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UPTET 2026 : सफल अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्र जारी, आयोग की वेबसाइट से कर सकेंगे डाउनलोड

- प्राथमिक स्तर के 5,71,435 और उच्च प्राथमिक स्तर के 7,59,513 अभ्यर्थी हुए सफल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि विज्ञापन संख्या 01/2026 के अंतर्गत आयोजित उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET-2026) में सफल घोषित सभी अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्र आयोग द्वारा निर्गत कर दिए गए हैं। सफल अभ्यर्थी आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से अपना अनुक्रमांक एवं जन्मतिथि दर्ज कर प्रमाण-पत्र डाउनलोड कर सकते हैं।

डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि UPTET-2026 की लिखित परीक्षा 02 एवं 03 जुलाई 2026 को दो-दो पालियों तथा 04 जुलाई 2026 को एक पाली, इस प्रकार कुल 05 पालियों में प्रदेश के 60 जनपदों के 955 परीक्षा केन्द्रों पर सकुशल सम्पन्न कराई गई थी। इनमें उच्च प्राथमिक स्तर की 03 पालियां तथा प्राथमिक स्तर की 02 पालियां शामिल थीं।

उन्होंने बताया कि UPTET-2026 का परिणाम 26 अगस्त 2026 को घोषित किया गया। प्राथमिक स्तर (कक्षा 01 से 05 तक) की परीक्षा में कुल 7,13,648 अभ्यर्थी सम्मिलित हुए थे, जिनमें से 5,71,435 अभ्यर्थी अर्थात 80.07 प्रतिशत सफल घोषित किए गए। इसी प्रकार उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 06 से 08 तक) की परीक्षा में कुल 10,57,021 अभ्यर्थी सम्मिलित हुए, जिनमें से 7,59,513 अभ्यर्थी अर्थात 71.85 प्रतिशत सफल घोषित किए गए।

आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि परीक्षा परिणाम घोषित होने के उपरांत सभी सफल अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्र निर्गत कर दिए गए हैं। अभ्यर्थी उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट https://www.upessc.up.gov.in/ पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से अपना अनुक्रमांक एवं जन्मतिथि दर्ज कर प्रमाण-पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उक्त प्रमाण-पत्र डिजिलॉकर के माध्यम से भी यथाशीघ्र उपलब्ध कराया जाएगा।

आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने सफल अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफलता उनके शिक्षण क्षेत्र में आगे बढ़ने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आयोग का प्रयास है कि परीक्षा एवं प्रमाण-पत्र से संबंधित सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी, सुगम और अभ्यर्थी हितैषी तरीके से समयबद्ध रूप से पूरी की जाएं।

योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश बनेगा देश का प्रमुख वस्त्र एवं परिधान उद्योग हब

- 8-9 सितंबर को लखनऊ में होगा यू.पी. टेक्स-2026, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे शुभारंभ

- वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र के प्रमुख उद्यमियों के साथ मुख्यमंत्री करेंगे उच्चस्तरीय संवाद, निवेश और रोजगार बढ़ाने पर होगा मंथन

- 'यू.पी. टेक्स मित्र’ पोर्टल, हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना और वस्त्र क्षेत्र प्रशिक्षण एवं कौशल विकास योजना का होगा शुभारंभ

लखनऊ। योगी सरकार उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख वस्त्र एवं परिधान उद्योग केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। प्रदेश में निवेश, रोजगार और निर्यात को बढ़ावा देने तथा हथकरघा, रेशम, परिधान, तकनीकी वस्त्र एवं हस्तशिल्प क्षेत्र को वैश्विक बाजार से जोड़ने के उद्देश्य से 8 एवं 9 सितंबर 2026 को इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में यू.पी. टेक्स-2026 का आयोजन किया जा रहा है। दो दिवसीय आयोजन का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं अवलोकन करने के साथ ही वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र के प्रमुख उद्यमियों के साथ उच्चस्तरीय गोलमेज संवाद भी करेंगे। 

यू.पी. टेक्स-2026 उत्तर प्रदेश को वैश्विक वस्त्र विनिर्माण एवं निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की सरकार की रणनीति को गति देगा। आयोजन में उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों, निवेशकों, विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर प्रदेश में वस्त्र क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं, उत्पादन क्षमता, निर्यात, तकनीकी वस्त्र और आधुनिक परिधान उद्योग के विस्तार पर व्यापक चर्चा की जाएगी। पहले दिन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में प्रमुख वस्त्र एवं परिधान उद्यमियों के साथ उच्चस्तरीय संवाद होगा, जिसमें प्रदेश में उद्योग विस्तार और निवेश को लेकर सुझाव लिए जाएंगे। 

यू.पी. टेक्स-2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा ‘यू.पी. टेक्स मित्र’ पोर्टल का शुभारंभ किया जाएगा। इसके साथ ही हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना तथा उत्तर प्रदेश वस्त्र क्षेत्र प्रशिक्षण एवं कौशल विकास योजना का भी शुभारंभ होगा। आयोजन में निवेश से जुड़े पत्रों का वितरण, चेक वितरण और निवेश संबंधी समझौतों का आदान-प्रदान भी प्रस्तावित है। 

वस्त्र क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सीआईटीआई-एनआईटीआरए की संयुक्त अध्ययन रिपोर्ट ‘एआई, ऑटोमेशन एवं डिजिटलीकरण के लिए भारतीय वस्त्र एवं परिधान उद्योग की तैयारी’ भी जारी की जाएगी। इससे वस्त्र एवं परिधान उद्योग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन और डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग तथा उद्योग की भविष्य की आवश्यकताओं को समझने में मदद मिलेगी। 

यू.पी. टेक्स-2026 में पीएम मित्र एवं संत कबीर टेक्सटाइल पार्क को वैश्विक स्तर के विनिर्माण एवं निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने पर विशेष चर्चा होगी। इन पार्कों के माध्यम से फाइबर से लेकर परिधान एवं तकनीकी वस्त्र तक पूरी मूल्य श्रृंखला को एकीकृत करने, बड़े घरेलू एवं वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने तथा भूमि, आधारभूत सुविधाओं, परीक्षण, परिवहन और अन्य सुविधाओं के साथ निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विचार होगा। 

योगी सरकार का प्रयास है कि टेक्सटाइल पार्कों के माध्यम से प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश के साथ रोजगार सृजन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का एकीकरण, तकनीकी हस्तांतरण, कौशल विकास और निर्यात वृद्धि को गति मिले। इससे उत्तर प्रदेश को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी। 

पहले दिन उत्तर प्रदेश में होम टेक्सटाइल की संभावनाओं पर विशेष सत्र आयोजित होगा। इसमें बेड लिनेन, तौलिया, पर्दे, फर्निशिंग, कालीन, गलीचे एवं अन्य उत्पादों में मूल्य संवर्धन, निवेश, तकनीकी नवाचार, निर्यात और वैश्विक ब्रांडों के लिए उत्तर प्रदेश को प्रमुख आपूर्ति केंद्र बनाने पर चर्चा होगी। 

इसके अलावा ‘स्केल यूपी अपैरल’ विषयक सत्र में असंगठित एवं छोटे परिधान निर्माण इकाइयों को संगठित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी परिधान इकाइयों में बदलने, आधुनिक परिधान क्लस्टर विकसित करने, स्वचालन एवं डिजिटल उत्पादन प्रणाली अपनाने और प्रदेश के एमएसएमई को वैश्विक परिधान मूल्य श्रृंखला से जोड़ने की रणनीति पर चर्चा होगी। 

9 सितंबर को आयोजित सत्रों में उत्तर प्रदेश को खेल वस्त्र एवं खेल सामग्री का प्रमुख विनिर्माण केंद्र बनाने तथा सुरक्षात्मक एवं रक्षा वस्त्रों का राष्ट्रीय केंद्र विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा होगी। खेल वस्त्र सत्र में फाइबर एवं तकनीकी वस्त्र से लेकर खेल परिधान, जूते, उपकरण एवं सहायक सामग्री तक पूरी मूल्य श्रृंखला विकसित करने, निवेश आकर्षित करने, अनुसंधान एवं नवाचार तथा निर्यात को बढ़ावा देने पर मंथन होगा। 

वहीं रक्षा एवं सुरक्षात्मक वस्त्रों से जुड़े सत्र में सुरक्षात्मक परिधान, बैलिस्टिक वस्त्र, छलावरण कपड़े तथा उच्च क्षमता वाली आधुनिक सामग्रियों के निर्माण के लिए प्रदेश में एकीकृत औद्योगिक तंत्र विकसित करने पर विचार होगा। रक्षा क्षेत्र की आवश्यकताओं के साथ प्रदेश के वस्त्र, इंजीनियरिंग, एमएसएमई एवं विनिर्माण क्षेत्र की क्षमताओं को जोड़ने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की जाएगी। 

यू.पी. टेक्स-2026 में उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प एवं हस्तनिर्मित उत्पादों के निर्यात के लिए रोडमैप तैयार करने पर भी विशेष सत्र होगा। पारंपरिक शिल्प समूहों को निर्यात योग्य उत्पादन तंत्र में विकसित करने, आधुनिक डिजाइन एवं वैश्विक बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने, गुणवत्ता एवं प्रमाणन में सुधार, डिजिटल वाणिज्य के माध्यम से वैश्विक खरीदारों तक पहुंच बनाने तथा प्रदेश की जीआई पहचान वाले उत्पादों की वैश्विक ब्रांडिंग पर चर्चा होगी। 

उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए बनेगी एक समान नीति

- योगी सरकार विद्यार्थियों को स्वस्थ, सुरक्षित एवं तनावमुक्त शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने सोमवार को लखनऊ स्थित अपने आवास पर उच्च शिक्षा संस्थानों में एक समान छात्र मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति के संबंध में उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में प्रस्तावित नीति के विभिन्न पहलुओं, इसके प्रभावी क्रियान्वयन और विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य एवं परामर्श संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा एम. पी. अग्रवाल, विशेष सचिव निधि श्रीवास्तव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
योगी सरकार उच्च शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के साथ-साथ विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दे रही है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसा शैक्षणिक वातावरण देना है, जहां वे शैक्षणिक दबाव, तनाव या भावनात्मक चुनौतियों की स्थिति में समय पर सहायता प्राप्त कर सकें।
प्रस्तावित नीति के तहत राज्य, जिला और संस्थान स्तर पर समन्वित व्यवस्था विकसित की जाएगी। राज्य स्तर पर निदेशक, उच्च शिक्षा को नोडल एवं कार्यान्वयन प्राधिकारी बनाया जाएगा, जबकि प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में संचालन समिति क्रियान्वयन, बजट और समीक्षा की निगरानी करेगी। जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के साथ समन्वय करेगी।
प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य सहायता कक्ष की स्थापना की जाएगी, जहां विद्यार्थियों को गोपनीय वातावरण में परामर्श मिलेगा। ऑनलाइन मानसिक स्वास्थ्य पोर्टल के माध्यम से टेस्टिंग की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। जरूरत पर विद्यार्थियों को परामर्शदाता, मनोवैज्ञानिक या विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ा जाएगा।
शिक्षकों, गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों और छात्र प्रतिनिधियों को तनाव, भावनात्मक परेशानी के संकेतों को समझने और सहायता पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षित शिक्षक छोटे समूहों में मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और जीवन कौशल पर संवाद कार्यक्रम चलाएंगे। गंभीर तनाव या आपातकाल में तत्काल सहायता के लिए हेल्पलाइन और रेफरल व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिसमें विद्यार्थी की गोपनीयता और गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
नीति के तहत मानसिक स्वास्थ्य को समग्र व्यक्तित्व विकास से जोड़ा जाएगा। इसके लिए जागरूकता अभियान, कार्यशालाएं, खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियां, करियर काउंसलिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से सकारात्मक वातावरण तैयार किया जाएगा। क्रियान्वयन और निगरानी के लिए उच्च शिक्षा विभाग में समेकित पोर्टल एवं डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा।
बागपत सड़क हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 08 हुई
24 घायलों का इलाज जारी

अपर पुलिस महानिदेशक भानु भास्कर ने बागपत पहुंचकर घायलों का हाल जाना

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के जनपद बागपत के थाना खेकड़ा क्षेत्र में रविवार देर रात हुए सड़क हादसे में मृतकाें की संख्या बढ़कर आठ पहुंच गयी है। बागपत पुलिस ने इसकी पुष्टि की है। मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक भानु भास्कर ने बागपत पहुंचकर घायलों का हाल जाना। उन्हाेंने बताया कि सभी घायलों का इलाज जारी है।

रविवार देर रात करीब 12:30 बजे एक वाहन डिवाइडर से टकराकर अनियंत्रित होकर पलट गया। उसकी सूचना डायल 112 को मिली थी। वाहन में सवार सभी लोग राजस्थान से जनपद बदायूं की ओर जा रहे थे। सूचना मिलते ही चार पीआरवी, एम्बुलेंस सेवा, थाना खेकड़ा पुलिस और उच्चाधिकारी मौके पर पहुंच गए और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। हादसा इतना भीषण था कि वाहन में सवार कई लोग बुरी तरह घायल हो गए।

दुर्घटना में करीब 24 लोग घायल हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को तत्काल सीएचसी खेकड़ा, सीएचसी बागपत और जिला अस्पताल बागपत भेजा गया। गंभीर रूप से घायलों को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया है। इस हादसे में आठ लोगों की मौत हो चुकी है।

अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन भानु भास्कर की ओर से भी इस घटना को लेकर बयान जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि हादसे में आठ लोगों की मौत हुई है। हालांकि पुलिस ने अभी तक मृतकों के नामों की पुष्टि नहीं की है। दुर्घटना में घायलों का इलाज जारी है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
पंचायत उत्सव भवन से ग्रामीणों को मिलेंगी सस्ती एवं सुलभ मांगलिक आयोजन की सुविधाएं
- प्रथम चरण में 71 ग्रामीण विधान सभाओं में निर्माण कार्य शुरू

- प्रत्येक भवन की अनुमानित लागत 1.41 करोड़ रुपये

लखनऊ। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह, मुंडन एवं अन्य मांगलिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए ग्रामीण आबादी को सुलभ एवं सस्ती दरों पर स्थान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक ग्रामीण विधान सभा में पंचायत उत्सव भवन का निर्माण कराया जाएगा। यह योजना ग्राम पंचायतों के माध्यम से क्रियान्वित एवं संचालित की जाएगी।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में पंचायत उत्सव भवनों के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपये का प्राविधान किया गया है। प्रथम चरण में प्रदेश की 71 ग्रामीण विधान सभाओं में एक-एक पंचायत उत्सव भवन का निर्माण हेतु धनराशि अवमुक्त की गई है। प्रत्येक भवन की अनुमानित लागत 1.41 करोड़ रुपये आकलित की गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रथम चरण के अंतर्गत प्रदेश की 71 ग्रामीण विधान सभाओं में पंचायत उत्सव भवनों का निर्माण कार्य प्रारम्भ किया जा चुका है।
पंचायत उत्सव भवन के निर्माण के लिए 3000 वर्गमीटर भूमि की आवश्यकता होगी, जिसमें 520 वर्गमीटर क्षेत्रफल में निर्माण कार्य कराया जाएगा। प्रस्तावित भवन में 100 लोगों की क्षमता वाला हॉल, स्टेज/मंडप, तीन कमरे, भूतल पर शौचालय सहित एक दिव्यांगजन हितैषी कमरा, पुरुष एवं महिला शौचालय, दिव्यांगजन शौचालय तथा रसोईघर सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
द्वितीय चरण हेतु वित्तीय वर्ष 2026-27 में 71 पंचायत उत्सव भवन निर्माण हेतु नियमित बजट से रू. 100 करोड् दिये जाने का प्राविधान है तथा अनुपूरक बजट से 78 पंचायत उत्सव भवन निर्माण हेतु रू. 109 करोड् की धनराशि का बजट प्राविधान किया गया है।
इस योजना से ग्रामीण परिवारों को वैवाहिक एवं अन्य मांगलिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए सस्ती दरों पर सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा। साथ ही, ग्राम पंचायतों के माध्यम से संचालित होने वाले इन भवनों से ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक सुविधाओं का विस्तार और स्थानीय स्तर पर जनसुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा।

- संचालन की प्रक्रिया :
पंचायत उत्सव भवन का संचालन ग्राम पंचायत दवारा निविदा प्रक्रिया के माध्यम से चयनित निविदादाता से अनुबंध किया जाएगा। पंचायत उत्सव भवन का संचालन रखरखाव एवं आवंटन का कार्य अनुबंधित निविदादाता द्वारा ही किया जाएगा। उपरोक्त कार्य हेतु अनुबंध अधिकतम 05 वर्ष के लिए मान्य होगा। भवन का रखरखाव, मरम्मत, जल शुल्क, विद्युत का व्यय भार वहन करने तथा संचालन इत्यादि अनुबंध अवधि में संबंधित ठेकेदार द्वारा किया जाएगा, जो अनुबंध की शर्तों में सम्मिलित किया जाएगा। निविदा हेतु शेष शर्ते, संचालन की मानक प्रक्रिया एवं पंचायत उत्सव भवन के आवंटन की दरों आदि पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा निर्णय लिया जायेगा। उपरोक्तानुसार चयनित निविदादाता द्वारा अनुबन्ध से पूर्व ही प्रथम वर्ष की धनरशि एकमुश्त ग्राम पंचायत से ओएसआर खाते में जमा की जायेगी तथा इसी प्रकार प्रत्येक वर्ष अनुबन्ध दिनांक के पूर्व ही धनराशि ग्राम पंचायत से ओएसआर खाते जमा की जायेगी।
सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम को लेकर कार्यशाला आयोजित 59 जिलों के अधिकारियों ने लिया प्रशिक्षण
दुर्घटना वाले स्थानों पर अधिक कार्रवाई के सिद्धांत पर जोर

जनवरी से अगस्त तक हादसों में 6.97 प्रतिशत की कमी

लखनऊ। सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में चलाए जा रहे शून्य मृत्यु जिला कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए सोमवार को एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। पुलिस मुख्यालय, उत्तर प्रदेश, लखनऊ स्थित अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यशाला में प्रदेश के 59 जिलों के दुर्घटना बाहुल्य स्थानों पर गठित 228 दलों के प्रभारी अधिकारियों और संबंधित नोडल अधिकारियों ने हिस्सा लिया। यह कार्यशाला मुख्यमंत्री के सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली जनहानि को कम करने के निर्देशों के क्रम में तथा डीजीपी राजीव कृष्ण के मार्गदर्शन में यातायात निदेशालय की ओर से आयोजित की गई। कार्यक्रम में तीसरे और चौथे चरण के अंतर्गत प्रदेश के 59 जिलों के 213 सबसे अधिक दुर्घटना वाले स्थानों पर गठित 228 दलों के अधिकारियों को दुर्घटनाओं की रोकथाम, जांच और प्रभावी कार्रवाई के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को केवल अचानक होने वाली घटना मानकर नहीं चलना चाहिए। प्रत्येक दुर्घटना के पीछे कोई न कोई कारण होता है। ऐसे कारणों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान कर उन्हें दूर करना आवश्यक है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपने-अपने क्षेत्र में दुर्घटना संभावित स्थानों और वहां दुर्घटनाओं के कारणों की पहचान की जाए। इसके बाद संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर उन कमियों को दूर कराने की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि किसी सड़क पर यदि बार-बार दुर्घटनाएं हो रही हैं तो वहां की सड़क व्यवस्था, यातायात संचालन, संकेतक, प्रकाश व्यवस्था, वाहनों की गति और अन्य संभावित कारणों की समीक्षा की जानी चाहिए। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि संबंधित विभागों से कराए जाने वाले सुधार कार्यों का लगातार अनुसरण किया जाए। जरूरत पड़ने पर उच्च अधिकारियों के स्तर पर मामला उठाकर सुधार कार्य पूरा कराया जाए।

दुर्घटना के बाद जांच के साथ रोकथाम भी जिम्मेदारी

उन्होंने कहा कि दुर्घटना वाले स्थानों पर गठित दलों की जिम्मेदारी केवल हादसा होने के बाद मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि दुर्घटनाओं को रोकना भी उनकी प्रमुख जिम्मेदारी है। प्रत्येक हादसे के बाद उसकी समीक्षा कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि दुर्घटना किस कारण हुई और भविष्य में उसी तरह की दुर्घटना को रोकने के लिए क्या सुधार किए जा सकते हैं। उन्होंने दुर्घटना रोकथाम और दुर्घटना की जांच में विशेषज्ञता विकसित करने पर जोर दिया। अधिकारियों को तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी हासिल करने, आवश्यक प्रशिक्षण लेने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए। डीजीपी ने कहा कि सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों में प्रक्रिया का सही और लगातार पालन सबसे महत्वपूर्ण है। दुर्घटना वाले स्थानों की समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों के साथ लगातार संपर्क और निगरानी रखी जानी चाहिए।

सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण

कार्यशाला के दौरान अधिकारियों को सड़क सुरक्षा, दुर्घटना रोकथाम, प्रभावी यातायात कार्रवाई, दुर्घटना विश्लेषण, दुर्घटना की जांच, दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान, प्राथमिक उपचार और आपात स्थिति में जीवन बचाने के उपायों की जानकारी दी गई। अपर पुलिस महानिदेशक यातायात एवं सड़क सुरक्षा ए. सतीश गणेश ने कार्यक्रम के प्रथम सत्र में शून्य मृत्यु जिला कार्यक्रम और सड़क दुर्घटनाओं तथा जनहानि को कम करने के लिए यातायात निगरानी उपकरणों के उचित और प्रभावी उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बरेली के अधिकारी रमेश चंद्र प्रजापति ने यातायात कार्रवाई में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के बारे में बताया। मेदांता अस्पताल के चिकित्सक डॉ. लोकेन्द्र गुप्ता ने प्राथमिक उपचार और हृदय गति रुकने जैसी आपात स्थिति में जीवन बचाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया।
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के शिजान ने दुर्घटनाओं से संबंधित ऑनलाइन व्यवस्था, पीड़ितों को मिलने वाली सहायता और पीड़ित या मरीज की पहचान से संबंधित जानकारी दी। यातायात निदेशालय के पुलिस उपमहानिरीक्षक ने दुर्घटना की जांच, दुर्घटना संभावित स्थानों और विभिन्न मामलों के अध्ययन के माध्यम से अधिकारियों का मार्गदर्शन किया।

योजना से दुर्घटनाओं में आई कमी

अधिकारियों के अनुसार शून्य मृत्यु जिला योजना प्रदेश के सभी पुलिस आयुक्तालयों और जिलों के सबसे अधिक दुर्घटना वाले 700 स्थानों पर लागू है। योजना के तहत वैज्ञानिक तरीके से दुर्घटना वाले स्थानों की पहचान, लक्षित यातायात कार्रवाई, उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, सड़क निर्माण से जुड़ी कमियों को दूर कराने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। योजना के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। जनवरी से अगस्त 2026 तक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में योजना के अंतर्गत आने वाले स्थानों पर सड़क दुर्घटनाओं में 6.97 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसी अवधि में दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में 8.03 प्रतिशत और घायलों की संख्या में 6.11 प्रतिशत की कमी आई। आंकड़ों के अनुसार जनवरी से अगस्त 2026 के दौरान पिछले वर्ष की तुलना में 1,255 सड़क दुर्घटनाएं कम हुईं। इसका मतलब प्रतिदिन औसतन करीब सात दुर्घटनाएं कम हुईं। इसी अवधि में 1,107 लोगों की जान बचाने में सफलता मिली, यानी प्रतिदिन औसतन करीब पांच लोगों का जीवन बचाया गया।

जहां दुर्घटनाएं अधिक, वहां कार्रवाई अधिक

शून्य मृत्यु जिला योजना का मुख्य आधार यह है कि जहां दुर्घटनाएं अधिक हों, वहां कार्रवाई भी अधिक की जाए। इसके तहत ऐसे स्थानों को लगातार चिन्हित किया जा रहा है, जहां सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए अतिरिक्त और लक्षित कार्रवाई की जरूरत है। यातायात निदेशालय की ओर से इन स्थानों पर गठित दुर्घटना रोकथाम दलों के प्रभारियों को नियमित रूप से मार्गदर्शन दिया जा रहा है। अधिकारियों को अपने क्षेत्र में दुर्घटनाओं के कारणों की पहचान करने और उनके अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। योजना के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए वैज्ञानिक विश्लेषण, लक्षित यातायात कार्रवाई, संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल, सड़क निर्माण से जुड़ी कमियों का समाधान और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

सुझावों को आगामी नीति में शामिल करने के निर्देश

कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले अधिकारियों ने सड़क सुरक्षा और दुर्घटना रोकथाम को लेकर अपने सुझाव भी दिए। पुलिस महानिदेशक ने इन सुझावों का संज्ञान लेते हुए अपर पुलिस महानिदेशक यातायात को निर्देश दिया कि सभी सुझावों का उचित परीक्षण किया जाए और आवश्यकतानुसार उन्हें यातायात से संबंधित आगामी नीति में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे सड़क दुर्घटनाओं की प्रभावी रोकथाम और सड़क सुरक्षा के प्रयासों को और मजबूत किया जा सकेगा।

बेहतर काम करने वाली तीन टीमों को सम्मान

कार्यशाला के दौरान शून्य मृत्यु जिला योजना के तहत बेहतर काम करने वाली तीन दुर्घटना रोकथाम टीमों को सम्मानित किया गया। डीजीपी राजीव कृष्ण ने कानपुर के विधनू थाने, बाराबंकी के कोतवाली नगर थाने और सुल्तानपुर के कोतवाली नगर थाने की टीमों के प्रभारी अधिकारियों एवं सदस्यों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। डीजीपी ने अधिकारियों से दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए पूरी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केवल पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय और निगरानी भी जरूरी है। कार्यक्रम में अपर परिवहन आयुक्त मयंक ज्योति, पुलिस महानिरीक्षक एवं पुलिस महानिदेशक के विशेष कार्याधिकारी के.एस. इमैन्युअल सहित यातायात निदेशालय और पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
अल्पसंख्यकों के हितों के लिए लगातार कार्य कर रही है सरकार : दानिश आजाद अंसारी
लखनऊ। इन्दिरा भवन-लखनऊ के सभागार कक्ष संख्या-511 में आज राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (एनसीएमईआई) भारत सरकार एवं अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में ‘‘अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की राष्ट्र निर्माण में भूमिका-विकसित भारत, 2047‘‘ के परिप्रेक्ष्य में बैठक आयोजित की गयी। बैठक में प्रो. (डा.) शाहिद अख्तर, कार्यकारी अध्यक्ष, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (एनसीएमईआई) भारत सरकार, दानिश आजाद अन्सारी, राज्यमंत्री, अल्पसंख्यक कल्याण, वक्फ एव हज विभाग, उप्र मुख्य अतिथि, शीलधर सिंह यादव निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण उप्र, विभिन्न शैक्षिक विभागों के अधिकारी तथा जनपद लखनऊ की विभिन्न अल्पसंख्यक संस्थाओं के प्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
बैठक को सम्बोधित करते हुए प्रो. शाहिद अख्तर कार्यकारी अध्यक्ष, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (एनसीएमईआई) द्वारा एनसीएमईआई के कार्यों पर प्रकाश डाला गया तथा बताया गया कि एनसीएमईआई अल्पसंख्यक संस्थाओं के हितों एवं अधिकारों के संरक्षण के लिए लगातार कार्य कर रही है। अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त करने हेतु सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारियों के साथ हुई बैठक में उनके द्वारा प्रक्रिया निर्धारित करने हेतु निर्देशित किया जा चुका है। कार्यकारी अध्यक्ष द्वारा संस्थाओं से यह भी अपेक्षा की गयी कि वह विकसित भारत 2027 विजन के सम्बन्ध में अपनी संस्था स्तर पर आयोजित विभिन्न प्रोग्रामों/सेमिनारों तथा भविष्य के प्रस्तावित कार्यक्रमों के सम्बन्ध में विस्तृत रिपोर्ट 15 दिन के भीतर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के माध्यम से राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग को प्रेषित करने की कार्यवाही की जाय। संस्था स्तर पर विकसित भारत 2047 की कार्ययोजना बनाकर विजन के कार्यान्वयन हेतु कार्य/दायित्व का निर्धारण सुनिश्चित किया जाय तथा आवश्यकतानुसार संस्थाओं द्वारा अनुभव की जाने वाली समस्याओं के बारे में सुझाव भी प्रस्तुत किये जांय। भविष्य में राज्य/जोन स्तर पर अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं के साथ मींटिग की जायेगी। सस्थाओं से समन्वय तथा सूचनाओं के आदान-प्रदान हेतु अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के द्वारा एक ई-मेल/डिजिटल प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जायेगा। दानिश आजाद अन्सारी, राज्यमंत्री, अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ, हज विभाग, उप्र द्वारा सम्बोधित करते हुए कहा गया कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग एवं उप्र सरकार अल्पसंख्यकों के हितों के लिए लगातार कार्य कर रही है। उनके रोजगार, शिक्षा एवं विकास हेतु कार्य करना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के सम्बन्ध में तत्परता से कार्य करने तथा इस सम्बन्ध में संस्थाओं द्वारा वर्कशाप एवं सेमिनारों के आयोजन के सम्बन्ध में आगामी 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अपेक्षा की गयी।
13वें इंडिया जीनियस अवॉर्ड समारोह में उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने प्रतिभाओं का किया उत्साहवर्धन
- अर्णव शर्मा और आद्या साहा बने ‘इंडिया जीनियस’, आद्या ने सबसे कम उम्र की जीनियस बनकर रचा इतिहास

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती अपर्णा यादव ने 13वें इंडिया जीनियस अवॉर्ड समारोह-2026 में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें उचित अवसर एवं सम्मान प्रदान करना उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ ही देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करता है।
लखनऊ स्थित होली पब्लिक स्कूल सभागार में आयोजित समारोह का शुभारंभ श्रीमती अपर्णा यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया। समारोह में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए 800 से अधिक विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया, जबकि शिक्षा जगत से जुड़े 100 से अधिक प्रधानाचार्यों, शिक्षकों एवं विशिष्ट व्यक्तित्वों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि  हरिश चंद्र श्रीवास्तव, लेफ्टिनेंट कर्नल विवेक गुप्ता एवं राहुल सेन सक्सेना ने भी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
समारोह में बीएलएस इंटरनेशनल स्कूल, हाथरस के अर्णव शर्मा तथा सुदिति ग्लोबल एकेडमी, मैनपुरी की आद्या साहा को ‘इंडिया जीनियस’ के सम्मान से नवाजा गया। कक्षा 3 की छात्रा आद्या साहा ने इंडिया जीनियस अवॉर्ड के 13 वर्षों के इतिहास में सबसे कम उम्र की ‘इंडिया जीनियस’ बनकर विशेष उपलब्धि हासिल की। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 25 विद्यार्थियों को साइकिल तथा 12 विद्यार्थियों को टैबलेट प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त विजेता विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक तथा प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, प्रबंधकों एवं समन्वयकों को भी राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर के विभिन्न सम्मान प्रदान किए गए। अवध कॉलेजिएट, लखनऊ की प्रबंध निदेशक श्रीमती जतिंदर वालिया को राष्ट्रीय उत्कृष्ट विद्यालय प्रशासन सम्मान-2026 से सम्मानित किया गया।
श्रीमती अपर्णा यादव ने लगातार 13 वर्षों से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मंच प्रदान करने के लिए इंडिया जीनियस अवॉर्ड की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों को अपनी क्षमता पहचानने और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं। इंडिया जीनियस अवॉर्ड ओलंपियाड-2026 के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित श्रीवास्तव ने कहा कि संस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानना, उनका आत्मविश्वास बढ़ाना तथा उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि 13 वर्षों की यात्रा में हजारों विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने एवं सम्मान प्राप्त करने का अवसर मिला है। समारोह में विद्यार्थियों, अभिभावकों, विद्यालय प्रतिनिधियों एवं शिक्षा जगत से जुड़े लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही।
यूपी के विधायकों को विधायक निधि की दूसरी किस्त जारी

-  उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि के लिए 12अरब 40 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृति  की लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में विधान मंडल क्षेत्र विकास निधि की दूसरी किस्त जारी करने की मंजूरी दे दी है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रदेश के 496 विधान सभा और विधान परिषद सदस्यों के लिए कुल 1,240 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। इसमें विधान सभा के 397 सदस्यों और विधान परिषद के 99 सदस्यों को प्रति सदस्य 2.50 करोड़ रुपये (जीएसटी सहित) दिए जाएंगे। इस संबंध में ग्राम्य विकास विभाग की ओर से शासनादेश भी जारी कर दिया गया है।
- 496 सदस्यों को मिलेगा 2.50-2.50 करोड़
प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में वर्तमान में छह स्थान रिक्त हैं। ऐसे में 397 विधायकों के लिए कुल 992.50 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं, 100 सदस्यीय विधान परिषद में एक सीट रिक्त होने के कारण 99 सदस्यों के लिए 247.50 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। दोनों सदनों के कुल 503 सदस्यों में से 496 सदस्यों के लिए यह राशि स्वीकृत हुई है।
- विकास कार्यों में खर्च होगी निधि
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विधायक निधि की राशि का इस्तेमाल केवल विधान मंडल क्षेत्र विकास निधि के मार्गदर्शी सिद्धांतों और शासन की ओर से समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ही किया जाए। जारी आदेश के मुताबिक धनराशि संबंधित डीआरडीए के डिपॉजिट खाते में स्थानांतरित की जाएगी। इसके बाद निर्धारित नियमों के अनुसार विकास कार्यों पर इसका खर्च किया जाएगा। सरकारी धन के इस्तेमाल में वित्त विभाग के मितव्ययिता संबंधी निर्देशों और यूपी बजट मैनुअल के प्रावधानों का पालन भी अनिवार्य होगा।
- काम की गुणवत्ता की जिम्मेदारी सीडीओ की
विधायक निधि से कराए जाने वाले विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की होगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कार्यों के लिए वास्तविक रूप से देय जीएसटी के बराबर ही धनराशि का आहरण और व्यय किया जाए।संबंधित जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों को स्वीकृत धनराशि की जानकारी और शासनादेश की प्रति अपने जिले के विधानसभा एवं विधान परिषद सदस्यों को एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
- पहली किस्त में भी 1,247.50 करोड़ रुपये हुए थे जारी
इससे पहले वित्तीय वर्ष 2026-27 में दोनों सदनों के सदस्यों के लिए पहली किस्त के रूप में 1,247.50 करोड़ रुपये (जीएसटी सहित) जारी किए गए थे। अब दूसरी किस्त के रूप में 1,240 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
प्रदेश में तोरिया के निःशुल्क मिनीकिट व रबी फसलों के बीजों की बुकिंग जारी, कृषक पोर्टल पर करें बुकिंग

- फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि बढ़कर हुई 10 सितंबर, कृषि मंत्री ने केसीसी धारकों को संतृप्त करने के दिए निर्देश
- अतिवृष्टि व बाढ़ से फसल नुकसान के पात्र आवेदनों का त्वरित सर्वेक्षण कर नियमानुसार क्षतिपूर्ति देने के आदेश


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। प्रदेश सरकार ने खरीफ 2026 में फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 अगस्त से बढ़ाकर 10 सितंबर 2026 कर दी है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों से अपील की है कि जिन किसानों ने अभी तक फसल का बीमा नहीं कराया है, वे निर्धारित अंतिम तिथि से पहले बीमा जरूर करा लें।
वहीं, प्रदेश में तोरिया के 30 हजार निःशुल्क मिनीकिट किसानों को उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। 7 सितंबर तक करीब 15 हजार मिनीकिट की बुकिंग किसान करा चुके हैं। किसान कृषि विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन बुकिंग कर योजना का लाभ ले सकते हैं।
गेहूं समेत रबी फसलों के बीजों की भी बुकिंग
तोरिया के अलावा रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न फसलों के बीजों की बुकिंग भी जारी है। विभाग के मुताबिक गेहूं के 10.45 लाख कुंतल, चना के 69.96 हजार कुंतल, मटर के 17.89 हजार कुंतल, मसूर के 41.76 हजार कुंतल और राई-सरसों के 15.94 हजार कुंतल की बुकिंग प्रक्रियाधीन है।
कृषि मंत्री ने किसानों से अधिक से अधिक संख्या में बीजों की बुकिंग कराने की अपील की है।
- 27.10 लाख केसीसी खातों को संतृप्त करने के निर्देश
कृषि भवन में सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड योजना की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को प्रदेश के 27.10 लाख असंतृप्त केसीसी खातों के पात्र किसानों को बैंकों के माध्यम से शत-प्रतिशत संतृप्त कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि किसानों को फसल बीमा का लाभ दिलाने के लिए बैंक और संबंधित विभाग पूरी सक्रियता से काम करें।
- 9 साल में 69.28 लाख किसानों को मिला फसल मुआवजा
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक 69.28 लाख किसानों को कुल 6,124.79 करोड़ रुपये की फसल क्षतिपूर्ति दी जा चुकी है।
- बाढ़ और अतिवृष्टि से फसल नुकसान का जल्द होगा सर्वे
खरीफ 2026 में अतिवृष्टि और बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान की भी समीक्षा की गई। कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि बचे हुए पात्र आवेदनों का जिला प्रशासन और कृषि विभाग की संयुक्त जांच समितियां किसानों की मौजूदगी में जल्द सर्वेक्षण पूरा करें, ताकि पात्र किसानों को समयबद्ध तरीके से क्षतिपूर्ति मिल सके।
उन्होंने फसल नुकसान की सूचना दर्ज कराने के लिए किसानों के बीच टोल-फ्री नंबर 14447, किसान कॉल सेंटर 0522-2317003, व्हाट्सऐप चैटबॉट, क्रॉप इंश्योरेंस ऐप और संबंधित बैंक शाखाओं की जानकारी व्यापक रूप से पहुंचाने के निर्देश दिए।
बैठक में कृषि विभाग के प्रमुख सचिव रवीन्द्र, कृषि निदेशक टीएम त्रिपाठी समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।