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यूपी के विधायकों को विधायक निधि की दूसरी किस्त जारी

-  उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि के लिए 12अरब 40 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृति  की लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में विधान मंडल क्षेत्र विकास निधि की दूसरी किस्त जारी करने की मंजूरी दे दी है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रदेश के 496 विधान सभा और विधान परिषद सदस्यों के लिए कुल 1,240 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। इसमें विधान सभा के 397 सदस्यों और विधान परिषद के 99 सदस्यों को प्रति सदस्य 2.50 करोड़ रुपये (जीएसटी सहित) दिए जाएंगे। इस संबंध में ग्राम्य विकास विभाग की ओर से शासनादेश भी जारी कर दिया गया है।
- 496 सदस्यों को मिलेगा 2.50-2.50 करोड़
प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में वर्तमान में छह स्थान रिक्त हैं। ऐसे में 397 विधायकों के लिए कुल 992.50 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं, 100 सदस्यीय विधान परिषद में एक सीट रिक्त होने के कारण 99 सदस्यों के लिए 247.50 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। दोनों सदनों के कुल 503 सदस्यों में से 496 सदस्यों के लिए यह राशि स्वीकृत हुई है।
- विकास कार्यों में खर्च होगी निधि
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विधायक निधि की राशि का इस्तेमाल केवल विधान मंडल क्षेत्र विकास निधि के मार्गदर्शी सिद्धांतों और शासन की ओर से समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ही किया जाए। जारी आदेश के मुताबिक धनराशि संबंधित डीआरडीए के डिपॉजिट खाते में स्थानांतरित की जाएगी। इसके बाद निर्धारित नियमों के अनुसार विकास कार्यों पर इसका खर्च किया जाएगा। सरकारी धन के इस्तेमाल में वित्त विभाग के मितव्ययिता संबंधी निर्देशों और यूपी बजट मैनुअल के प्रावधानों का पालन भी अनिवार्य होगा।
- काम की गुणवत्ता की जिम्मेदारी सीडीओ की
विधायक निधि से कराए जाने वाले विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की होगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कार्यों के लिए वास्तविक रूप से देय जीएसटी के बराबर ही धनराशि का आहरण और व्यय किया जाए।संबंधित जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों को स्वीकृत धनराशि की जानकारी और शासनादेश की प्रति अपने जिले के विधानसभा एवं विधान परिषद सदस्यों को एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
- पहली किस्त में भी 1,247.50 करोड़ रुपये हुए थे जारी
इससे पहले वित्तीय वर्ष 2026-27 में दोनों सदनों के सदस्यों के लिए पहली किस्त के रूप में 1,247.50 करोड़ रुपये (जीएसटी सहित) जारी किए गए थे। अब दूसरी किस्त के रूप में 1,240 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
प्रदेश में तोरिया के निःशुल्क मिनीकिट व रबी फसलों के बीजों की बुकिंग जारी, कृषक पोर्टल पर करें बुकिंग

- फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि बढ़कर हुई 10 सितंबर, कृषि मंत्री ने केसीसी धारकों को संतृप्त करने के दिए निर्देश
- अतिवृष्टि व बाढ़ से फसल नुकसान के पात्र आवेदनों का त्वरित सर्वेक्षण कर नियमानुसार क्षतिपूर्ति देने के आदेश


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। प्रदेश सरकार ने खरीफ 2026 में फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 अगस्त से बढ़ाकर 10 सितंबर 2026 कर दी है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों से अपील की है कि जिन किसानों ने अभी तक फसल का बीमा नहीं कराया है, वे निर्धारित अंतिम तिथि से पहले बीमा जरूर करा लें।
वहीं, प्रदेश में तोरिया के 30 हजार निःशुल्क मिनीकिट किसानों को उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। 7 सितंबर तक करीब 15 हजार मिनीकिट की बुकिंग किसान करा चुके हैं। किसान कृषि विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन बुकिंग कर योजना का लाभ ले सकते हैं।
गेहूं समेत रबी फसलों के बीजों की भी बुकिंग
तोरिया के अलावा रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न फसलों के बीजों की बुकिंग भी जारी है। विभाग के मुताबिक गेहूं के 10.45 लाख कुंतल, चना के 69.96 हजार कुंतल, मटर के 17.89 हजार कुंतल, मसूर के 41.76 हजार कुंतल और राई-सरसों के 15.94 हजार कुंतल की बुकिंग प्रक्रियाधीन है।
कृषि मंत्री ने किसानों से अधिक से अधिक संख्या में बीजों की बुकिंग कराने की अपील की है।
- 27.10 लाख केसीसी खातों को संतृप्त करने के निर्देश
कृषि भवन में सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड योजना की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को प्रदेश के 27.10 लाख असंतृप्त केसीसी खातों के पात्र किसानों को बैंकों के माध्यम से शत-प्रतिशत संतृप्त कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि किसानों को फसल बीमा का लाभ दिलाने के लिए बैंक और संबंधित विभाग पूरी सक्रियता से काम करें।
- 9 साल में 69.28 लाख किसानों को मिला फसल मुआवजा
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक 69.28 लाख किसानों को कुल 6,124.79 करोड़ रुपये की फसल क्षतिपूर्ति दी जा चुकी है।
- बाढ़ और अतिवृष्टि से फसल नुकसान का जल्द होगा सर्वे
खरीफ 2026 में अतिवृष्टि और बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान की भी समीक्षा की गई। कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि बचे हुए पात्र आवेदनों का जिला प्रशासन और कृषि विभाग की संयुक्त जांच समितियां किसानों की मौजूदगी में जल्द सर्वेक्षण पूरा करें, ताकि पात्र किसानों को समयबद्ध तरीके से क्षतिपूर्ति मिल सके।
उन्होंने फसल नुकसान की सूचना दर्ज कराने के लिए किसानों के बीच टोल-फ्री नंबर 14447, किसान कॉल सेंटर 0522-2317003, व्हाट्सऐप चैटबॉट, क्रॉप इंश्योरेंस ऐप और संबंधित बैंक शाखाओं की जानकारी व्यापक रूप से पहुंचाने के निर्देश दिए।
बैठक में कृषि विभाग के प्रमुख सचिव रवीन्द्र, कृषि निदेशक टीएम त्रिपाठी समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
जनता दर्शन में डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने सुनीं सैकड़ों फरियादें
- बोले- जनसमस्याओं का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार को 7-कालिदास मार्ग स्थित अपने कैम्प कार्यालय में जनता दर्शन आयोजित कर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे लोगों की समस्याएं सुनीं। सैकड़ों फरियादियों ने भूमि विवाद, अवैध कब्जे, आवास, पेंशन, चिकित्सा, बिजली, सड़क, पेयजल, पुलिस, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी शिकायतें उनके सामने रखीं।
डिप्टी सीएम ने प्रत्येक मामले को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को मौके पर जांच कर समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शिकायतों का निस्तारण महज कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि फरियादी को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए।
- अधिकारियों को दो टूक- फरियादी को न लगवाएं चक्कर
केशव मौर्य ने कहा कि जनसमस्याओं का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रत्येक प्रकरण की वास्तविक स्थिति की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि शिकायतकर्ता को अपनी समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि जनता दर्शन केवल शिकायतें सुनने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही और जनता के बीच सीधे संवाद का माध्यम है। सुशासन का मतलब तभी है, जब शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे और जरूरतमंद को समय पर उसका अधिकार मिले।
- जमीन पर कब्जे की शिकायतों पर सख्ती
भूमि विवाद और सरकारी अथवा निजी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायतों पर उप मुख्यमंत्री ने विशेष गंभीरता दिखाई। उन्होंने जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को राजस्व व पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर जरूरत के मुताबिक मौके पर जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गरीब और कमजोर लोगों की जमीन पर कब्जा करने या उन्हें डराने-धमकाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
- महिलाओं और दिव्यांगों की शिकायतों को प्राथमिकता
जनता दर्शन में महिलाओं, दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों तथा आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुना गया। डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को ऐसे मामलों में मानवीय संवेदना के साथ त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। केशव मौर्य ने कहा कि जनता का विश्वास सरकार की सबसे बड़ी ताकत है। हर फरियादी की बात सुनना, पात्र व्यक्ति को उसका अधिकार दिलाना और पीड़ित को न्याय उपलब्ध कराना सरकार का दायित्व है।उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि जनसमस्याओं के निस्तारण में ढिलाई, संवेदनहीनता या अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में यूपी का परचम, लखनऊ ने इंदौर को पीछे छोड़ रचा इतिहास
-  नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री के नेतृत्व में स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ शहरों की दिशा में उत्तर प्रदेश की बड़ी छलांग
- वार्ड लेवल पर लखनऊ के वार्ड-70 ने भी देशभर में हासिल किया प्रथम स्थान
- यह उपलब्धि प्रधानमंत्री के स्वच्छता संकल्प और मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन से संभव: एके शर्मा

लखनऊ। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में उत्तर प्रदेश ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने स्वच्छ वायु संरक्षण के क्षेत्र में देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए पहली बार इंदौर को पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, वायु गुणवत्ता सुधार और नगरीय व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, हरित क्षेत्र के विस्तार, सड़क एवं सार्वजनिक स्थलों की सफाई तथा वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में उत्तर प्रदेश के विभिन्न श्रेणियों के कुल 16 शहरों का स्थान बनाना प्रदेश के लिए गौरव की बात है।
- इंदौर से आगे निकला लखनऊ
दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की कैटेगरी-1 में उत्तर प्रदेश के छह शहरों ने स्थान बनाया। इनमें लखनऊ ने देश में पहला, आगरा ने चौथा, गाजियाबाद ने नौवां, कानपुर ने ग्यारहवां, प्रयागराज ने तेरहवां और मेरठ ने बाइसवां स्थान प्राप्त किया।
वहीं 3 लाख से 10 लाख तक की आबादी वाले शहरों की कैटेगरी-2 में भी उत्तर प्रदेश के छह शहरों ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इसमें फिरोजाबाद ने दूसरा, झांसी ने पांचवां, मुरादाबाद और नोएडा ने आठवां, गोरखपुर ने बाइसवां और बरेली ने छब्बीसवां स्थान प्राप्त किया। तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों की कैटेगरी-3 में भी उत्तर प्रदेश के चार शहरों ने सफलता हासिल की। रायबरेली ने 17वां, अनपरा ने 29वां, खुर्जा ने 30वां और गजरौला ने 31वां स्थान प्राप्त किया।
- वार्ड स्तर पर भी यूपी का शानदार प्रदर्शन
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की वार्ड लेवल रैंकिंग में भी उत्तर प्रदेश ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। कैटेगरी-1 में राजधानी लखनऊ के वार्ड-70 ने पूरे देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। वहीं कैटेगरी-2 में प्रयागराज के वार्ड-31 ने देश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश में नगरीय व्यवस्थाओं को केवल शहर स्तर पर ही नहीं, बल्कि वार्ड स्तर तक बेहतर बनाने के लिए भी गंभीरता से काम किया जा रहा है।
- मंत्री ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री का जताया आभार
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वच्छता का संदेश दिया था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वच्छता को जनअभियान बनाकर देश के प्रत्येक नागरिक से जोड़ने का कार्य किया है। आज स्वच्छता और स्वच्छ वायु के क्षेत्र में मिल रही उपलब्धियां उसी व्यापक जनभागीदारी का परिणाम हैं। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में लखनऊ का देश में प्रथम स्थान प्राप्त करना पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने इस उपलब्धि के लिए प्रदेश के सभी नगरीय निकायों के अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और विशेष रूप से प्रदेश के नागरिकों का आभार व्यक्त किया।
श्री शर्मा ने कहा कि लखनऊ ने स्वच्छ वायु संरक्षण के क्षेत्र में पहली बार इंदौर को पीछे छोड़कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के लिए एक नई प्रेरणा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिस प्रकार स्वच्छ वायु के क्षेत्र में लखनऊ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है, उसी प्रकार स्वच्छता सर्वेक्षण में भी लखनऊ को देश का नंबर-वन शहर बनाने के लिए सरकार, नगर निगम और नागरिक मिलकर पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करेंगे।
राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रचार-प्रसार के लिए पीआरवी वाहन रवाना

- जनपद न्यायाधीश ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना, 12 सितंबर को आयोजित होगी राष्ट्रीय लोक अदालत

लखनऊ। राष्ट्रीय लोक अदालत एवं राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 3.0 के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सोमवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ की ओर से पीआरवी वाहन रवाना किया गया। जनपद न्यायालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ मलखान सिंह ने पीआरवी वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली, मीडियेशन एवं कंसीलियेशन प्रोजेक्ट कमेटी, सर्वोच्च न्यायालय तथा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार 12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रीय लोक अदालत जनपद न्यायालय लखनऊ के साथ-साथ पारिवारिक न्यायालय, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, भूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण, उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, स्थायी लोक अदालत, श्रम न्यायालय, वाणिज्यिक न्यायालय, कलेक्ट्रेट एवं जनपद की सभी तहसीलों में आयोजित होगी।

इसके साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के तत्वावधान में राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 3.0 का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। यह अभियान 1 अगस्त से 30 दिसंबर 2026 तक चलेगा। अभियान का उद्देश्य पक्षकारों के बीच आपसी संवाद, सुलह और समझौते के माध्यम से विवादों का शीघ्र एवं स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कुँवर मित्रेश सिंह कुशवाहा ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत और मध्यस्थता अभियान 3.0 के प्रति आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से पीआरवी वाहन को रवाना किया गया है। यह वाहन लखनऊ की विभिन्न तहसीलों, ब्लॉकों तथा दूर-दराज के क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को राष्ट्रीय लोक अदालत और मध्यस्थता के माध्यम से विवादों के समाधान के संबंध में जानकारी देगा।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से लंबित मामलों का आपसी सहमति एवं सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण किया जा सकता है। वहीं मध्यस्थता अभियान 3.0 के जरिए पक्षकार आपसी संवाद के माध्यम से विवादों का समाधान प्राप्त कर सकते हैं, जिससे समय और धन दोनों की बचत होती है।

कार्यक्रम में अपर जिला जज एवं नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 3.0 अभिनय कुमार मिश्रा, सिविल जज (सी0डि0)/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कुँवर मित्रेश सिंह कुशवाहा, पुलिस उपायुक्त एवं नोडल अधिकारी किरन यादव सहित न्यायिक अधिकारीगण, कर्मचारीगण, पराविधिक स्वयंसेवक, पैनल अधिवक्ता तथा डिफेन्स काउन्सिल के अधिवक्ता उपस्थित रहे।

जनपद न्यायाधीश मलखान सिंह ने लखनऊ के सभी नागरिकों, अधिवक्ताओं एवं समाजसेवियों से अपील की कि वे 12 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत एवं राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 3.0 का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि पुराने मुकदमों और लंबे समय से चल रहे अदालती विवादों को आपसी सुलह एवं समझौते के माध्यम से समाप्त करने का यह महत्वपूर्ण अवसर है।

शिक्षक ज्ञान के दीप, शिक्षा का उद्देश्य जीवन को सही दिशा देना : सीएम योगी

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को लिखी पाती :-

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से किया आह्वान—हर बच्चे को स्कूल, हर युवा को कौशल और हर नागरिक को डिजिटल व एआई साक्षर बनाने का लें संकल्प

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस और आगामी अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम पाती लिखकर शिक्षा, साक्षरता और तकनीकी ज्ञान के महत्व को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक वह दीप हैं, जो ज्ञान का प्रकाश फैलाकर आने वाली पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं, बल्कि बच्चों को संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और जीवन को सही दिशा देने वाली समझ प्रदान करना भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर उन्हें राष्ट्र निर्माण की नींव मजबूत करने वाले 81 गुरुजनों को सम्मानित करने का सौभाग्य मिला। इसी ज्ञान के विस्तार और प्रत्येक व्यक्ति को सशक्त बनाने के संकल्प के साथ आठ सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाएगा।

- ज्ञान के साथ संस्कार और दायित्वबोध जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरुकुल समग्र शिक्षा के केंद्र रहे हैं। वहां ज्ञान के साथ जीवन मूल्यों, अनुशासन और दायित्वबोध की शिक्षा दी जाती थी। आज की शिक्षा व्यवस्था में भी इसी भावना को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह व्यक्ति के जीवन को सरल बनाने के साथ समाज के लिए भी उपयोगी साबित हो।

- डिजिटल साक्षरता के साथ एआई का ज्ञान भी जरूरी

योगी ने कहा कि तकनीक तेजी से जीवन को बदल रही है। ऐसे में डिजिटल साक्षरता के साथ एआई साक्षरता भी समय की आवश्यकता बन गई है। एआई, डीप-टेक और उभरती प्रौद्योगिकियां शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार परंपरागत ज्ञान को आधुनिक विज्ञान, तकनीक, नवाचार और कौशल से जोड़ने का प्रयास कर रही है। लखनऊ में विकसित हो रही एआई सिटी और कानपुर में ड्रोन एवं यूएवी तकनीक का बढ़ता पारिस्थितिकी तंत्र प्रदेश के तकनीकी भविष्य की नई संभावनाओं का आधार बन रहा है।

- ऑपरेशन कायाकल्प और मिशन प्रेरणा से शिक्षा व्यवस्था में बदलाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने ऑपरेशन कायाकल्प, मिशन प्रेरणा, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, विद्यालयों में सुविधाएं बढ़ाने, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया है। इन प्रयासों से प्रदेश के विद्यालयों में ड्रॉपआउट दर को न्यूनतम करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है और अधिक से अधिक बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

- शिक्षा की पूरी यात्रा में शिक्षक सबसे अहम कड़ी

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। शिक्षक विद्यार्थियों में संस्कार, जिज्ञासा, अनुशासन, आत्मविश्वास और दायित्वबोध विकसित करने के साथ ही देश की गौरवशाली ज्ञान परंपरा को आधुनिक ज्ञान और नवाचार से जोड़ने का कार्य करते हैं।

- साक्षरता के लिए समाज की भागीदारी जरूरी

योगी ने कहा कि साक्षरता का संकल्प समाज के सहयोग के बिना पूरा नहीं हो सकता। यदि आसपास कोई व्यक्ति अक्षर ज्ञान से वंचित है तो उसे साक्षर बनाना समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। किसी को पढ़ना-लिखना सिखाने का छोटा-सा प्रयास उसके जीवन में ज्ञान, आत्मविश्वास और अवसरों के नए द्वार खोल सकता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर संकल्प लें कि हर बच्चा विद्यालय पहुंचे, हर विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, हर युवा कौशल और नवाचार से जुड़े तथा हर नागरिक साक्षर होने के साथ डिजिटल ज्ञान और एआई के प्रति भी जागरूक बने।

बसपा में फिर बड़ा बदलाव, आकाश आनंद किनारे तो ईशान को मिली अहम जिम्मेदारी

- मायावती ने छोटे भतीजे को बनाया मुख्य सेक्टर प्रभारी, आकाश ने X पर बदला बायो; संगठन में बदलाव से बढ़ी सियासी हलचल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में एक बार फिर बड़ा संगठनात्मक बदलाव चर्चा में है। पार्टी प्रमुख मायावती ने अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हुए उन्हें मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाया है। वहीं, आकाश आनंद को पार्टी की प्रमुख संगठनात्मक जिम्मेदारियों से दूर किए जाने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। ईशान आनंद को करीब 15 राज्यों में पार्टी के कामकाज की समीक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। वह बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अपने पिता आनंद कुमार को रिपोर्ट करेंगे। पार्टी की हालिया बैठक में मायावती ने ईशान का पार्टी नेताओं से परिचय भी कराया था।
- आकाश ने बदला सोशल मीडिया बायो
इस बीच आकाश आनंद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना बायो बदलकर खुद को ‘BSP समर्थक’ बताया है। इससे पहले उन्होंने अपने बायो में खुद को ‘BSP कार्यकर्ता’ बताया था। उनका नाम पार्टी की नई संगठनात्मक सूची में भी नहीं है। हालांकि, आकाश आनंद ने पार्टी से इस्तीफा देने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।मायावती ने हाल ही में आकाश आनंद को बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी से हटाते हुए कहा था कि उन्हें अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत है। यह आकाश को महत्वपूर्ण पद से हटाए जाने का तीसरा बड़ा घटनाक्रम बताया जा रहा है।
- क्या ईशान बनेंगे नया चेहरा?
ईशान आनंद को अहम जिम्मेदारी मिलने और आकाश के संगठन से दूर होने के बाद बसपा के भीतर नेतृत्व और उत्तराधिकार को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, ईशान को मायावती का नया उत्तराधिकारी बनाए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में फिलहाल इसे बसपा के संगठनात्मक पुनर्संयोजन के तौर पर ही देखा जा रहा है। आकाश आनंद के जल्द पार्टी से बाहर किए जाने और बसपा पदाधिकारियों को उन्हें तथा उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को सोशल मीडिया पर अनफॉलो करने के निर्देश दिए जाने की चर्चाएं भी हैं, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। इसलिए इन दावों को तथ्य के रूप में पेश करने से बचना उचित होगा।
सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्रों का प्रदर्शन, MCD पर गंभीर सवाल
-  ABVP कार्यकर्ता ने जिम्मेदार अधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग की, कमिश्नर के इस्तीफे की उठाई मांग

नई दिल्ली। सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने के हादसे के बाद छात्रों और एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर दिल्ली नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इमारत में कथित अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं की गई।
प्रदर्शन में शामिल एबीवीपी की एक सदस्य ने पुलिस और प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जब लोग और छात्र मलबे में दबे हैं और कई लोगों की जान जा चुकी है, ऐसे समय में जिम्मेदार एमसीडी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारियों को गिरफ्तार करने के बजाय प्रदर्शन कर रहे छात्रों को परेशान किया जा रहा है।
एबीवीपी सदस्य ने एमसीडी कमिश्नर की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें घटनास्थल पर मौजूद रहना चाहिए था। उन्होंने कमिश्नर के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि हादसे के लिए जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस बीच प्रशासन की ओर से हादसे की जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच में इमारत की स्थिति, निर्माण संबंधी नियमों के पालन और संबंधित विभागों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
- हादसे में अब तक छह की मौत
राजधानी दिल्ली में पिछले तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश के बीच रविवार को सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे में अब तक छह लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। मलबे में कुछ और लोगों के दबे होने की आशंका के चलते राहत और बचाव अभियान जारी है।
- अवैध निर्माण पर उठे सवाल
हादसे के बाद नगर निगम और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि इमारत में नियमों को दरकिनार कर निर्माण कराया गया था और यहां पीजी का संचालन भी किया जा रहा था। स्थानीय लोगों का दावा है कि हादसे के समय इमारत में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। हालांकि, मलबे में फंसे लोगों की वास्तविक संख्या को लेकर प्रशासन की ओर से अभी कोई स्पष्ट आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।मलबे से निकाले गए घायलों को एम्स ट्रॉमा सेंटर, सफदरजंग अस्पताल और आरआर अस्पताल समेत विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मृतकों में दो छात्रों के शामिल होने की जानकारी भी सामने आई है।
- सरकार ने दिए जांच के आदेश
घटना को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। सरकार ने हादसे की परिस्थितियों, इमारत की स्थिति, निर्माण संबंधी नियमों और संबंधित विभागों की भूमिका की जांच कराने की बात कही है। जांच रिपोर्ट के बाद लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
ट्रांसफार्मर से टकराकर धू-धू कर जली कार, तीन की मौत
- ओयल चौकी के पास देर रात हुआ हादसा, छह लोग थे सवार; शीशे तोड़कर पुलिस ने सभी को निकाला बाहर
लखीमपुर खीरी/ लखनऊ। लखीमपुर से सीतापुर की ओर जा रही तेज रफ्तार वर्ना कार सोमवार देर रात ओयल चौकी के पास सड़क किनारे रखे बिजली के ट्रांसफार्मर से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार में तत्काल आग लग गई और देखते ही देखते वाहन आग की लपटों में घिर गया।
हादसे की सूचना मिलते ही ओयल पुलिस मौके पर पहुंची। कार में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए पुलिसकर्मियों ने वाहन के शीशे तोड़े और काफी मशक्कत के बाद उसमें सवार सभी छह लोगों को बाहर निकाला। इसके बाद घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।
हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई। मृतकों में पिपरिया निवासी आकाश वर्मा (पुत्र पप्पू वर्मा) की मौके पर ही मौत होने की जानकारी सामने आई है। दो अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया पुलिस की ओर से की जा रही है। हादसे में घायल अन्य लोगों का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है।
पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती तौर पर कार की तेज रफ्तार को हादसे की वजह माना जा रहा है। पुलिस घटनास्थल और आसपास के लोगों से जानकारी जुटाने के साथ ही मामले की अन्य पहलुओं से भी जांच कर रही है।
मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में सपा का दांव, 23 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज पहुंचेगा सहारनपुर
- अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रतिनिधिमंडल लेगा मौके का जायजा, कमिश्नर से भी होगी मुलाकात

सहारनपुर। मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले को लेकर समाजवादी पार्टी ने राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के निर्देश पर पार्टी का 23 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार, 7 सितंबर को सहारनपुर पहुंचेगा। प्रतिनिधिमंडल मामले की जानकारी जुटाने के साथ घटनास्थल का जायजा लेगा।
सपा नेताओं का प्रतिनिधिमंडल संबंधित लोगों से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की जानकारी लेगा। इसके बाद पार्टी के प्रतिनिधि मंडल की मंडलायुक्त से भी मुलाकात प्रस्तावित है। इस दौरान मस्जिद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई, प्रशासन की भूमिका और स्थानीय परिस्थितियों को लेकर जानकारी ली जाएगी। सपा ने इस दौरे के जरिए मामले को राजनीतिक रूप से भी उठाने की तैयारी की है। प्रतिनिधिमंडल अपनी पड़ताल के बाद पार्टी नेतृत्व को रिपोर्ट सौंप सकता है।