मूल शिकायत में नाम नहीं, फिर भी पत्रकार को बना दिया आरोपी! सीओ सहित पुलिस पर प्रतिशोध में मुकदमा दर्ज कराने का आरोप
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रितेश मिश्रा
शाहाबाद (हरदोई) शाहाबाद में कथित अड्डा वसूली प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है। मामले में पत्रकार पप्पू दीक्षित ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रकाशित समाचारों से नाराज पुलिस अधिकारियों ने सुनियोजित साजिश के तहत उन्हें फर्जी मुकदमे में नामजद करा दिया।
बताया जा रहा है कि वाहन चालक आलोक दीक्षित ने पुलिस अधीक्षक को दिए अपने मूल प्रार्थना पत्र एवं आईजीआरएस शिकायत में अल्हापुर तिराहे पर कथित रूप से ₹50 की अवैध वसूली मांगने तथा वाहन सीज कराने के संबंध में शिकायत की थी। शिकायत में सतीश राठौर सहित अन्य लोगों पर आरोप लगाए गए थे, लेकिन कहीं भी पत्रकार पप्पू दीक्षित का नाम दर्ज नहीं था।
पप्पू दीक्षित का आरोप है कि बाद में तैयार कराई गई नई तहरीर में उनका नाम जोड़ दिया गया और उसी के आधार पर मुकदमा अपराध संख्या 395/26 दर्ज करा दिया गया। उनका कहना है कि न तो उनका कथित वसूली से कोई संबंध है और न ही नामजद आरोपियों से कोई लेन-देन या विवाद है।
मामले को और गंभीर बनाते हुए दावा किया गया है कि वादी आलोक दीक्षित ने जानकारी होते ही शपथपत्र देकर कहा है कि उसने अपनी शिकायत में पप्पू दीक्षित का नाम नहीं लिखवाया था वाद जब उसे कोतवाली बुलाया गया तो उसके कम पढ़ें लिखे होने का फायदा उठाकर पप्पू दीक्षित का नाम बढ़ा दिया गया, वह पप्पू दीक्षित के विरुद्ध कोई भी कानूनी कार्यवाही कराना नहीँ चाहता है क्योंकि पप्पू दीक्षित का पूरे प्रकरण और अवैध वसूली से कोई वास्ता व सरोकार नहीँ है। पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मुकदमे में पप्पू दीक्षित का नाम शामिल किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
पत्रकार का आरोप है कि शाहाबाद में तैनात सहायक पुलिस अधीक्षक (सीओ) आलोक राज नारायण ने पूर्व में प्रकाशित समाचारों से नाराज होकर प्रतिशोधात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें काफी तंग किया और उनके द्वारा आयोजित कवि सम्मलेन में तत्कालीन कोतवाली को मय हमराही भेजकर उनके कवि सम्मेलन में बाधा उत्पन्न कर उन्हें काव्य पाठ करने से रोंक दिया, इतना ही नहीँ उक्त आईपीएस अफसर ने तत्कालीन कोतवाल समेत मय हमराही पुलिस बल के साथ उनके घर पर दबिश दी थी और उनके जर्मन सैफर्ड डॉग को छत पर चढ़कर नीचे फेंक दिया था, जिससे वह अपाहिज हालत में बरेली तक इलाज कराने के बाबजूद तड़प -तड़पकर मर गया और अब नई तहरीर में नाम बढ़वाकर मुकदमा दर्ज कराया है। उन्होंने इसे कानून प्रक्रिया का दुरुपयोग, दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई तथा निष्पक्ष न्याय व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न बताया है।
मामले में निष्पक्ष जांच, मूल शिकायत, आईजीआरएस अभिलेख, कथित नई तहरीर तथा वादी के शपथपत्र का मिलान कराए जाने की मांग उठी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल एक पत्रकार को फंसाने का अत्यंत षड़यंत्रकारी मामला होगा, बल्कि पुलिस कार्यप्रणाली और कानून के दुरुपयोग से जुड़ा गंभीर प्रकरण भी माना जाएगा।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक पुलिस अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई, इतना ही नहीं सीओ शाहाबाद के सीयुजी नम्बर पर कॉल की गई तो नम्बर स्वीच ऑफ बोलता रहा, और एसएसओ शाहाबाद का सीयुजी नम्बर कई बार मिलाने पर कवरेज क्षेत्र से बाहर बोलता रहा।
इस सम्बन्ध में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के संरक्षक वयोवृद्ध वरिष्ठ पत्रकार दिनेश प्रसाद मिश्रा ने कहा कि यदि पप्पू दीक्षित के विरुद्ध दर्ज कराया गया फर्जी मुकदमा तत्काल खारिज नहीँ किया गया तो जल्द ही वह आमरण अनशन करेंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन सरकार की ही होगी।



रितेश मिश्रा
रितेश मिश्रा
विनोद गुप्ता
रितेश मिश्रा
पीयूष तिवारी
रितेश मिश्रा
Jun 15 2026, 09:59
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