ईरान-यूएस जंग में झुलसा चाबहार पोर्ट, जानें अमेरिकी हमले से क्यों बढ़ी भारत की चिंता?
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अमेरिका और ईरान के बीच हो रही जंग एक बार फिर तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सीजफायर खत्म करने का ऐलान कर चुके हैं। ट्रंप के ईरान से सीजफायर खत्म होने का ऐलान करने के बाद लड़ाई तेज हो गई है। अमेरिका ने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन ईरान में हवाई हमले किए हैं। गुरुवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के चाबहार पोर्ट पर भी बमबारी की है। जिसने भारत की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, ईरान के इस पोर्ट का बड़ा हिस्सा भारत के सहयोग से विकसित हुआ है।
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90 से अधिक ठिकानों पर हवाई हमले
अमेरिका ने बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात ईरान के दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चाबहार पर नए हमले किए। होर्मुज और आसपास के इलाकों में 90 से अधिक ठिकानों पर हवाई हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने चाबहार को भी निशाना बनाया है। हमलों में बंदरगाह, एक समुद्री यातायात नियंत्रण टावर और पास की सैन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है।
चाबहार में विस्फोटों के बाद बिजली आपूर्ति बाधित
ईरान की सरकारी मीडिया में आई खबरों के मुताबिक चाबहार में विस्फोटों की आवाज सुनी गई। शहर के कुछ हिस्सों में बिजली भी गुल हो गई। स्थानीय लोगों ने कई धमाके सुने। आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी जगहों पर भी नुकसान की खबर है।
हमले को लेकर अमेरिकी सेना ने क्या कहा?
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, समुद्र में बने बुनियादी ढांचे और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया। वाशिंगटन की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि इन जगहों की मदद से ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाता है। खतरों को भांपते हुए अमेरिकी सेना की मध्य पूर्व कमान- सेंटकॉम ने लगभग 90 ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया। एक्स पर जारी बयान में सेंटकॉम ने लिखा, अमेरिकी सेंट्रल कमांड बलों ने ईरान के खिलाफ अतिरिक्त हमले शुरू किए हैं। इसका मकसद होर्मुज में खतरों को कम करना और जहाजों को नुकसान पहुंचाने की ईरान की ताकत पर नकेल कसना है।
भारत के लिए क्यों है चिंता का विषय
यह हमले चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि अप्रैल में अमेरिका-ईरान युद्धविराम की घोषणा के बाद से भारत की मदद के विकसित इस रणनीतिक बंदरगाह पर पहली बार हमले हुए हैं। चाबहार में हमले से भारत के इस पोर्ट पर अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की संभावना को जबरदस्त झटका लगा है। चाबहार पोर्ट ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में मकरान तट पर है। यह पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के पश्चिम में सिर्फ 170 किलोमीटर दूर है। ऐसे में चाबहार भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया का रास्ता देता है। ईरान-अमेरिका में शांति समझौते से भारत की चाबहार पोर्ट पर फिर से कामकाज की उम्मीद बंधी थी लेकिन नए हमलों ने चीजों को पटरी से उतार दिया है। हालांकि फिलहाल भारत चाबहार में सीधेतौर पर सक्रिय नहीं है।





2 hours and 56 min ago
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