झारखंड के कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का हार्ट अटैक से निधन, राज्य भर में शोक की लहर

रांची: झारखंड सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कद्दावर नेता सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक हृदयाघात (हार्ट अटैक) के कारण निधन हो गया। वे करीब 56 वर्ष के थे। इस दुखद खबर से पूरे राज्य के राजनीतिक गलियारों और समर्थकों में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है।

नींद के दौरान बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में तोड़ा दम

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू अपने गृह जिले गिरिडीह स्थित आवास पर थे। शनिवार रात सोने के दौरान अचानक उनके सीने में तेज दर्द हुआ और तबीयत काफी बिगड़ गई। परिजनों और समर्थकों ने बिना समय गंवाए उन्हें तुरंत गिरिडीह के स्थानीय निजी मरसी अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल के डॉक्टरों की पूरी टीम ने उन्हें बचाने की भरसक कोशिश की, लेकिन स्थिति बेहद नाजुक होने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। तबीयत इतनी तेजी से बिगड़ी कि डॉक्टरों के पास उन्हें बेहतर इलाज के लिए एंबुलेंस या एयर एंबुलेंस से रांची शिफ्ट करने तक का समय नहीं मिला।

अस्पताल पहुंचा प्रशासन, जुटी समर्थकों की भारी भीड़

मंत्री की तबीयत बिगड़ने और फिर उनके निधन की खबर फैलते ही गिरिडीह जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी देर रात ही अस्पताल पहुंच गए। वहीं, खबर सुनते ही अस्पताल परिसर के बाहर झामुमो कार्यकर्ताओं, नेताओं और स्थानीय नागरिकों की भारी भीड़ जमा हो गई। उनके असामयिक निधन से हर कोई स्तब्ध और गमगीन है।

झामुमो ने व्यक्त किया गहरा दुख

सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (X) पर पोस्ट साझा कर गहरा शोक प्रकट किया। पार्टी ने इसे संगठन, सरकार और पूरे झारखंड प्रदेश के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया। पार्टी नेताओं ने कहा कि सुदिव्य जी एक समर्पित कार्यकर्ता और जुझारू नेता थे, जिनकी कमी हमेशा महसूस होगी।

कौन थे सुदिव्य कुमार सोनू?

सुदिव्य कुमार सोनू झारखंड मुक्ति मोर्चा के अग्रणी नेताओं में गिने जाते थे। वे गिरिडीह सदर विधानसभा क्षेत्र से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए थे।

राजनीतिक सफर: उन्होंने पहली बार 2019 के विधानसभा चुनाव में गिरिडीह से जीत हासिल की थी। इसके बाद 2024 के चुनाव में भी जनता ने उन पर भरोसा जताया और वे दोबारा विधायक बने।

पहला मंत्री बनने का गौरव: 2024 में चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कैबिनेट में उन्हें मंत्री पद की शपथ दिलाई गई।

इसके साथ ही वे लगभग दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद गिरिडीह सदर सीट से राज्य मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले पहले नेता बने।

महत्वपूर्ण मंत्रालय: हेमंत सोरेन सरकार में उनके पास पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य, नगर विकास तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा जैसे कई बड़े और महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार था।

छात्र आंदोलनों और नीतिगत मामलों में रही सक्रिय भूमिका

हाल के महीनों में राज्य में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों, भर्ती परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सुदिव्य कुमार सोनू ने सरकार के मुख्य वार्ताकार और प्रतिनिधि के रूप में अहम भूमिका निभाई थी। वे युवाओं की समस्याओं को लेकर काफी संवेदनशील रहते थे।

ग्लोबल स्कूल ऑफ इंडिया में हर्षोल्लास से मना शिक्षक दिवस, शिक्षकों का किया गया भव्य सम्मान

ग्लोबल स्कूल ऑफ इंडिया में आज शिक्षक दिवस बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

इस अवसर पर छात्रों ने शिक्षकों के सम्मान में मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिनमें स्वागत गीत, समूह नृत्य, कविता पाठ और शिक्षकों के महत्व पर आधारित लघु नाटिका शामिल थी।शिक्षकों के लिए तरह-तरह के खेल का विशेष आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विद्यालय प्रबंधन द्वारा सभी शिक्षकों का सम्मान रहा। प्रबंधन की ओर से सभी शिक्षकों को उनके समर्पण, निष्ठा और उत्कृष्ट योगदान के लिए उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया।

विद्यालय के निदेशक डॉ. एस. खालिद ने अपने संबोधन में कहा कि "शिक्षक ही विद्यालय की आत्मा हैं और उनके बिना शिक्षा की कल्पना अधूरी है।" विद्यालय की चेयरपर्सन डॉ. निकहत परवीन की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी सफल बनाया।

प्रधानाचार्या सी. त्रिगुणायत ने अपने संबोधन में सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई दी और इस स्नेहपूर्ण सम्मान के लिए प्रबंधन का आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने छात्रों द्वारा किए गए सुंदर आयोजन की जमकर सराहना की।

अंत में छात्र परिषद ने सभी शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

रांची: आयुष्मान भारत के तहत 2 नए अस्पताल सूचीबद्ध, 2 के आवेदन अस्वीकृत

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में आज दिनांक 05.09.2026 को आयुष्मान भारत योजना (AB-PMJAY) के अंतर्गत नए अस्पतालों की सूचीबद्धता हेतु जिला सूचीबद्धता समिति की बैठक आयोजित की गई। समाहरणालय स्थित सभागार में आयोजित बैठक में उप विकास आयुक्त, रांची श्री संजय कुमार भगत, प्रशिक्षु आईएएस (IAS Probationer) सुश्री आस्था शरण सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

बैठक के दौरान आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अस्पतालों को सूचीबद्ध किए जाने हेतु प्राप्त आवेदनों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। समिति द्वारा आवेदनों के आलोक में गठित जांच दल के माध्यम से संबंधित अस्पतालों का किए गए भौतिक सत्यापन के उपरांत समर्पित जांच प्रतिवेदनों की समीक्षा की गई। समिति द्वारा 02 अस्पताल को आयुष्मान भारत योजना (AB-PMJAY) के अंतर्गत सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया गया।

वहीं, 03 अस्पतालों के आवेदनों में आवश्यक दस्तावेजों एवं संबंधित त्रुटियां पाए जाने पर समिति द्वारा निर्देश दिया गया कि आवश्यक दस्तावेजों एवं त्रुटियों के निराकरण के उपरांत इन आवेदनों को आगामी बैठक में पुनः प्रस्तुत किया जाए, ताकि निर्धारित मानकों के अनुरूप इन पर आगे की कार्रवाई की जा सके।

इसके अतिरिक्त समिति द्वारा 02 अस्पतालों के आवेदनों को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया। समिति ने स्पष्ट किया कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अस्पतालों की सूचीबद्धता निर्धारित पात्रता एवं मानकों के अनुरूप ही की जाएगी, ताकि योजना के लाभुकों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुगम स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक में समिति द्वारा प्राप्त आवेदनों एवं जांच प्रतिवेदनों की नियमानुसार समीक्षा करते हुए सूचीबद्धता की प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं निर्धारित मापदंडों के अनुपालन पर विशेष बल दिया गया।

छात्रों के नाम पर राजनीतिक नौटंकी कर रही भाजपा : विनोद पांडेय

झामुमो महासचिव ने कहा कि 48 घंटे का अल्टीमेटम देना भाजपा की हताशा और राजनीतिक अहंकार का परिचायक

झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने भाजपा के 48 घंटे के अल्टीमेटम और चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा पर

कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा छात्रों के नाम पर राजनीतिक नौटंकी कर रही है और युवाओं के आक्रोश को अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल कर रही है।

महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा को पहले अपने शासनकाल का हिसाब देना चाहिए। केंद्र और झारखंड में वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद युवाओं के लिए रोजगार के कितने अवसर पैदा किए, इसका जवाब भाजपा दे। झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर घड़ियाली आंसू बहाने से भाजपा की असलियत नहीं छिपेगी।

उन्होंने कहा कि छात्रों पर दर्ज मुकदमों को भाजपा नेता फर्जी बता रहे हैं। यदि मुकदमे फर्जी हैं तो भाजपा तथ्य और प्रमाण सामने रखे। कानून तोड़ने वालों को राजनीतिक संरक्षण देने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भाजपा आंदोलन के नाम पर सरकारी व्यवस्था को चुनौती देने की राजनीति कर रही है।

झामुमो महासचिव ने कहा कि 48 घंटे का अल्टीमेटम देना भाजपा की हताशा और राजनीतिक अहंकार का परिचायक है। झारखंड सरकार भाजपा के अल्टीमेटम से नहीं चलती। भाजपा को लगता है कि धमकी और दबाव की राजनीति से सरकार को झुकाया जा सकता है, तो यह उसकी बड़ी भूल है।

‘नौकरी बेचने’ के भाजपा के आरोप पर उन्होंने कहा कि भाजपा के पास यदि कोई प्रमाण है तो सामने लाए, अन्यथा झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाकर जनता को गुमराह करना बंद करे। बिना प्रमाण आरोप लगाना भाजपा की पुरानी राजनीतिक आदत रही है।

मुख्य सचिव से इंडिया गठबंधन के नेताओं की मुलाकात पर भाजपा की टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव से मिलने पर भाजपा को तकलीफ इसलिए हो रही है, क्योंकि उसे हर राजनीतिक गतिविधि में अपना राजनीतिक संकट दिखाई देता है। मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं होने की भाजपा की बात पूरी तरह हास्यास्पद है।

विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रही है। झारखंड के युवा भाजपा की इस राजनीति को समझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा चाहे जितने अल्टीमेटम दे और जितने प्रदर्शन कर ले, सरकार को धमकी देकर राजनीतिक दबाव में लेने का उसका मंसूबा पूरा नहीं होगा।

भाजपा का राज्य सरकार को दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम समाप्त, भाजपा ने की चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा

8 से लेकर 11 सितंबर तक तिथिवार 24 जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन के साथ डीसी एवं एसपी कार्यालय का किया जाएगा घेराव

मुकदमों से छात्रों की आवाज दबाने की भूल ना करें, भाजपा छात्रों के साथ न्याय की लड़ाई में मजबूती से खड़ी : आदित्य साहू

सत्ताधारी दल झामुमो और कांग्रेस के नेताओ को मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं

छात्रों पर दर्ज फर्जी मुकदमों को वापस करने, पिछले सात साल में सभी भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराने सहित अन्य मांगों को लेकर राज्य सरकार को दिए गए अपने 48 घंटे के अल्टीमेटम पूरा होने के बाद भाजपा ने 24 प्रशासनिक जिलों में चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा कर दी है। भाजपा द्वारा राज्य के सभी 24 प्रशासनिक जिलों में तिथिवार विभिन्न जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन के साथ एसपी और डीसी कार्यालय के घेराव का कार्यक्रम तय किया गया है। प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में पार्टी के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू ने इसकी घोषणा की है।

इस संबंध में प्रदेश अध्यक्ष श्री साहू ने कहा कि भाजपा के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के द्वारा मुख्य सचिव के माध्यम से राज्य सरकार को दिया गया समय अब खत्म हो चुका है। अब भाजपा कार्यकर्ता लगातार चार दिनों तक सभी 24 जिलों में प्रदर्शन के साथ डीसी एवं एसपी कार्यालय का घेराव कर छात्रों की आवाज बुलंद करेंगे। प्रतिदिन 6 जिलों में घेराव कार्यक्रम किया जाएगा। भाजपा हर कदम पर छात्रों के इस न्याय की लड़ाई में मजबूती से खड़ी रहेगी।

श्री साहू ने कहा कि इस कार्यक्रम की शुरुआत 8 सितंबर से होगी। 8 सितंबर को रांची, दुमका, हजारीबाग, गिरिडीह, जमशेदपुर और गढ़वा जिले में, 9 सितंबर कोडरमा, साहिबगंज, बोकारो, पलामू, सिमडेगा और चाईबासा जिले में, 10 सितंबर को सरायकेला, पाकुड़, धनबाद, गुमला, लातेहार और चतरा जिले में जबकि 11 सितंबर को रामगढ़, देवघर, लोहरदगा, खूंटी, गोड्डा और जामताड़ा जिले में यह कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।

श्री साहू ने कहा कि एकीकृत बिहार या झारखंड गठन के बाद किसी ने राज्य के अंदर ऐसा दृश्य नहीं देखा होगा, जिस प्रकार का सुलूक छात्रों के साथ राज्य सरकार कर रही है। छात्रों के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है। शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलनरत छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। राज्य के विभिन्न जिलों में शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों को झामुमो के कार्यकर्ताओं द्वारा लाठी-डंडों से पीटा गया। उल्टा छात्रों पर ही मुकदमा कर दिया गया है।

सवाल है कि छात्रों के साथ गुंडागर्दी और मारपीट करने वाले झामुमो कार्यकर्ताओं पर अभी तक मुकदमा क्यों नहीं दर्ज किया गया है, यह जनता जानना चाहती है।

श्री साहू ने कहा कि दिल्ली सहित अन्य प्रदेशों के छात्र आंदोलनों से झारखंड के आंदोलन की तुलना कीजिए। झारखंड के छात्रों ने मिसाल कायम किया है। वहीं दिल्ली के आंदोलन को पूरी दुनिया ने देखा कि कैसे कांग्रेस के इशारे पर देश के प्रधानमंत्री और उनकी दिवंगत मां के लिए अपशब्द का इस्तेमाल किया गया। लेकिन झारखंड में किसी छात्र ने किसी को गाली नहीं दी। फिर भी यह 1000 छात्रों पर मुकदमा दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि इतना से ही पुलिस और सरकार का मन नहीं भरा। पुलिस रात के अंधेरे में छात्रों के घर पर दस्तक देकर भय का माहौल बना रही है। कोचिंग संचालकों को डराया धमकाया जा रहा है।

श्री साहू ने कहा कि कांग्रेस और झामुमो की सरकार ने नौकरियों को बेचने का काम किया है। सरकार को डर है कि उनके द्वारा नौकरी बेचने का घोटाला सबके सामने न आ जाये। इसलिए सरकार छात्रों के आन्दोलन को रोकने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रही है।

श्री साहू ने कहा कि भाजपा के अल्टीमेटम के 48 घंटे पूरे भी नहीं हुए और कांग्रेस, jmm एवं आरजेडी के लोग मुख्य सचिव के पास पहुंच गए। अगर इन नेताओं को जाना ही था तो मुख्यमंत्री के पास जाते। लगता है सीएम पर इन नेताओं का भरोसा खत्म हो चुका है। मुख्य सचिव से मिलने के बाद इन नेताओं ने मीडिया के सामने जो बयान दिया, वह काफी शर्मनाक है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि झामुमो और कांग्रेस के नेताओं को मुख्य सचिव को सच बताना चाहिए था कि झारखंड में नौकरी बेची गयी है या नहीं।

श्री साहू ने कहा कि धमकी देकर, मुकदमा कर आप सवालों ने नहीं भाग सकते हैं। सरकार छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार कर रही है। सरकार और पुलिस को कोयला, बालू, पत्थर माफियाओं पर कार्रवाई करनी चाहिए, उन्हें पकड़नी चाहिए, खनिज संपदाओं की लूट पर रोक लगानी चाहिए तो ये लोग छात्राें को पकड़ रहे हैं।। उन्होंने सरकार को चेताते हुए कहा कि मुकदमों से छात्रों की आवाज दबाने की भूल सरकार कतई ना करे। ये झारखंड के भविष्य हैं। जब इन छात्रों के साथ उनके परिजन और गांव समाज वाले भी सड़क पर उतर जाएंगे तो इन्हें संभालना इस सरकार के बूते से बाहर की बात होगी। अतः सरकार से अनुरोध है कि ऐसी भयावह स्थित उत्पन्न न होने दें। राज्य सरकार को छात्रों के साथ न्याय करना ही होगा। अभी भी समय है, सरकार छात्रों पर दर्ज फर्जी मुकदमों को अविलंब रद्द करे और पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने की अनुशंसा करे।

इस दौरान प्रेस वार्ता में प्रदेश प्रवक्ता रामाकांत महतो, दीनदयाल बरनवाल, रवि नाथ किशोर और मीडिया सह प्रभारी अजय राय भी उपस्थित थे।

32 मन विशुद्ध सोने के अलौकिक विग्रह : श्री वंशीधर नगर धाम - पंचम धाम की महिमा

अभय तिवारी ।

गढ़वा :- विंध्य क्षेत्र अंतर्गत झारखंड के पश्चिम छोर पर गढ़वा जिला के बंशीधर नगर धाम, छत्तीसगढ़, यूपी और बिहार यानी तीन राज्यों के त्रिकोण पर वनों एवं पर्वतों से आच्छादित खूबसूरत वादियों के बीच और पतित पावनी कल कल निनादिनी मां बांकी नदी के किनारे बसा श्री बंशीधर नगर इस भूमंडल पर पांचवां धाम है।

विद्वानों के मुताबिक ऐसा भगवान श्रीकृष्ण जी द्वारा विग्रह रुप में यहां स्वयं आकर विराजमान होना है। विग्रह रुप में श्री वंशीधर जी का प्राकट्य विग्रहावतार माना जाता है। विद्वानों के मुताबिक श्री वंशीधर जी के रुप में उनका विग्रहावतार, अर्चावतार भी है। इसलिए इसे श्री बंशीधर नगर धाम के नाम से जाना जाता है।

विद्वानों की राय है कि आमतौर पर पहले किसी मंदिर का निर्माण होता है, उसके बाद मंदिर में भगवान का विग्रह स्थापित कर प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। लेकिन श्री वंशीधर मंदिर में ठीक इसके विपरीत रानी शिवमानी देवी को स्वप्न देकर पधारे भगवान श्री वंशीधर जी के विग्रह की स्थापना हुई और उसके बाद मंदिर का निर्माण हुआ है। श्री वंशीधर जी का प्रतिमा 32 मन विशुद्ध सोने का विग्रह मनमोहक, अदभुत, अलौकिक और अकल्पनीय है। भगवान श्रीकृष्ण जी का ऐसा विग्रह दुनियां के किसी कोने में नहीं है।

भगवान के विग्रह का वर्णन शब्दों में करना कठिन है, लेकिन एक वाक्य कहना और लिखना हो तो बस यही कहा और लिखा जायेगा कि जिनके दर्शन मात्र से सारे पीड़ा और संताप दूर हो जाते हैं। तन और मन हर्षित हो जाता है। विग्रह ऐसा कि नजर नहीं हटती। हमेशा देखते रहने का जी करता है।

श्री बंशीधर नगर में श्री वंशीधर जी के कण कण में विद्यमान रहने का अहसास होता है। इसके कारण यह स्थान श्रीकृष्ण की उपासना करने वाले व वैष्णवों के प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यहां सुविख्यात वैष्णव संत जगदाचार्य श्री श्री 1008 त्रिदंडी स्वामी जी महाराज, उनके शिष्य श्री श्री 1008 लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज व श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर जी महाराज समेत वैष्णव संप्रदाय के कई चोटी के संत यहां भगवान का दर्शन पूजन कर श्री वंशीधर धाम व श्री वंशीधर जी की महिमा का वर्णन कर चुके हैं।

पंडित राहुल सांकृत्यायन और विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय कई जानी मानी हस्तियां भी भगवान का दर्शन अर्चन कर चुके हैं। श्री वंशीधर मंदिर में श्रीकृष्ण जी की वंशीवादन करती आदमकद प्रतिमा के दर्शन के बाद लोगों को अदभुत सुख शांति की अनुभूति होती है। इस नगरी में कभी शोक और उदासी का भाव किसी के मन में उत्पन्न नहीं होता है। बाहर से श्री वंशीधर जी की नगरी में जो भी श्रद्धालु आते हैं, बस भगवान के दर्शन मात्र से उनके चित्त को परम शांति मिलती है। श्री वंशीधर जी के द्वार पर कभी किसी को मांगने की जरुरत नहीं पड़ी है। श्री वंशीधर के द्वार से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटा। जो भी श्रद्धालु श्री वंशीधरजी के दरबार में गया, उसकी अभिष्ट कामना की पूर्ति अवश्य हुई है। ऐसी मान्यता है कि भगवान अपने द्वार पर आने वाले भक्तों की मनोकामना को अवश्य पूरी करते हैं।

श्री बंशीधर नगरी की परिधि के भीतर अब तक कभी किसी प्रकार के प्राकृतिक आपदा का प्रभाव नहीं पड़ा है। लगभग एक दशक तक घोर उग्रवाद क्षेत्र से ग्रसित होने के बाद भी श्री बंशीधर नगर के लोगों में भय के वातावरण का कभी अहसास नहीं हुआ। श्री वंशीधर क्षेत्र में कभी महामारी को आसपास भटकने का भी अवसर नहीं मिला है। मतलब इस नगरी में सब कुछ श्री वंशीधर जी की इच्छा के अनुकूल होता है। प्राकृतिक आपदा और महामारी जैसे असामयिक घटना जिससे श्री वंशीधर जी के भक्त को परेशानी और शोक हो, इन सब चीजों को श्री वंशीधरजी अपने क्षेत्र में कभी फटकने नहीं देते। श्री वंशीधर जी की प्रेरणा से यहां वर्ष भर धार्मिक अनुष्ठान, संत्सग आदि का क्रम जारी रहता है। लोग एक दूसरे के हर सुख दुख में सहभागी बनकर जीवन यापन करते हैं। श्री वंशीधर की कृपा ही है कि लोग बिना किसी भय अथवा चिंता किये यहां सुखपूर्वक निवास करते हैं।

श्री बंशीधर नगर को योगेश्वर कृष्ण की भूमि और इस धरती को द्वितीय मथुरा और वृंदावन माना जाता है। श्री बंशीधर जी की स्थापना के बारे में पलामू के प्रसिद्ध इतिहासकारों स्व. रामदीन पाण्डेय, स्व. हवलधारी राम गुप्त हलधर एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत्त शिक्षक सह इतिहासकार डॉ रमेश चंचल ने अपनी रचनाओं में बड़ी विस्तार से की है। इतिहासकारों के अनुसार संवत 1885 में राजा स्व भवानी सिंह देव की विधवा शिवमानी कुंवर राजकाज का संचालन कर रही थी। रानी शिवमानी कुंवर धर्मपरायण एवं भगवत भक्ति में पूर्ण निष्ठावान थी। 14 अगस्त 1827 को रानी साहिबा जन्माष्टमी व्रत किया था उसी दिन मध्य रात्रि में उन्हें स्वप्न में भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन हुआ।

स्वप्न में श्री कृष्ण ने रानी से वर मांगने को कहा। रानी ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा कि प्रभु आपकी सदैव कृपा हम पर रहे। तब भगवान कृष्ण ने रानी से कनहर नदी के किनारे यूपी के महुअरिया के निकट शिव पहाड़ी अपनी प्रतिमा के गड़े होने की जानकारी दी और उन्हें अपने राज्य में लाने को कहा। भगवत कृपा जान रानी ने शिवपहाड़ी जाकर विधिवत पूजा अर्चना के बाद खुदाई करायी तो श्री बंशीधर जी की अद्वितीय असाधारण प्रतिमा मिली। जिसे हाथियों पर बैठाकर श्री बंशीधर नगर लाया गया। गढ़ के मुख्य द्वार पर अंतिम हाथी बैठ गया। लाख प्रयत्न के बावजूद हाथी नहीं उठने पर रानी ने राजपुरोहितों से राय मशविरा कर वहीं पर मंदिर का निर्माण कराया तथा वाराणसी से राधा रानी की अष्टधातु की प्रतिमा मंगाकर दिनांक 21 जनवरी 1828 स्थापित करायी।।।

संवत 1885 तदनुसार 21 जनवरी 1828 को वसंत पंचमी के दिन श्री राधा वंशीधर जी की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा कराई। जिसके बाद मंदिर में शुरू हुआ पूजन दर्शन अनवरत जारी है। प्रतिवर्ष असंख्य लोग भगवान का दर्शन पूजन कर मनवांछित फल प्राप्त करते हैं। श्री बंशीधर जी की प्रतिमा कला के दृष्टिकोण से अति सुंदर एवं अद्वितीय है। बिना किसी रसायन के प्रयोग या अन्य पॉलिस के प्रतिमा की चमक पूर्ववत है। भगवान श्री कृष्ण शेषनाग के उपर कमल पीड़िका पर बंशीवादन नृत्य करते विराजमान हैं। भूगर्भ में गड़े होने के कारण शेषनाग दृष्टिगोचर नहीं होते हैं।।।

श्री बंशीधर मंदिर के बारे में विद्वानों का मत है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों स्वरूप में हैं। विद्वानों का तर्क है कि यहां स्थित श्री बंशीधरजी जटाधारी के रूप में दिखाई देते है जबकि शास्त्रों में श्रीकृष्ण के खुले लट और घुंघराले बाल का वर्णन है इस लिहाज से मान्यता है कि श्रीकृष्ण जटाधारी अर्थात देवाधिदेव महादेव के रूप में विराजमान हैं। श्रीकृष्ण के शेषशैय्या पर होने का वर्णन शास्त्रों में मिलता है लेकिन यहां श्री बंशीधर जी शेषनाग के उपर कमलपुष्प पर विराजमान हैं, जबकि कमलपुष्प ब्रह्मा का आसन है। इस लिहाज से मान्यता है कि कमल पुष्पासीन श्री कृष्ण कमलासन ब्रह्मा के रूप में विराजमान हैं। भगवान श्रीकृष्ण स्वयं लक्ष्मीनाथ विष्णु के अवतार है इसलिये विष्णु के स्वरूप में विराजमान हैं। त्रिदेव के रूप में विराजमान भगवान सबकी मनोकामना पूरी करते हैं।।।

मंदिर में होने वाले कार्यक्रम व श्रद्धालुओं का आगमन

श्री बंशीधर मंदिर में वर्ष भर प्रतिमाह धार्मिक कार्यक्रम जारी रहता है। प्रतिवर्ष श्रीकृष्ण की जयंती जन्माष्टमी मथुरा एवं वृंदावन की तरह मनाई जाती है। इस मौके पर एक सप्ताह तक श्रीमद्भागवत कथा और रात्रि काल में वृंदावन की मंडली द्वारा रासलीला का आयोजन किया जाता है ।जिससे श्री बंशीधर नगर सहित आस पास के गांवों का माहौल भक्तिमय हो जाता है। जन्माष्टमी के मौके पर आठ दिनों तक आयोजित जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए देश भर से बड़ी संख्या में हजारों श्रद्धालु आते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर एक महीने तक मंदिर परिसर में भव्य मेला लगता है।

कार्तिक छठ पूजा पर देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु छठ व्रत करने मंदिर में दर्शन करने आते हैं। शारदीय और वासंतिक नवरात्रि दीपावली, गोवर्धन पूजा, चौबीसों एकादशी, वसंत पंचमी पर मंदिर स्थापना दिवस, अन्नकूट एवं हर माह पूर्णिमा आदि त्योहार पर मंदिर में विशेष कार्यक्रम व अनुष्ठान, भंडारा आयोजित होता है। जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय एवं बाहरी श्रद्धालु शामिल होते हैं। उपरोक्त विशेष आयोजन और अवसरों पर स्थानीय एवं पड़ोसी राज्यों के हजारों श्रद्धालु आते हैं।वही हर वर्ष में एक बार बंशीधर महोत्सव मनाया जाता है। साथ ही पहले से नगर उंटारी का नाम था उसे बदल कर श्री बंशीधर नगर कर दिया गया है। सांसद श्री विष्णुदयाल राम ने लोकसभा में श्री बंशीधर जी का महात्म्य बताते हुए भारत सरकार से श्री बंशीधर नगर को तीर्थ क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए स्वदेश दर्शन योजना में शामिल करने और श्री कृष्ण सर्किट से जोड़ने का अनुरोध किया है।।।

मंदिर से विभिन्न स्थानों की दूरी

मंदिर से रेलवे स्टेशन की दूरी 2.5 किमी, बस स्टैंड की दूरी 1.5 और थाना की दूरी 1.8 किमी, अनुमंडल की दूरी 2.8 और प्रखंड कार्यालय की दूरी 2.5 किमी, जिला मुख्यालय गढ़वा की दूरी 40 किमी है। झारखंड राज्य की राजधानी रांची की दूरी 245 किमी है। यूपी का सोनभद्र जिला सबसे करीब और सटा हुआ है। सोनभद्र जिलान्तर्गत विंढमगंज की दूरी मात्र 12 किमी है। जबकि सोनभद्र जिला मुख्यालय रॉबर्टसगंज की दूरी 100 किमी है। तीर्थ और धार्मिक लिहाज से महत्वपूर्ण वाराणसी एवं मिर्जापुर से 180 किमी है। बिहार की राजधानी पटना से 275 किमी है। दूसरे पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ का सरगुजा जिला भी सटा हुआ है। सरगुजा जिले का सनावल की दूरी लगभग 30 किमी है। सरगुजा का जिला मुख्यालय अंबिकापुर की दूरी 200 किमी है। तीसरे पड़ोसी राज्य बिहार का रोहतास जिला भी सटा हुआ है। रोहतास जिले का नौहट्टा की दूरी लगभग 50 किमी है। जहां से नाव से सोन नदी पार कर 8 महीने तक आवागमन होता है। श्री बंशीधर नगर शहर एनएच 75 एवं गढ़वा रोड चोपन रेलखंड पर स्थित है। रांची, वाराणसी, अंबिकापुर से श्री बंशीधर नगर तक अंतर्राज्यीय बस सेवा उपलब्ध है। प्रतिदिन कई बसें उपरोक्त स्थानों से आया जाया करती हैं। गढ़वा रोड चोपन रेलखंड पर चलने वाली सभी एक्सप्रेस और पैंसेंजर ट्रेनें श्री बंशीधर जी की नगरी में स्थित नगर ऊंटारी रेलवे स्टेशन पर रुकती हैं। सड़क और रेल मार्ग से वर्ष भर श्रद्धालुओं का आना जाना होता रहता है।।।

तीन राज्य तो बंशीधर नगर धाम से सटा हुआ रहने के कारण लोग आसानी से इनके दरबार में हाजिरी लगाने तो आते ही है ।लेकिन देश के कई कोने से भी भक्त यहां पहुंचते है ।और दर्शन कर अपनी मनोकामना बंशीधर नगर धाम में कहते है ।और उसे पूर्ण होने पर लोगों का आना जाना बराबर लगा रहता है।

छात्रों की पीठ के पीछे छिपकर राजनीति कर रही भाजपा, सीधे मैदान में उतरकर मुकाबला करे : विनोद पांडेय


रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं के मुद्दे पर भाजपा के आंदोलन और 48 घंटे के अल्टीमेटम को राजनीतिक नौटंकी करार दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की मौजूदा और पूर्व की गतिविधियों से यह पूरी तरह जगजाहिर हो चुका है कि पार्टी छात्रों को भ्रम में डालकर अपना राजनीतिक हित साधती रही है। भाजपा नेताओं को छात्रों के भविष्य की चिंता है तो उन्हें छात्रों की पीठ के पीछे से राजनीति करने के बजाय सीधे राजनीतिक और कानूनी लड़ाई के मैदान में उतरना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश के नेताओं को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब सीबीआई जांच का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तब मुख्य सचिव पर दबाव बनाकर वे आखिर क्या संदेश देना चाहते हैं। न्यायालय में विचाराधीन मामले में इस तरह राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश भाजपा की मंशा पर सवाल खड़े करती है। भाजपा को केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग में महारत हासिल है, यह कौन नहीं जानता है।

महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक निर्णय लिये हैं। सरकार ने पूरे मामले में जांच और कार्रवाई का रास्ता अपनाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सीआईडी लगातार कार्रवाई कर रही है और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे परीक्षा में कथित धांधली से जुड़े लोगों पर शिकंजा कस रहा है। इसी कार्रवाई से भाजपा घबराई हुई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अब सीबीआई जांच की मांग की आड़ में उन लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है, जिनके तार कथित परीक्षा धांधली से जुड़े हो सकते हैं। भाजपा को बताना चाहिए कि उसे राज्य की जांच एजेंसी की कार्रवाई पर भरोसा क्यों नहीं है और आखिर ऐसी कौन-सी जल्दबाजी है कि न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद वह सरकार पर दबाव बनाने की राजनीति कर रही है। भाजपा को डर है कि उसका कनेक्शन जगजाहिर ना हो जाए।

झामुमो महासचिव ने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। लेकिन छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक हथियार बनाकर सत्ता हासिल करने की कोशिश भी बर्दाश्त नहीं होगी। भाजपा को छात्रों की भावनाओं से खेलना और उनकी पीठ के पीछे से राजनीति करना बंद करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक लड़ाई लड़नी है तो भाजपा सीधे मैदान में आए, कानूनी लड़ाई लड़नी है तो कानून के रास्ते पर चले। छुप-छुपकर राजनीति करने वालों का चेहरा जनता के सामने बेनकाब हो चुका है। झारखंड की जनता यह समझ चुकी है कि भाजपा को छात्रों के भविष्य से ज्यादा अपनी राजनीतिक जमीन की चिंता है।

S-400 की सफलता के बाद S-500 और Su-57 पर भारत की नजर, रूस के साथ डिफेंस डील को लेकर हलचल!

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भारत अपनी वायु रक्षा प्रणाली और लड़ाकू विमानों की संख्या दोनों को तत्काल मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की जबरदस्त सफलता के बाद भारत की रूस के S-500 मिसाइल डिफेंस सिस्टम और SU-57 स्टील्थ फाइटर जेट पर निगाहें है।

पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, पाकिस्तानी हवाई खतरों के खिलाफ भारत की रूसी निर्मित एस-400 प्रणालियों को बड़े पैमाने पर तैनात किया गया था। पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना के S-400 सिस्टम ने असाधारण दूरी से दुश्मन के अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट को मार गिराया था। रूस अब उस परिचालन अनुभव का लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। रूस ने भारत को 5 अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन देने की भी पेशकश की है।

50 हजार करोड़ में हुई थी S-400 की डील

भारत ने 2018 में करीब 5.43 अरब डॉलर के समझौते के तहत पांच S-400 स्क्वाड्रन का ऑर्डर दिया था। इनमें से चार की डिलीवरी हो चुकी है, जबकि पांचवां और अंतिम स्क्वाड्रन नवंबर 2026 तक मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा भारत सरकार पांच और S-400 स्क्वाड्रन खरीदने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे चुकी है, जिसकी कीमत 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

भारत स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल निर्माण की ओर बढ़ा

लेकिन S-500 का प्रस्ताव काफी जटिल है। दरअसल, यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब भारत स्वदेशी लंबी दूरी की वायु रक्षा कार्यक्रम 'प्रोजेक्ट कुशा' के कुछ पहलुओं का परीक्षण शुरू कर रहा है, जिसका उद्देश्य अंततः एस-400 श्रेणी में एक भारतीय विकल्प प्रदान करना है। इसके अलावा, भारत का अपना बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रोग्राम भी काफी आगे बढ़ चुका है। ऐसे में भारी बजट खर्च करके S-500 खरीदना क्या सही फैसला होगा, या फिर इस डील से भारत के अपने घरेलू प्रोजेक्ट्स को झटका लगेगा।

सुखोई सु-57 फेलॉन को लेकर भी चर्चा

रूस का दूसरा प्रमुख प्रस्ताव है, सुखोई सु-57 फेलॉन। भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों की घटती संख्या और सबसे महत्वपूर्ण बात, आने वाले वर्षों तक किसी भारतीय स्टील्थ फाइटर के अभाव से जूझने के बीच, रूस ने पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर के प्रति अपना समर्थन और भी तीव्र कर दिया है। मॉस्को ने संकेत दिया है कि भविष्य में Su-57 से संबंधित किसी भी प्रस्ताव में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्थानीयकरण और भारत में उत्पादन को शामिल किया जा सकता है।

परिसीमन मामले पर भाजपा प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी का कांग्रेस पर जोरदार हमला

भाजपा ने झारखंड में परिसीमन मामले पर कांग्रेस द्वारा केवल झूठ परोसने और इस पर दोहरी राजनीति करने को लेकर जोरदार हमला किया है। पार्टी के प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी ने 2008 में तत्कालीन केंद्र की यूपीए सरकार पर हमला बोलते हुए कांग्रेस द्वारा की गई पूर्व की गलतियों के लिए कांग्रेस और राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आज परिसीमन का जो भी विवाद है उसकी जिम्मेवारी सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस की है, इस पार्टी की गलत नीतियों की यह देन है। कांग्रेस ने कभी इसका स्थाई समाधान चाहा ही नहीं और बीमारी का रूप बढ़ता गया। भाजपा के प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे।

श्री बाउरी ने कहा कि भाजपा जनजातीय समाज की सदैव हितैषी रही है। भाजपा ने कई मौकों पर इसे प्रमाणित किया है। उन्होंने कहा कि 2008 में देश में संविधान संशोधन किया गया था। तब जनसंख्या के आधार पर परिसीमन का प्रस्ताव कांग्रेस की सरकार ने किया था। इससे झारखंड की आदिवासी सीटों की संख्या 28 से घटकर 22 हो रही थी। ऐसी परिस्थिति में भाजपा ने जनजातीय समुदाय के हितों और उनकी भावनाओं का कद्र करते हुए कांग्रेस का समर्थन किया था। 2008 में भाजपा ने यूपीए सरकार को संविधान में 84वें संशोधन के लिए राजनीति से ऊपर उठकर साथ देने का काम दिया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने पूरे कार्यकाल में एक भी उदाहरण पेश करे कि उन्होंने जनजातीय समुदाय के विकास के लिए या उनके सम्मान के लिए कोई कार्य किया हो।

श्री बाउरी ने कहा कि आज कांग्रेस आदिवासी सीटें घटने को लेकर झारखंड में भ्रम फैला रही है। पहले तो कांग्रेस और राहुल गांधी को 2008 के प्रस्ताव के लिए जनजातीय समुदाय से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस ने कई गलतियां की है। अगर वास्तव में राहुल गांधी को अपराध बोध के कारण आज पछतावा हो रहा है, तो जनता से अविलंब माफी मांगनी चाहिए।

श्री बाउरी ने कहा कि आज जो चरित्र कांग्रेस दिखा रही है, 2008 में वही चरित्र अगर भारतीय जनता पार्टी दिखाई होती तो क्या यह संशोधन कांग्रेस कर पाती? उस समय भाजपा सकारात्मक राजनीति का परिचय देते हुए कांग्रेस की सरकार को अपना समर्थन नहीं देती तो क्या यह संशोधन संभव था ? तब तो 2008 में ही आदिवासी सीटें घट गई होती। लेकिन बीजेपी का यह स्वभाव नहीं है। भाजपा हमेशा राष्ट्र और यहां के नागरिकों के वृहद लाभ, उनके हक के साथ खड़ी रहती है।

श्री बाउरी ने कहा कि परिसीमन आयोग के गठन के पहले ही कांग्रेस हायतौबा मचा रही है। अभी तक परिसीमन आयोग का गठन बीजेपी सरकार ने किया भी नहीं है और न ही कोई प्रपोजल ही दिया गया है। कांग्रेस बेवजह आरोप लगा रही है। कांग्रेस कभी नहीं चाहती कि आदिवासी, दलित, महिलाओं को उनका वास्तविक हक अधिकार मिले। कांग्रेस हर बार नया झूठ, नया नेगेटिव लेकर जनता को भ्रमित करती रहती है। उनके इस झूठ से झारखंड को, देश को कितना नुकसान होगा इससे उनको कोई चिंता नहीं है।

उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया है कि इस बार परिसीमन का आधार जनसंख्या नहीं होगा। जितनी सीटें हैं उसमें 50% बढ़ोतरी के साथ सीटें बढ़ाई जाएगी। अगर यहां 81विस सीटें हैं तो 121 सीटें होगी, 28 एसटी सीटों की जगह वह बढ़कर 42 हो जाएगी, 9 sc सीटें हैं वह 14 हो जाएगी। जब सीटें बढ़ने वाली थी तो झामुमो कांग्रेस ने इसका विरोध किया। Jmm और कांग्रेस गृहमंत्री का जो 50% वाला मॉडल है उसको स्वीकार कर ले तो परिसीमन को लेकर जो विसंगतियां हैं वह हमेशा के लिए खत्म हो जाती। कांग्रेस झामुमो बतलाए कि वह किस कारण से जनसंख्या को ही आधार बनाकर रखना चाहती है। यह गृह मंत्री के 50% वाले मॉडल को क्यों नहीं स्वीकार कर रही है। इन दोनों दलों को यह बताना चाहिए। जब सीटें बढ़ रही थी तब उन्होंने विरोध क्यों किया और दूसरी तरफ लोगों को गुमराह कर रहे हैं कि सीट घट रही है। इसका कारण कांग्रेस की गलत नीतियां है।

श्री बाउरी ने कहा कि इतना ही नहीं,15 नवंबर 2000 को अटल बिहारी वाजपेई ने अलग झारखंड का सौगात दिया। कांग्रेस की सत्ता देश में लगातार रही लेकिन कांग्रेस ने कभी भी यहां के लोगों की भावनाओं को नहीं समझा और ना ही यहां के नागरिकों का सम्मान किया। एक समय आया था जब कांग्रेस अलग राज्य दे सकती थी लेकिन उसने सरकार बचाने के लिए यहां के लोगों को रिश्वत देना ज्यादा मुनासिब समझा। कांग्रेस ने बार-बार अपना चरित्र झारखंड वासियों के समक्ष दिखाने का काम किया है। अलग राज्य का दर्जा देकर बीजेपी ने बताया कि झारखंड वासियों की वह कितनी बड़ी हितैषी है। 1 नवंबर 2000 को ही देश के मानचित्र पर तीन राज्यों झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड का गठन हुआ था लेकिन झारखंड 15 नवंबर को इस लिए अस्तित्व में आया क्योंकि 15 नवंबर धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयंती है और उनकी जयंती ऐतिहासिक हो इसलिए अटक सरकार ने 15 नवंबर का दिन चुना। इतना ही नहीं मोदी सरकार द्वारा भगवान बिरसा की जन्म जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का घोषणा किया गया है। भाजपा ने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति जैसे देश के शीर्ष पद पर बैठाया। जब राज्य अलग बना तो पहले मुख्यमंत्री के रूप में बाबूलाल मरांडी ने शपथ ली। भाजपा ने हमेशा दिखलाया है कि वह आदिवासियों की सिर्फ हितकारी ही नहीं है बल्कि उनके लिए भाजपा सरकार वैसी योजनाएं और व्यवस्था लेकर आती है जिसके बलबूते वह स्वावलंबी बन सकें।

इस दौरान प्रदेश प्रवक्ता अशोक बड़ाइक, प्रकाश सिंह, मीडिया सह प्रभारी नीरज सिंह भी उपस्थित रहे।

मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 02 एवं 03 सितम्बर को रांची में

रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने मंगलवार को निर्वाचन सदन, धुर्वा, रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि 02 एवं 03 सितम्बर 2026 को नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “Voter Registration and Voter Registers 2026” आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन का उद्घाटन सत्र 02 सितम्बर को पूर्वाह्न 10:00 बजे से 11:30 बजे तक होगा।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन का आयोजन मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, झारखण्ड द्वारा सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखण्ड के सहयोग से किया जा रहा है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM), रांची, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची तथा सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची इसके नॉलेज पार्टनर हैं।

सम्मेलन में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखण्ड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर, NUSRL के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल, IIM रांची के निदेशक प्रो. दीपक कुमार श्रीवास्तव तथा सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के शिक्षाविद् एवं विशेषज्ञ भाग लेंगे। विशिष्ट अतिथियों में भारत निर्वाचन आयोग के प्रधान सचिव श्री अरविंद आनंद सहित निर्वाचन एवं अकादमिक क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे। उद्घाटन सत्र में “Voter Registration and Voter Registers” विषयक पुस्तक एवं सम्मेलन की स्मारिका का लोकार्पण भी किया जाएगा।

श्री के. रवि कुमार ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार द्वारा इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस (International IDEA) की अध्यक्षता ग्रहण करने के उपरांत भारत मंडपम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के क्रम में देश के राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचन कार्यालयों को निर्वाचन से संबंधित अलग-अलग विषयों पर शोध का दायित्व दिया गया था। इसी क्रम में झारखण्ड को “Voter Registration and Voter Registers” विषय पर शोध का दायित्व मिला।

उन्होंने बताया कि इस विषय पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय द्वारा देश-विदेश के विभिन्न संस्थानों, रिसर्च स्कॉलर्स एवं निर्वाचन विषय के शिक्षाविदों से शोध-पत्रों के एब्सट्रैक्ट्स आमंत्रित किए गए थे। कुल 230 एब्सट्रैक्ट्स प्राप्त हुए, जिनमें नॉलेज पार्टनर्स की टीम द्वारा मूल्यांकन के बाद 80 एब्सट्रैक्ट्स का चयन किया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न राज्यों के विषय-विशेषज्ञों से भी शोध-पत्र आमंत्रित किए गए। पूरी प्रक्रिया के बाद कुल 57 शोध-पत्रों को अंतिम रूप से चयनित किया गया है, जिन्हें सम्मेलन के विभिन्न तकनीकी सत्रों में विषयवार प्रस्तुत किया जाएगा।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि शुद्ध, समावेशी, अद्यतन एवं विश्वसनीय मतदाता सूची लोकतांत्रिक निर्वाचन व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। सम्मेलन में मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची निर्माण से जुड़े प्रशासनिक, कानूनी, सामाजिक, तकनीकी एवं अकादमिक पहलुओं के साथ व्यावहारिक चुनौतियों और बेहतर कार्यप्रणालियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि दो दिनों के तकनीकी एवं अकादमिक सत्रों में मतदाता पंजीकरण, निर्वाचक नामावली प्रबंधन, डिजिटाइजेशन, मतदाताओं की समावेशिता तथा लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़े उभरते विषयों पर चर्चा होगी। इसमें निर्वाचन प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारी, नीति-निर्माता, विधि विशेषज्ञ, शिक्षाविद्, शोधकर्ता, पत्रकार एवं सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि सहभागिता करेंगे।

श्री के. रवि कुमार ने कहा कि सम्मेलन के माध्यम से निर्वाचन प्रबंधन से जुड़े व्यावहारिक अनुभवों और अकादमिक शोध को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है। देश-विदेश के अनुभवों, शोध-पत्रों एवं विशेषज्ञों के विचारों से मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची प्रबंधन की वर्तमान एवं भविष्य की चुनौतियों को समझने तथा बेहतर कार्यप्रणालियों की पहचान करने में सहायता मिलेगी। सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्ष एवं सुझाव भविष्य में निर्वाचन प्रबंधन की प्रक्रियाओं को और अधिक प्रभावी, समावेशी एवं विश्वसनीय बनाने में उपयोगी सिद्ध होंगे।

इस अवसर पर अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री सुबोध कुमार, राज्य प्रशिक्षण नोडल पदाधिकारी श्री देव दास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी श्री धीरज कुमार ठाकुर, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखण्ड के राजनीति विज्ञान एवं लोक प्रशासन विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. आलोक कुमार गुप्ता, अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. अपर्णा, IIM रांची के लिबरल आर्ट्स विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. चार्वाक पति, NUSRL रांची के विधि विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आनंदकुमार आर. शिंदे, सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची के राजनीति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बी.के. सिन्हा तथा सहायक प्रोफेसर डॉ. आशुतोष कुमार पांडेय सहित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।