अब हर सप्ताह होगी एनीमिया की निगरानी
- गंभीर मामलों में मिलेगा एफसीएम व ब्लड ट्रांसफ्यूजन की सुविधा
- जुलाई में मंडल की 12500 गर्भवती महिलाओं में मिला गंभीर एनीमिया
- 93 फीसदी से अधिक को मिला उपचार
गोण्डा, 06 सितंबर 2026: गर्भवती व धात्री महिलाओं में गंभीर एनीमिया की पहचान और उपचार को लेकर अब स्वास्थ्य विभाग साप्ताहिक निगरानी करेगा। महानिदेशक, परिवार कल्याण की ओर से जारी निर्देशों के बाद देवीपाटन मंडल के चारों जिलों में एनीमिया के गंभीर मामलों की पहचान, उपचार और रिपोर्टिंग की नियमित समीक्षा की जाएगी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई में मंडल में 4.19 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच हुई। इनमें 2.81 लाख यानी 67.30 फीसदी महिलाओं का हीमोग्लोबिन परीक्षण किया गया। जांच में 12,500 महिलाएं गंभीर एनीमिया से ग्रसित मिलीं। इनमें से 11,654 यानी 93.23 फीसदी महिलाओं को उपचार मिला। मंडलीय कार्यक्रम प्रबंधक (एनएचएम) राहुल पटेल ने बताया कि उपचार से छूटे शेष मामलों की पहचान के लिए अब साप्ताहिक स्तर पर आंकड़ों की निगरानी की जाएगी।
जिलेवार आंकड़ों में श्रावस्ती में गंभीर एनीमिया के उपचार की दर सबसे बेहतर 97.14 फीसदी रही। बलरामपुर में 93.98 फीसदी, बहराइच में 102.83 फीसदी और गोण्डा में 83.13 फीसदी महिलाओं का उपचार हुआ। उपचार की संख्या बलरामपुर में 4,010, बहराइच में 3,230, गोण्डा में 3,159 और श्रावस्ती में 1,255 रही। अधिकारियों के अनुसार बहराइच में 100 फीसदी से अधिक उपचार दर दूसरे स्थानों से रेफर होकर आई महिलाओं के उपचार के कारण रही।
गंभीर एनीमिया में एफसीएम और ब्लड ट्रांसफ्यूजन की सुविधा -
मंडलीय प्रबंधक ने बताया कि गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए जिला महिला/संयुक्त चिकित्सालयों और एफआरयू-सीएचसी पर फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन की सुविधा दी जा रही है। इसके लिए चिकित्सकों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। वहीं मैटरनल एनीमिया मैनेजमेंट सेंटर के माध्यम से जरूरत के अनुसार आईवी आयरन सुक्रोज और ब्लड ट्रांसफ्यूजन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
हर शुक्रवार होगी रिपोर्टिंग-
प्रभारी अपर निदेशक व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतलाल पटेल ने बताया कि हाल ही में जारी शासन के निर्देशों के अनुसार अब एनीमिया उपचार की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी। सभी जिलों से लाभार्थियों का विवरण संबंधित अभिलेखों से सत्यापित कर संकलित किया जाएगा। हर शुक्रवार यूपीटीएसयू के सहयोग से निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य इकाइयों से नियमित रूप से उपचार की जानकारी लेने के साथ हर माह जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में आंकड़ों की समीक्षा होगी। इससे उपचार में देरी वाले मामलों और स्वास्थ्य इकाइयों की जरूरतों की पहचान कर समय पर सुधारात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।
Sep 08 2026, 17:33
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