बीजेपी ने अमित मालवीय को IT सेल से क्यों हटाया, क्या जेन-ज़ी प्रोटेस्ट का है असर?
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बारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को अपनी नई टीम का एलान किया। इस टीम में बहुत भारी फेरबदल किया गया है। 65 लोगों की बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 53 नए चेहरों को शामिल किया है। लेकिन, सबसे ज्यादा चर्चा है तो बीजेपी आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय की छुट्टी का।
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11 सालों तक संभाली बीजेपी आईटी सेल की जिम्मेदारी
बीजेपी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का एलान करते हुए पार्टी के आईटी और सोशल मीडिया विभाग में बड़ा बदलाव किया है। करीब 11 साल तक इस ज़िम्मेदारी को संभालने वाले अमित मालवीय को अब इस पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह छत्तीसगढ़ से आने वाले दीपक म्हस्के को सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। बीजेपी ने अमित मालवीय को हटाने की कोई वजह सार्वजनिक तौर पर नहीं बताई है। पार्टी की ओर से इसे संगठन में बदलाव के तौर पर ही पेश किया गया है। हालांकि, सवाल करने वाले तो सवाल करेंगे ही।
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क्या जेन-ज़ी प्रोटेस्ट का असर पड़ा?
मालवीय को हटाए जाने की टाइमिंग पर खास ध्यान दिया जा रहा है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब हाल में हुए छात्र और युवा प्रदर्शनों में सोशल मीडिया की भूमिका काफी अहम रही। जानकारों की माने तो हाल ही में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान बीजेपी युवाओं से जुड़ने में नाकाम रही। बीजेपी के इस बदलाव को हालिया युवा प्रदर्शनों के बाद पार्टी की डिजिटल रणनीति में बदलाव से जोड़कर देखा है।
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कभी सोशल मीडिया पर थी बीजेपी की पकड़
जंतर-मंतर समेत देश के कई हिस्सों में हुए स्टूडेंट और जेन जी प्रोटेस्ट के दौरान सोशल मीडिया मुख्य रूप से प्रदर्शनकारियों के लिए एकजुट होने का बड़ा माध्यम बन गया। उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल रैप, गानों और वीडियो के जरिए पीएम मोदी और उनकी सरकार का मजाक उड़ाने के लिए किया। दिलचस्प बात यह है कि इन्हीं प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बीजेपी लंबे समय से अपने समर्थकों तक पहुंचने और अपने राजनीतिक संदेश को आकार देने के लिए करती रही है। लेकिन इस बार बीजेपी से चूक हो गई। जिसकी बहुत बड़ी कीमत धर्मेद्र प्रधान का इस्तीफा माना जा सकता है।
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कहां चूक गई बीजेपी?
सक्रॉल के एक लेख के मुताबिक बीजेपी ने पिछले डेढ़ दशक में एक्स (पहले ट्विटर), फ़ेसबुक और व्हाट्सऐप जैसे टैक्स्ट-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म्स पर जिस तरह का मज़बूत डिजिटल नेटवर्क बनाया था, वही रणनीति इंस्टाग्राम और खासकर रील्स की दुनिया में उतना असर नहीं छोड़ पाई। लेख के मुताबिक जेन-ज़ी का सोशल मीडिया इस्तेमाल और राजनीतिक संवाद करने का तरीका पुरानी पीढ़ियों से काफी अलग है। लेख कहता है कि जेन-ज़ी का का मुख्य प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम है, जबकि एक्स, और फ़ेसबुक को युवा अपेक्षाकृत उम्रदराज़ लोगों के प्लेटफॉर्म के तौर पर देखते हैं। जेन-ज़ी आंदोलन में इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका काफी अहम रही थी।
जेन ज़ी आंदोलन से सीख
जानकारों का मानना है कि अमित मालवीय को हटाया जाना सिर्फ एक व्यक्तिगत फैसला नहीं है, बल्कि यह बीजेपी की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। सीजेपी के आंदोलन से सीख लेते हुए बीजेपी युवाओं को साधने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया की रणनीति बदल रही है। जेन ज़ी आंदोलन से सीख लेकर नए प्लेटफॉर्म और नए चेहरों पर फोकस कर रही है।























2 hours and 23 min ago
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