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Jun 19 2021, 22:49

सुप्रीम कोर्ट की जज न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी ने बंगाल में चुनाव के दौरान हुई हिंसा के मामले की सुनवाई से खुद को  किया अलग,अब यह मामला भेजें जाएंगे दूसरे बेंच के पास 
  


नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की एक जज ने शुक्रवार को बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें कथित तौर पर भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई थी।

  

 न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी ने मामले से खुद को अलग करते हुए कहा,कि  "मैं मामले की सुनवाई नहीं करना चाहती।जस्टिस बनर्जी कोलकाता से भी हैं इस लिए यह निर्णय लिया।

 इस केस को लेकर पीड़ितों के परिवार केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच की मांग को लेकर अदालत गए थे।

 सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार से उस मामले में जवाब मांगा था, जिस पर राज्य ने कहा था कि याचिकाएं "राजनीति से प्रेरित" थीं और चाहती थीं कि उन्हें खारिज कर दिया जाए।

 राज्य ने यह भी कहा कि चुनाव के बाद होने वाली हर हिंसा को चुनाव के बाद की हिंसा नहीं कहा जा सकता।

 ममता बनर्जी सरकार ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट को भी सूचित किया था कि भाजपा के दो कार्यकर्ताओं की कथित हत्या के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

 जस्टिस बनर्जी के हटने से अब मामले को दूसरी बेंच के पास भेजा जाएगा।

 सामूहिक बलात्कार की दो पीड़िताओं ने भी अपने मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल या सीबीआई से अपील की है।

 जीवित बचे लोगों में से एक अनुसूचित जाति समुदाय की नाबालिग है, जिसके साथ 9 मई को मुर्शिदाबाद जिले में कथित रूप से सामूहिक बलात्कार किया गया था। दूसरा पूर्वी मिदनापुर जिले की 60 वर्षीय महिला है, जिसके साथ 4 मई को उसके 6 के सामने कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया गया था ।

दोनों ने दावा किया है कि यह राजनीति से प्रेरित हिंसा थी।
भाजपा ने आरोप लगाया कि अप्रैल-मई के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद उसके गुंडों ने भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी। महिला सदस्यों पर हमला किया, घरों में तोड़फोड़ की, पार्टी सदस्यों की दुकानों को लूट लिया और उसके कार्यालयों में तोड़फोड़ की।

 बंगाल सरकार ने कहा कि चुनाव के बाद की हिंसा "कुछ हद तक बेरोकटोक" थी जब चुनाव आयोग कानून और व्यवस्था का प्रभारी था।  शपथ ग्रहण समारोह समाप्त होने के बाद कैबिनेट ने आदेश बहाल कर दिया। 

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Jun 19 2021, 19:44

sharmabecomesvicepresidentofup
  

एके शर्मा बने यूपी बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष, डिप्टी सीएम बनने की अटकलों पर लगा विराम

  

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले बीजेपी में हलचल तेज हैं। योगी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की चर्चा के बीच पूर्व आईएएस ए के शर्मा को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। एके शर्मा को यूपी बीजेपी का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके साथ ही ए के शर्मा को डिप्टी सीएम बनाने की अटकलों पर विराम लग गया है।
बता दें कि चुनाव से ठीक पहले एके शर्मा के अचानक वीआरएस लेकर सयासी सफर शुरू किया। बीजेपी ने उन्हें अपना एमएलसी घोषित किया था। ए के शर्मा के एमएलसी बनने के बाद से ही उन्हें यूपी सरकार में डिप्टी सीएम व कैबिनेट में मंत्री बनने को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। अब आखिरकार शर्मा को उपाध्यक्ष पद दे दिया गया है।

योगी नहीं चाहते थे शर्मा को सरकार में मिले जिम्मेदारी ?
एके शर्मा को यूपी भेजे जाने के बाद से ऐसी भी खबरें आ रही थी कि सीएम योगी आदित्यनाथ इससे खास खुश नहीं थे। वो नहीं चाहते थे कि एके शर्मा को उनकी सरकार में अहम जिम्मेदारी मिले। इसके बाद योगी और केंद्रीय नेतृत्व में मनमुटाव की खबरें भी सामने आ रही थी। इसी बीच सीएम योगी आदित्यनाथ का अचानक दिल्ली दौरा हुआ। यहां योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह जैसे नेताओं से मुलाकात की। 

केन्द्रीय नेतृत्व को सीएम योगी की जिद्द के सामने झुकना पड़ा!
इस मुलाकात के बाद एके शर्मा को मिलने वाली जिम्मेदारी को लेकर भी तरह ततरह के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन अब एके शर्मा को उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद ये साफ हो चुका है कि केन्द्रीय नेतृत्व को सीएम योगी की जिद्द के सामने झुकना पड़ा !
क्योंकि पहले कहा जा रहा था कि योगी की आपत्ति के बावजूद एके शर्मा की सरकार में एंट्री हो सकती है, लेकिन फिलहाल योगी ने ऐसा होने नहीं दिया है. शर्मा को पार्टी संगठन की जिम्मेदारी मिली है, यानी फिलहाल योगी सरकार में उनका कोई बड़ा रोल नहीं होगा. अब ये देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव से पहले एके शर्मा को किस खांचे में फिट किया जाता है. 

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Jun 19 2021, 17:05

पीएम ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कार्यों की जमकर की तारीफ, बोले-पहली बार चुने गए सांसदों को भी दिया मौका
  


 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ट्वीट कर लोकसभा अध्‍यक्ष ओम बिरला के कार्यों की तारीफ की। कहा कि बीते दो वर्षों में ओम बिरला जी के कई कार्यों से संसदीय लोकतंत्र समृद्ध तो हुआ ही है साथ ही उत्पादकता में भी काफी वृद्धि दर्ज की गई है। कई ऐतिहासिक और जन-समर्थक कानून पारित हुए हैं। इनके लिए ओम बिरला जी को बधाई।  

  

ओम बिरला जी ने पहली बार चुने गए सांसद, युवा सांसदों और महिला सांसदों को सदन में बोलने का मौका दिया है। उन्होंने विभिन्न समितियों को भी मजबूत किया है जिनकी हमारे लोकतंत्र में भूमिका महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि हाल ही में ओम बिरला ने एक विशेष साक्षात्‍कार में बताया था कि कोरोना संकट में भी सदन की उत्पादकता 122 फीसद रही।

कहा था कि‍ कोरोना संकट के दौर में भले ही हमें बहुत कुछ सीमित करना पड़ा लेकिन कामकाज सीमित कभी नहीं रहा। कोविड के मुश्‍क‍िल वक्‍त में ज्यादा चर्चा हुई। दो साल में लोकसभा से 107 विधेयक पारित किए गए। जो सदस्य मौजूद थे उनमें उत्साह था। ये दो वर्ष कठिन थे लेकिन हमने अधिकतम सक्रियता दिखाई। मैं चाहूंगा कि शारीरिक दूरी और दूसरी सतर्कता के साथ संसद की नियमित बैठकें चलें।उल्लेखनीय है कि अभी तक 425 सदस्यों ने वैक्सीन ली है। कुछ तो मंत्री हैं। 

बाकी सदस्यों से हम आग्रह कर रहे हैं। हमने संसद के अंदर भी वैक्सीनेशन की व्यवस्था की थी। सबको खुद आगे बढ़कर इसे लेना होगा। 

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Jun 19 2021, 15:03

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300 भाजपा कार्यकर्ता टीएमसी में शामिल, पार्टी में शामिल किए जाने से पहले गंगाजल छिड़क कर किया गया शुद्धीकरण

  


बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी का पहले ही बेड़ा गर्क हो चुका है, अब चुनाव के बाद टीएमसी की सरकार बनने के बाद बीजेपी में भगदड़ मची है। मुकुल रॉय की घर  वापसी के बाद अब ग्राउंड लेवल के भाजपा कार्यकर्ता भी टीएमसी में लौटने लगे हैं। इसी क्रम में बंगाल के बीरभूम जिले में एक साथ 300 भाजपा कार्यकर्ता शुक्रवार को टीएमसी में वापस लौटे। 

गंगाजल छिड़क कर किया गया शुद्धीकरण
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, बीरभूम में तृणमूल कांग्रेस कार्यालय के सामने कम से कम 300 भाजपा समर्थक भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनकी मांग थी कि उन्हें टीएमसी में वापस लिया जाए। हालांकि, बाद में उन सभी को टीएमसी में शामिल कराया गया और गंगाजल छिड़क कर उनके दिमाग का शुद्धीकरण किया गया। बीजेपी कार्यकर्ताओं का यह भूख हड़ताल सुबह 8 बजे शुरू हुआ और यह तीन घंटे तक 11 बजे तक चला। इन्हें टीएमसी में शामिल कराने के वक्त गंगाजल से शुद्ध किया गया। 

इन तीन सौ कार्यकर्ताओं को टीएमसी का झंडा सौंपने वाले बानाग्राम के तृणमूल पंचायत प्रधान तुषार कांति मंडल ने कहा कि ये लोग पिछले कुछ दिनों से हमारी पार्टी में शामिल होने का अनुरोध कर रहे थे। आज वे पार्टी कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए और वापस लेने की अपील की। मैंने अपने नेताओं से बात की और उन्हें फिर से अपनी पार्टी में शामिल कराया।

भाजपा एक सांप्रदायिक पार्टी
गंगाजल के छिड़काव पर मंडल ने कहा कि भाजपा एक सांप्रदायिक पार्टी है। उसने अपने जहरीले विचारों को इनके दिमाग में डाला है और उनकी मानसिक शांति को खराब कर दिया है। इसलिए उन पर सभी प्रकार की अशांति (बुराइयों) से छुटकारा पाने के लिए शांति जल (पवित्र जल) छिड़का गया। यह उनकी शुद्धि के लिए नहीं था, बल्कि उनके मन की शुद्धि के लिए था जो भाजपा द्वारा प्रदूषित किए गए थे। 

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Jun 19 2021, 15:02

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300 भाजपा कार्यकर्ता टीएमसी में शामिल, पार्टी में शामिल किए जाने से पहले गंगाजल छिड़क कर किया गया शुद्धीकरण

  


बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी का पहले ही बेड़ा गर्क हो चुका है, अब चुनाव के बाद टीएमसी की सरकार बनने के बाद बीजेपी में भगदड़ मची है। मुकुल रॉय की घर  वापसी के बाद अब ग्राउंड लेवल के भाजपा कार्यकर्ता भी टीएमसी में लौटने लगे हैं। इसी क्रम में बंगाल के बीरभूम जिले में एक साथ 300 भाजपा कार्यकर्ता शुक्रवार को टीएमसी में वापस लौटे। 

गंगाजल छिड़क कर किया गया शुद्धीकरण
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, बीरभूम में तृणमूल कांग्रेस कार्यालय के सामने कम से कम 300 भाजपा समर्थक भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनकी मांग थी कि उन्हें टीएमसी में वापस लिया जाए। हालांकि, बाद में उन सभी को टीएमसी में शामिल कराया गया और गंगाजल छिड़क कर उनके दिमाग का शुद्धीकरण किया गया। बीजेपी कार्यकर्ताओं का यह भूख हड़ताल सुबह 8 बजे शुरू हुआ और यह तीन घंटे तक 11 बजे तक चला। इन्हें टीएमसी में शामिल कराने के वक्त गंगाजल से शुद्ध किया गया। 

इन तीन सौ कार्यकर्ताओं को टीएमसी का झंडा सौंपने वाले बानाग्राम के तृणमूल पंचायत प्रधान तुषार कांति मंडल ने कहा कि ये लोग पिछले कुछ दिनों से हमारी पार्टी में शामिल होने का अनुरोध कर रहे थे। आज वे पार्टी कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए और वापस लेने की अपील की। मैंने अपने नेताओं से बात की और उन्हें फिर से अपनी पार्टी में शामिल कराया।

भाजपा एक सांप्रदायिक पार्टी
गंगाजल के छिड़काव पर मंडल ने कहा कि भाजपा एक सांप्रदायिक पार्टी है। उसने अपने जहरीले विचारों को इनके दिमाग में डाला है और उनकी मानसिक शांति को खराब कर दिया है। इसलिए उन पर सभी प्रकार की अशांति (बुराइयों) से छुटकारा पाने के लिए शांति जल (पवित्र जल) छिड़का गया। यह उनकी शुद्धि के लिए नहीं था, बल्कि उनके मन की शुद्धि के लिए था जो भाजपा द्वारा प्रदूषित किए गए थे। 

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Jun 19 2021, 14:04

खतरा : गुजरात की साबरमती नदी में पाया गया कोरोना वायरस, पानी के सौंपल में मिला 25 प्रतिशत संक्रमण, शोधकर्ता चिंतित
  



साबरमती नदी के अलावा अहमदाबाद के दो बड़े तालाब (कांकरिया, चंदोला) में भी कोरोना वायरस के लक्षण मिले

  


-- आईआईटी गांधीनगर ने अहमदाबाद की साबरमती नदी से पानी के सैंपल लिए थे

                    

 गुजरात की सबसे महत्वपूर्ण साबरमती नदी में कोरोना वायरस पाया गया है। अहमदाबाद के बीचो-बीच से निकलने वाली साबरमती के पानी के सैंपल लिए गए थे, जिसमें 25 फीसदी में कोरोना संक्रमण मिला है।

 साबरमती नदी के अलावा अहमदाबाद के दो बड़े तालाब (कांकरिया, चंदोला) में भी कोरोना वायरस के लक्षण पाए गए हैं। बता दें कि साबरमती से पहले गंगा नदी से जुड़े अलग-अलग सीवेज में भी कोरोना वायरस पाया गया था, लेकिन अब प्राकृतिक जल में इस तरह कोरोना के लक्षण मिलने से चिंता बढ़ी है। 

आईआईटी गांधीनगर ने अहमदाबाद की साबरमती नदी से पानी के सैंपल लिए थे। इनका अध्ययन के बाद चौकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। प्रोफेसर मनीष कुमार के मुताबिक, जांच के दौरान पानी के 25 फीसदी सैंपल में कोरोना वायरस की मौजूदगी का पता चला है जो काफी खतरनाक है।

शोध के लिए हर हफ्ते लिया गया था सैंपल

इस शोध को लेकर आईआईटी गांधीनगर के पृथ्वी और विज्ञान विभाग के प्रोफेसर मनीष कुमार ने बताया कि पानी के यह सैंपल नदी से 3 सितंबर से 29 दिसंबर 2020 तक हर सप्ताह लिए गए थे. 

सैंपल लेने के बाद इसमें जांच की गई तो कोरोना वायरस के संक्रमित जीवाणु पाए गए।
मनीष कुमार के मुताबिक, साबरमती नदी से 694, कांकरिया तालाब से 549 और चंदोला तालाब से 402 सैंपल लेकर उसकी जांच की गई. इन सैंपल में ही कोरोना वायरस पाया गया है। शोध में माना जा रहा है कि वायरस प्राकृतिक जल में भी जीवित रह सकता है। 

इसलिए शोधकर्ताओं का मानना है कि देश की सभी प्राकृतिक जल स्त्रोत की जांच होनी चाहिए, क्योंकि कोरोना की दूसरी लहर में वायरस के कई गंभीर म्यूटेशन भी देखने मिले हैं। 

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Jun 19 2021, 13:56

दिल्ली सरकार ने कोरोना के बीच बढ़ाया मजदूरों का वेतन, सरकारी खर्चों में कई कटौती, 55 लाख श्रमिकों को फायदा, एक अप्रैल से ही होगा प्रभावी
  



-- दिल्ली में मजदूरों को मिलने वाला न्यूनतम वेतन देश के अन्य किसी भी राज्य की तुलना में सबसे अधिक 

  



दिल्ली सरकार ने कोविड महामारी के बीच बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने मजदूरों का न्यूनतम वेतन बढ़ा दिया है। शुक्रवार को श्रम मंत्रालय की तरफ से महंगाई भत्ता बढ़ाने का आदेश जारी कर इसकी घोषणा की गई। उल्लेखनीय है कि निर्णय के अनुसार नई दरें 1 अप्रैल से लागू हैं। इस तरह अब दिल्ली में मजदूरों को मिलने वाला न्यूनतम वेतन देश के अन्य किसी भी राज्य की तुलना में सबसे अधिक हो गई है। इस बढ़ोतरी से कम से कम 55 लाख कॉन्ट्रैक्चुअल श्रमिकों को फायदा पहुंचेगा। सरकार के इस निर्णय से अकुशल, अर्धकुशल और अन्य श्रमिकों को फायदा होगा। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और श्रम मंत्री मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार को दिल्ली के अकुशल, अर्धकुशल और अन्य श्रमिकों का महंगाई भत्ता बढ़ाने का आदेश जारी किया है। इस आदेश में सभी श्रमिकों और कर्मचारियों को बढ़ी हुई दर के साथ भुगतान सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है। मनीष सिसोदिया ने कहा कि गरीब और मजदूर वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए महामारी के दौरान यह बड़ा कदम उठाया गया है। इसका लाभ लिपिक और सुपरवाइजर वर्ग के कर्मचारियों को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र के ऐसे श्रमिकों को महंगाई भत्ते पर रोक नहीं लगाई जा सकती है, जिन्हें सामान्य तौर पर केवल न्यूनतम मजदूरी मिलती है। इसलिए दिल्ली सरकार ने महंगाई भत्ते जोड़कर नए न्यूनतम वेतन की घोषणा की है।

सभी वर्ग के मजदूरों को लाभ

 महंगाई भत्ते के तहत अकुशल मजदूरों का हर महीने का वेतन अब 15,492 से बढ़ाकर 15,908 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों का 17,069 से बढ़ाकर 17,537 रुपये और कुशल श्रमिकों का मासिक वेतन 18,797 से बढ़ाकर 19,291 रुपये किया गया है। सुपरवाइजर और लिपिक वर्ग के कर्मचारियों की न्यूनतम मजदूरी की दरें बढ़ाई गई हैं। इनमें गैरमैट्रिक कर्मचारियों का हर महीने वेतन 17,069 से बढ़ाकर 17,537 रुपये, मैट्रिक लेकिन गैरस्नातक कर्मचारियों का मासिक वेतन 18,797 से बढ़ाकर 19,291 रुपये और स्नातक और इससे अधिक शैक्षणिक योग्यता वाले कर्मचारियों का हर महीने वेतन 20,430 से बढ़ाकर 20,976 रुपये कर दिया गया है। 

मनीष सिसोदिया बोले- सरकारी खर्चों में की गई कटौती 

मनीष सिसोदिया ने कहा कि हम सरकार के कई खर्चों में कटौती कर रहे हैं, लेकिन मजदूरों के हितों का ध्यान रख उनका महंगाई भत्ता बढ़ाने का निर्णय लिया है। कोरोना के कारण आज समाज का हर वर्ग आर्थिक रूप से भी प्रभावित हुआ है। ऊपर से दाल और तेल जैसी रोजाना के उपभोग की वस्तुएं भी महंगी हो गई हैं। उम्मीद करता हूं कि इस बढ़ोतरी से मजदूर भाइयों को सहायता मिलेगी। उपमुख्यमंत्री ने साझा किया कि दिल्ली में मजदूरों को मिलने वाला न्यूनतम वेतन देश के अन्य किसी भी राज्य की तुलना में सबसे अधिक है। इस बढ़ोतरी से कम से कम 55 लाख कॉन्ट्रैक्चुअल श्रमिकों को फायदा पहुंचेगा। 

आंकड़ों में जानिए, ऐसे बढ़ी पारिश्रमिक

अकुशल मजदूर	15492	15908
अर्धकुशल मजदूर	17069	17537
कुशल मजदूर	18797	19291 

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Jun 19 2021, 13:36

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20 हजार करोड़ के पार हुई स्वीस बैंकों में भारतीयों की पूंजी, मोदी सरकार ने रिपोर्ट का किया खंडन
काला धन वापस लाने का वादा निभा नहीं सकी मोदी सरकार ?

स्वीस बैंकों में जमा भारतीयों का काला धन क्या सरकार वापस लाने में नाकाम रही है ? ये सवाल एक बार फिर उठने लगे हैं। दरअसल, स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक की तरफ से गुरुवार को जारी सालाना डेटा के मुताबिक, साल 2020 के दौरान स्विस बैंकों में भारतीय नागरिकों और संस्थानों व कंपनियों का जमा धन बढ़कर 2.55 अरब स्विस फ्रैंक (करीब 20,700 करोड़ रुपये) से अधिक हो गया। 2019 में स्विस बैंकों में जमा धन 6628 करोड़ रुपए थे। यानी साल 2020 में स्विस बैंकों में कुल जमा राशि साल 2019 की तुलना में बढ़ कर 286 प्रतिशत हो गई। कुल जमा राशि 13 साल में सबसे ज्यादा है, जो साल 2007 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर है।

                    

हालांकि इस रिपोर्ट और उसके बाद सरकार पर उठ रहे सवालों के बाद केन्द्र ने उन रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें ये दावा किया गया है।सरकार ने शनिवार को उन खबरों का खंडन किया और कहा कि उसने स्विस अधिकारियों से जमा पैसों के बारे में जानकारी सत्यापित करने के लिए उसने संपर्क साधा है और सूचना की मांग की है।  

रिपोर्ट पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत और स्विटजरलैंड ने कर मामलों में पारस्परिक प्रशासनिक सहायता (एमएएसी) पर बहुपक्षीय सम्मेलन पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों ने बहुपक्षीय सक्षम प्राधिकरण समझौते (एमसीए) पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जिसके अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2018 के लिए सालाना वित्तीय खाते की जानकारी साझा करने के लिए दोनों देशों के बीच सूचना का स्वत: आदान-प्रदान हो रहा है। 

मंत्रालय ने आगे कहा कि भारत और स्विटजरलैंड ने दोनों देशों के निवासियों के संबंध में वित्तीय खाते की जानकारी का आदान-प्रदान साल 2019 और 2020 में भी किया है। वित्तीय खातों की जानकारी के आदान-प्रदान के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था को देखने पर (जिसका विदेशों में अघोषित संपत्ति के जरिए कर चोरी पर महत्वपूर्ण निवारक प्रभाव है) स्विस बैंकों में जमा में वृद्धि की कोई महत्वपूर्ण संभावना नहीं दिखती है।'

इधऱ कांग्रेस ने स्विस बैंकों में जमा भारतीय नागरिकों का व्यक्तिगत पैसा और कंपनियों का पैसा बढ़कर 20,700 करोड़ रुपये से अधिक हो जाने को लेकर शुक्रवार को केंद्र पर निशाना साधा और कहा कि सरकार श्वेत पत्र लाकर देशवासियों को बताए कि यह पैसा किनका है और विदेशी बैंकों में जमा कालेधन को वापस लाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?  पार्टी प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने से पहले भाजपा ने कालाधन लाने और लोगों के खातों में 15-15 लाख रुपये जमा करने का वादा किया था, लेकिन सात साल बीत जाने के बावजूद उसने अपने इस वादे को पूरा करने के लिए कुछ नहीं किया।

रिपोर्ट के मुताबिक स्विस बैंकों में भारतीयों का व्यक्तिगत पैसा और कंपनियों का पैसा 2020 में बढ़कर 2.55 अरब स्विस फ्रैंक (20,700 करोड़ रुपये से अधिक) हो गया। यह वृद्धि नकद जमा के तौर पर नहीं बल्कि प्रतिभूतियों, बांड समेत अन्य वित्तीय उत्पादों के जरिये रखी गई होल्डिंग से हुई है। हालांकि, इस दौरान ग्राहकों की  जमा राशि कम हुई है। 

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Jun 19 2021, 13:35

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20 हजार करोड़ के पार हुई स्वीस बैंकों में भारतीयों की पूंजी, मोदी सरकार ने रिपोर्ट का किया खंडन
काला धन वापस लाने का वादा निभा नहीं सकी मोदी सरकार ?

स्वीस बैंकों में जमा भारतीयों का काला धन क्या सरकार वापस लाने में नाकाम रही है ? ये सवाल एक बार फिर उठने लगे हैं। दरअसल, स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक की तरफ से गुरुवार को जारी सालाना डेटा के मुताबिक, साल 2020 के दौरान स्विस बैंकों में भारतीय नागरिकों और संस्थानों व कंपनियों का जमा धन बढ़कर 2.55 अरब स्विस फ्रैंक (करीब 20,700 करोड़ रुपये) से अधिक हो गया। 2019 में स्विस बैंकों में जमा धन 6628 करोड़ रुपए थे। यानी साल 2020 में स्विस बैंकों में कुल जमा राशि साल 2019 की तुलना में बढ़ कर 286 प्रतिशत हो गई। कुल जमा राशि 13 साल में सबसे ज्यादा है, जो साल 2007 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर है।

                    

हालांकि इस रिपोर्ट और उसके बाद सरकार पर उठ रहे सवालों के बाद केन्द्र ने उन रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें ये दावा किया गया है।सरकार ने शनिवार को उन खबरों का खंडन किया और कहा कि उसने स्विस अधिकारियों से जमा पैसों के बारे में जानकारी सत्यापित करने के लिए उसने संपर्क साधा है और सूचना की मांग की है।  

रिपोर्ट पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत और स्विटजरलैंड ने कर मामलों में पारस्परिक प्रशासनिक सहायता (एमएएसी) पर बहुपक्षीय सम्मेलन पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों ने बहुपक्षीय सक्षम प्राधिकरण समझौते (एमसीए) पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जिसके अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2018 के लिए सालाना वित्तीय खाते की जानकारी साझा करने के लिए दोनों देशों के बीच सूचना का स्वत: आदान-प्रदान हो रहा है। 

मंत्रालय ने आगे कहा कि भारत और स्विटजरलैंड ने दोनों देशों के निवासियों के संबंध में वित्तीय खाते की जानकारी का आदान-प्रदान साल 2019 और 2020 में भी किया है। वित्तीय खातों की जानकारी के आदान-प्रदान के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था को देखने पर (जिसका विदेशों में अघोषित संपत्ति के जरिए कर चोरी पर महत्वपूर्ण निवारक प्रभाव है) स्विस बैंकों में जमा में वृद्धि की कोई महत्वपूर्ण संभावना नहीं दिखती है।'

इधऱ कांग्रेस ने स्विस बैंकों में जमा भारतीय नागरिकों का व्यक्तिगत पैसा और कंपनियों का पैसा बढ़कर 20,700 करोड़ रुपये से अधिक हो जाने को लेकर शुक्रवार को केंद्र पर निशाना साधा और कहा कि सरकार श्वेत पत्र लाकर देशवासियों को बताए कि यह पैसा किनका है और विदेशी बैंकों में जमा कालेधन को वापस लाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?  पार्टी प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने से पहले भाजपा ने कालाधन लाने और लोगों के खातों में 15-15 लाख रुपये जमा करने का वादा किया था, लेकिन सात साल बीत जाने के बावजूद उसने अपने इस वादे को पूरा करने के लिए कुछ नहीं किया।

रिपोर्ट के मुताबिक स्विस बैंकों में भारतीयों का व्यक्तिगत पैसा और कंपनियों का पैसा 2020 में बढ़कर 2.55 अरब स्विस फ्रैंक (20,700 करोड़ रुपये से अधिक) हो गया। यह वृद्धि नकद जमा के तौर पर नहीं बल्कि प्रतिभूतियों, बांड समेत अन्य वित्तीय उत्पादों के जरिये रखी गई होल्डिंग से हुई है। हालांकि, इस दौरान ग्राहकों की  जमा राशि कम हुई है। 

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Jun 19 2021, 11:53

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आगरा के पारस हॉस्पिटल को क्लीन चिट, ऑक्सीजन मॉक ड्रिल को लेकर सुर्खियों में आया था अस्पताल

  

आगरा में ऑक्सीजन के लिए मॉक ड्रिल से सुर्खियों में आए पारस हॉस्पिटल को क्लीन चिट दे दी गई है। अस्पताल द्वारा 'मॉकड्रिल' के क्रम में ऑक्सीजन आपूर्ति बंद होने से 22 लोगों की मौत के विवाद के आरोपों की जांच के लिए गठित 4 सदस्यीय डेथ ऑडिट कमेटी ने शुक्रवार को अपनी जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी। जिसमें पारस अस्पताल के संचालक को क्लीन चिट दी गई है। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पारस हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की कमी नहीं थी।

जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया है कि वीडियो एक बनाया गया था। जिसे टुकडों में वायरल किया गया था। इसके पीछे की मंशा क्या थी? यह वीडियो किसने बनाया था? इसकी जांच पुलिस से कराने की सिफारिश की गई है। जांच कमेटी ने 26 अप्रैल से 27 अप्रैल को 16 मरीजों की बात स्वीकारी है, मगर, मरीजों की मौत की वजह गंभीर बीमारियां बताई हैं।

बता दें कि कुछ दिनों पहले पारस अस्पताल के प्रबंधन द्वारा कथित ऑक्सीजनन मॉक ड्रील को लेकर एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में एक डॉक्टर यह स्वीकार करता है कि मॉक ड्रिल के दौरान पांच मिनट के लिए ऑक्सीजन बंद करने से 22 लोगों की मौत हो गई।इस मामले ने काफी तूल भी पकड़ा था। 
जिसके बाद अस्पताल का लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया था। हालांकि इस मामले में पहले ही आगरा के जिलाधिकारी पी.एन. सिंह ने ऑक्सीजन की किसी भी कमी से इनकार किया था, जिससे मौतें हो सकती थीं। उस वक्त उन्होंने कहा था कि यदि मृतक के परिजन शिकायत करते हैं, तो पूरी जांच के आदेश दिए जा सकते हैं। जिसके बाद जिला प्रशासन ने जांच समिति गठित की थी।जिसने अब अस्पताल को क्लीन चिट दे दी है।