सदी के सबसे बड़े खतरे का अलर्ट, टूटेगा 100 साल का रिकॉर्ड, भारत में मानसून पर संकट
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दुनिया भर में मौसम का मिजाज एक बार फिर तेजी से बदलने वाला है। इस बार जो चेतावनी आई है, वो बेहद डरावने संकेत दे रही है। दुनिया में एक बड़ा संकट दस्तक देने को बेताब है। धरती पर सदी का सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इस संकट का नाम है अलनीनो। दुनिया भर की मौसम एजेंसियां आगाह कर रही हैं कि मानसून को सोख लेने वाला अल नीनो सौ सालों में सबसे भयानक रूप लेने वाला है।
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विनाशकारी और शक्तिशाली अल नीनो आकार ले रहा
ब्रिटेन के मौसम विभाग (मेट ऑफिस) ने चेतावनी दी है कि इस साल का अल नीनो पिछले 100 से अधिक वर्षों में सबसे अधिक विनाशकारी और शक्तिशाली रूप ले सकता है। प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से 3°C से भी अधिक रहने का अनुमान है, जो आधुनिक जलवायु रिकॉर्ड में अब तक का उच्चतम स्तर है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अभूतपूर्व घटना के कारण साल 2027 वैश्विक स्तर पर अब तक का सबसे गर्म साल साबित हो सकता है और यह 2024 के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देगा।
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4 डिग्री तक बढ़ सकता है तापमान
ब्रिटेन के मौसम विभाग का कहना है कि अल नीनो के असर से प्रशांत महासागर का पानी 3.9 डिग्री तक गर्म हो सकता है। यूके वेदर डिपार्टमेंट के अफसर एडम स्केफन का कहना है कि प्रशांत महासागर की सतह का तापमान दो डिग्री बढ़ने को भी बहुत बड़ी घटना माना जाता है। वर्ष 2015-16 में अल नीनो की वजह से महासागर का तापमान 3 डिग्री बढ़ा था। टेंपरेचर का 4 डिग्री तक बढ़ना जलवायु परिवर्तन के लिहाज से बड़ा बदलाव लाने वाली साबित हो सकती है। प्रशांत महासागर की सतह का तापमान अभी 30 साल के सामान्य औसत से 2.6 डिग्री तक बढ़ गया है।
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भारत पर दिख रहा असर
अल नीनो पहले ही भारत के मानसून पर असर डाल रहा है। अगस्त आते आते ही मानसून की गतिविधियां सुस्त पड़ने लगी हैं। बादल छाये हैं, लेकिन अच्छी बारिश नहीं हो रही है। ऊफर से बरसात लाने वाले मानसून ट्रफ या इंडियन ओशियन डायपोल भी सक्रिय नहीं हो पा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने मानसून के चार महीनों में बारिश का औसत सामान्य से केवल 90 फीसदी रहने का अनुमान जताया है, जो 11 सालों में सबसे कम है। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट वेदर ने तो यह आंकड़ा घटाकर 85 फीसदी कर दिया है।
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भारत पर होगा गंभीर असर
अल नीनो के एक्टिव होने से मानसून की बारिश थम सी गई है और इस बार सामान्य से काफी कम बारिश का अनुमान है। भारत में कृषि सीधे तौर पर मानसून से जुड़ी है। ऐसे में भारत पर इसका गंभीर हो सकता है। अब इसकी ताकत बढ़ने की आशंका के बीच भारत को लगातार दो फसल सीजन में नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इस साल की रबी फसल पर असर पड़ने के साथ 2027 की खेती भी प्रभावित हो सकती है।























Aug 22 2026, 19:50
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