155वें स्थापना दिवस पर अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन सम्पन्न,देशभक्ति,सामाजिक सरोकार और हास्य से सराबोर रही काव्य संध्या।
बलरामपुर।30 जून- आदर्श नगर पालिका परिषद के 155वें स्थापना दिवस के अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष डॉ.धीरेन्द्र प्रताप सिंह 'धीरू' के अथक प्रयासों से भव्य अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नगर के सांस्कृतिक,सामाजिक एवं धार्मिक आदि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों एवं विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। देर रात तक चले कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न जनपदों से आए ख्यातिप्राप्त कवियों ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके बाद सम्मान समारोह आयोजित कर नगर के विकास,सामाजिक सेवा,संस्कृति एवं शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।
कवि सम्मेलन में कवियों ने प्रेम,राष्ट्रभक्ति,सामाजिक समरसता, वर्तमान परिस्थितियों,व्यंग्य एवं हास्य पर आधारित अपनी रचनाओं से खूब तालियां बटोरीं।
विकास बौखल (बाराबंकी) ने प्रेम और मानवता का संदेश देते हुए पढ़ा—
"किसी खंजर से ना तलवार से जोड़ा जाए,सारी दुनिया को चलो प्यार से जोड़ा जाए।
यह किसी शख्स को दोबारा ना मिल पाए,प्यार के रोग को आधार से जोड़ा जाए।"
मणिका दुबे ने सामाजिक संवेदनाओं को स्वर देते हुए कहा—
"वजूद धागे सा टूट जाना सही नहीं है,अन्नाप्रस्तों से दिल लगाना सही नहीं है।
खुदा के बंदे हो आप सारे,खुद नहीं हो,इसे गिराना,उसे उठाना सही नहीं है।"
दिनेश रघुवंशी (फरीदाबाद) की राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कविता पर खूब तालियां गूंजी—
"हमेशा तन गए अंग्रेजों तोपों के दहानों के,कोई कीमत नहीं होती क्या प्राणों की जवानों के।
बड़े लोगों की औलादें तो कैंडल मार्च करती हैं,जो अपने प्राण देते हैं, वह बेटे हैं किसानों के।"
अभय निर्भीक ने देशभक्ति का जोश भरते हुए कहा—
"भारत माता का हरगिज सम्मान नहीं खोने देंगे,अपने पूज्य तिरंगे का अपमान नहीं होने देंगे।"
मनोज मिश्र 'कप्तान' ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर व्यंग्य करते हुए सुनाया—
"कप,बंदूक चाहे सरोवर मिले,कुनकुनी ठंड में भी पुलोवर मिले।
रेंज में जिसके ऑल्टो नहीं आज वे,चाहते ब्याह में रेंज रोवर मिले।"
सुरेश सैनिक ने अपनी अनूठी शैली में कहा—
"चींटियों के पांव में चट्टान चिपकाए गए,रास्ते-दर-रास्ते तूफान बैठाए गए।
आंखों की मछली दिखे तब और कुछ दिखता नहीं,सिखाने वाले पर हरदौल में पाए गए।"
रुखसार बलरामपुरी ने प्रेम और राष्ट्रप्रेम का संदेश देते हुए कहा—
"प्यार का हम पैगाम सुनाने वाले हैं,नफरत को धरती से मिटाने वाले हैं।
सभी वतन पर जान लुटाने वाले हैं।"
डॉ.कलीम कैसर ने भारत की महानता का गुणगान करते हुए कहा—
"युगों-युगों गूंजे यह नारा,केवल एक दो सदी नहीं,भारत जैसा देश नहीं और गंगा जैसी नदी नहीं।"
डॉ.ओम प्रकाश मिश्र 'प्रकाश' ने समाज को जागरूक होने का संदेश दिया—
"गर जागे नहीं,सोते-सोते रहेंगे,दुश्वारियों का बोझ सदा ढोते रहेंगे।
यूं जुल्मों-सितम सहकर जो चुप बैठे रहे आप,नफरत के बीच बोने वाले बोते रहेंगे।"
कुंवर जावेद ने दोहरे चरित्र वाले लोगों पर तीखा व्यंग्य किया—
"गिजाएं खाते हैं यह ऐसी होटलों में और,सड़क पर भूखे की,नंगे की बात करते हैं।
मजाक देखिए इससे ज्यादा क्या होगा,दुरंगे लोग तिरंगे की बात करते हैं।"
अकमल बलरामपुरी ने अपनी ग़ज़ल से श्रोताओं को खूब सराहा—
"उसे यह हक है शरारत से जाकर मर जाए,पठान वादा करें और फिर मुकर जाए।
तमाम शहर उसे देखने को आता है,उसे कहो कि कभी छत से उतर जाए।"
आदर्श त्रिपाठी ने सृजन और सकारात्मक सोच का संदेश देते हुए कहा—
"जो बैठे व्यर्थ विवादों में,विवेक केवल कोलाहल होंगे,जो जुड़ेंगे सृजन के साधन में,वे धरती के संबल होंगे।"
कार्यक्रम के अंत में हास्य कवि विनोद कलहंस ने अपने चुटीले अंदाज से समां बांध दिया। उनकी पंक्तियां—
"उसकी गली में आना-जाना सबके बस की बात नहीं,चोरी-चुपके दिल को चुराना सबके बस की बात नहीं।
हमें ये इल्म हुआ इश्क में इतने डंडे खाना,सबके बस की बात नहीं।"
—पर पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा।
देर रात तक चले इस अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में बड़ी संख्या में नगरवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। देशभक्ति,सामाजिक चेतना,प्रेम,व्यंग्य और हास्य से सजी इस काव्य संध्या ने नगर पालिका के 155वें स्थापना दिवस समारोह को यादगार बना दिया। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए नगर पालिका अध्यक्ष डॉ.धीरेन्द्र प्रताप सिंह 'धीरू' सहित आयोजन समिति की सर्वत्र सराहना की गई।
Jul 08 2026, 17:11
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