में ‘अलकनंदा’ फॉर्मेशन प्रस्तुत किया। भारतीय नौसेना के कैप्टन द्विवेंदू शर्मा के नेतृत्व में ‘त्रिदेव’ फॉर्मेशन भी प्रदर्शित किया गया। चिनूक हेलीकॉप्टर ने अपनी उड़ान के दौरान रैंप से 94 का अंक प्रदर्शित किया। यह प्रस्तुति भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के विशेष संदर्भ में आयोजित की गई। विभिन्न हेलीकॉप्टरों के प्रदर्शन में उनकी उड़ान क्षमता, भार वहन करने की दक्षता और समन्वित संचालन को दर्शाया गया।
भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एयरोबैटिक टीम ने हॉक जेट विमानों के साथ सटीक फॉर्मेशन, लूप, बैरल रोल और अन्य हवाई कलाबाजियों का प्रदर्शन किया। टीम के विमानों ने आसमान में केसरिया, सफेद और हरे रंग का धुआं छोड़कर तिरंगे की छटा बिखेरी। सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम ने भी समन्वित उड़ान और आकर्षक हवाई करतबों से दर्शकों का ध्यान खींचा।
एयर शो में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, तेजस, चिनूक, एमआई-17, प्रचंड और अपाचे सहित विभिन्न विमानों एवं हेलीकॉप्टरों ने भाग लिया। सी-295, एएन-32, आईएल-76 और आईएल-78 जैसे विमानों ने भी अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनों ने भारतीय वायुसेना की तकनीकी दक्षता, प्रशिक्षण और समन्वित हवाई संचालन को सामने रखा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नमो घाट पहुंचने पर मार्ग में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। ढोल-नगाड़ों और नारों के बीच प्रधानमंत्री ने हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। इसके बाद उन्होंने एयर शो देखा। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने प्रधानमंत्री को स्मृति चिह्न भेंट किया।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, केंद्रीय राज्यमंत्री पंकज चौधरी और संजय सेठ, एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह, वाइस चीफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित और एयर मार्शल तरुण चौधरी सहित वायुसेना और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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