सीएम हेमंत सोरेन ने खनिज संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, से हस्तक्षेप लगाई गुहार

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खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 को लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कड़ा ऐतराज जताया है। विधेयक को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। मुख्यमंत्री ने विधेयक को केंद्र-राज्य संबंधों के संतुलन और झारखंड की वित्तीय स्वायत्तता के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप का आग्रह किया है। इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भी अगल से पत्र लिखकर इस विषय पर समर्थन की मांग की गई है।

राष्ट्रपति को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने का आग्रह

सीएम हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी को पत्र लिखकर खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर झारखंड और झारखंडवासियों की गंभीर चिंताओं से अवगत कराया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संशोधन केवल राजस्व का विषय नहीं, बल्कि राज्यों की विधायी एवं वित्तीय स्वायत्तता, संघीय ढांचे, आदिवासी समुदायों और खनन प्रभावित क्षेत्रों के अधिकारों से जुड़ा प्रश्न है।

पीएम को पत्र लिखकर पुनर्विचार का आग्रह

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखकर खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित प्रावधान झारखंड जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों के संवैधानिक अधिकारों, राजस्व, विकास और संघीय ढांचे पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। मुख्यमंत्री ने विधेयक में प्रस्तावित एमएमडीआर अधिनियम की नई धारा 9डी पर आपत्ति जताई है। उनके मुताबिक, इस प्रावधान के बाद राज्य सरकारें खनिज अधिकारों या खनिज वाली जमीन पर कोई कर, सेस या दूसरी लेवी लगाती हैं तो उस पर केंद्र की तय शर्तें और सीमाएं लागू होंगी।सीएम हेमंत सोरेन ने पत्र में कहा कि केंद्र का यह नया कानून लागू हुआ तो झारखंड को खान-खनिज से मिलने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है।

राहुल गांधी को भी पत्र लिखकर मांगी मदद

वहीं हेमंत सोरेन ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भी पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने राहुल गांधी से इस विधेयक का विरोध करने की अपील की है। हेमंत सोरेन ने बताया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर बिल के माध्यम से राज्यों के संवैधानिक एवं वित्तीय अधिकारों को सीमित करने के जो प्रयास केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे हैं उस पर साथ आवाज़ उठाने का आग्रह किया है।

ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, पूरा देश देखेगा’ केंद्र के माइनिंग बिल पर सीएम हेमंत की चेतावनी

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केंद्र सरकार के खान और खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन विधेयक 2026 के खिलाफ झारखंड सरकार ने मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। सीएम हेमंत सोरेन ने आंदोलन के ऐलान एक्स पर किए एक पोस्ट में दी।

हेमंत सोरेन ने पूछा- हमारे हक का फैसला दिल्ली क्यों करेगी?

सीएम हेमंत सोरेन ने लिखा, झारखंड ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा। उन्होंने अपने पोस्ट में आगे लिखा- खनिज झारखंड का, जमीन झारखंड की—तो हमारे हक-अधिकार का फैसला दिल्ली क्यों करेगी?

सीएम सोरेन ने बताई आंदोलन की वजह

अपने पोस्ट में सीएम सोरेन ने आंदोलन की वजह भी बताई। उन्होंने लिखा कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में जल्दबाजी में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पास करा केंद्र सरकार ने झारखंड के हाथ-पैरों को काटने का काम किया है। यह काला बिल झारखंड और झारखंडियों के साथ अन्याय है, उनके विकास और भविष्य पर बहुत बड़ा कुठाराघात है। झारखंड यह सौतेला व्यवहार नहीं सहेगा। सीएम ने पोस्ट में यह भी लिखा कि इस बिल के कारण झारखंड में करोड़ों लोगों के सामाजिक सुरक्षा जैसे मईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, पेंशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदि योजनाएं बंद होने के कगार पर आ जाएगी।

हर जिला-प्रखंड और पंचायत में होगा कड़ा विरो- हेमंत सोरेन

हेमंत सोरेन ने लिखा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा इसका पुरजोर विरोध करता है। पोस्ट के आखिर में सीएम हेमंत ने लिखा कि प्रत्येक जिला, प्रत्येक प्रखंड, प्रत्येक पंचायत, प्रत्येक शहर में इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। अगर केंद्र सरकार नहीं चेती, और झारखंड तथा झारखंडियों को उसका हक-अधिकार वापस नहीं किया गया तो झारखंड निर्णायक और ऐतिहासिक निर्णयों को लेने से पीछे भी नहीं हटेगा।

माइनिंग बिल के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के सांसदों, विधायकों और पार्टी कोटे से सरकार में शामिल मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की गई।

चमोली हादसे में फंसे झारखंड के मजदूरों को लेकर सीएम सोरेन ने पुष्कर धामी से की बात, हेल्पलाइन नंबर जारी

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उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन टनल के धंसने से कई मजदूरों की मौत हो गई है। उनमें झारखंड के भी मजदूर शामिल हैं। वहीं, इस हादसे में कई श्रमिक अंदर फंसे हुए हैं। झारखंड के खूंटी, गुमला आदि जिलों के कुछ श्रमिकों के फंसे होने की खबर है। इसकी जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से फोन पर बात की।

सभी मजदूरों के सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया एक्स पर बताया कि झारखंड के खूंटी और गुमला जिले के कई मजदूरों के टनल में फंसे रहने की खबर मिलने के बाद उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से बात की। उन्होंने आश्वस्त किया है कि सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

झारखंड सरकार की ओर से हेल्पलाइन नंबर जारी

मुख्यमंत्री ने झारखंड के उन लोगों से अपील की है, जिनके परिजन या परिचित इस परियोजना में काम करने गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कंट्रोल रूम नंबर 1.हेल्पलाइन नंबर (टोल फ्री): 1800-3456-526 2.हेल्पलाइन व्हाट्सएप नंबर: 9470132591, 9431336472, 9431336427 पर संपर्क कर कृपया जानकारी साझा करें। सरकार हर श्रमिक की सुरक्षित वापसी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के गंभीर परिणाम-हेमंत सोरेन

सीएम सोरेन ने ये भी कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति के सम्मान और पर्यावरणीय संतुलन के साथ। हेमंत सोरेने ने लिखा, बार-बार निर्माणाधीन सुरंगों में हादसों और श्रमिकों के फंसे होने की खबरें मन को व्यथित करती हैं। विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति के सम्मान और पर्यावरणीय संतुलन के साथ। प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के गंभीर परिणाम हमें बार-बार चेताते हैं।

खनिज और जमीन हमारी, फैसला दिल्ली क्यों करे?" - झारखंड कांग्रेस ने नए खान-खनिज कानून को बताया जनविरोधी

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महासचिव श्री बिनय सिन्हा दीपू ने केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा संसद में जल्दबाजी में पारित कराए गए खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को झारखंड की जनता पर सीधा वज्रपात मानती है। खनिज और जमीन हमारी है,

तो हमारे हक-अधिकार का फैसला दिल्ली में बैठे लोग क्यों तय करेंगे? यह संशोधन सीधे तौर पर हमारे राज्य के वित्तीय हितों के हाथ-पैर काटने की साजिश है ।कांग्रेस पार्टी इस ने गंभीर बिंदुओं को जनता के बीच रखते हैं:₹1.36 लाख करोड़ के हक पर दिल्ली की डाकाजनी: झारखंड का विभिन्न केंद्रीय उपक्रमों (PSUs) और कोल इंडिया के पास ₹1.36 लाख करोड़ का पुराना बकाया भूमि मुआवजा, कॉमन कॉज और रॉयल्टी के रूप में लंबित है।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट ऐतिहासिक निर्णयों के बावजूद, इस बकाए को देने के बजाय केंद्र सरकार ने नया कानून लाकर राज्यों के कर वसूलने के संवैधानिक अधिकार को ही खत्म कर दिया।कल्याणकारी योजनाओं पर संकट: इस खनिज राजस्व और सेस के पैसों से झारखंड में मंइयां सम्मान योजना, अबुआ आवास, छात्रवृत्ति, और ग्रामीण विकास के कार्य संचालित होने हैं। केंद्र का यह तानाशाही कदम हमारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को बंद करने की सुनियोजित कोशिश है

।रघुवर दास के नक्शेकदम पर केंद्र की नीति: पूर्ववर्ती रघुवर दास सरकार ने भी झारखंड के जल-जंगल-जमीन और खनिज हितों को कमजोर करने के रास्ते खोले थे। आज केंद्र की भाजपा सरकार उसी जनविरोधी नीति को राष्ट्रीय स्तर पर कानून बनाकर धार दे रही है

ताकि झारखंड के मूलवासियों को उनके ही संसाधनों से बेदखल किया जा सके।हमारी हुंकार:झारखंड कांग्रेस पार्टी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। अगर केंद्र सरकार ने इस काले कानून को तुरंत वापस नहीं लिया, तो झारखंड पंचायत से लेकर राजधानी रांची तक ऐसा ऐतिहासिक और निर्णायक आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा।

बाबूलाल मरांडी ने पांकी के सकलदीपा गांव में दुष्कर्म आदिवासी पीड़िता के परिजनों से की मुलाकात

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पांकी विधानसभा क्षेत्र के सकलदीपा गांव में समुदाय विशेष के द्वारा एक आदिवासी बेटी के साथ दुष्कर्म और उनकी दो बहनों के अपहरण किए जाने के मामले में पीड़ित परिवार से जाकर मुलाकात की और पूरी घटना की विस्तृत जानकारी ली।

पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद नेता प्रतिपक्ष ने फुलवरिया बाजार टांड़ में आदिवासी महिलाओं और बच्चों के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ आयोजित विशाल आक्रोश महापंचायत सभा को संबोधित भी किया।

श्री मरांडी ने कहा कि उक्त गांव में मात्र पांच छह आदिवासी परिवार निवास करते हैं, बाकी मुस्लिम परिवार के लोग हैं। पीड़ित परिवार ने जो घटनाक्रम बतलाया है, वह कहानी काफी दर्द भरी है। उन्होंने कहा कि बच्ची के साथ फरवरी माह में दुष्कर्म हुआ था। अपराधी के पकड़े जाने के बाद उनके भाई पीड़ित परिवार को धमकी देने लगे। फिर दो-दो लड़कियों को जबरन उठाकर रांची और अन्यत्र जगह ले जाकर महीनों रखा गया। सोचिए, कानून का राज कहां है ? किस प्रकार का यहां आतंक है?

श्री मरांडी ने कहा कि इतना ही नहीं इन्हें बुर्का और हिजाब पहनने के लिए भी दबाव डाला गया। सभी समाज की भांति आदिवासी समाज की भी अपनी संस्कृति, रहन-सहन और खान पान है। इस पर किसी के द्वारा दबाव डालना अनुचित है। उन्होंने अपराधियों को सचेत किया कि इस प्रकार के कृत्य से बाज आएं। साथ ही प्रशासन और मुस्लिम समाज से कहा कि ऐसे अपराधियों, दुराचारियों को समाज से बहिष्कृत करने की जरूरत है। दूसरे घर की मां बहनों को अपनी मां बहन समझनी चाहिए। जो लोग ऐसे तत्व को साथ देंगे इसका खामियाजा उन्हें भी भुगतना पड़ता है।

श्री मरांडी ने कहा कि घटना के बाद पूरा आदिवासी परिवार अभी भी भय और असुरक्षा के साये में जी रहा है। उन्होंने जिले के एसपी से पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।

इस दौरान चतरा सांसद कालीचरण सिंह, पांकी विधायक शशि भूषण मेहता, प्रदेश महामंत्री मनोज सिंह, जिलाध्यक्ष अमित तिवारी सहित पार्टी के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से न छूटे, कोई विदेशी शामिल न हो - मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार

पूर्वी सिंहभूम/घाटशिला/बहरागोड़ा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने कहा कि वर्तमान विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत तैयार मतदाता सूची एवं उससे संबंधित दस्तावेजों को परमानेंट डॉक्यूमेंट के रूप में संरक्षित किया जाता है। वर्तमान में वर्ष 2003 के विशेष गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची में जिन मतदाताओं के नाम दर्ज हैं, उन्हें तथा उनके बच्चों को वर्तमान मतदाता सूची से मैपिंग की जा रही है। भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विगत एसआईआर के डॉक्यूमेंट को सुपीरियर डॉक्यूमेंट के रूप में माना गया है ।

इसी प्रकार वर्तमान विशेष गहन पुनरीक्षण के अभिलेख भविष्य में संबंधित मतदाताओं एवं उनकी संतानों के लिए महत्वपूर्ण सहयोगी दस्तावेज सिद्ध होंगे। इसलिए प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक वर्तमान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता करते हुए मतदाता सूची में अपना तथा अपने परिवार के सभी पात्र सदस्यों का नाम अवश्य सुनिश्चित करे।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी गुरुवार को पूर्वी सिंहभूम जिले के 45–घाटशिला विधानसभा अंतर्गत मतदान केंद्र संख्या 72,73,86 एवं 90 तथा 44–बहरागोड़ा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत मतदान केंद्र संख्या 270, 152 क्षेत्रों का भ्रमण कर झारखंड में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत किए जा रहे कार्यों का भौतिक निरीक्षण कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने संबंधित मतदान केंद्रों के बूथ लेवल पदाधिकारियों द्वारा उनके क्षेत्रों में मतदाता सत्यापन, पात्र नागरिकों के पंजीकरण, मतदाता सूची की शुद्धता तथा घर-घर संपर्क के माध्यम से किए जा रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण का प्रमुख उद्देश्य प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित करना एवं एक भी विदेशी नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो यह सुनिश्चित करने के साथ मतदाता सूची को शुद्ध, अद्यतन एवं त्रुटिरहित बनाना है। उन्होंने बीएलओ को निर्देश दिया कि वे अपने मतदान केंद्र क्षेत्र के प्रत्येक घर तक पहुंचकर पात्र नागरिकों का सत्यापन करें तथा ‘होम-टू-रोल’ को प्रभावी रूप से लागू करें। प्रत्येक घर एवं परिवार के सभी पात्र सदस्यों का मतदाता सूची से सही जुड़ाव सुनिश्चित किया जाए, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता पंजीकरण से वंचित न रह जाए।

श्री के रवि कुमार ने ‘एक परिवार–एक मतदान केंद्र’ पर विशेष बल देते हुए कहा कि एक ही परिवार के सभी पात्र सदस्यों के नाम एक ही मतदान केंद्र की मतदाता सूची में दर्ज होने चाहिए। यदि किसी परिवार के सदस्यों के नाम अलग-अलग मतदान केंद्रों अथवा अलग-अलग भागों में दर्ज हैं, तो फॉर्म 8 भरकर आवश्यक सुधार की कार्रवाई की जाए। इससे परिवार के सभी मतदाताओं को एक ही मतदान केंद्र पर अपने मताधिकार का प्रयोग करने की सुविधा प्राप्त होगी।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने पात्र युवा नागरिकों को मतदाता सूची से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके अथवा निर्धारित अर्हता तिथियों के अनुसार पात्र होने वाले युवाओं को मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया की जानकारी दी जाए तथा फॉर्म-6 के माध्यम से उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने में आवश्यक सहायता प्रदान की जाए। शैक्षणिक संस्थानों, आवासीय क्षेत्रों तथा युवाओं की अधिक संख्या वाले स्थानों पर जागरूकता गतिविधियां आयोजित कर उनका शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए।

इसी क्रम में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने घाटशिला के किताडीह स्थित सोना देवी विश्वविद्यालय में 13 अगस्त को आयोजित चौथे इंडक्शन-सह-ओरिएंटेशन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और नव नामांकित विद्यार्थियों को मतदाता सूची से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि मतदाता के रूप में पंजीकरण केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सक्रिय सहभागिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रत्येक पात्र युवा मतदाता सूची में अपना नाम अवश्य दर्ज कराए, अपने विवरण की जांच करे तथा अपने सहपाठियों एवं आसपास के अन्य पात्र युवाओं को भी इसके लिए जागरूक करे। उन्होंने विश्वविद्यालयों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों से पात्र विद्यार्थियों का मतदाता सूची में शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करने में निर्वाचन तंत्र को सक्रिय सहयोग प्रदान करने का आह्वान किया।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने घाटशिला में घर घर सर्वेक्षण की वस्तुस्थिति को जानने हेतु विभिन्न मतदान क्षेत्र के मतदाताओं के घर घर जाकर उनसे मुलाकात की। उन्होंने बताया कि यदि झारखंड का कोई पात्र नागरिक वर्तमान में किसी अन्य राज्य की मतदाता सूची में पंजीकृत है और अब सामान्य रूप से झारखंड में निवास कर रहा है, तो वह फॉर्म-8 भरकर अपना नाम झारखंड के संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में स्थानांतरित कराने के लिए आवेदन कर सकता है। बीएलओ ऐसे मतदाताओं को आवेदन प्रक्रिया की सही जानकारी दें तथा आवश्यकतानुसार उनका मार्गदर्शन करें। मतदाता सूची में दर्ज विवरण में किसी प्रकार की त्रुटि होने पर भी निर्धारित प्रपत्र के माध्यम से संशोधन के लिए आवेदन किया जा सकता है।

श्री के रवि कुमार ने बीएलओ को निर्देश दिया कि मतदाताओं द्वारा प्रस्तुत आवेदनों एवं दस्तावेजों का सावधानीपूर्वक सत्यापन किया जाए। मतदाता सूची में नाम जोड़ने, स्थानांतरित करने अथवा विवरण में संशोधन से संबंधित प्रत्येक आवेदन का निष्पादन भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से किया जाए। किसी भी पात्र मतदाता का नाम निर्धारित प्रक्रिया एवं सक्षम प्राधिकारी के आदेश के बिना मतदाता सूची से नहीं हटाया जाए।

उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना निर्वाचन तंत्र की सामूहिक जिम्मेदारी है कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे और किसी भी विदेशी अथवा अपात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो। इसके लिए बीएलओ घर-घर जाकर तथ्यपरक एवं निष्पक्ष सत्यापन करें तथा स्थानीय स्तर पर प्राप्त सूचनाओं एवं दस्तावेजों का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परीक्षण करें। मतदाता सूची की शुद्धता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

निरीक्षण के दौरान मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने संबंधित मतदान केंद्रों की मतदाता सूची, क्षेत्रीय सत्यापन की स्थिति तथा बीएलओ द्वारा संधारित फॉर्म का अवलोकन किया। उन्होंने बीएलओ से क्षेत्र में कार्य करने के दौरान सामने आ रही व्यावहारिक समस्याओं की जानकारी ली और मतदाताओं के साथ नियमित संवाद बनाए रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बीएलओ भारत निर्वाचन आयोग और मतदाताओं के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनके सक्रिय, निष्पक्ष एवं संवेदनशील प्रयासों से ही मतदाता सूची को अधिक समावेशी, शुद्ध और विश्वसनीय बनाया जा सकता है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बीएलओ द्वारा किए जा रहे परिश्रम एवं घर-घर संपर्क अभियान की सराहना की। उन्होंने बीएलओ को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। प्रत्येक पात्र नागरिक तक पहुंचना, उसे आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना तथा मतदाता सूची से संबंधित आवेदन प्रस्तुत करने में सहयोग प्रदान करना बीएलओ की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

श्री के रवि कुमार ने आम नागरिकों से अपील की कि वे मतदाता सूची में अपने तथा अपने परिवार के सभी पात्र सदस्यों के नाम एवं अन्य विवरण की जांच अवश्य करें। नाम दर्ज नहीं होने, निवास स्थान बदलने अथवा किसी विवरण में त्रुटि पाए जाने पर निर्धारित प्रपत्र के माध्यम से समय पर आवेदन करें। साथ ही सत्यापन के लिए आने वाले बीएलओ को सही जानकारी एवं आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराते हुए पूर्ण सहयोग प्रदान करें।

इस अवसर पर जिला निर्वाचन पदाधिकारी श्री राजीव रंजन, उप निर्वाचन पदाधिकारी श्रीमती प्रियंका सिंह, 45-घाटशिला विधानसभा क्षेत्र एवं 44-बहरागोड़ा विधानसभा क्षेत्र के ईआरओ, एईआरओ सहित निर्वाचन कार्य से जुड़े अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री आवास के आसपास बैरिकेडिंग से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त, छात्रों की आवाज़ से इतना डर क्यों : शोभा यादव

भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता शोभा यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री आवास के आसपास जिस तरह से भारी संख्या में बैरिकेडिंग की गई है, उससे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर पूरे इलाके के आम नागरिकों, स्कूली बच्चों, अभिभावकों, कर्मचारियों और राहगीरों को परेशानी में डाल देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। सड़कों पर जगह-जगह बैरिकेडिंग के कारण आवागमन बाधित हो रहा है और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अतिरिक्त समय और कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

श्रीमती यादव ने कहा कि सबसे अधिक परेशानी उन परिवारों को हो रही है जिनके बच्चे प्रतिदिन स्कूल जाते हैं। सुबह के समय जब बच्चों को समय पर विद्यालय पहुंचना होता है, तब रास्तों पर अवरोध और यातायात की समस्या के कारण अभिभावकों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। कई लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर आम जनता ने क्या गलती की है, जिसके कारण उसे इस तरह की अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है?

उन्होंने कहा कि आज झारखंड के छात्र अपनी समस्याओं और अपने भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। लोकतंत्र में छात्रों और युवाओं को अपनी मांगों को सरकार के सामने रखने का पूरा अधिकार है। उनकी बात सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं, तो सरकार को उनसे संवाद करना चाहिए, न कि उनके रास्ते में लगातार बैरिकेडिंग खड़ी करके उन्हें रोकने का प्रयास करना चाहिए। मुख्यमंत्री से मेरा सीधा सवाल है कि आखिर छात्रों से इतना भयभीत होने की क्या जरूरत है? यदि सरकार को लगता है कि छात्रों की मांगों में कोई तथ्य नहीं है, तो सरकार उनके साथ बैठकर बातचीत करे, उनकी बात सुने और तथ्यों के आधार पर जवाब दे। लोकतंत्र में संवाद किसी भी समस्या का सबसे बेहतर रास्ता है। बैरिकेडिंग, रास्ते बंद करना और आम जनता को परेशान करना किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि छात्र और युवा किसी सरकार के विरोधी नहीं होते। वे राज्य का भविष्य हैं और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनना सरकार का दायित्व है। परीक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया, रोजगार और पारदर्शिता जैसे विषयों पर युवाओं के मन में यदि सवाल हैं, तो उन सवालों का जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है। युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनके साथ विश्वास का वातावरण बनाया जाना चाहिए।

प्रदेश प्रवक्ता ने सरकार से मांग किया है कि मुख्यमंत्री आवास के आसपास की अनावश्यक बैरिकेडिंग और उससे आम लोगों को हो रही परेशानियों की तत्काल समीक्षा की जाए। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों, कर्मचारियों और आम नागरिकों के आवागमन को सुचारु बनाया जाए। साथ ही छात्रों के प्रतिनिधियों को बुलाकर उनके साथ खुले मन से बातचीत की जाए और उनकी वास्तविक समस्याओं का समाधान निकालने की पहल की जाए।

उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता को ऐसी सरकार चाहिए जो जनता के बीच रहे, युवाओं की बात सुने और समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से करे। मुख्यमंत्री आवास को किले में बदलने से समस्याएं खत्म नहीं होंगी, छात्रों के सवालों का जवाब देने से ही समाधान निकलेगा। सरकार को डर और अवरोध की राजनीति छोड़कर संवाद, पारदर्शिता और जवाबदेही का रास्ता अपनाना चाहिए।

रांची में मनाया गया क्यूबा एकजुटता दिवस, अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों की कड़ी निंदा

रांची, 13 अगस्त 2026: भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] द्वारा गुरुवार को रांची में क्यूबा एकजुटता दिवस मनाया गया। इस अवसर पर क्यूबा की जनता के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए समाजवादी देश क्यूबा पर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा दशकों से लगाए जा रहे आर्थिक प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की गई।

सभा को संबोधित करते हुए CPI(M) के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने कहा कि अमेरिकी साम्राज्यवादी शक्तियां क्यूबा की समाजवादी व्यवस्था से लगातार भयभीत रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1959 की क्यूबा क्रांति, फिदेल कास्त्रो और चे ग्वेरा के नेतृत्व में, अमेरिका के पड़ोस में समाजवादी सरकार की स्थापना का ऐतिहासिक उदाहरण बनी और उसने साम्राज्यवाद को मजबूत चुनौती दी। इस क्रांति ने पूरे लैटिन अमेरिका में क्रांतिकारी आंदोलनों को भी प्रेरित किया।

CITU के जिला सचिव प्रतीक मिश्रा ने कहा कि अमेरिका द्वारा क्यूबा की समाजवादी व्यवस्था को कमजोर करने के लगातार प्रयासों के बावजूद क्यूबा ने अपनी समाजवादी व्यवस्था को कायम रखा है।

CITU के राज्य महासचिव विश्वजीत देव ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों का क्यूबा की अर्थव्यवस्था और आम जनता के जीवन पर गंभीर असर पड़ा है। खाद्यान्न और ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि क्यूबा वर्तमान में गंभीर बिजली संकट का भी सामना कर रहा है, जिससे वहां की जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

CPI(M) राज्य सचिवमंडल सदस्य समीर दास ने आरोप लगाया कि अमेरिका क्यूबा में प्रति-क्रांति के जरिए अपनी पसंद की सरकार स्थापित करना चाहता है। उन्होंने कहा कि तमाम आर्थिक कठिनाइयों और बाहरी दबावों के बावजूद क्यूबा की कम्युनिस्ट पार्टी और वहां की जनता समाजवाद की रक्षा के लिए दृढ़ता से खड़ी है।

कार्यक्रम को अमन कुमार, फ़राज़ अब्बास और सोनाली ने भी संबोधित किया। प्रफुल्ल लिंडा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

वक्ताओं ने कहा कि देशभर में क्यूबा एकजुटता दिवस का आयोजन क्यूबा की जनता के प्रति समर्थन और एकजुटता व्यक्त करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को समाप्त करने और क्यूबा की संप्रभुता एवं समाजवादी व्यवस्था के खिलाफ हस्तक्षेप बंद करने की मांग की।

उल्लेखनीय है कि 13 अगस्त 2026 से महान क्यूबाई क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो के जन्मशती वर्ष की शुरुआत भी हो रही है। इस अवसर पर वक्ताओं ने क्यूबा की क्रांति, उसके समाजवादी संघर्ष और साम्राज्यवाद-विरोधी भूमिका को याद करते हुए क्यूबा की जनता के साथ एकजुटता व्यक्त की।

राजमाता अहिल्याबाई होल्कर सनातन संस्कृति की ध्वज वाहक : राकेश पाल।

गढ़वा :- गढ़वा जिला मुख्यालय मे गुरुवार को गढवा जिला पाल महासभा के तत्वाधान में राजमाता अहिल्या बाई होल्कर की पुण्यतिथि मनाई गई। वही गढवा जिला मुख्यालय के नीलांबर - पीताम्बर बहुदेशीय नगर भवन के समीप स्थित राजमाता अहिल्याबाई होल्कर के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पाल समाज के लोगों ने इस महान पुण्यात्मा को याद किया। कार्यक्रम के पूर्व प्रतिमा स्थल की विशेष साफ़-सफाई की गई एवम परिसर को फ़ूलों से सजाया गया।तत्पश्चात विभिन्न गाँव से सैकड़ों की संख्या में आए हुए पाल बंधुओं के द्वारा प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। वही इस दौरान अहिल्याबाई होल्कर अमर रहे के नारों से परिसर गूंज उठा।

वही उक्त अवसर पर प्रमुख समाजसेवी राकेश पाल ने कहा कि राजमाता अहिल्याबाई होल्कर भारतीय सनातन संस्कृति की ध्वज वाहक थी। वही उन्होंने विश्वविख्यात काशी विश्वनाथ मंदिर, गुजरात के सोमनाथ मंदिर, बिहार के गया जी स्थित प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर समेत सैकड़ों मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया। वही कई नए मंदिर बनवाये, धर्मशालाएं बनवाए,गरीबों के लिए निःशुल्क भोजनालय शुरू करवाये, गुलाम भारत मे एक महिला का समाज के प्रति ऐसा समर्पण अद्वितीय उदाहरण है।

कार्यक्रम मे गढवा जिला पाल महासंघ के जिलाध्यक्ष सुधीर कुमार पाल ने कहा कि महारानी अहिल्याबाई होल्कर का सम्पूर्ण जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है। गडरिया पाल वंश में जन्मी राजमाता अहिल्याबाई होल्कर हम सबों की धरोहर है। हम सभी गड़रिया पाल वंशज़ उनपर गर्व करते है।

इस कार्यक्रम में जोबरईया,

सहिजना, नवादा, तिलदाग, परिहारा, बरवाही,नगदरवा आदि गाँव से पाल समाज के लोगों ने अपनी उपस्थिति सुनिश्चित किया। वही कार्यक्रम के सफल आयोजन में पाल महासंघ के कोषाध्यक्ष सुरेंद्र पाल, मीडिया प्रभारी जितेन्द्र कुमार पाल,दिलीप पाल,योगेन्द्र पाल, सत्येन्द्र पाल, उदय पाल, अजय पाल की विशेष भागीदारी रही

।उक्त कार्यक्रम में पाल महासंघ के संरक्षक श्री बुधन पाल, रामदास पाल, विश्वनाथ पाल, नागेन्द्र पाल, शिवपूजन पाल, मंजय पाल, मनीष पाल, रामदेव पाल, विजय पाल,सुनीता देवी, प्रभा देवी, अनीता देवी समेत सैकड़ों की संख्या में पाल समाज के लोग उपस्थित थे।

आज तक कोई भी IPS अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे क्यों नहीं गया? : बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भ्रष्टाचार के मामले में केवल IAS अधिकारियों की गिरफ्तारी पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि कानून के हाथ इनके गिरेबान तक तो पहुँच जाते हैं, लेकिन पुलिस महकमे के रसूखदार आकाओं

(IPS अधिकारियों) तक जाँच की आँच क्यों नहीं पहुंच पाई है ? आज तक कोई भी IPS अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे क्यों नहीं गया?

उन्होंने सोशल मीडिया के एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए कहा है कि जब भ्रष्टाचार और सरकारी खजाने की लूट में लिप्त IAS अधिकारी जेल जा सकते हैं, तो खाकी वर्दी वाले IPS अधिकारियों को यह 'अभेद्य सुरक्षा कवच' किसने दे रखा है?

श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड अलग राज्य बनने के बाद से हमने देखा कि भ्रष्टाचार के महापाप में कई शीर्ष IAS अधिकारियों को जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा। जाँच एजेंसियों ने कार्रवाई की और यह साबित हुआ कि प्रशासनिक तंत्र का एक हिस्सा राज्य को दीमक की तरह चाट रहा था। लेकिन क्या अपराध और भ्रष्टाचार का इतना बड़ा साम्राज्य पुलिस की मिलीभगत के बिना चल सकता है? जिस राज्य में कोयला, बालू, पत्थर और लौह अयस्क का अरबों रुपयों का अवैध कारोबार दिन-दहाड़े धड़ल्ले से चल रहा है, क्या वह बिना पुलिसिया संरक्षण के संभव है?

उन्होंने कहा कि आए दिन अवैध ज़मीन के काले धंधे, खुलेआम रंगदारी वसूली, कुख्यात सुजीत सिन्हा जैसे आपराधिक गिरोहों के साथ पुलिस की साँठगाँठ और यहाँ तक कि भोले-भाले आदिवासियों की ज़मीनें हड़पने के मामलों में पुलिस अधिकारियों के नाम सामने आते हैं। एक पूर्व DGP तक के तार अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों से जुड़ने के संगीन आरोप लगे। राज्य की अस्मिता लुटती रही, लेकिन आज तक कोई भी IPS अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे क्यों नहीं गया?

उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या यह संभव है कि राज्य में संगठित अपराध और माफियाओं का इतना बड़ा नेक्सस बिना किसी IPS की संलिप्तता के चल रहा हो? फिर यह कैसा सिस्टम है जहाँ IAS अधिकारियों के गिरेबान तक तो कानून के हाथ पहुँच जाते हैं, लेकिन पुलिस महकमे के रसूखदार आकाओं पर जाँच की आँच तक नहीं आती?

उन्होंने कहा कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आज पूरे झारखंड को इस असमानता पर विचार करने की जरूरत है। राज्य के जो गिने-चुने ईमानदार IAS/IPS अधिकारी हैं, उन्हें भी आज गंभीरता से सोचना चाहिए कि आखिर इस सड़े हुए सिस्टम में पुलिस के शीर्ष अधिकारियों को बचाने वाला वह अदृश्य 'कवच' क्या है? जब सजा और बदनामी सिर्फ IAS के हिस्से आ रही है, तो IPS अधिकारियों को 'सात खून माफ' का यह विशेषाधिकार क्यों?