भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' लॉन्च, जानें क्या हैं इसकी खूबियां?
#skyrootaerospaceindiafirstprivateorbitalrocketvikram1_launched
भारत की निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने आज एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हैदराबाद स्थित निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस अपने पहले ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल ‘विक्रम-1’ को स्पेस में सफलतावपूर्वक लॉन्च कर दिया। विक्रम-1 ने 450 किलोमीटर दूर पृथ्वी की निचली कक्षा में पेलोड को सफलतापूर्वक स्थापित किया है। इसे मिशन ‘आगमन’ का नाम दिया गया था।
![]()
पीएम मोदी ने बताया ऐतिहासिक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि विक्रम-1 भारत का पहला निजी रूप से विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है, जिसे तेज और मांग के अनुरूप प्रक्षेपण सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह मिशन देश के युवाओं की प्रतिभा, इनोवेशन और उद्यमशीलता का प्रतीक है तथा 2020 में लागू अंतरिक्ष क्षेत्र के सुधारों के सकारात्मक परिणामों को दर्शाता है। उन्होंने देशवासियों विशेषकर युवाओं से इस ऐतिहासिक मिशन को देखने और स्काईरूट की सफलता की कामना करने का आग्रह किया।
![]()
इसरो के पूर्व अध्यक्ष ने भी दी शुभकामनाएं
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने भी स्काईरूट की टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह केवल एक रॉकेट का परीक्षण नहीं, बल्कि भारत की निजी रॉकेट निर्माण क्षमता के आगमन का प्रतीक है। उनके अनुसार इस मिशन की सफलता भारतीय उद्योग, स्टार्टअप और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर पैदा करेगी।
![]()
विक्रम-1 की विशेष विशेषताएं क्या हैं?
इस रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष प्रोग्राम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर विक्रम-1 रखा है। स्काईरूट एयरोस्पेस कंपनी के अनुसार, विक्रम-1 सैटेलाइट को 'लो अर्थ ऑर्बिट' में ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह तीन सॉलिड फ्यूल स्टेज और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल से ऑपरेट हुआ। इसकी क्षमता लगभग 350 किलोग्राम तक के पेलोड को 450 किलोमीटर की पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में स्थापित करने की है।
![]()
भारतीय स्पेस सेक्टर को क्या होगा फायदा?
स्पेस सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों के आने से भारत के स्पेस सेक्टर को भी बड़ा फायदा होगा। अब तक सैटेलाइट लॉन्च करने का काम मुख्य रूप से इसरो करता था। स्काईरूट जैसी निजी कंपनियों के आने से अब प्राइवेट सेक्टर भी इस क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाएगा। भारतीय निजी कंपनियां कम लागत में सैटेलाइट लॉन्च करने की सुविधा देंगी। इससे दुनिया की कई कंपनियां अपने सैटेलाइट लॉन्च कराने के लिए भारत का रुख कर सकती हैं। निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने से स्पेस सेक्टर में नए स्टार्टअप्स को मौका मिलेगा। साथ ही निवेश बढ़ेगा, नई नौकरियां पैदा होंगी और भारत का अंतरिक्ष उद्योग तेजी से आगे बढ़ेगा।







Jul 18 2026, 14:21
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
0- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
10.1k