आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, डॉग लवर्स की याचिका की खारिज, नहीं बदला अपना पुराना आदेश

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सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्‍तों पर अपने पूर्व के फैसलों को बदलने की मांग को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और उनसे जुड़ी सार्वजनिक सुरक्षा चिंताओं को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए अपने 25 नवंबर के आदेश में बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि वह जमीनी सच्चाइयों से आंखें बंद नहीं की जा सकती। अदालत ने सार्वजनिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि सरकारों की जिम्मेदारी है कि नागरिकों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

नसबंदी के बाद पुरानी जगहों पर छोड़ने का निर्देश देने से इनकार

स्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सुनवाई की। अदालत ने शैक्षणिक संस्थानों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों, खेल परिसरों, अस्पतालों आदि जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने पूर्व के निर्देशों को बदलने से इनकार कर दिया और कुत्तों को नसबंदी के बाद वापस पुरानी जगहों पर छोड़ने का निर्देश देने से इनकार कर दिया।

कुत्तों के काटने की घटना लगातार जारी

जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा, कुत्तों के काटने की घटना लगातार जारी है और यह दिखाता है कि संबंधित अथॉरिटी की लापरवाही है। डॉग बाइट की समस्या चिंता में डालने वाली है। राजस्थान के गंगानगर, सीकर, उदयपुर और भीलवाड़ा से हमें चौंकाने वाले आंकड़े मिले हैं। तमिलनाडु समेत दूसरे राज्यों से भी ऐसे ही आंकड़े सामने आए हैं। दिल्ली के IGI एयरपोर्ट में भी जनवरी से अब तक 31 डॉग बाइट की घटनाएं हुई हैं। विदेशी पर्यटकों को भी कुत्तों ने काटा है। देश भर में रैबीज से मौत की कई घटनाएं हुई हैं।

राइट टू लाइफ को लेकर राज्य सरकारों पर सख्त

शीर्ष अदालत ने कहा, "Animal Birth Control" नियमों को सही तरीके से लागू करने में गंभीर लापरवाही हुई है, जिसकी वजह से समस्या बढ़ी। राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों का यह दायित्व है कि लोगों के जीवन की रक्षा करें। राइट टू लाइफ की रक्षा करना राज्य और यूटी की जिम्मेदारी है।सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि यदि राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों ने समय रहते दूरदर्शिता के साथ काम किया होता, तो आज स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मुद्दे पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को Animal Birth Control (ABC) गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित राज्यों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी, व्यवस्थित और वैज्ञानिक कदम उठाना बेहद जरूरी है। अदालत ने निर्देश दिया कि देश के हर जिले में कम से कम एक ABC सेंटर स्थापित किया जाए, जहां प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो। अदालत ने माना कि मौजूदा व्यवस्था कई स्थानों पर बेहद कमजोर है और इसका सीधा असर आम नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ रहा है।

केजरीवाल-सिसोदिया को हाईकोर्ट का नोटिस, जस्टिस स्वर्ण कांता के खिलाफ अभियान चलाने का आरोप

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दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब नीति मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को निशाना बनाने के लिए कथित तौर पर चलाए गए एक सुनियोजित सोशल मीडिया अभियान के संबंध में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य को नोटिस जारी किया है।

चार हफ्ते में मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 'आप' के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को आपराधिक अवमानना के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने अवमानना मामले में सभी नेताओं को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।

आप नेताओं पर अवमानना करने के आरोप

आम आदमी पार्टी के नेताओं पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ कथित तौर पर 'मानहानिकारक और अपमानजनक' टिप्पणियां करने का आरोप है। सुनवाई जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की बेंच के पास है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के आदेश दिए थे। न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने कहा था कि वे आबकारी नीति मामले के कुछ बरी किए गए आरोपियों द्वारा सोशल मीडिया पर उनके और अदालत के खिलाफ की गई अत्यंत अपमानजनक, मानहानिकारक और घृणित टिप्पणियों पर चुप नहीं रह सकती हैं।

कई सोशल मीडिया पोस्ट पर आपत्ति

जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने जोर देकर कहा था कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने कानूनी उपायों को अपनाने के बजाय सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ बदनामी का एक "सोचा-समझा अभियान" चलाया, और यह साफ किया कि सभी आरोपियों को बरी करने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर अब कोई दूसरी बेंच सुनवाई करेगी। जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने उन लोगों के कई सोशल मीडिया पोस्ट पर आपत्ति जताई, जिन पर अवमानना का आरोप है। इन पोस्ट में उन पर "राजनीतिक निष्ठा" और "जुड़ाव" रखने का आरोप लगाया गया था और कथित तौर पर वाराणसी के एक शिक्षण संस्थान में दिए गए उनके भाषण का एक गुमराह करने वाला "एडिट किया हुआ" वीडियो पोस्ट करके उन्हें निशाना बनाया गया था।

पेट्रोल-डीजल आज फिर हो गया महंगा, एक हफ्ते में दूसरी बार बढ़े दाम

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देश में आम आदमी पर महंगाई की एक और मार पड़ी है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मंगलवार को फिर से बढ़ोतरी कर दी गई। तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम में करीब 90 पैसे प्रति लीटर तक का इजाफा किया है। एक हफ्ते के भीतर ईंधन की कीमतों में यह दूसरी बढ़ोतरी है।

19 मई को सुबह-सुबह नए रेट जारी कर दिए गए हैं। देश के कई शहरों में आज पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव हुआ है। ऐसे में दिल्ली से लेकर मुंबई, जयपुर, पटना और हैदराबाद तक कई शहरों में नई कीमतें लागू हो गई हैं।

तीन दिन पहले ही बढ़े थे दाम

इस नई बढ़ोतरी से ठीक तीन दिन पहले, शुक्रवार को ही केंद्र सरकार ने देशभर में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर का भारी इजाफा किया था। उस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये हो गया था।

देश अलग-अलग शहरों में पेट्रोल-डीजल का ताजा भाव

• दिल्ली में पेट्रोल ₹0.87 महंगा होकर ₹98.64 प्रति लीटर और डीजल ₹0.91 बढ़कर ₹91.58 प्रति लीटर हो गया है।

• मुंबई में पेट्रोल ₹0.91 बढ़कर ₹107.59 प्रति लीटर और डीजल ₹0.94 महंगा होकर ₹94.08 प्रति लीटर बिक रहा है।

• कोलकाता में पेट्रोल ₹1 बढ़कर ₹109.70 प्रति लीटर और डीजल ₹0.94 चढ़कर ₹96.07 प्रति लीटर पहुंच गया है।

• चेन्नई में पेट्रोल ₹0.79 महंगा होकर ₹104.46 प्रति लीटर और डीजल ₹0.86 बढ़कर ₹96.11 प्रति लीटर हो गया है।

• गुरुग्राम में पेट्रोल ₹0.82 बढ़कर ₹99.29 प्रति लीटर और डीजल ₹0.86 महंगा होकर ₹91.80 प्रति लीटर बिक रहा है।

• नोएडा में पेट्रोल ₹1.15 चढ़कर ₹98.91 प्रति लीटर और डीजल ₹1.22 बढ़कर ₹92.21 प्रति लीटर हो गया है।

• बेंगलुरु में पेट्रोल ₹0.95 महंगा होकर ₹107.12 प्रति लीटर और डीजल ₹0.94 बढ़कर ₹95.04 प्रति लीटर पहुंच गया है।

• भुवनेश्वर में पेट्रोल ₹0.52 बढ़कर ₹105.09 प्रति लीटर और डीजल ₹0.57 महंगा होकर ₹96.68 प्रति लीटर बिक रहा है।

• चंडीगढ़ में पेट्रोल ₹0.83 बढ़कर ₹98.10 प्रति लीटर और डीजल ₹0.84 चढ़कर ₹86.09 प्रति लीटर हो गया है।

• हैदराबाद में पेट्रोल ₹0.99 महंगा होकर ₹111.88 प्रति लीटर और डीजल ₹0.99 बढ़कर ₹99.95 प्रति लीटर पहुंच गया है.

• जयपुर में पेट्रोल ₹1.71 बढ़कर ₹109.32 प्रति लीटर और डीजल ₹1.60 महंगा होकर ₹94.50 प्रति लीटर बिक रहा है।

• लखनऊ में पेट्रोल ₹0.68 बढ़कर ₹98.40 प्रति लीटर और डीजल ₹0.72 चढ़कर ₹91.73 प्रति लीटर हो गया है।

• पटना में पेट्रोल ₹1.10 महंगा होकर ₹110.02 प्रति लीटर और डीजल ₹1.08 बढ़कर ₹96.05 प्रति लीटर पहुंच गया है।

पश्चिमी एशिया युद्ध के कारण दुनिया भर में ऊर्जा संकट

पेट्रोल और डीजल के दामों में इस तरह की लगातार बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण बहुत बड़ी वजह हैं। दरअसल, पश्चिमी एशिया के देशों में चल रहे संघर्ष और युद्ध के कारण दुनिया भर में ऊर्जा का बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस विवाद के कारण समुद्री व्यापार के सबसे अहम रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट आ गई है। इसी साल 28 फरवरी से अमेरिका और इस्राइल का ईरान के साथ युद्ध शुरू हो गया था, जिसके बाद से ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास घूम रही है, हालांकि मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान इस इलाके में लंबे समय के युद्धविराम के लिए बातचीत करने की कोशिश कर रहे हैं।

पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान को सत्ता से हटाने में अमेरिका का हाथ? सामने आ गई सीक्रेट फाइल

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इमरान खान को सत्ता से हटाने को लेकर विदेशी साजिश वाले आरोप फिर से चर्चा में हैं। पाकिस्तान की राजनीति में सालों से चर्चा में रहा एक खुफिया मैसेज यानी “साइफर” अब फिर सुर्खियों में है। अब इस कथित सीक्रेट दस्तावेज की तस्वीरें सामने आई हैं। इससे पता चला है कि इमरान खान के वो दावे सौ फीसदी सही थे जिसमें उन्होंने साइफर का हवाला देते हुए अमेरिका पर अपनी सरकार को गिराने का आरोप लगाया था।

इमरान खान के अविश्वास प्रस्ताव में हारने से ठीक पहले हुई थी बैठक

'ड्रॉप साइट' नाम की वेबसाइट ने 'साइफर' नाम का सीक्रेट डॉक्यूमेंट लीक किया है। यह वही सीक्रेट राजनयिक दस्तावेज है, जिसे लेकर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान लगातार विदेशी साजिश का आरोप लगाते रहे थे। इस दस्तावेज को 'केबल I-0678' के रूप में पहचाना गया है। इसमें पाकिस्तान के तत्कालीन वाशिंगटन स्थित राजदूत और अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डोनाल्ड लू के बीच हुई एक बैठक का ब्योरा दर्ज है। यह बैठक अप्रैल 2022 में इमरान खान के अविश्वास प्रस्ताव में हारने से ठीक पहले हुई थी।

इमरान खान के जाने के बाद शहबाज बने पाक पीएम

दस्तावेज में कहा गया कि सत्ता परिवर्तन होने पर अमेरिका और यूरोप के साथ पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार संभव होगा। इसमें संकेत दिया गया कि इमरान खान के पद पर बने रहने की स्थिति में पाकिस्तान को कूटनीतिक अलगाव का सामना करना पड़ सकता है। जो बाइडेन उस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति हुआ करते थे। इमरान खान के जाने के बाद शहबाज शरीफ देश के प्रधानमंत्री बने थे।

पाकिस्तान और अमेरिका से संबंध सुधारे

ड्रॉप साइट ने दस्तावेजों के हवाले से बताया है कि इमरान खान की सरकार गिरने के बाद पिछले पांच सालों में अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों को एक नया रूप दिया गया और वॉशिंगटन और इस्लामाबाद को आपसी शक-शुबहे के माहौल से निकालकर एक-दूसरे के करीब ला दिया।

इमरान खान बार-बार किया था ये दावा

इमरान खान ने अपनी सत्ता जाने से पहले और संसद में सरकार गिरने के बाद बार-बार यह दावा किया था कि अमेरिका ने उनकी स्वतंत्र विदेश नीति और रूस और चीन के खिलाफ उसके साथ पूरी तरह से न जुड़ने के कारण उन्हें सत्ता से हटाने के लिए पर्दे के पीछे से काम किया। इमरान खान ने पाकिस्तान की वंशवादी राजनीतिक पार्टियों जैसे पाकिस्तान मुस्लिम लीग-N और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी पर भी आरोप लगाया कि वे उनकी सरकार को गिराने के लिए विदेशी ताकतों के साथ मिलकर काम कर रही थीं।

इमरान खान सरकार और अमेरिका के बीच तनाव के कारण

रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान सरकार और अमेरिका के बीच तनाव कई मुद्दों पर बढ़ाः-

1. अफगानिस्तान मुद्दा: अमेरिका चाहता था कि पाकिस्तान अपनी जमीन ड्रोन ऑपरेशन के लिए दे, लेकिन इमरान खान ने साफ इनकार कर दिया था।

2. रूस यात्रा: फरवरी 2022 में इमरान खान रूस पहुंचे और उसी दिन यूक्रेन पर हमला शुरू हुआ। इस मुलाकात ने अमेरिका को नाराज कर दिया। दस्तावेज में यह भी कहा गया कि रूस यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों में ‘दरार’ डाल दी थी।

3. यूएन वोटिंग: पाकिस्तान ने रूस के खिलाफ प्रस्ताव पर वोटिंग से दूरी बनाई, जिससे पश्चिमी देशों की नाराजगी और बढ़ गई।

वीडी सतीशन बने केरल के मुख्यमंत्री, 60 साल बाद पूरी कैबिनेट ने एक साथ ली शपथ

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केरल में कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार का सोमवार को शपथ ग्रहण। कांग्रेस नेता वीडी सतीशन ने सोमवार को तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित भव्य समारोह में केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही एक दशक बाद कांग्रेस नीत यूडीएफ सरकार केरलम की सत्ता में वापस आ गई।

सीएम के साथ 21 सदस्यीय मंत्रिपरिषद का शपथ

केरल के राज्यपाल आरवी आर्लेकर ने सतीशन के साथ 21 सदस्यीय मंत्रिपरिषद को भी पद एंव गोपनीयता की शपथ दिलाई। तिरुवनंतपुरम में आयोजित भव्य समारोह में 60 साल बाद केरल में पूरी कैबिनेट एक साथ शपथ ली है।

कैबिनेट में 14 नए चेहरों को मौका मिला

वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली 21 सदस्यीय कैबिनेट में 14 नए चेहरों को मौका मिला है। कांग्रेस कोटे से रमेश चेन्निथला, सनी जोसेफ, के मुरलीधरन, एपी अनिल कुमार, पीसी विष्णुनाध, रोजी एम जॉन, बिंदु कृष्णा, एम लिजू, टी सिद्दीकी, केए थुलसी और ओजे जनेश मंत्री बनेंगे। आईयूएमएल को पांच मंत्री पद मिले हैं। पार्टी की ओर से पीके कुन्हालिकुट्टी, केएम शाजी, वी अब्दुल गफूर, एन शम्सुद्दीन और पीके बशीर को कैबिनेट में जगह दी गई है। इसके अलावा मॉन्स जोसेफ, शिबू बेबी जॉन, अनूप जैकब और सीपी जॉन भी मंत्री पद की शपथ लीं।

शपथ ग्रहण में वंदे मातरम् की गूंज

शपथ ग्रहण कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के अलावा कांग्रेस के तमाम बड़े नेता मौजूद रहे। इस शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत वंदे मातरम् गीत से हुई। वंदे मातरम मलयालम में गाया गया। उसके बाद जण गण मन हुआ और कार्यक्रम आगे बढ़ा

पिनराई विजय समेत मंच पर मौजूद रहे ये नेता

शपथ ग्रहण कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी पहुंचे। तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी भी शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद रहे। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी शपथ ग्रहण में मौजूद रहे। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन भी मंच पर नजर आए।

“कॉकरोच” टिप्पणी पर CJI सूर्यकांत का स्पष्टीकरण
* बोले— बेरोजगार युवाओं नहीं, फर्जी डिग्री वालों पर की थी टिप्पणी

**नई दिल्ली।** सीजेआई सूर्यकांत ने शनिवार को अपनी कथित “कॉकरोच” टिप्पणी को लेकर सफाई जारी करते हुए कहा कि उनकी मौखिक टिप्पणियों को मीडिया के एक हिस्से ने गलत तरीके से पेश किया।
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने बेरोजगार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” और “परजीवियों” से की थी। हालांकि, सूर्यकांत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी बेरोजगार युवाओं के लिए नहीं थी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी आलोचना उन लोगों को लेकर थी, जो फर्जी और नकली डिग्रियों के जरिए वकालत जैसे पेशों में प्रवेश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा “मुझे यह देखकर दुख हुआ कि मीडिया के एक हिस्से ने मेरी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी, जो नकली और फर्जी डिग्रियों की मदद से कानूनी पेशे में घुस आए हैं”।
सूर्यकांत ने आगे कहा कि ऐसे लोग केवल वकालत ही नहीं, बल्कि मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य पेशों में भी घुसपैठ कर चुके हैं और समाज के लिए “परजीवी” की तरह हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यह स्पष्टीकरण उस विवाद के बाद आया है, जिसमें सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर उनकी टिप्पणी को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
“कॉकरोच” टिप्पणी पर CJI सूर्यकांत का स्पष्टीकरण
* बोले— बेरोजगार युवाओं नहीं, फर्जी डिग्री वालों पर की थी टिप्पणी

**नई दिल्ली।** सीजेआई सूर्यकांत ने शनिवार को अपनी कथित “कॉकरोच” टिप्पणी को लेकर सफाई जारी करते हुए कहा कि उनकी मौखिक टिप्पणियों को मीडिया के एक हिस्से ने गलत तरीके से पेश किया।
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने बेरोजगार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” और “परजीवियों” से की थी। हालांकि, सूर्यकांत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी बेरोजगार युवाओं के लिए नहीं थी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी आलोचना उन लोगों को लेकर थी, जो फर्जी और नकली डिग्रियों के जरिए वकालत जैसे पेशों में प्रवेश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा “मुझे यह देखकर दुख हुआ कि मीडिया के एक हिस्से ने मेरी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी, जो नकली और फर्जी डिग्रियों की मदद से कानूनी पेशे में घुस आए हैं”।
सूर्यकांत ने आगे कहा कि ऐसे लोग केवल वकालत ही नहीं, बल्कि मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य पेशों में भी घुसपैठ कर चुके हैं और समाज के लिए “परजीवी” की तरह हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यह स्पष्टीकरण उस विवाद के बाद आया है, जिसमें सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर उनकी टिप्पणी को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
182 करोड़ की 'जिहादी ड्रग' जब्त, जिसे खाते ही आतंकी बन जाते हैं खूंखार

#ncbmajorconsignmentcaptagondrugseizedfirsttimeinthecountry

देश की मोदी सरकार को ड्रग तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। सरकार ने ड्रग्स के खिलाफ अपनी सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम देते हुए पहली बार ‘जिहादी ड्रग’ कहे जाने वाले ‘कैप्टागन’ की बड़ी खेप जब्त की है। मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी दी।

पहली बार कैप्टागन नामक ड्रग की बड़ी खेप जब्त

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने पहली बार कैप्टागन नामक ड्रग की बड़ी खेप जब्त की है, जिसकी कीमत करीब 182 करोड़ रुपये आंकी गई है। गृह मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ड्रग-फ्री इंडिया के संकल्प के साथ लगातार कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन रेजपिल’ के तहत एजेंसियों ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया।

ड्रग्स के प्रति सरकार की जीरो टॉलरेंस

अमित शाह ने कहा कि मध्य पूर्व जा रही ड्रग्स की खेप को जब्त करना और एक विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी ड्रग्स के प्रति हमारी शून्य सहिष्णुता की प्रतिबद्धता के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। मैं दोहराता हूं कि हम भारत में प्रवेश करने वाले या हमारे क्षेत्र को पारगमन मार्ग के रूप में उपयोग करके देश से बाहर जाने वाले हर ग्राम ड्रग्स पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। एनसीबी के बहादुर और सतर्क योद्धाओं को सलाम।

कैप्टागन को जिहादी ड्रग्स क्यों कहते हैं?

अब सवाल यह है कि आखिर कैप्टागन को जिहादी ड्रग्स क्यों कहा जाता है? इसका इस्तेमाल कौन करता है और भारत की नारकोटिक्स एजेंसियों ने कैसे इसका भंडाफोड़ किया। कैप्टागन असल में फेनेथिलिन नामक एम्फेटामिन आधारित ड्रग का रूप है। मिडिल ईस्ट के युद्धग्रस्त इलाकों और आतंकी संगठनों के लड़ाकों के बीच इसके इस्तेमाल की वजह से इसे ‘जिहादी ड्रग’ कहा जाता है। इस ड्रग का सेवन करने के बाद इंसान को दर्द, डर या थकान का एहसास कम हो जाता है। इसे लेने के बाद इंसान लंबे समय तक जाग सकता है, थकान महसूस नहीं होती, फोकस बढ़ जाता है और दिमाग में एक अलग तरह का जोश और खुशी महसूस होती है। यही वजह है कि इसे लड़ाई और हिंसक गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता रहा है।

अमेरिका ने ISIS के दूसरे सबसे बड़े आतंकी अबू-बिलाल अल-मिनुकी को मारा, डोनाल्ड ट्रंप ने दी जानकारी

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अमेरिकी सेना ने नाइजीरिया में आईएसआईएस के दूसरे सबसे बड़े वैश्विक कमांडर अबू-बिलाल अल-मिनुकी का खात्मा कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को खुद इसकी जानकारी दी। ट्रंप ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को घोषणा की है कि अमेरिका ने नाइजीरिया में एक ऑपरेशन चलाया था जिसमें अल-मिनुकी मारा गया।

अमेरिकी-नाइजीरियाई सेनाओं के ज्वाइंट ऑपरेशन

डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा है "आज रात मेरे निर्देश पर बहादुर अमेरिकी सेना और नाइजीरियाई सेना ने दुनिया के सबसे सक्रिय आतंकवादी को युद्ध के मैदान से खत्म करने के लिए एक बहुत ही बारीकी से प्लान किए गए और बेहद मुश्किल मिशन को बिना किसी गलती के अंजाम दिया।"

दुनिया भर में ISIS का दूसरे नंबर का था कमांडर

ट्रंप ने आगे लिखा "अबू-बिलाल अल-मिनुकी, जो दुनिया भर में ISIS का दूसरे नंबर का कमांडर था, उसे लगा कि वह अफ्रीका में छिप सकता है, लेकिन उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि हमारे पास ऐसे सूत्र थे जो हमें पल-पल की खबर दे रहे थे कि वह क्या कर रहा है।"

नाइजीरिया सरकार का जताया आभार

डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि "अब आईएसआईएस का यह नेता अफ्रीका के लोगों को डराने या अमेरिकियों पर हमले की योजना बनाने में मदद नहीं कर सकेगा। उसके मारे जाने के बाद ISIS की वैश्विक गतिविधियां काफी कमजोर हो गई हैं। इस ऑपरेशन में साझेदारी के लिए नाइजीरिया सरकार का धन्यवाद।"

कौन था अबू-बिलाल अल-मिनुकी?

अबू-बिलाल अल-मिनुकी को अबू बक्र इब्न मुहम्मद इब्न अली अल-मैनुकी के नाम से भी जाना जाता था। वह अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में ISIS की गतिविधियों से जुड़ा एक वरिष्ठ नेता था। वह इस्लामिक दुनिया बनाना चाहता था। अमेरिकी रिकॉर्ड्स के मुताबिक, वह ISIS के जनरल डायरेक्टरेट ऑफ प्रोविन्सेज से जुड़ा था और उसके कई नाम थे। जैसे अबू बिलाल अल-मिनुकी, अबुबकर मैनोक और अबोर मैनोक। अमेरिका के विदेश विभाग ने 2023 में उसे आधिकारिक तौर पर ISIS का वरिष्ठ नेता घोषित किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, साहेल क्षेत्र में ISIS से जुड़ी गतिविधियों में उसकी बड़ी भूमिका थी और संगठन की अंतरराष्ट्रीय संरचना में उसे एक महत्वपूर्ण व्यक्ति माना जाता था।

हमें अभी किसी युद्ध की जरूरत नहीं', ताइवान मुद्दे पर बदले ट्रंप के सुर, जिनपिंग की धमकी का असर?

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अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन और ताइवान के बीच चल रहे भारी तनाव को लेकर एक बहुत बड़ा बयान दिया है। चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर ताइवान पर बदले नजर आ रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस समय अमेरिका को किसी भी युद्ध की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है, खासकर ऐसे युद्ध की जो 9,500 मील दूर हो।

चीन यात्रा के समापन पर फॉक्स न्यूज से बात करते हुए ट्रंप ने ताइवान को लेकर कहा, "हम युद्ध नहीं चाहते हैं और अगर आप स्थिति को वैसा ही बनाए रखते हैं, जैसी वह अभी है, तो मुझे लगता है कि चीन को इससे कोई दिक्कत नहीं होगी। लेकिन हम ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते कि कोई यह कहे, चलो हम स्वतंत्र हो जाते हैं, क्योंकि अमेरिका हमारा समर्थन कर रहा है।" इंटरव्यू में ट्रंप ने दोहराया कि ताइवान पर अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।

1982 के समझौते और हथियारों की बिक्री पर क्या बोले ट्रंप?

पत्रकारों ने जब ट्रंप से पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन द्वारा 1982 में दिए गए उस भरोसे के बारे में पूछा, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ताइवान को हथियार बेचने पर चीन से सलाह नहीं लेगा, तो ट्रंप ने इसका बेबाकी से जवाब दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि 1982 अब बहुत पुरानी बात हो चुकी है।

9,500 मील दूर एक युद्ध अमेरिका की आखिरी जरूरत-ट्रंप

ट्रंप ने साफ किया कि बातचीत के दौरान खुद चीनी राष्ट्रपति ने यह मुद्दा उठाया था। ट्रंप ने कहा कि वे 1982 के समझौते का हवाला देकर बातचीत से पीछे नहीं हट सकते थे। इसलिए दोनों नेताओं ने ताइवान और उसे हथियारों की बिक्री के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। ट्रंप ने कहा कि इस पर वह जल्द ही कोई फैसला लेंगे, लेकिन अभी 9,500 मील दूर एक युद्ध अमेरिका की आखिरी जरूरत है।

क्यों बदले ट्रंप के सुर?

ट्रंप का यह बयान तब आया है, जब शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ मीटिंग में ताइवान के मुद्दे पर चेतावनी दे दी थी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने डोनाल्ड ट्रंप से कहा कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। शी ने ट्रंप से कहा, अगर ताइवान के मुद्दे को ठीक से नहीं संभाला गया तो दोनों देशों में टकराव या यहां तक कि झड़प भी हो सकती।

चीन और ताइवान में तनाव की वजह

चीन ताइवान पर अपना अधिकार जताता है और इसे हासिल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना से भी इनकार नहीं करता है। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते का कहना है कि ताइवान को औपचारिक आजादी घोषित करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वह खुद को पहले से ही एक संप्रभु राष्ट्र मानता है। ताइवान के राष्ट्रपति को लेकर बीजिंग अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर चुका है। चीन ने उन्हें समस्या पैदा करने वाला और ताइवान जलडमरूमध्य में शांति भंग करने वाला बताया है। ताइवान में बहुत से लोग खुद को अलग देश का हिस्सा मानते हैं। हालांकि, उनमें से ज्यादातर मौजूदा स्थिति को बनाए रखने के पक्ष में हैं, जिसमें ताइवान न तो चीन से आजादी घोषित करता है और न ही उसके साथ होता है।वहीं, अमेरिका लंबे समय से ताइवान का समर्थन करता रहा है, जिसमें उसे आत्मरक्षा के लिए हथियार उपलब्ध कराना भी शामिल है।