अयोध्या मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य पर भ्रष्टाचार के , हाई लेवल जांच के आदेश
-  डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा नेहा शर्मा करेंगी जांच, प्रारंभिक जांच में अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति

लखनऊ। अयोध्या राजकीय मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार पर लगे वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने हाई लेवल जांच के आदेश दिए हैं। उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (DGME) नेहा शर्मा को मामले की विस्तृत जांच सौंपी गई है।
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई है। आरोप है कि उन्होंने अयोध्या मेडिकल कॉलेज में तैनाती के दौरान अवकाश पर रहने के बावजूद सरकारी वित्तीय कार्यों में हस्तक्षेप किया।

-  अवकाश पर रहते हुए टेंडर और भुगतान का आरोप
शिकायत के मुताबिक, डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बीमारी के कारण अवकाश पर रहते हुए अपना प्रभार दूसरे अधिकारी को सौंप दिया था। इसके बावजूद उन्होंने GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) पोर्टल पर करोड़ों रुपये के खरीद अनुबंधों को स्वीकृति दी और करीब 1.28 करोड़ रुपये के 17 चेकों पर हस्ताक्षर कर भुगतान भी कराया। आरोप है कि इस दौरान करीब 2.12 करोड़ रुपये के सरकारी धन के व्यय से जुड़े निर्णय लिए गए।

-  पूर्व कार्यवाहक प्राचार्य ने की थी शिकायत
यह मामला पूर्व कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा द्वारा उठाया गया था। शिकायत में कहा गया कि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने जनवरी 2023 में अवकाश के दौरान 7 और 10 जनवरी को लगभग 84 लाख रुपये के GeM अनुबंध जारी किए, जबकि उसी अवधि में 17 चेकों के माध्यम से 1,28,90,990 रुपये का भुगतान भी कराया गया।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार को 16 जनवरी 2023 को पद से हटाने के आदेश जारी हो चुके थे। ऐसे में अवकाश के दौरान उनके द्वारा वित्तीय निर्णय लेने और भुगतान स्वीकृत करने पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन आगे की कार्रवाई करेगा।
अयोध्या मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य पर भ्रष्टाचार के , हाई लेवल जांच के आदेश
-  डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा नेहा शर्मा करेंगी जांच, प्रारंभिक जांच में अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति

लखनऊ। अयोध्या राजकीय मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार पर लगे वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने हाई लेवल जांच के आदेश दिए हैं। उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (DGME) नेहा शर्मा को मामले की विस्तृत जांच सौंपी गई है।
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई है। आरोप है कि उन्होंने अयोध्या मेडिकल कॉलेज में तैनाती के दौरान अवकाश पर रहने के बावजूद सरकारी वित्तीय कार्यों में हस्तक्षेप किया।

-  अवकाश पर रहते हुए टेंडर और भुगतान का आरोप
शिकायत के मुताबिक, डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बीमारी के कारण अवकाश पर रहते हुए अपना प्रभार दूसरे अधिकारी को सौंप दिया था। इसके बावजूद उन्होंने GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) पोर्टल पर करोड़ों रुपये के खरीद अनुबंधों को स्वीकृति दी और करीब 1.28 करोड़ रुपये के 17 चेकों पर हस्ताक्षर कर भुगतान भी कराया। आरोप है कि इस दौरान करीब 2.12 करोड़ रुपये के सरकारी धन के व्यय से जुड़े निर्णय लिए गए।

-  पूर्व कार्यवाहक प्राचार्य ने की थी शिकायत
यह मामला पूर्व कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा द्वारा उठाया गया था। शिकायत में कहा गया कि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने जनवरी 2023 में अवकाश के दौरान 7 और 10 जनवरी को लगभग 84 लाख रुपये के GeM अनुबंध जारी किए, जबकि उसी अवधि में 17 चेकों के माध्यम से 1,28,90,990 रुपये का भुगतान भी कराया गया।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार को 16 जनवरी 2023 को पद से हटाने के आदेश जारी हो चुके थे। ऐसे में अवकाश के दौरान उनके द्वारा वित्तीय निर्णय लेने और भुगतान स्वीकृत करने पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन आगे की कार्रवाई करेगा।
सपा के वरिष्ठ नेता आलमबदी आजमी का निधन, लंबे राजनीतिक सफर का हुआ अंत
लखनऊ /आजमगढ़। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और आजमगढ़ जिले की निजामाबाद विधानसभा सीट से कई बार विधायक रहे आलमबदी आजमी का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ थे और अपने गृह जनपद आजमगढ़ में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और क्षेत्र के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

आलमबदी आजमी का जन्म 16 मार्च 1936 को आजमगढ़ में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने गोरखपुर से तकनीकी शिक्षा प्राप्त की और इलेक्ट्रिकल एवं मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई और समाजवादी विचारधारा के साथ राजनीति में कदम रखा।

राजनीतिक जीवन में उन्होंने आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट का कई बार प्रतिनिधित्व किया। विधायक के रूप में उन्होंने क्षेत्र की सड़क, शिक्षा, बिजली और अन्य जनसुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। अपने सरल स्वभाव और आम लोगों से जुड़े रहने के कारण वे क्षेत्र में लोकप्रिय नेताओं में गिने जाते थे। राजनीतिक विरोधियों के बीच भी उनकी सादगी और व्यवहार की सराहना की जाती थी।

पिछले कुछ समय से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। इलाज के लिए उन्हें अप्रैल 2026 में लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। स्वास्थ्य में सुधार के बाद वह अपने घर लौट आए थे, लेकिन उम्र संबंधी समस्याओं के चलते उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता रहा। गुरुवार को उन्होंने अपने पैतृक निवास पर अंतिम सांस ली।

परिवार के अनुसार, उनके जनाजे की नमाज शाम 4 बजे जामियातुर रशाद में अदा की जाएगी। इसके बाद उन्हें पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में समर्थकों और शुभचिंतकों के पहुंचने की संभावना है।

उनके निधन पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आलमबदी आजमी का निधन पार्टी और उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को इस दुख को सहने की शक्ति देने की कामना की।

सपा सांसद इकरा हसन ने भी उन्हें जनसेवा के लिए समर्पित नेता बताते हुए कहा कि उनका जाना समाज और राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है। वहीं सपा सांसद आदित्य यादव ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आलमबदी आजमी का राजनीतिक और सामाजिक योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

आलमबदी आजमी ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता दी। अपने शांत स्वभाव, सादगी और लोगों से सीधे संवाद की शैली के कारण उन्होंने क्षेत्र में अलग पहचान बनाई। उनके निधन से समाजवादी पार्टी ने अपना एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता खो दिया है, वहीं आजमगढ़ की राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत माना जा रहा है।
यूपी में आज से मानसून की रफ्तार होगी धीमी, 26 जुलाई के बाद फिर होगी झमाझम बारिश

-  23 से 25 जुलाई तक भारी बारिश के आसार नहीं, बंगाल की खाड़ी का निम्न दबाव क्षेत्र कमजोर पड़ने से मानसूनी गतिविधियां सुस्त

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बीच अब मौसम कुछ दिनों के लिए राहत देने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में 23 जुलाई से मानसून की सक्रियता कमजोर पड़ने लगेगी, जिससे 23 से 25 जुलाई के बीच अधिकांश क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता कम रहेगी। इस दौरान कहीं भी भारी बारिश की संभावना नहीं जताई गई है।
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र कमजोर पड़ गया है, जबकि मानसून ट्रफ (मानसून रेखा) दक्षिण की ओर खिसक गई है। इन दोनों कारणों से प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां फिलहाल कमजोर रहेंगी।
हालांकि मौसम विभाग का अनुमान है कि 26 और 27 जुलाई से मौसम फिर करवट लेगा। इस दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना है और मानसून एक बार फिर सक्रिय हो सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों को मौसम के ताजा पूर्वानुमानों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है, क्योंकि मानसून की स्थिति में बदलाव के साथ बारिश की गतिविधियों में भी तेजी आ सकती है।
43 प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टर्स ने किया यूपी-112 मुख्यालय का भ्रमण
समझी आपातकालीन सेवाओं की आधुनिक कार्यप्रणाली

कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए

लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी, लखनऊ में चल रहे डिप्टी कलेक्टर्स के 90वें आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत बुधवार को 43 प्रशिक्षु अधिकारियों ने यूपी-112 मुख्यालय का भ्रमण किया। इस भ्रमण का उद्देश्य भविष्य के प्रशासनिक अधिकारियों को प्रदेश की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली  और यूपी-112 की कार्यप्रणाली से प्रत्यक्ष रूप से अवगत कराना था। बुधवार को दोपहर 2:45 बजे यूपी-112 मुख्यालय पहुंचे प्रशिक्षु अधिकारियों का स्वागत किया गया। इसके बाद उन्हें मुख्यालय के विभिन्न महत्वपूर्ण अनुभागों का भ्रमण कराया गया और आपातकालीन सेवाओं की तकनीकी व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षु अधिकारियों ने सबसे पहले कॉल टेकिंग सेंटर  का निरीक्षण किया। यहां उन्हें आपातकालीन कॉल प्राप्त करने की प्रक्रिया, कॉल फ्लो और अन्य सहयोगी डेस्कों की कार्यप्रणाली के बारे में बताया गया। अधिकारियों ने जाना कि किसी भी आपात स्थिति में सूचना प्राप्त होने से लेकर सहायता पहुंचाने तक की पूरी प्रक्रिया किस तरह संचालित होती है। इसके बाद प्रशिक्षु अधिकारियों ने डीएस हॉल का भ्रमण किया, जहां उन्हें सीएडी एप्लीकेशन  की कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया। उन्हें बताया गया कि तकनीक के माध्यम से आपात सूचना मिलते ही किस प्रकार कम से कम समय में पीआरवी  को घटनास्थल के लिए रवाना किया जाता है। मुख्यालय स्थित प्रज्ञा कक्ष में प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए यूपी-112 की कार्यप्रणाली पर विशेष प्रस्तुति आयोजित की गई। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक (डीजी) यूपी-112 विनोद कुमार सिंह ने प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टर्स से सीधा संवाद किया और उनके सवालों के जवाब दिए। डीजी यूपी-112 ने अपने संबोधन में आपातकालीन सेवाओं में त्वरित प्रतिक्रिया के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय को प्रभावी शासन व्यवस्था के लिए आवश्यक बताया। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए। इस भ्रमण के माध्यम से प्रशिक्षु अधिकारियों को प्रदेश की अत्याधुनिक आपातकालीन सेवा व्यवस्था, तकनीकी संसाधनों और त्वरित सहायता प्रणाली की व्यवहारिक जानकारी प्राप्त हुई।
उत्तर प्रदेश बनेगा देश की बायोएनर्जी राजधानी, IBET Expo-2026 की तैयारियां तेज

-  11 से 13 अगस्त तक ग्रेटर नोएडा में होगा अंतरराष्ट्रीय बायोएनर्जी एवं टेक एक्सपो, निवेश और हरित ऊर्जा को मिलेगा नया आयाम


लखनऊ। उत्तर प्रदेश को बायोएनर्जी और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में बुधवार को लखनऊ स्थित इन्वेस्ट यूपी सभागार में इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो (IBET Expo-2026) की तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय स्टेकहोल्डर बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने की।
बैठक में आयोजन की रूपरेखा, निवेश संभावनाओं, उद्योगों की भागीदारी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा आशीष गोयल, यूपीनेडा के निदेशक रविंद्र सिंह, सचिव पंकज सिंह, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और बायोएनर्जी क्षेत्र के विशेषज्ञ मौजूद रहे।

बैठक को संबोधित करते हुए ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ऊर्जा परिवर्तन, हरित विकास और निवेश का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि IBET Expo-2026 प्रदेश को बायोएनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), एथेनॉल, बायोडीजल, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF), वेस्ट-टू-एनर्जी और अन्य हरित तकनीकों के क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।
उन्होंने बताया कि कृषि प्रधान राज्य होने के कारण उत्तर प्रदेश के पास कृषि अपशिष्ट की अपार संभावनाएं हैं। वर्तमान में प्रदेश में उपलब्ध लगभग 17 मिलियन टन कृषि अपशिष्ट में से केवल 5 मिलियन टन का ही उपयोग हो रहा है। यदि इसकी पूरी क्षमता का दोहन किया जाए तो उत्तर प्रदेश ग्रीन एनर्जी उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है।
मंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा उत्तर प्रदेश को केवल राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बायोएनर्जी क्षेत्र में अग्रणी बनाना है। इसके लिए समयानुकूल नीतियों को और अधिक प्रभावी तथा निवेश अनुकूल बनाया जाएगा। उन्होंने सभी विभागों, उद्योग संगठनों और स्टेकहोल्डर्स से समन्वित प्रयास कर आयोजन को ऐतिहासिक और सफल बनाने का आह्वान किया।
बैठक में जानकारी दी गई कि 11 से 13 अगस्त, 2026 तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में आयोजित होने वाला IBET Expo-2026 उत्तर प्रदेश सरकार, यूपीनेडा और इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी (IFGE) के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया जाएगा।
इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आयोजन में देश-विदेश के नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, उद्योगपति, निवेशक और ऊर्जा विशेषज्ञ भाग लेंगे। एक्सपो में 25 से अधिक सम्मेलन सत्र, 120 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं के संबोधन, 150 से अधिक प्रदर्शकों की भागीदारी तथा हजारों व्यावसायिक प्रतिनिधियों और आगंतुकों के शामिल होने की संभावना है।
सरकार का मानना है कि यह आयोजन प्रदेश में निवेश, रोजगार सृजन, तकनीकी नवाचार और हरित ऊर्जा आधारित उद्योगों को नई गति देने के साथ उत्तर प्रदेश को देश की बायोएनर्जी राजधानी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
रूचि चौहान के काव्य संग्रह 'मन के मौसम' का पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने किया विमोचन

- नारी मन की संवेदनाओं का सशक्त दस्तावेज है यह कृति, महिलाओं के लिए बनेगी प्रेरणास्रोत : जयवीर सिंह


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बुधवार को पर्यटन भवन सभागार में लेखिका रूचि चौहान के प्रथम काव्य संग्रह 'मन के मौसम' का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने लेखिका को बधाई देते हुए कहा कि यह काव्य संग्रह नारी मन की कोमल भावनाओं और जीवन के विविध अनुभवों को अत्यंत संवेदनशील और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।
जयवीर सिंह ने कहा कि 'मन के मौसम' में नारी हृदय की सूक्ष्म अनुभूतियों, प्रेम, मिलन, वियोग, संघर्ष, त्रासदी, शोषण और जीवन के अनेक अनछुए पहलुओं को सरल, सहज और भावपूर्ण भाषा में अभिव्यक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि लेखिका का शब्द चयन सराहनीय है और कई कविताओं में भावनाएं शब्दों के साथ सहज रूप से प्रवाहित होती दिखाई देती हैं।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहला काव्य संग्रह लेखिका के साहित्यिक सफर की मजबूत शुरुआत है और भविष्य में उनकी लेखनी समाज में महिलाओं के संघर्ष, संवेदनाओं और समकालीन विषयों को और अधिक व्यापकता से अभिव्यक्त करेगी। उन्होंने पुस्तक की लोकप्रियता और व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचने की शुभकामनाएं भी दीं।

कार्यक्रम में पूर्व मंत्री स्वाति सिंह ने कहा कि ईश्वर ने नारी को सृजन की अद्भुत शक्ति प्रदान की है और उसके बिना समाज की कल्पना अधूरी है। उन्होंने कहा कि एक मां, बहन, पत्नी और बेटी के रूप में नारी समाज को निरंतर दिशा और ऊर्जा देती है।
प्रख्यात कवि पंकज प्रसून ने भी काव्य संग्रह की सराहना करते हुए कहा कि पुस्तक में प्रेम, विरह, संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया गया है। उन्होंने लेखिका रूचि चौहान को उनके प्रथम काव्य संग्रह के लिए शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम का संचालन लेखिका के पति डी. एस. चौहान ने किया।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक आशीष कुमार, वरिष्ठ नेता अशोक सिंह, डॉ. संग्राम सिंह, नाबार्ड परिवार के सदस्य, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन को नई रफ्तार: अडानी स्किल्स एंड एजुकेशन से एमओयू, हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार

-  6004 श्रमिकों को इजराइल में मिला रोजगार, 17 लाख से अधिक युवाओं का निजी क्षेत्र में हुआ चयन, 34 लाख अभ्यर्थियों को मिला करियर मार्गदर्शन


लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार रोजगार मिशन के माध्यम से प्रदेश के युवाओं और श्रमिकों को देश-विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में सेवायोजन विभाग और अडानी स्किल्स एंड एजुकेशन के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) किया गया है, जिसके माध्यम से हजारों युवाओं के कौशल विकास के साथ उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।

यह एमओयू 20 जुलाई को बापू भवन, सचिवालय में श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर तथा राज्यमंत्री मनोहर लाल मन्नू कोरी की उपस्थिति में हस्ताक्षरित हुआ। एमओयू पर सेवायोजन विभाग की निदेशक नेहा प्रकाश और अडानी स्किल्स एंड एजुकेशन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुधान्वा किमाने ने हस्ताक्षर किए।
श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को देश और विदेश में बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। इसके तहत रोजगार की मांग का सर्वेक्षण, प्रतिष्ठित कंपनियों से समन्वय, युवाओं के स्किल गैप को दूर करना, भाषा प्रशिक्षण और प्रस्थान-पूर्व प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं।
उन्होंने बताया कि अब तक 6004 निर्माण श्रमिकों को इजराइल में रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके अलावा 1336 निर्माण श्रमिकों तथा 245 रेनोवेशन सेक्टर के श्रमिकों को प्रशिक्षण देकर इजराइल भेजने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि अडानी समूह के साथ हुआ यह एमओयू प्रदेश में भी युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करेगा।
प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन डॉ. एम. के. शन्मुगम सुंदरम ने कहा कि इस समझौते से अडानी समूह की विभिन्न परियोजनाओं, जैसे डिफेंस कॉरिडोर और थर्मल पावर प्लांट, में प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिलेगा।
उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2017 से अब तक 17 लाख से अधिक युवाओं का निजी क्षेत्र में चयन कराया जा चुका है। अगस्त 2025 में आयोजित रोजगार महाकुंभ के माध्यम से 16,212 युवाओं का चयन हुआ, जिनमें 1,612 युवाओं को विदेश में रोजगार के अवसर मिले। वहीं गोरखपुर में आयोजित इंटरनेशनल प्लेसमेंट इवेंट के माध्यम से 279 तथा काशी सांसद रोजगार महाकुंभ के जरिए 8,054 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, जिनमें 85 युवाओं को विदेश में रोजगार मिला।

उन्होंने बताया कि पिंक रोजगार मेले के माध्यम से 2,765 महिला अभ्यर्थियों का चयन विभिन्न कंपनियों में हुआ, जिनमें 79 महिलाओं को विदेश में रोजगार मिला।
सेवायोजन विभाग की निदेशक नेहा प्रकाश ने बताया कि विभाग उद्योगों से बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए लगातार इंडस्ट्री कनेक्ट कार्यक्रम चला रहा है। इसी क्रम में विभिन्न औद्योगिक समूहों और संस्थानों के साथ एमओयू किए गए हैं, ताकि युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण और बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 से अब तक 34 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को करियर काउंसिलिंग कार्यक्रमों के माध्यम से विषय चयन, कौशल विकास, प्रशिक्षण और रोजगार संबंधी मार्गदर्शन प्रदान किया जा चुका है।
अडानी स्किल्स एंड एजुकेशन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुधान्वा किमाने ने कहा कि सेवायोजन विभाग के सहयोग से प्रदेश के युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने और उन्हें अडानी समूह की विभिन्न परियोजनाओं में रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्य किया जाएगा।
पेपर लीक पर सियासत तेज: ओमप्रकाश राजभर का अखिलेश पर पलटवार, बोले- सपा राज में नकल और भ्रष्टाचार का था बोलबाला
-  सपा को शिक्षा पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं, छात्रों को बरगलाकर सत्ता पाना चाहती है विपक्ष
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने पेपर लीक के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिनके शासनकाल में शिक्षा व्यवस्था नकल, पेपर लीक और भर्ती घोटालों से घिरी रही, उन्हें आज इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का नैतिक अधिकार नहीं है।

सोशल मीडिया पर जारी अपने विस्तृत पोस्ट में राजभर ने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा, "मित्र अखिलेश जी, आप पेपर लीक पर प्रदर्शन करने और झूठी गिरफ्तारी कराने निकल पड़े हैं, लेकिन क्या आपको अपनी सरकार का कार्यकाल याद है?"

-  सपा शासनकाल पर लगाए गंभीर आरोप
राजभर ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदहाल थी। उन्होंने कहा कि उस दौर में स्कूलों और परीक्षा केंद्रों पर खुलेआम नकल होती थी, प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले लीक हो जाते थे और हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के पेपर पैसों के बदले बेचे जाने की चर्चाएं आम थीं। उन्होंने फर्जी प्रमाणपत्रों और शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार का भी उल्लेख किया।

उन्होंने दावा किया कि सपा सरकार के दौरान सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता का अभाव था और नियुक्तियों में भ्रष्टाचार तथा जातिगत पक्षपात के आरोप लगातार लगते रहे। तंज कसते हुए राजभर ने कहा कि "सरकारी नौकरी की गाइडलाइन जारी होते ही चचा-भतीजा वसूली के लिए बोरा लेकर निकल जाते थे।"

-  धर्मेंद्र यादव पर भी साधा निशाना
अपने पोस्ट में राजभर ने समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव का भी जिक्र किया। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवेश परीक्षा से जुड़ी पुरानी चर्चाओं का हवाला देते हुए उन पर भी निशाना साधा। साथ ही समाजवादी पार्टी के चर्चित "हाऊ कैन यू रोक..." बयान का उल्लेख कर विपक्ष पर कटाक्ष किया।

- छात्रों का इस्तेमाल कर रही है विपक्ष
राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी छात्रों और युवाओं के हित में ईमानदारी से आंदोलन नहीं कर रही, बल्कि उन्हें राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। उनका आरोप है कि विपक्ष छात्रों को बरगलाकर सत्ता हासिल करना चाहता है और प्रदेश में अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ लेना है, जबकि भाजपा सरकार शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
गौरतलब है कि पेपर लीक के मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है और विभिन्न राजनीतिक दल छात्र हितों के नाम पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, सत्तापक्ष विपक्ष पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर छात्रों को गुमराह करने का आरोप लगा रहा है।
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा क्यों नहीं नैतिकता का प्रश्न: सूरज प्रसाद चौबे

लखनऊ। देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले जिम्मेदारों को बचाना अधर्म है और यह अधर्म कमोबेश मोदी सरकार को नहीं करना चाहिए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लेकर सरकार के संवैधानिक निष्ठा और प्रतिष्ठा साबित करनी चाहिए वरना मोदी सरकार द्वारा देश के युवाओं के साथ किया गया विश्वासघात प्रमाणित हो जाएगा और सरकार की नैतिकता तार तार हो जाएगी सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने सवर्ण समाज के लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा आगे कहा कि विगत एक वर्ष से शिक्षा विभाग विवादों से घिरा रहा चाहे वह neet परीक्षा के पेपर लीक का मामला हो अथवा NCERT परीक्षा पेपर पर जातीय है भेद भाव वाली नीति  का प्रकरण इत्यादि देश के साथ गद्दरी के सिवा क्या समझा जाय । मोदी सरकार द्वारा UGC काला कानून लाया गया जो सवर्ण बच्चों को जातीय अपराधी घोषित कर दिया है,सामान्य वर्ग के बच्चों को शोषण करता बता दिया गया है सामान्य वर्ग के बच्चों के साथ इस तरह का भेद भाव किन्हीं भी दशा में सवर्ण स्वीकार नहीं करेगा । यूजीसी काला कानून वापस लिए जाने हेतु सवर्ण समाज के सामाजिक संगठन अगस्त में दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन करने गए जिन्हें दिल्ली पुलिस ने बर्बरता पूर्वक जेल में बंद किया, माननीय उच्चतम न्यायालय बीच में दखल दिया स्थगन आदेश दिया जिस कारण से यूजीसी रेगुलेशन लागू नहीं किया गया । मोदी सरकार के शासन काल में दर्जनों मामले पेपर लीक के आ चुके हैं परंतु एक भी मामले में परन्तु एक भी मामले में ऐतिहासिक कार्यवाही करने में सफल नहीं हुई। ज्वातर विरोध को दबाने में माहिर मोदी सरकार हर बार देश के युवाओं की आवाज और विरोध को दबाया ही गया है न कि ऐसे गम्भीर समस्याओं का निराकरण न ही उस पर गंभीर कार्यवाही का परिचय प्रस्तुत किया जाता है जो कि सरकार के नैतिक जिम्मेदारी व दायित्व होते हैं सदैव जिम्मेदारी से बच कर ,सवालो से बच कर सत्ता निरंकुश और निर्मम ही साबित होती है इसलिए सरकार पर लगे दाग को मिटाने के लिए तत्काल प्रधानमंत्री एवं मोदी सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लेकर सरकार के घुमिल छबि को निखारने का प्रयत्न करना चाहिए और जनता में सरकार में विश्वास कम हेतु तत्काल प्रभाव से विरोध कर रहे युवा समुदाय को सम्मान प्रदान कर अपनी नैतिकता सिद्ध करे मोदी सरकार एवं प्रधानमंत्री मोदी
देश के युवाओं एवं सामान्य वर्ग की भावनाओं के साथ ठेस पहुंचाने वाले बड़े प्रधानमंत्री उनके विरोध प्रदर्शन कर रहे उनको सम्मान प्रदान करते हुए और सरकार की संवैधानिक गरिमा कायम करने हेतु तथा जनता में सरकारी के प्रति विश्वास बनाए रखने हेतु शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर डबल इंजन की सरकार को नैतिकता को सिद्ध करना चाहिए