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राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रचार-प्रसार के लिए पीआरवी वाहन रवाना

- जनपद न्यायाधीश ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना, 12 सितंबर को आयोजित होगी राष्ट्रीय लोक अदालत

लखनऊ। राष्ट्रीय लोक अदालत एवं राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 3.0 के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सोमवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ की ओर से पीआरवी वाहन रवाना किया गया। जनपद न्यायालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ मलखान सिंह ने पीआरवी वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली, मीडियेशन एवं कंसीलियेशन प्रोजेक्ट कमेटी, सर्वोच्च न्यायालय तथा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार 12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रीय लोक अदालत जनपद न्यायालय लखनऊ के साथ-साथ पारिवारिक न्यायालय, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, भूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण, उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, स्थायी लोक अदालत, श्रम न्यायालय, वाणिज्यिक न्यायालय, कलेक्ट्रेट एवं जनपद की सभी तहसीलों में आयोजित होगी।

इसके साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के तत्वावधान में राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 3.0 का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। यह अभियान 1 अगस्त से 30 दिसंबर 2026 तक चलेगा। अभियान का उद्देश्य पक्षकारों के बीच आपसी संवाद, सुलह और समझौते के माध्यम से विवादों का शीघ्र एवं स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कुँवर मित्रेश सिंह कुशवाहा ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत और मध्यस्थता अभियान 3.0 के प्रति आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से पीआरवी वाहन को रवाना किया गया है। यह वाहन लखनऊ की विभिन्न तहसीलों, ब्लॉकों तथा दूर-दराज के क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को राष्ट्रीय लोक अदालत और मध्यस्थता के माध्यम से विवादों के समाधान के संबंध में जानकारी देगा।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से लंबित मामलों का आपसी सहमति एवं सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण किया जा सकता है। वहीं मध्यस्थता अभियान 3.0 के जरिए पक्षकार आपसी संवाद के माध्यम से विवादों का समाधान प्राप्त कर सकते हैं, जिससे समय और धन दोनों की बचत होती है।

कार्यक्रम में अपर जिला जज एवं नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 3.0 अभिनय कुमार मिश्रा, सिविल जज (सी0डि0)/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कुँवर मित्रेश सिंह कुशवाहा, पुलिस उपायुक्त एवं नोडल अधिकारी किरन यादव सहित न्यायिक अधिकारीगण, कर्मचारीगण, पराविधिक स्वयंसेवक, पैनल अधिवक्ता तथा डिफेन्स काउन्सिल के अधिवक्ता उपस्थित रहे।

जनपद न्यायाधीश मलखान सिंह ने लखनऊ के सभी नागरिकों, अधिवक्ताओं एवं समाजसेवियों से अपील की कि वे 12 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत एवं राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 3.0 का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि पुराने मुकदमों और लंबे समय से चल रहे अदालती विवादों को आपसी सुलह एवं समझौते के माध्यम से समाप्त करने का यह महत्वपूर्ण अवसर है।

शिक्षक ज्ञान के दीप, शिक्षा का उद्देश्य जीवन को सही दिशा देना : सीएम योगी

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को लिखी पाती :-

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से किया आह्वान—हर बच्चे को स्कूल, हर युवा को कौशल और हर नागरिक को डिजिटल व एआई साक्षर बनाने का लें संकल्प

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस और आगामी अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम पाती लिखकर शिक्षा, साक्षरता और तकनीकी ज्ञान के महत्व को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक वह दीप हैं, जो ज्ञान का प्रकाश फैलाकर आने वाली पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं, बल्कि बच्चों को संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और जीवन को सही दिशा देने वाली समझ प्रदान करना भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर उन्हें राष्ट्र निर्माण की नींव मजबूत करने वाले 81 गुरुजनों को सम्मानित करने का सौभाग्य मिला। इसी ज्ञान के विस्तार और प्रत्येक व्यक्ति को सशक्त बनाने के संकल्प के साथ आठ सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाएगा।

- ज्ञान के साथ संस्कार और दायित्वबोध जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरुकुल समग्र शिक्षा के केंद्र रहे हैं। वहां ज्ञान के साथ जीवन मूल्यों, अनुशासन और दायित्वबोध की शिक्षा दी जाती थी। आज की शिक्षा व्यवस्था में भी इसी भावना को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह व्यक्ति के जीवन को सरल बनाने के साथ समाज के लिए भी उपयोगी साबित हो।

- डिजिटल साक्षरता के साथ एआई का ज्ञान भी जरूरी

योगी ने कहा कि तकनीक तेजी से जीवन को बदल रही है। ऐसे में डिजिटल साक्षरता के साथ एआई साक्षरता भी समय की आवश्यकता बन गई है। एआई, डीप-टेक और उभरती प्रौद्योगिकियां शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार परंपरागत ज्ञान को आधुनिक विज्ञान, तकनीक, नवाचार और कौशल से जोड़ने का प्रयास कर रही है। लखनऊ में विकसित हो रही एआई सिटी और कानपुर में ड्रोन एवं यूएवी तकनीक का बढ़ता पारिस्थितिकी तंत्र प्रदेश के तकनीकी भविष्य की नई संभावनाओं का आधार बन रहा है।

- ऑपरेशन कायाकल्प और मिशन प्रेरणा से शिक्षा व्यवस्था में बदलाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने ऑपरेशन कायाकल्प, मिशन प्रेरणा, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, विद्यालयों में सुविधाएं बढ़ाने, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया है। इन प्रयासों से प्रदेश के विद्यालयों में ड्रॉपआउट दर को न्यूनतम करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है और अधिक से अधिक बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

- शिक्षा की पूरी यात्रा में शिक्षक सबसे अहम कड़ी

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। शिक्षक विद्यार्थियों में संस्कार, जिज्ञासा, अनुशासन, आत्मविश्वास और दायित्वबोध विकसित करने के साथ ही देश की गौरवशाली ज्ञान परंपरा को आधुनिक ज्ञान और नवाचार से जोड़ने का कार्य करते हैं।

- साक्षरता के लिए समाज की भागीदारी जरूरी

योगी ने कहा कि साक्षरता का संकल्प समाज के सहयोग के बिना पूरा नहीं हो सकता। यदि आसपास कोई व्यक्ति अक्षर ज्ञान से वंचित है तो उसे साक्षर बनाना समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। किसी को पढ़ना-लिखना सिखाने का छोटा-सा प्रयास उसके जीवन में ज्ञान, आत्मविश्वास और अवसरों के नए द्वार खोल सकता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर संकल्प लें कि हर बच्चा विद्यालय पहुंचे, हर विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, हर युवा कौशल और नवाचार से जुड़े तथा हर नागरिक साक्षर होने के साथ डिजिटल ज्ञान और एआई के प्रति भी जागरूक बने।

बसपा में फिर बड़ा बदलाव, आकाश आनंद किनारे तो ईशान को मिली अहम जिम्मेदारी

- मायावती ने छोटे भतीजे को बनाया मुख्य सेक्टर प्रभारी, आकाश ने X पर बदला बायो; संगठन में बदलाव से बढ़ी सियासी हलचल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में एक बार फिर बड़ा संगठनात्मक बदलाव चर्चा में है। पार्टी प्रमुख मायावती ने अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हुए उन्हें मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाया है। वहीं, आकाश आनंद को पार्टी की प्रमुख संगठनात्मक जिम्मेदारियों से दूर किए जाने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। ईशान आनंद को करीब 15 राज्यों में पार्टी के कामकाज की समीक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। वह बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अपने पिता आनंद कुमार को रिपोर्ट करेंगे। पार्टी की हालिया बैठक में मायावती ने ईशान का पार्टी नेताओं से परिचय भी कराया था।
- आकाश ने बदला सोशल मीडिया बायो
इस बीच आकाश आनंद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना बायो बदलकर खुद को ‘BSP समर्थक’ बताया है। इससे पहले उन्होंने अपने बायो में खुद को ‘BSP कार्यकर्ता’ बताया था। उनका नाम पार्टी की नई संगठनात्मक सूची में भी नहीं है। हालांकि, आकाश आनंद ने पार्टी से इस्तीफा देने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।मायावती ने हाल ही में आकाश आनंद को बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी से हटाते हुए कहा था कि उन्हें अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत है। यह आकाश को महत्वपूर्ण पद से हटाए जाने का तीसरा बड़ा घटनाक्रम बताया जा रहा है।
- क्या ईशान बनेंगे नया चेहरा?
ईशान आनंद को अहम जिम्मेदारी मिलने और आकाश के संगठन से दूर होने के बाद बसपा के भीतर नेतृत्व और उत्तराधिकार को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, ईशान को मायावती का नया उत्तराधिकारी बनाए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में फिलहाल इसे बसपा के संगठनात्मक पुनर्संयोजन के तौर पर ही देखा जा रहा है। आकाश आनंद के जल्द पार्टी से बाहर किए जाने और बसपा पदाधिकारियों को उन्हें तथा उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को सोशल मीडिया पर अनफॉलो करने के निर्देश दिए जाने की चर्चाएं भी हैं, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। इसलिए इन दावों को तथ्य के रूप में पेश करने से बचना उचित होगा।
सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्रों का प्रदर्शन, MCD पर गंभीर सवाल
-  ABVP कार्यकर्ता ने जिम्मेदार अधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग की, कमिश्नर के इस्तीफे की उठाई मांग

नई दिल्ली। सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने के हादसे के बाद छात्रों और एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर दिल्ली नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इमारत में कथित अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं की गई।
प्रदर्शन में शामिल एबीवीपी की एक सदस्य ने पुलिस और प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जब लोग और छात्र मलबे में दबे हैं और कई लोगों की जान जा चुकी है, ऐसे समय में जिम्मेदार एमसीडी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारियों को गिरफ्तार करने के बजाय प्रदर्शन कर रहे छात्रों को परेशान किया जा रहा है।
एबीवीपी सदस्य ने एमसीडी कमिश्नर की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें घटनास्थल पर मौजूद रहना चाहिए था। उन्होंने कमिश्नर के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि हादसे के लिए जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस बीच प्रशासन की ओर से हादसे की जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच में इमारत की स्थिति, निर्माण संबंधी नियमों के पालन और संबंधित विभागों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
- हादसे में अब तक छह की मौत
राजधानी दिल्ली में पिछले तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश के बीच रविवार को सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे में अब तक छह लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। मलबे में कुछ और लोगों के दबे होने की आशंका के चलते राहत और बचाव अभियान जारी है।
- अवैध निर्माण पर उठे सवाल
हादसे के बाद नगर निगम और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि इमारत में नियमों को दरकिनार कर निर्माण कराया गया था और यहां पीजी का संचालन भी किया जा रहा था। स्थानीय लोगों का दावा है कि हादसे के समय इमारत में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। हालांकि, मलबे में फंसे लोगों की वास्तविक संख्या को लेकर प्रशासन की ओर से अभी कोई स्पष्ट आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।मलबे से निकाले गए घायलों को एम्स ट्रॉमा सेंटर, सफदरजंग अस्पताल और आरआर अस्पताल समेत विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मृतकों में दो छात्रों के शामिल होने की जानकारी भी सामने आई है।
- सरकार ने दिए जांच के आदेश
घटना को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। सरकार ने हादसे की परिस्थितियों, इमारत की स्थिति, निर्माण संबंधी नियमों और संबंधित विभागों की भूमिका की जांच कराने की बात कही है। जांच रिपोर्ट के बाद लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
ट्रांसफार्मर से टकराकर धू-धू कर जली कार, तीन की मौत
- ओयल चौकी के पास देर रात हुआ हादसा, छह लोग थे सवार; शीशे तोड़कर पुलिस ने सभी को निकाला बाहर
लखीमपुर खीरी/ लखनऊ। लखीमपुर से सीतापुर की ओर जा रही तेज रफ्तार वर्ना कार सोमवार देर रात ओयल चौकी के पास सड़क किनारे रखे बिजली के ट्रांसफार्मर से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार में तत्काल आग लग गई और देखते ही देखते वाहन आग की लपटों में घिर गया।
हादसे की सूचना मिलते ही ओयल पुलिस मौके पर पहुंची। कार में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए पुलिसकर्मियों ने वाहन के शीशे तोड़े और काफी मशक्कत के बाद उसमें सवार सभी छह लोगों को बाहर निकाला। इसके बाद घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।
हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई। मृतकों में पिपरिया निवासी आकाश वर्मा (पुत्र पप्पू वर्मा) की मौके पर ही मौत होने की जानकारी सामने आई है। दो अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया पुलिस की ओर से की जा रही है। हादसे में घायल अन्य लोगों का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है।
पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती तौर पर कार की तेज रफ्तार को हादसे की वजह माना जा रहा है। पुलिस घटनास्थल और आसपास के लोगों से जानकारी जुटाने के साथ ही मामले की अन्य पहलुओं से भी जांच कर रही है।
मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में सपा का दांव, 23 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज पहुंचेगा सहारनपुर
- अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रतिनिधिमंडल लेगा मौके का जायजा, कमिश्नर से भी होगी मुलाकात

सहारनपुर। मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले को लेकर समाजवादी पार्टी ने राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के निर्देश पर पार्टी का 23 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार, 7 सितंबर को सहारनपुर पहुंचेगा। प्रतिनिधिमंडल मामले की जानकारी जुटाने के साथ घटनास्थल का जायजा लेगा।
सपा नेताओं का प्रतिनिधिमंडल संबंधित लोगों से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की जानकारी लेगा। इसके बाद पार्टी के प्रतिनिधि मंडल की मंडलायुक्त से भी मुलाकात प्रस्तावित है। इस दौरान मस्जिद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई, प्रशासन की भूमिका और स्थानीय परिस्थितियों को लेकर जानकारी ली जाएगी। सपा ने इस दौरे के जरिए मामले को राजनीतिक रूप से भी उठाने की तैयारी की है। प्रतिनिधिमंडल अपनी पड़ताल के बाद पार्टी नेतृत्व को रिपोर्ट सौंप सकता है।
गोरखपुर में आकाशीय बिजली गिरने से हादसा, CM योगी ने लिया संज्ञान

- मृतकों के परिजनों को जल्द मिलेगी चार-चार लाख रुपये की सहायता, जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री राहत कोष से भी मदद

गोरखपुर। गोरखपुर के राजघाट पर रविवार को आकाशीय बिजली गिरने से हुए हादसे का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। हादसे में हुई जनहानि पर मुख्यमंत्री ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन को प्रभावित परिवारों को शासन की ओर से अनुमन्य आर्थिक सहायता तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक, राप्ती नदी के राजघाट पर बने गुम्बदनुमा छज्जों में से एक पर रविवार पूर्वाह्न करीब साढ़े 11 बजे अचानक आकाशीय बिजली गिर गई। तेज आवाज के साथ हुई इस घटना से घाट पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे में लोगों के हताहत होने की सूचना है।

घटना की प्रत्यक्षदर्शी और राजघाट पर दुकान चलाने वाली गुलजारी निषाद के अनुसार, बिजली गिरने के समय घाट पर सामान्य गतिविधियां चल रही थीं। अचानक तेज गर्जना के साथ एक गुम्बद पर बिजली गिरी, जिसके बाद मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से हादसे की जानकारी ली और राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से प्रभावित परिवारों की हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने को कहा है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन मृतकों के परिजनों को आकाशीय बिजली से मृत्यु की स्थिति में शासन द्वारा अनुमन्य चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में जुट गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर पीड़ित परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जाए। प्रशासन की ओर से हादसे के बाद मौके की स्थिति का जायजा लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आरजीआईपीटी में तीन नए छात्रावासों का किया उद्घाटन
-  डिप्टी सीएम ने मुख्यमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को वितरित किए स्वीकृति पत्र

लखनऊ। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने रविवार को अमेठी के जायस स्थित राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान (आरजीआईपीटी) में तीन नवनिर्मित छात्रावासों का उद्घाटन किया। उन्होंने एससी बोस, होमी भाभा और विद्यासागर छात्रावासों का लोकार्पण करते हुए विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय सुविधाएं मिलने की बात कही। इस दौरान मुख्यमंत्री आवास योजना के 17 लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र और 1.20 लाख रुपये के डेमो चेक भी वितरित किए गए।
कार्यक्रम के बाद उपमुख्यमंत्री ओदारी गांव पहुंचे और मुख्यमंत्री आवास योजना की लाभार्थी कृष्णा मौर्य के घर जाकर उन्हें स्वीकृति पत्र और डेमो चेक सौंपा। उन्होंने परिवार से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी भी ली।

- ऊर्जा क्षेत्र में शोध पर जोर
आरजीआईपीटी में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए केशव मौर्य ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति में युवा, वैज्ञानिक और शोधकर्ताओं की अहम भूमिका होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से पेट्रोलियम और ऊर्जा के क्षेत्र में नई तकनीक विकसित करने तथा वैकल्पिक ऊर्जा, ग्रीन फ्यूल, जैव ईंधन और ऊर्जा दक्षता जैसे क्षेत्रों में शोध को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा की जरूरत आने वाले समय में और बढ़ेगी। ऐसे में तकनीकी संस्थानों में पढ़ने वाले युवाओं को शोध और नवाचार के माध्यम से देश की ऊर्जा जरूरतों के समाधान तलाशने चाहिए। आरजीआईपीटी जैसे संस्थान केवल डिग्री देने वाले केंद्र नहीं, बल्कि भविष्य के वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों को तैयार करने के महत्वपूर्ण संस्थान हैं।

- हर पात्र परिवार को पक्का घर देना लक्ष्य
मुख्यमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य पात्र गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है। केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आवास के साथ बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी सरकार काम कर रही है। कार्यक्रम में आवास योजना के 17 लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र और डेमो चेक दिए गए। लाभार्थियों ने कहा कि इससे उनके पक्के घर का सपना पूरा करने में मदद मिलेगी।

- नए छात्रावासों से विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं
आरजीआईपीटी के निदेशक आचार्य हरीश हिरानी ने संस्थान की शैक्षणिक और शोध गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान को आगे बढ़ा रहा है। तीन नए छात्रावासों के शुरू होने से विद्यार्थियों को अतिरिक्त आवासीय सुविधा मिलेगी और उनकी पढ़ाई एवं शोध गतिविधियों के लिए बेहतर वातावरण तैयार होगा।
कार्यक्रम में राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, विधान परिषद सदस्य शैलेंद्र प्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश अग्रहरि, जगदीशपुर विधायक सुरेश पासी, जिलाधिकारी संजय चौहान, पुलिस अधीक्षक सरवणन टी., मुख्य विकास अधिकारी पूजा साहू सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, आरजीआईपीटी के शिक्षक, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।
चित्रकूट में बाढ़ के बाद योगी का एक्शन प्लान: क्षति का तत्काल सर्वे, मुआवजा और मंदाकिनी से अतिक्रमण हटाने के निर्देश
लखनऊ। अतिवृष्टि से प्रभावित चित्रकूट धाम का दौरा कर लौटे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए और फसल व मकान की क्षति का तत्काल सर्वे कराकर पात्र लोगों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने तथा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने को कहा। प्रभावित किसानों की फसल क्षति का सर्वे भी शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए।

- व्यापारियों और मठ-मंदिरों को भी मिलेगी सहायता
योगी ने चित्रकूट धाम के बाढ़ प्रभावित व्यापारियों को हुए नुकसान का आकलन कराने और उन्हें सहायता व मुआवजा उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था करने को कहा। मठ-मंदिरों को हुई क्षति का भी सर्वे कराने तथा आवश्यक मरम्मत कार्य शीघ्र शुरू कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण में शासन आवश्यक सहयोग करेगा।
राहत कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने शेष राहत किट का वितरण 48 घंटे के भीतर सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राहत सामग्री पहुंचाने में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। प्रशासन को प्रभावित परिवारों के बीच लगातार मौजूद रहकर उनकी जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

- बाढ़ के बाद बीमारियों से निपटने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने को कहा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और जरूरतमंदों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीमें बीमारी के लक्षणों पर नजर रखें और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करें।

- मंदाकिनी के कैचमेंट से हटेगा अतिक्रमण
मुख्यमंत्री ने मंदाकिनी नदी के कैचमेंट एरिया में हुए अतिक्रमण का चिन्हांकन कर नियमानुसार उसे हटाने के निर्देश दिए। इसके लिए जनपदीय अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद करने को कहा गया। साथ ही घाटों के विस्तारीकरण के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मंदाकिनी में किसी भी दशा में सीवर और नालों का पानी नहीं जाना चाहिए। पर्यटन, सिंचाई और नगर विकास विभाग आपसी समन्वय से इसके लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर उसे लागू करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदाकिनी चित्रकूट की आस्था से जुड़ी नदी है और इसकी स्वच्छता व निर्मलता बनाए रखना सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

- फुट ओवरब्रिज की सुरक्षा जांच के निर्देश
मंदाकिनी नदी पर बने फुट ओवरब्रिज का सेफ्टी ऑडिट कराने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसुरक्षा से जुड़े सभी निर्माण कार्यों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और जरूरत के अनुसार तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई हो।चित्रकूट धाम से एयरपोर्ट जाने वाले मार्ग की भी मुख्यमंत्री ने समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि सड़क का निर्माण कार्य विजयादशमी से पहले हर हाल में पूरा कराया जाए। विलंब के कारणों की समीक्षा कर जिम्मेदारी तय करने को भी कहा।
- गोशालाओं में चारे और पशु स्वास्थ्य की जांच
मुख्यमंत्री ने पशुधन की सुरक्षा के लिए गोशालाओं की जांच कराने और वहां पर्याप्त चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने लंपी डिजीज से बचाव के लिए भी आवश्यक प्रबंध करने को कहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राहत और पुनर्वास के साथ चित्रकूट के लिए दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि भविष्य में अतिवृष्टि और बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। इसमें मंदाकिनी के प्राकृतिक प्रवाह, कैचमेंट एरिया, अतिक्रमण और जल निकासी व्यवस्था को विशेष रूप से शामिल किया जाए।
सर्वोदय विद्यालयों के 3 हजार से अधिक विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ मिलेगा हुनर
- 'प्रोजेक्ट प्रवीण’ के तहत 31 संस्थाओं को प्रशिक्षण का जिम्मा, 30 सितंबर तक शुरू होगी ट्रेनिंग

लखनऊ। प्रदेश के सर्वोदय विद्यालयों में पढ़ने वाले तीन हजार से अधिक विद्यार्थियों को अब स्कूली शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल का प्रशिक्षण भी मिलेगा। समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों के विद्यार्थियों को विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में प्रशिक्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के तहत लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रशिक्षण के लिए 31 प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी केंद्रों पर 30 सितंबर तक प्रशिक्षण शुरू करना अनिवार्य किया गया है।
व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि प्रोजेक्ट प्रवीण का उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ ऐसे कौशल से जोड़ना है, जो आगे चलकर उन्हें रोजगार, स्वरोजगार और बेहतर करियर के अवसर दिलाने में मददगार हों। विद्यार्थियों की रुचि और उपलब्ध प्रशिक्षण के आधार पर उन्हें अपैरल, आईटी-आईटीईएस, मैनेजमेंट सहित अन्य रोजगारपरक सेक्टरों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

- 300 घंटे तक होगी ट्रेनिंग
प्रशिक्षण को स्कूली पढ़ाई के साथ संचालित करने के लिए एक बैच में अधिकतम 35 विद्यार्थी शामिल किए जाएंगे। प्रशिक्षण की कुल अवधि 300 घंटे तक होगी। इससे विद्यार्थियों की नियमित शिक्षा प्रभावित किए बिना उन्हें व्यावहारिक एवं व्यावसायिक दक्षता हासिल करने का अवसर मिलेगा।
मिशन ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता और पारदर्शिता के लिए प्रक्रिया भी तय की है। प्रशिक्षण प्रदाता को मिशन मुख्यालय में अनुबंध जमा कर उसकी पुष्टि करानी होगी। इसके बाद ही संबंधित जिले की जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (DPMU) को बैच गठित करने की अनुमति दी जाएगी।

- मान्यता प्राप्त जॉब रोल में ही प्रशिक्षण
विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं मान्य प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए बैच को मंजूरी देने से पहले NCVET और NQR पोर्टल पर संबंधित जॉब रोल की जांच की जाएगी। केवल वैध और मान्यता प्राप्त जॉब रोल में ही प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। पोर्टल पर उन्हीं बैच और सेक्टर को मंजूरी मिलेगी, जो संबंधित प्रशिक्षण संस्था को आवंटित किए गए हैं। इससे प्रशिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता के साथ निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित होगा।

- सात दिन में देनी होगी पाठ्य सामग्री
प्रशिक्षण प्रदाताओं को बैच शुरू होने के सात दिन के भीतर विद्यार्थियों को आवश्यक पाठ्य सामग्री उपलब्ध करानी होगी। सामग्री दिए जाने की हस्ताक्षरित रसीद और तस्वीरें मिशन पोर्टल पर अपलोड करना भी अनिवार्य होगा। प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम और मूल्यांकन संबंधित सेक्टर स्किल काउंसिल (SSC) के निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए भुगतान निर्धारित कॉमन कॉस्ट नॉर्म्स के आधार पर होगा।

मिशन निदेशक पुलकित खरे ने प्रशिक्षण प्रदाताओं को सभी प्रक्रियाएं निर्धारित समयसीमा और नियमों के अनुसार पूरी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मिशन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि प्रशिक्षण केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों को वास्तव में उपयोगी और गुणवत्तापूर्ण कौशल हासिल हो। स्कूल स्तर पर ही कौशल प्रशिक्षण मिलने से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे भविष्य में रोजगार एवं बेहतर करियर के अवसरों के लिए अधिक सक्षम बनेंगे।