ओवरलोड ट्रक रिश्वत मामला: लखनऊ, रायबरेली और फतेहपुर के एआरटीओ निलंबित


लखनऊ। ओवरलोड वाहनों से भारी वसूली कर पास कराने के बड़े भ्रष्टाचार सिंडिकेट का पर्दाफाश होने के बाद उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। गुरुवार को लखनऊ के एआरटीओ प्रवर्तन राजीव कुमार बंसल, रायबरेली के एआरटीओ अंबुज और फतेहपुर की एआरटीओ पुष्पांजलि मित्रा को निलंबित कर दिया गया है। सभी अधिकारियों को मुख्यालय से संबद्ध कर डिपार्टमेंटल जांच शुरू कर दी गई है।

जांच झांसी के उपपरिवहन आयुक्त केडी सिंह गौर को सौंपी गई

मामले की जांच झांसी के उपपरिवहन आयुक्त केडी सिंह गौर को सौंपी गई है।ये कार्रवाई उस समय हुई है जब पिछले नवंबर में एसटीएफ ने मौरंग, गिट्टी और बालू के ओवरलोड ट्रकों को रिश्वत लेकर पास कराने वाले सिंडिकेट का खुलासा किया था। इस मामले में लखनऊ के मड़ियांव, रायबरेली के लालगंज और उन्नाव में एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच में शामिल लगभग 25 लोगों के नाम सामने आए, जिनमें परिवहन विभाग के शीर्ष अधिकारी और दलाल शामिल हैं।

राजीव कुमार बंसल एफआईआर के बाद से गायब

सूत्रों के अनुसार, राजीव कुमार बंसल एफआईआर के बाद से गायब हैं। उनका मोबाइल बंद है और उन्होंने स्वास्थ्य कारण बताकर छुट्टी ले रखी है। बताया जा रहा है कि उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था, जिसे खारिज कर दिया गया।ओवरलोड वाहनों से वसूली के इस बड़े खेल में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। 48 दिन की लंबी चुप्पी के बाद यह निलंबन कार्रवाई हुई है।

पहले ही लखनऊ के पीटीओ निलंबित

परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने पहले ही लखनऊ के पीटीओ मनोज कुमार, रायबरेली की रेहाना बानो और फतेहपुर के अखिलेश चतुर्वेदी को निलंबित किया था। इसके अलावा, लखनऊ के प्रवर्तन पर्यवेक्षक अनुज, उन्नाव के प्रवर्तन पर्यवेक्षक इंद्रजीत सिंह, प्रवर्तन सिपाही रणजीत कुमार और प्रदीप सिंह, तथा रायबरेली के प्रवर्तन चालक नौशाद को भी निलंबित किया जा चुका है।

खुलासे ने परिवहन विभाग में हलचल मचा दी

इस भ्रष्टाचार के खुलासे ने परिवहन विभाग में हलचल मचा दी है और सवाल खड़े किए हैं कि इतने बड़े खेल के बावजूद कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई।विशेष जांच जारी – STF और परिवहन विभाग की टीम मामले की गहनता से छानबीन कर रही है और अगले कुछ दिनों में और अधिकारियों के नाम सामने आने की उम्मीद है।
भ्रष्टाचार निवारण संगठन, यूपी की बांदा इकाई ने रिश्वतखोरी में दो को किया गिरफ्तार
लखनऊ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ लागू की गई “जीरो टॉलरेंस” नीति और पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण के सख्त निर्देशों के अनुपालन में भ्रष्टाचार निवारण संगठन, यूपी लगातार प्रभावी और कठोर कार्रवाई कर रहा है। इसी क्रम में आज दिनांक 01.01.2026 को भ्रष्टाचार निवारण संगठन, बांदा इकाई ने चित्रकूट जिले में महत्वपूर्ण कार्रवाई की।
सूचना के आधार पर निरीक्षक श्री जाकिर हुसैन के नेतृत्व में टीम ने उपनिबंधन कार्यालय कर्वी, चित्रकूट से कनिष्ठ लिपिक वली उज्जमा और प्राइवेट मुंशी आनंद पाल को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि दोनों ने ग्राम नोनार, थाना पहाड़ी, जनपद चित्रकूट से बैनामा करवाने के एवज में 10,000 रुपये की अवैध धनराशि की मांग की थी।
गिरफ्तारी के समय आरोपियों से रिश्वत की गई रकम भी बरामद की गई। दोनों आरोपी अब विधिक कार्रवाई के तहत सख्त कानूनी प्रक्रिया के दायरे में हैं।
भ्रष्टाचार निवारण संगठन के अधिकारियों ने बताया कि इस कार्रवाई का उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों और आम जनता के बीच भ्रष्टाचार को पूरी तरह समाप्त करना है। टीम ने कहा कि संगठन लगातार ट्रैप के माध्यम से सरकारी कार्यालयों में होने वाले भ्रष्टाचार की जांच कर रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश जाता है कि उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगा। अधिकारियों ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रष्टाचार की शिकायत तुरंत संगठन को रिपोर्ट करें ताकि दोषियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई की जा सके।
भ्रष्टाचार निवारण संगठन की इस कार्रवाई को स्थानीय मीडिया और जनता ने सराहा है। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी इसी तरह की निरंतर कार्रवाई जारी रहेगी और राज्य के प्रत्येक जिले में भ्रष्टाचार मुक्त वातावरण बनाने के लिए कड़ा रुख अपनाया जाएगा।
अखिलेश यादव ने नए साल पर कार्यकर्ताओं और समाजसेवी संगठनों से की मुलाकात, भाजपा पर कसा निशाना
लखनऊ।समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नए साल के पहले दिन पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं, विधायकों, पत्रकारों और विभिन्न समाजसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नया वर्ष संकल्प और जिम्मेदारी का समय है।
अखिलेश यादव ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर, डॉ. लोहिया और नेताजी मुलायम सिंह यादव के मार्गदर्शन पर चलते हुए समाज को खुशहाली की ओर ले जाना होगा। उन्होंने भाजपा सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि प्रदेश में मंहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था चरम पर हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा कमजोर हो चुकी है और कमजोर होने पर वह साम्प्रदायिकता फैलाती है।
भूमाफियाओं को संरक्षण, सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और किसानों की समस्याओं — जैसे खाद की कमी, कालाबाजारी और फसलों के उचित मूल्य न मिलने — पर भी अखिलेश ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भाजपा पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक विरोधी नीतियों के जरिए जनता के हितों के खिलाफ काम कर रही है।
समाजवादी पार्टी को उन्होंने जनता के हितों की सच्ची लड़ाई लड़ने वाली पार्टी बताया। उन्होंने सरकार बनने पर महिलाओं को प्रतिवर्ष 40 हजार रुपये देने, किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने और बिजली संकट खत्म करने का वादा किया।
नए साल के अवसर पर रायबरेली के शिवा विश्वकर्मा ने अखिलेश यादव को संगीत बजाने वाला छोटा ट्रैक्टर भेंट किया, जबकि लक्ष्मण निषाद ने उन्हें सिंघाड़ा भेंट किया। इस मौके पर बाटी-चोखा सहभोज का आयोजन भी किया गया, जिसमें कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मिलकर भोजन किया। अखिलेश ने कहा कि लिट्टी-चोखा या बाटी-चोखा, समाजवादियों के लिए यह समानता और एकता का प्रतीक है।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव, नेता विरोधी दल माता प्रसाद पाण्डेय सहित कई वरिष्ठ नेता, सांसद, विधायक और पदाधिकारी उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भी अखिलेश यादव से मिलकर नववर्ष की बधाई दी।
यूपी सरकार ने कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के तैनाती-पट्टे में बड़ा फेरबदल किया
लखनऊ।उत्तर प्रदेश सरकार ने 21 आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों और तैनाती में व्यापक बदलाव किया है। इसमें सचिव, प्रमुख सचिव और विशेष सचिव स्तर के कई अफसरों को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह बदलाव प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने और विभागीय समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है।
मुख्य फेरबदल के तहत अपर्णा यू, जो सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा थीं, उन्हें अब प्रमुख सचिव राजस्व विभाग का जिम्मा दिया गया है। वहीं एसवीएस रंगाराव को सदस्य न्यायिक राजस्व परिषद और निदेशक भूमि अध्याप्ति से प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय, राष्ट्रीय एकीकरण और सामान्य प्रशासन विभाग बनाया गया है।
अखंड प्रताप सिंह को विशेष सचिव निर्वाचन से सचिव निर्वाचन का पद दिया गया है। नेहा शर्मा को प्रभारी महानिरीक्षक निबंधक से स्थायी महानिरीक्षक निबंधक बनाया गया है। मोनिका रानी को प्रभारी महानिदेशक स्कूल शिक्षा से स्थायी महानिदेशक स्कूल शिक्षा का पदभार सौंपा गया है। योगेश कुमार को प्रभारी आयुक्त एवं निबंधक सहकारी समितियां से आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता बनाया गया है।
डॉ. सारिका मोहन को सचिव वित्त से सचिव चिकित्सा शिक्षा विभाग और महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा बनाया गया है। नवीन कुमार जीएस को सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन, मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और परियोजना प्रशासक ग्रेटर शारदा क्षेत्र विकास प्राधिकरण से सदस्य न्यायिक राजस्व परिषद और निदेशक भूमि अध्याप्ति का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है।
अन्य महत्वपूर्ण तैनाती में भवानी सिंह खंगारोत को विशेष सचिव राजस्व परिषद से सचिव वित्त बनाया गया है। अरुण प्रकाश को विशेष सचिव नगर विकास से विशेष सचिव राजस्व विभाग, रविंद्र कुमार को प्रथम विशेष सचिव कृषि विभाग से सचिव नगर विकास और राज्य मिशन निदेशक अमृत एवं प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) का जिम्मा मिला है।
इसके अलावा, दिव्य प्रकाश गिरी को विशेष सचिव नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति से सचिव लोक निर्माण विभाग, कृष्ण कुमार को विशेष सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग से सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन बनाया गया है। सुधा वर्मा को विशेष सचिव महिला कल्याण एवं सचिव राज्य महिला आयोग से सचिव राजस्व विभाग, रेनू तिवारी को सचिव अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग से विशेष सचिव महिला कल्याण एवं सचिव राज्य महिला आयोग बनाया गया है।
राजेंद्र सिंह द्वितीय विशेष सचिव समाज कल्याण को वर्तमान पद के साथ सचिव अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग का अतिरिक्त प्रभार मिला है। संजीव सिंह को विशेष सचिव वित्त से निदेशक समाज कल्याण एवं प्रबंध निदेशक यूपी सिडको बनाया गया। डॉ. वंदना वर्मा को निदेशक पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं प्रबंध निदेशक पिछड़ा वर्ग वित्त विकास निगम से निदेशक महिला कल्याण एवं प्रबंध निदेशक महिला कल्याण निगम बनाया गया है।
उमेश प्रताप सिंह विशेष सचिव पिछड़ा वर्ग कल्याण को वर्तमान पद के साथ निदेशक पिछड़ा वर्ग कल्याण और प्रबंध निदेशक पिछड़ा वर्ग वित्त विकास निगम का अतिरिक्त दायित्व मिला है। कुमार प्रशांत को निदेशक समाज कल्याण एवं प्रबंध निदेशक यूपी सिडको से सचिव गृह विभाग और संदीप कौर को निदेशक महिला कल्याण एवं प्रबंध निदेशक महिला कल्याण निगम से सचिव वित्त विभाग का पदभार सौंपा गया है।
इस ताजा फेरबदल से विभागों में प्रशासनिक दक्षता और जिम्मेदारियों का पुनर्संतुलन करने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
नए साल पर धूप ने दी ठंड से राहत, कोहरे का असर धीरे-धीरे होगा कम
लखनऊ।उत्तर प्रदेश में नए साल की शुरुआत के साथ ही मौसम ने करवट ली है। प्रदेश के अधिकांश इलाकों में दिन चढ़ते ही तेज धूप निकलने से गलन और ठिठुरन से लोगों को कुछ राहत मिली। बीते कई दिनों से जारी कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बाद धूप खिलने से कई जिलों में दिन के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते आगरा और अलीगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी भी देखने को मिली। मौसम विभाग के अनुसार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के असर से प्रदेश के उत्तरी तराई और दक्षिणी हिस्सों में कुछ स्थानों को छोड़कर शुक्रवार से अगले दो दिनों तक कोहरे की तीव्रता में कमी आने की संभावना है।
हालांकि राहत के बीच पूर्वी तराई क्षेत्रों में कोहरे का खतरा अभी बना हुआ है। कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर और देवरिया के लिए शुक्रवार को घने कोहरे का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा प्रदेश के लगभग 40 जिलों में सुबह के समय कोहरा छाए रहने की संभावना जताई गई है।
बीते 24 घंटे के दौरान न्यूनतम तापमान के मामले में बाराबंकी प्रदेश में सबसे ठंडा जिला रहा, जहां रात का तापमान 3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं गोरखपुर में न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री और हरदोई में 4.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. अतुल कुमार सिंह के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के असर से फिलहाल तापमान में गिरावट का सिलसिला थम गया है। आने वाले तीन दिनों में दिन और रात के तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे ठंड से और राहत मिलने की उम्मीद है।
मौसम विभाग ने लोगों को कोहरे के दौरान सतर्क रहने, खासकर सुबह और रात के समय वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
यूपी में आज से खुलेंगे माध्यमिक विद्यालय, बदला गया स्कूलों का समय
लखनऊ।उत्तर प्रदेश में शीतलहर के बीच माध्यमिक विद्यालयों के संचालन को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया है। प्रदेश के सभी सरकारी व सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूल 2 जनवरी (शुक्रवार) से दोबारा खुल जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 29 दिसंबर से 1 जनवरी तक अवकाश घोषित किया गया था, जो अब समाप्त हो रहा है।
सर्दी के प्रकोप को देखते हुए विद्यालयों के समय में अस्थायी बदलाव किया गया है। अब माध्यमिक स्कूल सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक संचालित होंगे। पहले विद्यालयों का समय सुबह 9:30 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक था, जिसे एक घंटे कम कर दिया गया है। शासन ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश प्रदेश के सभी माध्यमिक विद्यालयों पर अनिवार्य रूप से लागू होगा।
वहीं, प्राथमिक विद्यालयों में शीतकालीन अवकाश पहले से ही घोषित है। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक कुल 15 दिनों का अवकाश रहेगा। यह अवकाश परिषद के वार्षिक अवकाश कैलेंडर में पहले से दर्ज है। निजी विद्यालयों में शीतकालीन अवकाश की तिथियां अलग-अलग होती हैं, जिन्हें उनके शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार तय किया जाता है। हालांकि अत्यधिक ठंड की स्थिति में जिलाधिकारी अपने स्तर पर अवकाश घोषित कर सकते हैं, जिसका पालन निजी स्कूलों को भी करना अनिवार्य होता है।
इसी बीच माध्यमिक शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026 के लिए विद्यालयों का अवकाश कैलेंडर भी जारी कर दिया है। विभाग के अनुसार, रविवार और ग्रीष्मकालीन अवकाश को मिलाकर कुल 112 दिन विद्यालय बंद रहेंगे। बोर्ड परीक्षाओं के लिए 15 दिन निर्धारित किए गए हैं, जबकि कुल 238 दिन विद्यालयों में पठन-पाठन एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होंगी। नए साल का पहला सार्वजनिक अवकाश 3 जनवरी को हजरत अली के जन्मदिवस के अवसर पर रहेगा।
जारी कैलेंडर के अनुसार वर्ष 2026 में कुल 28 दिन सार्वजनिक अवकाश रहेंगे। गर्मी की छुट्टियां 21 मई से 30 जून तक निर्धारित की गई हैं। इसके अलावा विशेष परिस्थितियों में प्रधानाचार्य को अपने विवेक से तीन दिन का स्थानीय अवकाश घोषित करने का अधिकार होगा, जिसकी सूचना विद्यालय के सूचना पट्ट पर चस्पा करने के साथ-साथ जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को देना अनिवार्य होगा।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव द्वारा जारी निर्देशों में यह भी कहा गया है कि माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत विवाहित महिला शिक्षिकाओं को करवा चौथ के दिन अवकाश मिलेगा। इसके अतिरिक्त क्षेत्र विशेष में हरितालिका तीज/हरियाली तीज, संकठा चतुर्थी, हलषष्ठी, ललई छठ, जिउतिया व्रत और अहोई अष्टमी जैसे पर्वों पर महिला शिक्षिकाओं को उनके आवेदन पर किसी भी दो दिनों का अवकाश दिया जा सकेगा।
कैलेंडर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय पर्वों पर विद्यालयों में अनिवार्य रूप से कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शोक सभाएं केवल विद्यालय से जुड़े शिक्षक, कर्मचारी या छात्र-छात्रा के निधन की स्थिति में ही होंगी। स्थानीय अवकाश जिलाधिकारी द्वारा जारी अवकाश तालिका के अनुसार मान्य होंगे। इसके अलावा महापुरुषों, स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारियों और समाज सुधारकों की जयंती पर विद्यालयों में कम से कम एक घंटे की गोष्ठी या सेमिनार आयोजित किया जाएगा। यदि संबंधित दिवस पर अवकाश होता है, तो अगले कार्यदिवस पर कार्यक्रम आयोजित करना अनिवार्य होगा।
निजीकरण के विरोध में 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल, यूपी के एक लाख से अधिक बिजली कर्मी होंगे शामिल
लखनऊ।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने बिजली के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में आगामी 12 फरवरी को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल में उत्तर प्रदेश के एक लाख से अधिक बिजली कर्मियों के शामिल होने का ऐलान किया है। नए साल के पहले दिन, निजीकरण के खिलाफ चल रहे आंदोलन के 400 दिन पूरे होने पर प्रदेशभर में बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर “विरोध दिवस” मनाया।
संघर्ष समिति ने बताया कि नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर देशभर के करीब 27 लाख बिजली कर्मी 12 फरवरी को एक दिवसीय हड़ताल पर रहेंगे। यह हड़ताल उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया रद्द कराने और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को वापस लेने की मांग को लेकर की जा रही है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि आज हुई कोर कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि निजीकरण और बिजली कर्मियों पर की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक निजीकरण का फैसला पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता।
हड़ताल की तैयारी को मजबूत करने के लिए संघर्ष समिति ने जनवरी माह में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में छह बड़ी बिजली महापंचायत आयोजित करने का निर्णय लिया है। ये महापंचायतें वाराणसी, ओबरा/अनपरा, आगरा, केस्को, मेरठ और लखनऊ में आयोजित होंगी। इन महापंचायतों में बिजली कर्मियों के साथ-साथ किसान, आम उपभोक्ता और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जनवरी माह में निजीकरण के विरोध में प्रदेशव्यापी सघन दौरा भी करेंगे और बिजली कर्मियों व आम जनता को निजीकरण से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करेंगे।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि 25 नवंबर 2024 को पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का एकतरफा निर्णय घोषित कर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने ऊर्जा निगमों का कार्य वातावरण पूरी तरह बिगाड़ दिया है। समिति ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान भी बिजली कर्मी उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक सेवाएं बनाए हुए हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि अब समय आ गया है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन निजीकरण का फैसला तत्काल निरस्त करे और आंदोलन के दौरान की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस ले। इसी मांग को लेकर आज प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं में बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
नए साल पर योगी सरकार का बड़ा तोहफा

* अब घर-दुकान का नक्शा होगा मिनटों में पास, दफ्तरों के चक्कर खत्म


लखनऊ। नए साल की शुरुआत के साथ योगी सरकार ने प्रदेशवासियों को बड़ी राहत दी है। अब मकान या दुकान का नक्शा पास कराने के लिए लोगों को विकास प्राधिकरण और सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार ने नए सॉफ्टवेयर के जरिए पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और सरल बना दिया है।

नए सिस्टम के तहत भूखण्ड स्वामी खुद अपने मकान या दुकान का नक्शा ऑनलाइन आवेदन करके स्वीकृत कर सकेंगे। आवेदन करने के कुछ ही मिनटों में नक्शा पास होने की सुविधा दी गई है। यह व्यवस्था नए बिल्डिंग बायलॉज के अंतर्गत लागू की गई है।

सरकार ने इसे फास्ट ट्रैक सिस्टम नाम देते हुए  ‘फास्टपास’  लागू किया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और समय की बचत होगी। अधिकारियों के अनुसार, इस नई व्यवस्था से आम नागरिकों को राहत मिलेगी, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और भवन निर्माण प्रक्रिया तेज होगी।

नए सॉफ्टवेयर और नियमों के लागू होने से प्रदेश में भवन निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाएं अब पहले से कहीं ज्यादा आसान और डिजिटल हो गई हैं।

साइबर ठगी के खिलाफ यूपी पुलिस की बड़ी पहल,नाना पाटेकर अभिनीत जागरूकता लघु फिल्म तैयार
लखनऊ। साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने और आमजन को डिजिटल ठगी से बचाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक विशेष जागरूकता लघु फिल्म का निर्माण किया है। इस फिल्म में प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर मुख्य भूमिका में नजर आ रहे हैं। यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साइबर अपराध रोकथाम संबंधी निर्देशों के क्रम में की गई है।
एक लाख लोगों को साइबर अपराध के प्रति किया जागरूक
पुलिस महानिदेशक यूपी राजीव कृष्ण ने साइबर अपराध की रोकथाम और जन-जागरूकता को अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल किया है। उनके मार्गदर्शन में प्रदेशभर में साइबर सुरक्षा को लेकर निरंतर अभियान चलाए जा रहे हैं। डीजीपी स्वयं 11 परिक्षेत्र स्तरीय साइबर जागरूकता कार्यशालाओं में ऑनलाइन शामिल होकर 25 से अधिक जनपदों के एक लाख से ज्यादा लोगों को साइबर अपराध के नए तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दे चुके हैं।
फिल्म हाल ही में कानपुर में सामने आई एक सच्ची घटना पर आधारित
इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा तैयार यह लघु फिल्म हाल ही में कानपुर में सामने आई एक सच्ची घटना पर आधारित है, जहां एक सतर्क नागरिक ने “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर की जा रही साइबर ठगी की कोशिश को अपनी सूझबूझ से नाकाम कर दिया था।फिल्म में नाना पाटेकर ने जागरूक नागरिक की भूमिका निभाई है, जबकि उनकी पत्नी के किरदार में अभिनेत्री लीना शर्मा नजर आई हैं। साइबर ठग बने फर्जी इंस्पेक्टर की भूमिका अभिनेता किशोर सोनी ने निभाई है, वहीं असली पुलिस अधिकारी के रूप में अभिनेता आदिल ईरानी दिखाई देते हैं।
“डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई वैधानिक प्रक्रिया नहीं होती
इस फिल्म का निर्देशन मशहूर निर्देशक राज शांडिल्य ने किया है, जो ड्रीम गर्ल और ड्रीम गर्ल-2 जैसी सफल फिल्मों के लिए जाने जाते हैं।लघु फिल्म के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया गया है कि “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई वैधानिक प्रक्रिया नहीं होती और किसी भी प्रकार की धमकी भरी कॉल, वीडियो कॉल या ऑनलाइन पैसों की मांग साइबर ठगी का संकेत हो सकती है।उत्तर प्रदेश पुलिस की यह पहल नागरिकों को सतर्क, जागरूक और डिजिटल रूप से सुरक्षित बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। यह साइबर जागरूकता लघु फिल्म उत्तर प्रदेश पुलिस के सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित की जा रही है।
नए साल में यूपी प्रशासनिक महकमे में बदलाव की सुगबुगाहट तेज

*प्रमोशन के बाद IAS–IPS अधिकारियों के व्यापक तबादलों की तैयारी, प्रदर्शन के आधार पर मिलेगी नई जिम्मेदारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नए साल की शुरुआत के साथ ही प्रशासनिक महकमे में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। दिसंबर माह में प्रमोशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य सरकार IAS और IPS अधिकारियों के व्यापक तबादलों की तैयारी कर रही है। प्रमोशन के बाद रैंक और स्केल में बदलाव होने से अधिकारियों की तैनाती में फेरबदल होना तय माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक कई जिलों के पुलिस कप्तानों के साथ-साथ रेंज और जोन स्तर पर भी जिम्मेदारियां बदली जा सकती हैं। पुलिस विभाग के अलावा IAS अधिकारियों के तबादलों की भी तैयारी चल रही है। प्रमोशन और वार्षिक मूल्यांकन के बाद जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और सचिव स्तर के कई अधिकारियों को नई तैनाती मिल सकती है।

बताया जा रहा है कि शासन विकास योजनाओं की प्रगति, कानून-व्यवस्था की स्थिति और आगामी प्रशासनिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यह फेरबदल करेगा। इस बार तबादलों में केवल रूटीन प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी, बल्कि कार्य प्रदर्शन, क्षेत्रीय अनुभव और प्रशासनिक संतुलन को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकारी सूत्रों का कहना है कि जिन अधिकारियों ने अपने वर्तमान पद पर बेहतर परिणाम दिए हैं, उन्हें बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपे जाने की संभावना है।