विपक्ष सदन नहीं, कैमरे के सामने चर्चा चाहता है : पंकज चौधरी
-  भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बोले— सरकार हर मुद्दे पर बहस को तैयार, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने देंगे

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने गुरुवार को पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने और मुद्दों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष सदन में बहस करने के बजाय कैमरों के सामने राजनीति करना चाहता है। प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह भी मौजूद रहे।
पंकज चौधरी ने कहा कि संसद और विधानमंडल लोकतांत्रिक विमर्श के मंच हैं और समाधान हमेशा चर्चा से निकलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा चर्चा की सभी शर्तें स्वीकार किए जाने के बावजूद विपक्ष अपने रुख से पीछे हट गया।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी सदन में चर्चा करने के बजाय धरने पर बैठ गए, जबकि सरकार ने सदन में अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सड़क पर राजनीति करने के बजाय सदन में बहस करनी चाहिए।

-  युवाओं के भविष्य पर सरकार गंभीर
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी और केंद्र सरकार के लिए युवाओं का भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने नीट (NEET) पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि घटना के बाद सरकार ने री-एग्जाम कराया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि इस मामले में आरोपियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से कड़ी सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए भी प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

-  देश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश का आरोप
पंकज चौधरी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग देश का माहौल बिगाड़ने और युवाओं व बच्चों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, संविधान और विकास भाजपा की प्राथमिकता हैं तथा सरकार हर मुद्दे पर पारदर्शी चर्चा के पक्ष में है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मिलने भी गई थी, जिससे स्पष्ट है कि संवाद के लिए सरकार हमेशा तैयार रहती है।
उन्होंने कहा कि यदि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलेगी और सभी मुद्दों पर चर्चा होगी, तो सच्चाई स्वतः सामने आ जाएगी। इसलिए विपक्ष को सदन चलने देना चाहिए और राजनीतिक टकराव के बजाय रचनात्मक संवाद को प्राथमिकता देनी चाहिए।
देहरादून में नकली दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार
-  यूपी एफएसडीए की कार्रवाई में करोड़ों की नकली दवाएं, मशीनरी और पैकिंग सामग्री जब्त

लखनऊ/देहरादून। उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने नकली दवाओं के कारोबार के खिलाफ बड़ी अंतरराज्यीय कार्रवाई करते हुए उत्तराखंड के देहरादून में संचालित एक अवैध नकली दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। संयुक्त अभियान में करीब एक करोड़ रुपये की नकली दवाएं, पैकिंग सामग्री और अत्याधुनिक मशीनरी जब्त की गई, जबकि दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
यह कार्रवाई एफएसडीए उत्तर प्रदेश की विशेष प्रवर्तन टीम ने क्राइम ब्रांच गाजियाबाद और एफएसडीए उत्तराखंड के अधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से की। टीम में औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्रा, गौरव लोधी और नीलेश शर्मा शामिल थे।

-  लखनऊ से जुड़ी जांच ने खोला गिरोह का राज

अधिकारियों के अनुसार, 19 जुलाई को लखनऊ के अमीनाबाद थाने में नकली दवाओं के भंडारण और बिक्री के मामले में दर्ज मुकदमे की जांच के दौरान इस अंतरराज्यीय गिरोह का सुराग मिला। जांच में पता चला कि गिरोह का मुख्य नेटवर्क उत्तराखंड से संचालित हो रहा था और नकली दवाओं की आपूर्ति उत्तर प्रदेश सहित कई क्षेत्रों में की जा रही थी।

-  गाजियाबाद से मुख्य आरोपी गिरफ्तार

22 जुलाई को गाजियाबाद के केडब्ल्यू मॉल (राजनगर एक्सटेंशन) के पास से गिरोह के मुख्य सप्लायर राजेन्द्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा को गिरफ्तार किया गया। उसके मोबाइल की जांच में व्हाट्सएप चैट, नकली दवाओं की पैकिंग, प्रिंटेड स्ट्रिप्स और मशीनों से संबंधित तस्वीरें मिलीं। जांच में सामने आया कि गौरव त्यागी, विपिन भटनागर, राजेन्द्र सिंह और विनय चंद गिरोह के प्रमुख सदस्य हैं।

-  फैक्ट्री से भारी मात्रा में नकली दवाएं और मशीनें बरामद

आरोपी की निशानदेही पर देहरादून के देवीपुर न्यू हाईवे रोड, ईस्ट होपटाउन स्थित परिसर में छापा मारा गया। यहां अवैध रूप से स्थापित आलू-आलू पैकिंग मशीन, स्ट्रिप मशीन, इंकजेट प्रिंटर, कंप्रेसर, स्टेबलाइजर, बड़ी मात्रा में टैबलेट, कैप्सूल, प्रिंटेड एल्युमिनियम फॉयल, रैपर और मास्टर कार्टन बरामद किए गए।
छापे में Clavactam 625, Razo-D Capsules समेत कई प्रसिद्ध ब्रांडों की नकली पैकिंग सामग्री मिली। इसके अलावा Cipla, Dr. Reddy's, Intas, Lupin, Elder और Macleods जैसी कंपनियों के नाम वाले प्रिंटेड कार्टन और फॉयल भी बरामद हुए, जिनका इस्तेमाल नकली दवाओं की पैकेजिंग में किया जा रहा था।

- चार पर मुकदमा, दो गिरफ्तार

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की विभिन्न धाराओं, जिनमें संगठित अपराध (धारा 111) भी शामिल है, के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

नामजद आरोपी:-
- गौरव त्यागी (फैक्ट्री संचालक)
- राजेन्द्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा (गिरफ्तार)
- विपिन भटनागर
- विनय चंद (गिरफ्तार)

एफएसडीए आयुक्त ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार विभाग नकली दवाओं के कारोबार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रहा है। नकली दवाओं के निर्माण, भंडारण और वितरण से जुड़े पूरे नेटवर्क को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
योगी सरकार का फोकस टेक्सटाइल सेक्टर पर, हथकरघा उद्योग को मिलेगी नई रफ्तार

-  टेक्सटाइल व अपैरल पार्क योजनाओं की मंत्री राकेश सचान ने की समीक्षा, समयबद्ध क्रियान्वयन के दिए निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग क्षेत्र को नई गति देने और निवेश के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से योगी सरकार ने टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को विधानसभा के मुख्य भवन स्थित कक्ष संख्या-80 में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान की अध्यक्षता में विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई।
बैठक में संत कबीर टेक्सटाइल पार्क और अपैरल पार्क योजना की प्रगति के साथ विभाग की अन्य प्रमुख योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों से परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और आगामी कार्ययोजना पर चर्चा करते हुए सभी योजनाओं का समयबद्ध एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
राकेश सचान ने कहा कि उत्तर प्रदेश में वस्त्रोद्योग क्षेत्र की अपार संभावनाएं हैं और इन्हें बेहतर ढंग से विकसित कर प्रदेश को देश का प्रमुख टेक्सटाइल एवं अपैरल हब बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल और अपैरल पार्क जैसी परियोजनाएं औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करेंगी तथा बुनकरों, कारीगरों और युवाओं को नए अवसर उपलब्ध कराएंगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विभागीय योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक समय पर पहुंचे और क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें प्रतिस्पर्धी बनाने और रोजगारपरक औद्योगिक वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
बैठक में प्रमुख सचिव अनिल सागर, विशेष सचिव शेषमणि पांडेय सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
अपर पुलिस अधिक्षक एवं कवि जितेन्द्र कुमार दुबे को बधाई देने जौनपुर से पहुंचे लोग
लखनऊ।  एडीशनल डीसीपी मध्य कमिश्नरेट लखनऊ एवं  कवि जितेन्द्र कुमार दुबे ने आज हजरतगंज स्थित कैंप कार्यालय में जौनपुर से आए अतिथियों ने शिष्टाचार भेंट किया तथा उनके जन्मदिन की पूर्व संध्या पर हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित की। जौनपुर से आए विनोद कुमार तिवारी प्रधानाचार्य विवेकानंद इंटर कॉलेज मड़ियाहूँ, जौनपुर व उनकी धर्मपत्नी कवयित्री विभा तिवारी तथा उनके भाई संतोष मिश्र माध्यमिक शिक्षा परिषद निदेशालय, पशुपालन विभाग उ.प्र. के उप निदेशक डा. विजय कुमार पाण्डेय उपस्थित रहे। आगंतुक अतिथियों ने कवि जितेन्द्र कुमार दुबे के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएँ दी। इस भेंटवार्ता के सूत्रधार शोधार्थी अश्वनी तिवारी रहे। इस अवसर पर कवयित्री विभा तिवारी ने अपनी काव्य कृति 'फुरक़त' पुस्तक कवि जितेन्द्र कुमार दुबे को भेंट किया। ज्ञात हो कि पूर्व डीजी तथा पूर्व सूचना आयुक्त लखनऊ प्रमोद कुमार तिवारी के छोटे भाई विनोद कुमार तिवारी हैं। वही दूरभाष पर मानसी चौहान, कवि गिरीश कुमार श्रीवास्तव, ज्ञान प्रकाश मिश्र असिस्टेंट प्रोफेसर रेवाड़ी,हरियाणा , जागृति सिंह कृषि अधिकारी प्रतापगढ़ व दिनेश कुमार तिवारी सहायक निदेशक राज्य निर्वाचन आयोग उ.प्र. ने शुभकामनाएं दी।
फर्जी FASTag से करोड़ों का टोल घोटाला! STF ने लखनऊ से दो शातिर गिरफ्तार, नकली नंबरों का बड़ा खेल बेनकाब


लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने फर्जी वाहन नंबर और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए FASTag बनवाकर टोल टैक्स और ऑनलाइन चालान से बचने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। STF ने इस मामले में दो आरोपियों अनन्त राम राठौर और नकीब खान को लखनऊ के पॉलीटेक्निक चौराहे से गिरफ्तार किया है।

मामले की विवेचना बाद में एसटीएफ को स्थानांतरित कर दी गई थी

आरोपियों पर फर्जी वाहन नंबरों का इस्तेमाल कर राष्ट्रीय राजमार्गों के विभिन्न टोल प्लाजा से आवाजाही के दौरान सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाने का आरोप है।यह कार्रवाई 22 जुलाई 2026 को की गई। दोनों आरोपी थाना सरोजनी नगर, लखनऊ में दर्ज मुकदमा संख्या 119/2026 में वांछित थे। मामले की विवेचना बाद में एसटीएफ को स्थानांतरित कर दी गई थी।

ये हैं गिरफ्तार आरोपी

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अनन्त राम राठौर, निवासी ग्राम नेवादा बरूआ, थाना खैराबाद, जनपद सीतापुर तथा नकीब खान, निवासी टकपुरवा, थाना खैराबाद, जनपद सीतापुर के रूप में हुई है।

क्या-क्या हुआ बरामद

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने दो मोबाइल फोन, दो पैन कार्ड और 4,230 रुपये नकद बरामद किए हैं।

मुखबिर की सूचना पर हुई गिरफ्तारी

एसटीएफ के अनुसार अपर पुलिस अधीक्षक सत्यसेन के पर्यवेक्षण में निरीक्षक प्रमोद कुमार वर्मा इस मामले की विवेचना कर रहे थे। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर निरीक्षक प्रमोद कुमार वर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने 22 जुलाई को दोपहर करीब 12:20 बजे पॉलीटेक्निक चौराहे से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

ऐसे चलता था फर्जी FASTag का खेल

जांच में सामने आया कि वाहन स्वामी रियाज और उसके भाई सिराज ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए एक नकली वाहन नंबर MA-34-S-9455 के नाम पर FASTag बनवाया था। इस FASTag का इस्तेमाल पहले वर्ष 2024 में एक अन्य वाहन UP-34-T-9974 पर किया गया। बाद में उस वाहन के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने पर उसी FASTag को वर्ष 2025 से वाहन UP-32-ZN-8925 पर इस्तेमाल किया जाने लगा।

आधार पर फर्जी वाहन नंबर के नाम पर FASTag जारी कर दिया

इस पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए सिराज ने अपने परिचितों के माध्यम से खैराबाद टोल प्लाजा के पास कार्यरत इंडसइंड बैंक के चैनल पार्टनर अनन्त राम राठौर और उसके एजेंट नकीब खान से संपर्क किया। आरोप है कि दोनों ने कूटरचित आरसी, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेजों के आधार पर फर्जी वाहन नंबर के नाम पर FASTag जारी कर दिया।

पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा

पूछताछ के दौरान नकीब खान ने बताया कि उसकी पंचर की दुकान खैराबाद टोल प्लाजा के पास है। वर्ष 2022 में उसकी मुलाकात अनन्त राम राठौर से हुई, जिसने उसे इंडसइंड बैंक का FASTag एजेंट बना दिया। शुरुआत में उसे बैंक के पोर्टल पर सामान्य तरीके से FASTag बनाना सिखाया गया।बाद में जून 2024 में सिराज अधिक पैसे देने का लालच देकर फर्जी नंबर का FASTag बनवाने पहुंचा। नकीब ने यह बात अनन्त राम को बताई, जिसके बाद दोनों ने मिलकर इंडसइंड बैंक के पोर्टल पर सिराज के केवाईसी दस्तावेज अपलोड कर फर्जी वाहन नंबर पर FASTag जारी कर दिया।

फर्जी FASTag बनाने के बदले उसे 5,000 रुपये मिले थे

नकीब ने स्वीकार किया कि एक फर्जी FASTag बनाने के बदले उसे 5,000 रुपये मिले थे। इसके बाद उसने और अनन्त राम ने मिलकर कई अन्य वाहनों के लिए भी फर्जी नंबरों पर FASTag जारी किए। इस काम से मिलने वाले कमीशन और अवैध कमाई को दोनों आपस में बांट लेते थे।

ऑनलाइन चालान और टोल से बचते थे आरोपी

एसटीएफ के अनुसार इस गिरोह का मुख्य उद्देश्य फर्जी वाहन नंबरों का उपयोग कर टोल प्लाजा से बिना वास्तविक पहचान उजागर किए गुजरना और ऑनलाइन चालान से बचना था। इससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल शुल्क की चोरी होती रही और सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा।

मुकदमा दर्ज, जेल भेजे गए आरोपी

जांच में दोनों आरोपियों की संलिप्तता पाए जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। अदालत के आदेश पर दोनों को जिला कारागार भेज दिया गया है।

अन्य आरोपियों की तलाश जारी

एसटीएफ का कहना है कि इस गिरोह में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। मामले में बैंक पोर्टल के दुरुपयोग, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों और लाभ लेने वाले वाहन मालिकों की भी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अयोध्या मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य पर भ्रष्टाचार के , हाई लेवल जांच के आदेश
-  डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा नेहा शर्मा करेंगी जांच, प्रारंभिक जांच में अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति

लखनऊ। अयोध्या राजकीय मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार पर लगे वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने हाई लेवल जांच के आदेश दिए हैं। उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (DGME) नेहा शर्मा को मामले की विस्तृत जांच सौंपी गई है।
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई है। आरोप है कि उन्होंने अयोध्या मेडिकल कॉलेज में तैनाती के दौरान अवकाश पर रहने के बावजूद सरकारी वित्तीय कार्यों में हस्तक्षेप किया।

-  अवकाश पर रहते हुए टेंडर और भुगतान का आरोप
शिकायत के मुताबिक, डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बीमारी के कारण अवकाश पर रहते हुए अपना प्रभार दूसरे अधिकारी को सौंप दिया था। इसके बावजूद उन्होंने GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) पोर्टल पर करोड़ों रुपये के खरीद अनुबंधों को स्वीकृति दी और करीब 1.28 करोड़ रुपये के 17 चेकों पर हस्ताक्षर कर भुगतान भी कराया। आरोप है कि इस दौरान करीब 2.12 करोड़ रुपये के सरकारी धन के व्यय से जुड़े निर्णय लिए गए।

-  पूर्व कार्यवाहक प्राचार्य ने की थी शिकायत
यह मामला पूर्व कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा द्वारा उठाया गया था। शिकायत में कहा गया कि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने जनवरी 2023 में अवकाश के दौरान 7 और 10 जनवरी को लगभग 84 लाख रुपये के GeM अनुबंध जारी किए, जबकि उसी अवधि में 17 चेकों के माध्यम से 1,28,90,990 रुपये का भुगतान भी कराया गया।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार को 16 जनवरी 2023 को पद से हटाने के आदेश जारी हो चुके थे। ऐसे में अवकाश के दौरान उनके द्वारा वित्तीय निर्णय लेने और भुगतान स्वीकृत करने पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन आगे की कार्रवाई करेगा।
अयोध्या मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य पर भ्रष्टाचार के , हाई लेवल जांच के आदेश
-  डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा नेहा शर्मा करेंगी जांच, प्रारंभिक जांच में अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति

लखनऊ। अयोध्या राजकीय मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार पर लगे वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने हाई लेवल जांच के आदेश दिए हैं। उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (DGME) नेहा शर्मा को मामले की विस्तृत जांच सौंपी गई है।
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई है। आरोप है कि उन्होंने अयोध्या मेडिकल कॉलेज में तैनाती के दौरान अवकाश पर रहने के बावजूद सरकारी वित्तीय कार्यों में हस्तक्षेप किया।

-  अवकाश पर रहते हुए टेंडर और भुगतान का आरोप
शिकायत के मुताबिक, डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बीमारी के कारण अवकाश पर रहते हुए अपना प्रभार दूसरे अधिकारी को सौंप दिया था। इसके बावजूद उन्होंने GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) पोर्टल पर करोड़ों रुपये के खरीद अनुबंधों को स्वीकृति दी और करीब 1.28 करोड़ रुपये के 17 चेकों पर हस्ताक्षर कर भुगतान भी कराया। आरोप है कि इस दौरान करीब 2.12 करोड़ रुपये के सरकारी धन के व्यय से जुड़े निर्णय लिए गए।

-  पूर्व कार्यवाहक प्राचार्य ने की थी शिकायत
यह मामला पूर्व कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा द्वारा उठाया गया था। शिकायत में कहा गया कि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने जनवरी 2023 में अवकाश के दौरान 7 और 10 जनवरी को लगभग 84 लाख रुपये के GeM अनुबंध जारी किए, जबकि उसी अवधि में 17 चेकों के माध्यम से 1,28,90,990 रुपये का भुगतान भी कराया गया।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार को 16 जनवरी 2023 को पद से हटाने के आदेश जारी हो चुके थे। ऐसे में अवकाश के दौरान उनके द्वारा वित्तीय निर्णय लेने और भुगतान स्वीकृत करने पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन आगे की कार्रवाई करेगा।
सपा के वरिष्ठ नेता आलमबदी आजमी का निधन, लंबे राजनीतिक सफर का हुआ अंत
लखनऊ /आजमगढ़। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और आजमगढ़ जिले की निजामाबाद विधानसभा सीट से कई बार विधायक रहे आलमबदी आजमी का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ थे और अपने गृह जनपद आजमगढ़ में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और क्षेत्र के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

आलमबदी आजमी का जन्म 16 मार्च 1936 को आजमगढ़ में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने गोरखपुर से तकनीकी शिक्षा प्राप्त की और इलेक्ट्रिकल एवं मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई और समाजवादी विचारधारा के साथ राजनीति में कदम रखा।

राजनीतिक जीवन में उन्होंने आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट का कई बार प्रतिनिधित्व किया। विधायक के रूप में उन्होंने क्षेत्र की सड़क, शिक्षा, बिजली और अन्य जनसुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। अपने सरल स्वभाव और आम लोगों से जुड़े रहने के कारण वे क्षेत्र में लोकप्रिय नेताओं में गिने जाते थे। राजनीतिक विरोधियों के बीच भी उनकी सादगी और व्यवहार की सराहना की जाती थी।

पिछले कुछ समय से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। इलाज के लिए उन्हें अप्रैल 2026 में लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। स्वास्थ्य में सुधार के बाद वह अपने घर लौट आए थे, लेकिन उम्र संबंधी समस्याओं के चलते उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता रहा। गुरुवार को उन्होंने अपने पैतृक निवास पर अंतिम सांस ली।

परिवार के अनुसार, उनके जनाजे की नमाज शाम 4 बजे जामियातुर रशाद में अदा की जाएगी। इसके बाद उन्हें पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में समर्थकों और शुभचिंतकों के पहुंचने की संभावना है।

उनके निधन पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आलमबदी आजमी का निधन पार्टी और उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को इस दुख को सहने की शक्ति देने की कामना की।

सपा सांसद इकरा हसन ने भी उन्हें जनसेवा के लिए समर्पित नेता बताते हुए कहा कि उनका जाना समाज और राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है। वहीं सपा सांसद आदित्य यादव ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आलमबदी आजमी का राजनीतिक और सामाजिक योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

आलमबदी आजमी ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता दी। अपने शांत स्वभाव, सादगी और लोगों से सीधे संवाद की शैली के कारण उन्होंने क्षेत्र में अलग पहचान बनाई। उनके निधन से समाजवादी पार्टी ने अपना एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता खो दिया है, वहीं आजमगढ़ की राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत माना जा रहा है।
यूपी में आज से मानसून की रफ्तार होगी धीमी, 26 जुलाई के बाद फिर होगी झमाझम बारिश

-  23 से 25 जुलाई तक भारी बारिश के आसार नहीं, बंगाल की खाड़ी का निम्न दबाव क्षेत्र कमजोर पड़ने से मानसूनी गतिविधियां सुस्त

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बीच अब मौसम कुछ दिनों के लिए राहत देने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में 23 जुलाई से मानसून की सक्रियता कमजोर पड़ने लगेगी, जिससे 23 से 25 जुलाई के बीच अधिकांश क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता कम रहेगी। इस दौरान कहीं भी भारी बारिश की संभावना नहीं जताई गई है।
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र कमजोर पड़ गया है, जबकि मानसून ट्रफ (मानसून रेखा) दक्षिण की ओर खिसक गई है। इन दोनों कारणों से प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां फिलहाल कमजोर रहेंगी।
हालांकि मौसम विभाग का अनुमान है कि 26 और 27 जुलाई से मौसम फिर करवट लेगा। इस दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना है और मानसून एक बार फिर सक्रिय हो सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों को मौसम के ताजा पूर्वानुमानों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है, क्योंकि मानसून की स्थिति में बदलाव के साथ बारिश की गतिविधियों में भी तेजी आ सकती है।
43 प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टर्स ने किया यूपी-112 मुख्यालय का भ्रमण
समझी आपातकालीन सेवाओं की आधुनिक कार्यप्रणाली

कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए

लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी, लखनऊ में चल रहे डिप्टी कलेक्टर्स के 90वें आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत बुधवार को 43 प्रशिक्षु अधिकारियों ने यूपी-112 मुख्यालय का भ्रमण किया। इस भ्रमण का उद्देश्य भविष्य के प्रशासनिक अधिकारियों को प्रदेश की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली  और यूपी-112 की कार्यप्रणाली से प्रत्यक्ष रूप से अवगत कराना था। बुधवार को दोपहर 2:45 बजे यूपी-112 मुख्यालय पहुंचे प्रशिक्षु अधिकारियों का स्वागत किया गया। इसके बाद उन्हें मुख्यालय के विभिन्न महत्वपूर्ण अनुभागों का भ्रमण कराया गया और आपातकालीन सेवाओं की तकनीकी व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षु अधिकारियों ने सबसे पहले कॉल टेकिंग सेंटर  का निरीक्षण किया। यहां उन्हें आपातकालीन कॉल प्राप्त करने की प्रक्रिया, कॉल फ्लो और अन्य सहयोगी डेस्कों की कार्यप्रणाली के बारे में बताया गया। अधिकारियों ने जाना कि किसी भी आपात स्थिति में सूचना प्राप्त होने से लेकर सहायता पहुंचाने तक की पूरी प्रक्रिया किस तरह संचालित होती है। इसके बाद प्रशिक्षु अधिकारियों ने डीएस हॉल का भ्रमण किया, जहां उन्हें सीएडी एप्लीकेशन  की कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया। उन्हें बताया गया कि तकनीक के माध्यम से आपात सूचना मिलते ही किस प्रकार कम से कम समय में पीआरवी  को घटनास्थल के लिए रवाना किया जाता है। मुख्यालय स्थित प्रज्ञा कक्ष में प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए यूपी-112 की कार्यप्रणाली पर विशेष प्रस्तुति आयोजित की गई। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक (डीजी) यूपी-112 विनोद कुमार सिंह ने प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टर्स से सीधा संवाद किया और उनके सवालों के जवाब दिए। डीजी यूपी-112 ने अपने संबोधन में आपातकालीन सेवाओं में त्वरित प्रतिक्रिया के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय को प्रभावी शासन व्यवस्था के लिए आवश्यक बताया। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए। इस भ्रमण के माध्यम से प्रशिक्षु अधिकारियों को प्रदेश की अत्याधुनिक आपातकालीन सेवा व्यवस्था, तकनीकी संसाधनों और त्वरित सहायता प्रणाली की व्यवहारिक जानकारी प्राप्त हुई।