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एग्रीवोल्टाइक से किसान बनेंगे ‘अन्नदाता’ के साथ ‘ऊर्जादाता’, यूपी ने पेश किया स्वच्छ ऊर्जा का विजन
- ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने वैश्विक मंच से निवेशकों को दिया उत्तर प्रदेश में निवेश का न्योता
- 2030 तक 32 गीगावाट और 2047 तक 150 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य
- एडीबी से एग्रीवोल्टाइक के लिए तकनीकी सहायता पाने वाला देश का पहला राज्य बना यूपी, वाराणसी में 100 किलोवाट का पायलट प्रोजेक्ट प्रस्तावित
लखनऊ/नई दिल्ली, 22 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश खेती और स्वच्छ ऊर्जा के समन्वय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी में है। प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित सातवें एग्रीवोल्टाइक वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस-2026 के ‘स्टेट मिनिस्टेरियल पिच’ सत्र में प्रदेश का नवीकरणीय ऊर्जा विजन और एग्रीवोल्टाइक रणनीति प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का प्रमुख कृषि उत्पादक राज्य होने के साथ स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी बड़ा केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि किसान अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता भी बनें और खेती की जमीन का उपयोग किए बिना कृषि तथा बिजली उत्पादन, दोनों को बढ़ावा मिले।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सौर ऊर्जा का तेजी से विस्तार हुआ है। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और पीएम-कुसुम जैसी योजनाओं के माध्यम से घरों की छतों से लेकर खेतों तक सौर ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहन मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश भी स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, किसानों के सशक्तीकरण और निवेश के नए अवसरों के सृजन की दिशा में काम कर रहा है।
- एक ही खेत से अनाज और बिजली
एग्रीवोल्टाइक तकनीक को कृषि और ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि इस मॉडल में ऊंचाई पर सोलर पैनल लगाए जाते हैं, ताकि उनके नीचे या आसपास उपयुक्त फसलों की खेती जारी रखी जा सके। इससे एक ही भूमि से खाद्यान्न और बिजली, दोनों का उत्पादन संभव हो सकता है। यह व्यवस्था खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़ाने में मददगार बन सकती है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में लगभग तीन करोड़ किसान खेती पर निर्भर हैं और 80 प्रतिशत से अधिक कृषि जोत एक हेक्टेयर से छोटी हैं। ऐसे में सीमित कृषि भूमि का बेहतर उपयोग करना जरूरी है। प्रदेश ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में 22 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया है। एग्रीवोल्टाइक मॉडल के जरिए खेती और ऊर्जा उत्पादन के बीच संतुलन स्थापित करने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।
- वाराणसी में 100 किलोवाट का पायलट प्रोजेक्ट
मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश एग्रीवोल्टाइक क्षेत्र में एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) से तकनीकी सहायता प्राप्त करने वाला देश का पहला राज्य बना है। इस पहल के तहत वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईआईवीआर) में 100 किलोवाट क्षमता का पायलट एग्रीवोल्टाइक प्रोजेक्ट स्थापित करने की तैयारी है। परियोजना की व्यवहार्यता संबंधी अध्ययन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब यह क्रियान्वयन के चरण में है।
इस परियोजना के माध्यम से कृषि और सौर ऊर्जा के संयुक्त उपयोग की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा। इसके परिणाम भविष्य में इस मॉडल को प्रदेश के अन्य कृषि क्षेत्रों में विस्तार देने की रणनीति तैयार करने में सहायक हो सकते हैं।
- सौर ऊर्जा और बायो-एनर्जी में यूपी की प्रगति
ऊर्जा मंत्री ने सम्मेलन में प्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा संबंधी उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पीएम सूर्य घर योजना के तहत उत्तर प्रदेश में लगभग नौ लाख घरों में 3,018 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इस योजना में प्रदेश देश में पहले स्थान पर है और आवंटित लक्ष्य का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
पीएम-कुसुम योजना के कंपोनेंट-सी1 के तहत 8,896 कृषि पंपों को 76.2 मेगावाट सौर क्षमता से जोड़ा गया है। वहीं, कंपोनेंट-सी2 के अंतर्गत 581 सब-स्टेशनों पर 1,708 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए विद्युत खरीद समझौते (पीपीए) किए गए हैं।यूटिलिटी स्तर की सौर परियोजनाओं में 3,098 मेगावाट क्षमता चालू है, जबकि 6,295 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं क्रियान्वयन के अधीन हैं। इनमें 3,310 मेगावाट क्षमता के सोलर पार्क भी शामिल हैं।बायो-एनर्जी के क्षेत्र में प्रदेश में 353 टन प्रतिदिन (टीपीडी) की कुल क्षमता वाले 42 संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) संयंत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश की अग्रणी स्थिति रेखांकित की।
- ग्रीन हाइड्रोजन पर भी जोर
मंत्री ने बताया कि गोरखपुर और रामपुर में स्थापित पायलट संयंत्रों से प्रति घंटे 31.5 किलोग्राम ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जा रहा है। इसके अलावा आईआईटी कानपुर, आईआईटी (बीएचयू) और मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के साथ ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में दो उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन पहलों का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा तकनीक के विकास, अनुसंधान और औद्योगिक उपयोग को प्रोत्साहित करना है।
- निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं प्रदेश की नीतियां
उत्तर प्रदेश की सौर ऊर्जा नीति-2022, बायो-एनर्जी नीति-2022 और ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत निवेशकों को विभिन्न प्रोत्साहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इनमें निजी डेवलपर्स के लिए 15,000 रुपये प्रति एकड़ प्रतिवर्ष की दर से भूमि उपलब्ध कराने, 100 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी छूट और सौर परियोजनाओं में 10 वर्ष तक विद्युत शुल्क से छूट जैसे प्रावधान शामिल हैं।
ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं के लिए 10 से 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी तथा सुपर मेगा परियोजनाओं के लिए 35 से 40 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान बताया गया। वहीं, सीबीजी परियोजनाओं के लिए 75 लाख रुपये प्रति टन प्रतिदिन क्षमता के हिसाब से सब्सिडी की व्यवस्था का उल्लेख किया गया। मंत्री ने वैश्विक निवेशकों, परियोजना डेवलपर्स और विशेषज्ञों को उत्तर प्रदेश में निवेश करने तथा प्रदेश के स्वच्छ ऊर्जा मिशन का भागीदार बनने के लिए आमंत्रित किया।
- 2047 तक 150 गीगावाट ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य
मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि ‘विकसित यूपी-2047’ के लक्ष्य के तहत प्रदेश ने वर्ष 2030 तक 32 गीगावाट और वर्ष 2047 तक 150 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। उन्होंने एग्रीवोल्टाइक तकनीक को कृषि भूमि के बेहतर उपयोग, किसानों की आय बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का प्रयास है कि नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार से किसानों को नए आर्थिक अवसर मिलें, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो और प्रदेश विकसित भारत के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे।
धान खरीद व्यवस्था होगी और सरल व पारदर्शी, राइस मिलर्स की समस्याओं के समाधान के निर्देश
- खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने राइस मिलर्स संघों के साथ की बैठक, प्रोत्साहन राशि बढ़ाने समेत कई मांगों पर हुआ मंथन
- हाइब्रिड धान की रिकवरी, मिलों के संबद्धीकरण, सीएमआर की आपूर्ति और लंबित भुगतान के मुद्दे उठे
लखनऊ, 22 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीद व्यवस्था को सुचारु, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में राइस मिलर्स की समस्याओं के समाधान पर जोर दिया है। खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने गुरुवार को बापू भवन स्थित अपने कार्यालय में मान्यताप्राप्त राइस मिलर्स संघों के प्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को सभी मांगों का नियमानुसार परीक्षण कर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में धान मिलिंग की प्रोत्साहन राशि, चावल की रिकवरी, मिलों के ऑनलाइन संबद्धीकरण, कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के सम्प्रदान, भंडारण, परिवहन, होल्डिंग चार्ज और लंबित भुगतान सहित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा और धान खरीद की सुचारु व्यवस्था सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के साथ राइस मिलर्स की वास्तविक समस्याओं का समाधान भी जरूरी है।
- प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की मांग
बैठक में राइस मिलर्स संघों ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समाप्त की गई प्रोत्साहन राशि को फिर से लागू करने और उसमें वृद्धि करने की मांग उठाई। प्रतिनिधियों ने प्रोत्साहन राशि 35 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 50 रुपये और 100 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने के अलग-अलग प्रस्ताव प्रस्तुत किए। मंत्री ने अधिकारियों को इन प्रस्तावों का वित्तीय एवं नीतिगत आधार पर परीक्षण करने के निर्देश दिए।
हाइब्रिड धान की कुटाई के दौरान चावल की रिकवरी में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का मुद्दा भी उठाया गया। मिलर्स ने मौजूदा 1.5 प्रतिशत की छूट बढ़ाकर दो प्रतिशत करने और क्षतिपूर्ति संबंधी प्रावधानों की समीक्षा करने का अनुरोध किया। इस पर मंत्री ने निर्धारित मानकों और प्रचलित नीतियों के अनुरूप प्रस्तावों की जांच करने को कहा।
- मिलों के संबद्धीकरण की प्रक्रिया होगी सरल
राइस मिलर्स ने मिलों के ऑनलाइन संबद्धीकरण की प्रक्रिया को अधिक सरल और व्यावहारिक बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने स्वचालित संबद्धीकरण के साथ स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार मैनुअल संबद्धीकरण का विकल्प उपलब्ध कराने की मांग की। मंत्री ने अधिकारियों से इस व्यवस्था का परीक्षण करने और संबद्धीकरण की प्रक्रिया के कारण धान खरीद कार्य प्रभावित नहीं होने देने को कहा।
बैठक में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों में जगह की कमी, फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) और बोरियों की अनुपलब्धता तथा अन्य व्यवस्थागत कारणों से कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के सम्प्रदान में हुई देरी का मुद्दा भी उठा। मिलर्स ने ऐसे मामलों में लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने तथा होल्डिंग चार्ज और अन्य कटौतियों से राहत देने की मांग की।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभागीय व्यवस्थाओं से जुड़ी कठिनाइयों का निष्पक्ष परीक्षण किया जाए। जिन मामलों में राइस मिलर्स की ओर से कोई त्रुटि नहीं पाई जाती, उनमें नियमानुसार उचित समाधान की कार्रवाई की जाए।
- किसानों के पंजीकरण और भुगतान पर भी चर्चा
बैठक में 10 प्रतिशत ब्रोकन राइस और 15 प्रतिशत खंडा चावल के सम्प्रदान एवं भंडारण की व्यवस्था, क्रय एजेंसियों से लंबित भुगतान, बारदाने और गनी यूजेज चार्जेज तथा मिलिंग से संबंधित अन्य समस्याओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।
इसके अलावा किसान पंजीकरण पोर्टल और एग्री स्टैक के आंकड़ों में विसंगतियों, पंजीकरण के दौरान गाटा विवरण में त्रुटियों तथा धान खरीद केंद्रों के संबद्धीकरण से जुड़ी दिक्कतों पर चर्चा की गई। मंत्री ने स्पष्ट किया कि तकनीकी या प्रक्रियागत समस्याओं के कारण पात्र किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को किसान पंजीकरण, धान की तौल, उपज के उठान, परिवहन और भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए। धान खरीद केंद्रों पर अनियमितता या अनावश्यक हस्तक्षेप की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने को भी कहा।
- किसानों और मिलर्स के हितों में संतुलन पर जोर
मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा कि धान खरीद व्यवस्था को सफल बनाने के लिए किसानों, राइस मिलर्स, क्रय एजेंसियों और विभागीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। सभी पक्षों को पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को राइस मिलर्स संघों के साथ समन्वय बनाकर उनकी मांगों का परीक्षण करने तथा शासन स्तर पर निर्णय की आवश्यकता वाले मामलों में नियमानुसार प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि अन्नदाता किसानों की समृद्धि और प्रदेश के चावल उद्योग का सुदृढ़ीकरण एक-दूसरे के पूरक हैं। सरकार का प्रयास है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले और राइस मिलर्स को भी सुचारु रूप से काम करने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो।
बैठक में प्रमुख सचिव एवं आयुक्त, खाद्य एवं रसद विभाग अनिल कुमार, विशेष सचिव अनीता वर्मा सिंह, अपर आयुक्त कामता प्रसाद, अपर आयुक्त सत्यदेव, आरएफसी मुख्यालय के अशोक कुमार पाल सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न राइस मिलर्स संघों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय साइंस टेक्नो फेस्टिवल में प्रतिभा दिखाएंगे पूर्वांचल के विद्यार्थी, 31 सदस्यीय टीम गुजरात रवाना
-  गोरखपुर, बस्ती, कुशीनगर, महराजगंज और सिद्धार्थनगर के 23 विद्यार्थी व आठ शिक्षक-मेंटर होंगे शामिल
-  डे एंड नाइट स्पेस फाउंडेशन की पहल, अंकलेश्वर में 24-25 अक्टूबर को आयोजित होगा छठवां भारतीय साइंस टेक्नो फेस्टिवल
गोरखपुर। पूर्वांचल के विद्यार्थियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के राष्ट्रीय मंच से जोड़ने की दिशा में डे एंड नाइट स्पेस फाउंडेशन (DANSF), गोरखपुर की पहल रंग ला रही है। गुजरात के अंकलेश्वर में 24 और 25 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाले छठवें भारतीय साइंस टेक्नो फेस्टिवल में प्रतिभाग करने के लिए पूर्वांचल के पांच जिलों के 23 विद्यार्थियों और आठ शिक्षकों एवं मेंटर्स की 31 सदस्यीय टीम गुजरात रवाना हो गई। टीम को लैब सॉल्यूशन्स के निदेशक संजीव कुमार, निगमा नंद अग्रहरि, दिनेश यादव, बृजेश यादव, अंजनी मिश्रा, आलोक साहनी, आकाश साहनी, राजेंद्र कुमार सहित अन्य सहयोगियों और नवापार के ग्रामीणों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस राष्ट्रीय आयोजन में पूर्वांचल के विद्यार्थी अपनी वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नवाचार से जुड़ी गतिविधियों को प्रस्तुत करेंगे। फेस्टिवल के माध्यम से उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्यार्थियों, शिक्षकों और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ संवाद करने तथा अपने ज्ञान और अनुभव को विस्तार देने का अवसर मिलेगा। आयोजन में रमन साइंस एंड टेक्नोलॉजी फाउंडेशन, एपीजे अब्दुल कलाम नेशनल काउंसिल ऑफ यंग साइंटिस्ट, नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर्स साइंटिस्ट और संकल्प दीप ट्रस्ट सहित कई संस्थाओं का सहयोग है।
- पांच जिलों के विद्यार्थियों का चयन
फेस्टिवल के लिए चयनित विद्यार्थियों में गोरखपुर से आदित्य यादव और अंशिका यादव, कुशीनगर से श्याम जी और अभिनव कुमार तथा महराजगंज से शुभम यादव, अमित विश्वकर्मा, काजल निषाद, कोमल जायसवाल, श्रेयांशी रौनियार और अंकित श्रीवास्तव शामिल हैं। इसी तरह बस्ती से दिव्यांश चौधरी, अमरमणि पांडे, आदित्य सोनी, अनंत पांडे, अरुण, तेजस राठौर और कृष्णा वर्मा का चयन हुआ है। सिद्धार्थनगर से दीपक कुमार, अवंतिका, शिवांगी, अनुज कुमार, आंचल, बिंद्रावती और नेहा को अवसर मिला है। चयनित विद्यार्थियों में आरपीआईसी, महराजगंज सहित पूर्वांचल के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के छात्र-छात्राएं शामिल हैं।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर
फाउंडेशन की संस्थापक प्रिया यादव और सह-संस्थापक सरोज के नेतृत्व में विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक क्षमता और नवाचार की भावना विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। संस्था का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की प्रतिभाओं को समान अवसर उपलब्ध कराना तथा उन्हें विज्ञान एवं अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। इस पहल में डे एंड नाइट स्पेस इनोवेशन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड, कुरत्रिम स्पेस टेक एलएलपी, भारत विज्ञान यात्रा, आरपीआईसी महराजगंज, कासिम इंटर कॉलेज सिद्धार्थनगर, स्मार्ट स्टडी क्लासेज कुशीनगर, प्रैक्सिस विद्यापीठ बस्ती, क्रिस्तुराजा पब्लिक जूनियर हाईस्कूल गोरखपुर, एसआरएल अकादमी सिद्धार्थनगर, लैब सॉल्यूशन्स हरियाणा, स्पेस टू स्पेस, कलाग्रह मध्य प्रदेश, इंडोप्लैनेटएक्स स्पेस वॉल्ट एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड रुड़की, ए.डब्ल्यू. इंटरप्राइजेज तमिलनाडु और केपी टेक्नो लाइफ अमरावती, महाराष्ट्र सहित विभिन्न संस्थाओं का सहयोग रहा है।
- वैज्ञानिकों ने दी शुभकामनाएं
टीम की गुजरात रवानगी पर विज्ञान एवं खगोल विज्ञान से जुड़े अनेक विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। शुभकामना देने वालों में डॉ. चंद्रमौली जोशी, डॉ. जे.जे. रावल, डॉ. दिलीप भट्ट, डॉ. ए.सी. माथुर, डॉ. आलोक माथुर, डॉ. एस.पी. व्यास, इंजीनियर जयंत पी. जोशी, प्रो. हरिओम वत्स, प्रो. चंद्रमौली सोलंकी, प्रो. मुकेश कुमार, इंजीनियर वी.एन. राव रेड्डी, डॉ. राजेश ठाकुर, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. दुर्गेश शाही, जय प्रकाश ओझा, मनीषा सिंह, आनंदमई पांडे, शोभा चौहान, शालिनी त्रिपाठी और खगोलविद अमर पाल सिंह सहित कई अन्य लोग शामिल रहे।
फाउंडेशन के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन में भागीदारी से विद्यार्थियों को नई तकनीकों और वैज्ञानिक गतिविधियों को समझने, अपने विचार साझा करने तथा नवाचार के प्रति रुचि विकसित करने का अवसर मिलेगा। संस्था को उम्मीद है कि यह अनुभव पूर्वांचल के विद्यार्थियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
श्रद्धा दुबे को लेकर लखनऊ पहुंची एसटीएफ, मेडिकल के बाद कोर्ट में की जाएंगी पेश
- व्यापारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच तेज, चार मोबाइल फोन के डेटा की होगी पड़ताल
- नागपुर में कथित ‘जेड गैंग’ से कनेक्शन की आशंका, फरारी के दौरान हुई बातचीत और चैट खंगालेगी पुलिस

लखनऊ। व्यापारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में चर्चा में आई श्रद्धा दुबे को लेकर विशेष कार्यबल (एसटीएफ) लखनऊ पहुंच गई है। जानकारी के मुताबिक, एसटीएफ रश्मि और दानिश को भी लखनऊ लेकर आई है। आरोपियों को मेडिकल परीक्षण के बाद कोर्ट में पेश किया जाएगा। श्रद्धा दुबे को नागपुर से गिरफ्तार किया गया था। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ही पुलिस अब आरोपियों के संपर्कों और उन्हें कथित तौर पर संरक्षण देने वालों की भूमिका की पड़ताल में जुटी है।
जांच के दौरान श्रद्धा दुबे के नागपुर में कथित ‘जेड गैंग’ से संबंधों की आशंका भी सामने आई है। हालांकि, इस संबंध की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस आरोपियों के पास से मिले चार मोबाइल फोन के डेटा की जांच करेगी। मोबाइल फोन में मौजूद चैट, कॉल रिकॉर्ड और फरारी के दौरान हुई बातचीत से मामले से जुड़े अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।
- मोबाइल डेटा से खुल सकते हैं राज
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि फरारी के दौरान श्रद्धा और अन्य आरोपियों ने किन लोगों से संपर्क किया था और उन्हें किसने मदद पहुंचाई। मोबाइल चैट और कॉल डिटेल के विश्लेषण से आरोपियों के संपर्कों तथा संभावित मददगारों की भूमिका स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है। जांच के दायरे में कुछ प्रभावशाली लोगों के संपर्कों की भी पड़ताल किए जाने की संभावना है।
- संरक्षण देने वालों की तलाश
नागपुर में श्रद्धा को कथित तौर पर संरक्षण देने और फार्म हाउस में ठहराने की व्यवस्था करने वालों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जुल्फिकार बेहलिम और मोहसिन सहित कथित वसूली गिरोह के कुछ सदस्यों पर उसे संरक्षण देने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इस गिरोह पर कारोबारियों से रंगदारी मांगने और धमकाने के आरोप भी हैं।
बताया जा रहा है कि अगस्त में इस गिरोह के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत कार्रवाई की गई थी। गिरोह के तार मादक पदार्थों और सोने की तस्करी से जुड़े होने के दावे भी किए जा रहे हैं। हालांकि, श्रद्धा दुबे को संरक्षण देने और कथित गैंग से उसके संबंधों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
फिलहाल, एसटीएफ श्रद्धा की मदद करने वाले संभावित लोगों की तलाश और मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाने में लगी है। मोबाइल फोन के डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद मामले में नए तथ्य सामने आने की संभावना है।
30 अक्टूबर को लखनऊ आएंगे अमित शाह, 2027 चुनाव की तैयारियों की करेंगे समीक्षा
- दो दिवसीय दौरे में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में होंगे शामिल, संगठन की मजबूती और चुनावी रणनीति पर होगा मंथन
- विधायकों के रिपोर्ट कार्ड और प्रदर्शन की समीक्षा की भी संभावना
लखनऊ। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 30 अक्टूबर को दो दिवसीय दौरे पर लखनऊ आएंगे। इस दौरान वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल होंगे और वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करेंगे। उनके दौरे को आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संगठनात्मक गतिविधियों और चुनावी रणनीति पर चर्चा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी तथा प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। बैठक में पार्टी के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े, सह-प्रभारी, केंद्रीय मंत्री, प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी शामिल होंगे।
बैठक में प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक संगठन की स्थिति, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और चुनावी तैयारियों की समीक्षा किए जाने की संभावना है। इसके साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को मजबूत बनाने, पार्टी के कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने और जनसंपर्क गतिविधियों को गति देने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। अमित शाह के दौरे के दूसरे दिन भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ संगठनात्मक स्थिति और चुनावी रणनीति को लेकर अलग से विचार-विमर्श होने की संभावना है। इस दौरान विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी की तैयारियों, संगठनात्मक गतिविधियों और जनप्रतिनिधियों के कामकाज की समीक्षा भी चर्चा के केंद्र में रह सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में विधायकों के रिपोर्ट कार्ड और उनके प्रदर्शन की समीक्षा का मुद्दा भी उठ सकता है। इसके जरिए विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी की स्थिति, जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और संगठन के सामने मौजूद चुनौतियों का आकलन किए जाने की संभावना है। हालांकि, इन बिंदुओं पर बैठक का अंतिम एजेंडा आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।
21-22 अक्टूबर की रात आसमान में दिखेंगी ओरियोनिड्स उल्का वर्षा की चमकीली लकीरें

- हैली धूमकेतु के मलबे से बनती है यह खगोलीय घटना, अनुकूल परिस्थितियों में प्रति घंटे दिख सकती हैं 15 से 20 उल्काएं

- आधी रात के बाद और भोर से पहले करें आकाश का अवलोकन, अंधेरी जगह पर मिलेगा बेहतर नजारा

गोरखपुर। अक्टूबर की रातों में आसमान में टूटते तारों जैसी चमकीली लकीरें देखने का अवसर मिलने जा रहा है। 21 अक्टूबर की रात से 22 अक्टूबर 2026 की भोर तक ओरियोनिड्स उल्का वर्षा का प्रमुख चरण रहने की संभावना है। खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, यह उल्का वर्षा प्रसिद्ध हैली धूमकेतु द्वारा पीछे छोड़े गए धूल और चट्टानी कणों के पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने से उत्पन्न होती है। अनुकूल परिस्थितियों में आकाश के अंधेरे स्थान से प्रति घंटे लगभग 15 से 20 उल्काएं देखी जा सकती हैं। हालांकि, वास्तविक संख्या मौसम, प्रकाश प्रदूषण और चंद्रमा की रोशनी पर निर्भर करेगी। अमर पाल सिंह ने बताया कि ओरियोनिड्स तेज गति से चलने वाली उल्काओं के लिए जानी जाती है। ये पृथ्वी के वायुमंडल में लगभग 66 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से प्रवेश करती हैं। इस दौरान वायुमंडल में गैसों और कणों के बीच होने वाली प्रक्रियाओं से प्रकाश उत्पन्न होता है और आसमान में कुछ क्षणों के लिए चमकीली लकीर दिखाई देती है। अधिकांश उल्काएं सफेद या हल्के पीले रंग की नजर आती हैं, जबकि कुछ परिस्थितियों में हरे, नारंगी या अन्य रंगों की झलक भी दिखाई दे सकती है।

- पूर्वी आकाश में ओरियन तारामंडल की दिशा से जुड़ा है उल्का वर्षा का नाम

खगोलविद के अनुसार, ओरियोनिड्स उल्का वर्षा का नाम ओरियन तारामंडल पर पड़ा है, जिसे भारतीय खगोल परंपरा में कालपुरुष के नाम से भी जाना जाता है। इस उल्का वर्षा का दीप्तिमान बिंदु यानी वह स्थान, जहां से उल्काएं आती हुई प्रतीत होती हैं, ओरियन तारामंडल की दिशा में स्थित है। अक्टूबर के दौरान यह तारामंडल रात बढ़ने के साथ पूर्वी आकाश में दिखाई देने लगता है। हालांकि, उल्काएं केवल इसी दिशा में दिखाई दें, ऐसा जरूरी नहीं है। वे आकाश के दूसरे हिस्सों में भी चमकीली लकीर बनाती नजर आ सकती हैं। किसी उल्का की चमकीली लकीर को पीछे की ओर बढ़ाकर यदि उसका रास्ता ओरियन तारामंडल की दिशा तक पहुंचे, तो उसके ओरियोनिड होने की संभावना होती है। ओरियन तारामंडल को पहचानने का सबसे आसान तरीका उसके मध्य में एक सीध में दिखाई देने वाले तीन चमकीले तारों को देखना है। इन तीन तारों को सामान्यतः ओरियन की बेल्ट कहा जाता है। इनके आधार पर तारामंडल की शेष आकृति को पहचानने में मदद मिलती है।

- कब और कैसे देखें ओरियोनिड्स उल्का वर्षा?

अमर पाल सिंह के मुताबिक, 21 अक्टूबर की रात से 22 अक्टूबर की भोर तक उल्का वर्षा देखने के लिए विशेष रूप से समय निकालना चाहिए। सामान्य तौर पर आधी रात के बाद से भोर से पहले का समय उल्काओं के अवलोकन के लिए बेहतर रहता है। हालांकि, 2026 में बढ़ते चंद्रमा की रोशनी कुछ समय तक उल्काओं को देखना कठिन बना सकती है। इसलिए चंद्रमा के अस्त होने के बाद का अंधेरा समय अधिक अनुकूल रहेगा। उल्का वर्षा देखने के लिए दूरबीन या टेलीस्कोप की आवश्यकता नहीं होती। इसके लिए शहर की तेज रोशनी से दूर किसी खुले स्थान का चयन करना चाहिए, जहां आकाश का बड़ा हिस्सा साफ दिखाई दे। आंखों को अंधेरे के अनुकूल होने के लिए लगभग 20 से 30 मिनट का समय देना उपयोगी रहेगा। इसके बाद आकाश को लगातार देखते हुए उल्काओं की चमकीली लकीरों का आनंद लिया जा सकता है। उल्का वर्षा का चरम समय होने का अर्थ यह नहीं है कि हर कुछ सेकंड में उल्का दिखाई देगी। कभी कुछ मिनटों में कई उल्काएं दिख सकती हैं, तो कभी लंबे अंतराल तक कोई उल्का नजर नहीं आएगी। बादलों, धुंध, चांदनी और प्रकाश प्रदूषण से दृश्यता प्रभावित हो सकती है।

- हैली धूमकेतु है ओरियोनिड्स का मूल स्रोत

अमर पाल सिंह ने बताया कि ओरियोनिड्स का संबंध प्रसिद्ध हैली धूमकेतु से है, जिसका आधिकारिक नाम 1P/हैली है। यह धूमकेतु लगभग 76 वर्षों में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करता है। इसकी वापसी की भविष्यवाणी खगोलविद एडमंड हैली ने की थी। इसी कारण इसका नाम उनके नाम पर रखा गया।जब हैली धूमकेतु सूर्य के निकट से गुजरता है, तो उसकी सतह से धूल और अन्य पदार्थ अंतरिक्ष में निकलकर उसकी कक्षा के आसपास बिखर जाते हैं। पृथ्वी प्रत्येक वर्ष अक्टूबर में इस मलबे के एक क्षेत्र से गुजरती है। धूल के ये सूक्ष्म कण पृथ्वी के वायुमंडल में अत्यधिक गति से प्रवेश करते हैं और चमकते हुए उल्कापथ बनाते हैं। इसी घटना को ओरियोनिड्स उल्का वर्षा कहा जाता है। आम बोलचाल में इन्हें टूटते तारे भी कहा जाता है, हालांकि ये वास्तव में तारे नहीं होते। हैली धूमकेतु की एक और विशेषता यह है कि इससे संबंधित मलबा मई में दिखाई देने वाली एटा एक्वेरिड्स उल्का वर्षा का भी स्रोत है। इस तरह एक ही धूमकेतु पृथ्वी पर हर साल दिखाई देने वाली दो अलग-अलग उल्का वर्षाओं से जुड़ा है।

- 1986 में दिखा था हैली धूमकेतु, 2061 में फिर लौटेगा

खगोलविद के अनुसार, हैली धूमकेतु पिछली बार 1986 में पृथ्वी के निकट दिखाई दिया था और इसकी अगली वापसी 2061 में अपेक्षित है। हालांकि, इसके मलबे से उत्पन्न ओरियोनिड्स उल्का वर्षा देखने के लिए धूमकेतु की वापसी का इंतजार नहीं करना पड़ता। पृथ्वी हर वर्ष अक्टूबर में इस मलबे के क्षेत्र से गुजरती है, इसलिए यह खगोलीय घटना नियमित रूप से देखने को मिलती है।अमर पाल सिंह ने कहा कि उल्का वर्षाओं का अवलोकन धैर्य और अनुकूल परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ओरियोनिड्स भले ही हर बार असाधारण प्रदर्शन न करे, लेकिन तेज गति से चमकती उल्काओं और कभी-कभी दिखाई देने वाले चमकीले अग्निगोलों के कारण यह खगोल प्रेमियों के लिए खास आकर्षण रखती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि खगोलीय घटनाओं से जुड़ी जानकारी साझा करते समय अप्रमाणित सोशल मीडिया दावों से बचें और वैज्ञानिकों तथा विश्वसनीय खगोलीय संस्थानों की जानकारी पर भरोसा करें।

श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाएं: रंजीता झा

- भाजपा नेत्री रंजीता झा ने रामलीला मंचों पर मुख्य अतिथि के रूप में की सहभागिता

हरिद्वार, उत्तराखंड। भाजपा नेत्री एवं संकल्प सेवा परमोधर्म ट्रस्ट की संस्थापक अध्यक्ष श्रीमती रंजीता झा ने हरिदर्शन रामलीला समिति द्वारा आयोजित रामलीला कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की। उन्होंने फीता काटकर तथा भगवान श्री गणेश जी की आरती कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।

इस अवसर पर रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने श्रीमती रंजीता झा का पटका पहनाकर एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानपूर्वक स्वागत किया। कार्यक्रम में संकल्प सेवा परमोधर्म ट्रस्ट के सचिव तरुण कुमार शुक्ल, जितेंद्र कुमार शुक्ल, शौर्य झा एवं रिदम झा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में श्रीमती रंजीता झा ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम का जीवन सत्य, त्याग, कर्तव्य, मर्यादा और आदर्शों का प्रतीक है। हम सभी को भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाते हुए परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। रामलीला जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन हमारी सनातन संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने संकल्प सेवा परमोधर्म ट्रस्ट द्वारा संचालित महिला सशक्तिकरण एवं बेटियों को आगे बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य महिलाओं को सम्मान, अवसर और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रोत्साहित करना है। इसी क्रम में उन्होंने आगामी 27 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाले चतुर्थ करवाचौथ मेहंदी महोत्सव में सभी सनातनी महिलाओं को सादर आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से ट्रस्ट परिवार की बेटियों को अपनी मेहंदी कला एवं हुनर प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया जाएगा। श्रीमती रंजीता झा ने मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित कर सम्मान प्रदान करने के लिए हरिदर्शन रामलीला समिति के समस्त पदाधिकारियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

- सेक्टर-4 में नटराज रामलीला समिति के कार्यक्रम में भी हुईं शामिल

श्रीमती रंजीता झा ने हरिद्वार के सेक्टर-4 में नटराज रामलीला समिति द्वारा आयोजित रामलीला कार्यक्रम में भी सहभागिता की। यहां समिति के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत एवं सम्मान किया। उन्होंने रामलीला के माध्यम से भारतीय संस्कृति और भगवान श्रीराम के आदर्शों के प्रचार-प्रसार के प्रयासों की सराहना की। दोनों रामलीला आयोजनों में उनकी सहभागिता ने धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण, सामाजिक समरसता तथा महिला सशक्तिकरण के संदेश को प्रमुखता प्रदान की।

सपा सरकार में कांवड़ यात्रा और रामनवमी के जुलूस बाधित किए जाते थे : चौधरी भूपेंद्र सिंह

- मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह बोले- तुष्टीकरण में अंधी होकर सपा ने बहुसंख्यक समाज को अपमानित किया 

- राजनीति में खाना खाने नहीं, सामाजिक मुद्दे हल कराने भाजपा के साथ आए हैं', कैबिनेट मंत्री संजय निषाद का अखिलेश पर हमला

- मीडिया का बॉयकॉट करने से जनता सपा के साथ नहीं आएगी, बीजेपी प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश पर साधा निशाना

लखनऊ, 20 अक्टूबर 2026।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्रियों और बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता ने तीखा निशाना साधा है। मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह ने धार्मिक आयोजनों और पत्रकारों के प्रति सपा के रवैये पर सवाल उठाए। मंत्री संजय निषाद ने सामाजिक न्याय और संविधान के मुद्दे पर सपा को घेरा। वहीं, बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सपा द्वारा रावण के रूप में दिखाने वाले एआई वीडियो, महंगाई के आरोपों पर पलटवार किया है।

- सपा सरकार में बाधित किए जाते थे धार्मिक आयोजन

कैबिनेट मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि सपा सरकार में कांवड़ यात्रा, रामनवमी के जुलूस और हिंदुओं के धार्मिक आयोजनों को बाधित किया जाता था। उन्होंने कहा कि योगी सरकार में सभी वर्गों को बिना भेदभाव त्योहार मनाने का अवसर मिला है। उन्होंने अखिलेश यादव पर तुष्टीकरण की राजनीति करने और बहुसंख्यक समाज को अपमानित करने का आरोप लगाया।भूपेंद्र सिंह ने पत्रकारों के प्रति सपा के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव पत्रकारों के सवालों पर उनकी जाति पूछते हैं और मीडिया को अपमानित करते हैं। उन्होंने सपा से पत्रकार जगत से माफी मांगने की मांग की। साथ ही आरोप लगाया कि सपा और कांग्रेस ने युवाओं को गुमराह कर अराजकता फैलाने का प्रयास किया।

- सामाजिक मुद्दों के समाधान के लिए भाजपा के साथ आए

कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि वो राजनीति में खाना खाने के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दों को हल कराने के लिए भाजपा के साथ आए हैं। भाजपा इन मुद्दों के समाधान के लिए पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा सामाजिक मुद्दों का समाधान नहीं करेगी और इस दिशा में दरवाजे बंद करेगी, तब आगे विचार किया जाएगा।

- सत्ता में आने के बाद वादे भूल जाते हैं राजनीतिक दल

संजय निषाद ने कहा कि संविधान की मूल भावना समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय पर आधारित है। सभी राजनीतिक दल लोगों को सम्मान, सुरक्षा, समृद्धि, समानता और स्वावलंबन देने की बात करते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद अपने वादे भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि इसी वजह से जनता अब मोदी और योगी को बुला रही है, क्योंकि उनकी सरकार लोगों के लिए काम कर रही है। अखिलेश यादव के संविधान बचाने के बयान पर पलटवार करते हुए निषाद ने सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि सरकारी नौकरियों में कुछ विशेष वर्गों के परिवारों का अधिक प्रतिनिधित्व है। उन्होंने सवाल उठाया कि दूसरी जातियों को उनका हक क्यों नहीं मिलना चाहिए? निषाद ने कहा कि संविधान का उद्देश्य सभी को समान अवसर और अधिकार देना है, न कि कुछ वर्गों तक अवसरों को सीमित रखना।

- एआई वीडियो और मीडिया के बहिष्कार पर भाजपा का हमला

भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को रावण के रूप में दिखाने वाले एआई वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आने के साथ अखिलेश यादव की बौखलाहट बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता सपा को जवाब देगी। उन्होंने सपा शासन में गुंडागर्दी, माफियाराज और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश रामराज्य की ओर बढ़ रहा है। महंगाई के कारण बाजारों की रौनक गायब होने के अखिलेश यादव के आरोप पर उन्होंने कहा कि त्योहार के दौरान बाजारों में खुशहाली और लोगों के चेहरों पर मुस्कान है। दैनिक जागरण के बहिष्कार संबंधी बयान पर उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव पत्रकारिता को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और सपा को मीडिया को निशाना बनाने के बजाय अपने रवैये में सुधार करना चाहिए।

जाति के नाम पर समाज को बांटने वालों में रावण की आत्मा: मुख्यमंत्री योगी

- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आर्यनगर में विजयादशमी के अवसर पर आयोजित रामलीला कार्यक्रम को किया संबोधित

- मुख्यमंत्री योगी बोले- भारत में सनातन की छाया में सबको मिल रही सुरक्षा

- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा- रामलीला में किसी की जाति नहीं पूछी जाती, कर्म और संवाद का महत्व

- विजयादशमी पर मुख्यमंत्री ने सामाजिक एकता और राष्ट्रहित का किया आह्वान

गोरखपुर, 20 अक्टूबर 2026।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया में मुस्लिम से मुस्लिम, कम्युनिस्ट से कम्युनिस्ट और क्रिश्चियन से क्रिश्चियन लड़ रहे हैं, जबकि भारत सनातन की छाया में हर जाति, संप्रदाय, मत और मजहब को सुरक्षा देने के साथ बिना भेदभाव समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की यह परंपरा उसकी सांस्कृतिक चेतना और समन्वय की भावना को दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज को बांटने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे लोग राष्ट्र की एकता को कमजोर करते हैं। उन्होंने समाज से दुष्प्रचार, नशे और विभाजनकारी प्रवृत्तियों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया।

आर्यनगर रामलीला मैदान में विजयादशमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन मर्यादा, संकल्प और वचन-कर्म की एकरूपता का संदेश देता है। रामलीलाएं इसी आदर्श को गांव-गांव तक पहुंचाने के साथ सामाजिक समरसता की मिसाल प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि विजयादशमी का संकल्प केवल रावण के दस सिर जलाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अन्याय, अत्याचार, अधर्म, भ्रष्टाचार, दुराचार, दुष्प्रचार, भ्रम और नशे के खिलाफ संघर्ष को भी मजबूत करना चाहिए।

- सनातन की छाया में सभी को सुरक्षा और समृद्धि

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में दुनिया के विभिन्न समुदायों और विचारधाराओं के बीच संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया में मुस्लिम से मुस्लिम, कम्युनिस्ट से कम्युनिस्ट और क्रिश्चियन से क्रिश्चियन आपस में लड़ रहे हैं। इसके विपरीत, भारत सनातन की छाया में हर जाति, संप्रदाय, मत और मजहब को सुरक्षा दे रहा है और बिना भेदभाव समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने भारत की सांस्कृतिक परंपरा को सामाजिक समन्वय और सह-अस्तित्व से जोड़ते हुए कहा कि देश की एकता और मजबूती ही उसकी विरासत तथा सम्मान की रक्षा का आधार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भारत कमजोर होता है, तब उसकी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत पर आघात होता है। राम जन्मभूमि, कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ जैसे धार्मिक स्थलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश की मजबूती से ही अपनी परंपराओं और सम्मान को सुरक्षित रखने की क्षमता बढ़ती है। मुख्यमंत्री ने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण को संकल्प और एकता का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान सत्ता नहीं, बल्कि संकल्प था। रामभक्तों ने कठिनाइयों के बावजूद मंदिर निर्माण का विश्वास बनाए रखा। उनके अनुसार, सनातन समाज की एकजुटता ने इस संकल्प को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

- जाति के नाम पर बांटने वाले रावण की प्रवृत्ति से प्रेरित

मुख्यमंत्री ने जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज को बांटने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग समाज की एकता को खंडित करके राष्ट्र को कमजोर करना चाहते हैं, वे रावण की प्रवृत्ति से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि रावण भी समाज की एकता को खंडित करता था। भारत को कमजोर करने की कोशिश करने वाली ऐसी प्रवृत्तियों के विरुद्ध लोगों को एकजुट रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि रामलीलाएं समाज को जोड़ने और समरसता का संदेश देने का काम करती हैं। गांवों में राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, सीता, दशरथ, कौशल्या, कैकेयी, हनुमान, सुग्रीव, अंगद, जामवंत, शबरी और निषादराज जैसे पात्र स्थानीय लोग निभाते हैं। इस प्रक्रिया में समाज के विभिन्न वर्ग एक साथ आते हैं और सामूहिक रूप से परंपरा का निर्वहन करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामलीला में किसी पात्र की जाति नहीं पूछी जाती। उसके कार्य, संवाद और समाज के प्रति योगदान को महत्व दिया जाता है। यह परंपरा समानता, एकता और सामाजिक समरसता का आदर्श प्रस्तुत करती है। उन्होंने लोगों से जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर विभाजन के बजाय राष्ट्रहित और सामाजिक एकता को प्राथमिकता देने की अपील की।

- दुष्प्रचार और भ्रम फैलाने वालों से सावधान रहने की अपील

मुख्यमंत्री ने अयोध्या और राम मंदिर को लेकर दुष्प्रचार किए जाने का आरोप लगाते हुए लोगों से सही और गलत के बीच अंतर पहचानने की अपील की। हनुमान जी और कालनेमि के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छल और कपट को पहचानना आवश्यक है। केवल राम-राम कहने से किसी की मंशा सही साबित नहीं होती, उसके आचरण और उद्देश्य को भी देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण और दीपोत्सव जैसे आयोजन देश की सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री ने लोगों से आह्वान किया कि समाज में भ्रम फैलाकर एकता को कमजोर करने वाले प्रयासों का मिलकर मुकाबला करें। हनुमान जी के संकल्प का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ विश्राम।” मुख्यमंत्री ने इस प्रसंग के माध्यम से समाज और राष्ट्र के हित में अपने दायित्वों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का संदेश दिया।

- नशे के खिलाफ समाज को भी निभानी होगी जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री ने नशे को समाज और युवा पीढ़ी के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि इसके खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। सरकार नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के विरुद्ध कार्रवाई कर रही है और उनकी संपत्तियां जब्त करने सहित कठोर कदम उठा रही है, लेकिन समाज को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी का जीवन बर्बाद करने वाली गतिविधियों को अपने आसपास पनपने नहीं देना चाहिए। परिवार, मोहल्ले और समाज के स्तर पर नशे के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने विजयादशमी के पर्व को इस अभियान से जोड़ते हुए कहा कि रावण के प्रतीकात्मक वध के साथ समाज को उन बुराइयों के विरुद्ध भी संकल्प लेना चाहिए, जो नई पीढ़ी और सामाजिक जीवन को नुकसान पहुंचा रही हैं। उन्होंने नशे के खिलाफ संघर्ष को सनातन धर्म की रक्षा और समाज के कल्याण का हिस्सा बताते हुए हर नागरिक से इस लड़ाई में सहभागी बनने की अपील की। उनके अनुसार, दुष्प्रचार करने वाले, समाज में भ्रम पैदा करने वाले और नशे के माध्यम से युवाओं को बर्बाद करने वाले तत्वों के खिलाफ युवाओं, नारी शक्ति और पूरे समाज को एकजुट होना होगा।

- परिवार और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ें लोग

मुख्यमंत्री ने आधुनिक जीवनशैली में परिवार के लिए समय निकालने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक ही घर में रहने के बावजूद कई बार परिवार के सदस्य सोशल मीडिया और अपने-अपने कार्यों में व्यस्त रहते हैं। लोगों को परिवार के साथ समय बिताने, धार्मिक ग्रंथों और महापुरुषों की जीवनियों को पढ़ने तथा अपनी परंपराओं से जुड़ने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने देश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की यात्रा करने की सलाह देते हुए कैलाश मानसरोवर, बदरीनाथ, केदारनाथ, जगन्नाथपुरी, द्वारकापुरी, कन्याकुमारी, रामेश्वरम और धनुषकोटि का उल्लेख किया। कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर जाकर वहां की परंपराओं को समझने से नई प्रेरणा मिलती है। इसका लाभ बच्चों को भी मिलता है और वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से जान पाते हैं।

- जनकल्याणकारी योजनाओं को बताया रामराज्य की अवधारणा का आधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने रामराज्य की अवधारणा को आदर्श शासन की प्रेरणा के रूप में स्वीकार किया है। इसका उद्देश्य ऐसा समाज बनाना है, जहां किसी को दुख और दरिद्रता का सामना न करना पड़े, हर व्यक्ति को सम्मान मिले और अन्याय-अत्याचार के लिए कोई जगह न हो। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, विद्युत कनेक्शन, रसोई गैस कनेक्शन और प्रधानमंत्री मुफ्त अन्न योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि जरूरतमंदों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में 67 लाख विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जा रही है। गरीब परिवारों की बेटियों की शिक्षा और विवाह के लिए भी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत बेटियों के विवाह के लिए एक लाख रुपये तक का अनुदान दिए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने रोजगार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के प्रयासों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में सीधे धनराशि पहुंचाने से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिली है। नारी गरिमा और सुरक्षा को शासन की प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के सम्मान पर आघात करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

- जन्मभूमि और मातृभूमि के सम्मान का संदेश

मुख्यमंत्री ने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद भी प्रभु श्रीराम वहां के वैभव से मोहित नहीं हुए। उन्होंने लक्ष्मण को जन्मभूमि का महत्व समझाते हुए कहा था, “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।” मुख्यमंत्री ने इस प्रसंग के माध्यम से राष्ट्र प्रथम की भावना अपनाने और भारत की एकता एवं अखंडता के लिए संकल्पबद्ध रहने की अपील की।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता यदि देश की एकता और राष्ट्रहित के संकल्प के साथ आगे बढ़ेगी तो समाज को बांटने और अराजकता फैलाने वाली ताकतों को परास्त किया जा सकेगा। अन्याय करने, नारी गरिमा को ठेस पहुंचाने तथा सनातन धर्म और भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने वालों को उनके कृत्यों का परिणाम भुगतना पड़ेगा।

- विजय शोभायात्रा में शामिल हुए गोरक्षपीठाधीश्वर

विजयादशमी के पावन अवसर पर श्री गोरखनाथ मंदिर के तत्वावधान में आयोजित पारंपरिक विजय शोभायात्रा में गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। नाथपंथ के पारंपरिक परिधान में सुसज्जित होकर वह विजयरथ पर सवार हुए और गोरखनाथ मंदिर से निकलने वाली भव्य शोभायात्रा की अगुवाई की। तुरही, नगाड़ों और बैंड-बाजे की गूंज के बीच शोभायात्रा मानसरोवर मंदिर पहुंची, जहां मुख्यमंत्री ने देवाधिदेव भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद शोभायात्रा मानसरोवर रामलीला मैदान पहुंची। यहां मुख्यमंत्री ने मंच पर पहुंचकर भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की पूजा-आरती की तथा प्रभु श्रीराम का राजतिलक किया। इस अवसर पर आर्यनगर रामलीला समिति के अध्यक्ष पुष्पदंत जैन ने अंगवस्त्र पहनाकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। समिति के पदाधिकारियों दीप अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, सुधीर जैन, कीर्तिरमण, अनुराग गुप्ता, विकास जालान और महेश पोद्दार ने विशाल माला पहनाकर उनका अभिनंदन किया। अतुल सराफ, अनूप सराफ, शोभित मोहन दास और पुष्पदंत जैन ने मुख्यमंत्री को स्मृति चिह्न के रूप में भगवान श्रीराम की प्रतिमा भेंट की। रामलीला का निर्देशन कर रहे स्वामी नेमाई ने उन्हें श्रीरामचरितमानस भेंट की।

- पुष्पदंत जैन ने मुख्यमंत्री का जताया आभार

आर्यनगर रामलीला समिति के अध्यक्ष पुष्पदंत जैन ने रामलीला मैदान और मंच को सनातन धर्म के लिए मुख्यमंत्री की अमूल्य देन बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री केवल एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि एक विचार हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के संकल्प को साकार करने में मुख्यमंत्री की भूमिका की सराहना की। जैन ने कहा कि गोरक्षपीठ की परंपरा सदियों से धर्म और राष्ट्र की रक्षा करती आई है। आर्यनगर की रामलीला केवल मंचीय आयोजन नहीं, बल्कि बच्चों को राम के आदर्शों से परिचित कराने का माध्यम है। राम मर्यादा, त्याग और न्याय के प्रतीक हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री की जनसेवा को रामराज्य की अवधारणा से जोड़ते हुए उन्हें प्रदेश के लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

- कार्यक्रम में रहे मौजूद

कार्यक्रम में गोरखपुर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, गोरखपुर ग्रामीण के विधायक विपिन सिंह, आर्यनगर रामलीला समिति के अध्यक्ष पुष्पदंत जैन, उपाध्यक्ष अतुल सराफ, महामंत्री दीप अग्रवाल और कोषाध्यक्ष मनीष अग्रवाल सहित समिति के पदाधिकारी सुधीर जैन, कीर्तिरमण, अनुराग गुप्ता, विकास जालान, महेश पोद्दार और शोभित मोहन दास उपस्थित रहे। मंच पर पूज्य संतजन तथा रामलीला आयोजन से जुड़े पदाधिकारी और श्रद्धालु भी मौजूद थे।

जन समस्याओं का निस्तारण भी होगा, सुविधाएं भी मिलेगी : केशव प्रसाद मौर्य
- डिप्टी सीएम ने जनता दर्शन में सुनी समस्याएं, दिए त्वरित निस्तारण के निर्देश
- उप मुख्यमंत्री ने कहा- हर व्यक्ति को न्याय दिलाना सरकार की प्रतिबद्धता
लखनऊ: 19 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार को अपने कैंप कार्यालय,7-कालिदास मार्ग, लखनऊ पर ‘जनता दर्शन’ के माध्यम से विभिन्न जनपदों से आए नागरिकों से भेंट कर उनकी समस्याओं को सुना तथा त्वरित, प्रभावी और न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करने हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए कई सैकड़ा लोगों की व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और संबंधित विभागीय अधिकारियों को उनके त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण के स्पष्ट निर्देश दिए। जनता दर्शन में बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं, वृद्धजन व युवा उपस्थित रहे, जिन्होंने अपनी समस्याओं को सीधे उप मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया। अधिकतर प्रकरणों में भूमि विवाद, राजस्व संबंधित मुद्दे, चिकित्सा सहायता, पेंशन, आवास, सड़क, बिजली-पानी की समस्याएं, पुलिस कार्यवाही से सम्बन्धित, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़े मामले रहे
श्री मौर्य ने कहा कि जनता दर्शन आमजन से सीधे संवाद का माध्यम है, जिससे जमीनी हकीकत सामने आती है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही न हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मामलों में आवश्यक हो, वहां मौके पर जाकर निरीक्षण किया जाए और पीड़ितों को समयबद्ध राहत प्रदान की जाए। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जरूरतमंदों व पात्र लोगों को हर सम्भव सरकारी सुविधाओं का भरपूर लाभ मिलना ही चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि सरकार आम जनता की भलाई के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और जनहित सर्वोपरि है।
श्री मौर्य ने उपस्थित लोगों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के समाधान हेतु सरकार हर संभव कदम उठाएगी और कोई भी पीड़ित निराश न लौटे—यही प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। जनता दर्शन में आये फरियादियों को विश्वास दिलाते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति की हर समस्या का हर सम्भव निदान किया जायेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि  प्रत्येक फरियादी की समस्या का त्वरित व संतुष्टिपरक समाधान किया जाय। निर्देश दिए कि समस्याओं का सम्पूर्ण समाधान किया जाय और समस्याओं के समाधान हेतु सम्बन्धित की जवाबदेही तय होनी चाहिये। निर्देश दिए कि जन समस्याओं का  समयबद्ध  निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। किसी भी स्तर  पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि उत्पीड़न, भूमि पर अवैध कब्जों के मामलों को बेहद गंभीरता व संवेदनशीलता के साथ हल किया जाय और जहां जरूरत हो, कठोर कार्यवाही की जाय।
उन्होने जनसुनवाई के दौरान एक-एक व्यक्ति की समस्या को पूरी गम्भीरता से सुना तथा समस्याओं के निराकरण हेतु  सम्बंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने  फरियादियों को विश्वास दिलाते हुये कहा कि परेशान न हो, समस्याओं का समाधान भी होगा, सरकार द्वारा प्रदत्त सुविधाएं भी मिलेंगी। उन्होंने सम्बंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि समस्याओं का निराकरण इस प्रकार किया जाय कि समस्याग्रस्त व्यक्ति पूरी तरह से संतुष्ट रहें और उन्हें दुबारा कहीं भटकना न पड़े और बार -बार चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने महिलाओं, दिव्यांग जनो, बुजुर्गों आदि की समस्याओं व शिकायतों को सुना और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर संबंधित अधिकारियों को त्वरित गति से निदान करने हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिए। जमीन सम्बन्धी अधिकांश प्रकरणों में उन्होंने सम्बन्धित जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि राजस्व व पुलिस विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की संयुक्त टीम बनाकर मौके पर भेजा जाय और सार्थक समाधान कराया जाय।