आम नागरिकों के लिए जल्द खुलेगा कुर्ला स्कायवॉक
मुंबई। कुर्ला (पश्चिम) स्थित टैक्सीमेन कॉलोनी से श्रीकृष्ण चौक तक सीताराम भैरू मार्ग पर बनाए जा रहे स्कायवॉक का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जून 2026 के प्रथम सप्ताह में यह स्कायवॉक आम नागरिकों के लिए खोल दिया जाएगा।
इस परियोजना के संबंध में आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने लगातार पत्राचार एवं अनुवर्ती कार्रवाई कर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। उनके प्रयासों के चलते परियोजना की प्रगति और शेष कार्यों की जानकारी सार्वजनिक हुई तथा संबंधित विभागों को लंबित कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
स्कायवॉक शुरू होने के बाद प्रतिदिन हजारों की संख्या में पैदल यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा। विशेष रूप से बारिश के मौसम में इस क्षेत्र में जलभराव की समस्या गंभीर हो जाती है, जिससे लोगों को सड़क पार करने और आवागमन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में यह स्कायवॉक नागरिकों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प साबित होगा। इसके अलावा, पैदल यात्रियों के लिए अलग मार्ग उपलब्ध होने से सड़क पर भीड़ कम होगी और यातायात व्यवस्था अधिक सुचारु बनेगी। इससे ट्रैफिक जाम की समस्या में कमी आएगी तथा वाहन चालकों और आम नागरिकों दोनों को राहत मिलेगी। अनिल गलगली ने मांग की है कि स्कायवॉक के साथ दोनों ओर के एस्केलेटर भी जल्द से जल्द चालू किए जाएं, ताकि नागरिकों को परियोजना का पूर्ण लाभ मिल सके।
दुर्गा माता मंदिर के वर्धापन दिवस पर माता की चौकी का आयोजन
वसई। वर्तक कॉलेज के सामने, वसई पश्चिम में स्थित दुर्गा माता मंदिर के वर्धापन दिवस के अवसर पर 28 मई को माता की चौकी का भव्य आयोजन किया गया,जिसमें प्रख्यात भजन गायिका उषा शर्मा और देवेंद्र राणा ने अपने गए मधुर भजनों द्वारा पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। समाजसेवी उषा धुरी और उनके परिवार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ो लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित रहने वाले प्रमुख लोगों में नगरसेविका अर्पणा पाटिल, नगरसेवक छोटू आनंद, समाजसेविका  रीता इस्सर आदि का समावेश रहा।
मीरा रोड में जैन मुनिश्री जिन रत्न विजय महाराज की प्रेरणा से गुरुकुल बोर्डिंग स्कूल

मीरा-भायंदर। जैन मुनिश्री जिन रत्नविजयजी म.सा. की प्रेरणा से मुस्कान संस्था एवं फ्लोरा फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से भारत भर में गुरुकुलों के निर्माण का संकल्प लिया गया है। इस अभियान की शुभ शुरुआत मीरारोड, महाराष्ट्र में हुई, जहां जिन भक्ति मानव सेवा आश्रम ट्रस्ट एवं प्लेजेंट पैलेस जैन संघ द्वारा परम पूज्य गणिवर्य क्रांतिकारी जैन मुनिश्री जिन रत्न विजय महाराज साहेब, की प्रेरणा तथा दानदाताओं के सहयोग से दो मंजिला गुरुकुल विद्यालय (बोर्डिंग) की स्थापना की गई, जो शुरू भी हो गया है। इस गुरुकुल में लगभग 100 बच्चों के लिए शिक्षा, भोजन एवं रहने की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इस गुरुकुल विद्यालय का उद्घाटन महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा द्वारा स्थानीय विधायक नरेंद्र मेहता, महापौर डिंपल विनोद मेहता, मुंबई मनपा के पूर्व उपमहापौर बाबूभाई भवानजी की विशेष उपस्थिति एवं सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में किया गया। उद्घाटन समारोह के दौरान संस्था द्वारा घोषणा की गई कि एक बच्चे का वार्षिक पालन-पोषण एवं शिक्षा खर्च दो लाख सात हजार रुपए होगा। यह घोषणा सुनते ही उपस्थित दानदाताओं ने आगे बढ़कर पहले वर्ष का संपूर्ण खर्च वहन करने हेतु सहयोग प्रदान किया और अपने धन का सदुपयोग किया। संस्था का उद्देश्य जहां-जहां देवालय, वहां-वहां गुरुकुल विद्यालय एवं गौशाला का निर्माण करना है। इसके साथ ही अनाथ एवं जरूरतमंद बच्चों को संस्कार, इंसानियत, देशभक्ति, स्वरोजगार (स्किल डेवलपमेंट) एवं सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण भी प्रदान करना है। यह जानकारी फ्लोरा फाउंडेशन के चेयरमैन व ट्रस्टी बाबूभाई भवानजी तथा मुस्कान संस्थान के मैनेजिंग ट्रस्टी भरत नागड़ा (जैन) ने दी। फ्लोरा फाउंडेशन के चेयरमैन तथा मुंबई महानगर पालिका के पूर्व उपमहापौर बाबूभाई भवानजी ने आगे कहा कि अब जैन एवं हिंदू समाज संगठित होकर संकल्प लिया है कि जहां देवालय वहां गुरुकुल विद्यालय, में संस्कार, देशभक्ति, इंसानियत सेवा, और शास्त्र के पाठ के साथ - शस्त्र विद्या, स्वरोजगार, सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देकर और गौशाला का निर्माण कराया जाएगा।
लोढ़ा फाउंडेशन द्वारा सैद्धांतिक भौतिकी अनुसंधान संस्थान का शुभारंभ
मुंबई । देश की प्रमुख सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था "लोढ़ा फाउंडेशन" द्वारा भारत के एक मात्र निजी वित्त पोषित सैद्धांतिक भौतिकी अनुसंधान संस्थान का शुभारम्भ बुधवार, 27 मई, 2026 को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में किया गया। यह जानकारी देते हुए लोढ़ा डेवलपर्स के CEO एवं प्रबंध निदेशक और लोढ़ा फाउंडेशन के ट्रस्टी अभिषेक लोढ़ा ने बताया कि भारत आने वाले वर्षों में एक वैश्विक लीडर बनने के लिए तैयार है। इसलिए लोढ़ा फाउंडेशन का मानना है कि एक विकासशील राष्ट्र से एक विकसित राष्ट्र बनने की इस यात्रा में हम सार्थक योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन में हम 'उत्कृष्टता के परोपकार' (Philanthropy of Excellence) का अभ्यास करते हैं और इस दिशा में कई कार्यक्रम शुरू किये गये हैं। इसी क्रम में अत्यंत विचार पूर्वक तैयार की गई और विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा में अहम योगदान देने वाली सबसे नई पहल  है, जिसे 27 मई, 2026 को मुंबई स्थित लोढ़ा वर्ल्ड टॉवर में लॉन्च किया गया। इस अवसर पर महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा एवं डॉ मंजू लोढ़ा ने लोढ़ा फाउंडेशन की ओर से सभी विशिष्ट अतिथियों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और उपस्थित महानुभावों का हार्दिक स्वागत किया तथा अपने प्रेरणादायक विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार सबसे बड़ी शक्ति हैं और ऐसे संस्थान आने वाले समय में भारत को वैश्विक एवं वैज्ञानिक नेतृत्व प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। उन्होंने बताया कि वुल्फ प्राइज विजेता प्रोफेसर जैनेंद्र जैन के नेतृत्व में LTPI, मौलिक भौतिकी में साहसिक विचारों को प्रोत्साहित करेगा। लोढ़ा थ्योरिटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट की परिकल्पना भारत में सैद्धांतिक भौतिकी में मौलिक अनुसंधान के लिए एक समर्पित केंद्र के रूप में की गई है। यह संस्थान भारत और दुनिया भर के अग्रणी वैज्ञानिकों के बीच केंद्रित अनुसंधान कार्यक्रमों, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और सार्थक सहयोग के लिए एक शैक्षणिक वातावरण तैयार करके निरंतर और दीर्घकालिक अनुसंधान की आवश्यकता को पूरा करने का प्रयास करेगा। अभिषेक लोढ़ा ने कहा कि लोढ़ा फाउंडेशन में हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें उत्कृष्टता के प्रयास करना, सबसे बड़ा प्रभाव पैदा करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। चाहे देश भर से प्रतिभावान विद्यार्थियों की पहचान  और उन्हें त्वरित कार्यक्रमों में शामिल करना हो, या शहरी स्थिरता के समाधानों में निवेश करना हो। या फिर 'लोढ़ा मैथमैटिकल साइंसेज इंस्टीट्यूट' और अब 'लोढ़ा थ्योरिटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट' के माध्यम से नवाचार और अनुसंधान को सहायता व बढ़ावा देना हो, हम भारत के एक विकसित राष्ट्र बनने के इस महत्वपूर्ण सफर में सार्थक योगदान देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मूलभूत विज्ञान में क्रांति के बाद ही परिवर्तनकारी तकनीकी युगों की शुरुआत होती है। इसी विजन पर LTPI की स्थापना की गई है । यह भारत में मौलिक अनुसंधान के लिए एक समर्पित केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जो दुनिया भर से सर्वश्रेष्ठ दिमागों को आकर्षित करेगा और बौद्धिक जिज्ञासा की संस्कृति को बढ़ावा देगा । असाधारण फैकल्टी, पोस्ट डॉक्टरल फेलो और दीर्घकालिक आगंतुकों को एक साथ लाकर, यह संस्थान बौद्धिक स्वतंत्रता, स्थिरता, सहयोग की भावना और गहरे प्रश्नों व साहसिक विचारों को तलाशने का साहस प्रदान करेगा, जिससे ऐसी खोज संभव होंगी, जिनका गहरा प्रभाव आने वाले दशकों में दिखाई देगा। लोढ़ा फाउंडेशन के मुख्य मार्गदर्शक आशीष कुमार सिंह ने कहा कि LTPI का उद्देश्य दुनिया भर के सबसे असाधारण बुद्धिमानों को एक साथ लाना और बिना किसी बाधा के भौतिकी के बारे में खुलकर सोचने में समय बिताना है। उन्होंने कहा कि जब असाधारण दिमाग एक साथ आते हैं, तो वे असाधारण परिणाम देते हैं और यह एक ऐसा दाॅंव है, जो हम भारत के लिए लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि LTPI (Lodha Theoretical Physics Insititute) का नेतृत्व संस्थापक निदेशक प्रो. जैनेंद्र के. जैन करेंगे, जो एक प्रसिद्ध सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी हैं और उन्हें 'ऑलिवर ई. बकली प्राइज' एवं भौतिकी में 'वुल्फ प्राइज' मिल चुका है । उन्होंने 'कंपोजिट फर्मिओन्स' नामक उभरते कणों की खोज की। इसका वर्णन करने वाले उनके सिद्धांत ने correlated quantum matter की समझ को बेहद समृद्ध किया है और आधुनिक सैद्धांतिक भौतिकी को आकार देना जारी रखा है। प्रो. जैन ने कहा कि सैद्धांतिक भौतिकी प्रकृति के प्रति हमारी समझ के केंद्र में है। सैद्धांतिक भौतिकी में प्रगति ने ऐतिहासिक रूप से वैज्ञानिक सोच को आकार दिया है और विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तनकारी विकास की नींव रखी है।2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लिए, भारत को विश्व स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान बुनियादी ढांचे के साथ मजबूत संस्थानों का निर्माण करना अनिवार्य होगा। LTPI इसी दिशा में एक विशेष रूप से महत्वपूर्ण प्रयास होगा, क्योंकि यह भारत में पूरी तरह से निजी तौर पर वित्त पोषित पहला भौतिकी संस्थान होगा। उन्होंने बताया कि एक बड़ी शुरुआत के साथ, LTPI 'इमर्जेंट फेनोमेना इन क्वांटम हॉल सिस्टम्स' (EPQHS-10) पर 10वीं अंतर्राष्ट्रीय बैठक की मेजबानी कर रहा है । यह तीन दिवसीय कार्यशाला श्रृंखला दुनिया भर के कई प्रसिद्ध वैज्ञानिकों की मेजबानी करेगी, जो रोमांचक हालिया खोजों की घोषणा करेंगे और भौतिकी के क्षेत्र में भविष्य की आशाजनक दिशाओं पर चर्चा करेंगे । संस्थान की प्रतिष्ठा स्थापित करने वाले एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर के रूप में कार्य करते हुए, EPQHS-10 की मेजबानी करना यह दर्शाता है कि LTPI में पहले दिन से ही तैयार किया जा रहा शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र कितना गम्भीर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक और विश्व स्तरीय गुणवत्ता का है। समारोह के दौरान, नोबेल पुरस्कार विजेता और मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर सॉलिड स्टेट रिसर्च के डायरेक्टर एमेरिटस क्लाउस वॉन क्लिट्जिंग ने 'टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च' (TIFR) के सहयोग से आयोजित एक सार्वजनिक व्याख्यान दिया। इस व्याख्यान में बताया गया कि कैसे "क्वांटम हॉल इफेक्ट" की खोज अत्यधिक परिस्थितियों में इलेक्ट्रॉनों के व्यवहार पर बुनियादी, जिज्ञासा-संचालित अनुसंधान से उभरी। और कैसे इस अप्रत्याशित खोज ने अंततः माप मानकों की अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली में क्रांति ला दी । इस अवसर पर डॉ मंजू लोढ़ा द्वारा एक विशेष काव्यात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की गई, जो इस प्रकार है:- आज सजा है ज्ञान का मंदिर, आज जली है नई मशाल, जहाँ विज्ञान के पंख लगाकर, सपने छू लेंगे हर आकाश। यह केवल एक मंच नहीं है, यह भविष्य की पहचान है, जहाँ जिज्ञासा बनती शक्ति, और शोधों से बढ़ता मान है। गिरते सेब से प्रेरित होकर, न्यूटन ने ज्ञान जगाया, गति और गुरुत्वाकर्षण का सुंदर नियम समझाया। समय, प्रकाश और ब्रह्मांड का जिसने नया विज्ञान दिया, अल्बर्ट आइंस्टीन ने सोच को नया आसमान दिया। दूरबीन से नभ को देखा, सत्य की राह अपनाई, गैलीलियो ने नई चेतना जग में लाई। विद्युत की अद्भुत धारा से दुनिया को जिसने सजाया, निकोला टेस्ला ने नवयुग का दीप जलाया। असंख्य प्रयोगों की तपस्या से अंधियारा दूर भगाया, थॉमस एडीसन ने बल्ब का उजियारा लाया। रेडियम की खोज में जिसने जीवन अपना खपा दिया, मैरी क्यूरी ने नारी शक्ति का मान बढ़ा दिया। ब्लैक होल के गहरे रहस्य दुनिया को समझाने वाले, स्टीफेन हॉकिंग  थे, जिन्होंने हौसलों से जग जीता। भारत माँ भी गर्वित हुई, जब सी वी रमन ने कमाल दिखाया, प्रकाश की किरणों के बदलते रंगों का अद्भुत रहस्य समझाया। ज्ञान और गणित की शक्ति से नया सिद्धांत बनाया,सत्येन्द्र नाथ बोस ने आइंस्टीन संग इतिहास रचाया। परमाणु शक्ति के क्षेत्र में भारत को जिसने बढ़ाया, होमी जहांगीर भाभा ने विज्ञान का मान बढ़ाया। अंतरिक्ष के सपनों को भी जिसने साकार बनाया, विक्रम साराभाई ने भारत का गौरव बढ़ाया। मिसाइल मैन कहलाकर भी मन से रहे महान, एपीजे अब्दुल कलाम ने युवाओं को दिए ऊँचे अरमान। ये वैज्ञानिक दीप समान हैं, ज्ञान जिनसे जगमगाता है, इनकी मेहनत और खोजों से मानव आगे बढ़ पाता है। विज्ञान हमें यह सिखलाता, हर मुश्किल आसान बने, जिज्ञासा और कर्म के बल पर मानव चाँद समान बने। कभी रसायन की प्रयोगशाला में, तत्वों ने मिलकर रंग भरे, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन ने, जीवन के जल के दीप धरे। कार्बन की छोटी सी रचना ने, हीरे जैसा रूप लिया, विज्ञान ने मिट्टी के कण को, सोने से बढ़कर मूल्य दिया।कभी अम्ल और क्षार मिले तो, संतुलन का संदेश मिला, हर क्रिया ने यह सिखलाया संघर्षों से नव जीवन खिला। आज इसी प्रेरणा की धरती पर, ज्ञान के दीप प्रज्वलित होंगे, प्रो. जैनेंद्र जैन की शोधों से, विज्ञान के नये पथ निर्मित होंगे। “कॉम्पोज़िट फर्मियॉन” की खोज ने, दुनिया को नई दिशा दिखाई, वुल्फ प्राइज़ जैसे महान सम्मान ने, भारत की प्रतिभा चमकाई। दूर विदेशी धरती से आए, नोबेल विजेता वैज्ञानिक महान,प्रो. क्लॉस वॉन क्लिट्जिंग ने, बढ़ाया विज्ञान का गौरवमान। “क्वांटम हॉल इफेक्ट” की खोज ने, भौतिकी को नया विस्तार दिया, सूक्ष्म कणों की अद्भुत दुनिया का, मानव को नया आधार दिया। यहाँ सूत्र केवल अक्षर नहीं, हर सूत्र जीवन गाता है, विज्ञान वही है जो मानव को, अज्ञान से ऊपर उठाता है। लोढ़ा फाउंडेशन की प्रेरणा ने, शिक्षा का नव दीप जलाया है, अभिषेक लोढ़ा के संकल्पों ने, हर युवा को आगे बढ़ाया है। मंगल प्रभात लोढ़ा  जैसे, सेवा जिनकी पहचान बनी, समाज और संस्कृति के संग, जनहित की सुंदर शान बनी। आईएएस आशीष सिंह के प्रयासों ने, कर्तव्य का मान बढ़ाया है।
भोर भ्रमण परिवार ने किया एड .राजकुमार मिश्रा का सम्मान
भायंदर। भायंदर पूर्व के प्रबुद्ध उत्तर भारतीयों की संस्था भोर भ्रमण परिवार द्वारा मीरा भायंदर महानगरपालिका परिवहन समिति के नवनिर्वाचित सभापति एडवोकेट राजकुमार मिश्रा का जोरदार सम्मान किया गया। नवघर रोड स्थित भारत सरकार के नोटरी तथा भोर भ्रमण परिवार के वरिष्ठ पदाधिकारी एडवोकेट आर जे मिश्रा के कार्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में  शॉल , श्रीफल और अंग वस्त्र से श्री मिश्रा का सम्मान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ उमेश चंद्र शुक्ला ने किया। इस अवसर पर स्कूल प्रबंधक वीरेंद्र प्रसाद द्विवेदी, समाजसेवी संजय दुबे, पूर्व प्राध्यापक उपेंद्र पांडे, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, प्रवक्ता अनिल पांडे, पूर्व प्रवक्ता बीके दुबे, समाजसेवी अभयराज पांडे, आरपी सिंह, डॉ त्रैलोक्यमणि त्रिपाठी ने अपने विचार व्यक्त किए। राजकुमार मिश्रा ने कहा कि भोर भ्रमण परिवार हमेशा उनके साथ खड़ा रहा । यही कारण है कि इस संस्था का प्रत्येक व्यक्ति उनका अपना परिवार है। उन्होंने कहा कि वे इस उपलब्धि के लिए उत्तर भारतीय समाज के साथ साथ लोकप्रिय विधायक नरेंद्र मेहता और राहुल एजुकेशन के चेयरमैन पंडित लल्लन तिवारी के प्रति विशेष आभारी हैं, जिनके आशीर्वाद से उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली।  कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट  आर जे मिश्रा ने किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों में सूर्यमणि दुबे ,जयप्रकाश मिश्रा, अजीत शुक्ला, राजीवमणि त्रिपाठी, सभाजीत शुक्ला, एडवोकेट सतीश चौबे आदि का समावेश रहा।
टीएमसीसी मेडिको लीग में एम टी खान की टीम नाइट राइडर्स ने जीता खिताब

ठाणे। टीएमसीसी मेडिको लीग 2026 के15वें सीज़न में 24 मई 2026 को एक नया इतिहास लिखा गया।पहली बार टूर्नामेंट में उतरी एम टी खान नाइट राइडर्स ने अपने दमदार प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया और डेब्यू सीज़न में ही चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।कैप्टन डॉ एम टी खान, वाईस कैप्टेन डॉ दानिश खान और टीम मैनेजर डॉ बद्री मंडुरे के नेतृत्व में टीम ने पूरे सीज़न अनुशासन और जज़्बे की मिसाल पेश की।क्वार्टर फाइनल में टेबल टॉपर कल्याण राइडर्स को बाहर किया।लो-स्कोरिंग मुकाबले में नाइट राइडर्स ने 155 रन का बचाव करते हुए कल्याण राइडर्स को 146 रन पर रोक दिया। कप्तान डॉ एम टी खान ने 48 रन और 4 विकेट लेकर 'मैन ऑफ द मैच' प्रदर्शन किया। डॉ अजीज ने 49 रनों की अहम पारी खेली।
मजबूत ऐरोली टीम के खिलाफ नाइट राइडर्स ने पहले खेलकर 130 रन बनाए। जवाब में डॉ जावेद के 3 विकेट और डॉ अजित की कसी हुई गेंदबाजी के दम पर ऐरोली को सिर्फ 96 रन पर समेट दिया। डॉ अफज़ल और डॉ दानिश खान ने 30-30 रन का योगदान दिया।
फाइनल में DRDF ने 158 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। सलामी बल्लेबाज़ डॉ अजित ने 48 गेंदों पर 74 रन की तूफानी पारी खेलकर नींव रखी।आखिरी ओवरों में डॉ बद्री मंडुरे के 12 गेंद पर 24 रन और डॉ इखलास के 18 गेंद पर नाबाद 24 रन की 48 रन की साझेदारी ने टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई।पूरे ठाणे मेडिकल जगत में नाइट राइडर्स की इस जीत की चर्चा है। टीमवर्क और संघर्ष की इस कहानी ने लीग को एक नई चैंपियन टीम दी है।
साझा संकलन 'मिशन सिंदूर शौर्य गाथा' का हुआ लोकार्पण
मुंबई । ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में देश के वीर जवानों को समर्पित काव्य कृति 'मिशन सिंदूर शौर्य गाथा' पुस्तक का लोकार्पण समारोह कांदिवली पूर्व में संपन्न हुआ। लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार डॉ कृपाशंकर मिश्र ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में दैनिक संझा लोकस्वामी मुंबई के संपादक राकेश मणि तिवारी उपस्थित थे।सम्मानित अतिथियों में इस काव्य कृति का संपादन करने वाले वरिष्ठ कवि एवं पूर्व प्रधानाध्यापक राम सिंह,प्रोफेसर डॉक्टर दिनेश कुमार तथा युगांश फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश वर्मा की विशेष उपस्थिति रही।इस पुस्तक में पहलगाम आतंकी हमले में पैदा हुई त्रासदी के बाद हमारे देश में वीर जवानों द्वारा किए गए ऑपरेशन सिंदूर को केंद्र में रखते हुए देश भर के विभिन्न कवियों एवं कवियत्रियों ने अपनी भावपूर्ण रचनाओं के माध्यम से अपने भाव पुष्प अर्पित किए हैं जिसे नीलम पब्लिकेशन ने बड़ी प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
उत्तर भारतीय समाज ने किया एड. राजकुमार मिश्रा का सम्मान
भायंदर। मीरा भायंदर की प्रतिष्ठित उत्तर भारतीय समाज द्वारा आज परिवहन समिति के सभापति एडवोकेट राजकुमार मिश्रा का सम्मान किया गया। वरिष्ठ समाजसेवी रत्नाकर मिश्रा के इंद्रलोक स्थित आवास पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि श्री मिश्रा के सभापति बनने से पूरा समाज गौरवान्वित हुआ है। उपस्थित लोगों ने विधायक नरेंद्र मेहता के साथ साथ राहुल एजुकेशन  के चेयरमैन लल्लन तिवारी के प्रति भी आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों में रत्नाकर मिश्रा के अलावा वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, भाजपा जिला महामंत्री बृजेश तिवारी, पत्रकार महेंद्र पांडे, उत्तर भारतीय मोर्चा के जिला महामंत्री कमलेश दुबे, मानस अस्पताल के संचालक संदीप तिवारी, मनीष मिश्रा, स्वामीनाथ पांडे, विजय दुबे समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।
भारतीय जनभाषा प्रचार समिति की मासिक काव्यगोष्ठी संपन्न

ठाणे । साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था भारतीय जनभाषा प्रचार समिति ठाणे के तत्वावधान में शनिवार 23 मई 2026 को मुन्ना विष्ट कार्यालय सिडको ठाणे में मासिक काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार त्रिलोचन सिंह अरोरा ने किया तथा मुख्य अतिथि के रूप में संगीत साहित्य मंच के संस्थापक रामजीत गुप्ता उपस्थित थे।मंच का खूबसूरत संचालन नरसिंह हैरान जौनपुरी ने किया।गोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके वंदना से हुआ।साहित्यकारों में वरिष्ठ साहित्यकार एवं मार्गदर्शक तिलकराज खुराना,विनय सिंह विनम्र,नंदलाल क्षितिज,अनिल कुमार राही,डॉ वफ़ा वारसी, अजय कुमार सिंह,ओमप्रकाश सिंह एवं युवा कवि प्रथमेश प्रवीण नाईक मुख्य रूप से उपस्थित थे।उपस्थित सभी साहित्यकारों एवं लेखकों ने अपनी रचनाओं से उपस्थित श्रोता साहित्यकारों को मंत्रमुग्ध कर दिया।अंत में संस्था अध्यक्ष विनय सिंह विनम्र ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए राष्ट्रगान के साथ समापन किया।
एक जीवित विश्वविद्यालय का स्वरूप है स्त्री
—  डॉ मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार


माना कि महिलाएँ आज भी
रसायन विज्ञान, भौतिक शास्त्र, अर्थशास्त्र,
प्रबंधन, बैंकिंग और अनेक क्षेत्रों में
संख्या के आधार पर पुरुषों से कम दिखाई देती हैं…

लेकिन फिर भी
इन सभी क्षेत्रों के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों,
अर्थशास्त्रियों, प्रबंधकों और विद्वानों की
पहली गुरु, पहली पाठशाला
और पहली प्रयोगशाला
एक स्त्री ही होती है —
माँ।

वह प्रयोगशाला
जहाँ इंसान गढ़े जाते हैं…
जहाँ संस्कारों की नींव रखी जाती है,
जहाँ प्रेम, त्याग, अनुशासन
और मानवता का निर्माण होता है।

स्त्रियाँ जन्मजात विदुषी होती हैं।
वह लक्ष्मी भी हैं,
अन्नपूर्णा भी हैं,
सरस्वती भी हैं…
और समय आने पर
दुर्गा भी बन जाती हैं।

जिसे दुनिया अक्सर
केवल “घर संभालना” कहकर
छोटा समझ लेती है,
असल में वही
सबसे बड़ा प्रबंधन है।

एक पुरुष शायद घर चला सकता है,
पर एक स्त्री
पूरे घर में जीवन भर देती है।
वह दीवारों को घर
और घर को परिवार बनाती है।

इतिहास गवाह है
कि संसार के बड़े-बड़े वीर,
महापुरुष और युग निर्माता भी
किसी स्त्री की गोद में ही
संस्कार पाकर महान बने।

वह माँ राजमाता जिजाबाई ही थीं
जिन्होंने बालक शिवा को
केवल पुत्र नहीं,
एक वीर, धर्मरक्षक और राष्ट्रनायक
छत्रपति शिवाजी महाराज बनाया।

वह माँ जयवंता बाई ही थीं
जिन्होंने अपने पुत्र में
स्वाभिमान, साहस और राष्ट्रप्रेम के
ऐसे संस्कार डाले
कि वही बालक आगे चलकर
महाराणा प्रताप बना।

क्योंकि संसार की हर महान प्रतिभा की
पहली पाठशाला
एक माँ होती है।

एक स्त्री कितनी विदुषी होती है,
आइए उसके जीवन को ही
एक जीवित विश्वविद्यालय मानकर
उसकी अद्भुत विद्वता को समझने का प्रयास करें।

क्या कभी किसी ने
सच में समझा है
उस स्त्री की बुद्धिमत्ता को
जो दिन-रात
सिर्फ घर नहीं संभालती,
बल्कि जीवन सँवारती है?

हम डिग्रियों में ज्ञान ढूँढते हैं,
पद और पहचान में सम्मान ढूँढते हैं…
पर हर घर में
एक चलता-फिरता विश्वविद्यालय बसता है।

जहाँ बिना किसी किताब के
हर दिन जीवन का विज्ञान जन्म लेता है…
जहाँ अनुभव ही शिक्षा है,
और प्रेम ही सबसे बड़ी डिग्री।

जिसे दुनिया केवल घर समझती है,
वहीं से पीढ़ियाँ संस्कार सीखती हैं।
वहाँ केवल दिनचर्या नहीं चलती,
वहाँ रिश्ते, संवेदनाएँ
और सभ्यताएँ जन्म लेती हैं।

गणित वहाँ हर रोज़ मुस्कुराता है—

कितने लोगों की कितनी ज़रूरतें,
कहाँ कितना समय देना है,
कैसे सीमित साधनों में
सबकी इच्छाओं को संतुलित करना है।

बिना कॉपी-कलम के
हर हिसाब सही हो जाता है,
क्योंकि माँ के अनुभव में
ईश्वर का ज्ञान समा जाता है।

भौतिक विज्ञान भी वहीं बसता है—

कब धैर्य रखना है,
कब दृढ़ होना है,
कब मौन रहकर समझाना है,
और कब आवाज़ उठानी है।

जीवन की परिस्थितियों का
इतना सटीक संतुलन,
शायद किताबें भी
इतने प्रेम से न सिखा पाएँ।

रसायन विज्ञान का अद्भुत संसार—

वह टूटे मनों को जोड़ देती है,
क्रोध को प्रेम में बदल देती है,
उदासी में आशा घोल देती है,
और संघर्षों में साहस मिला देती है।

उसके स्पर्श में ऐसा जादू होता है
कि बिखरे हुए रिश्ते भी
फिर मुस्कुराने लगते हैं।

प्रबंधन कला की वह जीवित मिसाल है—

एक साथ चार काम करना,
सबको समय पर संभालना,
कम समय में सब व्यवस्थित करना।

यह किसी बड़ी कंपनी का
मैनेजमेंट नहीं तो और क्या है?

कॉरपोरेट की बड़ी-बड़ी बैठकों में
जिस “मैनेजमेंट स्किल” की बातें होती हैं,
उसका सबसे जीवंत रूप तो
सदियों से एक स्त्री के जीवन में दिखाई देता है।

मल्टीटास्किंग उसकी पहचान है—

एक तरफ चाय उबल रही है,
पूजा की थाली भी सज रही है,
पति और बच्चों का टिफिन भी भर रहा है,
बच्चों को उठाकर तैयार भी किया जा रहा है।

फोन भी उठा रही है,
दरवाज़ा भी खोल रही है,
और बारिश आ जाए तो
छत से कपड़े भी दौड़कर ला रही है।

खुद भी ऑफिस के लिए
तैयार हो रही है,
फिर भी चेहरे पर मुस्कान रहती है,
और घर व्यवस्थित चलता रहता है।

उसकी निरीक्षण शक्ति अद्भुत होती है—

दाल पकी या नहीं,
बच्चे का मन उदास है या नहीं,
पति की थकान चेहरे पर दिख रही है या नहीं,
घर में कौन चुपचाप किसी चिंता में है—

उसकी नज़र सब समझ जाती है।
वह शब्दों से पहले
चेहरों की भाषा पढ़ लेती है।

अर्थशास्त्र भी वही संभालती है—

सीमित बजट में घर चलाना,
भोजन तैयार करना,
बचे हुए संसाधनों का सदुपयोग करना,
मौसम के अनुसार आवश्यकताओं को चुनना।

तीज-त्योहार की तैयारी,
अतिथियों की आवभगत,
नेग और रिश्तों का निर्वाह—
घर की आर्थिक नीति
अक्सर उसी की समझ से चलती है।

मनोविज्ञान भी उसे भलीभाँति आता है—

किसका मन उदास है,
किसे प्रोत्साहन चाहिए,
कौन बिना कहे दर्द छिपा रहा है—

वह सब जानती है।

कभी वह
मदर टेरेसा सी ममता बन जाती है,
तो कभी अपने दुःख छिपाकर
सबके जीवन में उजाला भर देती है।

वह केवल परिवार नहीं संभालती,
पूरा संसार सँभालने की क्षमता रखती है।

वह स्त्री चाहे पढ़ी-लिखी हो या नहीं,
अंग्रेज़ी जानती हो या नहीं,
पर उसके अनुभव, धैर्य और प्रेम के आगे
बड़ी-बड़ी डिग्रियाँ भी छोटी लगती हैं।

वह केवल अन्नपूर्णा नहीं,
समय आने पर दुर्गा भी बन जाती है।
प्रेम दे तो गंगा सी निर्मल,
और अन्याय हो तो
चंडी सी प्रखर हो जाती है।

स्त्री को कम मत आँकिए,
क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक,
डॉक्टर, लेखक, सैनिक और उद्योगपति भी
सबसे पहले
एक माँ की गोद में ही गढ़े जाते हैं।

दुनिया की हर महान प्रतिभा की
पहली प्रयोगशाला,
एक स्त्री की ममता ही होती है।

क्योंकि
स्त्री केवल घर नहीं संभालती,
वह पीढ़ियाँ गढ़ती है,
संस्कार बोती है,
और प्रेम से संसार रचती है।

इसलिए अगली बार
जब वह चुपचाप
सबकी चिंता करती दिखाई दे,
तो उसे सामान्य मत समझिए…

एक पल रुककर
उस माँ, पत्नी, बहन या बेटी को
दिल से धन्यवाद ज़रूर कहिए,
जो अपने हिस्से की थकान छिपाकर भी
आपके जीवन को सहज बनाती है।

और केवल धन्यवाद ही नहीं…
कभी उसके लिए भी
थोड़ा समय निकालिए,
उसकी मुस्कान का कारण बनिए।

आइए नमन करें
उस महामानवी को,
जो अपने हाथों से
केवल कार्य नहीं करती,
बल्कि पूरे घर में
प्रेम, अपनापन और जीवन भर देती है।

जो हर परेशानी को
मुस्कान से हल्का कर देती है,
और अपने त्याग से
घर को सचमुच स्वर्ग बना देती है।