मुंबई की 15 वर्षीय लेखिका वृत्ति अविचल ने आठ पुस्तकें लिखकर बनाया रिकॉर्ड
मुंबई।  जिस उम्र में अधिकांश किशोर अपनी स्कूली पढ़ाई और सामान्य गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में 15 वर्षीय वृत्ति अविचल ने लेखन, सार्वजनिक वक्तृत्व, कला और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। पहली किताब 13 की उम्र में लिखी । मुंबई की इस प्रतिभाशाली किशोरी ने एक ही दिन में अपनी आठ अंग्रेज़ी पुस्तकों का प्रकाशन कर इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है। वृत्ति अविचल की प्रकाशित पुस्तकों में Divided by Design, Light After Shadows, The Darkest Chapter, The Valley that Broke Hearts, Village to Verdict, Arabella’s Journey from Shadows to Sunshine, The Yellow Line और The Living Symphony शामिल हैं। इन पुस्तकों में समानता, न्याय, शांति, संघर्ष से उबरने की क्षमता, भारतीय संस्कृति और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। लेखन के साथ-साथ वृत्ति अविचल एक प्रभावशाली सार्वजनिक वक्ता (पब्लिक स्पीकर) के रूप में भी अपनी पहचान बना चुकी हैं। वर्ष 2024 में उन्होंने TEDx Youth Palm Road के मंच से अपने विचार साझा किए। इसके अलावा उन्होंने 10वें रेडियो चिको स्विट्जरलैंड वर्ल्ड पीस वीक के दौरान भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। उन्हें कॉमनवेल्थ एसे प्रतियोगिता में रजत पदक (सिल्वर मेडल) से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त कला, वाद-विवाद, निबंध लेखन, पॉडकास्टिंग और मोनो एक्टिंग जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त किए हैं।
साहित्य और शिक्षा तक पहुंच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वृत्ति अविचल अपनी पुस्तकों का दान मुंबई और पुणे के विभिन्न विद्यालयों के पुस्तकालयों में भी कर चुकी हैं। साहित्य और रचनात्मकता को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम मानने वाली वृत्ति अविचल आगे भी लेखन, सार्वजनिक वक्तृत्व और कला के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में कार्य करती रहना चाहती हैं।
साहित्य और शिक्षा से इतर खेलों में भी उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियां रही हैं। वह राज्य स्तरीय थ्रोबॉल खिलाड़ी हैं और वर्ष 2024 में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने राज्य स्तरीय शतरंज प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया है। कम उम्र में हासिल की गई उनकी ये उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि रचनात्मकता, समर्पण और सामाजिक सरोकार के माध्यम से युवा पीढ़ी भी समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रभावशाली भूमिका निभा सकती है।
भारी बारिश के दौरान उत्तर भारतीय मोर्चा ने किया छतरी वितरण
भायंदर। पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के कारण जहां मीरा-भायंदर शहर का जनजीवन बुरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। जगह-जगह जलजमाव की स्थिति बनी हुई है, इस दौरान बारिश से प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद के साथ-साथ भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा के मीरा-भायंदर जिलाध्यक्ष संतोष दीक्षित के नेतृत्व में इंद्रलोक, रामदेव पार्क, लक्ष्मी पार्क की कई हाउसिंग सोसायटियों के सुरक्षा रक्षकों तथा अन्य जरूरतमंदों के बीच छतरी का वितरण किया गया। इस दौरान उत्तर भारतीय मोर्चा के पदाधिकारी राज पाठक, राम अवतार राय, आशीष द्विवेदी, संग्राम सिंह, चंद्रकांत दुबे, राजेश शुक्ला आदि उपस्थित रहे। संतोष दीक्षित ने कहा कि मीरा-भायंदर के विधायक नरेंद्र मेहता, महापौर डिंपल विनोद मेहता, भाजपा जिलाध्यक्ष दिलीप जैन, उपमहापौर ध्रुवकिशोर पाटिल, मनपा स्थायी समिति के सभापति हसमुख गहलोत के मार्गदर्शन में उत्तर भारतीय मोर्चा की समूची टीम अतिवृष्टि के इस संकट भरे दौर में समूचे शहर में लोगों को हरसंभव मदद पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर जुटी हुई है।
राष्ट्रवाद और छात्र आंदोलन को नई दिशा देते एबीवीपी के 78 वर्ष
  – रवि रमेशचंद्र शुक्ल, एसोसिएट प्रोफेसर, जेएनयू

छात्र शक्ति, राष्ट्र शक्ति" केवल एक नारा नहीं, बल्कि विद्यार्थी परिषद के संपूर्ण आंदोलन का मूल दर्शन है, जो छात्रों को 'कल के नहीं, बल्कि आज के नागरिक' के रूप में स्थापित करता है। भारत के इतिहास में युवा और विशेषकर छात्र आंदोलनों का एक विशिष्ट और गौरवशाली स्थान रहा है। यह परंपरा आधुनिक युग की देन नहीं है, बल्कि इसके सूत्र सुदूर अतीत में तक्षशिला विश्वविद्यालय के उन विद्यार्थियों से जुड़ते हैं, जिन्होंने नंद वंश के कुशासन के विरुद्ध और सिकंदर के आक्रमण से राष्ट्र की रक्षा के लिए एक एकीकृत छात्र आंदोलन का सूत्रपात किया था। उस ऐतिहासिक आंदोलन के मूल में सांस्कृतिक-आध्यात्मिक राष्ट्रवाद की चेतना, राष्ट्र की एकता और सुशासन की स्थापना सर्वोपरि थी। इतिहास गवाह है कि छात्र सदैव परिवर्तन और युगांतरकारी क्रांतियों के उत्प्रेरक रहे हैं। यद्यपि छात्र आंदोलनों का नेतृत्व कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों से होता है, किंतु उनके सरोकार केवल अकादमिक परिसरों तक सीमित नहीं होते। विद्यार्थी समाज के सजग प्रहरी, नीति-निर्माता और जिम्मेदार नागरिक होते हैं; इसलिए राष्ट्र का हर सामाजिक, सांस्कृतिक या विधिक निर्णय उन्हें सीधे प्रभावित करता है। स्वतंत्रता के पश्चात देश के छात्र परिदृश्य पर एक बड़ा वैचारिक शून्य और असंतोष देखा गया। तत्कालीन समय में कम्युनिस्ट और कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन सक्रिय थे, किंतु उनके नेताओं और सदस्यों की अत्यधिक राजनीतिक महत्वाकांक्षा तथा दलीय राजनीति में सीधे संलिप्तता ने सामान्य छात्रों को निराश किया। ऐसे में एक ऐसे छात्र संगठन की आवश्यकता तीव्रता से महसूस की गई, जो दलीय राजनीति से सर्वथा मुक्त हो और जिसका ध्येय केवल सत्ता-लोलुपता न होकर राष्ट्रीय पुनर्निर्माण, सेवा और राष्ट्रभक्ति हो। इसी वैचारिक मंथन के परिणामस्वरूप 5 जून 1948 को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की नींव पड़ी, जिसकी औपचारिक घोषणा 'पाञ्चजन्य' पत्रिका के माध्यम से देश के युवाओं के समक्ष की गई। 9 जुलाई 1949 को इसे आधिकारिक रूप से पंजीकृत किया गया। अंबाला में इसके पहले अधिवेशन के साथ प्रोफेसर ओम प्रकाश बहल इसके प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष और श्री केशव देव वर्मा प्रथम राष्ट्रीय महासचिव बने। विद्यार्थी परिषद की सांगठनिक यात्रा और वैचारिक विस्तार में वर्ष 1967 एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब प्राध्यापक यशवंतराव केलकर इसके अध्यक्ष बने। अपनी दूरदृष्टि, प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता से उन्होंने परिषद की कार्यपद्धति का खाका खींचा, जिसके कारण उन्हें संगठन का 'मुख्य वास्तुकार' (चीफ आर्किटेक्ट) माना जाता है। उन्होंने छात्र-शिक्षक समन्वय और नि:स्वार्थ राष्ट्रसेवा को संगठन के मूल में रखा। वर्तमान में एबीवीपी देश ही नहीं, बल्कि विश्व का सबसे बड़ा और दीर्घकालिक सक्रिय छात्र आंदोलन बन चुका है। संगठन का वैचारिक ढांचा तीन स्तंभों पर टिका है: 'ज्ञान, शील और एकता'। यह त्रयी केवल अकादमिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के भीतर चरित्र निर्माण और सामाजिक चेतना का संचार करती है। परिषद की कार्यपद्धति को तीन मुख्य आयामों में विभाजित किया जा सकता है: रचनात्मक (रचनात्मक कार्य): सामाजिक सेवा, साक्षरता अभियान और सामुदायिक परियोजनाएं। आंदोलनात्मक (सकारात्मक संघर्ष): अकादमिक विसंगतियों और राष्ट्रीय मुद्दों के विरुद्ध लोकतांत्रिक व शांतिपूर्ण विरोध। प्रतिनिधित्वपरक (प्रतिनिधित्व): छात्र संघों और विधिक निकायों के माध्यम से विद्यार्थियों की आवाज को प्रभावी ढंग से उठाना। यह संगठन संवेदनशीलता (छात्रों की स्थानीय समस्याओं का समाधान), स्पष्टता (धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित वैचारिक रुख) और दृष्टि (भारत को पुन: 'विश्व गुरु' के रूप में स्थापित करने का संकल्प) के त्रिकोण पर काम करता है। इसके अतिरिक्त, 'वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन ऑफ स्टूडेंट्स एंड यूथ' (WOSY) के माध्यम से पिछले 77 वर्षों में इसने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है और अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय की सांस्कृतिक व राजनीतिक चेतना को प्रभावित किया है।
एबीवीपी ने वैश्विक छात्र राजनीति की दो सबसे बड़ी भ्रांतियों को तोड़ा है। पहली भ्रांति यह थी कि छात्रों को केवल 'भविष्य का नागरिक' मानकर नीति-निर्धारण से दूर रखा जाता था। दूसरी भ्रांति यह कि छात्र आंदोलनों को नकारात्मक और उपद्रवी (न्यूसेंस पावर) समझा जाता था। परिषद ने नारा दिया कि छात्र आज के नागरिक हैं और छात्र शक्ति ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। किंतु यह सदैव दलीय राजनीति से पूर्णतः अलिप्त रहा है। दलीय राजनीति से ऊपर उठने का अर्थ यह कतई नहीं है कि संगठन सामाजिक और राजनीतिक वास्तविकताओं के प्रति तटस्थ है। संगठन का मानना है कि पूर्णतः सामाजिक गतिविधियां भी राजनीति से अछूती नहीं रह सकतीं, क्योंकि देश के नागरिक होने के नाते छात्र सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों के प्रति जवाबदेह हैं। किंतु, एबीवीपी किसी भी राजनीतिक दल की कठपुतली या विंग (प्रकोष्ठ) नहीं है। सत्ता की राजनीति या दलीय हित किसी सामाजिक संगठन का केंद्र बिंदु नहीं हो सकते। आपातकाल का संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के गीतों और सांस्कृतिक चेतना का एक बड़ा हिस्सा वास्तव में राष्ट्रीय पहचान की खोज तथा औपनिवेशिक दासता से दमित भारतीय संस्कृति को पुनः गौरव दिलाने का एक अनवरत प्रयास है। इतिहास गवाह है कि औपनिवेशिक काल के दौरान भारत का सांस्कृतिक पुनर्जागरण और औपनिवेशिक सत्ता के विरुद्ध संघर्ष, दोनों ही जनमानस द्वारा अपनी खोई हुई राष्ट्रीय पहचान को खोजने की सामूहिक अभिव्यक्ति थे। परिषद के गीत अपने समय की सामाजिक चुनौतियों से गहराई से जुड़े रहे हैं, जिसके कारण यह संगठन केवल एक छात्र संघ न रहकर समय के साथ एक व्यापक सांस्कृतिक आंदोलन में परिवर्तित हो गया। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 'आपातकाल' (1975-77) का दौर सबसे अंधकारमय अध्याय माना जाता है। उस दमनकारी कालखंड में विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने दो मोर्चों पर एक साथ ऐतिहासिक संघर्ष किया: पहला, अपने कार्यकर्ताओं और पूर्णकालिक संगठन मंत्रियों के मनोबल को जीवित रखना; और दूसरा, देश में लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए जनमत को लामबद्ध करना। संगठन इस राष्ट्रव्यापी संघर्ष में 'लोक संघर्ष समिति' के एक अत्यंत सक्रिय अंग के रूप में उभरा। इस दौरान अरुण जेटली जैसे परिषद के कई शीर्ष कार्यकर्ताओं को महीनों जेल की सलाखों के पीछे गुजारने पड़े, वहीं अनगिनत कार्यकर्ताओं ने भूमिगत (अंडरग्राउंड) रहकर दमनकारी नीतियों के खिलाफ अलख जगाए रखी। औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति और तानाशाही के विरुद्ध संघर्ष, दोनों ही भारत की 'चिति' (सामूहिक चेतना) को जीवंत रखने के प्रयास थे। वर्ष 1977 में जब इस कठोर और क्रूर तानाशाही युग का अंत हुआ, तब देश के युवाओं ने स्वतंत्रता की खुली हवा में सांस ली। आपातकाल के बाद के इस दौर में लोकतंत्र के प्रति एक नई उम्मीद जगी और अधिकारों तथा संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता पुनर्जीवित हुई। युवा एक बार फिर सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के अपने मूल मिशन में जुट गए। यद्यपि आपातकाल के बाद का राजनीतिक दौर (1977) कुछ हद तक राजनीतिक अस्थिरता से प्रभावित रहा, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई द्वारा सामाजिक सुधारों और हाशिए के वर्गों के उत्थान के लिए किए गए प्रयास उनकी सरकार के आंतरिक राजनीतिक अंतर्विरोधों के कारण पूरी तरह सफल नहीं हो सके। इस अस्थिर माहौल के बीच भी विद्यार्थी परिषद ने युवाओं का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। संगठन ने समाज में समता (समानता) और बंधुत्व को बढ़ावा देने के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता व्यक्त की। साथ ही, कार्यकर्ताओं को सचेत किया कि वे तात्कालिक या अल्पकालिक लाभ के प्रलोभनों में न आएं, क्योंकि ऐसे लाभों का कोई स्थायी मूल्य नहीं होता। राष्ट्र निर्माण की इस महायात्रा में युवाओं को 'समानता, न्याय और बंधुत्व' के संवैधानिक व शाश्वत आदर्शों के लिए बिना थके निरंतर कार्य करने की आवश्यकता है, ताकि एक सुदृढ़ और समृद्ध भारत का स्वप्न साकार हो सके।
अंततः, विद्यार्थी परिषद की दो अनूठी संरचनात्मक विशेषताएं इसे अन्य संगठनों से भिन्न और स्थायी बनाती हैं। पहली है इसकी 'संगठन मंत्री' (पूर्णकालिक विस्तारक) प्रणाली, जो दलीय छात्र राजनीति के क्षणिक नेतृत्व चक्र के विपरीत संगठन को दीर्घकालिक प्रशासनिक स्थिरता प्रदान करती है। दूसरी विशेषता है 'गुरु-शिष्य' (शिक्षक-छात्र) समन्वय, जो शैक्षणिक परिवार की अवधारणा को जीवंत करता है। शिक्षा व्यवस्था में 'समरसता, समता और अमानता' (सौहार्द, समानता और समत्व) के मूल्यों को समाहित करते हुए यह आंदोलन आज भी राष्ट्र के पुनर्निर्माण और युवाओं के समग्र सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर अग्रसर है।
संघ परिवार के अन्य सभी संगठनों की तरह, एबीवीपी (ABVP) के समर्पित कार्यकर्ताओं का दल हमेशा सभी राहत गतिविधियों में सबसे आगे रहता है, और किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय तुरंत अपनी सेवाएं देता है। तेजस्वी सूर्या के शब्दों में 'चाहे 1977 में आंध्र प्रदेश में आए चक्रवात के दौरान राहत कार्य में भागीदारी हो, एबीवीपी के कार्यकर्ता सबसे पहले पहुंचने वालों में से होते हैं, जो पीड़ितों की मदद करते हुए दिखाई देते हैं।' शिक्षा और राष्ट्रनिर्माण के लिए 78 वर्ष से अनवरत संघर्ष करने वाला यह विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन है। आज परिषद के बिना छात्र जीवन लगभग असंभव हो गया है।
राजस्थान फाउंडेशन दक्षिण मुंबई चैप्टर के अध्यक्ष बने दिलीप माहेश्वरी
मुंबई। राजस्थान सरकार द्वारा प्रेरित राजस्थान फाउंडेशन के संगठन विस्तार अभियान के अंतर्गत मुंबई चैप्टर के अध्यक्ष गणपत कोठारी ने प्रख्यात समाजसेवी, कर्मठ कर्मयोगी एवं सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप माहेश्वरी को राजस्थान फाउंडेशन दक्षिण मुंबई चैप्टर का अध्यक्ष मनोनीत किया।नियुक्ति की घोषणा करते हुए गणपत कोठारी ने कहा कि दक्षिण मुंबई में बड़ी संख्या में प्रवासी राजस्थानवासी निवास एवं व्यापार करते हैं। उन्हें पूर्ण विश्वास है कि दिलीप माहेश्वरी के नेतृत्व में दक्षिण मुंबई का प्रवासी राजस्थान समाज एक मजबूत संगठनात्मक सूत्र में जुड़ेगा तथा राजस्थान फाउंडेशन के माध्यम से अपनी जन्मभूमि राजस्थान से भावनात्मक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संबंध और अधिक सुदृढ़ होंगे। उन्होंने कहा कि राजस्थान फाउंडेशन का उद्देश्य देश-विदेश में बसे राजस्थान मूल के लोगों को अपनी मातृभूमि से जोड़ना, सामाजिक समन्वय स्थापित करना तथा राज्य के विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। दिलीप माहेश्वरी के अनुभव, सक्रियता एवं सामाजिक कार्यों का लाभ निश्चित रूप से संगठन को मिलेगा। नवनियुक्त अध्यक्ष दिलीप माहेश्वरी ने राजस्थान सरकार, राजस्थान फाउंडेशन एवं मुंबई चैप्टर के अध्यक्ष गणपत कोठारी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें सौंपे गए दायित्व का पूरी निष्ठा, ईमानदारी एवं समर्पण के साथ निर्वहन करेंगे। उन्होंने विश्वास दिलाया कि दक्षिण मुंबई में राजस्थान फाउंडेशन के कार्यों को नई ऊर्जा प्रदान करते हुए अधिक से अधिक प्रवासी राजस्थानवासियों को संगठन से जोड़ा जाएगा।
दिलीप माहेश्वरी ने यह भी घोषणा की कि शीघ्र ही राजस्थान फाउंडेशन दक्षिण मुंबई चैप्टर की नई कार्यकारिणी की घोषणा की जाएगी, जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों के सक्रिय एवं समर्पित लोगों को अवसर दिया जाएगा। संगठन सेवा, संस्कार, संस्कृति और सामाजिक समरसता के मूल्यों को लेकर दक्षिण मुंबई में प्रभावी भूमिका निभाएगा।
मुंबई में जनजीवन और स्थिति पूरी तरह नियंत्रित : मंगल प्रभात लोढा
मुंबई। पिछले दो-तीन दिनों से मुंबई में हो रही भारी बारिश के बीच मुंबई में जनजीवन और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। संकट के इस समय में मुंबईकरों द्वारा प्रशासन को दिया गया सहयोग अत्यंत बहुमूल्य है, यह प्रतिपादन मंत्री मंगल प्रभात लोढा ने आज किया। वे मुंबई महानगरपालिका के आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष (Disaster Management Center) का प्रत्यक्ष दौरा कर स्थिति की समीक्षा करने के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। इस अवसर पर सदन के नेता गणेश खणकर, महानगरपालिका आयुक्त श्रीमती अश्विनी भिडे (IAS), अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) श्रीमती प्राजक्ता वर्मा - लवंगारे (IAS), अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (पूर्वी उपनगर) अविनाश ढाकणे (IAS), उपायुक्त (स्वास्थ्य) श्री शरद उघडे और महानगरपालिका के संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री मंगल प्रभात लोढा ने स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैसा कि माननीय मुख्यमंत्री ने विधानसभा में उल्लेख किया था, यह प्रकृति का एक बड़ा प्रकोप है और यह एक अभूतपूर्व स्थिति है। शहर में एक ही दिन में ३५० से अधिक पेड़ों के उखड़ने की घटना हुई। हालांकि, ऐसी कठिन परिस्थितियों में भी महानगरपालिका का आपदा प्रबंधन विभाग और सरकारी तंत्र अत्यंत तीव्र गति से और युद्ध स्तर पर सड़कों से पेड़ हटाने और जलभराव को दूर करने के काम में जुटा हुआ है। नागरिकों, विशेषकर लंबी दूरी की यात्रा करने वालों को किसी भी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासन ने अत्यंत सतर्कता के साथ कदम उठाए हैं। एक आवश्यक एहतियाती उपाय के रूप में सुबह के सत्र में स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी घोषित की गई और उसके बाद दोपहर के सत्र में सरकारी कार्यालयों को भी छुट्टी दे दी गई, ताकि यात्री सुरक्षित अपने घर पहुंच सकें। मंत्री लोढा ने अत्यंत सकारात्मकता व्यक्त करते हुए कहा कि इतने बड़े संकट के बाद भी मुंबई कहीं भी थमी नहीं है। एहतियाती उपायों के कारण लोकल ट्रेनों की गति थोड़ी धीमी जरूर है, लेकिन रेल यातायात पूरी तरह से चालू है। सड़कों पर जमा पानी और गिरे हुए पेड़ों को पूरी तरह से साफ कर दिया गया है और सड़कों को यातायात के लिए खोल दिया गया है।
पिछले तीन दिनों से महानगरपालिका के अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात एक कर ऑन-फील्ड काम कर रहे हैं। संकट के समय में राजनीति न करते हुए हम सभी को प्रशासन के साथ खड़ा होना चाहिए और उनके इस निरंतर परिश्रम की सराहना (Appreciation) करनी चाहिए," ऐसा आह्वान मंत्री लोढा ने इस अवसर पर किया। उन्होंने आगे कहा कि ९० किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सभी को व्हाट्सएप के माध्यम से सतर्कता के संदेश भेज दिए गए हैं, और आगामी किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए संपूर्ण प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह तैयार है।
वाग्धारा सम्मान समारोह में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल के हाथों आचार्य पवन त्रिपाठी समेत 14 विभूतियां सम्मानित
मुंबई। साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना के संवर्धन में पिछले चार दशकों से कार्यरत अग्रणी संस्था 'वाग्धारा' और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समाचार नेटवर्क 'भारत एक्सप्रेस' के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को अंधेरी (वेस्ट) स्थित मुक्ति ऑडिटोरियम में "वाग्धारा सम्मान समारोह 2026" का ऐतिहासिक व भव्य आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस गरिमामयी समारोह के मुख्य अतिथि तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल थे, जिन्होंने देश भर से चुनकर आईं 14 अद्वितीय प्रतिभाओं को अपने कर-कमलों से सम्मानित किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में 'भारत एक्सप्रेस' के सीएमडी और एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय मंच पर उपस्थित रहे। राजभवन के उच्चतम प्रोटोकॉल के अनुसार तैयार किए गए मंच पर मुख्य अतिथि राज्यपाल महोदय के साथ विशिष्ट अतिथि उपेंद्र राय, वाग्धारा के अध्यक्ष डॉ. वागीश सारस्वत, कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमती दुर्गेश्वरी सिंह 'महक', सिद्धिविनायक ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी, चयन समिति के अध्यक्ष श्री जयंत देशमुख और प्रस्तावक समिति के अध्यक्ष अरविंद शर्मा राही उपस्थित रहे। कार्यक्रम का अत्यंत सफल और मंत्रमुग्ध कर देने वाला सूत्र संचालन अरविन्द शर्मा राही और रवि यादव द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने वाग्धारा एनजीओ के कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना की और कहा कि वाग्धारा संस्था पिछले 40 वर्षों से साहित्य, कला और समाज सेवा के क्षेत्र में जो अलख जगा रही है, वह वास्तव में अत्यंत सराहनीय और अनुकरणीय है। अपने आशीर्वचन और व्याख्यान में राज्यपाल महोदय ने वर्तमान परिदृश्य पर गहराई से प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के दौर में समाज सेवा, पत्रकारिता, सिनेमा, रंगमंच, विज्ञान और शिक्षा जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निस्वार्थ भाव से काम करने वाले सच्चे और अच्छे लोगों को ढूंढना बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्य हो गया है। ऐसे समय में वाग्धारा और भारत एक्सप्रेस ने देश के कोने-कोने से ऐसी वास्तविक प्रतिभाओं को खोज निकाला है, जिन्होंने समाज को आगे बढ़ाने में अपना जीवन लगा दिया। राज्यपाल महोदय ने ज़ोर देकर कहा कि ग्रामीण स्तर पर बदलाव लाने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं से लेकर राष्ट्रीय स्तर के शीर्ष दिग्गजों तक—भारत के अलग-अलग राज्यों और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाली इन अनमोल प्रतिभाओं को एक मंच पर लाकर सम्मानित करना स्वयं को गौरवान्वित करने जैसा है। समारोह के इस गौरवशाली 10वें संस्करण में कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी व उत्कृष्ट योगदान देने के लिए बस्तर के डॉ. राजाराम त्रिपाठी को सर्वोच्च 'वाग्धारा जीवन गौरव सम्मान 2026' से नवाजा गया। इसके साथ ही, भारतीय सिनेमा और अभिनय जगत के शीर्ष स्तंभ वरिष्ठ अभिनेता रज़ा मुराद और हिंदी व मराठी रंगमंच व फिल्मों के अत्यंत लोकप्रिय अभिनेता सचिन खेड़ेकर को 'वाग्धारा नवरत्न सम्मान' से विभूषित किया गया। ज्योतिष विज्ञान व संस्कृत के प्रकांड विद्वान और सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट (मुंबई) के कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी को इस वर्ष का 'डॉ. शंकरलाल सारस्वत स्मृति वाग्धारा सम्मान' प्रदान किया गया। वहीं पश्चिम रेलवे के सीपीआरओ श्री विनीत अभिषेक को 'नेत्रपाल सिंह स्मृति रेल सेवा सम्मान' और सुश्री नीता बाजपेई को 'संध्या पांडेय स्मृति वाग्धारा सम्मान' दिया गया। इनके अतिरिक्त, अपने-अपने क्षेत्रों में देश का नाम रोशन करने वाली विभूतियों में शिक्षा के लिए डॉ. सदानंद भोसले (पुणे), निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए श्री मृत्युंजय बोस (वसई, महाराष्ट्र), भाषा सेतु हेतु डॉ. नामदेव गौडा (बीजापुर, कर्नाटक), लोककला के लिए श्री शिवपूजन शुक्ल (गोंडा), निस्वार्थ समाज सेवा के लिए डॉ.आलोक सोनी (दतिया, मध्य प्रदेश), मानव कल्याण व न्याय के लिए श्रीमती स्वाति चौहान (पूर्व न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट मुंबई) तथा संगीत साधना के लिए डॉ. स्मृति त्रिपाठी (दिल्ली) को 'वाग्धारा नवरत्न सम्मान 2026' प्रदान किया गया। प्रेस नोट जारी करते हुए वाग्धारा के महासचिव एडवोकेट भार्गव तिवारी ने समारोह को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए मुंबई के समस्त प्रबुद्ध नागरिकों, बुद्धिजीवियों और मीडिया जगत का सहृदय आभार व्यक्त किया। समारोह का शुभारंभ सुप्रसिद्ध लोक गायक विनोद दुबे के गीतों से हुई।गायिका श्रद्धा मोहिते ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। सभी सम्मानमूर्तियों ने अपने वक्तव्य प्रस्तुत किए। अवधेश कुमार पांडेय,सुरेश तिवारी यश,नरेंद्र कोठेकर,मनीषा जोशी,नंदिता माज़ी शर्मा,बेला बारोट, विनीता टंडन यादव,देव फौजदार,मुस्तफ़ा यूसुफ़अली गोम,सुनील पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार विमल मिश्र, ओमप्रकाश तिवारी ,आरती राजदान और कमर हाजीपुरी समारोह में सक्रिय सहभागिता की।
संदीप तिवारी को मिली मीरा भायंदर शिवसेना उत्तर भारतीय जिला प्रमुख की कमान
भायंदर। मीरा भायंदर शहर में उत्तर भारतीय समाज का युवा चेहरा कहे जाने वाले संदीप तिवारी को अंततः शिवसेना ने एक बड़ी जिम्मेदारी दे दी। महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री तथा मीरा भायंदर संपर्क प्रमुख प्रताप सरनाईक ने उन्हें उत्तर भारतीय जिला प्रमुख की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी। संदीप तिवारी को दिए गए नियुक्ति पत्र में प्रताप सरनाईक ने आशा व्यक्त की है कि संदीप तिवारी पार्टी संगठन को मजबूत करने और उत्तर भारतीय समाज को पार्टी की विचारधारा से जोड़ने का समर्पित भावना के साथ कार्य करेंगे। इस अवसर पर विधानसभा चुनाव प्रमुख विक्रम प्रताप सिंह, जिला अध्यक्ष राजू भोईर, संजय मांजरेकर, ठाकुर नवीन सिंह,पूर्व नगरसेवक विजय राय, डॉ अजय तिवारी एडवोकेट कुंवर पांडे, अभिनव त्रिपाठी, विद्या शंकर चतुर्वेदी, गुड्डू तिवारी, राजेश यादव, पवन घरत, आस्तिक म्हात्रे, नितेश कुमार, प्रवीण सिंह, अजय सिंह, आकाश तिवारी, डॉ अखिलेश मिश्रा, दिनेश तिवारी, सपना त्रिपाठी, पूजा पांडे, डॉली सिंह, उषा मिश्रा समेत अनेक लोग उपस्थित रहे। संदीप तिवारी ने कहा कि वे दी गई जिम्मेदारी का निर्वहन पूरे मनोयोग और समर्पित भावना के साथ करेंगे। ज्ञातव्य हो कि संदीप तिवारी का परिवार राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है। उनके चाचा रविंद्र नाथ तिवारी भदोही से भाजपा के पूर्व विधायक है तो दूसरे चाचा अनिरुद्ध त्रिपाठी भदोही जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। छोटे भाई सचिन त्रिपाठी ब्लॉक प्रमुख तो बड़े भाई चंद्रभूषण त्रिपाठी जिला पंचायत सदस्य हैं। ऐसे में संदीप त्रिपाठी को उत्तर भारतीय जिला प्रमुख की  कमान देने से शिवसेना की ताकत बढ़नी तय मानी जा रही है।
एडीशनल डीसीपी जितेन्द्र कुमार दुबे को ‘डॉ. तारा सिंह साहित्य राष्ट्रीय सम्मान
वाराणसी। खाकी वर्दी के साथ कलम की स्याही का संगम जब होता है तो समाज को जितेन्द्र कुमार दुबे जैसा व्यक्तित्व मिलता है। वाराणसी के मार्कण्डेय महादेव, कैथी निवासी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं कवि जितेन्द्र कुमार दुबे को साहित्य और समाज सेवा में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था स्वर्गविभा परिवार ने "डॉ. तारा सिंह साहित्य राष्ट्रीय सम्मान-2026" से सम्मानित किया है।वर्तमान में एडीशनल डीसीपी, मध्य कमिश्नरेट, लखनऊ के पद पर कार्यरत जितेन्द्र कुमार दुबे ने प्रशासन और साहित्य दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एम.एससी. जियोफिजिक्स में स्वर्ण पदक हासिल किया। विज्ञान का छात्र होने के बावजूद साहित्य के प्रति उनका अनुराग शुरू से ही प्रखर रहा। स्वर्गविभा परिवार द्वारा जारी प्रशस्ति-पत्र में उनके साहित्यिक अवदान, सृजनात्मक प्रतिबद्धता और सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना के संवर्धन में किए गए कार्यों की विशेष सराहना की गई है। संस्था ने उनकी सतत साहित्य साधना और उत्कृष्ट रचनाधर्मिता को देखते हुए यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया।
जितेन्द्र कुमार दुबे की कविताओं में सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदनाएं और राष्ट्रप्रेम की झलक मिलती है। कानून व्यवस्था संभालने के साथ-साथ वे शब्दों के जरिए समाज को नई दिशा देने का काम भी कर रहे हैं। इस उपलब्धि पर उनकी पत्नी बीना दुबे समेत साहित्य, शिक्षा और प्रशासनिक जगत की कई हस्तियों ने बधाई दी है। लोगों ने कहा कि यह सम्मान न सिर्फ दुबे परिवार बल्कि पूरे वाराणसी जनपद और उत्तर प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। एक पुलिस अधिकारी का साहित्य के शीर्ष सम्मान तक पहुंचना साबित करता है कि प्रतिभा किसी वर्दी की मोहताज नहीं होती। जितेन्द्र कुमार दुबे का जीवन युवा पीढ़ी के लिए संदेश है कि अगर इरादे मजबूत हों तो प्रशासन और सृजन दोनों एक साथ साधे जा सकते हैं। वर्दी का अनुशासन और कलम की संवेदना जब मिलते हैं तो समाज को एक नई रोशनी मिलती है।
शिक्षण समिति की निर्विरोध सभापति बनी नगरसेविका स्नेहा शैलेश पांडे
भायंदर। मीरा भायंदर महानगरपालिका की लोकप्रिय भाजपा नगरसेविका स्नेहा शैलेश पांडे ,शिक्षण ,कला  क्रीड़ा और सांस्कृतिक समिति के सभापति के रूप में निर्विरोध निर्वाचित हुई हैं। चुनाव के बाद महापौर की रेस में शामिल स्नेहा पांडे को यह बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने से उनके प्रशंसकों में खुशी की लहर देखी जा सकती है। लगातार तीसरी बार नगरसेविका बनी श्रीमती पांडे उच्चशिक्षित  मूक बधिर दिव्यांगो की शिक्षिका रह चुकी होने के साथ-साथ अनुभवी नगरसेविका के रूप में जानी जाती हैं। ऐसे में वे दी गई जिम्मेदारी का निर्वहन पूरे मनोयोग और समर्पित भावना के साथ करेंगी।उनके पति आचार्य शैलेश पांडे भाजपा के तेज तर्रार प्रदेश प्रवक्ता के रूप में पहचाने जाते हैं, जो  विद्यार्थी  जीवन से  संघ  व   अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद  से भाजपा मे जनसेवा करते पिछले 34 वर्षो समाजसेवा और राजनिती मे सक्रिय है ऐसे में उन्हें अपने पति के कार्यों का पूरा लाभ मिलेगा। स्नेहा पांडे ने निर्विरोध सभापति बनाए जाने के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण, विधायक नरेंद्र मेहता जिला अध्यक्ष दिलीप जैन, महापौर डिंपल मेहता, उपमहापौर ध्रुव किशोर पाटिल, स्थाई समिति सभापति हसमुख गहलोत समेत सभी वरिष्ठ जनों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्हें यह पद दिए जाने पर राहुल एजुकेशन के चेयरमैन लल्लन तिवारी, महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह, पूर्व राज्य मंत्री अमरजीत मिश्रा, पद्मश्री  ब्रह्मदेव पंडित अशोक  महेश्वरी ,शैलेन्द्र शर्मा  परिवहन समिति के सभापति एडवोकेट राजकुमार मिश्रा, जिला महामंत्री बृजेश तिवारी,  भाजपा नेता सुरेश सिंह, वरिष्ठ नगरसेवक मदन उदित नारायण सिंह, नगरसेवक मनोज रामनारायण दुबे, नगरसेवक विवेक उपाध्याय, अमरनाथ तिवारी, जिला महामंत्री ज्ञानेन्द्र सिंग , संतोष दीक्षित  जिलाध्यक्ष उत्तर भारतीय मोर्चा, जटाशंकर पांडेय
साहबदिन पांडे.एड अरुण दुबे  विनोद तिवारी जेपी  सिंह,एडवोकेट अरुणा सत्यप्रकाश पांडे,संजय वोरा अनुपमा शुक्ला राजीव गोइन, गीता सिंह, विश्वाथ तिवारी, एड. आर जे मिश्रा, अभयराज पांडे, प्रोफेसर विजय नाथ मिश्रा, दीपक सावंत, शंकर वीरकर, महेश म्हात्रे, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, पत्रकार राजेश उपाध्याय समेत अनेक लोगों ने खुशी जाहिर करते हुए शुभकामनाएं दी हैं।
मूसलाधार बारिश के बीच बांद्रा में सीमा सिंह ने श्रमिकों को बांटी छतरी
मुंबई। मुंबई में हो रही मूसलाधार बारिश के बीच देश की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था मेघाश्रेय फाउंडेशन द्वारा बांद्रा पश्चिम के अलमेडा पार्क में बरसात से बचने के लिए सैकड़ों श्रमिकों को छतरी बांटकर एक पुनीत कार्य किया। बरसात में भीग रहे श्रमिक छतरी पाकर बेहद खुश नजर आए। संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सीमा सिंह ने अपने हाथों से उन्हें छतरी वितरित किया। इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि बरसात में वर्षा से बचने के लिए छतरी एक महत्वपूर्ण साधन है। बहुत सारे गरीब मजदूर पैसे की तंगी के चलते चाह कर भी छतरी नहीं खरीद पाए। उनके बच्चों को भीगते हुए विद्यालय जाना पड़ता है। यही सोच कर संस्था ने भारी बरसात के बीच छतरी बांटने का निर्णय लिया। उपस्थित लोगों ने संस्था के इस मानवीय कार्य की सराहना की। भारी बरसात के चलते जहां एक तरफ लोग अपने घरों या सुरक्षित स्थानों में  रह रहे हैं, वहीं सीमा सिंह ने बारिश की परवाह न करते हुए श्रमिकों के बीच पहुंचकर उन्हें छतरी वितरित की।