69000 शिक्षक भर्ती: आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने मंत्री संजय निषाद से की मुलाकात
- नियुक्ति की मांग को लेकर आवास के बाहर प्रदर्शन; अभ्यर्थियों ने सौंपा ज्ञापन, 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

लखनऊ। 69000 सहायक अध्यापक भर्ती मामले में नियुक्ति की मांग को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने रविवार को कैबिनेट मंत्री संजय निषाद के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की जानकारी मिलने पर मंत्री ने अभ्यर्थियों को अंदर बुलाकर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन भी सौंपा।
अभ्यर्थियों ने बताया कि 69000 सहायक अध्यापक भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगतियों को लेकर शासन की ओर से 5 जनवरी 2022 को करीब 6,800 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की गई थी। अभ्यर्थी लंबे समय से इस सूची में शामिल लोगों की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि जब वे बेसिक शिक्षा विभाग के तत्कालीन निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी से मामले को लेकर मुलाकात करते हैं और सुप्रीम कोर्ट में 6,800 अभ्यर्थियों की चयन सूची के पक्ष में स्पष्ट रुख रखने की मांग करते हैं, तो उन्हें जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने वाला जवाब मिलता है। अभ्यर्थियों के मुताबिक, उनसे कहा जाता है कि सूची उनके कार्यकाल में जारी नहीं हुई थी और संबंधित अधिकारी से ही संपर्क किया जाए।
अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि जब उन्होंने चयन सूची मुख्यमंत्री के आदेश पर जारी होने की बात कही तो उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क करने की सलाह दी गई। इन दावों पर संबंधित पक्ष का पक्ष सामने नहीं आया है।

- 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
अभ्यर्थियों के मुताबिक, 6,800 चयन सूची से जुड़ा मामला डायरी नंबर 38554/2024 समेत संबंधित प्रकरणों के साथ सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। मामले में अगली सुनवाई 8 सितंबर 2026 को निर्धारित है।
अभ्यर्थियों ने मंत्री संजय निषाद से मांग की कि आगामी सुनवाई से पहले शासन और बेसिक शिक्षा विभाग अपने शपथपत्र में 5 जनवरी 2022 को जारी 6,800 अभ्यर्थियों की सूची को लेकर स्पष्ट और समाधानात्मक प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि सूची में शामिल अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो सके।
मंत्री संजय निषाद ने अभ्यर्थियों की समस्याएं सुनीं और उनके ज्ञापन को लिया। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांग को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय के समक्ष प्रभावी पक्ष रखेगी।
उत्तर प्रदेश ने 9 वर्ष में तय की सुरक्षा, सुशासन की नई यात्रा : मुख्यमंत्री

-मुख्यमंत्री ने सुनाई लखनऊ के बदलाव की कहानी, कहा- सांसद राजनाथ सिंह के नेतृत्व में साकार हुए अटल जी के सपने

- ‘आदर्श’ बनकर विकास व जन-सुविधाओं का महत्वपूर्ण केंद्र होगी लखनऊ की छावनी परिषद : मुख्यमंत्री योगी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हम इस वर्ष के अंत तक गोमती नदी को स्वच्छ बनाने में सफल होंगे। सेना की मध्य कमान ने गोमती नदी की अविरलता व स्वच्छता के लिए प्रदेश सरकार को पूरा सहयोग दिया है, जिससे यह कार्यक्रम युद्ध स्तर पर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री व रक्षा मंत्री के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने 9 वर्ष में सुरक्षा, सुशासन की नई यात्रा तय की है। 20 वर्ष पहले राजधानी में रेलवे स्टेशन पर एक बोर्ड लिखा होता था कि ‘मुस्कुराइए, आप लखनऊ में हैं’, लेकिन ट्रैफिक जाम, संकरी गलियों व गंदगी को देखकर मुस्कुराने के बजाय लोग रोने को मजबूर होते थे। किंतु अब लखनऊ ने पुरानी विरासत के साथ आधुनिक स्मार्ट सिटी के रूप में नई पहचान बनाई है।

मुख्यमंत्री ने रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ 101 करोड़ की 12 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास व भूमि पूजन किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य लखनऊ छावनी को मॉडल छावनी के रूप में विकसित करना है। एआई बेस्ड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के अलावा यहां स्कूल में अभ्युदय कोचिंग की व्यवस्था भी प्रारंभ होने जा रही है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि लखनऊ की छावनी परिषद ‘आदर्श’ बनकर विकास व जन-सुविधाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगी। ‘ईज ऑफ लिविंग’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में अग्रसर होगी। सीएम ने कहा कि यह छावनी परिषद अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त होगी, जिससे सैन्यकर्मियों, पूर्व सैन्यकर्मियों व सिविलियन को यहां हर महत्वपूर्ण सेवा मिलेगी। बदलते हुए परिवेश में लखनऊ में इन सुविधाओं की आवश्यकता थी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी व रक्षा मंत्रालय की तरफ से ये प्राप्त हो रही हैं।

मुख्यमंत्री ने सुनाई लखनऊ के बदलाव की कहानी

मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह जी के नेतृत्व में अटल जी के सपनों को साकार किया गया है। लखनऊ में संकरी गलियां हैं तो सीएम ग्रिड की स्मार्ट रोड भी है। किसान पथ जैसा आउटर रिंग रोड भी है। यहां ऊदा देवी पासी व महाराजा बिजली पासी के स्मारकों की धरोहर है तो दूसरी ओर लखनऊ भारत की रक्षा आवश्यकता व आत्मनिर्भरता की दृष्टि से ब्रह्मोस जैसी आधुनिक मिसाइलों का केंद्र भी बना है। यहां हस्तशिल्पियों की चिकनकारी की अद्भुत कला है तो यूनेस्को ने ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ के रूप में मान्यता देकर लखनऊ को नई ऊंचाई तक पहुंचाया है।

9 वर्ष में यूपी को नई दिशा देने का प्रयास

सीएम ने कहा कि 2017 के पहले जिस प्रदेश के सामने पहचान का संकट, अभाव, अराजकता, अव्यवस्था, उपद्रव था, आज वह प्रदेश इन सबसे उबर चुका है। हमने 9 वर्ष में उत्तर प्रदेश को नई दिशा देने का प्रयास किया है। अब यूपी भारत की अर्थव्यवस्था का ब्रेकथ्रू बनकर ग्रोथ इंजन के रूप में अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहा है। भारत की आत्मनिर्भरता के लिए यूपी में छह डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर भी स्थापित हो रहे हैं।

इन्फ्रास्ट्रक्चर भी बना यूपी की पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए भी जाना जा रहा है। देश में जितने भी एक्सप्रेसवे हैं, इनमें 60 फीसदी यूपी के पास हैं। यहां रेलवे का सबसे बड़ा नेटवर्क, सर्वाधिक मेट्रो भी हैं। सीएम ने भारत सरकार से मेट्रो के द्वितीय चरण की स्वीकृति दिलाने के लिए रक्षा मंत्री का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि यह कार्य भी बहुत जल्द आगे बढ़ने जा रहा है। देश की पहली रैपिड रेल, पहला वाटर-वे और सबसे बड़ा एयरकनेक्टिविटी नेटवर्क यूपी के पास है। यहां 17 घरेलू व 5 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट क्रियाशील हैं। यूपी से देश-दुनिया के सभी क्षेत्रों में एयर कनेक्टिविटी की सुविधा उपलब्ध है।

सैन्य बलों में यूपी की लीडिंग पोजिशन

मुख्यमंत्री ने कहा कि सैन्य बलों की सेवाओं में यूपी हमेशा लीडिंग पोजिशन में रहा है। देश में सैनिक स्कूलों की परंपरा की शुरुआत डॉ. संपूर्णानंद ने यूपी से की थी। यूपी में बने कई सैनिक स्कूल युवाओं को तैयार कर रहे हैं, जो वर्तमान के साथ ही भविष्य के भारत की सुरक्षा आवश्यकताओं की पूर्ति में योगदान देंगे। हमारी सेना के अधिकारी व जवान 24 घंटे अनवरत भारत की रक्षा करते हैं। पहले उनकी सुविधा के लिए फंड की कमी आड़े आती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है।

इस कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण, व्यावसायिक शिक्षा मंत्री कपिलदेव अग्रवाल, महापौर सुषमा खर्कवाल, राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, संजय सेठ, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल, रामचंद्र प्रधान, मुकेश शर्मा, विधायक डॉ. नीरज बोरा, ओपी श्रीवास्तव, जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ (मध्य कमान) लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, भारतीय रक्षा संपदा सेवा की महानिदेशक शोभा गुप्ता आदि की मौजूदगी रही।
12.45 करोड़ से बदलेगी 223 राजकीय अनुसूचित जाति छात्रावासों की तस्वीर
- असीम अरुण ने दी बजट मंजूरी, पेयजल से लेकर बिजली, शौचालय और सुरक्षा व्यवस्था में होगा सुधार

लखनऊ। प्रदेश के राजकीय अनुसूचित जाति छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए सरकार ने सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने प्रदेश के सभी 223 राजकीय अनुसूचित जाति छात्रावासों के रखरखाव, मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं के सुधार के लिए 12.45 करोड़ रुपये की बजट स्वीकृति दी है।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि छात्रावासों में होने वाले सभी मरम्मत और रखरखाव कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरे किए जाएं। साथ ही कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया है।

- छात्रावास की क्षमता के आधार पर मिलेगा बजट
सरकार की ओर से छात्रावासों को उनकी क्षमता के अनुसार धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। 50 विद्यार्थियों की क्षमता वाले छात्रावास को अधिकतम पांच लाख रुपये तक की राशि रखरखाव और मरम्मत कार्यों के लिए दी जाएगी। अन्य छात्रावासों में भी क्षमता के अनुरूप बजट आवंटित किया जाएगा।

- पानी, बिजली और शौचालयों पर रहेगा फोकस
स्वीकृत धनराशि से छात्रावासों में पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने के साथ विद्युत उपकरणों की मरम्मत, शौचालयों का सुधार, रंग-रोगन और स्वच्छता संबंधी कार्य कराए जाएंगे। इसके अलावा विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ी जरूरी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां वे सुरक्षित और बेहतर माहौल में रहकर अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

- 'छात्रावास भविष्य निर्माण के केंद्र'
समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण ने कहा कि सरकार अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सम्मानजनक और बेहतर आवासीय सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि छात्रावास सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य को आकार देने वाले महत्वपूर्ण केंद्र हैं। 223 छात्रावासों के लिए स्वीकृत बजट से वहां की व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार किया जाएगा।
IAS दिव्या मित्तल ने दिया इस्तीफा, 13 साल की प्रशासनिक सेवा को कहा अलविदा
- फेसबुक पोस्ट में लिखा- पद छूटा है, लेकिन देश के लिए देखा सपना नहीं; कहा- सबसे ज्यादा मैंने ही पाया

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट के जरिए अपने निर्णय की जानकारी दी। दिव्या मित्तल ने लिखा कि उन्होंने 13 वर्षों की अपनी प्रशासनिक यात्रा को अपनी इच्छा से विराम दिया है।
अपने इस्तीफे की वजहों का विस्तार से उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु से पढ़ाई की और इसके बाद लंदन में नौकरी की। हालांकि, विदेश में अच्छी नौकरी और सफलता हासिल करने के बावजूद उन्हें अपने देश से दूर होने का एहसास लगातार बना रहा। उन्होंने कहा कि उनकी शिक्षा, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की क्षमता पर इस देश की मिट्टी का कर्ज था, जिसे चुकाने के लिए वह भारत लौटीं और IAS अधिकारी बनने का अवसर मिला।

- देवरिया और मीरजापुर के अनुभवों को किया याद
दिव्या मित्तल ने अपनी सेवा के दौरान देवरिया और मीरजापुर में मिले अनुभवों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि देवरिया ने उन्हें सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना केवल विकल्प नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। वहीं, मीरजापुर में काम करते हुए उन्हें यह सीख मिली कि असंभव कोई अंतिम सच नहीं होता। उन्होंने मां विंध्यवासिनी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि शक्ति केवल किसी पद से नहीं आती, बल्कि लोगों के विश्वास और ईश्वर की कृपा से मिलती है।

- 'सरकारी फाइल के पीछे एक इंसान होता है'
पूर्व IAS अधिकारी ने अपनी पोस्ट में प्रशासनिक सेवा के दौरान आम लोगों के साथ किए गए कामों को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने जमीन का अधिकार पाने वाले परिवार, सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर प्राप्त करने वाले दिव्यांग और खेत तक पानी पहुंचने से लाभान्वित किसान के अनुभवों को याद किया। उन्होंने लिखा कि सेवा के दौरान उन्हें यह समझ आया कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक व्यक्ति होता है और उसकी गरिमा की रक्षा करना ही न्याय की वास्तविक भावना है।

- 'सोचा था कुछ देने आई हूं, लेकिन सबसे ज्यादा मैंने पाया'
दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट में जनता से मिले स्नेह और भरोसे के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि वह यह सोचकर आई थीं कि लोगों के लिए कुछ करने का अवसर मिलेगा, लेकिन वास्तविकता में उन्हें लोगों से ही सबसे ज्यादा मिला। उन्होंने अपने साथ काम करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगियों का भी आभार व्यक्त किया।
अपनी पोस्ट में उन्होंने लहुरिया दह की पहाड़ी की एक बुजुर्ग महिला से जुड़ा भावुक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि गांव में पहली बार पानी पहुंचने पर बुजुर्ग महिला ने कुछ कहने के बजाय उनके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया था। दिव्या मित्तल ने लिखा कि IAS का पद भले ही पीछे छूट गया है, लेकिन वह आशीर्वाद और देश के लिए देखा गया सपना उनके साथ हमेशा रहेगा। उन्होंने अपनी पोस्ट का समापन 'आपकी अपनी, दिव्या मित्तल' लिखकर किया।
रक्षाबंधन पर मुफ्त बस यात्रा का जोरदार रिस्पॉन्स, पहले दिन 9.26 लाख यात्रियों ने किया सफर
- 6.03 लाख महिलाओं को नि:शुल्क यात्रा का लाभ, साथ गए 3.22 लाख सहयात्रियों का किराया भी माफ; 9.06 करोड़ रुपये से अधिक की यात्रा


लखनऊ। रक्षाबंधन पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से महिलाओं को दी गई नि:शुल्क बस यात्रा सुविधा का पहले ही दिन बड़े पैमाने पर लाभ उठाया गया। 27 अगस्त से शुरू हुई इस सुविधा के तहत उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में 6.03 लाख से अधिक महिलाओं ने बिना किराया यात्रा की। महिलाओं के साथ सफर करने वाले 3.22 लाख से अधिक सहयात्रियों को भी निशुल्क यात्रा की सुविधा मिली।
परिवहन निगम के आंकड़ों के मुताबिक पहले दिन कुल 9.26 लाख से अधिक यात्रियों ने बिना किराया बस यात्रा की। इस यात्रा की कुल अनुमानित कीमत 9.06 करोड़ रुपये से अधिक रही।

- जरूरत के अनुसार अतिरिक्त बसें सड़कों पर
यात्रियों की बढ़ी संख्या को देखते हुए परिवहन निगम ने विभिन्न मार्गों पर अतिरिक्त बसों का संचालन शुरू किया है। यूपीएसआरटीसी के प्रधान प्रबंधक (संचालन) अनिल कुमार के मुताबिक महिलाओं को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यालय से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक अधिकारी- कर्मचारी लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं।

-  मुरादाबाद सबसे आगे
पहले दिन नि:शुल्क यात्रा करने वाले महिलाओं और सहयात्रियों की संयुक्त संख्या के मामले में मुरादाबाद क्षेत्र सबसे आगे रहा। यहां 62,586 महिलाओं और 32,203 सहयात्रियों समेत कुल 94,789 यात्रियों ने मुफ्त यात्रा की।
इसके बाद हरदोई में 82,920, गोरखपुर में 68,152, लखनऊ में 64,590 और बरेली में 58,309 यात्रियों ने इस सुविधा का लाभ उठाया। इन पांच क्षेत्रों में ही करीब 3.69 लाख यात्रियों ने निशुल्क सफर किया।

- औचक निरीक्षण से होगी निगरानी
परिवहन निगम की टीमें निशुल्क यात्रा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण भी किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र यात्रियों को सुविधा का लाभ मिले और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित हो। साथ ही बसों में यात्रियों को मिल रही सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच की जाएगी।
त्योहार के दौरान निशुल्क यात्रा की सुविधा से यात्रियों ने राहत जताई। कई यात्रियों ने कहा कि रक्षाबंधन पर घर आने-जाने का अतिरिक्त खर्च परिवारों के बजट पर असर डालता है, ऐसे में मुफ्त बस यात्रा से आर्थिक बोझ कम हुआ है।
स्वाइन फ्लू को लेकर सीएम योगी अलर्ट, अधिकारियों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश
- बोले- लक्षणों को नजरअंदाज न करें, समय पर जांच और इलाज कराएं; अस्पतालों में जरूरी तैयारियां पूरी रखने के आदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से बीमारी की स्थिति पर लगातार नजर रखने और प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि स्वाइन फ्लू के संभावित लक्षणों को हल्के में न लें। सर्दी-जुकाम, बुखार या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण सामने आने पर समय रहते चिकित्सकीय परामर्श लेकर आवश्यक जांच कराएं।
सीएम योगी ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अस्पतालों में पर्याप्त तैयारियां रखने के साथ जरूरी दवाओं, उपकरणों और अन्य व्यवस्थाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वाइन फ्लू की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। स्वास्थ्य विभाग को भी बीमारी की रोकथाम और मरीजों के उपचार से जुड़ी व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
रक्षाबंधन पर लखनऊ जेल में यह है खास इंतजाम
- मुलाकातियों के लिए हेल्प डेस्क, पानी-मिष्ठान और मेडिकल सुविधा की व्यवस्था; राखी, रोली और मिठाई भी उपलब्ध करा रहा जेल प्रशासन

लखनऊ। रक्षाबंधन के पर्व पर जिला कारागार लखनऊ में बंद भाइयों को राखी बांधने पहुंच रही बहनों की सुविधा के लिए जेल प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। कारागार के बाहर हेल्प डेस्क स्थापित की गई है, जहां बाहर से आने वाली बहनों और अन्य मुलाकातियों की सहायता की जा रही है।
मुलाकातियों के लिए पानी, मिष्ठान और कोल्ड ड्रिंक की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही किसी भी आकस्मिक स्वास्थ्य समस्या से निपटने के लिए मेडिकल डेस्क भी बनाई गई है, जहां जरूरत पड़ने पर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
जिन बहनों के पास राखी, रोली, अक्षत या मिठाई नहीं है, उन्हें जेल प्रशासन की ओर से ये सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपने भाइयों के साथ रक्षाबंधन का पर्व मना सकें।
जिला कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक आरके जायसवाल, जेलर ऋत्विक प्रियदर्शी समेत कारागार के अधिकारी और कर्मचारी व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करने में जुटे हैं। प्रशासन का प्रयास है कि पर्व के दौरान आने वाले मुलाकातियों को किसी तरह की असुविधा न हो।
उत्तर प्रदेश की सभी जेलों में हर्षोल्लास से मनाया जा रहा रक्षाबंधन का पर्व
- कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने बंदियों को बहनों से राखी बंधवाने के लिए समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

लखनऊ, 28 अगस्त। कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने बताया कि आज प्रदेश की सभी कारागारों में भाई-बहन के पवित्र प्रेम और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में बहनें अपने भाइयों से मिलने के लिए कारागारों में पहुंच रही हैं और उनकी कलाई पर राखी बांधकर उनके सुखद एवं स्वस्थ जीवन की कामना कर रही हैं। कारागार मंत्री ने बताया कि रक्षाबंधन के पावन पर्व को देखते हुए प्रदेश की सभी कारागारों के जेल अधीक्षकों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। निर्देश दिए गए हैं कि बंदियों से मिलने के लिए आने वाली उनकी बहनों एवं अन्य परिजनों के लिए समुचित, सुचारू एवं सुविधाजनक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि किसी भी महिला अथवा परिजन को असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि कारागारों में निरुद्ध बंदियों को भी अपने परिजनों एवं विशेषकर बहनों के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाने का अवसर मिलना उनके भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण है। इस दौरान कारागार प्रशासन द्वारा मुलाकात की प्रक्रिया को व्यवस्थित एवं सुगम बनाए रखने के साथ-साथ आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य कारागारों को केवल दंड देने का स्थान न बनाकर सुधार, पुनर्वास और मानवीय संवेदनाओं का केंद्र बनाना है। त्योहारों के अवसर पर बंदियों को अपने परिवार से जुड़ने का अवसर देने से उनमें सकारात्मक सोच और समाज की मुख्यधारा में लौटने की भावना को बल मिलता है। कारागार मंत्री ने रक्षाबंधन के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने प्रदेश की सभी बहनों और भाइयों के सुख, समृद्धि एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
यूपी में थमेगी बारिश की रफ्तार, अगले तीन-चार दिन कमजोर रहेगा मानसून

- एक सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट नहीं, तराई समेत कुछ इलाकों में हल्की बारिश के आसार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पिछले कई दिनों से जारी बारिश के दौर पर अब विराम लगने के संकेत मिलने लगे हैं। मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार से प्रदेश में मानसून की सक्रियता धीरे-धीरे कम होगी और अगले तीन से चार दिनों तक बारिश का जोर अपेक्षाकृत कमजोर रह सकता है। एक सितंबर तक प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में कहीं भी भारी बारिश की चेतावनी जारी नहीं की गई है।
हालांकि तराई क्षेत्र के साथ ही कुछ अन्य जिलों में स्थानीय स्तर पर हल्की बारिश का सिलसिला बना रह सकता है। शुक्रवार को प्रदेश के 19 जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने इन इलाकों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

- बुंदेलखंड समेत कई जिलों में जमकर बरसे बादल
इससे पहले बृहस्पतिवार को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहा। बुंदेलखंड के अलावा पश्चिमी और मध्य यूपी के कुछ जिलों में भी मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई। मुरादाबाद में सबसे अधिक 161 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। इसके अलावा महोबा में 155 मिमी, बदायूं में 154 मिमी, गोंडा में 133 मिमी और बांदा में 101.8 मिमी बारिश दर्ज की गई।
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक शुक्रवार से मानसून की गतिविधियों में कमी आने के संकेत हैं। अगले कुछ दिनों में बारिश की तीव्रता घटने के साथ मौसम में उमस बढ़ सकती है। बारिश थमने के बाद तापमान में बढ़ोतरी और उमस भरी गर्मी लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है।
सीएम योगी ने प्रदेशवासियों को दी रक्षाबंधन की शुभकामनाएं


- बोले- भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है यह पावन पर्व, सनातन विरासत और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने का लें संकल्प

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन स्नेह, विश्वास और संस्कारों से जुड़ा पर्व है, जो भाई-बहन के अटूट प्रेम और आत्मीय रिश्ते का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि इस पवित्र अवसर पर हम सभी को अपनी सनातन विरासत को और मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए। साथ ही परिवार और समाज में प्रेम, सौहार्द तथा आपसी विश्वास को बढ़ावा देने के लिए पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में भी प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के रिश्ते की गरिमा और पारिवारिक एकता की भावना को मजबूत करता है। मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की।