अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद एक्शन में शुभेन्दु सरकार, 5 आरोपी गिरफ्तार

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तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ कथित दुर्व्यवहार और हमले के मामले में पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। अभिषेक बनर्जी शनिवार को दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में चुनाव बाद हुई हिंसा के पीड़ित परिवारों से मिलने गए थे। इसी दौरान कथित तौर पर एक भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया और राज्य की राजनीति गरमा गई।

पुलिस ने पांच लोगों को किया गिरफ्तार

अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद बंगाल पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। घटना के बारे में जानकारी देते हुए पुलिस ने कहा कि वीडियो में दिख रहे व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया है। जिनमें से दो लोगों की पहचान तपन मैती और आकाश के रूप में हुई है। फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है और पकड़े गए पांचों लोगों से पूछताछ की जा रही है।

ममता ने हमले के लिए भाजपा को ठहराया जिम्मेदार

टीएमसी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस हमले के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी को चिकित्सा सुविधा मिलने से रोकने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने कहा, सत्ता में बैठे लोग अस्पतालों और संबंधित अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं ताकि अभिषेक बनर्जी को भर्ती न किया जाए, क्योंकि वे नहीं चाहते कि उनका इलाज हो। उन्होंने पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।

हमले के विरोध में टीएमसी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे

उधर, अभिषेक बनर्जी के कथित हमले के विरोध में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं। हुगली जिले के चुंचुड़ा में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। पूर्व तृणमूल विधायक असित मजूमदार ने पिपुलपाती मोड़ पर सड़क जाम कर धरना दिया। प्रदर्शन के कारण कुछ देर के लिए ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया। असित मजूमदार ने कहा कि अत्याचार का सामना कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं के समर्थन में जाने पर अभिषेक बनर्जी को कथित रूप से अपमानित किया गया।उन्होंने आरोप लगाया कि उनके ऊपर अंडे और जूते फेंके गए, जिसके विरोध में तृणमूल कांग्रेस सड़क पर उतरी है।

लंबित फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सभी हाईकोर्ट को 3 महीने में निर्णय सुनाने का निर्देश

* अनुच्छेद 142 की विशेष शक्तियों का इस्तेमाल; कहा— समय पर न्याय, न्यायपालिका की विश्वसनीयता के लिए जरूरी


नई दिल्ली। लंबित न्यायिक फैसलों में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए देश के सभी हाईकोर्ट को लंबित मामलों में अधिकतम तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि न्यायिक फैसलों में अनावश्यक देरी न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी फैसले के मुख्य हिस्से (ऑपरेटिव पार्ट) को सुनाए जाने की तारीख ही उस निर्णय की आधिकारिक तारीख मानी जाएगी।

शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट देश की प्रमुख न्यायिक संस्थाएं हैं, जहां हजारों लोग न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में समयबद्ध तरीके से निर्णय देना न्यायपालिका की पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता के भरोसे के लिए अत्यंत आवश्यक है।

* क्या है अनुच्छेद 142 ?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को विशेष अधिकार प्रदान करता है, जिसके तहत वह किसी भी मामले में “पूर्ण न्याय” (Complete Justice) सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश जारी कर सकता है, भले ही उसके लिए सामान्य कानून में स्पष्ट प्रावधान न हो। इस शक्ति का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्ष और प्रभावी न्याय सुनिश्चित करना है। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने और लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कर्नाटक में सियासी हलचल तेज, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे की चर्चा
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपना इस्तीफा राजभवन भेज दिया है। बताया जा रहा है कि राज्यपाल के बेंगलुरु लौटने के बाद आगे की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व में नई व्यवस्था को लेकर गतिविधियां तेज हो सकती हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी तक सरकार या राजभवन की ओर से कोई औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है। प्रदेश की राजनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं और अगले कुछ घंटों में तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।
आलाकमान ने जो कहा वो किया’, पद छोड़ने के बाद बोले सिद्धारमैया

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को अपने पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। इस दौरान बेंगलुरु में मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है और उन्हें पूरा भरोसा है कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यपाल इसे जल्द ही स्वीकार कर लेंगे।

हाईकमान ने इस्तीफा देने को कहा मैंने दे दिया- सिद्धारमैया

सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि अभी मैं राज्यपाल भवन गया था। मैंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राज्यपाल अभी शहर में नहीं है। हमें बताया कि वो बेंगलुरु में नहीं है, इसलिए मेरा इस्तीफे को उनके सचिव को हैंडओवर कर दिया गया है। मैं कई बार ये बात बोल चुका हूं जब भी मुझे हाईकमान इस्तीफा देने के लिए कहेंगे तो मैं उनकी बात मानूंगा। कल हाईकमान ने मुझे इस्तीफा देने के लिए कहा था। इसलिए मैंने आज इस्तीफा दे दिया है।

हमारे पास 135 विधायक- सिद्धारमैया

उन्होंने आगे कहा कि राज्यपाल जब बेंगलुरु लौटेंगे तो मेरा इस्तीफा को मंजूर करेंगे। हमारी पार्टी के 135 विधायक हैं। इसके साथ दो अन्य विधायक ने हमें समर्थन दिया है। ऐसे में हमारी पार्टी के पास पूर्ण बहुमत है। हमारे सभी विधायक एकजुट हैं। मुझे कर्नाटक के 7 करोड़ लोगों की सेवा करने का दो बार मौका मिला है।

ब्रेकफास्ट मीटिंग में किया इस्तीफा का ऐलान

इससे पहले सिद्धारमैया ने अपनी कैबिनेट के सभी मंत्रियों को ब्रेकफास्ट मीटिंग पर बुलाया थी। इस दौरान उन्होंने अपने कैबिनेट सहयोगियों को धन्यवाद दिया। तीन साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया। सीएम सिद्धारमैया ने इसी मीटिंग में इस्तीफा देने का ऐलान किया था।

टीएमसी में बढ़ा आपसी कलह, काकोली घोष ने अपनी ही पार्टी के नेता के खिलाफ स्पीकर को लिखा पत्र

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पश्चिम बंगाल में सत्ता के बदलते ही तृणमूल कांग्रेस का आपसी कलह खुल कर सामने आ गया है। कभी ममता की बेहद करीबी रहीं टीएमसी सांसद काकोली घोष ने बागी रूख अख्तियार कर लिया है। काकोली घोष ने अपनी पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। घोष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में उन्होंने कल्याण बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

दुर्व्यवहार और अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप

पत्र में काकोली घोष ने लोकसभा स्पीकर से अपनी पार्टी के चीफ व्हिप कल्याण बनर्जी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की अनुमति मांगी है। पत्र में काकोली घोष दस्तीदार ने आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी ने लोकसभा में उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उनके लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। काकोली घोष ने दावा किया कि कल्याण बनर्जी का उनके खिलाफ ही नहीं बल्कि अन्य महिला सांसदों के प्रति भी व्यवहार अनुचित और अपमानजनक रहा है।

स्पीकर से हस्तक्षेप करने की अपील

काकोली घोष ने अपने पत्र में लोकसभा स्पीकर से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है और औपचारिक शिकायत दर्ज करने की अनुमति देने की मांग की है। साथ ही काकोली घोष ने उचित कार्रवाई के बाद सजा सुनिश्चित करने की भी मांग की है।

पार्टी के सभी पदों से दे चुकीं हैं इस्तीफा

टीएमसी नेता काकोली घोष दस्तीदार ने बुधवार को ही पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दिया हैं। इसके एक दिन बाद ही उनका लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता की शिकायत की, जो दिखा रहा है कि टीएमसी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है। काकोली घोष दस्तीदार को हाल ही में टीएमसी के लोकसभा सचेतक पद से हटाया गया है। काकोली की जगह कल्याण बनर्जी को ही लोकसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है।

कल्याण बनर्जी की प्रतिक्रिया आई सामने

काकोली घोष के आरोपों पर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है कि सदन में कोई घटना होने के बाद, स्पीकर को तुरंत सूचित किया जाना चाहिए। यही नियम है। किसी भी घटना की जानकारी बिना किसी देरी के स्पीकर को दी जानी चाहिए। जहां तक लगाए जा रहे आरोपों की बात है, तो सवाल यह है कि किसने क्या और कब कहा। असल समस्या उनकी नीयत में है। ऐसा लगता है कि वे किसी मकसद से काम कर रहे हैं, जिससे मेरे मन में संदेह पैदा होता है।

डीके शिवकुमार होंगे कर्नाटक के अगले सीएम, सिद्धारमैया ने खुद किया ऐलान, आज देंगे इस्तीफा

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कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस सरकार में आज बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सीएम सिद्धारमैया आज सीएम पद से इस्तीफा देंगे और उनकी जगह डीके शिवकुमार राज्य के अगले सीएम बनाए जाएंगे।विधायकों की बैठक में सिद्धारमैया ने उनके नाम का ऐलान किया। उन्होंने सभी विधायकों से डीके का साथ देने की अपील की।

आज शाम 3 बजे इस्तीफा देंगे सिद्धारमैया

कर्नाटक सरकार के मंत्री एच के पाटिल ने बताया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज शाम 3 बजे इस्तीफा दे देंगे। सिद्धारमैया ने ही कहा है कि डीके शिवकुमार नए सीएम होंगे। एच के पाटिल ने बताया कि नाश्ते के दौरान हुई बैठक में सिद्धारमैया ने ये बातें कहीं।

इस्तीफे से पहले मंत्रियों का जताया आभार

कर्नाटक के मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को नाश्ते पर बुलाया और इस्तीफा देने से पहले वह सभी मंत्रियों को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद देना चाहते थे। मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि सिद्धारमैया को दिल्ली में किसी पद की पेशकश की गई है या नहीं। यह हाई कमान पर निर्भर करता है।

कर्नाटक कांग्रेस के लंबे समय खींचतान

कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर खींचतान कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार गुट के बीच सत्ता की खींचतान चर्चा में रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में चली कई दौर की मैराथन बैठकों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर पद छोड़ने का दबाव बनाया, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने पर सहमति जता दी। बताया जा रहा है कि सिद्दारमैया ने शुरुआत में दो सप्ताह का समय मांगा था, ताकि वह जातीय जनगणना रिपोर्ट को कैबिनेट में पेश कर सकें, लेकिन पार्टी नेतृत्व तत्काल नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में था। कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें याद दिलाया कि 2023 में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के साथ ढाई-ढाई साल के सत्ता साझेदारी फार्मूले पर सहमति बनी थी और सिद्दारमैया पहले ही तय अवधि से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज, ब्रेकफास्‍ट मीटिंग में डीके शिवकुमार ने सिद्दारमैया के छुए पैर

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कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से चल रहे सत्ता हस्तांतरण के विवाद पर आखिरकार कांग्रेस हाईकमान ने निर्णायक कदम उठा लिया है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में चली कई दौर की मैराथन बैठकों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर पद छोड़ने का दबाव बनाया, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने पर सहमति जता दी।

डीके ने पैर छूकर लिया सिद्धारमैया से आशीर्वाद

राज्य में जारी सियासी हलचल के बीच सिद्धारमैया ने आज ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई। इस मीटिंग में पहुंचे डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल नजर आया। सत्ता हस्तांतरण से पहले डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छूकर आशीर्वाद लिए। सिद्धा ने भी उन्हें गले लगाया।

आज इस्तीफा दे सकते हैं सिद्धारमैया

सीएम सिद्धारमैया आज सीएम पद से इस्तीफा दे सकते हैं और उनकी जगह डीके शिवकुमार को अगला सीएम बनाया जा सकता है। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि सीएम सिद्धारमैया आज राज्यपाल से मुलाकात करेंगे और इस मुलाकात में वे अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप सकते हैं।

राज्यपाल थावरचंद गहलोत बंगलूरू में मौजूद नहीं

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के संभावित इस्तीफे को लेकर बढ़ते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच राज्यपाल थावरचंद गहलोत के बंगलूरू छोड़ने से राज्य की राजनीति में अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि राज्यपाल की गैरमौजूदगी इस्तीफा प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेगी और सिद्धारमैया गुरुवार दोपहर 3 बजे तय कार्यक्रम के अनुसार अपना इस्तीफा राज्यपाल कार्यालय को सौंप सकते हैं। कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि सिद्धारमैया को निर्देश दिया गया है कि राज्यपाल के बंगलूरू में नहीं होने के बावजूद वे अपना इस्तीफा राज्यपाल कार्यालय में जमा करें। पार्टी नेताओं का कहना है कि तय कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं होगा और सभी घटनाक्रम पहले से निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ेंगे।

कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें याद दिलाया कि 2023 में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के साथ ढाई-ढाई साल के सत्ता साझेदारी फार्मूले पर सहमति बनी थी और सिद्दारमैया पहले ही तय अवधि से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं. ‘डेक्‍कन हेराल्‍ड’ की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने बंद कमरे में हुई बैठकों के दौरान सिद्दारमैया से कहा कि पार्टी की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पुराने वादे का सम्मान जरूरी है. इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में बताए जा रहे हैं. राहुल गांधी ने दोनों नेताओं (सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार) से संयुक्त और अलग-अलग बैठकें कर पार्टी एकता बनाए रखने की अपील की

केरल में ईडी की टीम पर हमला, पूर्व सीएम पी विजयन के समर्थकों ने अफसरों को घेरा, गाड़ियों में तोड़फोड़

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केरल में राजनीतिक भूचाल आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम बुधवार सुबह-सुबह केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के ठिकानों पर धावा बोला। तिरुवनंतपुरम से लेकर कन्नूर तक हुई इस अचानक छापेमारी से राज्य में हड़कंप मच गया। इसी क्रम में कन्नूर में छापेमारी का विरोध करते हुए विजयन के समर्थकों ने जमकर बवाल किया। विजयन के समर्थकों ने ईडी अधिकारियों को घेर लिया। और जांच अधिकारियों की गाड़ियों पर जमकर पथराव किया।

ईडी अधिकारियों की गाड़ी पर हमला

तिरुवनंतपुरम में पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा नेता प्रतिपक्ष पिनाराई विजयन के आवास के बाहर उस वक्त भारी हंगामा मच गया, जब सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं ने ईडी अधिकारियों की गाड़ी पर हमला कर दिया। ये कार्यकर्ता केंद्रीय एजेंसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। सैकड़ों की संख्या में आए समर्थकों ने ईडी की गाड़ियों पर पत्थर फेंके हैं। सीपीएम के समर्थकों ने ईडी की टीम की गाड़ियों को तोड़ने की कोशिश की।

ईडी के तीन वाहनों को नुकसान पहुंचाया

जानकारी के मुताबिक ईडी अधिकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवास पर छापा पूरा कर लिया था और जब वे वहां से निकल रहे थे, तो पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके वाहनों को रोक दिया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। आरोप है कि काफिला निकलने से पहले सीपीआई (एम) के कार्यकर्ताओं ने ईडी के तीन वाहनों को नुकसान पहुंचाया और उन पर पत्थर फेंके। इस बीच जैसे-तैसे ईडी के अधिकारी केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीआई (एम) नेता पिनाराई विजयन के आवास से रवाना हुए।

विजयन की बेटी से जुड़ा है मामला

ईडी की इस बड़ी कार्रवाई के केंद्र में पूर्व सीएम पिनाराई विजयन की बेटी टी. वीणा हैं। यह पूरा विवाद टी. वीणा की पूर्व आईटी कंपनी ‘एक्सालॉजिक’ और एक निजी खनन कंपनी कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड से जुड़ा है। आरोप है कि 2017 से 2021 के बीच, वीणा की कंपनी को बिना कोई वास्तविक आईटी सर्विस दिए ही, सीएमआरएल की तरफ से हर महीने भारी-भरकम ‘रिटेनर फीस’ का भुगतान किया गया। ईडी इसी कथित ‘पॉलिटिकल पे-ऑफ’ और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से मामले की गहराई से जांच कर रही है।

प्यासे को एक गिलास पानी जरूर दें...प्रचंड गर्मी में पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील

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पूरे देश में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। खासकर पूरा उत्तर भारत चिलचिलाती धूप और लू के थेपेड़ों से परेशान है। कई इलाकों में पारा 47 के आसपास पहुंच गया है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से सावधानी बरतने और खुद को हाइड्रेटेड रखने की अपील की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के अदिकांश हिस्सों में तापमान को देखते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से देशवासियों तक अपनी बात पहुंचाई है और इसकी चपेट में आने से बचने के लिए सभी सावधानी बरतने का अनुरोध किया है। पीएम मोदी ने एक के बाद एक कई एक्स पोस्ट किए हैं।

लोगों को हाइड्रेटेड रहने की सलाह

पीएम मोदी ने कहा, ‘देश के अलग-अलग हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ ही दैनिक जीवन में गर्मी से होने वाली कई कठिनाइयां भी बढ़ रही हैं। मैं सभी देशवासियों से आग्रह करता हूं कि जितनी अधिक सावधानी बरत सकें, अवश्य बरतें। कृपया स्वयं को हाइड्रेटेड रखें, घर से बाहर निकलते समय पानी साथ रखें।

प्यासे को पानी पिलाने की अपील

ऐसे मौसम में आपकी संवेदनशीलता भी बहुत बड़ा सहारा बन जाती है। यदि संभव हो, तो किसी प्यासे व्यक्ति को एक गिलास पानी अवश्य दें। मैं ऐसे लोगों की सराहना भी करूंगा जो अपने घरों के और दुकानों के बाहर मटके में जल रखते हैं ताकि कोई भी उनसे पानी पी सके।

सतर्कता बरतने की सलाह

प्रधानमंत्री ने आगे लिखा है, अत्यधिक गर्मी से होने वाली परेशानी, जैसे चक्कर आना, मतली या ज्यादा थकान लगे तो उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। यदि आपके आसपास किसी व्यक्ति को अचानक बेहोशी जैसा लगे, कमजोरी महसूस करे या फिर अस्वस्थ दिखाई दे, तो उसे तुरंत किसी ठंडी और छायादार जगह पर ले जाएं। उसे पानी, ORS या अन्य तरल पदार्थ दें, जिससे शरीर को राहत मिल सके। बच्चे, बुज़ुर्ग और धूप में काम करने वाले लोग इस भीषण गर्मी में सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। समय रहते ध्यान न देने पर यह स्थिति हीटस्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या का रूप ले सकती है। ऐसे समय में आपकी सतर्कता और देखभाल किसी का जीवन बचा सकती है।

'हीट वेव' की चेतावनी

बता दें कि इन दिनों नौतपा चल रहा है। 25 मई से 2 जून तक का समय भीषम गर्म रहेगा। मौसम विभाग ने साफ तौर पर 'हीट वेव' यानी लू चलने की चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही दोपहर और शाम के समय तेज सतही हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, 27 मई को हवा में नमी का स्तर अधिकतम 40 प्रतिशत और न्यूनतम 25 प्रतिशत रहने का अनुमान है। विभाग ने दोपहर और शाम दोनों समय तेज गर्म हवाओं के साथ लू चलने की चेतावनी दी है। ऐसे में लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और धूप से बचाव करने की सलाह दी गई है।

SIR पर लगी मुहर, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- चुनाव आयोग का ये अधिकार है

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सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसआईआर कराना चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि मुक्त और निष्पक्ष चुनाव के लिए एसआईआर जरूरी है।

SIR चुनाव आयोग का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21(3) चुनाव आयोग को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का अधिकार देते हैं। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि SIR प्रक्रिया जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में ‘नई जान फूंकने’ का काम करती है और इसका उद्देश्य मतदाता सूची को ज्यादा शुद्ध और विश्वसनीय बनाना है।

कोर्ट ने बताया SIR क्यों जरूरी

सीजेआई सूर्यकांत ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कहा कि बिहार में चल रही SIR प्रक्रिया संविधान के उस मूल दायित्व से अलग नहीं है, जिसका संबंध स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने से है। अदालत ने माना कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की प्रक्रिया चलाने का अधिकार है। अदालत ने कहा कि बिहार में बड़े पैमाने पर जनसांख्यिकीय बदलाव, शहरीकरण और प्रवासन के कारण मतदाता सूची में व्यापक परिवर्तन हुए हैं, जिसके चलते चुनाव आयोग ने यह प्रक्रिया शुरू की।

दस्तावेज मांगने का मतलब उन्हें नागरिक ना मानना नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR की प्रकिया में कोई गलती नहीं है। लोगों को अपनी जानकारी जोड़ने, सुधार करने और आपत्ति/अपील करने के कई मौके दिए गए। अगर मतदाताओं से SIR के दौरान अपने दस्तावेज या जानकारी देने के लिए कहा जाता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उनको नागरिक नहीं माना जा रहा है। निष्पक्ष चुनाव सिर्फ वोट डालने की प्रक्रिया तक सीमित नहीं होते। उनका सबसे महत्वपूर्ण आधार सही, भरोसेमंद और सटीक वोटर लिस्ट होती है। ऐसे में वोटर लिस्ट को अपडेट करना गलत नहीं माना जा सकता।

SIR के खिलाफ याचिका में क्या?

इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि इतने बड़े स्तर पर SIR कराना जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के खिलाफ है और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया कानून के दायरे में है और उसका उद्देश्य वैध है। इस फैसले को बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 से पहले कराए गए वोटर लिस्ट सुधार अभियान पर चुनाव आयोग के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। साथ ही यह निर्णय भविष्य में देशभर में मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।