मुंबई में जनजीवन और स्थिति पूरी तरह नियंत्रित : मंगल प्रभात लोढा
मुंबई। पिछले दो-तीन दिनों से मुंबई में हो रही भारी बारिश के बीच मुंबई में जनजीवन और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। संकट के इस समय में मुंबईकरों द्वारा प्रशासन को दिया गया सहयोग अत्यंत बहुमूल्य है, यह प्रतिपादन मंत्री मंगल प्रभात लोढा ने आज किया। वे मुंबई महानगरपालिका के आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष (Disaster Management Center) का प्रत्यक्ष दौरा कर स्थिति की समीक्षा करने के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। इस अवसर पर सदन के नेता गणेश खणकर, महानगरपालिका आयुक्त श्रीमती अश्विनी भिडे (IAS), अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) श्रीमती प्राजक्ता वर्मा - लवंगारे (IAS), अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (पूर्वी उपनगर) अविनाश ढाकणे (IAS), उपायुक्त (स्वास्थ्य) श्री शरद उघडे और महानगरपालिका के संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री मंगल प्रभात लोढा ने स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैसा कि माननीय मुख्यमंत्री ने विधानसभा में उल्लेख किया था, यह प्रकृति का एक बड़ा प्रकोप है और यह एक अभूतपूर्व स्थिति है। शहर में एक ही दिन में ३५० से अधिक पेड़ों के उखड़ने की घटना हुई। हालांकि, ऐसी कठिन परिस्थितियों में भी महानगरपालिका का आपदा प्रबंधन विभाग और सरकारी तंत्र अत्यंत तीव्र गति से और युद्ध स्तर पर सड़कों से पेड़ हटाने और जलभराव को दूर करने के काम में जुटा हुआ है। नागरिकों, विशेषकर लंबी दूरी की यात्रा करने वालों को किसी भी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासन ने अत्यंत सतर्कता के साथ कदम उठाए हैं। एक आवश्यक एहतियाती उपाय के रूप में सुबह के सत्र में स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी घोषित की गई और उसके बाद दोपहर के सत्र में सरकारी कार्यालयों को भी छुट्टी दे दी गई, ताकि यात्री सुरक्षित अपने घर पहुंच सकें। मंत्री लोढा ने अत्यंत सकारात्मकता व्यक्त करते हुए कहा कि इतने बड़े संकट के बाद भी मुंबई कहीं भी थमी नहीं है। एहतियाती उपायों के कारण लोकल ट्रेनों की गति थोड़ी धीमी जरूर है, लेकिन रेल यातायात पूरी तरह से चालू है। सड़कों पर जमा पानी और गिरे हुए पेड़ों को पूरी तरह से साफ कर दिया गया है और सड़कों को यातायात के लिए खोल दिया गया है।
पिछले तीन दिनों से महानगरपालिका के अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात एक कर ऑन-फील्ड काम कर रहे हैं। संकट के समय में राजनीति न करते हुए हम सभी को प्रशासन के साथ खड़ा होना चाहिए और उनके इस निरंतर परिश्रम की सराहना (Appreciation) करनी चाहिए," ऐसा आह्वान मंत्री लोढा ने इस अवसर पर किया। उन्होंने आगे कहा कि ९० किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सभी को व्हाट्सएप के माध्यम से सतर्कता के संदेश भेज दिए गए हैं, और आगामी किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए संपूर्ण प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह तैयार है।
वाग्धारा सम्मान समारोह में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल के हाथों आचार्य पवन त्रिपाठी समेत 14 विभूतियां सम्मानित
मुंबई। साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना के संवर्धन में पिछले चार दशकों से कार्यरत अग्रणी संस्था 'वाग्धारा' और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समाचार नेटवर्क 'भारत एक्सप्रेस' के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को अंधेरी (वेस्ट) स्थित मुक्ति ऑडिटोरियम में "वाग्धारा सम्मान समारोह 2026" का ऐतिहासिक व भव्य आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस गरिमामयी समारोह के मुख्य अतिथि तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल थे, जिन्होंने देश भर से चुनकर आईं 14 अद्वितीय प्रतिभाओं को अपने कर-कमलों से सम्मानित किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में 'भारत एक्सप्रेस' के सीएमडी और एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय मंच पर उपस्थित रहे। राजभवन के उच्चतम प्रोटोकॉल के अनुसार तैयार किए गए मंच पर मुख्य अतिथि राज्यपाल महोदय के साथ विशिष्ट अतिथि उपेंद्र राय, वाग्धारा के अध्यक्ष डॉ. वागीश सारस्वत, कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमती दुर्गेश्वरी सिंह 'महक', सिद्धिविनायक ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी, चयन समिति के अध्यक्ष श्री जयंत देशमुख और प्रस्तावक समिति के अध्यक्ष अरविंद शर्मा राही उपस्थित रहे। कार्यक्रम का अत्यंत सफल और मंत्रमुग्ध कर देने वाला सूत्र संचालन अरविन्द शर्मा राही और रवि यादव द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने वाग्धारा एनजीओ के कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना की और कहा कि वाग्धारा संस्था पिछले 40 वर्षों से साहित्य, कला और समाज सेवा के क्षेत्र में जो अलख जगा रही है, वह वास्तव में अत्यंत सराहनीय और अनुकरणीय है। अपने आशीर्वचन और व्याख्यान में राज्यपाल महोदय ने वर्तमान परिदृश्य पर गहराई से प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के दौर में समाज सेवा, पत्रकारिता, सिनेमा, रंगमंच, विज्ञान और शिक्षा जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निस्वार्थ भाव से काम करने वाले सच्चे और अच्छे लोगों को ढूंढना बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्य हो गया है। ऐसे समय में वाग्धारा और भारत एक्सप्रेस ने देश के कोने-कोने से ऐसी वास्तविक प्रतिभाओं को खोज निकाला है, जिन्होंने समाज को आगे बढ़ाने में अपना जीवन लगा दिया। राज्यपाल महोदय ने ज़ोर देकर कहा कि ग्रामीण स्तर पर बदलाव लाने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं से लेकर राष्ट्रीय स्तर के शीर्ष दिग्गजों तक—भारत के अलग-अलग राज्यों और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाली इन अनमोल प्रतिभाओं को एक मंच पर लाकर सम्मानित करना स्वयं को गौरवान्वित करने जैसा है। समारोह के इस गौरवशाली 10वें संस्करण में कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी व उत्कृष्ट योगदान देने के लिए बस्तर के डॉ. राजाराम त्रिपाठी को सर्वोच्च 'वाग्धारा जीवन गौरव सम्मान 2026' से नवाजा गया। इसके साथ ही, भारतीय सिनेमा और अभिनय जगत के शीर्ष स्तंभ वरिष्ठ अभिनेता रज़ा मुराद और हिंदी व मराठी रंगमंच व फिल्मों के अत्यंत लोकप्रिय अभिनेता सचिन खेड़ेकर को 'वाग्धारा नवरत्न सम्मान' से विभूषित किया गया। ज्योतिष विज्ञान व संस्कृत के प्रकांड विद्वान और सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट (मुंबई) के कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी को इस वर्ष का 'डॉ. शंकरलाल सारस्वत स्मृति वाग्धारा सम्मान' प्रदान किया गया। वहीं पश्चिम रेलवे के सीपीआरओ श्री विनीत अभिषेक को 'नेत्रपाल सिंह स्मृति रेल सेवा सम्मान' और सुश्री नीता बाजपेई को 'संध्या पांडेय स्मृति वाग्धारा सम्मान' दिया गया। इनके अतिरिक्त, अपने-अपने क्षेत्रों में देश का नाम रोशन करने वाली विभूतियों में शिक्षा के लिए डॉ. सदानंद भोसले (पुणे), निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए श्री मृत्युंजय बोस (वसई, महाराष्ट्र), भाषा सेतु हेतु डॉ. नामदेव गौडा (बीजापुर, कर्नाटक), लोककला के लिए श्री शिवपूजन शुक्ल (गोंडा), निस्वार्थ समाज सेवा के लिए डॉ.आलोक सोनी (दतिया, मध्य प्रदेश), मानव कल्याण व न्याय के लिए श्रीमती स्वाति चौहान (पूर्व न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट मुंबई) तथा संगीत साधना के लिए डॉ. स्मृति त्रिपाठी (दिल्ली) को 'वाग्धारा नवरत्न सम्मान 2026' प्रदान किया गया। प्रेस नोट जारी करते हुए वाग्धारा के महासचिव एडवोकेट भार्गव तिवारी ने समारोह को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए मुंबई के समस्त प्रबुद्ध नागरिकों, बुद्धिजीवियों और मीडिया जगत का सहृदय आभार व्यक्त किया। समारोह का शुभारंभ सुप्रसिद्ध लोक गायक विनोद दुबे के गीतों से हुई।गायिका श्रद्धा मोहिते ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। सभी सम्मानमूर्तियों ने अपने वक्तव्य प्रस्तुत किए। अवधेश कुमार पांडेय,सुरेश तिवारी यश,नरेंद्र कोठेकर,मनीषा जोशी,नंदिता माज़ी शर्मा,बेला बारोट, विनीता टंडन यादव,देव फौजदार,मुस्तफ़ा यूसुफ़अली गोम,सुनील पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार विमल मिश्र, ओमप्रकाश तिवारी ,आरती राजदान और कमर हाजीपुरी समारोह में सक्रिय सहभागिता की।
संदीप तिवारी को मिली मीरा भायंदर शिवसेना उत्तर भारतीय जिला प्रमुख की कमान
भायंदर। मीरा भायंदर शहर में उत्तर भारतीय समाज का युवा चेहरा कहे जाने वाले संदीप तिवारी को अंततः शिवसेना ने एक बड़ी जिम्मेदारी दे दी। महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री तथा मीरा भायंदर संपर्क प्रमुख प्रताप सरनाईक ने उन्हें उत्तर भारतीय जिला प्रमुख की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी। संदीप तिवारी को दिए गए नियुक्ति पत्र में प्रताप सरनाईक ने आशा व्यक्त की है कि संदीप तिवारी पार्टी संगठन को मजबूत करने और उत्तर भारतीय समाज को पार्टी की विचारधारा से जोड़ने का समर्पित भावना के साथ कार्य करेंगे। इस अवसर पर विधानसभा चुनाव प्रमुख विक्रम प्रताप सिंह, जिला अध्यक्ष राजू भोईर, संजय मांजरेकर, ठाकुर नवीन सिंह,पूर्व नगरसेवक विजय राय, डॉ अजय तिवारी एडवोकेट कुंवर पांडे, अभिनव त्रिपाठी, विद्या शंकर चतुर्वेदी, गुड्डू तिवारी, राजेश यादव, पवन घरत, आस्तिक म्हात्रे, नितेश कुमार, प्रवीण सिंह, अजय सिंह, आकाश तिवारी, डॉ अखिलेश मिश्रा, दिनेश तिवारी, सपना त्रिपाठी, पूजा पांडे, डॉली सिंह, उषा मिश्रा समेत अनेक लोग उपस्थित रहे। संदीप तिवारी ने कहा कि वे दी गई जिम्मेदारी का निर्वहन पूरे मनोयोग और समर्पित भावना के साथ करेंगे। ज्ञातव्य हो कि संदीप तिवारी का परिवार राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है। उनके चाचा रविंद्र नाथ तिवारी भदोही से भाजपा के पूर्व विधायक है तो दूसरे चाचा अनिरुद्ध त्रिपाठी भदोही जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। छोटे भाई सचिन त्रिपाठी ब्लॉक प्रमुख तो बड़े भाई चंद्रभूषण त्रिपाठी जिला पंचायत सदस्य हैं। ऐसे में संदीप त्रिपाठी को उत्तर भारतीय जिला प्रमुख की  कमान देने से शिवसेना की ताकत बढ़नी तय मानी जा रही है।
एडीशनल डीसीपी जितेन्द्र कुमार दुबे को ‘डॉ. तारा सिंह साहित्य राष्ट्रीय सम्मान
वाराणसी। खाकी वर्दी के साथ कलम की स्याही का संगम जब होता है तो समाज को जितेन्द्र कुमार दुबे जैसा व्यक्तित्व मिलता है। वाराणसी के मार्कण्डेय महादेव, कैथी निवासी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं कवि जितेन्द्र कुमार दुबे को साहित्य और समाज सेवा में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था स्वर्गविभा परिवार ने "डॉ. तारा सिंह साहित्य राष्ट्रीय सम्मान-2026" से सम्मानित किया है।वर्तमान में एडीशनल डीसीपी, मध्य कमिश्नरेट, लखनऊ के पद पर कार्यरत जितेन्द्र कुमार दुबे ने प्रशासन और साहित्य दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एम.एससी. जियोफिजिक्स में स्वर्ण पदक हासिल किया। विज्ञान का छात्र होने के बावजूद साहित्य के प्रति उनका अनुराग शुरू से ही प्रखर रहा। स्वर्गविभा परिवार द्वारा जारी प्रशस्ति-पत्र में उनके साहित्यिक अवदान, सृजनात्मक प्रतिबद्धता और सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना के संवर्धन में किए गए कार्यों की विशेष सराहना की गई है। संस्था ने उनकी सतत साहित्य साधना और उत्कृष्ट रचनाधर्मिता को देखते हुए यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया।
जितेन्द्र कुमार दुबे की कविताओं में सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदनाएं और राष्ट्रप्रेम की झलक मिलती है। कानून व्यवस्था संभालने के साथ-साथ वे शब्दों के जरिए समाज को नई दिशा देने का काम भी कर रहे हैं। इस उपलब्धि पर उनकी पत्नी बीना दुबे समेत साहित्य, शिक्षा और प्रशासनिक जगत की कई हस्तियों ने बधाई दी है। लोगों ने कहा कि यह सम्मान न सिर्फ दुबे परिवार बल्कि पूरे वाराणसी जनपद और उत्तर प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। एक पुलिस अधिकारी का साहित्य के शीर्ष सम्मान तक पहुंचना साबित करता है कि प्रतिभा किसी वर्दी की मोहताज नहीं होती। जितेन्द्र कुमार दुबे का जीवन युवा पीढ़ी के लिए संदेश है कि अगर इरादे मजबूत हों तो प्रशासन और सृजन दोनों एक साथ साधे जा सकते हैं। वर्दी का अनुशासन और कलम की संवेदना जब मिलते हैं तो समाज को एक नई रोशनी मिलती है।
शिक्षण समिति की निर्विरोध सभापति बनी नगरसेविका स्नेहा शैलेश पांडे
भायंदर। मीरा भायंदर महानगरपालिका की लोकप्रिय भाजपा नगरसेविका स्नेहा शैलेश पांडे ,शिक्षण ,कला  क्रीड़ा और सांस्कृतिक समिति के सभापति के रूप में निर्विरोध निर्वाचित हुई हैं। चुनाव के बाद महापौर की रेस में शामिल स्नेहा पांडे को यह बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने से उनके प्रशंसकों में खुशी की लहर देखी जा सकती है। लगातार तीसरी बार नगरसेविका बनी श्रीमती पांडे उच्चशिक्षित  मूक बधिर दिव्यांगो की शिक्षिका रह चुकी होने के साथ-साथ अनुभवी नगरसेविका के रूप में जानी जाती हैं। ऐसे में वे दी गई जिम्मेदारी का निर्वहन पूरे मनोयोग और समर्पित भावना के साथ करेंगी।उनके पति आचार्य शैलेश पांडे भाजपा के तेज तर्रार प्रदेश प्रवक्ता के रूप में पहचाने जाते हैं, जो  विद्यार्थी  जीवन से  संघ  व   अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद  से भाजपा मे जनसेवा करते पिछले 34 वर्षो समाजसेवा और राजनिती मे सक्रिय है ऐसे में उन्हें अपने पति के कार्यों का पूरा लाभ मिलेगा। स्नेहा पांडे ने निर्विरोध सभापति बनाए जाने के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण, विधायक नरेंद्र मेहता जिला अध्यक्ष दिलीप जैन, महापौर डिंपल मेहता, उपमहापौर ध्रुव किशोर पाटिल, स्थाई समिति सभापति हसमुख गहलोत समेत सभी वरिष्ठ जनों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्हें यह पद दिए जाने पर राहुल एजुकेशन के चेयरमैन लल्लन तिवारी, महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह, पूर्व राज्य मंत्री अमरजीत मिश्रा, पद्मश्री  ब्रह्मदेव पंडित अशोक  महेश्वरी ,शैलेन्द्र शर्मा  परिवहन समिति के सभापति एडवोकेट राजकुमार मिश्रा, जिला महामंत्री बृजेश तिवारी,  भाजपा नेता सुरेश सिंह, वरिष्ठ नगरसेवक मदन उदित नारायण सिंह, नगरसेवक मनोज रामनारायण दुबे, नगरसेवक विवेक उपाध्याय, अमरनाथ तिवारी, जिला महामंत्री ज्ञानेन्द्र सिंग , संतोष दीक्षित  जिलाध्यक्ष उत्तर भारतीय मोर्चा, जटाशंकर पांडेय
साहबदिन पांडे.एड अरुण दुबे  विनोद तिवारी जेपी  सिंह,एडवोकेट अरुणा सत्यप्रकाश पांडे,संजय वोरा अनुपमा शुक्ला राजीव गोइन, गीता सिंह, विश्वाथ तिवारी, एड. आर जे मिश्रा, अभयराज पांडे, प्रोफेसर विजय नाथ मिश्रा, दीपक सावंत, शंकर वीरकर, महेश म्हात्रे, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, पत्रकार राजेश उपाध्याय समेत अनेक लोगों ने खुशी जाहिर करते हुए शुभकामनाएं दी हैं।
मूसलाधार बारिश के बीच बांद्रा में सीमा सिंह ने श्रमिकों को बांटी छतरी
मुंबई। मुंबई में हो रही मूसलाधार बारिश के बीच देश की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था मेघाश्रेय फाउंडेशन द्वारा बांद्रा पश्चिम के अलमेडा पार्क में बरसात से बचने के लिए सैकड़ों श्रमिकों को छतरी बांटकर एक पुनीत कार्य किया। बरसात में भीग रहे श्रमिक छतरी पाकर बेहद खुश नजर आए। संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सीमा सिंह ने अपने हाथों से उन्हें छतरी वितरित किया। इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि बरसात में वर्षा से बचने के लिए छतरी एक महत्वपूर्ण साधन है। बहुत सारे गरीब मजदूर पैसे की तंगी के चलते चाह कर भी छतरी नहीं खरीद पाए। उनके बच्चों को भीगते हुए विद्यालय जाना पड़ता है। यही सोच कर संस्था ने भारी बरसात के बीच छतरी बांटने का निर्णय लिया। उपस्थित लोगों ने संस्था के इस मानवीय कार्य की सराहना की। भारी बरसात के चलते जहां एक तरफ लोग अपने घरों या सुरक्षित स्थानों में  रह रहे हैं, वहीं सीमा सिंह ने बारिश की परवाह न करते हुए श्रमिकों के बीच पहुंचकर उन्हें छतरी वितरित की।
समाजसेवी रमापति बिंद ने ली बिंद समाज विकास संघ की सदस्यता

मुंबई । वरिष्ठ समाजसेवी रमापति पुत्र राम कृपाल बिंद ने 1 जुलाई को संघ के जनसंपर्क कार्यालय दादर मुंबई में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ शेषधर बिंद के कर कमलों द्वारा सदस्यता ग्रहण की।रमापति बिंद,ग्राम सभा हसिया,पोस्ट सरसरा, जिला जौनपुर उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। रमापति लगभग 50 साल के अनुभवी समाजसेवी हैं, अखिल भारतीय बिंद जातिय सुधार महासभा में भी कार्यरत हैं।

भारत के कोने-कोने में समाज के निचले पायदान से लेकर शिक्षित, गैर शिक्षित, राजनीतिक, सामाजिक, गतिविधियों में नजर रखते हुए समाज सेवा में अपना जीवन व्यतीत करते हैं।इनका कहना है कि इंसान अपनी रोजी-रोटी, पेट पालन तो करता रहता है, अगर अपना जीवन समाज के लिए न्योछावर नहीं किया तो मनुष्य रूप में जन्म लेना व्यर्थ है।

रमापति बिंद,खुश दिल,खुले मन,खुले विचारों के धनी समाज सेवी है।उन्होंने संघ को बताया कि बिंद समाज विकास संघ, बहु चर्चित एवं लोकप्रिय संगठन है।राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूरी कमेटी को धन्यवाद देते हुए कहा कि संघ ने हमें समाज सेवा करने का मौका दिया है, मैं तन मन धन से संघ के नीति और नियमों का पालन करते हुए तन मन धन से हमेशा तत्पर रहूंगा।
सर्व सहयोग सेवा ट्रस्ट ने किया उच्च न्यायालय अधिवक्ता का सम्मान

मुंबई। प्रयागराज उच्च न्यायालय अधिवक्ता,पूर्व प्रत्याशी मेम्बर आफ गवर्निंग काउंसिल एवं जिला उपाध्यक्ष लो. वा. समाजवादी पार्टी अनुज कुमार सेन का सम्मान मंगलवार 30 जून 2026 को अंगवस्त्र,गायत्री पट्टी,आइडियल जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा सम्मान पत्र व डायरी देकर सर्व सहयोग सेवा ट्रस्ट मुंबई ने सम्मानित किया। उक्त सम्मान में राष्ट्रीय कवि एवं पत्रकार विनय शर्मा दीप, वरिष्ठ समाजसेवी सेन हरिकेश शर्मा नंदवंशी,मनोज जगदीश शर्मा, युवा समाजसेवी गोपाल शर्मा, रचित वि.शर्मा,अधिवक्ता नितेश शर्मा, कुमारी शिखा प्रदीप शर्मा एवं रेडियोलॉजिस्ट रचना शर्मा उपस्थित रहे।अधिवक्ता अनुज कुमार सेन से पत्रकार विनय शर्मा दीप ने उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के विषय में पूछा तो संक्षेप में उन्होंने कहा प्रयागराज (पूर्ववर्ती इलाहाबाद) स्थित इलाहाबाद उच्च न्यायालय भारत के सबसे पुराने उच्च न्यायालयों में से एक है जिसकी स्थापना 17 मार्च 1866 को भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम 1861 के तहत की गई थी।यह न्यायालय मूल रूप से आगरा में स्थापित हुआ था जिसे 1869 में प्रयागराज स्थानांतरित किया गया।11 मार्च 1919 को इसे आधिकारिक तौर पर 'इलाहाबाद उच्च न्यायालय' का नाम दिया गया। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद इसका क्षेत्राधिकार पूरे उत्तर प्रदेश में विस्तारित हो गया। यहां एक विधि संग्रहालय एवं अभिलेखागार स्थापित किया था जो महारानी विक्टोरिया के मूल चार्टर 1866 जैसी ऐतिहासिक और विधिक वस्तुओं को संजोए हुए है।
हस्तनिर्मित उपहारों ने जीता विदेशी प्रतिनिधिमंडल का दिल
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 'महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा' के विज़न को साकार करते हुए एमपी टूरिज्म बोर्ड द्वारा 'महिलाओं के लिए सुरक्षित पर्यटन स्थल (STDW)' परियोजना चलाई जा रही है। इसी क्रम में टूरिज्म बोर्ड में एक विशेष सत्र में यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव सुश्री शोको इशिकावा ने परियोजना की प्रशिक्षित बालिकाओं से सीधा संवाद किया और उनके अनुभवों व उपलब्धियों को जाना। यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव सुश्री शोको इशिकावा ने प्रशिक्षित बालिकाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और कौशल की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल महिलाओं के लिए सुरक्षित और समावेशी पर्यटन के वैश्विक दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत है
एमपी टूरिज्म बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक श्री अभय अरविंद बेडेकर ने कहा कि हमारा लक्ष्य मध्यप्रदेश को महिला पर्यटकों के लिए देश का सबसे सुरक्षित और संवेदनशील पर्यटन गंतव्य बनाना है। प्रदेश में सुरक्षा, कौशल विकास और सामुदायिक सहभागिता के समन्वित प्रयासों से महिलाओं के लिए नए अवसर सृजित हो रहे हैं तथा पर्यटन क्षेत्र अधिक समावेशी बन रहा है।
STDW प्रोजेक्ट पर हुए संवाद के दौरान परियोजना से जुड़ी महिलाओं एवं बालिकाओं ने अपने कौशल का परिचय देते हुए अतिथियों को स्वयं निर्मित हस्तशिल्प भेंट किए। इनमें हस्तनिर्मित स्मृति चिन्ह, फैब्रिक ज्वेलरी, फेंगशुई कलाकृतियां शामिल हैं। इन उत्पादों ने न केवल स्थानीय कला और रचनात्मकता को प्रदर्शित किया, बल्कि यह भी दर्शाया कि परियोजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी रूप से कार्य कर रही है। बैठक के दौरान यूएन विमेन के प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना के तहत विकसित कौशल प्रशिक्षण मॉडल, सामुदायिक सहभागिता और महिलाओं के आत्मविश्वास में आए सकारात्मक बदलावों की सराहना करते हुए इसे एक प्रभावी और प्रेरणादायक पहल बताया। इस अवसर पर यूएन विमेन इंडिया की कंट्री डिप्टी रिप्रेजेंटेटिव सुश्री कांता सिंह और स्टेट रिप्रेजेंटेटिव सुश्री जोयात्री राय भी उपस्थित रहीं।
स्वयंसेवकत्व की अखंड यात्रा, ‘विठ्ठल’ से समाजमन के ‘विठ्ठलराव’ तक
– प्रदीप बालकृष्ण भोईर, संगठन एवं प्रबंधन शास्त्र के अध्येता

कुछ व्यक्तित्व पदों से बड़े होते हैं और कुछ अपने कार्य से। कुछ लोगों की पहचान उनके नाम के साथ जुड़े दायित्वों से होती है, तो कुछ ऐसे भी होते हैं जिनकी सबसे बड़ी पहचान उनका स्वयंसेवकत्व बन जाती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कोकण प्रांत कार्यवाह, शिक्षा क्षेत्र के अध्ययनशील नेतृत्व, समाजजीवन के कुशल समन्वयक और हजारों कार्यकर्ताओं के आत्मीय मार्गदर्शक श्री. विठ्ठल दुधाप्पा कांबले ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिनका जीवन सेवा, समर्पण, संगठन और संस्कारों की सतत साधना का पर्याय बन गया है।
उनके जन्मदिवस के अवसर पर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का स्मरण करते हुए केवल एक व्यक्ति का परिचय नहीं मिलता, बल्कि संघ संस्कारों से निर्मित उस स्वयंसेवक की यात्रा सामने आती है, जिसने अपने जीवन को राष्ट्रकार्य के लिए समर्पित कर दिया।
एक कार्यक्रम में मंच संचालक ने उनके द्वारा निभाई जा रही अनेक जिम्मेदारियों का उल्लेख किया। भाषण के लिए खड़े होते ही उन्होंने अपनी सहज और विनोदी शैली में कहा, “आपने मेरी विभिन्न जिम्मेदारियों का परिचय दिया, लेकिन मेरी वास्तविक पहचान बताना भूल गए। मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक हूँ और यही मेरी सबसे बड़ी पहचान है।” यह वाक्य उनके व्यक्तित्व का सार है। पद से अधिक स्वयंसेवकत्व, प्रसिद्धि से अधिक कार्य, अधिकार से अधिक दायित्व और व्यक्तिपूजा से अधिक संगठन इन्हीं मूल्यों पर उनका जीवन आधारित है।
व्यवसाय से शिक्षक और चेंबूर एज्युकेशन सोसायटी के विद्यार्थियों के प्रिय प्रधानाचार्य के रूप में उन्होंने अनेक पीढ़ियों का निर्माण किया। उनके लिए शिक्षा केवल ज्ञानार्जन का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण की आधारशिला है। विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के बीच संवाद और विश्वास का वातावरण निर्मित करते हुए उन्होंने शिक्षा को संस्कारों से जोड़ने का निरंतर प्रयास किया। इसी कारण वे केवल एक सफल प्रधानाचार्य नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायी शिक्षक और संस्कारवान शिक्षाविद् के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
समाजजीवन के विविध क्षेत्रों में सक्रिय रहते हुए उन्होंने असंख्य कार्यकर्ताओं को जोड़ा। समरसता, संवाद और सामूहिकता उनकी कार्यशैली की विशेष पहचान है। “संगच्छध्वं संवदध्वं” के वैदिक संदेश को उन्होंने व्यवहार में उतारा। आज समाज के सभी वर्गों के लोग उन्हें आत्मीयता से “विठ्ठलराव” कहकर संबोधित करते हैं। यह संबोधन किसी पद की देन नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और अपनत्व का प्रतीक है।
चेंबूर एज्युकेशन सोसायटी का मैदान और सभागार पिछले कई दशकों से अनेक सामाजिक, शैक्षणिक और संगठनात्मक गतिविधियों का केंद्र रहा है। मुंबई के निजी अनुदानित विद्यालयों के कर्मचारियों को वेतन पथक दिलाने के लिए हुए ऐतिहासिक संघर्ष की शुरुआत भी इसी परिसर से हुई। अनेक बैठकों, योजनाओं और सामूहिक प्रयासों के फलस्वरूप यह संघर्ष सफल हुआ। इस प्रकार यह परिसर संघर्ष, समर्पण और सफलता का साक्षी बन गया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कोकण प्रांत कार्यवाह के रूप में उन्होंने व्यक्तिनिर्माण, परिवार प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और संगठन विस्तार को विशेष महत्व दिया। उनके लिए शाखा केवल एक दैनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का विश्वविद्यालय है। विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं में कार्यरत कार्यकर्ताओं को दायित्व सौंपने के साथ-साथ वे गुणवत्ता, व्यवस्थापन, संस्कार और समाजाभिमुखता के प्रति भी निरंतर सजग रहते हैं।
मुंबई महानगरपालिका क्षेत्र की निजी अनुदानित शालाओं के विभिन्न प्रश्नों के समाधान के लिए उन्होंने सदैव समन्वयकारी भूमिका निभाई। विभिन्न विचारधाराओं के संगठनों को एक सूत्र में पिरोकर सामूहिक शक्ति का निर्माण करना उनकी विशिष्ट क्षमता रही है। संघ प्रार्थना की पंक्ति “विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिः” में उनका अटूट विश्वास है। उन्होंने अपने कार्य से यह सिद्ध किया है कि संगठित शक्ति के सामने असंभव प्रतीत होने वाली चुनौतियाँ भी परास्त हो जाती हैं। कोविड महामारी के कठिन दौर में जब अनेक शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी और कार्यकर्ता संकट में थे, तब उन्होंने केवल औपचारिक संवेदना व्यक्त नहीं की, बल्कि चिकित्सा सहायता, मानसिक संबल और आत्मीय सहयोग प्रदान कर यह विश्वास जगाया कि संकट की घड़ी में कोई कार्यकर्ता अकेला नहीं है। “सेवा ही साधना है” इस भाव को उन्होंने अपने जीवन में साकार किया।
मुंबई प्राथमिक विभाग के अनुदानित विद्यालयों के कर्मचारियों के हिंदू कॉलोनी स्थित महामोर्चे के दौरान परिस्थितियाँ तनावपूर्ण हो गई थीं। ऐसे समय में संयम, अनुशासन और विश्वास के बल पर उन्होंने पूरे आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखा। संघर्ष के क्षणों में भी संगठनात्मक मर्यादा और अनुशासन को बनाए रखने का उनका यह प्रयास प्रेरणादायी है।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति उनकी विशेष संवेदनशीलता है। राष्ट्रभक्ति, सेवाभाव, सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण संरक्षण और नेतृत्व क्षमता जैसे गुण विद्यार्थियों में विकसित हों, इसके लिए वे निरंतर प्रयासरत रहते हैं। खेल, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में स्वयं सहभागी होकर वे नई पीढ़ी को प्रेरणा प्रदान करते हैं। उनके कार्य से यह अनुभव होता है कि शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का शिल्पकार होता है।
मेरे व्यक्तिगत जीवन में उनका स्थान एक बड़े भाई जैसा है। विभिन्न संगठनों के समन्वय की जिम्मेदारियाँ निभाते समय अनेक कठिन परिस्थितियाँ सामने आईं। उन दिनों प्रायः उनका फोन आता था “प्रदीप, कैसे हो? कोई परेशानी तो नहीं?” अत्यंत व्यस्त जीवन के बावजूद हर परिस्थिति में साथ खड़े रहने वाला यह मित्र कब बड़े भाई का स्वरूप बन गया, इसका एहसास ही नहीं हुआ।
आज अनेक सेवानिवृत्त शिक्षिकाएँ, शिक्षकेतर कर्मचारी और सहयोगी मुस्कराते हुए पूछते हैं “भोईर, तुम्हारा यह विठ्ठल हमें कब पावेगा?” इस सहज प्रश्न में उनके प्रति लोगों के मन में बसे विश्वास, स्नेह और अपनत्व की झलक दिखाई देती है। इतना व्यापक कार्य करने के बाद भी पुरस्कार, प्रसिद्धि और पदों के प्रति उनमें कोई आकर्षण नहीं है। उनके लिए संघकार्य ही साधना है। इसलिए हजारों शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी और कार्यकर्ता विश्वासपूर्वक कहते हैं “कांबले सर हैं, तो समाधान अवश्य निकलेगा।” किंतु वे स्वयं सदैव इस बात पर बल देते हैं कि परिवर्तन किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि संगठित शक्ति से आता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गीत की पंक्तियाँ मानो उनके जीवन का परिचय देती हैं
“तन समर्पित, मन समर्पित, और यह जीवन समर्पित,
चाहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूँ।”
आज मेरा मित्र “विठ्ठल” समाजमन का “विठ्ठलराव” बन चुका है। यह सम्मान किसी पद, प्रतिष्ठा अथवा प्रसिद्धि का परिणाम नहीं, बल्कि स्वयंसेवकत्व, सेवा, समरसता, संगठन, संस्कार और आत्मीयता की लंबी साधना का प्रतिफल है।
कबीर ने कहा है
“बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥”
किन्तु विठ्ठलराव का जीवन उस वटवृक्ष की भाँति है, जिसकी छाया में असंख्य कार्यकर्ताओं को विश्वास, मार्गदर्शन और आत्मीयता का संबल प्राप्त होता है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि उनके माध्यम से समाजजीवन में सेवा, राष्ट्रनिष्ठा और संगठन का यह दीपक निरंतर प्रज्वलित रहता रहे और आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देता रहे।