सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम को लेकर कार्यशाला आयोजित
59 जिलों के अधिकारियों ने लिया प्रशिक्षण
दुर्घटना वाले स्थानों पर अधिक कार्रवाई के सिद्धांत पर जोर
जनवरी से अगस्त तक हादसों में 6.97 प्रतिशत की कमी
लखनऊ। सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में चलाए जा रहे शून्य मृत्यु जिला कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए सोमवार को एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। पुलिस मुख्यालय, उत्तर प्रदेश, लखनऊ स्थित अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यशाला में प्रदेश के 59 जिलों के दुर्घटना बाहुल्य स्थानों पर गठित 228 दलों के प्रभारी अधिकारियों और संबंधित नोडल अधिकारियों ने हिस्सा लिया। यह कार्यशाला मुख्यमंत्री के सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली जनहानि को कम करने के निर्देशों के क्रम में तथा डीजीपी राजीव कृष्ण के मार्गदर्शन में यातायात निदेशालय की ओर से आयोजित की गई। कार्यक्रम में तीसरे और चौथे चरण के अंतर्गत प्रदेश के 59 जिलों के 213 सबसे अधिक दुर्घटना वाले स्थानों पर गठित 228 दलों के अधिकारियों को दुर्घटनाओं की रोकथाम, जांच और प्रभावी कार्रवाई के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को केवल अचानक होने वाली घटना मानकर नहीं चलना चाहिए। प्रत्येक दुर्घटना के पीछे कोई न कोई कारण होता है। ऐसे कारणों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान कर उन्हें दूर करना आवश्यक है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपने-अपने क्षेत्र में दुर्घटना संभावित स्थानों और वहां दुर्घटनाओं के कारणों की पहचान की जाए। इसके बाद संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर उन कमियों को दूर कराने की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि किसी सड़क पर यदि बार-बार दुर्घटनाएं हो रही हैं तो वहां की सड़क व्यवस्था, यातायात संचालन, संकेतक, प्रकाश व्यवस्था, वाहनों की गति और अन्य संभावित कारणों की समीक्षा की जानी चाहिए। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि संबंधित विभागों से कराए जाने वाले सुधार कार्यों का लगातार अनुसरण किया जाए। जरूरत पड़ने पर उच्च अधिकारियों के स्तर पर मामला उठाकर सुधार कार्य पूरा कराया जाए।
दुर्घटना के बाद जांच के साथ रोकथाम भी जिम्मेदारी
उन्होंने कहा कि दुर्घटना वाले स्थानों पर गठित दलों की जिम्मेदारी केवल हादसा होने के बाद मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि दुर्घटनाओं को रोकना भी उनकी प्रमुख जिम्मेदारी है। प्रत्येक हादसे के बाद उसकी समीक्षा कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि दुर्घटना किस कारण हुई और भविष्य में उसी तरह की दुर्घटना को रोकने के लिए क्या सुधार किए जा सकते हैं। उन्होंने दुर्घटना रोकथाम और दुर्घटना की जांच में विशेषज्ञता विकसित करने पर जोर दिया। अधिकारियों को तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी हासिल करने, आवश्यक प्रशिक्षण लेने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए। डीजीपी ने कहा कि सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों में प्रक्रिया का सही और लगातार पालन सबसे महत्वपूर्ण है। दुर्घटना वाले स्थानों की समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों के साथ लगातार संपर्क और निगरानी रखी जानी चाहिए।
सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण
कार्यशाला के दौरान अधिकारियों को सड़क सुरक्षा, दुर्घटना रोकथाम, प्रभावी यातायात कार्रवाई, दुर्घटना विश्लेषण, दुर्घटना की जांच, दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान, प्राथमिक उपचार और आपात स्थिति में जीवन बचाने के उपायों की जानकारी दी गई। अपर पुलिस महानिदेशक यातायात एवं सड़क सुरक्षा ए. सतीश गणेश ने कार्यक्रम के प्रथम सत्र में शून्य मृत्यु जिला कार्यक्रम और सड़क दुर्घटनाओं तथा जनहानि को कम करने के लिए यातायात निगरानी उपकरणों के उचित और प्रभावी उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बरेली के अधिकारी रमेश चंद्र प्रजापति ने यातायात कार्रवाई में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के बारे में बताया। मेदांता अस्पताल के चिकित्सक डॉ. लोकेन्द्र गुप्ता ने प्राथमिक उपचार और हृदय गति रुकने जैसी आपात स्थिति में जीवन बचाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया।
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के शिजान ने दुर्घटनाओं से संबंधित ऑनलाइन व्यवस्था, पीड़ितों को मिलने वाली सहायता और पीड़ित या मरीज की पहचान से संबंधित जानकारी दी। यातायात निदेशालय के पुलिस उपमहानिरीक्षक ने दुर्घटना की जांच, दुर्घटना संभावित स्थानों और विभिन्न मामलों के अध्ययन के माध्यम से अधिकारियों का मार्गदर्शन किया।
योजना से दुर्घटनाओं में आई कमी
अधिकारियों के अनुसार शून्य मृत्यु जिला योजना प्रदेश के सभी पुलिस आयुक्तालयों और जिलों के सबसे अधिक दुर्घटना वाले 700 स्थानों पर लागू है। योजना के तहत वैज्ञानिक तरीके से दुर्घटना वाले स्थानों की पहचान, लक्षित यातायात कार्रवाई, उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, सड़क निर्माण से जुड़ी कमियों को दूर कराने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। योजना के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। जनवरी से अगस्त 2026 तक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में योजना के अंतर्गत आने वाले स्थानों पर सड़क दुर्घटनाओं में 6.97 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसी अवधि में दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में 8.03 प्रतिशत और घायलों की संख्या में 6.11 प्रतिशत की कमी आई। आंकड़ों के अनुसार जनवरी से अगस्त 2026 के दौरान पिछले वर्ष की तुलना में 1,255 सड़क दुर्घटनाएं कम हुईं। इसका मतलब प्रतिदिन औसतन करीब सात दुर्घटनाएं कम हुईं। इसी अवधि में 1,107 लोगों की जान बचाने में सफलता मिली, यानी प्रतिदिन औसतन करीब पांच लोगों का जीवन बचाया गया।
जहां दुर्घटनाएं अधिक, वहां कार्रवाई अधिक
शून्य मृत्यु जिला योजना का मुख्य आधार यह है कि जहां दुर्घटनाएं अधिक हों, वहां कार्रवाई भी अधिक की जाए। इसके तहत ऐसे स्थानों को लगातार चिन्हित किया जा रहा है, जहां सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए अतिरिक्त और लक्षित कार्रवाई की जरूरत है। यातायात निदेशालय की ओर से इन स्थानों पर गठित दुर्घटना रोकथाम दलों के प्रभारियों को नियमित रूप से मार्गदर्शन दिया जा रहा है। अधिकारियों को अपने क्षेत्र में दुर्घटनाओं के कारणों की पहचान करने और उनके अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। योजना के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए वैज्ञानिक विश्लेषण, लक्षित यातायात कार्रवाई, संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल, सड़क निर्माण से जुड़ी कमियों का समाधान और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
सुझावों को आगामी नीति में शामिल करने के निर्देश
कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले अधिकारियों ने सड़क सुरक्षा और दुर्घटना रोकथाम को लेकर अपने सुझाव भी दिए। पुलिस महानिदेशक ने इन सुझावों का संज्ञान लेते हुए अपर पुलिस महानिदेशक यातायात को निर्देश दिया कि सभी सुझावों का उचित परीक्षण किया जाए और आवश्यकतानुसार उन्हें यातायात से संबंधित आगामी नीति में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे सड़क दुर्घटनाओं की प्रभावी रोकथाम और सड़क सुरक्षा के प्रयासों को और मजबूत किया जा सकेगा।
बेहतर काम करने वाली तीन टीमों को सम्मान
कार्यशाला के दौरान शून्य मृत्यु जिला योजना के तहत बेहतर काम करने वाली तीन दुर्घटना रोकथाम टीमों को सम्मानित किया गया। डीजीपी राजीव कृष्ण ने कानपुर के विधनू थाने, बाराबंकी के कोतवाली नगर थाने और सुल्तानपुर के कोतवाली नगर थाने की टीमों के प्रभारी अधिकारियों एवं सदस्यों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। डीजीपी ने अधिकारियों से दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए पूरी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केवल पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय और निगरानी भी जरूरी है। कार्यक्रम में अपर परिवहन आयुक्त मयंक ज्योति, पुलिस महानिरीक्षक एवं पुलिस महानिदेशक के विशेष कार्याधिकारी के.एस. इमैन्युअल सहित यातायात निदेशालय और पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
Sep 07 2026, 19:31
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