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*भारत के 3 महान ग्रंथों का दुनिया में बजा डंका, UNESCO की लिस्ट में शामिल

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भारत की साहित्यिक, ऐतिहासिक और बौद्धिक विरासत का दुनिया में डंका बजा है। भारत की तीन प्रमुख प्राचीन भारतीय कृतियों को वैश्विक पहचान मिली है। महाभारत, अर्थशास्त्र और राजतरंगिनी को यूनेस्को के लिस्ट में शामिल किया गया है।

कश्मीर के इतिहास पर आधारित कल्हण की 12वीं सदी की रचना 'राजतरंगिणी', महाकाव्य 'महाभारत' और कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' को यूनेस्को के 'मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रीजनल रजिस्टर फॉर एशिया एंड द पैसिफिक' में शामिल किया गया है। तीनों ग्रंथों को रजिस्टर में शामिल कराने के लिए नामांकन दस्तावेज तैयार करने में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) की अहम भूमिका रही।

सरकार ने बताया-देश के लिए गौरव का क्षण

संस्कृति मंत्रालय ने इस घोषणा को साझा करते हुए इसे देश के लिए गौरव का क्षण बताया। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र शेखावत ने कहा, “ये तीनों कृतियाँ भारत की बौद्धिक विरासत के विशिष्ट पहलुओं– ऐतिहासिक दस्तावेजीकरण, महाकाव्य साहित्य और राजनीतिक अर्थव्यवस्था–का प्रतिनिधित्व करती हैं। इनके शामिल होने से यूनेस्को के क्षेत्रीय दस्तावेजी विरासत रजिस्टर में भारत की बढ़ती उपस्थिति को और बल मिलता है।”

लिस्ट में भारत के कुल 6 प्राचीन ग्रंथ

इस तरह अब इस लिस्ट में भारत के कुल 6 प्राचीन ग्रंथ शामिल हैं। इससे पहले मई 2024 में मंगोलिया की राजधानी उलानबटोर में आयोजित 10वीं बैठक के दौरान तीन प्राचीन ग्रंथों पंचतंत्र, सहृदयालोक-लोचन और रामचरितमानस को भी इस सूची में जोड़ा गया था।

रांची में प्रबुद्धजनों का सम्मेलन: CEC ज्ञानेश कुमार को सर्वोच्च सम्मान देने की मांग, कांग्रेस पर लगाए आरोप

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू अपर बाजार स्थित महेश्वरी धर्मशाला में आयोजित प्रबुद्ध जनों के सम्मेलन में शामिल हुए। सम्मेलन में उपस्थित प्रबुद्ध जनों के द्वारा देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान देने की मांग उठाई गई।

सम्मेलन में उपस्थित प्रबुद्धजनों ने कहा कि ज्ञानेश कुमार संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और कानून सम्मत तरीके से कर रहे हैं। इसके बावजूद कुछ राजनीतिक दल अपने राजनीतिक स्वार्थों के कारण उन पर बेबुनियाद और निराधार आरोप लगा रहे हैं। यह संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास है।

प्रबुद्धजनों ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ अपना दायित्व निभाने का अवसर मिलना चाहिए। ज्ञानेश कुमार के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किए जाने की मांग की गई।

वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि देश भर के प्रबुद्ध लोग तथा सारी जनता कांग्रेस द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम और इसकी सारी सच्चाई को देख एवं समझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर बेबुनियाद आरोप लगाने की आदत हो गई है। जब भी चुनाव आयोग निष्पक्षता और कानून के दायरे में रहकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करता है, कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने लगती है।

श्री साहू ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में भी मतदाता सूची के पुनरीक्षण और संशोधन की प्रक्रिया 10 बार हुई, लेकिन उस समय किसी राजनीतिक दल ने इस प्रक्रिया पर इस तरह सवाल नहीं उठाए। आज जब चुनाव आयोग संवैधानिक प्रावधानों के तहत निष्पक्षता से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा है, तब कांग्रेस को परेशानी हो रही है। दरअसल, कांग्रेस को आपत्ति चुनाव आयोग की प्रक्रिया से नहीं, बल्कि इस बात से है कि आयोग उसके मनमुताबिक काम नहीं कर रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से छूटा है तो कांग्रेस को राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय संबंधित व्यक्ति को ठोस तथ्यों और प्रमाणों के साथ सामने लाना चाहिए। चुनाव आयोग लगातार कह रहा है कि जिनका नाम छूटा है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर अपना नाम जुड़वा सकते हैं। ऐसे में बिना प्रमाण आरोप लगाकर संवैधानिक संस्था की छवि धूमिल करना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बताना चाहिए कि यदि किसी मतदाता का नाम कटा है तो उसने संबंधित व्यक्ति का नाम और प्रमाण चुनाव आयोग के समक्ष क्यों नहीं रखा? केवल राजनीतिक बयानबाजी से मतदाताओं की समस्या का समाधान नहीं होगा। कांग्रेस यदि वास्तव में मतदाताओं के हितों को लेकर चिंतित है तो उसे आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति छोड़कर प्रभावित लोगों को सामने लाना चाहिए और उनके नाम जुड़वाने की प्रक्रिया में सहयोग करना चाहिए।

इस दौरान प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी, महानगर अध्यक्ष वरुण साहू, जितेंद्र कुमार, नीरज चौधरी, मुकेश काबरा के अलावा प्रबुद्ध जनों में प्रदीप चौरसिया, ओ.पी. कश्यप, जितेंद्र साहा, अरविंद पांडे, कुमार विमल, अजीत कुमार, मुकेश अग्रवाल, सतीश शाहदेव, मुकेश कुमार, संजीत कुमार, अजीत ओझा, अमितेश कुमार, अमित चौधरी, अशोक पुरोहित, जवाहर तनेजा, मुकेश पांडे, नरेन्द्र लाखोटिया, शिव शंकर साबू, प्रकाश धोलिया, राजीव वर्मा, रमेन्द्र, राम बगड़िया, मनोज कल्याणी, गोवधन माला, डॉ. अभिषेक कुमार रामाधीन , डॉ. शंभू प्रसाद, डॉ. अरुण कुमार , डॉ निशांत भारद्वाज, डॉ. अत्रि गंगोपाध्याय , डॉ शिवालिक, सीए जेपी शर्मा, सीए राज कुमार, सीए धर्मेंद्र कुमार, सीए प्रदीप झालुका, सीए सुरेंद्र विश्वकर्मा, सीए नवीन डोकानिया, सीए उदय जायसवाल, विनोद बख्शी, चन्द्र प्रकाश धोलिया , अनिल गोयल, शुभम मित्तल, मुरारी लाल बजाज, रमेश अग्रवाल,

राकेश गिरधर, संजय अग्रवाल , भाविन राठौर सहित अन्य लोग शामिल रहे।

*मरांग बुरू महासम्मेलन में शामिल हुए CM हेमंत सोरेन

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन आज गिरिडीह जिले के पीरटांड़ स्थित मधुबन थाना मैदान में आयोजित 'मारांग बुरू धोरोमगाड़ महासम्मेलन' में सम्मिलित हुए।

मुख्यमंत्री ने वहां उपस्थित जन-समुदाय को संताली भाषा में संबोधित करते हुए आदिवासी समाज को और मजबूती प्रदान करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को विशिष्ट सामाजिक अधिकार प्राप्त है, जिन्हें भारतीय संविधान में भी मान्यता दी गई है। उन्होंने कहा कि देश में कई ऐसे क्षेत्र हैं ,

जहां आदिवासी समाज की सहमति और अनुमति के बिना कोई भी कार्य संपन्न नहीं किया जा सकता। उन्होंने महासम्मेलन में उपस्थित जनसमूह को शुभकामनाएं देते हुए समाज को संगठित, सशक्त और प्रगतिशील बनाने की दिशा में किए जा रहे सार्थक प्रयासों की सराहना की। साथ ही, समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सामूहिक सहभागिता और आपसी सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

उन्होंने कहा कि मरांग बुरू धोरोमगाड़ का संरक्षण आवश्यक है। उनकी देखभाल कैसे करना है, उसके लिए हम सभी हैं।

आदिवासी समाज देश का सबसे पुराना समाज

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज देश का सबसे पुराना समाज है। समाज की जड़ मजबूत है, परंतु शाखाएं भिन्न हो गई है। वर्तमान समय में समाज के कुछ लोग हिन्दू मानते हैं, तो कुछ लोग सरना कहते हैं। लोग जनजातीय भाषा भी बोल रहे हैं और हिन्दी भी। हमारे पूर्वज जंगलों में वास करते हैं। जंगल से रोजगार मिलता है। जंगल हमारे लिए भगवान के समान है।

अपनी पारंपरा व रीति- रिवाज को समझें युवा

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पिताजी दिशोम गुरू शिबू सोरेन और पूजनीय माता रूपी सोरेन का निधन हो गया है। पारंपरिक विधि-विधान व रीति रिवाज के साथ उनका द्वादशकर्म संपन्न किया गया। उन्होंने युवाओं से भी आह्वान किया कि उन्हें अपनी परंपरा, रीति- रिवाज को समझना चाहिए। साथ ही अपनी समाज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से अवगत होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया इतनी तरक्की कर गई है कि लोग चांद पर पहुंच गए हैं। वैज्ञानिक शोध हो रहे हैं। आदिवासी समाज अभी भी शैक्षणिक, बुद्धिमता व आर्थिक रूप से कमजोर हैं। समाज के उत्थान के लिए हमसबों को एकत्रित व संगठित होना होगा। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जो दिया है, उसे हम खोते जा रहे हैं। हमारे समाज में जीविकोपार्जन का मुख्य साधन पशुपालन व कृषि कार्य था, लेकिन वर्तमान पीढ़ी इससे दूर हो रहा है। उन्होंने कहा स्थानीय स्तर पर आप सभी ने सुदिव्य कुमार सोनू जी को विधायक बनाया था और मैने उन्हें मंत्री पद देकर क्षेत्र का मान बढ़ाया था, परंतु कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। वे हमलोग से दूर हो गये। उन्होंने कहा कि उनके पिताजी दिशोम गुरू शिबू सोरेन से राज्य को बड़ी शक्ति मिली। उन्होंने झारखंड राज्य को अलग करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन राज्य अलग हुए 25 वर्ष से अधिक समय हो गए परंतु अभी भी अपेक्षित विकास नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अभी विकास के पथ पर अग्रसर रहने के लिए हमलोगों को तैयार होना होगा।

नशाखोरी कर रहा कमजोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशाखोरी आदिवासी समाज को कमजोर कर रहा है। समाज के लोग नशाखोरी के गिरफ्त में हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने इसके लिए योजना बनाई है। 'नशामुक्त जीवन हो हमारा' को लेकर सामूहिक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही झारखंड में हड़िया और अवैध शराब (दारू) के निर्माण व बिक्री की रोकथाम के लिए फूलो-झानो आशीर्वाद योजना चलाई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य हड़िया-दारू बेचने वाली महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका और स्वरोजगार से जोड़ना है। उन्होंने लोगों से नशामुक्त समाज निर्माण की ओर कदम बढ़ाते हुए नशाखोरी बंद करने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पिछले 2 साल से कई सारे नजदीकी लोगों की मृत्यु से आहत हैं। उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मंच के द्वारा जो ज्ञापन दिया गया है, उसपर पर न्याय संगत बात होगी। समाज के लोगों को हर संभव मदद मिलेगी।

महासम्मेलन में विधायक सोमेश सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन, मरांग बुरू बचाओ संघर्ष मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष फागू बेसरा, महासचिव हीरालाल मांझी, जिला अध्यक्ष महावीर मुर्मू, सचिव विष्णु किस्कू सहित झारखंड राज्य के विभिन्न जिलों से आए आदिवासी समाज के प्रतिनिधिण के अलावा आसाम, ओड़ीसा, बिहार, मध्य प्रदेश, बंगाल सहित अन्य राज्यों से आदिवासी समाज के प्रतिनिधिगण तथा बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित रहे।

गार्ड ऑफ ऑनर

मुख्यमंत्री को गिरिडीह के पीरटांड़ मधुबन स्थित सी.आर.पी.एफ. कैंप परिसर स्थित हैलिपैड पहुंचने पर स्थानीय प्रशासन द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर किया गया। साथ ही आईजी, डीआईजी, उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा स्वागत किया गया।

*दीपावली-काली पूजा को लेकर रांची प्रशासन अलर्ट, डीसी मंजूनाथ भजन्त्री ने पूजा पंडालों का किया निरीक्षण, सुरक्षा और विसर्जन को लेकर दिए निर्देश

आगामी दीपावली एवं काली पूजा के अवसर पर जिले में विधि-व्यवस्था, शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा पूजा का आयोजन सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सजग है। इसी क्रम में आज दिनांक जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर काली पूजा के लिए बनाए जा रहे पूजा पण्डालों एवं तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पूजा समितियों के सदस्यों से बातचीत कर आयोजन से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी ली तथा सुरक्षित एवं सफल आयोजन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा अल्बर्ट एक्का चौक, कॉसमॉस क्लब, वर्द्धमान कंपाउण्ड, अग्रदूत क्लब प्लाजा चौक, डोरण्डा बाजार काली पूजा समिति, काली मंदिर डोरण्डा, कुसई कॉलोनी काली पूजा समिति, छप्पन सेट एवं एजी कॉलोनी में बनाए जा रहे पूजा पण्डालों का निरीक्षण किया गया। उन्होंने पण्डाल निर्माण, श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक तैयारियों का जायजा लेते हुए संबंधित पदाधिकारियों एवं पूजा समितियों को आवश्यक निर्देश दिए।

पण्डाल निर्माण एवं सुरक्षा मानकों का अनुपालन अनिवार्य

निरीक्षण के दौरान जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी पूजा समितियों को निर्देश दिया कि पण्डाल निर्माण एवं पूजा आयोजन के दौरान जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करें। पण्डालों में विद्युत वायरिंग एवं अस्थायी विद्युत कनेक्शन की व्यवस्था सुरक्षित तरीके से की जाए। बिजली के तारों को खुला अथवा असुरक्षित नहीं छोड़ा जाए तथा शॉर्ट सर्किट एवं आगजनी जैसी घटनाओं की आशंका को देखते हुए अग्निशमन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम रखे जाएं। पण्डालों में अग्निशमन यंत्र एवं आपातकालीन निकास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।

जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने पण्डालों में श्रद्धालुओं के प्रवेश एवं निकास के लिए अलग-अलग व्यवस्था रखने, अनावश्यक भीड़ एकत्रित नहीं होने देने तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिये। पण्डाल एवं उसके आसपास पर्याप्त रोशनी, साफ-सफाई तथा पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी ध्यान रखने को कहा गया।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन पर विशेष जोर

जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पण्डालों में पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में पूजा समितियां स्वयंसेवकों की पर्याप्त संख्या में तैनाती करें तथा भीड़ प्रबंधन में प्रशासन का सहयोग करें। किसी भी प्रकार की अव्यवस्था अथवा अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं हो, इसके लिए विशेष सतर्कता बरतें। साथ ही पण्डाल परिसर एवं आसपास सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने तथा संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस एवं प्रशासन को देने का निर्देश दिया गया।

विसर्जन के दौरान यातायात के संबंध में निर्देश

जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने पूजा समितियों को विशेष रूप से निर्देश दिया कि प्रतिमा विसर्जन के दौरान स्थानीय थाना एवं जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप विसर्जन कार्यक्रम संपन्न करें। निर्धारित मार्ग, समय एवं प्रशासनिक निर्देशों का पालन करते हुए यातायात व्यवस्था सुचारू बनाए रखने में सहयोग करें।

उन्होंने विसर्जन के दौरान जुलूस में अनुशासन बनाए रखने, ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग निर्धारित मानकों एवं प्रशासनिक निर्देशों के अनुरूप करने तथा किसी भी प्रकार के भड़काऊ, आपत्तिजनक अथवा सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले गीत, नारे एवं गतिविधियों से परहेज करने की अपील की।

दीपावली पर अग्नि सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण का रखें ध्यान

जिला प्रशासन की ओर से दीपावली के अवसर पर आम नागरिकों से भी सुरक्षित एवं जिम्मेदारी के साथ त्योहार मनाने की अपील की गई है। आतिशबाजी के दौरान विशेष सावधानी बरतें तथा बच्चों को पटाखे जलाते समय अकेला नहीं छोड़ें। पटाखे खुले एवं सुरक्षित स्थानों पर ही जलाएं तथा ज्वलनशील पदार्थों, पेट्रोल पंपों, विद्युत प्रतिष्ठानों एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों के आसपास आतिशबाजी करने से बचें।

शांति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में त्योहार मनाने की अपील

जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी पूजा समितियों, आयोजनकर्ताओं एवं आम नागरिकों से अपील दीपावली एवं काली पूजा को आपसी भाईचारे, प्रेम, शांति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें तथा विधि-व्यवस्था एवं सुरक्षा संधारण में प्रशासन को अपेक्षित सहयोग प्रदान करें।

निरीक्षण के दौरान विभिन्न पूजा समितियों द्वारा जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं उपस्थित वरीय पदाधिकारियों को चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर अनुमण्डल पदाधिकारी, सदर श्री कुमार रजत,प्रशिक्षु आईएएस सुश्री आस्था शरण, अपर जिला दण्डाधिकारी (विधि-व्यवस्था) श्री धनंजय, उपसमाहर्त्ता नजारत श्री सुदेश कुमार, नगर निगम के संबंधित पदाधिकारी, समाजसेवी श्री आलोक दुबे, शांति समिति के सदस्य श्री जयसिंह यादव एवं श्री सागर कुमार सहित अन्य संबंधित लोग उपस्थित थे।

उद्योग विभाग की बदहाली पर शोभा यादव ने हेमंत सरकार को घेरा

रांची। झारखंड में उद्योगों की संभावनाओं, निवेश और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के मुद्दे पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शोभा यादव ने हेमंत सोरेन सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड में उद्योगों का अपेक्षित विस्तार नहीं हो रहा है। सरकार निवेश आकर्षित करने और एमओयू करने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन धरातल पर कितने उद्योग स्थापित हुए और कितने युवाओं को स्थायी रोजगार मिला, इसका स्पष्ट हिसाब जनता के सामने नहीं रखा जा रहा है। शोभा यादव ने झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य के औद्योगिक सकल मूल्यवर्धन में बेसिक मेटल यानी लोहा-इस्पात क्षेत्र की हिस्सेदारी 72.4 प्रतिशत है। यह औद्योगिक विविधीकरण की कमी को दर्शाता है। वहीं, वर्ष 2023-24 में राज्य में एफडीआई इक्विटी निवेश केवल 90 करोड़ रुपये रहा। राष्ट्रीय एफडीआई में झारखंड की हिस्सेदारी भी लगभग एक प्रतिशत रही।

उन्होंने कहा कि MSME क्षेत्र में भी तस्वीर चिंताजनक है। वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में 83,363 MSME इकाइयों का उद्यम पोर्टल पर पंजीकरण हुआ, जिनसे 3,34,504 रोजगार का उल्लेख है। इनमें 99 प्रतिशत से अधिक इकाइयां सूक्ष्म श्रेणी की हैं। ऐसे में सवाल है कि छोटे उद्योगों को बड़े औद्योगिक नेटवर्क से जोड़ने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं?

शोभा यादव ने कहा कि 2024-25 में औद्योगिक नीति के तहत 184.51 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन का वितरण किया गया, लेकिन सरकार को यह बताना चाहिए कि इससे कितनी नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुईं और कितने स्थायी रोजगार सृजित हुए। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 95 इकाइयां स्थापित होने, 676 करोड़ रुपये के निवेश और 4,917 लोगों को रोजगार मिलने के आंकड़े भी सामने हैं, लेकिन राज्य की विशाल औद्योगिक संभावनाओं के मुकाबले यह पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने लॉजिस्टिक पार्क और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर जैसी परियोजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि 3 जून 2026 को मुख्यमंत्री ने स्वयं उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इन परियोजनाओं में तेजी लाने का निर्देश दिया। इससे स्पष्ट है कि कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अभी गति लाने की जरूरत है। शोभा यादव ने सरकार से सवाल किया कि आखिर निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने में देरी क्यों हो रही है?

औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की स्थिति क्या है? स्थानीय युवाओं को उद्योगों में प्राथमिकता क्यों नहीं मिल रही है? उन्होंने मांग की कि सरकार पिछले पांच वर्षों के एमओयू, वास्तविक निवेश, स्थापित और बंद उद्योगों, सब्सिडी वितरण तथा स्थानीय रोजगार का जिला-वार श्वेत पत्र जारी करे।

उन्होंने कहा कि झारखंड को केवल खनिज संपदा निकालने वाला राज्य बनाकर नहीं रखा जा सकता। यहां कच्चे माल के बजाय तैयार उत्पादों के उद्योग विकसित करने होंगे। हेमंत सरकार को बताना चाहिए कि खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड का युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर क्यों है?

पशुपालन भवन में राज्य स्तरीय खेत बचाओ अभियान सह रबी कर्मशाला-2026 का आयोजन

रांची: पशुपालन भवन, हेसाग में गुरुवार को खेत बचाओ अभियान सह राज्य स्तरीय रबी कर्मशाला-2026 का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि सचिव श्री अबु बकर सिद्दीकी पी ने जिला स्तरीय पदाधिकारियों से कहा कि वे किसानों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करें।

किसानों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करें तथा उनकी समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि किसानों को इन योजनाओं की जानकारी मिले और वे इसका अधिकतम लाभ उठा सकें।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता किसानों की खुशहाली और उनका आर्थिक सशक्तिकरण है। इस लक्ष्य को हासिल करने में अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे सरकार की योजनाओं और नीतियों को धरातल पर उतारने वाले प्रतिनिधि हैं। इसलिए अधिकारी कार्यालय तक सीमित न रहकर गांवों और खेतों तक पहुंचें तथा किसानों की जरूरतों के अनुरूप कार्य करें।

कृषि सचिव ने बताया कि इस वर्ष की कर्मशाला दो प्रमुख विषयों पर केंद्रित है। पहला, खेत बचाओ अभियान और दूसरा, रबी कर्मशाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष रबी कर्मशाला में फसल उत्पादकता (क्रॉप प्रोडक्टिविटी), फसल सघनता (क्रॉप इंटेंसिटी), सिंचाई और बाजार संपर्क (मार्केट लिंकेज) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाती है। इस वर्ष खेतों की उर्वरता एवं स्वास्थ्य बनाए रखने, परती भूमि का बेहतर उपयोग करने, उर्वरकों का सीमित एवं सुरक्षित इस्तेमाल सुनिश्चित करने तथा कृषि उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। साथ ही, इन लक्ष्यों की प्राप्ति में आने वाली समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान की आवश्यकता बताई गई।

उन्होंने सभी जिलों में सिंचाई व्यवस्था से संबंधित अद्यतन आंकड़े तैयार करने पर जोर देते हुए कहा कि जिलों में उपलब्ध तालाबों, नहरों एवं अन्य सिंचाई संसाधनों का संशोधित डेटा अपडेट किया जाए। साथ ही, इन संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करते हुए किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने फसल उत्पादकता और फसल सघनता बढ़ाने के साथ-साथ कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन के लिए बाजार संपर्क को मजबूत करने की आवश्यकता भी बताई।

कर्मशाला को संबोधित करते हुए कृषि निदेशक श्री विद्यानंद शर्मा पंकज ने राज्य में परती भूमि के अधिकतम उपयोग एवं उसमें फसल आच्छादन का क्षेत्र विस्तार करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया, ताकि कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि की जा सके। साथ ही, उन्होंने मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण एवं सतत कृषि विकास के लिए रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों से तकनीकी सत्रों में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने तथा विशेषज्ञों द्वारा साझा किए जा रहे तकनीकी ज्ञान एवं अनुभवों का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया ।

कार्यक्रम को मृदा निदेशक श्री विकास कुमार ,निदेशक समिति श्री रमाशंकर प्रसाद , गव्य निदेशक श्री संजीव कुमार सहित विभिन्न कृषि वैज्ञानिकों ने भी अपने विचार रखे और कृषि विकास से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की।

कार्यक्रम को बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति श्री सीएस दुबे ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि खेत बचाओ अभियान सह रबी कर्मशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को भूमि का स्वास्थ्य एवं उर्वरा शक्ति बनाए रखने के प्रति जागरूक करना है, ताकि वे बेहतर उत्पादन प्राप्त कर अपनी आय में वृद्धि कर सकें। उन्होंने भूमि की उर्वरा शक्ति को लंबे समय तक बनाए रखने के विभिन्न उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसानों की आय में वृद्धि करना सरकार का महत्वपूर्ण लक्ष्य है और इसके लिए कृषि की उत्पादकता बढ़ाने के साथ भूमि संरक्षण पर भी ध्यान देना जरूरी है।

कार्यक्रम में कृषि विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी, विभिन्न जिलों से आए जिला कृषि पदाधिकारी, कृषि एवं संलग्न विभागों के मुख्यालय तथा जिला स्तर के पदाधिकारी कृषि वैज्ञानिक एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के. राजू ने की मुलाकात, विकास योजनाओं और राजनीतिक परिस्थितियों पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से आज कांके रोड रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में झारखंड कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी श्री के० राजू ने शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री एवं उनके बीच राज्य में चलाई जा

रही विकासात्मक योजनाओं के संचालन, वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति सहित कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इस शिष्टाचार मुलाकात के अवसर पर झारखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष श्री केशव महतो कमलेश, विधायक श्री प्रदीप यादव एवं विधायक श्री राजेश कच्छप उपस्थित रहे।

रांची में सर्वजन पेंशन योजना के तहत 2.55 लाख लाभुकों को मिला 2 माह का पेंशन, 51.10 करोड़ रुपये DBT से खाते में हस्तांतरित

राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी सर्वजन पेंशन योजना के तहत रांची जिले के पेंशनधारियों को माह अक्टूबर एवं माह नवम्बर 2026 की पेंशन राशि का भुगतान कर दिया गया है। योजना अंतर्गत जिले के कुल 2,55,534 लाभुकों को दोनों माह की पेंशन राशि का भुगतान किया गया है। योजना के तहत कुल 51 करोड़ 10 लाख 68 हजार रुपये की राशि DBT के माध्यम से लाभुकों के बैंक खाते में हस्तांतरित की गई है।

प्रखंडवार एवं शहरी क्षेत्रवार पेंशन लाभुकों की संख्या निम्न प्रकार है :-

अनगड़ा – 10,311

अरगोड़ा शहरी – 9,368

बरगाईं शहरी – 5,188

बेड़ो – 14,142

बुंडू – 9,034

बुंडू नगर पंचायत – 2,753

बुढ़मू – 11,055

चान्हो – 12,461

हेहल शहरी – 7,541

इटकी – 5,568

कांके – 17,027

कांके शहरी – 340

खलारी – 5,214

लापुंग – 7,164

मांडर – 16,115

नगड़ी – 8,259

नगड़ी शहरी – 6,800

नामकुम – 10,136

नामकुम शहरी – 5,733

ओरमांझी – 8,157

राहे – 9,189

रांची टाउन शहरी – 13,099

रातू – 10,756

सिल्ली – 15,683

सोनाहातू – 13,752

तमाड़ – 20,689

सर्वजन पेंशन योजना का उद्देश्य पात्र वृद्धजनों, विधवा एवं एकल महिलाओं तथा दिव्यांगजनों सहित अन्य निर्धारित श्रेणियों के लाभुकों को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।

जिला प्रशासन द्वारा पेंशन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं पात्र लाभुकों तक योजना का लाभ समय पर पहुंचाने को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि कोई भी योग्य लाभुक सामाजिक सुरक्षा के लाभ से वंचित न रहे। जिन लाभुकों के बैंक खाते में अभी तक पेंशन राशि प्राप्त नहीं हुई है, उन्हें अपने बैंक खाते से आधार सीडिंग कराना अनिवार्य है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया भाषा शिक्षा नीति के प्रारूप का अवलोकन, कहा - मातृभाषा को सम्मान के साथ कौशल और डिजिटल दक्षता पर हो फोकस

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को ध्यान में रखते हुए शिक्षा नीति तैयार की जाए। यह नीति विद्यार्थियों की मातृभाषा को सम्मान देने के साथ-साथ उनके ज्ञान, कौशल और अभिव्यक्ति की क्षमता को भी मजबूत बनाए। शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम, आत्मविश्वासी और प्रतिस्पर्धी बनाना भी होना चाहिए। मुख्यमंत्री आज झारखंड मंत्रालय में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा 'झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति' के प्रारूप प्रस्तुतीकरण से संबंधित बैठक में अधिकारियों को निदेशित कर रहे थे।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य की भाषाई विविधता, विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों, कौशल विकास, डिजिटल दक्षता और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एक व्यावहारिक एवं दूरदर्शी शिक्षा नीति तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि झारखंड में भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता अत्यंत व्यापक है। राज्य के बच्चे अपने घर और समुदाय में अपनी मातृभाषा एवं विभिन्न स्थानीय भाषाओं का प्रयोग करते हैं, जबकि विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रायः हिंदी या अंग्रेजी माध्यम से होता है। भाषाओं के इस अंतर के कारण प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों की समझ, अभिव्यक्ति, सहभागिता और सीखने की गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से 'झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति' की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की भाषाई विविधता राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान है। इसे शिक्षा व्यवस्था से जोड़कर ऐसी पद्धति विकसित की जाए, जिससे विद्यार्थी अपनी भाषा में सहजता से सीख सकें और शिक्षा के क्षेत्र में नए एवं अभिनव प्रयोगों का मार्ग प्रशस्त हो सके।

विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल

मुख्यमंत्री ने राज्य के विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ विद्यार्थियों की रुचि, प्रतिभा और व्यावहारिक कौशल को भी विकसित किया जाना चाहिए। कौशल आधारित शिक्षा के अंतर्गत हॉकी को भी शामिल करने पर विचार किया जाए। झारखंड के बच्चे-बच्चियाँ हॉकी के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में कौशल आधारित शिक्षा के माध्यम से उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने और आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे।

अंग्रेजी स्पोकन की कक्षाओं की व्यवस्था सुनिश्चित हो

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी स्पोकन की कक्षाएं संचालित करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा, रोजगार, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं एवं खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए विद्यार्थियों को देश के अलग-अलग राज्यों में जाना पड़ता है। ऐसे में अंग्रेजी बोलने और संवाद करने का आत्मविश्वास उनके लिए काफी लाभकारी साबित होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने से पहले ही विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी स्पोकन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि वे भाषाई रूप से दक्ष और आत्मविश्वासी बन सकें। इससे विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे तथा वे संवाद कौशल के क्षेत्र में भी दक्ष बन सकेंगे।

विद्यार्थियों को डिजिटल रूप से भी समृद्ध बनाने की आवश्यकता पर जोर

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को डिजिटल रूप से भी दक्ष एवं समृद्ध बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति ऐसी होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों को वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में भी किसी प्रकार की परेशानी न हो। कक्षाओं में शिक्षण व्यवस्था से लेकर विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा नीति तैयार की जाए।

मातृभाषा, हिंदी और अंग्रेजी को परस्पर सहयोगी भाषा समूह के रूप में देखते हुए नीति को स्वरूप दें

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा नीति संवर्धनात्मक बहुभाषिकता के सिद्धांत पर आधारित हो। इसके अंतर्गत पहली भाषा को हटाए बिना दूसरी और तीसरी भाषा को जोड़ते हुए विद्यार्थियों को शिक्षण की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने मातृभाषा, हिंदी और अंग्रेजी को परस्पर सहयोगी भाषा समूह के रूप में देखते हुए नीति को स्वरूप देने का निर्देश दिया।

तीन शैक्षणिक चरणों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है प्रारूप

बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को प्रस्तुतीकरण के माध्यम से अवगत कराया कि झारखंड में भाषा शिक्षा नीति तैयार करने के उद्देश्य से वर्ष 2025 में भाषा शिक्षा नीति निर्माण समिति का गठन किया गया था। समिति ने झारखंड के साथ-साथ अन्य राज्यों की शिक्षा पद्धतियों का अध्ययन कर नीति का प्रारूप तैयार किया है।

प्रारूप के प्रस्तुतीकरण के दौरान बताया गया कि इस शिक्षा नीति में तीन प्रमुख शैक्षणिक चरणों को शामिल किया गया है। इनमें पूर्व बाल्यावस्था शिक्षा से कक्षा 2 तक, कक्षा 3 से कक्षा 5 तक तथा कक्षा 6 से कक्षा 12 तक के चरण शामिल हैं। इन तीनों चरणों में विद्यार्थियों की मातृभाषा एवं स्थानीय भाषाओं को स्कूली शिक्षा में समाहित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि विद्यार्थी अपनी भाषा में सहजता से पढ़ाई कर सकें और बेहतर शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल कर सकें।

अधिकारियों ने बताया कि इस शिक्षा नीति से राज्य की स्थानीय भाषाओं का संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। इससे विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज और प्रभावी बनेगी तथा शिक्षा के क्षेत्र में स्थानीय भाषाओं के उपयोग को भी नई दिशा मिलेगी। बैठक में शिक्षा नीति के विभिन्न प्रावधानों एवं प्रारूप के बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में इनकी रही उपस्थिति

'झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति' के प्रारूप प्रस्तुतीकरण से संबंधित बैठक में मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव श्री उमाशंकर सिंह, झारखंड शिक्षा परियोजना के राज्य परियोजना निदेशक श्री शशि रंजन, टीआरआई के निदेशक श्री आलोक शिकारी कच्छप, जैक के सचिव श्री एस.डी. तिग्गा सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

*15 साल पुराने सरकारी वाहनों का होगा व्यवस्थित निस्तारण, परिवहन सचिव राजीव रंजन ने नोडल अधिकारियों के साथ की बैठक

रांची :- परिवहन सचिव श्री राजीव रंजन ने कहा कि राज्य में सरकारी वाहनों की स्क्रैपिंग एवं निस्तारण की प्रक्रिया भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए एक व्यवस्थित एवं पारदर्शी व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है। इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण विषय यह निर्धारित करना है कि किन वाहनों को स्क्रैपिंग की श्रेणी में रखा जाना है। विशेषकर पुलिस विभाग के थानों में दुर्घटनाग्रस्त एवं लंबे समय से अनुपयोगी पड़े वाहनों सहित अन्य विभागों के ऐसे वाहन, जो मरम्मत योग्य नहीं हैं अथवा जिनका उपयोग व्यावहारिक रूप से संभव नहीं रह गया है, उनके निस्तारण के लिए निर्धारित प्रक्रिया का अनुपालन किया जाना आवश्यक है। सचिव श्री राजीव रंजन बुधवार को राज्य में 15 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण कर चुके सरकारी वाहनों के व्यवस्थित एवं पारदर्शी निस्तारण हेतु प्रोजेक्ट भवन, रांची स्थित प्रथम तल सभागार में राज्यस्तरीय नोडल पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे ।

सचिव ने स्पष्ट किया कि सरकारी वाहनों की स्क्रैपिंग केवल पुराने वाहनों को हटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह संसाधनों के बेहतर उपयोग, पर्यावरण संरक्षण, पारदर्शिता तथा सरकारी राजस्व में वृद्धि से भी जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत वाहन स्क्रैपिंग से संबंधित वित्तीय एवं राजस्व संबंधी प्रावधानों का भी लाभ संबंधित विभागों को प्राप्त होगा। साथ ही, स्क्रैपिंग के उपरांत परिवहन विभाग के माध्यम से देय कर की राशि भी सरकारी राजकोष में जमा होगी।

उन्होंने सभी विभागीय नोडल पदाधिकारियों से कहा किया कि वे इस प्रक्रिया को गंभीरता से समझें तथा अपने-अपने विभागों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी कहा कि प्रक्रिया के किसी भी चरण में यदि कोई संदेह अथवा तकनीकी समस्या उत्पन्न होती है, तो परिवहन विभाग से परामर्श प्राप्त किया जा सकता है।

बैठक में MSTC एवं RVSF के प्रतिनिधियों द्वारा सरकारी वाहनों की स्क्रैपिंग की संपूर्ण प्रक्रिया का विस्तृत एवं चरणबद्ध (Step-by-Step) प्रस्तुतीकरण किया गया। MSTC एवं GeM पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण, संबंधित वाहन का विवरण अपलोड करने, नीलामी एवं RVSF के माध्यम से वाहन स्क्रैपिंग कराने सहित पूरी प्रक्रिया की जानकारी उपस्थित पदाधिकारियों को दी गई। साथ ही, स्क्रैपिंग से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों, विभागीय जिम्मेदारियों एवं निर्धारित प्रक्रियाओं से भी अवगत कराया गया।

बैठक में विभिन्न विभागों के नामित नोडल पदाधिकारियों के साथ MSTC, GeM एवं पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा (RVSF) से संबंधित प्रतिनिधि उपस्थित रहे।