आज तक कोई भी IPS अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे क्यों नहीं गया? : बाबूलाल मरांडी
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भ्रष्टाचार के मामले में केवल IAS अधिकारियों की गिरफ्तारी पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि कानून के हाथ इनके गिरेबान तक तो पहुँच जाते हैं, लेकिन पुलिस महकमे के रसूखदार आकाओं
(IPS अधिकारियों) तक जाँच की आँच क्यों नहीं पहुंच पाई है ? आज तक कोई भी IPS अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे क्यों नहीं गया?
![]()
उन्होंने सोशल मीडिया के एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए कहा है कि जब भ्रष्टाचार और सरकारी खजाने की लूट में लिप्त IAS अधिकारी जेल जा सकते हैं, तो खाकी वर्दी वाले IPS अधिकारियों को यह 'अभेद्य सुरक्षा कवच' किसने दे रखा है?
![]()
श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड अलग राज्य बनने के बाद से हमने देखा कि भ्रष्टाचार के महापाप में कई शीर्ष IAS अधिकारियों को जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा। जाँच एजेंसियों ने कार्रवाई की और यह साबित हुआ कि प्रशासनिक तंत्र का एक हिस्सा राज्य को दीमक की तरह चाट रहा था। लेकिन क्या अपराध और भ्रष्टाचार का इतना बड़ा साम्राज्य पुलिस की मिलीभगत के बिना चल सकता है? जिस राज्य में कोयला, बालू, पत्थर और लौह अयस्क का अरबों रुपयों का अवैध कारोबार दिन-दहाड़े धड़ल्ले से चल रहा है, क्या वह बिना पुलिसिया संरक्षण के संभव है?
![]()
उन्होंने कहा कि आए दिन अवैध ज़मीन के काले धंधे, खुलेआम रंगदारी वसूली, कुख्यात सुजीत सिन्हा जैसे आपराधिक गिरोहों के साथ पुलिस की साँठगाँठ और यहाँ तक कि भोले-भाले आदिवासियों की ज़मीनें हड़पने के मामलों में पुलिस अधिकारियों के नाम सामने आते हैं। एक पूर्व DGP तक के तार अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों से जुड़ने के संगीन आरोप लगे। राज्य की अस्मिता लुटती रही, लेकिन आज तक कोई भी IPS अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे क्यों नहीं गया?
![]()
उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या यह संभव है कि राज्य में संगठित अपराध और माफियाओं का इतना बड़ा नेक्सस बिना किसी IPS की संलिप्तता के चल रहा हो? फिर यह कैसा सिस्टम है जहाँ IAS अधिकारियों के गिरेबान तक तो कानून के हाथ पहुँच जाते हैं, लेकिन पुलिस महकमे के रसूखदार आकाओं पर जाँच की आँच तक नहीं आती?
उन्होंने कहा कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आज पूरे झारखंड को इस असमानता पर विचार करने की जरूरत है। राज्य के जो गिने-चुने ईमानदार IAS/IPS अधिकारी हैं, उन्हें भी आज गंभीरता से सोचना चाहिए कि आखिर इस सड़े हुए सिस्टम में पुलिस के शीर्ष अधिकारियों को बचाने वाला वह अदृश्य 'कवच' क्या है? जब सजा और बदनामी सिर्फ IAS के हिस्से आ रही है, तो IPS अधिकारियों को 'सात खून माफ' का यह विशेषाधिकार क्यों?























Aug 13 2026, 19:33
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
0- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
10.4k