हनुमान अंश फिल्म के सामूहिक दर्शन से भक्तिमय हुआ माहौल

हजारीबाग। हजारीबाग यूथ विंग के सदस्यों एवं उनके परिवारजनों ने शहर स्थित लक्ष्मी सिनेमा हॉल में सामूहिक रूप से ‘हनुमान अंश’ फिल्म का दर्शन किया। संस्था के संरक्षक चंद्र प्रकाश जैन के निर्देश एवं अध्यक्ष करण जायसवाल के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यक्रम भक्ति, परिवार और सामाजिक एकजुटता का सुंदर उदाहरण बना।

फिल्म देखने से पहले सभी सदस्य एवं परिवारजन सिनेमा हॉल के बाहर एकत्र हुए, जहां सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इसके बाद सीताराम के जयघोष के बीच सभी ने सिनेमा हॉल में प्रवेश किया और एक साथ बैठकर फिल्म का आनंद लिया। सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के कारण पूरे वातावरण में भक्तिमय माहौल बना रहा।

‘हनुमान अंश’ महान संत नीम करौली बाबा (नीब करौरी बाबा) के जीवन और भगवान श्रीहनुमान के प्रति उनके अटूट समर्पण पर आधारित फिल्म है। फिल्म में संत नीम करौली बाबा के जीवन के संघर्ष, साधना और उनसे जुड़ी चमत्कारों की मान्यताओं के साथ प्रेम, सेवा, मानवता तथा ईश्वर के प्रति समर्पण जैसे भावों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। फिल्म के माध्यम से भक्ति और मानव सेवा को जीवन का महत्वपूर्ण आधार बनाने का संदेश भी दिया गया है।

फिल्म का भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दी…’ भी दर्शकों के बीच विशेष रूप से भावपूर्ण रहा। सदस्यों एवं उनके परिवारजनों ने पूरी श्रद्धा, उत्साह और भक्ति भावना के साथ फिल्म देखी तथा इसके संदेश की सराहना की।

इस अवसर पर हजारीबाग यूथ विंग के संरक्षक चंद्र प्रकाश जैन ने कहा कि हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ के बाद सभी ने पूरी भक्ति भावना और आनंद के साथ ‘हनुमान अंश’ फिल्म का आनंद लिया। ऐसे आयोजन युवाओं को भक्ति, संस्कार और भारतीय संस्कृति से जोड़ने का सार्थक माध्यम हैं।

वहीं, संस्था के अध्यक्ष करण जायसवाल ने कहा कि परिवारजनों और सदस्यों के साथ सामूहिक रूप से फिल्म देखना बेहद आनंददायक रहा। भक्ति, संस्कार और मनोरंजन का यह सुंदर संगम सभी के लिए यादगार रहा।

हजारीबाग यूथ विंग द्वारा आयोजित इस सामूहिक फिल्म दर्शन का उद्देश्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से युवाओं और परिवारों को एक साथ जोड़ना तथा प्रेम, सेवा, मानवता, भक्ति और संस्कार जैसे मूल्यों के प्रति सकारात्मक भाव जागृत करना भी था। फिल्म से पहले हुए सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ ने पूरे आयोजन को विशेष आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया।

दिल्ली के ब्रजधाम महोत्सव में हजारीबाग का तरंग ग्रुप सम्मानित

हजारीबाग। कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में लगातार सक्रिय तरंग ग्रुप, हजारीबाग को दिल्ली के द्वारका में आयोजित आत्मनिर्भर दिल्ली सह ब्रजधाम महोत्सव में सम्मानित किया गया। 6 से 11 सितंबर तक आयोजित छह दिवसीय महोत्सव का आयोजन बिरसा मुंडा जनकल्याण प्रचार अभियान के तहत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से किया गया।

महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे लघु एवं सूक्ष्म उद्यमियों ने अपने उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री के लिए करीब 70 स्टॉल लगाए। इसके अलावा प्रत्येक शाम सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों के कलाकारों एवं सांस्कृतिक समूहों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधता को प्रदर्शित किया।

कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में तरंग ग्रुप की निरंतर सक्रियता और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों में योगदान को देखते हुए संस्था को सम्मान प्रदान किया गया। तरंग ग्रुप के निदेशक अमित कुमार गुप्ता ने आयोजन समिति की ओर से प्रदान किया गया सम्मान ग्रहण किया।

तरंग ग्रुप लंबे समय से नृत्य, संगीत, रंगमंच, लोककला, सांस्कृतिक जागरूकता और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से सक्रिय है। संस्था का उद्देश्य कलाकारों और नई प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने के साथ भारतीय कला एवं संस्कृति को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाना रहा है।

अमित कुमार गुप्ता ने सम्मान के लिए आयोजन समिति के प्रचार अभियान प्रमुख राजमणि कुमार एवं रामकिशोर सावंत के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि कलाकारों एवं सांस्कृतिक संस्थाओं को प्रोत्साहित कर राष्ट्रीय मंच प्रदान करना सराहनीय पहल है। ऐसे आयोजन कलाकारों को नई ऊर्जा देने के साथ देश के विभिन्न राज्यों की कला, संस्कृति और प्रतिभाओं को एक-दूसरे से जोड़ने का कार्य करते हैं।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली में मिले इस सम्मान से पूर्व 15 अगस्त 2026 को हजारीबाग में जिला प्रशासन द्वारा आयोजित स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में भी तरंग ग्रुप के निदेशक अमित कुमार गुप्ता को सम्मानित किया जा चुका है।

तरंग ग्रुप ने प्राप्त सम्मान को संस्था के सभी कलाकारों, सहयोगियों एवं शुभचिंतकों को समर्पित करते हुए कहा कि भविष्य में भी हजारीबाग की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने के लिए संस्था निरंतर कार्य करती रहेगी।

किसान परिवार से निकले सपन कुमार महथा ने पुलिस सेवा में बनाई अलग पहचान

प्रस्तुति : रंजन चौधरी

सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र

हजारीबाग। पुलिस की वर्दी सिर्फ एक पोशाक नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, अनुशासन, कानून के प्रति निष्ठा और समाज के प्रति कर्तव्य का प्रतीक है। इसी वर्दी को पहनकर कई पुलिस पदाधिकारी अपनी सेवा पूरी करते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं, जिनकी पहचान पद और वर्दी से आगे बढ़कर उनके व्यवहार, साहस, संवेदनशीलता और जनसेवा से बनती है। झारखंड पुलिस के इंस्पेक्टर सपन कुमार महथा ऐसे ही पुलिस पदाधिकारी हैं।

बोकारो जिले के चंदनकियारी की मिट्टी से निकलकर वर्ष 1994 बैच में बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर के रूप में सेवा शुरू करने वाले सपन कुमार महथा आज हजारीबाग जिले में सर्किल इंस्पेक्टर के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनके लंबे सेवाकाल में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी के साथ कम्युनिटी पुलिसिंग, मानवीय संवेदना और साहस के कई उदाहरण देखने को मिलते हैं।

किसान परिवार में जन्म, संघर्षों के बीच पढ़ाई

सपन कुमार महथा का जन्म 11 सितंबर 1971 को चंदनकियारी प्रखंड के चंडीपुर गांव में एक सामान्य किसान परिवार में हुआ। उनके पिता धान और सब्जी की खेती करते थे, जबकि मां साझा में बकरी और बत्तख पालकर उनके अंडे बेचती थीं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद परिवार ने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी।

उन्होंने चंडीपुर प्राथमिक विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद मध्य विद्यालय चंदनकियारी और उच्च विद्यालय चंदनकियारी से पढ़ाई की। वर्ष 1986 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद बोकारो स्टील कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

उनके विद्यार्थी जीवन का एक प्रसंग उनके संघर्ष को बयां करता है। कॉलेज जाने के लिए साइकिल की जरूरत थी, लेकिन परिवार के पास इसके लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। तब उनकी मां ने साझा में मिले बकरी और बत्तख के अंडे बेचकर 100 रुपये में सेकंड हैंड साइकिल खरीदी। यही साइकिल उनके लिए केवल कॉलेज आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि सपनों की ओर बढ़ने का माध्यम बनी।

सात लाख के इनामी अपराधी की गिरफ्तारी से मिली पहचान

वर्ष 1994 में बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर के रूप में सेवा शुरू करने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग नालंदा जिले में हुई। सेवा के शुरुआती दौर में ही उन्होंने सात लाख रुपये के इनामी फरार अपराधी सूरजभान सिंह की गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में सूरजभान सिंह राजनीति में आए और सांसद भी बने।

इसके बाद सपन कुमार महथा ने नालंदा, दुमका, स्पेशल ब्रांच, मुख्यमंत्री सुरक्षा, धनबाद, लातेहार, रांची और सीआईडी सहित विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों पर सेवाएं दीं। झारखंड गठन के बाद राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की मुख्यमंत्री सुरक्षा में भी उन्होंने जिम्मेदारी निभाई।

हजारीबाग में उन्होंने सदर थाना प्रभारी और विष्णुगढ़ थाना प्रभारी के रूप में भी कार्य किया। विष्णुगढ़ थाना प्रभारी रहते हुए नवादा में बालिका की नरबलि की चर्चित घटना के उद्भेदन में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्तमान में वे पेलावल सर्किल इंस्पेक्टर के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

कोरोना काल में पुलिस की वर्दी ने दिखाया इंसानियत का चेहरा

सपन कुमार महथा के सेवाकाल का सबसे संवेदनशील अध्याय कोरोना संक्रमण का दौर रहा। उस समय वे रांची के बरियातू थाना प्रभारी के रूप में पदस्थापित थे। संक्रमण के भय के कारण लोग घरों से निकलने से डर रहे थे और अस्पतालों में मरीजों के परिजनों के सामने गंभीर संकट खड़ा था।

ऐसे समय में उन्होंने पुलिस की पारंपरिक भूमिका से आगे बढ़कर जरूरतमंदों की मदद का बीड़ा उठाया। मेडिकल सहायता, दवाइयां और भोजन उपलब्ध कराने के साथ करीब 98 दिनों तक थाना परिसर में जरूरतमंदों और मरीजों के परिजनों के लिए नि:शुल्क भोजनालय संचालित कराया।

कोरोना काल में रिम्स समेत अन्य अस्पतालों में कई मरीजों की मृत्यु हुई, जिनके परिजन समय पर अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंच सके। ऐसे मामलों में सपन कुमार महथा ने मृतकों को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दिलाने में भी सहयोग किया। देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों से भी लोग उन्हें फोन कर अपने परिजनों के अंतिम संस्कार में मदद की गुहार लगाते थे।

कई मामलों में उन्होंने निजी खर्च और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से अंतिम संस्कार कराया। लॉकडाउन के दौरान धनबाद के कतरास में एक ही परिवार के छह सदस्यों की मृत्यु के बाद उनके अंतिम संस्कार में सहयोग करना भी उनके मानवीय पक्ष का उदाहरण रहा।

नक्सल मुठभेड़ में दिखाया अदम्य साहस

सपन कुमार महथा की सेवा यात्रा केवल संवेदनशीलता ही नहीं, बल्कि साहस की भी मिसाल है। नेतरहाट क्षेत्र में नक्सलियों के साथ हुई एक मुठभेड़ के दौरान उनके करीब एक दर्जन साथी जवान संकट में थे। परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण थीं। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने भी उन्हें आगे नहीं जाने की सलाह दी थी और आर्मी फोर्स ने भी तत्काल वहां जाने से इनकार किया था।

इसके बावजूद सपन कुमार महथा अपने साथियों को संकट में छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने जोखिम उठाते हुए उनकी मदद के लिए आगे बढ़ने का फैसला किया। बाद में आर्मी फोर्स और अन्य पुलिस जवान भी वहां पहुंचे। मुठभेड़ में एक जवान शहीद हुआ, जबकि अन्य जवान सुरक्षित निकल सके।

कम्युनिटी पुलिसिंग को मानते हैं पुलिसिंग का अहम हिस्सा

सपन कुमार महथा पुलिसिंग को केवल अपराध और अपराधियों से निपटने तक सीमित नहीं मानते। आम लोगों से संवाद, पीड़ितों की सुनवाई और जरूरतमंदों की मदद को वे पुलिस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।

जहां भी पदस्थापित रहे, उन्होंने लोगों से सीधे जुड़ने का प्रयास किया। जनप्रतिनिधियों, मीडिया, आम जनता और अपने सहकर्मियों के साथ समन्वय बनाकर काम करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है। कोरोना काल में रांची में बने उनके सामाजिक संबंध आज भी जरूरतमंद लोगों के काम आ रहे हैं।

जन्मभूमि से आज भी कायम है गहरा रिश्ता

लंबे पुलिस सेवाकाल और विभिन्न पदस्थापनाओं के बावजूद चंदनकियारी से उनका रिश्ता आज भी उतना ही मजबूत है। सहज, सरल, मिलनसार और मृदुभाषी स्वभाव के कारण वे अपने क्षेत्र के लोगों के बीच सहजता से घुल-मिल जाते हैं।

उनकी पत्नी सुषमा देवी बोकारो जिला परिषद की अध्यक्ष रह चुकी हैं और वर्तमान में जिला परिषद सदस्य हैं। उनकी बहन भी चंदनकियारी क्षेत्र से जिला परिषद सदस्य रह चुकी हैं। सामाजिक जीवन में सक्रियता और लोगों से जुड़ाव के कारण चंदनकियारी क्षेत्र में उनकी अपनी अलग पहचान बनी हुई है।

वर्दी की असली पहचान इंसानियत से

सपन कुमार महथा की सेवा यात्रा बताती है कि किसी पुलिस अधिकारी की पहचान केवल उसके पद, रैंक या पदस्थापना से नहीं होती। असली पहचान इस बात से होती है कि कठिन समय में उसने किसका साथ दिया, संकट में किसका हाथ थामा और कर्तव्य निभाते हुए कितनी बार स्वयं जोखिम उठाया।

एक किसान परिवार में जन्मे उस बच्चे की कहानी, जिसकी मां ने बकरी और बत्तख के अंडे बेचकर 100 रुपये में साइकिल खरीदी थी, आज संघर्ष, सफलता, साहस, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदना की कहानी बन चुकी है।

11 सितंबर को अपने जन्मदिन के अवसर पर इंस्पेक्टर सपन कुमार महथा को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। उनके स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन की कामना के साथ समाज और पुलिस सेवा के प्रति उनके समर्पण को सलाम।

झारखंड फुटबॉल संघ की बैठक और नई कमेटी को लेकर पुराने खिलाड़ियों में नाराजगी

हजारीबाग। झारखंड फुटबॉल संघ की ओर से हजारीबाग में आयोजित बैठक और नई कमेटी के गठन को लेकर जिले के पुराने फुटबॉल खिलाड़ियों, कोच, रेफरी एवं संघ के पूर्व सदस्यों में नाराजगी है। पुराने खिलाड़ियों और संघ से जुड़े सदस्यों ने बैठक में शामिल लोगों तथा नई कमेटी के गठन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है।

पूर्व सदस्यों का आरोप है कि बैठक में ऐसे लोगों को भी बुलाया गया, जो पूर्व में संघ के सदस्य नहीं रहे हैं। कुछ लोगों को पुराने खिलाड़ियों ने फुटबॉल गतिविधियों में भी नहीं देखा है। सदस्यों का कहना है कि हजारीबाग की पुरानी कमेटी को भंग किए बिना ही नए सदस्यों को जोड़कर नई कमेटी का गठन कर दिया गया। उनका कहना है कि संघ की परंपरा के अनुसार पहले पुरानी कमेटी को भंग किया जाना चाहिए और इसके बाद नई कमेटी का गठन होना चाहिए।

पुराने खिलाड़ियों ने झारखंड फुटबॉल संघ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। सदस्यों का कहना है कि झारखंड गठन के बाद से गुलाम रब्बानी लगातार सचिव पद पर बने हुए हैं, जबकि इस दौरान अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष के पदों पर बदलाव होता रहा है। सदस्यों ने संघ में परिवारवाद को बढ़ावा दिए जाने का भी आरोप लगाया।

पूर्व सदस्यों के अनुसार, पुरानी कमेटी के कोषाध्यक्ष, संयुक्त सचिव एवं अन्य सदस्यों के साथ नए लोगों को जोड़कर लगातार लीग मैचों का आयोजन किया जाता रहा है। पिछले वर्ष 28 टीमों के बीच लीग मैच आयोजित किए जाने की बात भी सदस्यों ने कही।

सदस्यों ने बताया कि कुछ पूर्व सदस्यों की ओर से 72 खिलाड़ियों के पंजीयन के लिए दस्तावेज जमा किए गए थे, लेकिन अब तक उनका रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया। इस संबंध में पूछे जाने पर भी स्पष्ट जवाब नहीं मिलने का आरोप लगाया गया।

पुराने खिलाड़ियों का आरोप है कि ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन से प्रतियोगिताओं की जानकारी पहले मिलने के बावजूद झारखंड के सदस्यों को अंतिम समय में इसकी सूचना दी जाती है। इससे खिलाड़ियों और आयोजकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। संतोष ट्रॉफी जैसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंट के लिए भी पर्याप्त समय नहीं मिलने की बात सदस्यों ने कही।

कार्यप्रणाली की जांच की मांग

पुराने खिलाड़ियों और संघ के पूर्व सदस्यों ने झारखंड फुटबॉल संघ के कार्यकाल एवं कार्यप्रणाली की पूरी जांच कराने की मांग की है। सदस्यों ने कहा कि हजारीबाग में गठित नई कमेटी के संबंध में उपायुक्त से मिलकर पूरी जानकारी दी जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की मांग की जाएगी।

खेल मंत्री के निधन के बाद बैठक को लेकर भी जताई नाराजगी

छह सितंबर को खेल मंत्री सुदीप्त कुमार सोनू के निधन के बाद आठ सितंबर को हजारीबाग में बैठक आयोजित किए जाने को लेकर भी सदस्यों ने नाराजगी जताई। सदस्यों ने बैठक के समय को लेकर सवाल उठाते हुए इसकी निंदा की। उनका कहना है कि झारखंड फुटबॉल संघ के सचिव गुलाम रब्बानी गिरिडीह से हैं और दिवंगत खेल मंत्री भी गिरिडीह से थे। ऐसे में मंत्री के निधन के एक दिन बाद बैठक आयोजित किए जाने को लेकर सदस्यों ने आपत्ति जताई और इसे असंवेदनशील बताया।

इस अवसर पर लाल किशोर प्रसाद, अशोक भट्टाचार्य, नजरुल हसन, भैया मुरारी सिन्हा, सरफराज अहमद, बहादुर राम, महताब आलम, धनेश्वर गोप और सूरज सिंह थापा उपस्थित थे।

जनता दरबार में उपायुक्त ने सुनी आमजनों की समस्याएं

हजारीबाग के उपायुक्त हेमन्त सती ने शुक्रवार को अपने कार्यालय कक्ष में जनता दरबार का आयोजन कर जिले के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों से पहुंचे आमजनों की समस्याएं सुनीं। जनता दरबार में बड़ी संख्या में लोगों ने विभिन्न समस्याओं से संबंधित आवेदन उपायुक्त के समक्ष प्रस्तुत किए।

जनता दरबार में भूमि विवाद, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ, सड़क निर्माण, आवास योजना, रोजगार, मुआवजा भुगतान सहित अन्य जनहित से जुड़े मामले सामने आए। उपायुक्त ने प्रत्येक आवेदक की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों के पदाधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए आवेदन अग्रसारित किया।

इस दौरान उपायुक्त ने कहा कि जनता दरबार आमजनों और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्राप्त आवेदनों का त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

झामुमो जिला समिति ने दिवंगत सुदिव्य कुमार सोनू को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

हजारीबाग। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) हजारीबाग जिला समिति की ओर से गुरुवार को हीराबाग चौक स्थित पार्टी कार्यालय में झारखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं झामुमो के वरिष्ठ नेता रहे दिवंगत सुदिव्य कुमार सोनू को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष संजीव बेदिया ने की, जबकि संचालन जिला सचिव नीलकंठ महतो ने किया। उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष संजीव बेदिया ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू का असामयिक निधन झारखंड की राजनीति और झामुमो परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि वे जुझारू, कर्मठ और जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील जनप्रतिनिधि थे। संगठन को मजबूत करने और आम जनता की आवाज को सरकार तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके निधन से पार्टी में एक बड़ा शून्य उत्पन्न हुआ है।

जिला सचिव नीलकंठ महतो ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू ने अपने राजनीतिक जीवन में गरीब, मजदूर, किसान और वंचित वर्गों की आवाज को मजबूती से उठाया। उन्होंने संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने का प्रयास किया। उनका संघर्ष और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

केंद्रीय सदस्य सह युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष गौरव पटेल ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू ने साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर संघर्ष, मेहनत और जनसेवा के बल पर राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। वे झामुमो की विचारधारा और आंदोलनकारी परंपरा के समर्पित सिपाही थे। झारखंड, विशेषकर गिरिडीह क्षेत्र के विकास में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।

अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला अध्यक्ष यासीन खान ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू सभी वर्गों और समुदायों के बीच लोकप्रिय थे। उन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने के लिए लगातार काम किया। उनका निधन राज्य की जनता के लिए भी बड़ी क्षति है।

सभा में वक्ताओं ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू ने संगठन को मजबूत करने, युवाओं को राजनीति से जोड़ने और झारखंड के विकास के लिए निरंतर कार्य किया। उनकी सादगी, कार्यशैली और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता उन्हें विशिष्ट पहचान देती थी। उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके अधूरे सपनों तथा जनहित के कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

श्रद्धांजलि सभा में केंद्रीय सदस्य इजहार अंसारी, जिला प्रवक्ता कुणाल यादव, सतीश नारायण दास, जिला उपाध्यक्ष दीपक राय, मो. अख्तर, लखीराम मांझी, सत्येंद्र मेहता, अब्दुल्ला खान, राजदेव यादव, दयानंद मेहता, रामा सोनी, राजीव वर्मा, संजय सिंह, राजेश मेहता, देवानंद कुमार, नाजीर अहमद, कुदुस अंसारी, बिनेश पासवान, महताब अंसारी, नवीन प्रकाश, यासीन अंसारी, निसार अहमद, राजकुमार राम, सूलेंद्र बांडो, चंद्रिका रजक, राजेश बेदिया, राजेश यादव, बबलू चंद्रवंशी, पिंटू कुमार, विजय सिन्हा, चंदन सिंह, सुनील कुमार, साजन मेहता, मो. कौशर, कैशर जमाल, सुनीता देवी, श्वेता दूबे, प्यारी देवी, साज़मा खातून, रेखा देवी, नाजनी खातून, भावना देवी, रविंद्र कुशवाहा, समशाद अंसारी, नंदू वीर राम, रंजीत कुमार, नवीन राम, वासुदेव राम, रामचंद्र राम, कुलदीप राम, बीरबल मेहता और गुलाब मेहता समेत सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे। सभी ने दिवंगत नेता के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उनके परिवार के प्रति भी शोक संवेदना प्रकट की।

पूर्व सांसद महावीर लाल विश्वकर्मा आरोग्यम अस्पताल में भर्ती, हर्ष अजमेरा ने ली स्वास्थ्य की जानकारी

हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ समाजसेवी महावीर लाल विश्वकर्मा अस्वस्थ चल रहे हैं। बेहतर चिकित्सा के लिए उन्हें हजारीबाग स्थित आरोग्यम अस्पताल के एमआईसीयू में भर्ती कराया गया है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, चिकित्सकों की टीम उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए हुए है। उनकी स्थिति के अनुसार आवश्यक उपचार एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इसी क्रम में आरोग्यम अस्पताल के निदेशक हर्ष अजमेरा ने एमआईसीयू पहुंचकर महावीर लाल विश्वकर्मा से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों से उनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति एवं चल रहे उपचार के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। साथ ही चिकित्सकों को उनके इलाज और देखभाल में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने देने तथा आवश्यकता के अनुसार बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

महावीर लाल विश्वकर्मा के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी मिलने के बाद उनके शुभचिंतकों, समर्थकों एवं परिचितों में उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी हुई है। लोग उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। आरोग्यम अस्पताल प्रबंधन की ओर से भी उनके जल्द स्वस्थ होकर सकुशल घर लौटने की कामना की गई है।

खुशियों के लिए परिस्थितियां नहीं, सकारात्मक दृष्टिकोण जरूरी : रंजन चौधरी

रंजन चौधरी

सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र

हजारीबाग। जीवन में खुशी केवल परिस्थितियों के अनुकूल होने से नहीं, बल्कि व्यक्ति के दृष्टिकोण से तय होती है। इंसान अक्सर अपनी खुशियों को उन चीजों से जोड़ देता है, जो अभी उसके पास नहीं हैं। उसे लगता है कि कोई इच्छा पूरी हो जाए, कोई मंजिल हासिल हो जाए या परिस्थितियां उसके मनमुताबिक हो जाएं, तभी जीवन सुखी होगा। जबकि वास्तविकता यह है कि संतोष और सकारात्मक सोच के साथ वर्तमान को स्वीकार करना ही जीवन की सच्ची खुशी है।

सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र रंजन चौधरी ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि जीवन में कुछ अधूरे सपने, इच्छाएं, इंतजार और चुनौतियां भी जरूरी हैं। यदि हर चीज मनमुताबिक मिल जाए तो चाहत और जीवन के सफर का अर्थ ही समाप्त हो जाएगा। इसलिए आने वाले कल की खुशियों का इंतजार करने के बजाय वर्तमान में उपलब्ध सुख को महसूस करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति को जहां रहे, वहां पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए। कर्मों में नेकी, व्यवहार में विनम्रता और रिश्तों में सम्मान का भाव बनाए रखना जरूरी है। बुजुर्गों का सम्मान, हमउम्रों के साथ सद्भाव और छोटों के प्रति स्नेह ही व्यक्ति के वास्तविक चरित्र की पहचान है। इंसान की पहचान उसके पद, प्रतिष्ठा या संपत्ति से नहीं, बल्कि उसके कर्म और व्यवहार से होती है।

रंजन चौधरी ने कहा कि जीवन में जो भी जिम्मेदारी मिले, उसे बोझ नहीं बल्कि अवसर समझकर पूरे मन से निभाना चाहिए। आधे मन से किया गया कार्य सफलता तो दे सकता है, लेकिन आत्मसंतोष नहीं दे सकता। ईश्वर पर आस्था, प्रकृति के प्रति प्रेम और नियति पर विश्वास व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की शक्ति देता है।

उन्होंने कहा कि हर प्रश्न का उत्तर तुरंत मिलना और हर रास्ते का आसान होना जरूरी नहीं है। कई बार देर से मिलने वाला उत्तर ही जीवन का सबसे बड़ा सबक बन जाता है। इसी तरह तन की स्वच्छता के साथ मन को नकारात्मकता, ईर्ष्या और द्वेष से मुक्त रखना भी आवश्यक है। सकारात्मक मन वाला व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी रास्ता खोज लेता है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि जीवन में जो मिला, उसके लिए आभार रखें और जो नहीं मिला, उसके लिए शिकायतों का बोझ न ढोएं। संतोष का अर्थ प्रयास छोड़ देना नहीं, बल्कि आगे बढ़ते हुए वर्तमान की खुशियों को महसूस करना है।

उन्होंने कहा कि जीवन में हर दिन उत्सव नहीं होता। कभी धूप तो कभी छांव, कभी प्रशंसा तो कभी आलोचना और कभी अपनों का साथ तो कभी दूरी का एहसास होता है। इन परिस्थितियों के बीच यदि विश्वास, संयम और सकारात्मकता कायम रहे तो यही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।

रंजन चौधरी के अनुसार, असली खुशी तब नहीं है जब जीवन में कोई कमी न हो, बल्कि तब है जब कमियों के बावजूद मन में संतोष, संघर्षों के बावजूद उम्मीद और परिस्थितियों के बावजूद चेहरे पर मुस्कान बनी रहे। जीवन का सौंदर्य सब कुछ पा लेने में नहीं, बल्कि जो मिला उसे प्रेम से जीने, जो नहीं मिला उसे सहजता से स्वीकार करने और आने वाले कल पर विश्वास रखने में है।

उन्होंने कहा कि कर्म करते रहना, रिश्ते निभाते रहना, मुस्कुराते रहना और हर परिस्थिति में भीतर की सकारात्मकता को बनाए रखना ही सफल जीवन का सार है। हर इच्छा का पूरा होना जरूरी नहीं, बल्कि मन का शांत होना जरूरी है। हर मंजिल मिलना जरूरी नहीं, बल्कि जीवन का सफर सार्थक होना जरूरी है।

सुदिव्य कुमार सोनू की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा आयोजित

हजारीबाग। रामजानकी मठ बड़ा अखाड़ा परिसर में झारखंड सरकार के दिवंगत मंत्री एवं गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

कार्यक्रम की अगुवाई बड़ा अखाड़ा के पुजारी आनंद प्रकाश पांडेय ने की। श्रद्धांजलि सभा में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला प्रवक्ता कुणाल यादव उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में झामुमो अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष रोमी सलूजा एवं महिला नेत्री श्वेता दूबे मौजूद रहीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, श्रद्धालु एवं स्थानीय नागरिकों ने शामिल होकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर झामुमो जिला प्रवक्ता कुणाल यादव ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू का असामयिक निधन झारखंड की राजनीति और सामाजिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू संघर्षशील और जुझारू नेता थे तथा जनहित से जुड़े मुद्दों को मुखरता से उठाते थे। उन्होंने गरीबों, किसानों, मजदूरों, युवाओं और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया। मंत्री के रूप में उन्होंने राज्य के विकास एवं जनकल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की। उनका सरल व्यक्तित्व और कार्यकर्ताओं के प्रति आत्मीय व्यवहार उन्हें हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रखेगा।

झामुमो अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष रोमी सलूजा ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू ने अपने राजनीतिक जीवन में जनता की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। वे आम लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए सदैव तत्पर रहते थे। उनका निधन झारखंड के लिए बड़ी क्षति है। उनके विचार, संघर्ष और जनसेवा की भावना आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए उनका जीवन समर्पण और प्रतिबद्धता का आदर्श उदाहरण है।

महिला नेत्री श्वेता दूबे ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू एक संवेदनशील और दूरदर्शी जननेता थे। उन्होंने महिलाओं, युवाओं एवं समाज के कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य किया। अपने व्यवहार, सादगी और कार्यशैली के कारण वे सभी वर्गों में लोकप्रिय थे। उनका निधन अत्यंत दुखद है। झारखंड ने एक ऐसे जनप्रतिनिधि को खो दिया, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है।

सभा के अंत में उपस्थित लोगों ने दिवंगत मंत्री के अधूरे सपनों को पूरा करने तथा उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज और राज्य के विकास के लिए कार्य करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन शोक संवेदना एवं दिवंगत आत्मा की शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना के साथ हुआ।

इस मौके पर झामुमो जिला सह सचिव राजदेव यादव, बादल राज, वीरेंद्र कुमार दूबे, रंजीत कुमार राम, नवीन कुमार, संदीप कुमार दास समेत कई अन्य लोग उपस्थित थे।

बरही में सांसद खेल महोत्सव-2026 का आगाज, नमो फुटबॉल नॉक आउट मैच में 50 टीमों ने लिया हिस्सा

हजारीबाग। हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल की पहल पर सांसद खेल महोत्सव-2026 के तहत आयोजित नमो फुटबॉल नॉक आउट मैच का मंगलवार को बरही प्रखंड मैदान में शुभारंभ हुआ। प्रतियोगिता में बरही प्रखंड क्षेत्र की कुल 50 टीमों ने पंजीकरण कराया है। उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में खिलाड़ी, खेलप्रेमी और दर्शक मौजूद रहे।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि बरही विधायक मनोज कुमार यादव ने किया। उन्होंने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया और मशाल जलाकर खेल भावना एवं युवाओं को खेल से जोड़ने का संकल्प लिया। इसके बाद नमो जर्सी पहने सैकड़ों खिलाड़ियों ने मशाल के साथ मार्च पास्ट किया। विधायक ने फुटबॉल में किक मारकर प्रतियोगिता का विधिवत शुभारंभ किया। इस दौरान खिलाड़ियों और खेलप्रेमियों के साथ सामूहिक रूप से नशामुक्ति का संकल्प भी लिया गया।

उद्घाटन समारोह की शुरुआत सामूहिक राष्ट्रगान से हुई। वहीं, विभिन्न टीमों के खिलाड़ियों का रंग-बिरंगी नमो जर्सी में मार्च पास्ट आकर्षण का केंद्र रहा।

उद्घाटन मैच अंबेडकर क्लब बाराटांड़ और एफसी बुल 11 क्लब छोटकी केवाल के बीच खेला गया। मुकाबले में अंबेडकर क्लब बाराटांड़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 1-0 से जीत दर्ज की।

इस अवसर पर विधायक मनोज कुमार यादव ने सांसद मनीष जायसवाल की पहल की सराहना करते हुए कहा कि पूरे हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र में लगभग 60 हजार खिलाड़ियों का महासंगम हो रहा है। उन्होंने कहा कि खेल महोत्सव के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं—युवाओं को मैदान से जोड़ना, प्रतिभावान खिलाड़ियों को प्रोत्साहित कर बेहतर मंच उपलब्ध कराना और युवाओं को नशे से दूर रखना।

उन्होंने खिलाड़ियों से खेल भावना के साथ प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने की अपील की। साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के युवाओं को आगे बढ़ाने के संकल्प को पूरा करने की दिशा में सांसद खेल महोत्सव महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।

कार्यक्रम में जिप उपाध्यक्ष किशुन यादव, विधानसभा प्रतिनिधि मुकुंद साव, नमो खेल श्रृंखला संयोजक बंटी तिवारी, जिप प्रतिनिधि गुरुदेव गुप्ता, सांसद प्रतिनिधि मणिलाल यादव समेत कई जनप्रतिनिधि, भाजपा नेता, कार्यकर्ता और खेलप्रेमी मौजूद रहे। मंच संचालन गुरुदेव गुप्ता और संजय दुबे ने संयुक्त रूप से किया।