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देव में नियमों को ठेंगा दिखाकर चल रहे कबाड़खाने, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

,देव(औरंगाबाद) देव में कायदे-कानून को खुलेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है। नगर के घनी आबादी और मुख्य सड़क के किनारे अवैध कबाड़खाने बेरोकटोक चल रहे हैं। इनके पास न तो देव नगर पंचायत से ट्रेड लाइसेंस है, न प्रदूषण विभाग से एनओसी और न हीं फायर विभाग की अनुमति, फिर भी इनका अवैध साम्राज्य फल-फूल रहा है। यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं तो और क्या है?

हर नियम की धज्जियां उड़ा रहे कबाड़ी

जानकारी के अनुसार ये कबाड़खाने कई कानूनों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं।

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 का खुला उल्लंघन-नियम कहता है कि कबाड़ का भंडारण और रीसाइक्लिंग के लिए प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से ऑथोराइजेशन लेना अनिवार्य है। लेकिन यहां किसी के पास एनओसी नहीं है। खतरनाक कचरा, प्लास्टिक, ई-वेस्ट का सही तरीके से भंडारण नही किये जाने से इलाके में प्रदूषण फैल रहा है।

बिहार म्यूनिसिपल एक्ट 2007 का भी उल्लंघन- नगर पंचायत से बिना ट्रेड लाइसेंस और नजरी नक्शा पास कराए व्यवसायिक गतिविधि चलाना पूरी तरह अवैध है। लेकिन यहां कबाड़खाने देव नगर पंचायत को बिना किसी होल्डिंग टैक्स और ट्रेड टैक्स दिये चलाया जा रहा है, जिससे सरकार को लाखों का चूना लगा रहा हैं। साथ ही आवासीय और कृषि भूमि पर अवैध रूप से कबाड़खाना चलाया जाना भी नियमों का उल्लंघन है।

जीएसटी और श्रम कानून को ठेंगा-यहां बिना बिल वाउचर के लाखों के लोहे और प्लास्टिक कबाड़ की खरीद-बिक्री नगद में हो रही है। जीएसटी की चोरी चरम पर है। साथ ही बाल मजदूरी और बिना सुरक्षा उपकरण के मजदूरों से काम कराना भी आम है।

चोरी के सामान का भी अड्डा, प्रशासन कब जागेगा?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये कबाड़खाने चोरी के बिजली तार, सरकारी नल के पाइप, लोहे के एंगल तक खरीदते हैं। कबाड़खाने में भारी मात्रा में कबाड़ के भंडारण में फायर सेफ्टी की भी पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। यदि कबाड़ में आग लगने की अनहोनी हो जाये, तो अगल-बगल के घर भी जल जायेंगे। इस स्थिति में जिस मुहल्ले में कबाड़खाना चल रहा है, उस पूरे मोहल्ले को आग का खतरा है क्योंकि कबाड़खाने में एक भी फायर सेफ्टी उपकरण का इंतजाम नहीं है। एसे में

सवाल यह उठता है कि आखिर अवैध कबाड़खाना किसके संरक्षण में चल रहा हैं? औरंगाबाद जिला प्रशासन, देव नगर पंचायत, प्रदूषण बोर्ड और पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर हो रहे इस अवैध कारोबार पर कठोर कार्रवाई कब होगी