32 मन विशुद्ध सोने के अलौकिक विग्रह : श्री वंशीधर नगर धाम - पंचम धाम की महिमा

अभय तिवारी ।

गढ़वा :- विंध्य क्षेत्र अंतर्गत झारखंड के पश्चिम छोर पर गढ़वा जिला के बंशीधर नगर धाम, छत्तीसगढ़, यूपी और बिहार यानी तीन राज्यों के त्रिकोण पर वनों एवं पर्वतों से आच्छादित खूबसूरत वादियों के बीच और पतित पावनी कल कल निनादिनी मां बांकी नदी के किनारे बसा श्री बंशीधर नगर इस भूमंडल पर पांचवां धाम है।

विद्वानों के मुताबिक ऐसा भगवान श्रीकृष्ण जी द्वारा विग्रह रुप में यहां स्वयं आकर विराजमान होना है। विग्रह रुप में श्री वंशीधर जी का प्राकट्य विग्रहावतार माना जाता है। विद्वानों के मुताबिक श्री वंशीधर जी के रुप में उनका विग्रहावतार, अर्चावतार भी है। इसलिए इसे श्री बंशीधर नगर धाम के नाम से जाना जाता है।

विद्वानों की राय है कि आमतौर पर पहले किसी मंदिर का निर्माण होता है, उसके बाद मंदिर में भगवान का विग्रह स्थापित कर प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। लेकिन श्री वंशीधर मंदिर में ठीक इसके विपरीत रानी शिवमानी देवी को स्वप्न देकर पधारे भगवान श्री वंशीधर जी के विग्रह की स्थापना हुई और उसके बाद मंदिर का निर्माण हुआ है। श्री वंशीधर जी का प्रतिमा 32 मन विशुद्ध सोने का विग्रह मनमोहक, अदभुत, अलौकिक और अकल्पनीय है। भगवान श्रीकृष्ण जी का ऐसा विग्रह दुनियां के किसी कोने में नहीं है।

भगवान के विग्रह का वर्णन शब्दों में करना कठिन है, लेकिन एक वाक्य कहना और लिखना हो तो बस यही कहा और लिखा जायेगा कि जिनके दर्शन मात्र से सारे पीड़ा और संताप दूर हो जाते हैं। तन और मन हर्षित हो जाता है। विग्रह ऐसा कि नजर नहीं हटती। हमेशा देखते रहने का जी करता है।

श्री बंशीधर नगर में श्री वंशीधर जी के कण कण में विद्यमान रहने का अहसास होता है। इसके कारण यह स्थान श्रीकृष्ण की उपासना करने वाले व वैष्णवों के प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यहां सुविख्यात वैष्णव संत जगदाचार्य श्री श्री 1008 त्रिदंडी स्वामी जी महाराज, उनके शिष्य श्री श्री 1008 लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज व श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर जी महाराज समेत वैष्णव संप्रदाय के कई चोटी के संत यहां भगवान का दर्शन पूजन कर श्री वंशीधर धाम व श्री वंशीधर जी की महिमा का वर्णन कर चुके हैं।

पंडित राहुल सांकृत्यायन और विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय कई जानी मानी हस्तियां भी भगवान का दर्शन अर्चन कर चुके हैं। श्री वंशीधर मंदिर में श्रीकृष्ण जी की वंशीवादन करती आदमकद प्रतिमा के दर्शन के बाद लोगों को अदभुत सुख शांति की अनुभूति होती है। इस नगरी में कभी शोक और उदासी का भाव किसी के मन में उत्पन्न नहीं होता है। बाहर से श्री वंशीधर जी की नगरी में जो भी श्रद्धालु आते हैं, बस भगवान के दर्शन मात्र से उनके चित्त को परम शांति मिलती है। श्री वंशीधर जी के द्वार पर कभी किसी को मांगने की जरुरत नहीं पड़ी है। श्री वंशीधर के द्वार से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटा। जो भी श्रद्धालु श्री वंशीधरजी के दरबार में गया, उसकी अभिष्ट कामना की पूर्ति अवश्य हुई है। ऐसी मान्यता है कि भगवान अपने द्वार पर आने वाले भक्तों की मनोकामना को अवश्य पूरी करते हैं।

श्री बंशीधर नगरी की परिधि के भीतर अब तक कभी किसी प्रकार के प्राकृतिक आपदा का प्रभाव नहीं पड़ा है। लगभग एक दशक तक घोर उग्रवाद क्षेत्र से ग्रसित होने के बाद भी श्री बंशीधर नगर के लोगों में भय के वातावरण का कभी अहसास नहीं हुआ। श्री वंशीधर क्षेत्र में कभी महामारी को आसपास भटकने का भी अवसर नहीं मिला है। मतलब इस नगरी में सब कुछ श्री वंशीधर जी की इच्छा के अनुकूल होता है। प्राकृतिक आपदा और महामारी जैसे असामयिक घटना जिससे श्री वंशीधर जी के भक्त को परेशानी और शोक हो, इन सब चीजों को श्री वंशीधरजी अपने क्षेत्र में कभी फटकने नहीं देते। श्री वंशीधर जी की प्रेरणा से यहां वर्ष भर धार्मिक अनुष्ठान, संत्सग आदि का क्रम जारी रहता है। लोग एक दूसरे के हर सुख दुख में सहभागी बनकर जीवन यापन करते हैं। श्री वंशीधर की कृपा ही है कि लोग बिना किसी भय अथवा चिंता किये यहां सुखपूर्वक निवास करते हैं।

श्री बंशीधर नगर को योगेश्वर कृष्ण की भूमि और इस धरती को द्वितीय मथुरा और वृंदावन माना जाता है। श्री बंशीधर जी की स्थापना के बारे में पलामू के प्रसिद्ध इतिहासकारों स्व. रामदीन पाण्डेय, स्व. हवलधारी राम गुप्त हलधर एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत्त शिक्षक सह इतिहासकार डॉ रमेश चंचल ने अपनी रचनाओं में बड़ी विस्तार से की है। इतिहासकारों के अनुसार संवत 1885 में राजा स्व भवानी सिंह देव की विधवा शिवमानी कुंवर राजकाज का संचालन कर रही थी। रानी शिवमानी कुंवर धर्मपरायण एवं भगवत भक्ति में पूर्ण निष्ठावान थी। 14 अगस्त 1827 को रानी साहिबा जन्माष्टमी व्रत किया था उसी दिन मध्य रात्रि में उन्हें स्वप्न में भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन हुआ।

स्वप्न में श्री कृष्ण ने रानी से वर मांगने को कहा। रानी ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा कि प्रभु आपकी सदैव कृपा हम पर रहे। तब भगवान कृष्ण ने रानी से कनहर नदी के किनारे यूपी के महुअरिया के निकट शिव पहाड़ी अपनी प्रतिमा के गड़े होने की जानकारी दी और उन्हें अपने राज्य में लाने को कहा। भगवत कृपा जान रानी ने शिवपहाड़ी जाकर विधिवत पूजा अर्चना के बाद खुदाई करायी तो श्री बंशीधर जी की अद्वितीय असाधारण प्रतिमा मिली। जिसे हाथियों पर बैठाकर श्री बंशीधर नगर लाया गया। गढ़ के मुख्य द्वार पर अंतिम हाथी बैठ गया। लाख प्रयत्न के बावजूद हाथी नहीं उठने पर रानी ने राजपुरोहितों से राय मशविरा कर वहीं पर मंदिर का निर्माण कराया तथा वाराणसी से राधा रानी की अष्टधातु की प्रतिमा मंगाकर दिनांक 21 जनवरी 1828 स्थापित करायी।।।

संवत 1885 तदनुसार 21 जनवरी 1828 को वसंत पंचमी के दिन श्री राधा वंशीधर जी की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा कराई। जिसके बाद मंदिर में शुरू हुआ पूजन दर्शन अनवरत जारी है। प्रतिवर्ष असंख्य लोग भगवान का दर्शन पूजन कर मनवांछित फल प्राप्त करते हैं। श्री बंशीधर जी की प्रतिमा कला के दृष्टिकोण से अति सुंदर एवं अद्वितीय है। बिना किसी रसायन के प्रयोग या अन्य पॉलिस के प्रतिमा की चमक पूर्ववत है। भगवान श्री कृष्ण शेषनाग के उपर कमल पीड़िका पर बंशीवादन नृत्य करते विराजमान हैं। भूगर्भ में गड़े होने के कारण शेषनाग दृष्टिगोचर नहीं होते हैं।।।

श्री बंशीधर मंदिर के बारे में विद्वानों का मत है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों स्वरूप में हैं। विद्वानों का तर्क है कि यहां स्थित श्री बंशीधरजी जटाधारी के रूप में दिखाई देते है जबकि शास्त्रों में श्रीकृष्ण के खुले लट और घुंघराले बाल का वर्णन है इस लिहाज से मान्यता है कि श्रीकृष्ण जटाधारी अर्थात देवाधिदेव महादेव के रूप में विराजमान हैं। श्रीकृष्ण के शेषशैय्या पर होने का वर्णन शास्त्रों में मिलता है लेकिन यहां श्री बंशीधर जी शेषनाग के उपर कमलपुष्प पर विराजमान हैं, जबकि कमलपुष्प ब्रह्मा का आसन है। इस लिहाज से मान्यता है कि कमल पुष्पासीन श्री कृष्ण कमलासन ब्रह्मा के रूप में विराजमान हैं। भगवान श्रीकृष्ण स्वयं लक्ष्मीनाथ विष्णु के अवतार है इसलिये विष्णु के स्वरूप में विराजमान हैं। त्रिदेव के रूप में विराजमान भगवान सबकी मनोकामना पूरी करते हैं।।।

मंदिर में होने वाले कार्यक्रम व श्रद्धालुओं का आगमन

श्री बंशीधर मंदिर में वर्ष भर प्रतिमाह धार्मिक कार्यक्रम जारी रहता है। प्रतिवर्ष श्रीकृष्ण की जयंती जन्माष्टमी मथुरा एवं वृंदावन की तरह मनाई जाती है। इस मौके पर एक सप्ताह तक श्रीमद्भागवत कथा और रात्रि काल में वृंदावन की मंडली द्वारा रासलीला का आयोजन किया जाता है ।जिससे श्री बंशीधर नगर सहित आस पास के गांवों का माहौल भक्तिमय हो जाता है। जन्माष्टमी के मौके पर आठ दिनों तक आयोजित जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए देश भर से बड़ी संख्या में हजारों श्रद्धालु आते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर एक महीने तक मंदिर परिसर में भव्य मेला लगता है।

कार्तिक छठ पूजा पर देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु छठ व्रत करने मंदिर में दर्शन करने आते हैं। शारदीय और वासंतिक नवरात्रि दीपावली, गोवर्धन पूजा, चौबीसों एकादशी, वसंत पंचमी पर मंदिर स्थापना दिवस, अन्नकूट एवं हर माह पूर्णिमा आदि त्योहार पर मंदिर में विशेष कार्यक्रम व अनुष्ठान, भंडारा आयोजित होता है। जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय एवं बाहरी श्रद्धालु शामिल होते हैं। उपरोक्त विशेष आयोजन और अवसरों पर स्थानीय एवं पड़ोसी राज्यों के हजारों श्रद्धालु आते हैं।वही हर वर्ष में एक बार बंशीधर महोत्सव मनाया जाता है। साथ ही पहले से नगर उंटारी का नाम था उसे बदल कर श्री बंशीधर नगर कर दिया गया है। सांसद श्री विष्णुदयाल राम ने लोकसभा में श्री बंशीधर जी का महात्म्य बताते हुए भारत सरकार से श्री बंशीधर नगर को तीर्थ क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए स्वदेश दर्शन योजना में शामिल करने और श्री कृष्ण सर्किट से जोड़ने का अनुरोध किया है।।।

मंदिर से विभिन्न स्थानों की दूरी

मंदिर से रेलवे स्टेशन की दूरी 2.5 किमी, बस स्टैंड की दूरी 1.5 और थाना की दूरी 1.8 किमी, अनुमंडल की दूरी 2.8 और प्रखंड कार्यालय की दूरी 2.5 किमी, जिला मुख्यालय गढ़वा की दूरी 40 किमी है। झारखंड राज्य की राजधानी रांची की दूरी 245 किमी है। यूपी का सोनभद्र जिला सबसे करीब और सटा हुआ है। सोनभद्र जिलान्तर्गत विंढमगंज की दूरी मात्र 12 किमी है। जबकि सोनभद्र जिला मुख्यालय रॉबर्टसगंज की दूरी 100 किमी है। तीर्थ और धार्मिक लिहाज से महत्वपूर्ण वाराणसी एवं मिर्जापुर से 180 किमी है। बिहार की राजधानी पटना से 275 किमी है। दूसरे पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ का सरगुजा जिला भी सटा हुआ है। सरगुजा जिले का सनावल की दूरी लगभग 30 किमी है। सरगुजा का जिला मुख्यालय अंबिकापुर की दूरी 200 किमी है। तीसरे पड़ोसी राज्य बिहार का रोहतास जिला भी सटा हुआ है। रोहतास जिले का नौहट्टा की दूरी लगभग 50 किमी है। जहां से नाव से सोन नदी पार कर 8 महीने तक आवागमन होता है। श्री बंशीधर नगर शहर एनएच 75 एवं गढ़वा रोड चोपन रेलखंड पर स्थित है। रांची, वाराणसी, अंबिकापुर से श्री बंशीधर नगर तक अंतर्राज्यीय बस सेवा उपलब्ध है। प्रतिदिन कई बसें उपरोक्त स्थानों से आया जाया करती हैं। गढ़वा रोड चोपन रेलखंड पर चलने वाली सभी एक्सप्रेस और पैंसेंजर ट्रेनें श्री बंशीधर जी की नगरी में स्थित नगर ऊंटारी रेलवे स्टेशन पर रुकती हैं। सड़क और रेल मार्ग से वर्ष भर श्रद्धालुओं का आना जाना होता रहता है।।।

तीन राज्य तो बंशीधर नगर धाम से सटा हुआ रहने के कारण लोग आसानी से इनके दरबार में हाजिरी लगाने तो आते ही है ।लेकिन देश के कई कोने से भी भक्त यहां पहुंचते है ।और दर्शन कर अपनी मनोकामना बंशीधर नगर धाम में कहते है ।और उसे पूर्ण होने पर लोगों का आना जाना बराबर लगा रहता है।

छात्रों की पीठ के पीछे छिपकर राजनीति कर रही भाजपा, सीधे मैदान में उतरकर मुकाबला करे : विनोद पांडेय


रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं के मुद्दे पर भाजपा के आंदोलन और 48 घंटे के अल्टीमेटम को राजनीतिक नौटंकी करार दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की मौजूदा और पूर्व की गतिविधियों से यह पूरी तरह जगजाहिर हो चुका है कि पार्टी छात्रों को भ्रम में डालकर अपना राजनीतिक हित साधती रही है। भाजपा नेताओं को छात्रों के भविष्य की चिंता है तो उन्हें छात्रों की पीठ के पीछे से राजनीति करने के बजाय सीधे राजनीतिक और कानूनी लड़ाई के मैदान में उतरना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश के नेताओं को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब सीबीआई जांच का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तब मुख्य सचिव पर दबाव बनाकर वे आखिर क्या संदेश देना चाहते हैं। न्यायालय में विचाराधीन मामले में इस तरह राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश भाजपा की मंशा पर सवाल खड़े करती है। भाजपा को केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग में महारत हासिल है, यह कौन नहीं जानता है।

महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक निर्णय लिये हैं। सरकार ने पूरे मामले में जांच और कार्रवाई का रास्ता अपनाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सीआईडी लगातार कार्रवाई कर रही है और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे परीक्षा में कथित धांधली से जुड़े लोगों पर शिकंजा कस रहा है। इसी कार्रवाई से भाजपा घबराई हुई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अब सीबीआई जांच की मांग की आड़ में उन लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है, जिनके तार कथित परीक्षा धांधली से जुड़े हो सकते हैं। भाजपा को बताना चाहिए कि उसे राज्य की जांच एजेंसी की कार्रवाई पर भरोसा क्यों नहीं है और आखिर ऐसी कौन-सी जल्दबाजी है कि न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद वह सरकार पर दबाव बनाने की राजनीति कर रही है। भाजपा को डर है कि उसका कनेक्शन जगजाहिर ना हो जाए।

झामुमो महासचिव ने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। लेकिन छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक हथियार बनाकर सत्ता हासिल करने की कोशिश भी बर्दाश्त नहीं होगी। भाजपा को छात्रों की भावनाओं से खेलना और उनकी पीठ के पीछे से राजनीति करना बंद करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक लड़ाई लड़नी है तो भाजपा सीधे मैदान में आए, कानूनी लड़ाई लड़नी है तो कानून के रास्ते पर चले। छुप-छुपकर राजनीति करने वालों का चेहरा जनता के सामने बेनकाब हो चुका है। झारखंड की जनता यह समझ चुकी है कि भाजपा को छात्रों के भविष्य से ज्यादा अपनी राजनीतिक जमीन की चिंता है।

S-400 की सफलता के बाद S-500 और Su-57 पर भारत की नजर, रूस के साथ डिफेंस डील को लेकर हलचल!

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भारत अपनी वायु रक्षा प्रणाली और लड़ाकू विमानों की संख्या दोनों को तत्काल मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की जबरदस्त सफलता के बाद भारत की रूस के S-500 मिसाइल डिफेंस सिस्टम और SU-57 स्टील्थ फाइटर जेट पर निगाहें है।

पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, पाकिस्तानी हवाई खतरों के खिलाफ भारत की रूसी निर्मित एस-400 प्रणालियों को बड़े पैमाने पर तैनात किया गया था। पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना के S-400 सिस्टम ने असाधारण दूरी से दुश्मन के अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट को मार गिराया था। रूस अब उस परिचालन अनुभव का लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। रूस ने भारत को 5 अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन देने की भी पेशकश की है।

50 हजार करोड़ में हुई थी S-400 की डील

भारत ने 2018 में करीब 5.43 अरब डॉलर के समझौते के तहत पांच S-400 स्क्वाड्रन का ऑर्डर दिया था। इनमें से चार की डिलीवरी हो चुकी है, जबकि पांचवां और अंतिम स्क्वाड्रन नवंबर 2026 तक मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा भारत सरकार पांच और S-400 स्क्वाड्रन खरीदने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे चुकी है, जिसकी कीमत 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

भारत स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल निर्माण की ओर बढ़ा

लेकिन S-500 का प्रस्ताव काफी जटिल है। दरअसल, यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब भारत स्वदेशी लंबी दूरी की वायु रक्षा कार्यक्रम 'प्रोजेक्ट कुशा' के कुछ पहलुओं का परीक्षण शुरू कर रहा है, जिसका उद्देश्य अंततः एस-400 श्रेणी में एक भारतीय विकल्प प्रदान करना है। इसके अलावा, भारत का अपना बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रोग्राम भी काफी आगे बढ़ चुका है। ऐसे में भारी बजट खर्च करके S-500 खरीदना क्या सही फैसला होगा, या फिर इस डील से भारत के अपने घरेलू प्रोजेक्ट्स को झटका लगेगा।

सुखोई सु-57 फेलॉन को लेकर भी चर्चा

रूस का दूसरा प्रमुख प्रस्ताव है, सुखोई सु-57 फेलॉन। भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों की घटती संख्या और सबसे महत्वपूर्ण बात, आने वाले वर्षों तक किसी भारतीय स्टील्थ फाइटर के अभाव से जूझने के बीच, रूस ने पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर के प्रति अपना समर्थन और भी तीव्र कर दिया है। मॉस्को ने संकेत दिया है कि भविष्य में Su-57 से संबंधित किसी भी प्रस्ताव में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्थानीयकरण और भारत में उत्पादन को शामिल किया जा सकता है।

परिसीमन मामले पर भाजपा प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी का कांग्रेस पर जोरदार हमला

भाजपा ने झारखंड में परिसीमन मामले पर कांग्रेस द्वारा केवल झूठ परोसने और इस पर दोहरी राजनीति करने को लेकर जोरदार हमला किया है। पार्टी के प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी ने 2008 में तत्कालीन केंद्र की यूपीए सरकार पर हमला बोलते हुए कांग्रेस द्वारा की गई पूर्व की गलतियों के लिए कांग्रेस और राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आज परिसीमन का जो भी विवाद है उसकी जिम्मेवारी सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस की है, इस पार्टी की गलत नीतियों की यह देन है। कांग्रेस ने कभी इसका स्थाई समाधान चाहा ही नहीं और बीमारी का रूप बढ़ता गया। भाजपा के प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे।

श्री बाउरी ने कहा कि भाजपा जनजातीय समाज की सदैव हितैषी रही है। भाजपा ने कई मौकों पर इसे प्रमाणित किया है। उन्होंने कहा कि 2008 में देश में संविधान संशोधन किया गया था। तब जनसंख्या के आधार पर परिसीमन का प्रस्ताव कांग्रेस की सरकार ने किया था। इससे झारखंड की आदिवासी सीटों की संख्या 28 से घटकर 22 हो रही थी। ऐसी परिस्थिति में भाजपा ने जनजातीय समुदाय के हितों और उनकी भावनाओं का कद्र करते हुए कांग्रेस का समर्थन किया था। 2008 में भाजपा ने यूपीए सरकार को संविधान में 84वें संशोधन के लिए राजनीति से ऊपर उठकर साथ देने का काम दिया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने पूरे कार्यकाल में एक भी उदाहरण पेश करे कि उन्होंने जनजातीय समुदाय के विकास के लिए या उनके सम्मान के लिए कोई कार्य किया हो।

श्री बाउरी ने कहा कि आज कांग्रेस आदिवासी सीटें घटने को लेकर झारखंड में भ्रम फैला रही है। पहले तो कांग्रेस और राहुल गांधी को 2008 के प्रस्ताव के लिए जनजातीय समुदाय से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस ने कई गलतियां की है। अगर वास्तव में राहुल गांधी को अपराध बोध के कारण आज पछतावा हो रहा है, तो जनता से अविलंब माफी मांगनी चाहिए।

श्री बाउरी ने कहा कि आज जो चरित्र कांग्रेस दिखा रही है, 2008 में वही चरित्र अगर भारतीय जनता पार्टी दिखाई होती तो क्या यह संशोधन कांग्रेस कर पाती? उस समय भाजपा सकारात्मक राजनीति का परिचय देते हुए कांग्रेस की सरकार को अपना समर्थन नहीं देती तो क्या यह संशोधन संभव था ? तब तो 2008 में ही आदिवासी सीटें घट गई होती। लेकिन बीजेपी का यह स्वभाव नहीं है। भाजपा हमेशा राष्ट्र और यहां के नागरिकों के वृहद लाभ, उनके हक के साथ खड़ी रहती है।

श्री बाउरी ने कहा कि परिसीमन आयोग के गठन के पहले ही कांग्रेस हायतौबा मचा रही है। अभी तक परिसीमन आयोग का गठन बीजेपी सरकार ने किया भी नहीं है और न ही कोई प्रपोजल ही दिया गया है। कांग्रेस बेवजह आरोप लगा रही है। कांग्रेस कभी नहीं चाहती कि आदिवासी, दलित, महिलाओं को उनका वास्तविक हक अधिकार मिले। कांग्रेस हर बार नया झूठ, नया नेगेटिव लेकर जनता को भ्रमित करती रहती है। उनके इस झूठ से झारखंड को, देश को कितना नुकसान होगा इससे उनको कोई चिंता नहीं है।

उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया है कि इस बार परिसीमन का आधार जनसंख्या नहीं होगा। जितनी सीटें हैं उसमें 50% बढ़ोतरी के साथ सीटें बढ़ाई जाएगी। अगर यहां 81विस सीटें हैं तो 121 सीटें होगी, 28 एसटी सीटों की जगह वह बढ़कर 42 हो जाएगी, 9 sc सीटें हैं वह 14 हो जाएगी। जब सीटें बढ़ने वाली थी तो झामुमो कांग्रेस ने इसका विरोध किया। Jmm और कांग्रेस गृहमंत्री का जो 50% वाला मॉडल है उसको स्वीकार कर ले तो परिसीमन को लेकर जो विसंगतियां हैं वह हमेशा के लिए खत्म हो जाती। कांग्रेस झामुमो बतलाए कि वह किस कारण से जनसंख्या को ही आधार बनाकर रखना चाहती है। यह गृह मंत्री के 50% वाले मॉडल को क्यों नहीं स्वीकार कर रही है। इन दोनों दलों को यह बताना चाहिए। जब सीटें बढ़ रही थी तब उन्होंने विरोध क्यों किया और दूसरी तरफ लोगों को गुमराह कर रहे हैं कि सीट घट रही है। इसका कारण कांग्रेस की गलत नीतियां है।

श्री बाउरी ने कहा कि इतना ही नहीं,15 नवंबर 2000 को अटल बिहारी वाजपेई ने अलग झारखंड का सौगात दिया। कांग्रेस की सत्ता देश में लगातार रही लेकिन कांग्रेस ने कभी भी यहां के लोगों की भावनाओं को नहीं समझा और ना ही यहां के नागरिकों का सम्मान किया। एक समय आया था जब कांग्रेस अलग राज्य दे सकती थी लेकिन उसने सरकार बचाने के लिए यहां के लोगों को रिश्वत देना ज्यादा मुनासिब समझा। कांग्रेस ने बार-बार अपना चरित्र झारखंड वासियों के समक्ष दिखाने का काम किया है। अलग राज्य का दर्जा देकर बीजेपी ने बताया कि झारखंड वासियों की वह कितनी बड़ी हितैषी है। 1 नवंबर 2000 को ही देश के मानचित्र पर तीन राज्यों झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड का गठन हुआ था लेकिन झारखंड 15 नवंबर को इस लिए अस्तित्व में आया क्योंकि 15 नवंबर धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयंती है और उनकी जयंती ऐतिहासिक हो इसलिए अटक सरकार ने 15 नवंबर का दिन चुना। इतना ही नहीं मोदी सरकार द्वारा भगवान बिरसा की जन्म जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का घोषणा किया गया है। भाजपा ने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति जैसे देश के शीर्ष पद पर बैठाया। जब राज्य अलग बना तो पहले मुख्यमंत्री के रूप में बाबूलाल मरांडी ने शपथ ली। भाजपा ने हमेशा दिखलाया है कि वह आदिवासियों की सिर्फ हितकारी ही नहीं है बल्कि उनके लिए भाजपा सरकार वैसी योजनाएं और व्यवस्था लेकर आती है जिसके बलबूते वह स्वावलंबी बन सकें।

इस दौरान प्रदेश प्रवक्ता अशोक बड़ाइक, प्रकाश सिंह, मीडिया सह प्रभारी नीरज सिंह भी उपस्थित रहे।

मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 02 एवं 03 सितम्बर को रांची में

रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने मंगलवार को निर्वाचन सदन, धुर्वा, रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि 02 एवं 03 सितम्बर 2026 को नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “Voter Registration and Voter Registers 2026” आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन का उद्घाटन सत्र 02 सितम्बर को पूर्वाह्न 10:00 बजे से 11:30 बजे तक होगा।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन का आयोजन मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, झारखण्ड द्वारा सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखण्ड के सहयोग से किया जा रहा है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM), रांची, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची तथा सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची इसके नॉलेज पार्टनर हैं।

सम्मेलन में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखण्ड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर, NUSRL के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल, IIM रांची के निदेशक प्रो. दीपक कुमार श्रीवास्तव तथा सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के शिक्षाविद् एवं विशेषज्ञ भाग लेंगे। विशिष्ट अतिथियों में भारत निर्वाचन आयोग के प्रधान सचिव श्री अरविंद आनंद सहित निर्वाचन एवं अकादमिक क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे। उद्घाटन सत्र में “Voter Registration and Voter Registers” विषयक पुस्तक एवं सम्मेलन की स्मारिका का लोकार्पण भी किया जाएगा।

श्री के. रवि कुमार ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार द्वारा इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस (International IDEA) की अध्यक्षता ग्रहण करने के उपरांत भारत मंडपम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के क्रम में देश के राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचन कार्यालयों को निर्वाचन से संबंधित अलग-अलग विषयों पर शोध का दायित्व दिया गया था। इसी क्रम में झारखण्ड को “Voter Registration and Voter Registers” विषय पर शोध का दायित्व मिला।

उन्होंने बताया कि इस विषय पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय द्वारा देश-विदेश के विभिन्न संस्थानों, रिसर्च स्कॉलर्स एवं निर्वाचन विषय के शिक्षाविदों से शोध-पत्रों के एब्सट्रैक्ट्स आमंत्रित किए गए थे। कुल 230 एब्सट्रैक्ट्स प्राप्त हुए, जिनमें नॉलेज पार्टनर्स की टीम द्वारा मूल्यांकन के बाद 80 एब्सट्रैक्ट्स का चयन किया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न राज्यों के विषय-विशेषज्ञों से भी शोध-पत्र आमंत्रित किए गए। पूरी प्रक्रिया के बाद कुल 57 शोध-पत्रों को अंतिम रूप से चयनित किया गया है, जिन्हें सम्मेलन के विभिन्न तकनीकी सत्रों में विषयवार प्रस्तुत किया जाएगा।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि शुद्ध, समावेशी, अद्यतन एवं विश्वसनीय मतदाता सूची लोकतांत्रिक निर्वाचन व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। सम्मेलन में मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची निर्माण से जुड़े प्रशासनिक, कानूनी, सामाजिक, तकनीकी एवं अकादमिक पहलुओं के साथ व्यावहारिक चुनौतियों और बेहतर कार्यप्रणालियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि दो दिनों के तकनीकी एवं अकादमिक सत्रों में मतदाता पंजीकरण, निर्वाचक नामावली प्रबंधन, डिजिटाइजेशन, मतदाताओं की समावेशिता तथा लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़े उभरते विषयों पर चर्चा होगी। इसमें निर्वाचन प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारी, नीति-निर्माता, विधि विशेषज्ञ, शिक्षाविद्, शोधकर्ता, पत्रकार एवं सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि सहभागिता करेंगे।

श्री के. रवि कुमार ने कहा कि सम्मेलन के माध्यम से निर्वाचन प्रबंधन से जुड़े व्यावहारिक अनुभवों और अकादमिक शोध को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है। देश-विदेश के अनुभवों, शोध-पत्रों एवं विशेषज्ञों के विचारों से मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची प्रबंधन की वर्तमान एवं भविष्य की चुनौतियों को समझने तथा बेहतर कार्यप्रणालियों की पहचान करने में सहायता मिलेगी। सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्ष एवं सुझाव भविष्य में निर्वाचन प्रबंधन की प्रक्रियाओं को और अधिक प्रभावी, समावेशी एवं विश्वसनीय बनाने में उपयोगी सिद्ध होंगे।

इस अवसर पर अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री सुबोध कुमार, राज्य प्रशिक्षण नोडल पदाधिकारी श्री देव दास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी श्री धीरज कुमार ठाकुर, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखण्ड के राजनीति विज्ञान एवं लोक प्रशासन विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. आलोक कुमार गुप्ता, अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. अपर्णा, IIM रांची के लिबरल आर्ट्स विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. चार्वाक पति, NUSRL रांची के विधि विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आनंदकुमार आर. शिंदे, सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची के राजनीति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बी.के. सिन्हा तथा सहायक प्रोफेसर डॉ. आशुतोष कुमार पांडेय सहित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

नेतरहाट की नाशपाती ने पकड़ी संगठित बाजारों की राह, महिला किसानों को मिल रहा बेहतर दाम

नेतरहाट की पहाड़ियों में उगने वाली प्रीमियम गुणवत्ता की नाशपाती अब स्थानीय हाट-बाजारों से निकलकर संगठित और बड़े बाजारों तक पहुंच रही है। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के SETU (Scaling and Enabling for Trade Upliftment) सेल की पहल से महिला-नेतृत्व वाले किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के माध्यम से किसानों को संस्थागत खरीदारों से जोड़ा जा रहा है।

इस पहल के तहत अब तक करीब 5 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता की नाशपाती संगठित खरीदारों तक पहुंचाई जा चुकी है, जबकि लगभग 10 मीट्रिक टन नाशपाती की एक और खेप असम के गुवाहाटी भेजने के लिए तैयार की जा रही है।

JSLPS की इस पहल में केवल बाजार उपलब्ध कराने पर ही नहीं, बल्कि पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत नाशपाती का सामूहिक संग्रहण, वैज्ञानिक ग्रेडिंग और छंटाई, गुणवत्ता जांच, आधुनिक पैकेजिंग तथा सुव्यवस्थित लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने लगा है।

Agri Arjuna के माध्यम से नेतरहाट की नाशपाती अब संगठित रिटेल चेन, जिसमें रिलायंस भी शामिल है, तक पहुंच रही है। वहीं, Tincture Agri के जरिए अतिरिक्त खेपों को प्रीमियम घरेलू बाजारों में भेजा जा रहा है।

नेतरहाट की ठंडी जलवायु नाशपाती की खेती के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है और यह क्षेत्र झारखंड के प्रमुख नाशपाती उत्पादक इलाकों में शामिल है। JSLPS की यह पहल किसानों को पारंपरिक बाजारों पर निर्भरता से आगे बढ़ाकर संगठित मूल्य श्रृंखला से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो रही है। इससे नेतरहाट की नाशपाती को राज्य के एक प्रमुख बागवानी उत्पाद के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से निदेशक आई०आई०टी० मण्डी, प्रो० लक्ष्मीधर बेहरा ने की मुलाकात

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से आज कांके रोड रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में निदेशक आई०आई०टी० मण्डी, प्रो० लक्ष्मीधर बेहरा ने मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री को उन्होंने इस्कॉन रांची द्वारा आगामी 04 सितंबर 2026 को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर कटहल मोड़, रांची में आयोजित होने वाले "श्री कृष्ण जन्माष्टमी महामहोत्सव" में सम्मिलित होने हेतु सादर आमंत्रित किया।

साथ ही मुख्यमंत्री एवं उनके बीच राज्य में युवाओं के स्किल डेवलपमेंट, एआई, रोबोटिक्स एवं आधुनिक तकनीक की उपयोगिता के माध्यम से आर्थिक समृद्धि की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

मौके पर मुख्यमंत्री ने उन्हें श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित महामहोत्सव के लिए अपनी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर इस्कॉन रांची के श्रीमान प्रदीप (PR) एवं श्रीमान सुधीर कृष्ण चैतन्य दास उपस्थित थे।

सिंधु जल संधि पर वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता अदालत के फैसले को भारत ने किया खारिज, दिया दो टूक जवाब

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भारत ने सिंधु जल संधि पर वर्ल्ड बैंक की बनाई कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (CoA) के फ़ैसले को मानने से इनकार कर दिया है। भारत ने कोर्ट को अवैध बताते हुए कहा कि इस मामले पर कोई सुनवाई उसके अधिकारी क्षेत्र में नहीं आता है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि CoA की ओर से दिए गए फैसलों का भारत की कार्रवाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के निर्णय को भी दोहराया।

भारत ने संस्था को “अवैध रूप से गठित” बताया

विदेश मंत्रालय ने सोमवार को सिंधु जल संधि को लेकर विश्व बैंक द्वारा गठित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने इस संस्था को “अवैध रूप से गठित” बताते हुए कहा कि पाकिस्तान के साथ जल संधि को स्थगित रखने का उसका फैसला लागू रहेगा। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि विश्व बैंक द्वारा गठित यह तथाकथित मध्यस्थता अदालत संधि की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए बनाई गई थी। इसलिए भारत इसके फैसले को पूरी तरह खारिज करता है, जैसा कि वह इस संस्था की पिछली टिप्पणियों को भी खारिज करता रहा है।

भारत ने कहा- निकाय का गठन ही सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने कभी भी इस कथित मध्यस्थता अदालत के कानूनी अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया है। भारत का लगातार यह रुख रहा है कि इस निकाय का गठन ही सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत इस तथाकथित अदालत के समक्ष कभी पेश नहीं हुआ और न ही उसने इसके पहले दिए गए किसी फैसले या टिप्पणी को मान्यता दी है।

सिंधु जल समझौते पर मध्यस्थता कोर्ट ने क्या कहा

इससे पहले, नीदरलैंड के हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत ने आदेश दिया कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि पूरी तरह से लागू है। मध्यस्थता अदालत ने भारत से कहा कि यह 'समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करे।

सिंधु जल समझौता कब हुआ था

भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में सिंधु जल समझौता हुआ था। भारत का हमेशा से मानना रहा है कि सिंधु जल समझौता एकतरफा पाकिस्तान के हक में हुई और उसका अधिकतर लाभ उसे ही दिया जा रहा है और फिर भी वह उसका पूरी तरह से फायदा उठा नहीं पा रहा। पाकिस्तान ने हमेशा इस संधि का फायदा उठाते हुए खूब मनमानी की और भारत के सिंधु जलों पर समझौते के तहत मिले उचित अधिकारों के इस्तेमाल में भी अड़ंगा डालने की आदत बना ली। भारत ने सबकुछ सहते हुए 65 साल तक इस एकतरफा समझौते का पालन किया और सारे नुकसान को ताक पर रखकर संधि का सम्मान किया।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को किया था स्थगित

भारत ने अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। इसके बाद से पाकिस्तान के नेताओं ने कई बार पानी को अपनी 'रेड लाइन' बताया है और भारत के इस कदम को लेकर चेतावनी दी है। पाकिस्तान की ओर से इसे 'युद्ध की कार्रवाई' तक बताया जा चुका है

भारत की जीडीपी हुई 7.8% तो पीएम मोदी ने कांग्रेस को कोसा, जयराम रमेश ने भी पर साधा निशाना

#pmmodihailsindia7.8growthrateamidglobal_crises

अप्रैल-जून तिमाही में देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) दर उम्मीद से कहीं बेहतर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की 7.8 प्रतिशत आर्थिक विकास दर को लेकर देशवासियों को बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर निराशा का माहौल बनाने वाले आलोचकों पर तीखा तंज कसा है।

पीएम मोदी इस वक्त एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए बिश्केक में हैं। पीएम मोदी ने वहां से इंस्टाग्राम पर एक नया वीडियो साझा करते हुए कहा कि यह उपलब्धि देश की सामूहिक शक्ति, संकल्प और मेहनत का नतीजा है। उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया गंभीर आर्थिक अनिश्चितताओं और मंदी के दबाव से जूझ रही है, तब भारत की यह तेज रफ्तार देश के मजबूत बुनियादी ढांचे और अदम्य आर्थिक सामर्थ्य का जीता-जागता सबूत है। यह प्रदर्शन साबित करता है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

पीएम मोदी ने देशवासियों को दी बधाई

पीएम मोदी ने इंस्टाग्राम और ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा, “मेरे देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई। 7.8% की विकास दर – पूरा देश खुशी से भरा हुआ है। मैं देश के लोगों को उनके संकल्प और मेहनती स्वभाव के लिए बधाई देता हूं; यह हमारी सामूहिक ताकत को दिखाता है। दुनिया संघर्षों में फंसी हुई है; हर तरफ से युद्ध की खबरें आ रही हैं और दुनिया संकटों से घिरी हुई है। सप्लाई चेन बुरी तरह बाधित हुई। इसके बावजूद भारत तेज गति से प्रगति कर रहा है।”

विपक्ष पर साधा निशाना

प्रधानमंत्री ने कहा कि “एक तरफ भारत तमाम वैश्विक चुनौतियों को पार करते हुए आगे बढ़ रहा है, वहीं देश के भीतर कुछ लोग निराशा और झूठ का माहौल बनाने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी चुनौतियों के बीच भारत ने 7.8 प्रतिशत की ग्रोथ हासिल की है। हमें इस गति को बनाए रखना होगा। हमें आगे बढ़ते रहना होगा, और इसके लिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनना जरूरी है।”

जयराम रमेश ने जीडीपी के आंकड़ों पर केन्द्र को घेरा

वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने जीडीपी के आंकड़ों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।जयराम रमेश ने कहा कि ये आंकड़े अर्थव्यवस्था में घरेलू और विदेशी, दोनों तरह के निजी निवेश को लेकर बेहद कमजोर धारणा को नहीं दर्शाते। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता भरोसा बेहद सुस्त है और नवंबर 2025 से लगातार गिरावट की ओर है। कांग्रेस नेता ने कहा कि घरेलू जरूरत की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि शिक्षित बेरोजगारी चिंताजनक स्तर पर है।

एसआईआर में देश भर में 13 करोड़ नाम ड्राफ्ट से कटे, दिल्ली में सबसे अधिक कैंची चली

#sirtransformvoterlistsacross30states13crorenamesremoved

चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तीसरे चरण का ड्राफ्ट आंकड़ा सामने आ चुका है। जून 2025 में शुरू हुई इस कवायद के तहत अब तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूची से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए जा चुके हैं। सबसे ज्यादा दिल्ली और महाराष्ट्र में ये 'सफाई' हुई है। दिलचस्प बात ये है कि देशभर की वोटर लिस्ट में 34 लाख नाम ऐसे थे, जो अब इस दुनिया में ही नहीं थे। इनके नाम भी हटा दिए गए हैं।

हर तीन में से एक मतदाता ड्राफ्ट सूची से बाहर

सोमवार को दिल्ली और महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। दिल्ली में एसआईआर से पहले करीब 1.45 करोड़ मतदाता दर्ज थे, लेकिन ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर 97.53 लाख रह गई। यानी मतदाताओं की संख्या में करीब 32.8 फीसदी की कमी दर्ज हुई है। यानी करीब हर तीन में से एक मतदाता फिलहाल ड्राफ्ट सूची से बाहर है।

महाराष्ट्र में 2 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से हटे

महाराष्ट्र में भी बड़ी संख्या में नाम हटे हैं। यहां एसआईआर से पहले करीब 9.78 करोड़ मतदाता थे, जो ड्राफ्ट रोल में घटकर 7.71 करोड़ रह गए। यानी राज्य की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 2.07 करोड़ नाम हटाए गए हैं। जो करीब 21.1 फीसदी की गिरावट आई है।

तीसरे चरण में अब तक 6.15 करोड़ नाम बाहर

चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के तीसरे चरण में शामिल 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अब तक कुल करीब 6.15 करोड़ नाम ड्राफ्ट रोल से हटाए गए हैं। चुनाव आयोग ने 14 मई को एसआईआर के तीसरे चरण की घोषणा की थी, जो 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित किया जाएगा। अब तक, इनमें से 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट रोल प्रकाशित किए जा चुके हैं, जबकि दो राज्यों (नागालैंड और त्रिपुरा) में अगले दो महीनों में गिनती का चरण शुरू होने वाला है।

34 लाख लोग मृत पाए गए

भारत निर्वाचन आयोग के डेटा के अनुसार, 1.54 करोड़ नाम (यानी 15.7%) अनुपस्थिति/जगह बदलने के कारण हटाए गए, जबकि 34 लाख लोग मृत पाए गए। दिलचस्प बात ये है कि देशभर की वोटर लिस्ट में 34 लाख नाम ऐसे थे, जो अब इस दुनिया में ही नहीं थे। इनके नाम भी हटा दिए गए हैं।