सुखपुरा का सपूत प्रियांशु कुमार सिंह बना थल सेना में लेफ्टिनेंट; सैनिक परिवार की तीसरी पीढ़ी ने पहनी अफसर की वर्दी
संजीव सिंह बलिया!सुखपुरा: कस्बा निवासी धनंजय सिंह के पुत्र प्रियांशु कुमार सिंह ने भारतीय थल सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्ति पाकर घर-परिवार और बलिया-बागी धरती का नाम रोशन किया है। जयपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद UPSC के माध्यम से EME ग्रुप में चयनित प्रियांशु ने गया के ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से एक वर्ष का कठोर प्रशिक्षण पूरा कर पासिंग आउट परेड में शानदार प्रदर्शन किया। प्रियांशु का परिवार सेना की गौरवशाली परंपरा से जुड़ा हुआ है। उनके पिता धनंजय सिंह 17वीं बटालियन द महार रेजीमेंट से सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हैं, जबकि चाचा राजीव कुमार सिंह ऑनरेरी कैप्टन और अजय कुमार सिंह सूबेदार मेजर के पद पर सेवारत हैं। प्रियांशु की प्रारंभिक शिक्षा गुड सेमेरिटन इंग्लिश स्कूल सुखपुरा में हुई; बाद में उन्होंने आर्मी पब्लिक स्कूल बीकानेर और मामूँ कैंट पठानकोट से पढ़ाई पूरी की।पारिवारिक पृष्ठभूमि: सैनिक परंपरा की तीसरी पीढ़ी प्रियांशु का परिवार लंबे समय से भारतीय सेना से जुड़कर देश सेवा करता आया है: पिता: धनंजय सिंह (मंजीत कुमार सिंह उर्फ धनंजय) — भारतीय थल सेना की 17वीं बटालियन, द महार रेजीमेंट से सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त। चाचा: राजीव कुमार सिंह — 15वीं बटालियन, द महार रेजीमेंट से ऑनरेरी कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त। चाचा: अजय कुमार सिंह (रामबाबू) — प्रथम बटालियन, द महार रेजीमेंट में सूबेदार मेजर-ऑनरेरी कैप्टन के पद पर सेवारत। माता: प्रियंका सिंह (गृहिणी); बहन: रिद्धि सिंह (कक्षा 12वीं की छात्रा)। रविवार को स्वतंत्रता शहीद स्मारक संस्थान सुखपुरा के पदाधिकारी व विशिष्टजनों ने घर जाकर प्रियांशु को अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस मौके पर बसंत सिंह, जेपी सिंह, राकेश कुमार, अनुज कुमार, संदेश सिंह, रामजन्म सिंह, गुड्डू उपाध्याय, पप्पू जी, गामाजी, विकास कुमार, डाकघर अभिकर्ता उमेश सिंह तथा संस्था प्रबंधक उमेश कुमार सिंह मौजूद रहे। गांव पहुंचने पर सैकड़ों ग्रामीणों ने भी उनका जोरदार स्वागत किया।
जिला अभ्यास वर्ग में कार्यकर्ताओं को मिला संगठनात्मक दिशा-बोध, पांच सत्रों में हुई विस्तृत चर्चा
अमर बहादुर सिंह नगरा।। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, गोरक्ष प्रांत जिला रसड़ा का एक दिवसीय जिला अभ्यास वर्ग रविवार को नगरा नगर इकाई स्थित तेजश पैलेस में आयोजित किया गया। अभ्यास वर्ग में जिले की पांचों नगर इकाइयों सिकंदरपुर, नगरा, बेल्थरा रोड, रसड़ा एवं चिलकहर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम में प्रवासी के रूप में प्रमुख रूप से राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, विभाग प्रमुख डॉ. अनिल तिवारी, विभाग संगठन मंत्री रंजीत सिंह, विभाग संयोजक अनन्या शर्मा उपस्थित रहे। इसके अलावा रसड़ा जिला प्रमुख घनश्याम शरण सिंह, जिला संयोजक अतुल मिश्रा, नगरा नगर अध्यक्ष उदय नारायण पाण्डेय, सिकंदरपुर नगर अध्यक्ष विशाल सोनी सहित विभिन्न नगर इकाइयों के कार्यकर्ता मौजूद रहे। अभ्यास वर्ग की शुरुआत परिषद गीत से हुई। इसके बाद मां सरस्वती एवं स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण, पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। आगंतुक अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह देकर स्वागत और सम्मान किया गया। एक दिवसीय अभ्यास वर्ग में कुल पांच सत्र आयोजित किए गए, जिनमें सैद्धांतिक भूमिका, सदस्यता एवं कार्यकारिणी पुनर्गठन, कार्यपद्धति, कार्यकर्ता विकास एवं समारोप प्रमुख रहे। इन सत्रों के माध्यम से कार्यकर्ताओं को संगठन की विचारधारा, कार्यशैली, दायित्वों एवं आगामी कार्ययोजना से विस्तारपूर्वक परिचित कराया गया। वक्ताओं ने कहा कि सही विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने से व्यक्ति और समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। संगठनात्मक कार्यों में पूर्व योजना को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा गया कि पूर्व योजना ही पूर्ण योजना का आधार होती है। उन्होंने विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति और उसके उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थी परिषद विद्यार्थियों के साथ-साथ समाज के हितों की चिंता करते हुए समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर कार्य करता है। अभ्यास वर्ग में यह भी बताया गया कि विद्यार्थी परिषद शिक्षक एवं विद्यार्थी कार्यकर्ताओं के माध्यम से राष्ट्र के पुनर्निर्माण की दिशा में युवाओं को सही मार्गदर्शन देने का कार्य करता है। संगठन में किसी भी निर्णय से पहले वास्तविक परिस्थितियों से परिचित होना और उसके आधार पर निर्णय लेना कार्यपद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न नगरों से आए कार्यकर्ताओं की सक्रिय सहभागिता रही।
बलिया डीएम मंगला प्रसाद सिंह पहुंचे वायरल हुई ज्योति के घर, बैटरी साइकिल के साथ मिला दिव्यांगता प्रमाण पत्र
संजीव सिंह बलिया। तहसील सिकंदरपुर के ग्राम महुलानपार की 19 वर्षीय दिव्यांग युवती कुमारी ज्योति के शिक्षक बनने के सपने को अब नई उम्मीद मिली है। दोनों पैरों से दिव्यांग ज्योति की पढ़ाई आठवीं के बाद विद्यालय आने-जाने की सुविधा के अभाव में छूट गई थी। जिलाधिकारी ने स्वयं पहुंचकर ली जानकारी हाल ही में ज्योति की परेशानी सामने आने के बाद जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने मामले का संज्ञान लिया और रविवार को स्वयं उसके गांव पहुंचकर ज्योति से मुलाकात की। जिलाधिकारी ने ज्योति और उसके माता-पिता गुलाब चन्द्र प्रसाद एवं श्रीमती देवन्ती देवी से मुलाकात कर उसकी दिव्यांगता, पढ़ाई और पारिवारिक परिस्थितियों की जानकारी ली। सपना दोबारा जगा, प्रशासन ने दी मदद बातचीत के दौरान ज्योति ने बताया कि यदि उसे स्कूल आने-जाने के लिए साधन मिल जाए तो वह दोबारा पढ़ाई शुरू करना चाहती है। उसका सपना पढ़-लिखकर शिक्षक बनने का है। जिलाधिकारी ने ज्योति का उत्साह बढ़ाते हुए उसे चॉकलेट, स्कूल बैग, बैटरी वाली साइकिल और हेलमेट एवं अन्य सामग्री प्रदान किया। विद्यालय में दाखिले के दिए निर्देश उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि कुमारी ज्योति का विद्यालय में दाखिला कराने को कहा, ताकि उसकी पढ़ाई दोबारा शुरू हो सके। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि कुमारी ज्योति के लिए शौचालय तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। मौके पर मिला दिव्यांगता प्रमाण पत्र उन्होंने मौके पर ही कुमारी ज्योति को दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया। जिलाधिकारी की इस पहल से ज्योति और उसके परिवार में खुशी का माहौल है। अब बैटरी साइकिल मिलने के बाद विद्यालय तक पहुंचने की उसकी सबसे बड़ी समस्या दूर होने की उम्मीद है। ज्योति के शिक्षक बनने के सपने को साकार करने के लिए प्रशासन की ओर से की गई पहल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। अधिकारियों की रही मौजूदगी इस अवसर पर एसडीएम सिकंदरपुर, सीएमओ डॉ. अभय कुमार राय, बीडीओ सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
शिक्षक दिवस पर बलिया में भव्य सम्मान समारोह; परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने 50 उत्कृष्ट शिक्षकों को किया सम्मानित
संजीव सिंह बलिया!शनिवार, 5 सितंबर 2026 को शिक्षक दिवस के अवसर पर बलिया के गंगा बहुद्देशीय सभागार में एक भव्य शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर किया। राज्य स्तरीय समारोह का सजीव प्रसारण इस दौरान उपस्थित अधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षिकाओं ने गोरखपुर में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक दिवस समारोह का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सजीव प्रसारण देखा और सुना। राज्य स्तरीय समारोह के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों के सम्मान और प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी उपस्थित लोगों ने प्राप्त की। 50 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मान इस अवसर पर बलिया जिले के माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा विभाग के उत्कृष्ट शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 50 शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों को प्रशस्ति पत्र एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया। कुल मिलाकर 1000 शिक्षकों को इस कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। मंत्री का संदेश दयाशंकर सिंह ने कहा कि ऐसे सम्मान शिक्षकों के उत्साह को बढ़ाने के साथ-साथ अन्य शिक्षकों को भी बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर बेहतर कार्य करने का आह्वान किया। नवाचार और गुणवत्ता पर जोर कार्यक्रम में अधिकारियों ने कहा कि शिक्षकों द्वारा किए जा रहे नवाचार और बेहतर शैक्षिक प्रयास विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अन्य शिक्षकों को भी शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार, नवाचार को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रेरित किया गया। उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी कार्यक्रम में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह, सीडीओ आलोक कुमार, जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा, सुनीता श्रीवास्तव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह इत्यादि अधिकारी उपस्थित रहे।
बलिया:किकोढ़ा के सुपुत्र डॉ. इफ्तेखार खां को राष्ट्रपति के हाथों मिला राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026; बलिया जिले का गौरव बढ़ा
संजीव सिंह बलिया!राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में शिक्षक दिवस के अवसर पर देशभर से चुने गए 48 उत्कृष्ट स्कूल शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया, जिनमें बलिया के राजकीय इंटर कॉलेज के कला शिक्षक डॉ. इफ्तेखार खां का नाम भी शामिल है। मूल रूप से सिकंदरपुर क्षेत्र के किकोढ़ा गांव के निवासी डॉ. खां को यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में उनके अभिनव और समाज-केंद्रित कार्यों के लिए दिया गया है। परिचय और शैक्षणिक पृष्ठभूमि डॉ. इफ्तेखार खां साल 1998 से राजकीय इंटर कॉलेज, बलिया में कला शिक्षक के रूप में सेवा दे रहे हैं। उन्होंने शुरू में विज्ञान से पढ़ाई की, लेकिन बाद में कला की ओर रुख किया और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से BFA, MFA तथा पीएचडी की डिग्री प्राप्त की; उनकी पीएचडी का विषय ‘मुगलकालीन पोथियों में दृष्टांत चित्र’ रहा है। सामाजिक पहल: मुफ्त कला शिक्षा और ‘गुरु दक्षिणा में एक पेड़’ डॉ. खां का पढ़ाने का दायरा सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं है—वे साल 2000 से हर रविवार अपने घर पर बच्चों को नि:शुल्क कला की बारीकियां सिखाते हैं और गर्मियों में चित्रकला वर्कशॉप भी आयोजित करते हैं। उनके मार्गदर्शन में कई छात्र कला व रचनात्मक क्षेत्रों में आगे बढ़ चुके हैं। पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है उनकी अनूठी पहल—वे छात्रों से महंगे तोहफों की बजाय ‘गुरु दक्षिणा में एक पेड़’ लगवाने की अपील करते हैं, जिससे एक ओर पर्यावरण जागरूकता फैलती है और दूसरी ओर सामाजिक संदेश भी मिलता है। कक्षा से परे कला: प्रकृति और पर्यावरण से जोड़कर सीखना डॉ. खां बच्चों को प्रकृति, पेड़-पौधों और आसपास के माहौल से जोड़कर कला सीखने के लिए प्रेरित करते हैं, इसलिए उनकी कक्षाएं पारंपरिक क्लासरूम तक सीमित नहीं रहतीं। उनके छात्रों ने पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण और जल संरक्षण जैसे विषयों पर चित्र बनाकर समाज में जागरूकता का संदेश दिया है। राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तीन चरणों में किए गए चयन के बाद 27 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों से 48 शिक्षकों को इस पुरस्कार के लिए चुना गया। प्रत्येक विजेता को रजत पदक, प्रमाण पत्र और ₹50,000 की नकद राशि प्रदान की जाती है। इस सूची में उत्तर प्रदेश से डॉ. इफ्तेखार खां का चयन बलिया जिले के लिए गौरव की बात मानी जा रही है।
“अनुदेशिका अनीता देवी की तेरहवीं पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम संपन्न; जिला-ब्लॉक कार्यकारिणी ने शोकाकुल परिवार को सौंपा एक लाख रुपये का सहयोग”
संजीव सिंह बलिया। कम्पोजिट विद्यालय गौवापार, शिक्षा क्षेत्र नगरा की अनुदेशिका श्रीमती अनीता देवी का 24 अगस्त 2026 को विद्युत आघात से असामयिक निधन हो गया था। उनकी याद में आज 5 सितंबर 2026 को उनके मूल आवास पर एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जिला व ब्लॉक कार्यकारिणी के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष शमशाद खान, जिला महामंत्री दीपक कुमार सिंह, जिला कार्यकारिणी अविनाश सिंह, अरुण कुमार पाण्डेय, शेषमणि कुमार, ब्लॉक अध्यक्ष पंकज कुमार, ब्लॉक संयोजक अमित सिंह ( सिप्पू), कोषाध्यक्ष सुनील कुमार, ब्लॉक कार्यकारिणी विनय गुप्त, राजनाथ यादव, रंजीत, रामसेवक यादव सहित समस्त जिला व ब्लॉक कार्यकारिणी के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित सभी ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किया और शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। इसी क्रम में परिवार को रु. 1,00,000/- (एक लाख रुपये) की सहयोग राशि भेंट की गई। वक्ताओं ने कहा कि अनीता देवी का सरल, सहज और सहयोगी व्यक्तित्व शिक्षा जगत के लिए प्रेरणा था और उनका जाना अनुदेशक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। सभी ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिवार को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
अंकल, साइकिल दिला दीजिए…” — एक पैर पर स्कूल जाने वाली रागिनी की पुकार सीएम योगी तक पहुंची; सरकार उठाएगी इलाज का पूरा खर्च, BHU में होगी जांच
संजीव सिंह बलिया!बलिया के मनियर ब्लॉक की 7 वर्षीय रागिनी ने डीएम से भावुक अपील की थी; वायरल वीडियो के बाद दो ट्राइसाइकिल, पढ़ाई का सामान और अब प्रदेश सरकार के निर्देश पर बेहतर उपचार की राह खुली जिले के मनियर ब्लॉक अंतर्गत रानीपुर गांव की निवासी सात वर्षीय रागिनी दिघेड़ा गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक की छात्रा है। एक पैर में दिव्यांगता के बावजूद वह रोज़ 400 मीटर की दूरी कूदते-कूदते तय कर स्कूल जाती थी, रास्ते में थककर बैठ जाती और दर्द होने पर रोने लगती थी। 31 अगस्त को उसने जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह से भावुक होकर कहा—“अंकल, साइकिल दिला दीजिए… मैं खूब पढ़ना चाहती हूं।” यह अपील इंटरनेट/सोशल मीडिया पर तेजी से फैली और मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गया। प्रशासनिक पहल: दो ट्राइसाइकिल, स्कूल किट और इलाज का भरोसा बुधवार को डीएम स्वयं रागिनी के गांव पहुंचे और उसे एक नहीं, बल्कि दो ट्राइसाइकिलें सौंपीं; साथ ही स्कूल बैग, कॉपी-किताब, चॉकलेट व अन्य जरूरी सामान दिया गया। साइकिल मिलने पर रागिनी ने मासूमियत से कहा—“अब मुझे और कुछ नहीं चाहिए।” गुरुवार को जिला अस्पताल में उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया। सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. करन सिंह चौहान की मौजूदगी में जांच के बाद तय हुआ कि कुछ विशेष जांचें बलिया में संभव नहीं हैं, इसलिए उसे वाराणसी स्थित बीएचयू (BHU) भेजा जाएगा। डीएम ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार इलाज का पूरा खर्च प्रदेश सरकार उठाएगी और लक्ष्य है कि रागिनी अपने पैरों पर खड़ी हो सके। समाज से भी बढ़े मदद के हाथ रागिनी की कहानी सामने आने के बाद फिजिक्स वाला (Physics Wallah) के सह-संस्थापक व सीईओ अलख पांडेय ने बच्ची के इलाज के लिए 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भेजी है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह की ओर से भी 26 हजार रुपये की सहायता भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। पारिवारिक पृष्ठभूमि रागिनी के पिता देवेंद्र राजभर हैदराबाद में मजदूरी करते हैं; वह गांव में अपनी मां बबीता देवी और दादा-दादी के साथ रहती है। बबीता देवी के मुताबिक, जब रागिनी लगभग छह माह की थी तब दुर्घटना में उसके पैर में गंभीर चोट लगी; इलाज हुआ पर पैर पूरी तरह ठीक नहीं हो सका। आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने इलाज जारी रखा, पर अपेक्षित लाभ नहीं मिला। आगे की कार्ययोजना जिला प्रशासन ने शनिवार को रागिनी को वाराणसी BHU ले जाने की तैयारी की है। वहां विशेष जांचों के बाद ऑपरेशन या अन्य संभावित उपचार पर फैसला लिया जाएगा। प्रदेश सरकार इलाज का पूरा व्यय वहन करेगी; जरूरत पड़ने पर लखनऊ या अन्य केंद्रों पर भी उपचार की व्यवस्था की जाएगी। रागिनी की “पढ़ाई की ललक” ने न सिर्फ प्रशासन को संवेदनशील बनाया, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को भी एकजुट किया। अब चुनौती है—समय पर विशेष जांच और सटीक उपचार से उसे वास्तव में “अपने पैरों पर खड़ा” करना।
शिक्षण और साहित्य-सृजन का अनूठा संगम हैं हनुमानगंज के धर्मपुरा प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के साथ हिंदी साहित्य के प्रति भी समर्पित
संजीव सिंह, बलिया। शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि साहित्य, सृजन और संवेदनशील सोच के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का माध्यम भी बनती है। इस विचार को अपने व्यक्तित्व और कार्यशैली में आत्मसात किए हुए हैं शिक्षा क्षेत्र हनुमानगंज के प्राथमिक विद्यालय धर्मपुरा के प्रधानाध्यापक एवं पूर्व एआरपी अम्बरीश कुमार पाण्डेय। हिंदी साहित्य के प्रति गहरा अनुराग प्रधानाध्यापक अम्बरीश कुमार पाण्डेय शिक्षण कार्य के साथ हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति विशेष लगाव रखते हैं। हिंदी के प्रति उनका समर्पण केवल अध्ययन और अध्यापन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे स्वयं हिंदी में रचनाएं और कविताएं भी लिखते हैं। भाषा की बारीकियों, शब्दों की सुंदरता और साहित्य की संवेदनशीलता के प्रति उनका विशेष अनुराग उनकी रचनात्मक अभिव्यक्ति में स्पष्ट दिखाई देता है। साहित्य को वे समाज और विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हैं। शिक्षण में रचनात्मकता पर जोर अम्बरीश कुमार पाण्डेय का मानना है कि बच्चों को शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से नहीं, बल्कि गतिविधियों, कहानियों, कविताओं और रचनात्मक अभिव्यक्ति के जरिए भी दी जानी चाहिए। इसी सोच के साथ वे विद्यालय में शिक्षण को सरल, रोचक और प्रभावी बनाने का प्रयास करते हैं। उनकी कार्यशैली में अनुशासन के साथ संवेदनशीलता और नवाचार का समावेश दिखाई देता है। वे विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अपनी प्रतिभा पहचानने, विचार व्यक्त करने और रचनात्मक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रेरित करते हैं। शिक्षक के साथ साहित्य साधक भी प्रधानाध्यापक के रूप में विद्यालय की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के साथ अम्बरीश कुमार पाण्डेय साहित्य साधना में भी निरंतर सक्रिय रहते हैं। उनके लिए लेखन आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम होने के साथ समाज और नई पीढ़ी से संवाद का सशक्त साधन भी है। उनकी रचनाओं में सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदनाएं और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता प्रमुख रूप से दिखाई देती है। यही कारण है कि वे शिक्षण जगत में एक ऐसे शिक्षक के रूप में पहचान बना रहे हैं, जिनके व्यक्तित्व में शिक्षक, साहित्यकार और सृजनशील मार्गदर्शक—तीनों का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। प्रेरणास्रोत बन रहा व्यक्तित्व अम्बरीश कुमार पाण्डेय का व्यक्तित्व शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। वे यह संदेश देते हैं कि एक शिक्षक का दायित्व केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह समाज में जागरूकता, संवेदनशीलता और सृजनात्मक सोच विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्राथमिक विद्यालय धर्मपुरा के प्रधानाध्यापक के रूप में उनका शिक्षण कार्य और साहित्य के प्रति समर्पण शिक्षा क्षेत्र हनुमानगंज में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है
बलिया: दाह संस्कार की तैयारी के बीच उठ बैठे 70 वर्षीय विश्वनाथ, घर में मातम से खुशी का माहौल

संजीव सिंह बलिया! बलिया के शिवपुर दियर नम्बरी निवासी 70 वर्षीय विश्वनाथ पाल मंगलवार सुबह अचानक बिस्तर पर बेसुध पड़े मिले। छोटे बेटे विजय शंकर पाल द्वारा जगाने के प्रयास के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर परिजन घबरा गए और उन्हें मृत समझकर दाह संस्कार की तैयारी में जुट गए।
इसी दौरान अचानक विश्वनाथ पाल उठ बैठे, जिससे घर में मातम का माहौल खुशी में बदल गया। परिजन खुशी से चिल्लाने लगे और ईश्वर का शुक्रिया अदा किया। इसके बाद उन्हें तत्काल जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें मेडिकल वार्ड में रखकर इलाज शुरू किया।
बड़े बेटे दयाशंकर पाल ने बताया कि पिता के दोबारा उठ बैठने से परिवार को बड़ी राहत मिली है और यह ईश्वर की कृपा है। ईएमओ डॉक्टर नीरज ने बताया कि मरीज बेहोशी की हालत में था और सिटी स्कैन कराने की सलाह दी गई है।
‘गाण्डीव के पार’ का हरिद्वार में भव्य लोकार्पण, बलिया के विद्वान डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को मिली बधाई
संजीव सिंह बलिया! सेवा मिशन, हरिद्वार के तत्वावधान में अवधूत मंडल आश्रम में आयोजित द्वितीय अंतरराष्ट्रीय दिव्य गंगा महोत्सव एवं साहित्यिक कुंभ में बलिया निवासी प्रकांड विद्वान डॉ. विद्यासागर उपाध्याय के खंडकाव्य ‘गाण्डीव के पार’ का भव्य लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम में देश-विदेश से आए साहित्यकारों, विद्वानों, शोधार्थियों, संतों और संस्कृति चिंतकों की उपस्थिति रही। कृति का लोकार्पण उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, रामभद्राचार्य राज्य विश्वविद्यालय चित्रकूट के कुलपति प्रो. शिशिर पांडेय, उत्तराखंड हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश लोकपाल वर्मा, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा बिहार के पूर्व कुलपति आचार्य धर्मेंद्र, त्रिभुवन विश्वविद्यालय काठमांडू नेपाल के प्रो. गोपाल अधिकारी, नेपाल के डॉ. हरि तिमिलसेना तथा उत्तराखंड के पूर्व मुख्य शिक्षा अधिकारी डॉ. विद्याशंकर चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से किया। कृति की विशेषता अठारह छंदों से छः अनुवाक व अठारह पर्व में रचित मौलिक खंडकाव्य ‘गाण्डीव के पार’ में गत-प्रत्यागत, अनुलोम-विलोम, शार्दूलविक्रीड़ित, मंदाक्रांता, चंडवृष्टिप्रयात दंडक, भुजंगप्रयात, घनाक्षरी, सवैया, दोहा, कुंडलिया, वीर, चौपाई आदि छंदों का प्रयोग किया गया है। विद्वानों ने इस कृति को भारतीय इतिहास, महाभारत परंपरा और समकालीन साहित्यिक विमर्श की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। यह ग्रंथ महाभारत के युद्ध प्रसंग के उपरांत वानप्रस्थ होते वृद्ध अर्जुन और उनके प्रपौत्र परीक्षित का एक रात्रि में घटित संवाद है, जो श्रीमद्भगवद्गीता की अभिनव व्याख्या प्रस्तुत करता है। डॉ. उपाध्याय का व्याख्यान महोत्सव के प्रथम उद्घाटन सह बौद्धिक सत्र में ‘भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना के विकास में गंगा का महत्व’ विषय पर विशिष्ट अतिथि के रूप में व्याख्यान देते हुए डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने कहा कि भारतीय परंपरा में गंगा केवल भौगोलिक जलधारा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक स्मृति, आध्यात्मिक चेतना और सभ्यतागत निरंतरता की प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि गंगा को बचाने का प्रश्न केवल नदी और पर्यावरण के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की उस सांस्कृतिक दृष्टि की रक्षा का प्रश्न भी है, जिसमें प्रकृति को जीवन और चेतना से पृथक नहीं माना गया। सम्मान समारोह कार्यक्रम में साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अनेक रचनाकारों और विद्वानों को ‘गंगा सेवी सम्मान’ और ‘टीजीटी सम्मान’ से सम्मानित किया गया। अंतिम सत्र में शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप जी महाराज मुख्य अतिथि रहे, जबकि हर्ष प्रसाद काला, रामभद्राचार्य राज्य विश्वविद्यालय चित्रकूट के शिक्षा संकाय के विभागाध्यक्ष प्रो. अशोक शुक्ला विशिष्ट अतिथि रहे। बलिया में हर्ष डॉ. विद्यासागर उपाध्याय के इस आध्यात्मिक खंडकाव्य का आध्यात्मिक नगरी हरिद्वार में लोकार्पण होने पर बलिया के विद्वानों में हर्ष व्याप्त है। महामंडलेश्वर कौशलेन्द्र गिरी, संत बालक नाथ, स्वामी आनंद स्वरूप, डॉ. मणिकर्णिका, करुणानिधि तिवारी, हरेंद्र नाथ मिश्रा, संतोष कुमार दीक्षित, पंडित विजय नारायण शरण, डॉ. गणेश पाठक, लल्लन पाण्डेय, कौशल कुमार उपाध्याय, विजय प्रताप आर्य आदि ने बधाई दी है। कार्यक्रम का कुशल संचालन मनीष श्रीवास्तव एवं मनीषा आवले चौगांवकर ने संयुक्त रूप से किया। अंत में समस्त अभ्यगतों के प्रति दिव्य गंगा सेवा मिशन के संस्थापक एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय ने आभार व्यक्त किया।