बी-पैक्स की ब्याजमुक्त कैश क्रेडिट सीमा बढ़कर ₹15 लाख

- मुख्यमंत्री की घोषणा को मिली रफ्तार, किसानों को बड़ी राहत; उर्वरक कारोबार के लिए कार्यशील पूंजी बढ़ेगी

लखनऊ। किसानों और सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने बी-पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों) के लिए बड़ा फैसला लागू करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। अब बी-पैक्स को उर्वरक व्यवसाय के लिए मिलने वाली ब्याजमुक्त कैश क्रेडिट ऋण सीमा ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख कर दी गई है। सहकारिता विभाग ने इस संबंध में शासनादेश जारी कर आवश्यक प्रक्रिया और पात्रता निर्धारित कर दी है।
सरकार के मुताबिक यह निर्णय देश में अपनी तरह की पहली पहल है, जिसमें बी-पैक्स को ₹15 लाख तक की ब्याजमुक्त कैश क्रेडिट ऋण सीमा उपलब्ध कराई गई है। यह कदम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 21 मार्च 2025 को उत्तर प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक की 61वीं वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक में की गई घोषणा के अनुपालन में उठाया गया है।

-  उर्वरक की उपलब्धता में होगी आसानी
सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जे.पी.एस. राठौर ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि सरकार के मार्गदर्शन में प्रदेश का सहकारिता क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि ब्याजमुक्त कैश क्रेडिट सीमा बढ़ने से बी-पैक्स की कार्यशील पूंजी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
इससे समितियों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध रखने में मदद मिलेगी और किसानों को ग्रामीण स्तर पर समय से उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत होगी। साथ ही बी-पैक्स की आर्थिक क्षमता बढ़ने से किसानों को विभिन्न सहकारी और जनोपयोगी सेवाएं उपलब्ध कराने की क्षमता भी बढ़ेगी।

-  बी-पैक्स ने किया ₹7 हजार करोड़ का कारोबार
जे.पी.एस. राठौर ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में प्रदेश की बी-पैक्स समितियों ने करीब ₹7 हजार करोड़ का कारोबार किया है और इससे ₹176 करोड़ का मुनाफा अर्जित किया गया है। उन्होंने कहा कि ब्याजमुक्त ऋण सीमा बढ़ने से समितियों के कारोबार को और गति मिलने की उम्मीद है।
सहकारिता विभाग के इस कदम से बी-पैक्स को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम और सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों को मिलने वाली सुविधाओं का दायरा बढ़ेगा।
सरकार के अनुसार, बी-पैक्स की वित्तीय क्षमता बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती, किसानों की आय में वृद्धि और उनके आर्थिक सशक्तीकरण को गति मिलेगी। उत्तर प्रदेश की इस पहल की केंद्र सरकार द्वारा भी सराहना की गई है और अन्य राज्यों द्वारा इसका अनुकरण किए जाने की संभावना जताई गई है।
प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के लिए 24 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन
-  14 अगस्त से खुला विभागीय पोर्टल, छह परियोजनाओं के लिए पात्र लाभार्थी कर सकेंगे आवेदन

लखनऊ। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) के तहत विभिन्न परियोजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रदेश के पात्र लाभार्थी 14 से 24 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। मत्स्य विकास मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने बताया कि भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2020-21 से संचालित इस योजना की अवधि सितंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। योजना के अवशेष लक्ष्यों के सापेक्ष पात्र लाभार्थियों को लाभ देने के लिए विभागीय पोर्टल को निर्धारित अवधि में आवेदन के लिए खोला गया है।
इच्छुक आवेदक विभागीय पोर्टल fisheries.up.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। परियोजनाओं का विवरण, इकाई लागत, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक अभिलेखों से संबंधित जानकारी भी पोर्टल पर उपलब्ध है।

-  छह परियोजनाओं के लिए मिलेंगे अवसर
मत्स्य मंत्री ने बताया कि योजना के तहत इस चरण में छह परियोजनाओं के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इनमें—

- बड़े क्षेत्र में तालाब निर्माण एवं निवेश: 33.93 हेक्टेयर — सामान्य, महिला एवं अनुसूचित जाति वर्ग।
- मध्य आकार की आरएएस (RAS) यूनिट: 3 यूनिट — सामान्य वर्ग।
- रियरिंग यूनिट का निर्माण: 22.667 हेक्टेयर — महिला एवं अनुसूचित जाति वर्ग।

बैकयार्ड आरएएस: 241 यूनिट — महिला वर्ग।

- जलाशयों में मत्स्य अंगुलिका संचय: 65,000 अंगुलिकाएं — सामान्य, महिला एवं अनुसूचित जाति वर्ग।
- पारंपरिक मछुआरा परिवारों के लिए आजीविका एवं पोषण संबंधी सहायता: 500 यूनिट।

-  मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने पर जोर
डॉ. संजय कुमार निषाद ने कहा कि प्रदेश में उपलब्ध जल संसाधनों का वैज्ञानिक एवं तकनीकी तरीके से बेहतर उपयोग कर मत्स्य उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर सरकार का विशेष जोर है। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के माध्यम से मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने, पारंपरिक मछुआरा परिवारों की आजीविका मजबूत करने और आधुनिक तकनीक आधारित मत्स्य पालन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से मत्स्य क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

-  सभी जिलों में होगा प्रचार-प्रसार
मत्स्य मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आवेदन अवधि के दौरान सभी जनपदों में योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए, ताकि अधिक से अधिक पात्र लाभार्थी इसका लाभ उठा सकें। जिला स्तर पर मत्स्य पालकों और अन्य पात्र आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी तथा आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को प्राप्त आवेदनों की जांच और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा में पूरी करने के निर्देश दिए। साथ ही लाभार्थियों को परियोजनाओं के संचालन के दौरान आवश्यक तकनीकी एवं विभागीय मार्गदर्शन उपलब्ध कराने को कहा, ताकि योजना के निर्धारित उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सके।
कार्यक्रम में विशेष सचिव सुनील वर्मा, महानिदेशक मत्स्य धनलक्ष्मी के. सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पनीर में मिलावट के खिलाफ बड़ा अभियान, 25 इकाइयों पर कार्रवाई

-  गाजियाबाद, मथुरा और सहारनपुर में 24 विशेष टीमों की छापेमारी; 72 नमूने लिए गए

-  करीब ₹10 लाख कीमत की 7,686 किलो खाद्य सामग्री नष्ट, 2,131 किलो सामग्री व अपमिश्रक जब्त

-  गंभीर अनियमितताओं पर छह एफआईआर, पनीर में औद्योगिक रसायन और खाद्य तेल के इस्तेमाल के मामले सामने आए

लखनऊ। प्रदेश में पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादों में मिलावट के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बड़े स्तर पर विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया। अभियान के तहत गाजियाबाद, मथुरा और सहारनपुर में 24 विशेष टीमों ने दुग्ध एवं दुग्ध पदार्थ निर्माण इकाइयों पर आकस्मिक छापेमारी की। इस दौरान 25 विनिर्माण इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जबकि तीन इकाइयां नॉन-ऑपरेशनल मिलीं।

अभियान के दौरान पनीर निर्माण में औद्योगिक प्रयोग के रसायनों तथा पामोलिन ऑयल/रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल के इस्तेमाल के मामले सामने आए। इसके अलावा कई स्थानों पर खाद्य पदार्थों का निर्माण अस्वास्थ्यकर एवं अस्वच्छ परिस्थितियों में होता मिला। विभागीय टीमों ने मौके पर कार्रवाई करते हुए संदिग्ध खाद्य सामग्री को नष्ट और जब्त कराया।
विशेष अभियान के दौरान टीमों ने कुल 72 खाद्य नमूने एकत्र किए। सभी नमूनों को आवश्यक जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। प्रयोगशाला जांच की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित इकाइयों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में तैयार की गई बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री को मौके पर ही नष्ट कराया गया। विभाग के अनुसार कुल 7,686 किलोग्राम खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपये है।

इसके अतिरिक्त 2,131 किलोग्राम खाद्य सामग्री एवं अपमिश्रक जब्त किए गए। जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत करीब 4.75 लाख रुपये बताई गई है। इस तरह अभियान में कुल 9,817 किलोग्राम खाद्य सामग्री एवं अपमिश्रकों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

-  पनीर निर्माण में रसायन और खाद्य तेल के इस्तेमाल पर सख्ती
टीमों ने पनीर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल, निर्माण प्रक्रिया और इकाइयों में स्वच्छता व्यवस्था की जांच की। इस दौरान कुछ प्रतिष्ठानों में पनीर निर्माण के लिए औद्योगिक प्रयोग के रसायनों और पामोलिन ऑयल/रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल के इस्तेमाल के मामले सामने आए।

विभाग ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित इकाइयों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की तथा संदिग्ध सामग्री को जब्त या नष्ट कराया।

-  गंभीर मामलों में छह एफआईआर
अभियान के दौरान गंभीर अनियमितताओं के मामलों में कुल छह एफआईआर दर्ज कराई गईं। इनमें पनीर निर्माण में औद्योगिक रसायनों और पामोलिन ऑयल/रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल के इस्तेमाल तथा अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में खाद्य पदार्थ तैयार करने से संबंधित पांच मामले शामिल हैं।
इसके अलावा सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में भी एक एफआईआर दर्ज कराई गई। विभागीय विवरण के अनुसार गाजियाबाद में तीन और मथुरा में दो प्रकरणों में एफआईआर दर्ज हुई, जबकि सहारनपुर में भी प्रवर्तन कार्रवाई की गई।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर लगातार निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई कर रहा है। विशेष रूप से व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले पनीर में मिलावट और अस्वच्छ निर्माण पर विभाग की टीमें नजर रख रही हैं।
विभाग का कहना है कि अभियान का उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और हितों की रक्षा करना है। अभियान के दौरान लिए गए नमूनों की प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विभाजन की त्रासदी की स्मृति में सीएम योगी ने निकाली मौन पदयात्रा

-  सरदार पटेल प्रतिमा से लोकभवन तक पैदल चले मुख्यमंत्री, विभाजन में जान गंवाने वालों को दी श्रद्धांजलि


-  प्रदर्शनी का अवलोकन कर विस्थापित परिवारों से मिले, सुने बंटवारे के दर्दनाक अनुभव


लखनऊ। भारत विभाजन की त्रासदी को स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ में मौन पदयात्रा निकाली। मुख्यमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा से लोकभवन तक करीब आधा किलोमीटर पैदल चलकर विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मौन पदयात्रा के बाद मुख्यमंत्री ने लोकभवन में विभाजन की त्रासदी पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभाजन के दौरान हुए विस्थापन, पीड़ा और संघर्ष को दर्शाने वाली सामग्री को देखा। इस दौरान उन्होंने शॉर्ट फिल्म के माध्यम से भी विभाजन की त्रासदी को याद किया।

-  लाइव पेंटिंग के जरिए उकेरी गई विभाजन की पीड़ा
लोकभवन परिसर में कलाकारों द्वारा बनाई जा रही लाइव पेंटिंग का भी मुख्यमंत्री ने अवलोकन किया। चित्रों के माध्यम से विभाजन के दौरान लोगों के विस्थापन और उनके संघर्ष को अभिव्यक्त किया गया।
मुख्यमंत्री ने विभाजन के समय भारत आए विस्थापित परिवारों के सदस्यों से मुलाकात भी की। परिवारों ने उस दौर की अपनी पीड़ादायक स्मृतियां और अनुभव मुख्यमंत्री के साथ साझा किए।

-  बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल
मौन पदयात्रा में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समेत भाजपा के पदाधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और अन्य लोग शामिल हुए। पदयात्रा के माध्यम से विभाजन के दौरान अपनी जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने के साथ उनकी पीड़ा और संघर्ष को स्मरण किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विभाजन की त्रासदी से जुड़े इतिहास और उससे प्रभावित परिवारों की स्मृतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश भी दिया गया।
हल्द्वानी मंच शुद्धिकरण मामले पर मायावती सख्त

-  खरगे के भाषण के बाद मंच के शुद्धिकरण को बताया ‘अति निंदनीय’, जातिवादी तत्वों पर कार्रवाई की मांग


-  मायावती बोलीं- उत्तराखंड सरकार ऐसे लोगों को जेल भेजे, संघ प्रमुख को भी करना चाहिए विचार


लखनऊ। हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के भाषण के बाद कथित तौर पर मंच के शुद्धिकरण किए जाने के मामले को लेकर बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस घटना को अति निंदनीय और चिंतनीय बताते हुए उत्तराखंड सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मायावती ने कहा कि दलित नेता के भाषण के बाद मंच का शुद्धिकरण किया जाना बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने कहा कि जातिवादी मानसिकता रखने वाले ऐसे तत्वों के खिलाफ सरकार को कठोर कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजना चाहिए।
उन्होंने उत्तराखंड सरकार से मामले में गंभीरता से कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं सामाजिक समरसता और भाईचारे के लिए चिंताजनक हैं।

-  संघ प्रमुख से भी सोचने की अपील
बसपा प्रमुख ने कहा कि ऐसे मामलों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख को भी विचार करना चाहिए और समाज में जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाली मानसिकता के खिलाफ स्पष्ट संदेश जाना चाहिए।
मायावती ने इसके साथ ही शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर हमले की घटना को भी चिंतनीय बताया और ऐसी घटनाओं की निंदा की।
राज्यपाल की टिप्पणी के बाद मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति ने दिया इस्तीफा

-  कार्यकाल पूरा होने से करीब 10 माह पहले छोड़ा पद, प्रो. अखिलेश कुमार सिंह को मिला अतिरिक्त प्रभार

प्रयागराज/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत्यकाम ने अपने कार्यकाल की समाप्ति से करीब 10 महीने पहले पद से इस्तीफा दे दिया है। कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए प्रो. राजेंद्र सिंह ‘रज्जू भैया’ राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह को मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है।
सूत्रों के अनुसार, 17 जुलाई को आयोजित विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने मंच से प्रो. सत्यकाम को राजभवन बुलाने की बात भी कही थी। इसके बाद से ही उनके इस्तीफे को राज्यपाल की टिप्पणी से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, प्रो. सत्यकाम के इस्तीफे का आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। ऐसे में राज्यपाल की टिप्पणी से आहत होकर इस्तीफा देने की चर्चा फिलहाल सूत्रों के हवाले से ही है।
प्रो. सत्यकाम को 5 जून 2024 को उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया था। कार्यकाल पूरा होने से पहले उनके इस्तीफे के बाद अब प्रो. अखिलेश कुमार सिंह को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक संचालन की जिम्मेदारी दी गई है।
गीडा बना पूर्वांचल के औद्योगिक विकास का नया इंजन


-  9 वर्षों में ₹20 हजार करोड़ से अधिक का निवेश, 40 हजार से ज्यादा रोजगार सृजित

-  2,000 एकड़ की धुरियापार औद्योगिक टाउनशिप में निवेश के नए अवसर; अडानी और श्रेयस डिस्टिलरीज को 115 एकड़ भूमि आवंटित

लखनऊ/ गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देते हुए गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) पूर्वांचल के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। बेहतर आधारभूत सुविधाओं, मजबूत कनेक्टिविटी और निवेश के अनुकूल माहौल के चलते गीडा ने पिछले नौ वर्षों में ₹20,000 करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित किया है और 40,000 से ज्यादा रोजगार के अवसर सृजित किए हैं।

गीडा की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अनुज मलिक के अनुसार, वर्तमान में गीडा क्षेत्र की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में 50 हजार से अधिक लोग तकनीकी, कुशल और अर्धकुशल श्रेणियों में कार्यरत हैं। इससे पूर्वांचल के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के बेहतर अवसर मिल रहे हैं। अडानी सीमेंट प्लांट जैसे बड़े प्रोजेक्ट में करीब 70 प्रतिशत कार्यबल गोरखपुर मंडल और पूर्वांचल के अन्य जिलों से है।

-  3,600 एकड़ का क्षेत्र लगभग भर चुका
गीडा का मौजूदा करीब 3,600 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र लगभग पूरी तरह भर चुका है। निवेशकों की बढ़ती मांग को देखते हुए प्राधिकरण ने 2,000 एकड़ का नया लैंड बैंक तैयार किया है, जिसे ‘धुरियापार औद्योगिक टाउनशिप’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर नए उद्योगों की स्थापना और रोजगार सृजन का रास्ता खुलेगा।

-  एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी से निवेशकों को बढ़त
धुरियापार औद्योगिक टाउनशिप पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के बीच रणनीतिक स्थिति में है। बेहतर सड़क संपर्क के कारण गोरखपुर को लखनऊ से लगभग तीन घंटे में जोड़ा जा सकेगा। इससे औद्योगिक इकाइयों को कच्चे माल और तैयार उत्पादों के तेज परिवहन, बेहतर लॉजिस्टिक्स तथा बड़े बाजारों तक आसान पहुंच का लाभ मिलेगा।
नई औद्योगिक टाउनशिप में निवेशकों की रुचि भी सामने आने लगी है। अडानी और श्रेयस डिस्टिलरीज को 115 एकड़ भूमि आवंटित की जा चुकी है।

-  राष्ट्रीय और वैश्विक कंपनियों की मौजूदगी
गीडा में देश की प्रमुख कंपनियों की मौजूदगी इसके मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम को दर्शाती है। एनएसई में सूचीबद्ध गैलेंट ग्रुप, हाल में आईपीओ लाने वाली क्रेजी स्नैक्स प्राइवेट लिमिटेड, तथा कोका-कोला और पेप्सिको के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट यहां संचालित हैं। इसके अलावा आईजीएल, अपोलो एपीआई स्टील ट्यूब्स और तत्व पॉलीप्लास्टिक जैसी कंपनियां भी गीडा के औद्योगिक आधार को मजबूती प्रदान कर रही हैं।

-  डिजिटल सुविधाओं से निवेश प्रक्रिया आसान
गीडा में निवेशकों को सुविधाजनक और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए भौतिक आधारभूत ढांचे के साथ डिजिटल सुविधाओं को भी मजबूत किया जा रहा है। निवेश मित्र 2.0 से निवेश मित्र 3.0 पर अपग्रेड के बाद उद्यमियों को मंजूरियों, प्रोत्साहनों और अन्य आवश्यकताओं से संबंधित 21 ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध हैं।
वहीं, वन मैप पोर्टल के जरिए निवेशक उपलब्ध भूखंडों को लाइव देख सकते हैं और पारदर्शी ई-नीलामी में भाग ले सकते हैं। इन्वेस्ट यूपी के तहत तैनात उद्यमी मित्र निवेशकों के लिए सिंगल-पॉइंट फैसिलिटेशन के रूप में कार्य कर रहे हैं और विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर मंजूरियों की प्रक्रिया को सुगम बना रहे हैं।

-  पूर्वांचल को औद्योगिक शक्ति बनाने की दिशा में कदम
जमीन की उपलब्धता, बेहतर कनेक्टिविटी, बड़े उद्योगों की मौजूदगी और डिजिटल निवेश सुविधाओं के चलते गीडा अब गोरखपुर सहित पूरे पूर्वांचल को विनिर्माण और रोजगार के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। धुरियापार औद्योगिक टाउनशिप के विकास से निवेश का दायरा और विस्तृत होने की उम्मीद है। गीडा का यह विस्तार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को गति देने में पूर्वांचल की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करता है।
संत रविदास मंदिर के जीर्णोद्धार का होगा शिलान्यास
-  दोहरीघाट में मंत्री ए.के. शर्मा करेंगे ₹1.82 करोड़ की परियोजना का शुभारंभ


-  संत रविदास की 650वीं जयंती पर समरसता संकल्प अभियान में भी लेंगे हिस्सा

लखनऊ। संत शिरोमणि श्री रविदास जी की 650वीं जन्म जयंती के अवसर पर प्रदेश सरकार सामाजिक समरसता, समानता और सद्भाव के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इसी क्रम में नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा शुक्रवार, 14 अगस्त को मऊ के दोहरीघाट पहुंचेंगे। यहां वह संत रविदास जी मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य का शिलान्यास करेंगे और समरसता संकल्प अभियान में भी भाग लेंगे।
दोहरीघाट स्थित संत रविदास मंदिर का जीर्णोद्धार नगर विकास विभाग की वंदन योजना के तहत कराया जाएगा। करीब ₹1.82 करोड़ की लागत से होने वाले इस कार्य से मंदिर परिसर को बेहतर और सुव्यवस्थित स्वरूप मिलेगा। साथ ही श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा।

-  सामाजिक समरसता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास
मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास जी ने अपने जीवन और विचारों के माध्यम से समानता, भाईचारे, मानवता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उनके विचार आज भी समाज को एकजुट करने और भेदभाव से मुक्त समरस समाज के निर्माण की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार संत रविदास जी के आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग के सम्मान, उत्थान और सहभागिता के लिए लगातार कार्य कर रही है। 650वीं जयंती का अवसर उनके जीवन और कृतित्व को स्मरण करने के साथ-साथ उनके विचारों को जीवन में उतारने का भी अवसर है।

-  वंदन योजना से धार्मिक स्थलों का संरक्षण
श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार धार्मिक, आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के स्थलों के संरक्षण और विकास को प्राथमिकता दे रही है। वंदन योजना के माध्यम से ऐसे स्थलों का जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण और विकास कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत संरक्षित होने के साथ ही श्रद्धालुओं और आमजन को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

-  समरसता संकल्प अभियान में लेंगे हिस्सा
मंत्री ने कहा कि संत रविदास जी की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित समरसता संकल्प अभियान समाज में आपसी भाईचारे, सद्भाव और समानता की भावना को मजबूत करने का माध्यम बनेगा। संत रविदास जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाकर सामाजिक समरसता और सहयोग की भावना को और मजबूत किया जाएगा।
योगी सरकार ने 7 अधिकारियों के किए तबादले, एसडीएम लखनऊ बनाई गईं निधि पांडेय
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गुरुवार को प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। शासन ने 7 अधिकारियों के तबादले किए हैं। ज्योति राय को अपर जिलाधिकारी (वि/रा), बलरामपुर से अपर आयुक्त, आजमगढ़ मंडल के तौर पर नई तैनाती दी गई है। संदीप केला को नगर मजिस्ट्रेट, बांदा से अपर जिलाधिकारी (वि/रा), बलरामपुर की जिम्मेदारी दी गई है।

दिनेश चंद्र को उपजिलाधिकारी, बुलंदशहर से नगर मजिस्ट्रेट बांदा बनाया गया है। दिव्या ओझा को उपजिलाधिकारी, चंदौली से अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), बरेली की जिम्मेदारी दी गई है। विनय कुमार सिंह को नगर मजिस्ट्रेट, प्रयागराज से नगर मजिस्ट्रेट गोरखपुर बनाया गया है।

इसी तरह से उत्कर्ष श्रीवास्तव की भी तैनाती बदली गई है। उत्कर्ष श्रीवास्तव को नगर मजिस्ट्रेट, गोरखपुर से नगर मजिस्ट्रेट, प्रयागराज की जिम्मेदारी सौंपी गई है। निधि पांडेय को कंपट्रोलर, जन भवन से उपजिलाधिकारी, लखनऊ की जिम्मेदारी दी गई है।

बीते महीने जुलाई में योगी सरकार ने 182 अधिकारियों के तबादले किए थे। सरकार ने कई जिलों से एसडीएम की तैनाती बदल दी थी। 13 जुलाई को किए गए तबादले में प्रशांत कुमार को एसडीएम उन्नाव से एसडीएम बहराइच के पद पर तैनाती दी गई थी। कुमार संजय को जालौन, ध्रुव शुक्ला को गाजीपुर, अभय कुमार सिंह को विशेष कार्याधिकारी राजस्व परिषद, यूपी, मनोज प्रकाश को एसडीएम जालौन, अरविंद कुमार सिंह को एसडीएम मैनपुरी, पुष्पेंद्र पटेल को एसडीएम अंबेडकरनगर, योगेश कुमार गौड़ को एसडीएम सहारनपुर बनाया गया था।

पिछले महीने किए गए ट्रांसफर में अरुण दीक्षित को एसडीएम भदोही, अश्विनी कुमार सिंह को एसडीएम बाराबंकी, क्षितिज द्विवेदी को एसडीएम देवरिया, मनोज कुमार को एसडीएम मथुरा, राकेश कुमार त्यागी को एसडीएम रामपुर, शुभम यादव को एसडीएम बुलंदशहर, दीपिका मेहर को एसडीएम शामली, अवधेश कुमार निगम को एसडीएम फिरोजाबाद, गोपाल शर्मा को एसडीएम बरेली, और विश्वेश्वर सिंह को एसडीएम सिद्धार्थनगर बनाया गया था।
एक साल से फरार उज्बेकिस्तानी महिला लोला कायूमोवा गिरफ्तार, फर्जी दस्तावेज और अवैध तरीके से रहने के मामले में बड़ा खुलासा

लखनऊ। राजधानी में विदेशी नागरिकों के अवैध रूप से रहने और उनसे जुड़े कथित नेटवर्क की जांच में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। थाना सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस ने उज्बेकिस्तान की नागरिक लोला क्यूमोवा उर्फ लोला कायूमोवा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार वह वर्ष 2025 में दर्ज मुकदमे में वांछित थी और लंबे समय से अपनी पहचान छिपाकर लखनऊ समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में रह रही थी। उसकी गिरफ्तारी एफआरआरओ (Foreigners Regional Registration Office) से मिली सूचना के बाद की गई।

पुलिस के मुताबिक लोला के खिलाफ सुशांत गोल्फ सिटी थाने में दर्ज मुकदमे में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और विदेशी नागरिकों से संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में महिला ने कई वर्षों से पासपोर्ट और वीजा की अवधि समाप्त होने के बावजूद भारत में रहने, भारतीय पहचान संबंधी दस्तावेज बनवाने और अलग-अलग स्थानों पर अनैतिक देह व्यापार से जुड़े नेटवर्क में शामिल होने की जानकारी दी है। उसके मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अब अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

2025 में सामने आया था मामला

पुलिस के अनुसार पूरा मामला 20 जून 2025 को सामने आया था। उस समय सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र में विदेशी महिलाओं के अवैध रूप से रहने की सूचना पर पुलिस और एफआरआरओ की टीम ने कार्रवाई की थी। जांच के दौरान दो उज्बेकिस्तानी महिलाओं के बिना वैध पासपोर्ट और वीजा के भारत में रहने की बात सामने आई थी।

इस मामले में पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो लोला क्यूमोवा की भूमिका भी सामने आई। पुलिस के मुताबिक वह विदेशी महिलाओं को लखनऊ में ठहराने और उनके लिए व्यवस्था कराने में कथित रूप से शामिल थी। कार्रवाई के दौरान लोला मौके से निकल गई थी, जिसके बाद उसकी तलाश की जा रही थी।

पहचान छिपाने के लिए दस्तावेज बनवाने का आरोप

पुलिस की विवेचना में यह भी आरोप सामने आया कि लोला ने भारत में अपनी पहचान छिपाने के लिए भारतीय दस्तावेज बनवाए। पुलिस ने उसके कब्जे से दो आधार कार्ड, एक पैन कार्ड और एक ड्राइविंग लाइसेंस बरामद किए हैं। इसके अलावा उसके पास से तीन डेबिट कार्ड और लुलु मॉल का एक फंटुरा कार्ड भी मिला है।

पुलिस अब इन दस्तावेजों के बनने की प्रक्रिया और उनमें दर्ज विवरणों का सत्यापन कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि विदेशी नागरिक होने के बावजूद उसे ये दस्तावेज किस तरह हासिल हुए और इसमें किसी अन्य व्यक्ति या स्थानीय नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं।

प्लास्टिक सर्जरी से पहचान बदलने की भी जांच

मामले में प्लास्टिक सर्जरी का पहलू भी जांच के दायरे में है। पुलिस के अनुसार विदेशी महिलाओं की पहचान बदलने के लिए कथित तौर पर प्लास्टिक सर्जरी कराए जाने की बात विवेचना में सामने आई है। लोला द्वारा भी अपनी पहचान छिपाने के लिए प्लास्टिक सर्जरी कराए जाने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस अब यह सत्यापित कर रही है कि सर्जरी कहां और किसकी मदद से कराई गई तथा इसमें किसी चिकित्सक या अन्य स्थानीय व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। इस संबंध में सामने आए नामों और तथ्यों की भी जांच की जा रही है।

देह व्यापार के नेटवर्क से जुड़े होने का पुलिस का दावा

पूछताछ में लोला ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उसके संपर्क में कई अन्य सहयोगी हैं और अलग-अलग राज्यों एवं जिलों में महिलाओं से अनैतिक देह व्यापार कराया जाता था। पुलिस को उसके मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिलने की बात कही गई है।

जांच एजेंसियां अब इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि लखनऊ के अलावा दूसरे शहरों में इस नेटवर्क का कितना विस्तार था और इसमें स्थानीय स्तर पर किन लोगों ने मदद की।

विदेशी नेटवर्क से संपर्क की भी जांच

पुलिस की जांच में लोला के नेपाल और उज्बेकिस्तान से जुड़े लोगों के संपर्क में होने की बात भी सामने आई है। हालांकि इन संपर्कों की वास्तविक भूमिका और नेटवर्क की प्रकृति की पुष्टि के लिए आगे की जांच जारी है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विदेशी महिलाओं को भारत लाने, उनके रहने की व्यवस्था करने और उनकी पहचान छिपाने में कौन-कौन लोग शामिल थे।

मोबाइल और दस्तावेजों से खुलेगा नेटवर्क का राज

गिरफ्तारी के समय पुलिस ने लोला के पास से दो मोबाइल फोन, नकदी और जेवरात के साथ कई पहचान एवं बैंकिंग संबंधी दस्तावेज बरामद किए हैं। बरामदगी में 39,740 रुपये नकद, वीवो और सैमसंग के दो मोबाइल फोन, एक्सिस और एचडीएफसी के तीन डेबिट कार्ड, दो आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस शामिल हैं।

इसके अलावा पुलिस ने पीली और सफेद धातु की अंगूठियां, चेन, ब्रेसलेट, ईयररिंग और घड़ी भी बरामद की है। पुलिस इन सामानों और डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है।

कई साल से भारत में रहने का दावा

पुलिस पूछताछ में लोला ने कथित तौर पर बताया कि उसके पासपोर्ट और वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी वह कई वर्षों से भारत के अलग-अलग राज्यों और जिलों में छिपकर रह रही थी। पुलिस अब उसके भारत में रहने की अवधि, आवागमन और संपर्कों की विस्तृत जानकारी जुटा रही है।

इसके साथ ही संबंधित विदेशी नागरिकता एवं आव्रजन रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने मामले की जानकारी संबंधित एजेंसियों को भी दी है।

सुशांत गोल्फ सिटी थाने में दर्ज है मुकदमा

लोला के खिलाफ थाना सुशांत गोल्फ सिटी में मु0अ0सं0 544/2025 दर्ज है। इसमें धारा 318(4), 61 बीएनएस के साथ विदेशी पंजीकरण अधिनियम और विदेशी अधिनियम की संबंधित धाराओं तथा इमीग्रेशन एंड फॉरेनर एक्ट की धाराओं में कार्रवाई की गई है।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार महिला की पहचान लोला क्यूमोवा पुत्री अलिमद जमोवना, मूल निवासी ताशकंद, उज्बेकिस्तान के रूप में हुई है। उसकी उम्र पुलिस रिकॉर्ड में करीब 45 वर्ष बताई गई है। उसके लखनऊ में राजाजीपुरम और सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र में रहने के पते सामने आए हैं।

न्यायालय में पेश किया गया, जांच जारी

एफआरआरओ की सूचना के बाद पुलिस टीम ने महिला से पूछताछ की और इसके बाद उसे नियमानुसार गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है। अब उसके मोबाइल फोन, बरामद दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और संपर्कों की जांच के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि लोला का कथित नेटवर्क कितना बड़ा था, इसमें कितने लोग शामिल थे और विदेशी महिलाओं को भारत में अवैध रूप से ठहराने तथा उनकी पहचान छिपाने में किन लोगों ने मदद की।