मंत्री ने बलिया मोड़, गाजीपुर तिराहा, बस स्टैंड व मिर्ज़ाहादीपुर में विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का किया शुभारंभ

- नागरिकों की सुविधा-सहूलियत के लिए विकास कार्यों में नहीं आने दी जाएगी कोई कमी: ए. के. शर्मा

- मऊ में विकास की नई तस्वीर, प्रमुख स्थलों पर सौंदर्यीकरण और प्रकाश व्यवस्था से बढ़ेगी शहर की सुंदरता

लखनऊ। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने मऊ जनपद में कल देर शाम विभिन्न विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने बलिया मोड़ तिराहा स्थित पटेल उपवन में सरदार वल्लभभाई पटेल जी की प्रतिमा के आसपास कराए गए विकास कार्यों, गाजीपुर तिराहा स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की प्रतिमा के आसपास के सौंदर्यीकरण कार्यों, मऊ बस स्टैंड स्थित स्व. अलगू राय शास्त्री जी की प्रतिमा स्थल तथा मिर्ज़ाहादीपुर चौक पर स्थापित भव्य ट्राई कलर मिरर एवं कॉलम लाइट का शुभारंभ किया।

मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि मऊ शहर को स्वच्छ, सुंदर, सुरक्षित और आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाने की दिशा में विकास कार्य निरंतर जारी रहेंगे। शहर के प्रमुख चौराहों, मार्गों और सार्वजनिक स्थलों का योजनाबद्ध तरीके से विकास एवं सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है, जिससे नागरिकों को बेहतर वातावरण के साथ-साथ सुविधाजनक और आकर्षक सार्वजनिक स्थल उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि महापुरुषों की प्रतिमाएं हमारी प्रेरणा और गौरव का प्रतीक हैं। ऐसे स्थलों का विकास एवं सौंदर्यीकरण केवल शहर की सुंदरता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे नई पीढ़ी को महापुरुषों के जीवन, संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान से परिचित कराने का भी अवसर मिलता है।

नगर विकास मंत्री ने कहा कि सरकार का मूल उद्देश्य नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और शहरों में ऐसा वातावरण तैयार करना है, जिसमें लोगों को आवागमन, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं के स्तर पर किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए नगरीय क्षेत्रों में लगातार विकास कार्य कराए जा रहे हैं।

मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के शहरों को आधुनिक, स्वच्छ, सुंदर और नागरिक सुविधाओं से युक्त बनाने का अभियान निरंतर आगे बढ़ रहा है। मऊ भी इसी विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और आने वाले समय में यहां और अधिक विकास कार्य दिखाई देंगे।

महोबा में तीन बच्चों की पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबने से मौत


लखनऊ /महोबा। उत्तर प्रदेश में महोबा जिले के चरखारी क्षेत्र में रविवार दोपहर नहाने गए तीन मासूम बच्चे खेलते-खेलते पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में समा गए, जिसमें डूबने से तीनों की मौत हो गई। देर रात एक-एक कर तीनों के शव पानी से बाहर निकाले गए तो पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। पुलिस मामले की जांच में जुट गई।

चरखारी क्षेत्राधिकारी दीपक दुबे ने रविवार की देर रात बताया कि थाना चरखारी क्षेत्र के रिवई गांव में तीन बच्चे प्रिंस (15) पुत्र मनोज अहिरवार, रोशनी (11) पुत्री जियालाल और अंशुल (10) पुत्र खलक अहिरवार की नहाने के दौरान गहरे पानी में चले जाने के कारण डूब जाने की सूचना मिली। इस पर थाना पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुँचकर स्थानीय गोताखोरों की मदद से तीनों बच्चों की तलाश कर उन्हें बाहर निकाला। तीनों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चरखारी ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हे मृत घोषित कर दिया गया।

परिवार से पता चला है कि तीनों बच्चें रविवार दोपहर गांव के ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज के पीछे बने गड्ढे में भरे पानी में नहाने गए थे। तीनों रोजाना वहां मछली पकड़ने भी जाते थे। रविवार को भी गए और देर शाम तक जब तीनों बच्चे घर नहीं लौटे तो परिजनों को चिंता हुई। खोजबीन की गई, लेकिन कोई पता नहीं चल सका। देर रात गांव के लोगों ने गड्ढे में एक शव उतराता देखा, जिसकी सूचना ग्रामीणों ने पुलिस को दी।

सूचना पर चरखारी थाना प्रभारी राहुल मिश्रा ने पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच कर स्थानीय गोताखोरों की मदद से प्रिंस को बाहर निकाल उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चरखारी भेजा। इसके बाद दुबे अन्य दो बच्चों की तलाश की तो वह भी उसी गहरे गड्ढे में मिले। लगभग आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रोशनी और अंशुल को उसी गड्ढे से बाहर निकाल कर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। पुलिस अब मामले की जांच में जुट गई हैं।

सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में कांग्रेस एक्टिव

- प्रदेश अध्यक्ष अजय राय आज पहुंचेंगे सहारनपुर, मस्जिद कमेटी के सदस्यों से करेंगे मुलाकात

लखनऊ। सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के मामले को लेकर कांग्रेस ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय आज सहारनपुर जाएंगे। वह शाम करीब 5 बजे सहारनपुर पहुंचेंगे और मस्जिद कमेटी के सदस्यों से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी लेंगे।

अजय राय मस्जिद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी लेने के साथ स्थानीय लोगों और संबंधित पक्षों से भी बातचीत कर सकते हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के दौरे को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर पार्टी की सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा है।

पार्टी के मुताबिक, अजय राय मौके की स्थिति और अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी लेने के बाद इस मामले को लेकर कांग्रेस का पक्ष सामने रख सकते हैं।

92 साल के रस्किन बॉन्ड से मिलने लखनऊ की अद्रिका पहुंची देहरादून

- स्पाइन सर्जरी के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे साहित्यकार ने बच्ची की किताब पर लिखा—‘Keep writing!’

लखनऊ/देहरादून। किताबों की दुनिया में कुछ मुलाकातें उम्र और पहचान की सीमाओं से कहीं आगे निकल जाती हैं। लखनऊ की बच्ची अद्रिका उमराव के लिए ऐसी ही यादगार मुलाकात तब हुई, जब वह भारत के बेहद लोकप्रिय साहित्यकार रस्किन बॉन्ड से मिलने देहरादून पहुंची। 92 वर्ष की उम्र में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे बॉन्ड ने न केवल बच्ची से मुलाकात की, बल्कि उसकी किताब देखकर उसे अपने हाथ से शुभकामना भी दी।

कुछ महीने पहले स्पाइन की सर्जरी के बाद रस्किन बॉन्ड इन दिनों देहरादून में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। शारीरिक दिक्कतों के बावजूद जब अद्रिका उनसे मिलने पहुंची तो उन्होंने उसके साथ समय बिताया और उसकी किताब पर अपने हाथ से संदेश लिखा—

“Dear Adrika,

Congratulations on your book.

Keep writing!

Ruskin Bond

6/9/26”

छोटा-सा यह संदेश अद्रिका के लिए किसी बड़े सम्मान से कम नहीं। जिस लेखक की कहानियों ने भारत में कई पीढ़ियों के बचपन को संवारा, उसी साहित्यकार का एक उभरती लेखिका से कहना—‘लिखते रहो’—अपने आप में एक खूबसूरत साहित्यिक आशीर्वाद है।

- 17 साल की उम्र में लिखी थी पहली किताब

रस्किन बॉन्ड ने महज 17 वर्ष की उम्र में अपना पहला उपन्यास ‘The Room on the Roof’ लिखा था। वर्ष 1957 में इस कृति के लिए उन्हें प्रतिष्ठित John Llewellyn Rhys Memorial Prize मिला। इसके बाद उनका लेखन लगातार आगे बढ़ता रहा। उन्होंने कहानियों, निबंधों, उपन्यासों और बाल साहित्य की अनेक पुस्तकों के जरिए भारतीय साहित्य में अपनी अलग पहचान बनाई।

‘The Blue Umbrella’, ‘Our Trees Still Grow in Dehra’, ‘A Flight of Pigeons’ और ‘The Adventures of Rusty’ उनकी चर्चित कृतियों में शामिल हैं। खास तौर पर Rusty का किरदार बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय रहा है।

- पहाड़, बारिश और छोटे शहर बने उनकी कहानियों की दुनिया

रस्किन बॉन्ड के साहित्य की सबसे खास बात उनकी सहज और सरल भाषा है। पेड़-पौधे, बारिश, पहाड़, जानवर, बचपन, दोस्ती और छोटे शहरों के आम लोग उनकी कहानियों में बेहद आत्मीयता के साथ दिखाई देते हैं।

देहरादून और मसूरी उनके साहित्यिक संसार के महत्वपूर्ण हिस्से रहे हैं। उनके लेखन में पहाड़ों की खूबसूरती के साथ-साथ वहां का सामान्य जीवन, छोटे कस्बों की गलियां और प्रकृति के साथ इंसान का रिश्ता बार-बार उभरता है।

उनकी पुस्तक ‘Our Trees Still Grow in Dehra’ में देहरादून और गढ़वाल क्षेत्र से जुड़े अनुभवों की झलक मिलती है, जबकि ‘The Adventures of Rusty’ में देहरादून में अपने दादा-दादी के साथ रहने वाले Rusty की दुनिया को केंद्र में रखा गया है।

- पुरस्कारों से कहीं बड़ी है पाठकों की दुनिया

रस्किन बॉन्ड को वर्ष 1992 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1999 में पद्मश्री और 2014 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। उन्हें 2021 में साहित्य अकादमी फेलोशिप भी मिली।

हालांकि, बॉन्ड की सबसे बड़ी उपलब्धि उनके पुरस्कारों से ज्यादा उनके पाठकों के बीच उनकी लोकप्रियता है। उनकी कहानियों में पाठक अपने बचपन, बारिश, पहाड़, पेड़ और आसपास के साधारण लोगों की झलक महसूस करते हैं।

उम्र के इस पड़ाव पर उनकी शारीरिक सक्रियता भले सीमित हुई हो, लेकिन लेखन से उनका रिश्ता अब भी कायम है। हालिया जानकारी के मुताबिक दृष्टि कमजोर होने के कारण अब वे अपनी रचनाएं स्वयं लिखने के बजाय पोती को बोलकर लिखवाते हैं। मई 2026 में उनके 92वें जन्मदिन के मौके पर ‘All-Time Favourite Friendship Stories’ भी प्रकाशित हुई।

और अद्रिका के साथ हुई यह मुलाकात शायद इसी निरंतरता की सबसे खूबसूरत तस्वीर है—एक ओर 92 साल का वह लेखक, जिसने अपना जीवन शब्दों को समर्पित कर दिया, और दूसरी ओर लेखन की दुनिया में कदम रखती एक बच्ची। बॉन्ड ने अद्रिका को कोई लंबा भाषण नहीं दिया।

बस उसकी किताब पर लिखा—“Congratulations on your book. Keep writing!”

कभी-कभी साहित्य की सबसे बड़ी सीख बस इतनी ही होती है—लिखते रहो।

2027 से पहले कांग्रेस का अल्पसंख्यक संगठन पर फोकस, हसीब खान को 15 जिलों की कमान


लखनऊ। 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने अपने अल्पसंख्यक संगठन को सक्रिय करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। पार्टी ने मुस्लिम नेता हसीब खान को उत्तर प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त करने के साथ ही पूर्वी जोन के 15 जिलों का प्रभारी बनाया है।

अल्पसंख्यक विभाग के चेयरमैन सोहिल अख्तर अंसारी की ओर से जारी जिम्मेदारी के तहत हसीब खान को बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, जौनपुर, आजमगढ़, वाराणसी, गाजीपुर और सुल्तानपुर समेत कुल 15 जिलों की संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कांग्रेस के इस कदम को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी इन जिलों में संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़ाने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क मजबूत करने पर जोर दे रही है।

कांग्रेस में शामिल होने के बाद हसीब खान को मिली इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को संगठन में उनके बढ़ते कद से जोड़कर देखा जा रहा है। नई जिम्मेदारी मिलने पर हसीब खान ने कांग्रेस नेतृत्व का आभार जताया। उन्होंने अजय राय, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गांधी के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी ने जो भरोसा जताया है, उसे पूरी जिम्मेदारी और निष्ठा के साथ निभाने का प्रयास करेंगे।

उन्होंने कहा कि संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना और पार्टी की नीतियों एवं कार्यक्रमों को आम लोगों तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी।

कांग्रेस की ओर से पूर्वी उत्तर प्रदेश के 15 जिलों में संगठनात्मक जिम्मेदारी का यह फेरबदल ऐसे समय हुआ है, जब सभी प्रमुख राजनीतिक दल 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर रहे हैं।

सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
जिला अदालत के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में छह बुलडोजर से हटाया गया निर्माण

लखनऊ /सहारनपुर। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने छह बुलडोजर का इस्तेमाल करके सहारनपुर कलेक्ट्रेट के अंदर बनी एक मस्जिद को गिरा दिया है। यह ध्वस्तीकरण कार्रवाई जिला अदालत के उस फैसले के बाद की गई, जिसमें सरकारी जमीन पर बनी इस इमारत को अवैध घोषित करने वाले बेदखली के आदेश को सही ठहराया गया था।

आईएएनएस से बातचीत करते हुए डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा, "सहारनपुर जिले में जिला कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर सरकारी जमीन पर एक अवैध निर्माण पाया गया था, जिसके बारे में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने पहली अपील दायर की थी। उनकी अपील खारिज कर दी गई है और सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा गया है। इसी आदेश के तहत, इस अवैध निर्माण को गिराने का काम किया जा रहा है।"

डीआईजी अभिषेक सिंह की ओर से बताया गया कि प्रशासन की ओर से जितने भी लीगल रिस्पॉन्सिबिलिटी थी, उसको पूरा किया है। कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत ही कार्रवाई की जा रही है। त्योहारों और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पीएसी और आरएएफ मिली है।

बता दें कि कैराना की सांसद इकरा हसन को पुलिस ने नजरबंद कर दिया था। सांसद इकरा हसन कलेक्ट्रेट मस्जिद के मुद्दे पर सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं। उनकी मां और पूर्व सांसद तबस्सुम हसन ने इस कार्रवाई की आलोचना की और कहा कि उनका परिवार जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है।

सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, "देखिए, बात सिर्फ मस्जिद की नहीं है, देश के कानून और संविधान का उल्लंघन हो रहा है। आप यह साबित नहीं कर सकते कि जमीन आपकी है। खसरा रिकॉर्ड के आधार पर आपने दावा किया है कि यह सरकारी कलेक्ट्रेट की जमीन है। लेकिन कलेक्ट्रेट की जमीन आज भी वहीद खान और याकूब खान के नाम पर दर्ज है, जिनकी जमींदारी के भीतर मस्जिद बनाई गई थी। यह अभी भी कायम है।"

इमरान मसूद ने आगे कहा, "मस्जिद वक्फ बोर्ड के साथ पंजीकृत है, लेकिन आपने वक्फ बोर्ड को पार्टी नहीं बनाया। जहां तक वक्फ बाय यूजर का सवाल है, मैं जेपीसी का सदस्य था, और वक्फ बाय यूजर स्थापित करता है कि यह एक मस्जिद है, वहां लगातार नमाज अदा की जाती रही है और ये सभी गतिविधियां होती रही हैं।''
पुलिस लाइन में सीएम योगी ने किया श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह का शुभारंभ
भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत
डीजीपी ने भेंट की कामधेनु-बछड़े की प्रतिमा,पुलिस अधिकारियों ने उनका स्वागत किया
जन्माष्टमी को लेकर उत्साह और भक्ति का माहौल रहा
लखनऊ। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर लखनऊ की रिजर्व पुलिस लाइन में भव्य सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिजनों ने उत्साह एवं श्रद्धा के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में सहभागिता की।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम में पहुंचने पर पुलिस अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया और जन्माष्टमी समारोह के औपचारिक शुभारंभ की घोषणा की। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनके आदर्शों और कर्मयोग के संदेश को प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश राजीव कृष्ण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। इसके साथ ही स्मृति-चिह्न के रूप में कामधेनु और बछड़े की आकर्षक प्रतिमा भी भेंट की गई। मुख्यमंत्री ने इस सम्मान को स्वीकार किया।कार्यक्रम में पुलिस परिवार के अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिजनों की मौजूदगी रही। जन्माष्टमी के अवसर पर रिजर्व पुलिस लाइन परिसर में उत्सव और भक्ति का माहौल नजर आया।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पुलिस विभाग के समस्त अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिवारजनों को भी जन्माष्टमी की शुभकामनाएं प्रेषित कीं।मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेश को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश भी देखने को मिला।रिजर्व पुलिस लाइन लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के बाद पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश राजीव कृष्ण महानगर स्थित पुलिस टेलीकॉम मुख्यालय पहुंचे। यहां भी श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था। डीजीपी ने कार्यक्रम में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया और पुलिसकर्मियों एवं उनके परिवारजनों को पर्व की शुभकामनाएं दीं।इस दौरान उन्होंने प्रदेश के समस्त पुलिस कर्मियों और उनके परिवारजनों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। पुलिस टेलीकॉम मुख्यालय में भी जन्माष्टमी को लेकर उत्साह और भक्ति का माहौल रहा।श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर लखनऊ पुलिस लाइन से लेकर पुलिस टेलीकॉम मुख्यालय तक धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए पर्व को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रमों में पुलिस परिवार की भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया।
35वीं वाहिनी पीएसी में धूमधाम से मनी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

मध्यरात्रि में कान्हा का प्राकट्य, पूजन-आरती के साथ गूंजे भजन-कीर्तन; पुलिसकर्मियों और परिजनों ने लिया आशीर्वाद

लखनऊ। महानगर स्थित 35वीं वाहिनी पीएसी परिसर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भव्य एवं भक्तिमय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक पीएसी, उत्तर प्रदेश आलोक सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, अधिकारी-कर्मचारियों और उनके परिजनों ने श्रद्धा एवं उत्साह के साथ भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया।

कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद बृजलाल, पुलिस महानिदेशक रेलवे/जीआरपी उत्तर प्रदेश प्रकाश डी., अपर पुलिस महानिदेशक पावर कॉरपोरेशन उत्तर प्रदेश डॉ. रामकृष्ण स्वर्णकार, पुलिस महानिरीक्षक पीएसी मध्य जोन लखनऊ डॉ. प्रीतिंदर सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक पीएसी लखनऊ अनुभाग किरीट राठोड़, पुलिस उपमहानिरीक्षक भवन/कल्याण मोहम्मद इमरान, 35वीं वाहिनी पीएसी के सेनानायक अमित कुमार तथा सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक डॉ. सूर्य कुमार शुक्ल समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की मनोहारी झांकी सजाई गई

जन्माष्टमी के अवसर पर वाहिनी परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की मनोहारी झांकी सजाई गई। झांकी ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम के दौरान भजन, कीर्तन और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं और उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण स्मरण किया।भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की प्रतीक्षा में कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और उमंग देखने को मिली। जैसे-जैसे मध्यरात्रि नजदीक आई, भक्तों का उत्साह बढ़ता गया।

श्रीकृष्ण के जन्म के बाद विधि-विधान से पूजन और आरती की गई

मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद विधि-विधान से पूजन और आरती की गई। इस दौरान मौजूद श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया।इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी पुलिसकर्मियों और उनके परिवारजनों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया। अधिकारियों ने धर्म, कर्तव्य, सत्य और कर्मयोग के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन कर्तव्यनिष्ठा और कर्म के प्रति समर्पण का संदेश देता है।

वाहिनी परिसर में देर रात तक भक्तिमय माहौल बना रहा

जन्माष्टमी समारोह के दौरान वाहिनी परिसर में देर रात तक भक्तिमय माहौल बना रहा। भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में पुलिसकर्मियों के परिवारजनों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के बाद श्रद्धालुओं ने आरती में भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया।कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण के साथ हुआ। पूरी वाहिनी परिसर में श्रद्धा, उल्लास और भक्ति का वातावरण नजर आया। पुलिसकर्मियों और उनके परिजनों ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को हर्षोल्लास के साथ मनाते हुए सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।

मथुरा से 2027 का सियासी बिगुल! योगी के ‘विजय संकल्प’ के सामने अखिलेश की चुनौती

ब्रजभूमि में धर्म, विकास और राजनीति का संगम; भाजपा के सामने सत्ता बरकरार रखने की चुनौती, विपक्ष तलाश रहा वापसी का रास्ता

राम आशीष गोस्वामी

उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन उसकी आहट तेज होने लगी है। श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘विजय संकल्प’ वाला संदेश ऐसे समय आया है, जब प्रदेश की राजनीति धीरे-धीरे अगले विधानसभा चुनाव की दिशा में बढ़ रही है। मंच पर ‘राधे-राधे’ का उद्घोष, विकास परियोजनाओं का जिक्र और सत्ता में वापसी का आत्मविश्वास—इन सबने मथुरा के कार्यक्रम को महज सरकारी आयोजन से आगे राजनीतिक संकेतों का विषय बना दिया है।

ब्रजभूमि की धार्मिक पहचान और उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति का यह मेल भाजपा की रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा सकता है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने चुनौती है कि वे भाजपा के मजबूत संगठन और सांस्कृतिक मुद्दों के बीच अपने राजनीतिक एजेंडे को किस तरह जनता तक पहुंचाते हैं।

मथुरा से संदेश कितना राजनीतिक, कितना सांस्कृतिक?

मथुरा भाजपा के लिए केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। कृष्ण जन्मभूमि, वृंदावन, बरसाना और गोवर्धन की धार्मिक पहचान को विकास और पर्यटन से जोड़ने की कोशिश लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रही है। योगी आदित्यनाथ के भाषणों में भी विरासत और विकास का यह मेल लगातार दिखाई देता है। मथुरा में विकास परियोजनाओं के साथ ब्रज की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को प्रमुखता देना इसी व्यापक राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा माना जा सकता है।

यहीं से 2027 की राजनीति का एक अहम सवाल निकलता है—क्या सांस्कृतिक मुद्दे और विकास का मॉडल भाजपा को फिर से मजबूत बढ़त दिला पाएगा, या विपक्ष सामाजिक और आर्थिक मुद्दों के सहारे चुनावी समीकरण बदलने में सफल होगा? 2027 का चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए महज सत्ता में वापसी का चुनाव नहीं होगा। यह उनके शासन मॉडल, कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों और हिंदुत्व आधारित राजनीतिक छवि की जनता के बीच स्वीकार्यता का भी परीक्षण होगा।

भाजपा के पास संगठन की मजबूत मशीनरी, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का आधार तथा मुख्यमंत्री का स्थापित राजनीतिक चेहरा है। ऐसे में पार्टी के लिए चुनौती अपने समर्थक आधार को बनाए रखने के साथ-साथ अलग-अलग सामाजिक वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत करना होगी। मथुरा से निकला ‘विजय’ का संदेश इसी आत्मविश्वास को दर्शाता है, लेकिन चुनावी मैदान में राजनीतिक दावे तभी परिणाम में बदलते हैं, जब वे मतदाता की प्राथमिकताओं से जुड़ते हैं।

अखिलेश के सामने भाजपा के नैरेटिव का जवाब देने की चुनौती

समाजवादी पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वह 2027 में किस मुद्दे और किस सामाजिक समीकरण के साथ भाजपा को चुनौती देगी। अखिलेश यादव के पास पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की रणनीति है। इसके साथ रोजगार, किसानों की समस्याएं, महंगाई, युवाओं की अपेक्षाएं और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे विपक्ष के प्रमुख हथियार हो सकते हैं। लेकिन केवल सरकार विरोधी माहौल के भरोसे चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। सपा को मतदाताओं के सामने ऐसा वैकल्पिक राजनीतिक एजेंडा रखना होगा, जो भाजपा के सांस्कृतिक और विकास संबंधी नैरेटिव का प्रभावी जवाब दे सके।

आस्था के बीच राजनीति का नया रंग

उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक प्रतीकों की भूमिका नई नहीं है। कृष्ण की मथुरा हो या अयोध्या, काशी और अन्य धार्मिक केंद्र—आस्था हमेशा से राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करती रही है।

नीम करोली बाबा और हनुमान भक्ति से जुड़े संदर्भ भी इसी व्यापक आध्यात्मिक विमर्श को एक नया आयाम देते हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषण में यह अंतर बनाए रखना जरूरी है कि धार्मिक आस्था और चुनावी निर्णय एक ही चीज नहीं हैं। मतदाता मंदिर में श्रद्धालु हो सकता है, लेकिन मतदान केंद्र पर उसका फैसला स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवार, सरकार के कामकाज, सामाजिक समीकरण और व्यक्तिगत अनुभवों समेत कई कारकों से प्रभावित हो सकता है।

2027 की लड़ाई में आमने-सामने होंगे दो अलग नैरेटिव

आगामी विधानसभा चुनाव की तस्वीर को मोटे तौर पर दो अलग राजनीतिक दृष्टिकोणों के बीच मुकाबले के रूप में देखा जा सकता है।

एक ओर भाजपा अपने विकास, कानून-व्यवस्था, सांस्कृतिक विरासत और हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ा सकती है। दूसरी ओर सपा सामाजिक न्याय, पीडीए, रोजगार, किसान और महंगाई जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर चुनावी मैदान तैयार कर सकती है।

लेकिन चुनाव का वास्तविक परिणाम इन नैरेटिव से आगे जाकर तय होगा। कौन-सा मुद्दा मतदाता को ज्यादा प्रभावित करता है, किस दल का संगठन बूथ स्तर तक प्रभावी रहता है और कौन गठबंधन या सामाजिक समीकरणों को बेहतर तरीके से साध पाता है—ये सभी निर्णायक कारक होंगे।

मथुरा से शुरू हुई हलचल का अगला पड़ाव कहां?

मथुरा से उठी चुनावी हलचल अब प्रदेश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचने की संभावना है। पश्चिमी यूपी से लेकर अवध, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और मध्य यूपी तक राजनीतिक दल अपने-अपने मुद्दों के साथ जनता के बीच जाने की तैयारी करेंगे। भाजपा जहां सत्ता में अपनी पकड़ बनाए रखने की रणनीति पर आगे बढ़ेगी, वहीं विपक्ष के सामने सत्ता परिवर्तन के लिए व्यापक सामाजिक आधार तैयार करने की चुनौती होगी। आखिरकार 2027 की लड़ाई किसी एक मंच, नारे या धार्मिक प्रतीक से तय नहीं होगी। चुनावी मैदान में राजनीतिक दल अपने-अपने दावे रखेंगे, लेकिन अंतिम निर्णय जनता के हाथ में होगा।

मथुरा से सियासी संकेत जरूर मिल गया है। अब देखना यह है कि 2027 के चुनावी रण में भाजपा अपने विजय अभियान को आगे बढ़ा पाती है या अखिलेश यादव विपक्ष की चुनौती को सत्ता परिवर्तन की ताकत में बदल पाते हैं।

चित्रकूट में मंदाकिनी का जलस्तर घटा, 688 लोगों का रेस्क्यू; राहत-बचाव अभियान जारी

- 36 गांवों में 13,906 प्रभावितों तक पहुंची मदद, 28,803 लंच पैकेट और 2,065 राहत किट बांटी गईं; गाजीपुर में 12 चरवाहों समेत 2 हजार से अधिक भेड़ों को बचाया

लखनऊ। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर अब तेजी से घट रहा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन की निगरानी और राहत-बचाव अभियान जारी है। 29 अगस्त को नदी का जलस्तर 135.20 मीटर के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया था, जो अब घटकर 128 मीटर रह गया है। राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार बाढ़ की स्थिति में अब तक 688 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जिले में बाढ़ से किसी व्यक्ति या पशु की मौत की सूचना नहीं है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय बचाव दलों को तैनात रखा है। एनडीआरएफ के 30 और एसडीआरएफ की दो टीमों के 27 सदस्य राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं।

- 36 गांवों में 13,906 लोग प्रभावित
मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने से कर्वी क्षेत्र के रामघाट समेत 19 गांव, राजापुर के 7 और मानिकपुर के 10 गांव प्रभावित हुए। कुल 36 गांवों में 13,906 लोगों तक राहत पहुंचाई गई है। प्रशासन की ओर से भोजन, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था लगातार की जा रही है।

- करीब 29 हजार लंच पैकेट बांटे
बाढ़ प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए अब तक 28,803 लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। इनमें कर्वी में 24,530, राजापुर में 4,043 और मानिकपुर में 230 पैकेट शामिल हैं।
जरूरी घरेलू सामग्री के लिए 2,065 राहत किट भी बांटी गई हैं। कर्वी में 1,073, राजापुर में 796 और मानिकपुर में 196 राहत किट वितरित की गईं। प्रभावित लोगों के लिए जिले में 18 बाढ़ शरणालय सक्रिय हैं।

- मकान क्षति पर 8.72 लाख की सहायता
बाढ़ के कारण जिले में 653 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें 188 मामलों में प्रभावित परिवारों के खातों में 7.52 लाख रुपये की सहायता भेजी जा चुकी है। पूरी तरह क्षतिग्रस्त एक मकान के लिए 1.20 लाख रुपये की सहायता दी गई है। बाकी मामलों में भी भुगतान की प्रक्रिया चल रही है।

- 28 मेडिकल टीमें तैनात
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बीमारी और संक्रमण की आशंका को देखते हुए 28 मेडिकल टीमें एंबुलेंस और दवाओं के साथ तैनात हैं। टीमें प्रभावित लोगों की स्वास्थ्य जांच और दवा वितरण कर रही हैं। वहीं किसानों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए फसल क्षति का सर्वे भी कराया जा रहा है।

-  गाजीपुर में टला बड़ा हादसा, 12 चरवाहे और 2 हजार से अधिक भेड़ें बचाईं
गाजीपुर में गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद डूहिया सरैया के पास नदी के एक टापू पर फंसे 12 चरवाहों और दो हजार से अधिक भेड़ों को पुलिस-प्रशासन की टीम ने सुरक्षित निकाल लिया। करीब छह घंटे चले रेस्क्यू अभियान में नाइट विजन ड्रोन की मदद से पहले फंसे लोगों और पशुओं की लोकेशन चिन्हित की गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस, प्रशासन, पीएसी की फ्लड कंपनी और स्थानीय नाविकों की संयुक्त टीम ने ददरी घाट से अभियान शुरू किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद सभी चरवाहों और भेड़ों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस अभियान में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।