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JPSC-JSSC छात्र आंदोलन: आज झारखंड विधानसभा घेराव की फुल तैयारी, क्या हैं मांग?

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ दो हफ्ते से अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के आज प्रस्तावित विधानसभा मार्च को देखते हुए पुलिस ने विधानसभा परिसर के आसपास निषेधाज्ञा लागू कर दी है और पूरे शहर में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है. वहीं आठ दिन से अनशन पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि आज विधानसभा घेराव की तैयारी पूरी हो चुकी है.

अनशन के दौरान देवेंद्र नाथ महतो के वजन में 10.5 किलो की कमी का दावा किया गया है. रात करीब 3 बजे मेडिकल टीम, सिटी एसपी, सदर SDO, सदर CO और ADM रांची मौके पर पहुंचे. साथ ही स्थिति को देखते हुए देवेंद्र नाथ महतो को अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी गई, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया.

हम अनशन नहीं तोड़ेंगे: देवेंद्र महतो

देवेंद्र महतो ने कहा कि हम अनशन नहीं तोड़ेंगे, चाहे मेरा चादर कफन में बदल जाए. वहीं सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता को देवेंद्र नाथ महतो ने सकारात्मक बताया. सरकार की हाई लेवल कमिटी में शामिल चार मंत्रियों ने वीडियो कॉल के जरिए देवेंद्र नाथ महतो का हालचाल लिया. मंत्रियों ने भूख हड़ताल खत्म करने का आग्रह किया.

आज का विधानसभा घेराव जारी रहेगा

उन्होंने कहा कि बातचीत के बाद भी आज का विधानसभा घेराव जारी रहेगा. महतो ने छात्रों से रांची पहुंचकर विधानसभा घेराव को ऐतिहासिक बनाने की अपील की. वहीं आंदोलन को देश के अलग-अलग हिस्सों से समर्थन मिलने का दावा किया जा रहा है. मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से छात्र-अभिभावक रांची पहुंचे हैं. अभिनेता पीयूष मिश्रा ने भी देवेंद्र नाथ महतो से मुलाकात कर आंदोलन को समर्थन दिया. JPSC-JSSC न्याय मंच के मुताबिक आंदोलन की चर्चा देश के विभिन्न हिस्सों में हो रही है.

बीजेपी अध्यक्ष को किया नजरबंद

बीजेपी के नेता अमर बाउरी ने आरोप लगाया कि पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष आदित्य साहू को नजरबंद कर दिया गया है. बीजेपी के प्रदेश महासचिव बाउरी ने कहा कि साहू के आवास के बाहर सुरक्षा बलों की तैनाती करके सरकार सफलता हासिल नहीं कर पाएगी. पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि राज्य विधानसभा के पास प्रस्तावित धरने-प्रदर्शन को देखते हुए सभी जरूरी सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं.

विधानसभा मार्च के दौरान अशांति की आशंका

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) मनोज कौशिक ने कहा, छात्रों के प्रस्तावित विधानसभा मार्च के दौरान अशांति की आशंका को देखते हुए पुलिस प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है. उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से मार्च में शामिल हों, क्योंकि पिछले दो हफ्ते से अधिक समय से जारी उनके प्रदर्शन में उन्होंने अनुशासन बनाए रखा है. एडीजी ने कहा, यह सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है कि असामाजिक तत्वों और उपद्रव करने वालों को मार्च में शामिल होने से रोका जाए.

रांची एसएसपी राकेश रंजन ने कहा कि मार्च के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा, हम नहीं चाहते कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने के कारण किसी छात्र के करियर पर दाग लगे. शहर के प्रमुख स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती के साथ अवरोधक लगाए गए हैं.

विधानसभा भवन के 750 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा

एसएसपी ने बताया कि विधानसभा भवन के 750 मीटर के दायरे में छह अगस्त से 12 अगस्त तक निषेधाज्ञा पहले ही लागू की जा चुकी है. उन्होंने बताया कि यह आदेश इन दिनों सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक प्रभावी रहेगा. एक आधिकारिक बयान के अनुसार, रांची में प्रस्तावित मार्च को देखते हुए रविवार आधी रात से जमशेदपुर में भी ऐसी ही निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है.

उग्र प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की अपील

रांची जिला प्रशासन ने आंदोलनकारी छात्रों से किसी भी तरह के उग्र प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की अपील की है. प्रशासन ने विधानसभा मार्च के दौरान हिंसा और गैरकानूनी गतिविधियों को लेकर भी चेतावनी दी है. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि झारखंड के विभिन्न हिस्सों से राजधानी रांची आ रहे सैकड़ों छात्रों को पुलिस बलपूर्वक रोक रही है. भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन में प्रवेश कर गया. इस दौरान छह छात्र भूख हड़ताल पर हैं.

विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर JFDCL की ओर से विशेष फिल्म स्क्रीनिंग का आयोजन*


विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रांची के मोरहाबादी मैदान में 9 एवं 10 अगस्त को आयोजित आदिवासी महोत्सव के तहत आज अमर शहीद चाँद-भैरव मुर्मू मंडप में Jharkhand Film Development Corporation Limited (JFDCL) की ओर से विशेष फिल्म स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के हेड ऑफ डिपार्टमेंट श्री शुक्रांतो मजूमदार, श्री शिलाजीत सान्याल, श्री नीलांजन बनर्जी,अभिनेत्री सुश्री कल्याणी खत्री तथा झारखंड के प्रतिष्ठित फिल्म निर्देशक श्री बीजू टोप्पो एवं श्री निरंजन कुजूर की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।

इस अवसर पर आदिवासी जीवन, संस्कृति, परंपराओं एवं सामाजिक सरोकारों पर आधारित अनेक उत्कृष्ट शॉर्ट फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। इनमें EPIL, PANCHABHUTA, PAHADA KUDUK, BURO GHAR, THE GIRL WHO LIVED IN THE LOO, LONG LOST HOME, SONDHAYNI, ANGEN, PAPAYA, SARI SARJOM, LADY TARZEN, EDPA KANA, MAN MELODY तथा DOLLS शामिल रहीं।

फिल्म स्क्रीनिंग में बड़ी संख्या में युवाओं एवं विभिन्न महाविद्यालयों से आए विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान फिल्म मेकिंग में करियर विषय पर एक विशेष पैनल डिस्कशन का भी आयोजन किया गया।

इस अवसर पर सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के श्री शुक्रांतो मजूमदार ने साउंड प्रोडक्शन के क्षेत्र में उपलब्ध करियर संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं को संस्थान में संचालित विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों, तकनीकी प्रशिक्षण एवं रोजगार के अवसरों की जानकारी देते हुए इस क्षेत्र में कौशल विकास के महत्व पर बल दिया।

वहीं, श्री शिलाजीत सान्याल ने कहा कि फिल्म मेकिंग से जुड़े व्यावसायिक पाठ्यक्रम युवाओं के लिए अपने सपनों को साकार करने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में युवा इस क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं और झारखंड का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित कर रहे हैं।

फिल्म निर्देशक श्री निरंजन कुजूर ने फिल्म निर्माण से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए युवाओं को रचनात्मकता, समर्पण और निरंतर सीखने की भावना के साथ इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

अभिनेत्री सुश्री कल्याणी खत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में सफलता का आधार अनुशासन, समर्पण और निरंतर कड़ी मेहनत है। उन्होंने अपने संघर्ष और अनुभव साझा करते हुए युवाओं को अपने सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने के लिए प्रेरित किया।

पैनल डिस्कशन में विशेषज्ञों ने युवाओं को फिल्म निर्माण से जुड़े विभिन्न पाठ्यक्रमों, करियर के अवसरों और इस क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

गौरतलब है कि 10 अगस्त को युवाओं के लिए एक विशेष मास्टर क्लास का आयोजन किया जाएगा, जहाँ उन्हें फिल्म निर्माण संबंधी विषय पर अनुभवी विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने और सीखने एवं फिल्म निर्माण की बारीकियों को समझने का सुनहरा अवसर प्राप्त होगा।

रांची जिला प्रशासन का छात्रों से आग्रह: 10 अगस्त को विधानसभा के 750 मीटर दायरे में धारा 144 लागू, प्रदर्शन से बचें

दिनांक 10 अगस्त 2026 को कतिपय छात्र संगठनों द्वारा विधानसभा घेराव किए जाने की सूचना है। झारखंड विधानसभा परिसर (नया विधानसभा) के 750 मीटर के दायरे में (माननीय उच्च न्यायालय झारखंड, रांची को छोड़कर) अनुमंडल पदाधिकारी, सदर रांची द्वारा अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए BNS की धारा 163 (144 CRPC) लागू की गई है, जिस कारण उक्त क्षेत्र में किसी भी प्रकार का विरोध प्रदर्शन, धरना आदि करना ग़ैर क़ानूनी है ।

आप सभी से अपील की जाती है कि किसी भी प्रकार के आक्रामक प्रदर्शन में भाग लेने से बचें। ऐसी गतिविधियाँ न केवल कानून व्यवस्था के लिए समस्या उत्पन्न करती हैं, बल्कि आपकी शिक्षा, भविष्य और करियर पर भी गहरा प्रभाव डाल सकती हैं।

अगर आप किसी हिंसक या ग़ैर क़ानूनी गतिविधि में शामिल पाए जाते हैं, तो आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह कार्रवाई आपके शैक्षणिक रिकॉर्ड और भविष्य में नौकरी पाने की संभावनाओं को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। वर्तमान में अधिकांश नौकरियों में पुलिस वेरिफिकेशन की आवश्यकता होती है, और कोई भी नकारात्मक रिकॉर्ड आपके करियर के रास्ते में रुकावट बन सकता है एवं न सिर्फ़ सरकारी नौकरियों बल्कि निजी कंपनियों में भी नौकरी अथवा ठेके प्राप्त करने में बाधक बन सकता है ।

आपकी प्राथमिकता आपकी पढ़ाई और उज्ज्वल भविष्य होनी चाहिए। किसी भी समस्या या शिकायत के लिए शांतिपूर्ण और कानूनी उपाय अपनाएं। आक्रामकता से न तो कोई समाधान मिलेगा और न ही यह आपके या समाज के हित में है।

यदि आपको कोई भी शिकायत है तो इसके लिए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें न कि किसी भी प्रकार की उग्रता का प्रदर्शन करें ।

आप राष्ट्र एवं राज्य के कर्णधार हैं। कृपया संयम बरतें, शांति बनाए रखें और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें। अतः किसी भी प्रकार के बहकावे में न आकर वैधानिक प्रक्रिया का पालन करें ।

राज्यपाल संतोष गंगवार और सीएम हेमन्त सोरेन ने किया झारखंड आदिवासी महोत्सव का उद्घाटन

रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित दो दिवसीय झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने सभी राज्यवासियों को विश्व आदिवासी दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए जोहार से अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस को हम सभी जानते हैं।

पूरे आदिवासी समाज को आज के इस दिवस को यादगार बनाने के का इंतजार रहता है। धरती पर आदिवासी समाज की अलग पहचान है। इसे अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए इस आदिवासी महोत्सव की शुरुआत हुई है। उन्होंने महोत्सव के लिये सभी लोगों के सहयोग व आशीर्वाद प्राप्त होने का आभार जताया।

मुख्यमंत्री ने राज्य के माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार जी की गरिमामयी उपस्थिति को समारोह की विशेष गरिमा और आदिवासी समाज के गौरव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि हमारे लिए राज्यपाल महोदय केवल राज्य के राज्यपाल ही नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय के मार्गदर्शक और सर्वमान्य नेतृत्वकर्ता के रूप में हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य में ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल (टीएसी) राज्यपाल महोदय की छत्रछाया और मार्गदर्शन में कार्य करती है। टीएसी के माध्यम से आदिवासी समुदाय के हितों की रक्षा, उनके समग्र विकास और कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाती है। साथ ही, आदिवासी समाज के विकास के साथ-साथ पूरे समाज की प्रगति और भविष्य की दिशा तय करने में भी टीएसी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा एवं जीवनशैली को सामने लाने का प्रयास

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के आदिवासी दिवस को पूरे देश और दुनिया में आदिवासी समाज अपने-अपने तरीके से यादगार बनाने में जुटा हुआ है। झारखंड में भी पिछले कुछ वर्षों से इस अवसर पर छोटे-बड़े विभिन्न कार्यक्रमों को आयोजित करके आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मोरहाबादी के पूरे मैदान में देश और राज्य के विभिन्न हिस्सों में निवास करने वाले आदिवासी समुदायों की विविधता और सांस्कृतिक झलक देखने को मिल रही है। आयोजन स्थल पर पंडाल लगाए गए हैं, जहां हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग अपनी जीवनशैली, कला, संस्कृति, परंपरा और आजीविका के साधनों को प्रदर्शित कर रहे हैं। यह आयोजन हमें यह भी दिखाता है

कि किस तरह आदिवासी समाज अपनी पारंपरिक पहचान को संजोते हुए विकास और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन में केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से भी आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हुए हैं। कलाकारों, कारीगरों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों की सहभागिता ने इस आयोजन को और भी अधिक व्यापक स्वरूप प्रदान किया है।

उनके हुनर, परंपरा और अनुभवों के माध्यम से एक मजबूत और बेहतर रास्ते की तलाश में आगे बढ़ते आदिवासी समाज की तस्वीर यहां देखने को मिल रही है। इस अवसर पर राज्य में विभिन्न गतिविधियों और कार्यक्रमों के माध्यम से आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत को सम्मान और सशक्तिकरण का प्रदर्शन हो रहा है।

झारखंड की सवा तीन करोड़ जनता के प्रति राज्य सरकार संवेदनशील

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आज राज्य विश्व आदिवासी दिवस धूमधाम से मना रही है, वहीं हमारे कुछ युवा, नौजवान और छात्र-छात्राएं अपनी कुछ मांगों और अधिकारों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार खुले मन से उनकी बातें सुन रही है और उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझने का प्रयास कर रही है। हर समस्या का समाधान संवाद से संभव है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि इतनी बड़ी व्यवस्था का संचालन करते हुए भी सरकार की मंशा राज्य के सवा तीन करोड़ लोगों के प्रति पूरी संवेदनशीलता के साथ काम करने की है।

गांव में रहने वाला व्यक्ति हो या शहर में रहने वाला, किसान हो या मजदूर, महिला हो या पुरुष, पढ़ा-लिखा नौजवान हो या कम पढ़ा-लिखा अथवा अशिक्षित व्यक्ति—सरकार सभी की चिंता करती है और सबके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जिस विषय को लेकर राज्य के नौजवान अपने अधिकार की आवाज उठा रहे हैं, वह उनकी जागरूकता और अपने हक के लिए खड़े होने के साहस को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि नौजवानों ने हिम्मत इसलिए जुटाई है, क्योंकि उन्हें विश्वास है कि उनके साथ न्याय होगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि मेरे संज्ञान में गड़बड़ी सामने आई है, उसकी जांच होगी, नौजवानों को न्याय मिलेगा और जिन लोगों ने गड़बड़ी की है, उन्हें कठोर से कठोर सजा दी जाएगी। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए धरती पुत्र की भांति कहा कि आप विश्वास रखिए, हम इसी मिट्टी में जन्मे हैं और इसी मिट्टी में दफन भी होंगे। इसलिए हम आपके साथ गलत नहीं होने देंगे।

संवाद से हर समस्या का समाधान संभव, दिग्भ्रमित नहीं हों युवा

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि इस पूरे विषय को राजनीतिक रूप से देखने की आवश्यकता नहीं है, और न ही युवाओं को किसी राजनीतिक छत्रछाया की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बड़ी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पालते हैं और राजनीतिक दलों का इस्तेमाल कर युवा पीढ़ी को अपने हित में इस्तेमाल करने का रास्ता अख्तियार करते हैं।

उन्होंने विशेष रूप से नौजवानों से कहा कि वे विद्यार्थी हैं, उनका अपना अधिकार है और उन्हें उनका अधिकार एवं न्याय मिलना चाहिए। यह जिम्मेदारी सरकार की है और सरकार इसे पूरा करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरे देश में अलग-अलग तरीके से राजनीतिक दलों की नजर युवा पीढ़ी पर है। किस तरह युवाओं को सही और गलत तथ्यों के बीच दिग्भ्रमित किया जाए, इसके लिए बड़े पैमाने पर प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसमें केवल सामान्य लोग ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े विद्वान, पढ़े-लिखे और ज्ञानी लोग भी शामिल हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी बात सरकार के समक्ष पूरी स्पष्टता और निर्भीकता के साथ रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब केवल आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के माध्यम से ही8 युवाओं की बातें सुनने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन युवाओं तक भी पहुंचने का प्रयास कर रही है, जो घर बैठे अपनी समस्याओं और अपेक्षाओं को लेकर चिंतित हैं। इसके लिए सरकार ने संवाद का माध्यम भी बनाया है।

व्यक्ति अमीर हो या गरीब, संविधान सभी को बराबरी का अधिकार देता है

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने देश को जो संविधान दिया है, वह देश में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को समान अधिकार प्रदान करता है। व्यक्ति अमीर हो या गरीब, संविधान सभी को बराबरी का अधिकार देता है,

लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी के 75 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद समाज में असमानता पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है। आने वाले वर्षों में देश आजादी की शताब्दी की ओर बढ़ेगा, लेकिन आज भी समाज के विभिन्न वर्गों के बीच बड़ी असमानताएं मौजूद है

समाज, राज्य और देश में आर्थिक एवं सामाजिक असमानताएं जितनी बढ़ेंगी, तनाव भी उतना ही बढ़ेगा। इसलिए इन असमानताओं को दूर करना और सभी वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराना समय की बड़ी आवश्यकता है।

झारखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि वीरों की भूमि है

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आज लोकतंत्र की मूल भावना को चुनौती देने के लिए भी एक बड़ा समूह पूरी ताकत और शिद्दत के साथ प्रयासरत है। हालांकि, झारखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि वीरों की भूमि है। यह वह धरती है, जहां देश के बड़े हिस्से में आजादी का सपना देखने की शुरुआत भी नहीं हुई थी, उस समय से झारखंड के वीर पूर्वज अपने अधिकार, अस्मिता और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे हैं। संघर्ष की यह परंपरा आज भी जारी है। उन्होंने कहा कि झारखंड को अलग राज्य बने 25 वर्ष हो चुके हैं और इन वर्षों में राज्य ने अपने पैरों पर खड़े होने तथा अपनी अलग पहचान स्थापित करने की दिशा में लगातार प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था, जब झारखंड को केवल संसाधनों के दोहन के लिए एक चारागाह की तरह देखा गया, लेकिन आज जब यह राज्य अपनी ताकत और क्षमता के साथ आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है, तो यह बात कई लोगों को स्वीकार नहीं हो रही है।

युवाओं को सजग रहने की आवश्यकता

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य की प्रगति और उसकी बढ़ती ताकत को रोकने के लिए कभी चेहरा छिपाकर, कभी चेहरा बदलकर और कभी पर्दे के पीछे से गलत संदेश देने तथा लोगों को दिग्भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे प्रयासों के प्रति समाज और विशेषकर युवाओं को सजग रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान बातचीत और लोकतांत्रिक तरीके से निकाला जा सकता है। सीमाओं पर देश के दुश्मनों से मुकाबला अलग विषय है, लेकिन देश के भीतर रहने वाले अपने ही लोगों के साथ लाठी-डंडे के बल पर किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता।

युवाओं, विद्यार्थियों का पारदर्शिता के साथ होगा न्याय

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से युवाओं, विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि वे स्वयं को युवाओं से अलग नहीं मानते। आपकी भावनाएं और सभी की चिंताएं उनकी चिंताएं हैं। उन्होंने कहा कि आज संवैधानिक जिम्मेदारी के स्थान पर रहते हुए वे युवाओं को आश्वस्त करना चाहते हैं कि उनके साथ पूरी पारदर्शिता के साथ न्याय होगा और न्याय केवल होगा ही नहीं, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देगा।

आदिवासी महोत्सव गौरवशाली विरासत, संघर्ष और पहचान को याद करने का अवसर

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का यह महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी गौरवशाली विरासत, संघर्ष और पहचान को याद करने का अवसर है। उन्होंने कामना की कि यह महोत्सव यादगार और प्रेरणादायक बने तथा आदिवासी समाज अपने गौरव और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे ऐसे वीर सपूतों के वंशज हैं, जिन्होंने अपने हक-अधिकार और जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष किया। जल, जंगल और जमीन केवल उनके जीवन के संसाधन नहीं, बल्कि उनके जीवन की शुरुआत से लेकर अंत तक उनकी संस्कृति और अस्तित्व से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि आज उन्हें गर्व है कि वे आदिवासी हैं।

मुख्यमंत्री ने जताया आभार

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने आदिवासी महोत्सव में सशरीर एवं अन्य माध्यमों से उपस्थित सभी लोगों के प्रति आभार जताया।

इनकी रही उपस्थिति..

इस अवसर पर राज्य के मंत्री श्री राधा कृष्ण किशोर, सांसद राज्यसभा श्रीमती महुआ माजी, विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन, विधायक श्री अमित महतो, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, विकास आयुक्त श्री अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव श्रीमती वंदना दादेल, अपर मुख्य सचिव श्री नितिन मदन कुलकर्णी सहित अन्य गणमान्य अतिथिगण, राज्य सरकार के पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोग उपस्थित थे।

‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन: आदिवासी आंदोलन को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले जननेता

#shibusorenwasleaderwhogavenationalidentitytotribalmovement

आज जब झारखंड में विश्व आदिवासी महोत्सव पूरे धूमधाम से मनाया जा रहा है, ऐसे समय में आदिवासियों के हक की आवाज को बुलंद करने वाली शख्सियत की याद बरबस आना सहज बात है। 'दिशोम गुरु' के नाम से प्रसिद्ध शिबू सोरेन झारखंड और देश के आदिवासी आंदोलन के सबसे बड़े नायक थे। उन्होंने महाजनों व सूदखोरों के शोषण के खिलाफ आदिवासियों को एकजुट किया, अलग झारखंड राज्य की मांग को राष्ट्रीय पटल पर रखा और तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की

झारखंड के गठन में अहम भूमिका निभाने वाले अनुभवी आदिवासी नेता और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक शिबू सोरेन ने देश की राजनीति को नया स्वरूप दिया। रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में 11 जनवरी 1944 को जन्मे शिबू सोरेन देश के आदिवासी और क्षेत्रीय राजनीतिक परिदृश्य के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक थे। उन्हें ‘दिशोम गुरु’ (भूमि के नेता) के नाम से भी जाना जाता है।

कैसे बने दिशोम गुरु?

आदिवासी सूदखोरी के चक्र में फंसे हुए थे। इसके ख़िलाफ लड़ते हुए शिबू सोरेन के पिता की हत्या हुई थी। पिता सोबरन सोरेन की हत्या के बाद शिबू सोरेन ने महाजनी प्रथा के ख़िलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी थी। इसी प्रथा को खत्म करने के लिए शिबू सोरेन जी ने धान कटनी आंदोलन चलाया। उन्होंने आदिवासियों को जागरूक किया कि धान लगाने वाला ही धान काटेगा और इस पर महाजनों का कोई अधिकार नहीं है। 70 से 80 के दशक में ये आंदोलन बहुत बड़ा हो गया। उन्होंने झारखंड के किसानों, कामगारों और काश्तकारों को एकजुट किया और आदिवासियों को शोषण से मुक्त करवाने में अहम भूमिका निभाई। यही वजह है कि शिबू सोरेन को झारखंड के लोगों ने दिशोम गुरु की उपाधि दी। दिशोम का मतलब देश को दिशा देने वाला होता है और यहां देश का मतलब आदिवासी क्षेत्र से है।

आदिवासियों के अधिकारों की निरंतर वकालत

शिबू सोरेन अपने पूरे राजनीतिक जीवन में आदिवासियों के अधिकारों की निरंतर वकालत करते रहे। 970 से 1975 के बीच शिबू सोरेन रात्रि पाठशाला चलाते थे, ताकि दिन भर अपना-अपना काम निपटाने के बाद आदिवासी लोग पढ़ पाएं। शिबू सोरेन ने आदिवासियों को मान-सम्मान के साथ जीना सिखाया। शराब के प्रचलन जैसी कुरीतियों से निजात दिलाने को लेकर समाज को जागरूक करने का अभियान शुरू किया। इसी क्रम में आजादी के बाद से छोटानागपुर और संताल परगना अब झारखंड की हो रही उपेक्षा से निजात दिलाने के लिए विनोद बिहारी महतो, प्रख्यात मजदूर नेता एके राय और शिबू सोरेन की पहल पर 1973 में झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन कर अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत की।

अलग झारखंड राज्य के लिए चार दशकों तक संघर्ष

झारखंड मुक्ति मोर्चा आदिवासियों की लड़ाई का प्रतीक बना। 80 के दशक में शिबू सोरेन की रैलियों में जनसैलाब उमड़ता था। जब वे जेएमएम के पहले सांसद बने तो आदिवासियों की आवाज संसद तक सुनाई देने लगी। राजनीति में सक्रिय होने के बाद शिबू सोरेन ने झारखंड राज्य को लेकर दशकों तक आंदोलन किया। अविभाजित बिहार में दक्षिण के क्षेत्र में 26 जिलों को मिलाकर एक सांस्कृतिक इकाई के रूप में उन्होंने झारखंड राज्य की कल्पना की थी। झारखंड राज्य के आंदोलन को शिबू सोरेन ने एक नया तेवर देने का काम किया। झारखंड राज्य के लिए शिबू सोरेन ने चार दशकों तक संघर्ष किया। उसका ही परिणाम था कि साल 2000 में झारखंड को राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ।

रांची सजी आदिवासी रंग में: ढोल-नगाड़ों के साथ शुरू हुआ विश्व आदिवासी महोत्सव

विश्व आदिवासी महोत्सव को लेकर राजधानी रांची पूरी तरह सज-धज गई है। रविवार को बिरसा मुंडा जेल म्यूजियम और मोरहाबादी का नजारा देखते ही बन रहा है। हर जगह आदिवासी संस्कृति, प्रकृति और जीवन दर्शन की झलकियां देखने को मिल रही हैं।

कलाकारों में है जमकर उत्साह

राजधानी की सड़कों पर ढोल-नगाड़े की गूंज के साथ कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से आदिवासी संस्कृति और प्रकृति की अमिट छाप छोड़ रहे हैं। कलाकारों में जबरदस्त उत्साह है। यूं कहें तो पूरी राजधानी इस समय झारखंड की कला-संस्कृति को विश्व पटल पर रख रही है।

प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था

महोत्सव को लेकर जिला प्रशासन की भी तैयारी पूरी है। सुरक्षा के लिए हर मुख्य स्थल पर मजिस्ट्रेट और पुलिस की तैनाती की गई है। यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने में जिला प्रशासन के कर्मी जुटे हुए हैं। आपको बता दे कि विधिवत कार्यक्रम दोपहर 1 बजे से शुरू होगा, लेकिन अभी से ही पूरा झारखंड इस महोत्सव के रंग में रंग गया है।

उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने दिए जरूरी निर्देश

इस महोत्सव की सारी तैयारियां को खुद उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री देख रहे हैं .उन्होंने बताया कि महोत्सव की तैयारी के लिए सभी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। अधिकारी और कर्मचारी पूरी तन्मयता के साथ अपने दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।

विश्व आदिवासी दिवस, झारखंड की वो 5 आदिवासी महिलाएं जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद जल-जंगल-जमीन से लेकर ओलंपिक और FIFA तक में बनाई अम

विश्व आदिवासी दिवस (9 अगस्त) केवल अपनी परंपराओं और जड़ों को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि यह उस शख्सियतों पर भी गर्व करने अवसर है जिसने सीमित साधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद वैश्विक पटल पर अमिट पहचान बनाई. खासकर झारखंड जैसे राज्यों के महिलाओं की, जिसने समाज की रूढ़िवादी सोच को दरकिनार ऐसी पहचान बनाई कि दुनिया तालियां बजाने पर मजबूर हो गई. जिसने तमाम कठिनाईयों में भी हार नहीं मानी और अपनी अलग पहचान बनाई. आज हम झारखंड की उन 5 प्रमुख आदिवासी महिलाओं के बारे में जानेंगे जिनकी उपलब्धियों की गूंज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुनाई दी.

दयामनी बारला

खूंटी और गुमला के जंगलों से उठकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचने वाली दयामनी बारला जल-जंगल-जमीन के संरक्षण की प्रतीक हैं. विश्व प्रसिद्ध स्टील दिग्गज 'आर्सेलरमित्तल' के मेगा प्रोजेक्ट के खिलाफ अपने अहिंसक जन-आंदोलन के बल पर उन्होंने कंपनी को बैकफुट पर ढकेला. उनके इस ऐतिहासिक संघर्ष के लिए अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था कल्चरल सर्वाइवल द्वारा उन्हें ''एलन लुट्ज़ इंडिजिनियस राइट्स पुरस्कार' (2013) से सम्मानित किया गया. उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय जलवायु और मानवाधिकार सम्मेलनों में स्वदेशी अधिकारों की बेबाक तरीके से उठाई.

निक्की प्रधान

खूंटी जिले के एक बेहद छोटे से गांव हेसेल से निकलकर जब निक्की प्रधान 2016 के रियो ओलंपिक और उसके बाद 2020 के टोक्यो ओलंपिक के मैदान पर उतरीं, तो इतिहास के पन्नों में नया अध्याय जुड़ गया. वे ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली झारखंड की पहली महिला आदिवासी एथलीट बनीं. रियो से लेकर टोक्यो ओलंपिक और विश्व कप में उनके प्रदर्शन ने साबित किया कि झारखंड के गांवों की पगडंडियों से निकलने वाली महिलाओं में भी खास प्रतिभा छिपी है.

सलीमा टेटे

सिमडेगा की बेहद साधारण परिवार से आने वाली सलीमा टेटे ने अपनी अद्भुत गति और ड्रिबलिंग से टोक्यो ओलंपिक में पूरी दुनिया का ध्यान खींचा. उनकी इसी वैश्विक पहचान और मैदान पर नेतृत्व क्षमता को देखते हुए एशियाई हॉकी महासंघ (AHF) ने उन्हें "एशिया का एथलीट एंबेसडर" नियुक्त किया. वर्तमान में वे भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तानी करते हुए विश्व मंच पर देश और राज्य का मान बढ़ा रही हैं.

अष्टम उरांव

गुमला के बनासो गांव की अष्टम उरांव ने तब वैश्विक इतिहास रचा जब भारत में आयोजित फीफा अंडर-17 महिला विश्व कप 2022 में वे भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की कप्तान बनीं. दुनिया के सबसे बड़े खेल संगठन 'फीफा' के मंच पर भारत का नेतृत्व करना किसी भी खिलाड़ी के लिए सर्वोच्च सपना होता है. अष्टम की इस उपलब्धि ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल जगत में झारखंडी प्रतिभा का डंका बजाया.

जमुना टुडू

पूर्वी सिंहभूम के जंगलों को लकड़ी माफियाओं के चंगुल से बचाने के लिए 'वन सुरक्षा समितियां' बनाकर हजारों आदिवासी महिलाओं की सशस्त्र सेना खड़ी करने वाली जमुना टुडू को दुनिया 'लेडी टार्जन' के नाम से जानती है. 2019 में पद्मश्री से सम्मानित उनकी इस साहसी सामुदायिक वन-संरक्षण मॉडल की मिसाल अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलनों और वनों के संरक्षण से जुड़े वैश्विक मंचों पर प्रमुखता से दी जाती है.

छात्र आंदोलन: तीसरे दौर की वार्ता के लिए अतिथिशाला पहुंचे छात्र और मंत्रियों की टीम, कुछ ही देर में बातचीत शुरू

रांची: छात्र संगठनों और सरकार के बीच उपजे गतिरोध को सुलझाने के लिए कोशिशें तेज़ हो गई हैं। इसी क्रम में आज तीसरे दौर की वार्ता आयोजित की जा रही है।

प्रशासन की टीम छात्र प्रतिनिधियों को लेकर अतिथिशाला (गेस्ट हाउस) पहुंच चुकी है। दूसरी ओर, सरकार की तरफ से बातचीत के लिए गठित चार मंत्रियों की विशेष टीम भी अतिथिशाला पहुंच गई है।

मुख्य बिंदु:

दो दौर की बैठकें बेनतीजा: इससे पहले दो दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन किसी अंतिम सहमति पर न पहुंच पाने के कारण आज तीसरे दौर की बैठक बुलाई गई है।

कुछ ही देर में शुरू होगी बैठक: छात्र संगठन और सरकारी प्रतिनिधियों के बीच अब से बस कुछ ही देर में यह अहम वार्ता शुरू होने वाली है।

माना जा रहा है कि आज की इस बैठक में दोनों पक्ष किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने की पूरी कोशिश करेंगे ताकि मामले का हल निकाला जा सके।

क्विक समरी ( हाइलाइट्स):

छात्र संगठन और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच तीसरे दौर की वार्ता।

कहां: स्थानीय अतिथिशाला (गेस्ट हाउस)।

कौन शामिल: छात्र प्रतिनिधि और मंत्रिमंडल के चार सदस्यों की टीम।

स्थिति: कुछ ही देर में बातचीत शुरू होगी।

तिरंगा यात्रा राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान का प्रतीक, यात्रा देशभक्ति की जगाती है प्रेरणा : आदित्य साहू


‘हर घर तिरंगा’ अभियान के भाजपा के द्वारा मोरहाबादी मैदान से शहीद अल्बर्ट एक्का चौक तक प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के नेतृत्व में भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। इस दौरान देशभक्ति के उत्साह और हाथों में तिरंगा लिए हजारों कार्यकर्ताओं एवं आमजनों ने इस यात्रा के माध्यम से राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव का संदेश दिया। दिल में राष्ट्रभक्ति और कदमों में देश के प्रति समर्पित इस यात्रा ने राँची की धरती पर राष्ट्रप्रेम का अद्भुत संदेश दिया।

इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘हर घर तिरंगा अभियान" आज राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता और जनभागीदारी का जनआंदोलन बन चुका है। तिरंगा यात्रा राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान का प्रतीक है, यह देशभक्ति की प्रेरणा जगाती है। यह सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सद्भावना का संदेश लेकर घर-घर, गाँव-गाँव, शहर-शहर और हर नागरिक तक पहुंच रही है। उन्होंने सभी से इस गौरवपूर्ण अभियान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि आप सभी अपने घर एवं प्रतिष्ठान पर तिरंगा फहराएं और राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं गौरव के इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में सहभागी बनें।

संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने कहा कि तिरंगा केवल ध्वज नहीं बल्कि हमारा गौरव है। यह तिरंगा यात्रा राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। राष्ट्रभक्ति, एकता और देश के प्रति समर्पण की भावना से ओत-प्रोत यह यात्रा हर भारतीय के हृदय में तिरंगे के गौरव को और अधिक सशक्त करने का संदेश दे रही है।

इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री संजय सेठ, प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद, बालमुकुंद सहाय, प्रदेश महामंत्री गणेश मिश्र, मनोज सिंह, विधायक नवीन जायसवाल, सीपी सिंह, नीरा यादव, प्रदेश मंत्री सुनीता सिंह, पूर्व विधायक जीतू चरण राम, अनंत कुमार ओझा, रांची की मेयर रोशनी खलखो, संजीव विजयवर्गीय, आरती कुजूर, सुबोध सिंह गुड्डू, केके गुप्ता, शोभा यादव, वरुण साहू, सीमा सिंह, जितेंद्र वर्मा सहित कई वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

मंत्री चमरा लिंडा ने भगवान बिरसा मुंडा जतरा को दिखाई हरी झंडी, 10 हजार कलाकार हुए शामिल*

राँची। झारखण्ड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और वीर शहीद भगवान बिरसा मुंडा की अमर विरासत को जीवंत रखने वाले एक भव्य आयोजन का आज शुभारंभ हुआ। अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग झारखण्ड सरकार के माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा ने भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क (बिरसा मुंडा कारागृह) जेल मोड़ से भगवान बिरसा मुंडा जतरा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस दौरान प्रधान सचिव, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग श्री कृपानन्द झा, आदिवासी कल्याण आयुक्त, श्री कुलदीप चौधरी, विशेष सचिव सह निदेशक सूचना जन संपर्क विभाग, श्री राजीव लोचन पदाधिकारी, परियोजना निदेशक ITDA रांची, श्रीमती मनीषा तिर्की, जिला जन संपर्क पदाधिकारी रांची, श्रीमती उर्वशी पांडेय एवं सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

यह ऐतिहासिक जतरा भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क (बिरसा मुंडा कारागृह) जेल मोड़ से प्रारंभ होकर करम टोली चौक होते हुए एसएसपी आवास से होते हुए मोरहाबादी पहुँचेगी। पूरे मार्ग में जनजातीय संस्कृति की अनुपम झलक देखने को मिलेगी।

जतरा में झारखण्ड के सभी जिलों से लगभग 10 हजार कलाकार शामिल हुए हैं। ये कलाकार राज्य की विभिन्न जनजातियों—संथाल, मुंडा, हो, उरांव, खड़िया, खरवार और अन्य—से संबंधित हैं। उन्होंने अपने-अपने पारंपरिक स्थानीय वेश-भूषा, आभूषण और वाद्ययंत्रों (ढोल, नगाड़ा, मांदर, बाँसुरी आदि) से सुसज्जित होकर इस भव्य आयोजन में भाग लिया है। जतरा में कुल 6 आकर्षक झाँकियों का भी प्रदर्शन किया गया, जिनमें भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और आदिवासी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।

यह जतरा केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भगवान बिरसा मुंडा के त्याग, बलिदान और आदिवासी अस्मिता के संरक्षण का प्रतीक है। इसमें शामिल कलाकारों की विशाल संख्या और विविध जनजातीय प्रतिनिधित्व झारखण्ड की सांस्कृतिक एकता और गौरव को प्रदर्शित करता है।

माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा ने इस अवसर पर सभी कलाकारों, आयोजकों और प्रतिभागियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन आदिवासी युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और झारखण्ड की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। मंत्री महोदय ने जतरा की सफलता की कामना करते हुए सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया।

इस भव्य आयोजन में बड़ी संख्या में आम नागरिक, संस्कृति प्रेमी और अधिकारीगण भी उपस्थित रहे, जिन्होंने कलाकारों के उत्साहपूर्ण प्रदर्शन की भरपूर सराहना की।