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PVUNL की सामाजिक पहल को मिला सम्मान: विधायक रोशन लाल चौधरी ने शहीद निर्मल महतो स्मारक परिसर के सौंदर्यीकरण कार्य का किया लोकार्पण

पतरातू, 08 अगस्त 2026:

पीटीपीएस पोस्ट ऑफिस के समीप स्थित शहीद निर्मल महतो स्मारक परिसर में आज झारखंड के वीर सपूत एवं अमर शहीद निर्मल महतो जी का 39वां शहादत दिवस श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (PVUNL) द्वारा सामुदायिक विकास कार्य के अंतर्गत शहीद निर्मल महतो स्मारक परिसर के सौंदर्यीकरण एवं जीर्णोद्धार कार्य का विधिवत लोकार्पण किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री रोशन लाल चौधरी उपस्थित रहे। इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि श्री राधेश्याम अग्रवाल, जिला परिषद सदस्य सह सांसद प्रतिनिधि श्री राजाराम प्रजापति, पीवीयूएनएल के सीजीएम (O&M) श्री मनीष खेतरपाल, जीएम (Project Construction) श्री बी.डी. दास, HOHR श्री जियाउर रहमान, AGM (Civil Construction) श्री शिरीष कुमार बरकुल, DGM (Civil Construction) श्री अमित रंजन सहित पीवीयूएनएल के अन्य पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

लोकार्पण के अवसर पर मुख्य अतिथि विधायक श्री रोशन लाल चौधरी सहित उपस्थित अतिथियों ने स्मारक परिसर में वृक्षारोपण भी किया। विद्यालय की छात्राओं द्वारा सभी अतिथियों का चंदन लगाकर एवं पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों एवं लोगों ने शहीद निर्मल महतो जी के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके विचारों एवं आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर विधायक श्री रोशन लाल चौधरी ने कहा कि अमर शहीद निर्मल महतो जी झारखंड की अस्मिता, अधिकार और सम्मान के लिए संघर्ष करने वाले महान जननेता थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन झारखंड एवं समाज के हितों के लिए समर्पित कर दिया। उनका संघर्ष, त्याग और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

उन्होंने कहा कि शहीद निर्मल महतो जी के सपनों का झारखंड बनाने के लिए हम सभी को उनके विचारों एवं आदर्शों को आत्मसात करते हुए समाजहित में कार्य करना होगा। उनके बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

पीवीयूएनएल द्वारा सामुदायिक विकास के तहत किए गए इस सौंदर्यीकरण कार्य का उद्देश्य स्मारक परिसर को सुव्यवस्थित, आकर्षक एवं जनोपयोगी स्वरूप प्रदान करना तथा क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं सामाजिक विरासत के संरक्षण में योगदान देना है। इस पहल के माध्यम से पीवीयूएनएल ने स्थानीय समुदाय के साथ अपने सतत जुड़ाव एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।

रांची के मोरहाबादी स्थित गेस्ट हाउस में झारखंड सरकार और आंदोलनरत छात्रों के दूसरे गुट के बीच दूसरे दिन की वार्ता सकारात्मक और सफल रही।

Ranchi: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्रों की मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। रांची के मोरहाबादी स्थित गेस्ट हाउस में आज लगातार दूसरे दिन राज्य सरकार और आंदोलनरत छात्रों के देवेंद्र नाथ महतो गुट के बीच अहम बैठक हुई। दोनों ही पक्षों ने इस वार्ता को बेहद सकारात्मक और सफल बताया है।

सरकार का कहना है कि छात्रों से हर सुझाव लेने के लिए एक विशेष मेल आईडी भी जारी की गई है।

झारखंड सरकार और आंदोलनरत छात्रों के बीच गतिरोध दूर करने की दिशा में आज एक और बड़ा कदम उठाया गया। रांची के मोरहाबादी गेस्ट हाउस में सरकार के प्रतिनिधिमंडल और छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले छात्र गुट के बीच दूसरे दिन की वार्ता संपन्न हुई.

सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई इस बैठक के बाद राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार और दीपिका पांडेय सिंह ने मीडिया से बात की। मंत्रियों ने बताया कि सरकार छात्रों की मांगों को लेकर बेहद गंभीर है। छात्रों के सुझाव सीधे सरकार तक पहुँचाने के लिए एक विशेष मेल आईडी जारी की गई है, जिस पर छात्र संगठन या कोई भी स्टेकहोल्डर अपने विचार भेज सकते हैं। सरकार ने साफ किया है कि अन्य छात्र संगठनों से वार्ता के बाद पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी।

उधर सरकार के इस रुख से आंदोलनरत छात्र भी संतुष्ट नज़र आए। छात्र प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता को सकारात्मक बताते हुए उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेगी।

लगातार दूसरे दिन हुई इस बैठक और बातचीत के इस दौर से साफ है कि सरकार छात्रों के मुद्दों को जल्द से जल्द सुलझाना चाहती है। अब देखना होगा कि अन्य संगठनों से वार्ता और जारी की गई ईमेल आईडी पर मिलने वाले सुझावों के बाद मुख्यमंत्री इस पर क्या अंतिम फैसला लेते हैं।

बाबूलाल मरांडी ने सीआईडी जांच एवं एडीजी मनोज कौशिक की भूमिका पर उठाया गंभीर सवाल

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया के एक्स हैंडल ताबड़तोड़ दो पोस्ट कर सीआईडी जांच की कार्यप्रणाली एवं इसके एडीजी मनोज कौशिक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार पर करारा प्रहार किया है।

श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और सीजीएल (CGL) परीक्षा घोटालों की जांच कर रही सीआईडी (CID) की सत्यनिष्ठा और कार्यप्रणाली पर अब आम जनता का रत्ती भर भी विश्वास नहीं रह गया है। यह अविश्वास निराधार नहीं है। जिस सीआईडी ने सीजीएल परीक्षा धोखाधड़ी में दुर्भावनापूर्ण तरीके से जांच की प्रकृति ही बदल दी और अपनी नाकामी व असली दोषियों को छिपाने के लिए सारा दोष नेपाल में कोचिंग लेने वाले छात्रों पर मढ़ दिया, उससे जेपीएससी घोटाले में न्याय की उम्मीद करना पूरी तरह बेमानी है। वास्तविकता तो यह थी कि सीजीएल के अधिकांश प्रश्न पिछले प्रश्नपत्रों से हूबहू उठाए गए थे और चयनित 'खास' उम्मीदवारों को पहले से ही उन सवालों की कोचिंग दे दी गई थी, लेकिन सीआईडी ने ट्रायल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक को गुमराह किया और अहम साक्ष्य छिपा लिए।

उन्होंने कहा कि इस पूरी साजिश के केंद्र में सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक हैं, जिनका खुद हजारीबाग में कोयले और बालू की तस्करी से अवैध उगाही का दागदार इतिहास रहा है। ऐसे दागी अधिकारी को सरकार ने मेहरबानी करते हुए तीन-तीन अहम पदों से नवाजा है, जबकि कई योग्य अधिकारी बिना काम के बैठे हैं। यह साफ दर्शाता है कि मनोज कौशिक के नेतृत्व में महत्वपूर्ण आपराधिक मामलों के अनुभव से विहीन अफसरों वाली सीआईडी महज सरकार की कठपुतली बनकर रह गई है।

उन्होंने कहा कि इसी कठपुतली एजेंसी ने एफआईआर दर्ज करने से पहले आरोपों की कोई जांच कराए बिना ही जानबूझकर एक बेहद कमजोर एफआईआर दर्ज की है, ताकि सत्ताधारी दल के राजनेताओं और इस महाघोटाले के असली मास्टरमाइंड्स को सुरक्षित निकाला जा सके।

उन्होंने कहा कि जेपीएससी चेयरमैन से चार-चार बार पूछताछ होने के बावजूद आज तक उनकी गिरफ्तारी न होना और परीक्षा आयोजित करने वाली निजी एजेंसी पर सारा ठीकरा फोड़ने का प्रयास यह साबित करता है कि सीआईडी जांच और तलाशी की आड़ में असल में महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट करने और सफेदपोश चेहरों को बचाने का घिनौना खेल खेल रही है। एक पेशेवर जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली के बिल्कुल उलट, सीआईडी जानबूझकर जांच के परिणामों को नियमित रूप से मीडिया में लीक कर रही है। इसका एकमात्र उद्देश्य जनता का ध्यान भटकाकर और भ्रम फैलाकर अपने आकाओं को बचाने के लिए एक झूठा नैरेटिव सेट करना है, बिल्कुल वैसे ही जैसे सीजीएल मामले में सिर्फ नेपाल जाने वाले छात्रों को ही दोषी ठहराने की साजिश रची गई थी।

श्री मरांडी ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि यह महज कोई साधारण पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा सुनियोजित महाघोटाला है जिसमें सत्ता के शीर्ष पर बैठे राजनेताओं के इशारे पर पैसों के बदले पूरी परीक्षा प्रक्रिया को ही हाईजैक कर लिया गया, ताकि अयोग्य उम्मीदवारों को सफल घोषित किया जा सके। सबसे हैरानी और सीआईडी की नीयत पर शक पैदा करने वाली बात तो यह है कि जब यह तथ्य सार्वजनिक डोमेन में आ चुका है कि परीक्षा कराने वाली दागी एजेंसी के पीछे का मुख्य व्यक्ति अभय कुमार तिवारी खुद धोखाधड़ी के जरिए कई अन्य परीक्षाओं में नौकरियां पा चुका है, तो सीआईडी ने उन पुरानी परीक्षाओं के हेरफेर के मामले में अब तक कोई नई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की? सीआईडी जानबूझकर केवल छोटे उम्मीदवारों और निजी एजेंसियों को मोहरा बनाकर कार्रवाई का दिखावा कर रही है, जबकि सत्ता के गलियारों में बैठे असली गुनाहगारों को छुआ तक नहीं जा रहा।

उन्होंने कहा कि सीआईडी का पिछला इतिहास हमेशा से सच को दबाने और समझौता करने वाला रहा है। ऐसे में राज्य के हर युवा और नागरिक का अब सरकार से सीधा सवाल है कि अगर उसके हाथ वाकई साफ हैं और उसे किसी बात का डर नहीं है, तो वह इस पूरे महाघोटाले की निष्पक्ष जांच सीबीआई (CBI) को क्यों नहीं सौंप देती?

वहीं अपने दूसरे पोस्ट में श्री मरांडी ने कहा है कि झारखंड में आज सिपाही से लेकर एसपी तक हर कोई जानता है कि राज्य में पुलिस का असली नियंत्रण डीजीपी के पास नहीं, बल्कि मनोज कौशिक के पास है, जिनका अतीत कोयले के काले कारोबार और भ्रष्टाचार से जुड़ा रहा है। 2013 से 2015 के बीच हजारीबाग एसपी रहते हुए उन पर बड़े पैमाने पर कोयला चोरी में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसका भंडाफोड़ तत्कालीन ईमानदार और कड़क आईजी मुरारीलाल मीणा ने किया था।

इसके बाद उन पर दूसरी गाज तब गिरी जब एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) में भी उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतें दर्ज हुईं। शुरुआत में नीरज सिन्हा जैसे विवादास्पद अधिकारी (जिन्होंने खुद जेएसएससी घोटाले में फंसने के डर से हाल ही में इस्तीफा दे दिया) ने जांच की दिशा भटकाकर मामले को गोल-गोल घुमाने और रफा-दफा करने की पूरी कोशिश की। लेकिन जब वही ईमानदार अफसर मुरारीलाल मीणा एसीबी के चीफ बनकर आए, तो रुकी हुई जांच सही दिशा में आगे बढ़ी।

यह दूसरी बार था जब मनोज कौशिक कानूनी शिकंजे में फंसे; एसीबी की निष्पक्ष जांच में उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप पूरी तरह से सही पाए गए। इसके बाद एसीबी ने इन आरोपों की पुष्टि करते हुए, उनके खिलाफ आगे की दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने की औपचारिक अनुमति प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार को सीधे पत्र लिखा। इन दो-दो ठोस आधिकारिक जांच रिपोर्टों और दागी कारनामों के बावजूद, आज आलम यह है कि पुलिस महकमे के सारे कामकाज और 'धंधे' का निर्देश अधिकारी डीजीपी से नहीं, बल्कि मनोज कौशिक से लेते हैं।

श्री मरांडी ने कहा कि सत्ता से लेकर विपक्ष तक सब जानते हैं कि पुलिस के नियंत्रण में कोयला, बालू और पत्थर चोरी के कारोबार का पूरा कंट्रोल किसके हाथ में है और कौन इसे संचालित और मैनेज करवा रहा है। सरकार जानबूझकर सीआईडी और एसीबी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में ऐसे ही दागदार अफसरों को चुनकर बैठाती है ताकि वे कानून के प्रति नहीं, बल्कि राजनीतिक आकाओं और उनके दलालों के नौकर बनकर काम करें। इसका जीता-जागता प्रमाण तब मिला जब सीआईडी का प्रभार संभालते ही मनोज कौशिक ने जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) जांच की दिशा भटका दी और सत्ता के दलालों को बचाने के लिए हाईकोर्ट में सीआईडी की तरफ से भ्रामक शपथ पत्र दिलवाकर पूरी जांच की हवा निकाल दी। सत्ता के मनमाफिक ये सारे गैर-कानूनी काम करके वह सरकार के सबसे बड़े चहेते बन गए हैं। मनोज कौशिक के इसी काले इतिहास, उन पर हुई दो-दो आधिकारिक जांचों और वर्तमान की सत्ता-परस्ती को देखते हुए यह साफ हो चुका है कि झारखंड में अब किसी को भी सीआईडी जांच पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं रह गया है।

बड़कागांव: पुलिस से भागने के क्रम में फायरिंग, गैंगस्टर प्रिंस खान के गुर्गे अंकित पांडेय के पैर में लगी गोली*

हजारीबाग जिले के बड़कागांव थाना क्षेत्र के ग्राम पिपरा डीह स्थित बंद पड़े गैस प्लांट के पास गैंगस्टर प्रिंस खान के कथित गुर्गे अंकित कुमार पांडेय ने बड़कागांव पुलिस को धक्का देकर भागने के क्रम में पुलिस पर फायरिंग की. जवाबी कार्रवाई में बड़कागांव पुलिस ने भाग रहे अंकित कुमार पांडेय के पैर में गोली चलाई. जिससे वह गिरकर बुरी तरह घायल हो गया. यह घटना शुक्रवार की देर रात की है.उक्त घटना की पुष्टी थाना प्रभारी दीपक कुमार सिंह ने की है. घायल अभियुक्त अंकित कुमार पांडेय को बड़कागांव अस्पताल में प्राथमिक इलाज कर बेहतर इलाज के लिए उसे हजारीबाग रेफर कर दिया गया.

पुलिस पूछताछ में प्रिंस खान गिरोह से जुड़ाव का खुलासा

थाना प्रभारी दीपक कुमार सिंह ने बताया कि 25 जुलाई को 13 माइल के पास ट्रांसपोर्ट रोड में दो हाईवा गाड़ी पर गैंगस्टर प्रिंस खान के गुर्गों द्वारा गोली कांड किया गया था, जिस संबंध में बड़कागांव थाना कांड संख्या-133/26 दर्ज किया गया था. इस कांड में संदिग्ध पिपराडीह निवासी अरुण कुमार पांडेय के पुत्र अंकित कुमार पांडेय को पूछताछ के लिए बड़कागांव थाना लाया गया, पूछताछ के क्रम में उसके मोबाइल फोन का जांच किया गया तो, पाया गया कि उसके द्वारा अपने मोबाइल फोन के टेली ग्राम एप के माध्यम से गैंगस्टर प्रिंस खान एवं प्रिंस खान गिरोह (के एस एस .) के सदस्यों के साथ चैट किया गया है. अग्रतर पूछताछ के क्रम में उनके द्वारा अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि गैंगस्टर प्रिंस खान के निर्देशानुसार बड़कागांव थाना क्षेत्र के 13 माइल स्थित ट्रांसपोर्ट रोड में दिनांक 25 जुलाई को रात्रि में अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर गोली बारी की घटना को अंजाम दिया गया था .एवं प्रिंस खान (के एस एस ) संगठन के नाम से पर्चा छोड़ने का काम किया गया था.साथ ही इनके द्वारा अपने अपराध स्वीकारोक्ति बयान में बताए कि पिपराडीह गांव के नजदीक स्थित बन्द पड़े गैस प्लांट में घटना कारित हथियार एवं बम को छुपाकर रखे हैं, साथ चलने पर बरामद करा सकते है.

पुलिस को धक्का देकर भागने क्रम में अपराधी ने पुलिस पर की फायरिंग

थाना प्रभारी दीपक कुमार सिंह ने यह भी बताया कि अभियुक्त के निशानदेही पर शुक्रवार की देर रात्रि ग्राम पिपराडीह के नजदीक स्थित बन्द पड़े गैस प्लांट के पास हथियार एवं बम के बरामदगी के दौरान अभियुक्त अंकित पाण्डेय द्वारा पुलिस बल के जवान को अचानक धक्का देते बरामद पिस्तौल से पुलिस बल की और लक्षित करते हुए फायर कर दिया गया और भागने की कोशिश करने लगा. पुलिस द्वारा अपना बचाव करते हुए आत्मरक्षार्थ फायर किया गया. जिसमें अभियुक्त अंकित कुमार पांडेय के पैर में गोली लग गई, तत्पश्चात वो वहीं गिर गया, जिसे पुलिस बल के द्वारा पकड़ लिया गया और ईलाज हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बड़कागांव भेजा गया, जिसे वंहा से बेहतर ईलाज हेतु सदर अस्पताल, हजारीबाग रेफर किया गया.

घटनास्थल में बरामद सामग्रियां

घटनास्थल से घटना में प्रयुक्त एक देसी पिस्तौल, 7.62 एम एम का एक खोखा, 7.62 एम एम का एक मिस फायर गोली , 7.62 एम एम का एक जिंदा गोली, एक देशी बॉम तथा चार हस्तलिखित धमकी भरा पर्चा बरामद किया गया.

बिग न्यूज:JPSC-JSSC विवाद पर बड़ी बैठक ,देवेन्द्रनाथ महतो गुट और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हो रही है बात चित

रांची: झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों और सरकार के बीच शनिवार को एक और दौर की मह्त्वपूर्ण वार्ता शुरू होने जा रही है।

JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच का 8-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल कड़े सुरक्षा घेरे में स्टेट गेस्ट हाउस पहुंच चुका है.शुक्रवार की वार्ता बेनतीजा रहने के बाद, आज की इस बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में JLKM नेता देवेन्द्रनाथ महतो पिछले 6 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर हैं, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ गया .

शुक्रवार को सरकार और छात्रों के दूसरे गुट के बीच हुई वार्ता से कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया था। हालांकि, दोनों ही पक्ष बातचीत के जरिए रास्ता निकालने के पक्ष में हैं।

देवेन्द्रनाथ महतो की बिगड़ती सेहत के बीच, आज की यह बैठक बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि क्या आज की वार्ता से अभ्यर्थियों की मांगों पर कोई ठोस सहमति बन पाती है या गतिरोध यूं ही बरकरार रहेगा।

नोट: इस खबर से जुड़ी पल-पल की अपडेट के लिए बने रहिए streetbuzz.co.in साथ।

77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन: जल, जंगल, जमीन के संरक्षण से ही बनेगा समृद्ध झारखंड

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कल्पना सोरेन आज खेलगांव, रांची स्थित हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित 77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव-2026 में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों तथा वृक्षारोपण के महत्व पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए।

मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन एवं विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों के बीच वृक्षारोपण पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन ही सतत भविष्य की कुंजी

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन विश्व की सबसे गंभीर और चिंताजनक चुनौतियों में से एक बन चुका है। इसके प्रभाव अब केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, जल संसाधनों, जैव विविधता और समग्र विकास प्रक्रिया पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों के साथ लगातार हो रहे हस्तक्षेप, अंधाधुंध दोहन तथा अनियोजित विकास गतिविधियों के कारण जलवायु में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगीकरण, खनन गतिविधियों, शहरीकरण और विकास से जुड़े विभिन्न कार्यों का पर्यावरण पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में विकास की गति को बनाए रखते हुए पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के बीच संतुलन स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक होगा, जब वह प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए आगे बढ़े।

उन्होंने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ से बचना होगा तथा जल, जंगल और जमीन जैसे अमूल्य संसाधनों का विवेकपूर्ण एवं जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना होगा। आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण प्रदान करने के लिए आज से ही ठोस कदम उठाने होंगे। वृक्षारोपण, वन संरक्षण, जल संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक और सामाजिक दायित्व है। जब तक आमजन इस दिशा में सक्रिय भागीदारी नहीं निभाएंगे, तब तक जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती का प्रभावी समाधान संभव नहीं होगा। उन्होंने सभी लोगों से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने तथा हरित एवं समृद्ध भविष्य के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

हर नागरिक एक पौधा लगाए और उसके संरक्षण का संकल्प ले

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्यवासियों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसके संरक्षण एवं देखभाल का संकल्प भी ले। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पौधों को सुरक्षित रखना, उनका नियमित संरक्षण करना और उन्हें विकसित कर वृक्ष के रूप में स्थापित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जनभागीदारी सबसे प्रभावी माध्यम है। यदि राज्य का प्रत्येक नागरिक एक पौधा लगाकर उसकी जिम्मेदारी निभाए, तो आने वाले समय में झारखंड हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक मिसाल बन सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में विभिन्न अभियान के तहत लगाए गए पौधों की स्थिति का वे स्वयं जायजा लेंगे। साथ ही, वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं और समुदायों को प्रोत्साहित करने के लिए सम्मानित भी किया जाएगा।

जलवायु परिवर्तन का असर मानव जीवन के साथ पशु-पक्षियों और वन्यजीवों पर भी

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के स्वरूप में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। बीते कुछ वर्षों में प्राकृतिक घटनाओं की प्रकृति और तीव्रता में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है, जो पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन चुका है। उन्होंने कहा कि अनियमित वर्षा, बादल फटने की घटनाएं, अत्यधिक वर्षा, भीषण गर्मी, लंबे समय तक सूखे की स्थिति, बिजली गिरने तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इन बदलते मौसमीय हालात का सीधा प्रभाव मानव जीवन, कृषि, जल संसाधनों और आजीविका पर पड़ रहा है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों को इसका गंभीर प्रभाव झेलना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण जन-धन की हानि के साथ-साथ फसलों, पशुधन और आधारभूत संरचनाओं को भी नुकसान पहुंचता है, जिससे लोगों के जीवन और आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि पशु-पक्षियों, वन्यजीवों और अन्य जीव-जंतुओं को भी इसका भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्राकृतिक आवासों में बदलाव, जल स्रोतों का प्रभावित होना तथा पर्यावरणीय असंतुलन जैव विविधता के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों से निपटने के लिए पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है।

पर्यावरण, मानव जीवन और वन्यजीवों के लिए उपयोगी वृक्षों के रोपण को मिलेगी प्राथमिकता

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य में वृक्षारोपण अभियानों के तहत ऐसे वृक्षों के रोपण को प्राथमिकता दी जाएगी, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मानव जीवन, वन्यजीवों और जैव विविधता के लिए भी उपयोगी हों। उन्होंने कहा कि केवल वृक्षों की संख्या बढ़ाना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि ऐसी प्रजातियों का चयन करना आवश्यक है जो स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करें तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, जलवायु, मिट्टी की प्रकृति तथा क्षेत्र की जैव विविधता को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाएगा। इसके तहत फलदार, छायादार, औषधीय एवं वन्यजीवों के लिए अनुकूल वृक्ष प्रजातियों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आम लोगों, पशु-पक्षियों और अन्य जीवों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए स्थानीय और पारंपरिक वृक्ष प्रजातियों का संरक्षण एवं संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल हरित आवरण में वृद्धि होगी, बल्कि भूजल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता, स्वच्छ वायु और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रकृति के अनुकूल और दीर्घकालिक पर्यावरणीय लाभ देने वाली वृक्षारोपण योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ा रही है, ताकि झारखंड को अधिक हरित, समृद्ध और पर्यावरण-संतुलित राज्य बनाया जा सके।

अंत में असम सहित देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ की स्थिति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक असंतुलन का प्रभाव केवल मानव जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका गहरा असर वन्यजीवों, जैव विविधता और संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र पर भी पड़ रहा है। बाढ़ जैसी आपदाओं के कारण वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों तथा संरक्षित वन क्षेत्रों को व्यापक क्षति पहुंचती है। इससे वहां रहने वाले पशु-पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के प्राकृतिक आवास प्रभावित होते हैं तथा उनके जीवन पर गंभीर संकट उत्पन्न हो जाता है। कई बार वन्यजीवों को भोजन और सुरक्षित आश्रय की तलाश में अपने मूल आवास छोड़ने पड़ते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा और अस्तित्व दोनों प्रभावित होते हैं।

उन्होंने कहा कि मानव गतिविधियों के विस्तार तथा जंगलों के लगातार घटते क्षेत्रफल के कारण वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास सिकुड़ता जा रहा है। इसका परिणाम यह हो रहा है कि जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने को विवश हो रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी वृद्धि हो रही है। यह स्थिति पर्यावरणीय असंतुलन का स्पष्ट संकेत है और हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव जीवन की सभी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति का आधार पर्यावरण ही है। स्वच्छ जल, शुद्ध वायु, उपजाऊ भूमि और प्राकृतिक संसाधनों के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम या अभियान के रूप में नहीं, बल्कि अपनी जीवनशैली और सामाजिक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित, स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण उपलब्ध कराना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए वृक्षारोपण, जल संरक्षण, जैव विविधता के संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत एवं विवेकपूर्ण उपयोग को जनभागीदारी के साथ बढ़ावा देना होगा। तभी हम पर्यावरणीय चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करते हुए एक सुरक्षित और हरित भविष्य का निर्माण कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन एवं सामुदायिक वन प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले राज्य के विभिन्न वन प्रमंडलों के 20 वन मित्रों एवं समिति प्रतिनिधियों को किया सम्मानित

77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव-2026 के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने वन संरक्षण, संवर्धन, जैव विविधता संरक्षण तथा सामुदायिक वन प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले राज्य के विभिन्न वन प्रमंडलों से चयनित 20 वन मित्रों एवं समिति प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने सम्मानित व्यक्तियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण और हरित झारखंड के निर्माण में इनकी भूमिका प्रेरणादायी है।

सम्मानित होने वालों में शामिल हैं

श्रीमती फुलवीन बेरनादेत कुजूर (रांची वन प्रमंडल), श्री टिकैत चन्द्र प्रधान (घाटशिला वन प्रमंडल), श्री बुधदेव चालक (दुमका वन प्रमंडल), श्री पौथीराम हांसदा (पोड़ाहाट वन प्रमंडल, चाईबासा), श्री रमेश नायक (पोड़ाहाट वन प्रमंडल, चाईबासा), श्री निरोज टेटे (गुमला वन प्रमंडल), श्री तारकेश्वर मुंडा (रांची वन प्रमंडल), श्रीमती सोनी देवी (झारखंड जैव-विविधता परिषद, रांची)

श्री लक्ष्मण मुर्मू (साहेबगंज वन प्रमंडल)

श्री राजीव रंजन प्रसाद (साहेबगंज वन प्रमंडल), मो० जैनुल अंसारी (सिमडेगा वन प्रमंडल), श्री कृष्ण सिंह (कोडरमा वन प्रमंडल), श्री मनोज राणा (गिरिडीह पूर्वी वन प्रमंडल), श्री मिथिलेश कुमार (मेदिनीनगर वन प्रमंडल), श्री सुरेन्द्र पासवान (मेदिनीनगर वन प्रमंडल)

श्री मुनेश्वर महतो (हजारीबाग पूर्वी वन प्रमंडल), श्री खुशीद आलम (चतरा उत्तरी वन प्रमंडल), श्री गुडल सिंह (पलामू व्याघ्र परियोजना, उत्तरी प्रमंडल), श्री राजु कोरवा (पलामू व्याघ्र परियोजना, उत्तरी प्रमंडल), श्री नासिर खान (पलामू व्याघ्र परियोजना, उत्तरी प्रमंडल)

इस अवसर पर विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन, सचिव श्री अबू बकर सिद्दीकी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री संजीव कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री विश्वनाथ शाह, श्री ए. टी. मिश्रा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री वेंकटेश लू, श्री जब्बेर सिंह, मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री एस. आर. नेटेशा सहित वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अन्य पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

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#Team PRD(CMO)

आदिवासी महोत्सव 2026: रांची में फिल्म फेस्टिवल और SRFTI कोलकाता द्वारा मास्टर क्लास का आयोजन

रांची:- झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (JFFDCL) द्वारा आगामी आदिवासी महोत्सव-2026 के तहत 9 अगस्त को मोराबादी मैदान, रांची में विशेष फिल्म फेस्टिवल एवं मास्टर क्लास का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर राज्य के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को फिल्म निर्माण, दृश्य कथानक (विजुअल स्टोरीटेलिंग) और मीडिया उद्योग की बारीकियों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।

इस संबंध में झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के कुलपति को पत्र भेजकर कार्यक्रम में सहभागिता का आमंत्रण दिया है। साथ ही विश्वविद्यालय से जनसंचार, पत्रकारिता, मीडिया स्टडीज, फिल्म स्टडीज, परफॉर्मिंग आर्ट्स, विजुअल कम्युनिकेशन एवं संबंधित विषयों के कम से कम 50 विद्यार्थियों को नामित कर कार्यक्रम में भेजने का अनुरोध किया गया है।

फिल्म फेस्टिवल के दौरान आदिवासी जीवन, स्वदेशी संस्कृति, सामाजिक सरोकारों और उत्कृष्ट सिनेमा पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं "फिल्म मेकिंग एंड करियर ऑपर्च्युनिटीज इन द फिल्म इंडस्ट्री" विषय पर विशेष मास्टर क्लास आयोजित होगी। इसका संचालन सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI), कोलकाता के विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक करेंगे।

मास्टर क्लास में प्रतिभागियों को फिल्म निर्माण की मूलभूत तकनीक, विजुअल स्टोरीटेलिंग, पटकथा लेखन, निर्देशन, सिनेमैटोग्राफी, संपादन, साउंड डिजाइन तथा फिल्म, टेलीविजन, ओटीटी और डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में उभरते करियर अवसरों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। साथ ही सिनेमा एवं मीडिया के क्षेत्र में उच्च शिक्षा और रोजगार की संभावनाओं पर भी विशेषज्ञ मार्गदर्शन देंगे।

झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन का मानना है कि यह कार्यक्रम युवाओं को फिल्म एवं मीडिया उद्योग की व्यावहारिक समझ विकसित करने के साथ-साथ रचनात्मक अभिव्यक्ति के नए अवसर प्रदान करेगा। आदिवासी महोत्सव के दौरान आयोजित यह पहल राज्य के युवा मीडिया एवं फिल्म विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण सीखने और करियर निर्माण का मंच साबित होगी। ज्ञात हो कि विगत 22 जुलाई को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में झारखंड राज्य फिल्म विकास निगम एवं सत्यजीत रे फिल्म इंस्टीट्यूट कोलकाता के बीच स्थानीय सूचना भवन में फिल्म इंस्टीट्यूट की स्थापना को लेकर एमओयू (MoU) हस्ताक्षरित कि

या गया था।

रांची में बैठे प्रदर्शनकारियों से राहुल गांधी ने की बात, मांगों पर सीएम हेमंत से बात करने का दिलाया भरोसा

#jharkhand

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ यह प्रदर्शन हो रहा है। आज 14वें दिन भी स्टूडेंट्स आंदोलन कर रहे हैं। इस बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से फोन पर बात की है और हर संभव मदद का भरोसा दिया है। बता दें कि कांग्रेस राज्य में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) नीत गठबंधन का एक घटक दल है।

छात्रों को दिया हर संभव मदद का भरोसा

छात्र नेताओं ने दावा किया कि गुरुवार देर शाम राहुल गांदी से फोन पर बातचीत हुई। धरना दे रहे छात्र नेताओं की राहुल गांधी से बातचीत रांची महानगर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा के मोबाइल फोन के माध्यम से कराई गई। बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों से अपनी मांगों का विवरण भेजने को कहा और उन्हें आश्वासन दिया कि वह उनकी समस्याओं को लेकर राज्य सरकार से बात करेंगे। वो इस मामले को लेकर सीएम हेमंत सोरेन से भी बात कर सकते हैं।

मांगों की सूची व्हाट्सएप पर मंगाई

ये बातचीत लगभग 10 मिनट तक चली। राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से कहा कि वे अपनी सभी मांगों का विस्तृत ज्ञापन उन्हें व्हाट्सएप पर भेजें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह पूरे मामले पर झारखंड सरकार से बात करेंगे और छात्रों की मांगों के समाधान का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए और उनके साथ न्याय होना चाहिए।

क्या है छात्रों की मांगें?

प्रदर्शनकारी 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने और भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि यह जांच या तो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए या फिर राज्य के बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक पैनल से कराई जाए। उन्होंने जेपीएससी और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में व्यापक सुधारों पर भी जोर दिया।

वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित

इधर, प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने गतिरोध को समाप्त करने के लिए सरकार के साथ बातचीत करने के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित किया। प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र प्रतिनिधियों के अलावा दो पत्रकार और एक अधिवक्ता को शामिल किया गया। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि सरकार के समक्ष केवल छात्र प्रतिनिधि ही अपनी मांगें रखेंगे। पत्रकार और अधिवक्ता केवल अभिभावक एवं मार्गदर्शक की भूमिका में मौजूद रहेंगे।

जेपीएससी-जेएससीसी परीक्षा विवाद पर डटे आंदोलकारी छात्र, सीएम हेमंत से वार्ता का इंतजार

#jpscjsccexamcontroversystudentstoholdtalkswith_government

झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्र आंदोलन अब एक व्यापक अभियान का रूप ले चुका है। छात्रों का आरोप है कि राज्य में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता लगातार सवालों के घेरे में रही है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि सिर्फ 14वीं जेपीएससी ही नहीं बल्कि पिछले सात वर्षों में जेपीएससी और जेएसएससी की कई भर्ती परीक्षाएं विवादों में रही हैं। इसलिए वे केवल एक परीक्षा की नहीं बल्कि वर्ष 2019 से अब तक आयोजित सभी विवादित भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

आंदोलनकारी छात्रों का प्रतिनिधिमंडल तैयार

जयपाल सिंह स्टेडियम में जारी छात्रों आंदोलन के बीच बातचीत का रास्ता भी खुल गया है। सरकार के साथ होने वाली बातचीत को लेकर आंदोलनकारी छात्रों ने प्रतिनिधिमंडल की सूची जारी कर दी है। इस प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्व में राज्य सरकार के साथ वार्ता होगी। प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र प्रतिनिधियों के अलावा दो पत्रकार और एक वकील को शामिल किया गया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वार्ता के दौरान सभी मांगे और तथ्य केवल छात्र प्रतिनिधि ही सरकार के सामने रखेंगे।

वार्ता के प्रस्ताव के बाद भी नहीं आया बुलावा

सरकार की ओर से वार्ता का प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद अब तक छात्र प्रतिनिधियों को औपचारिक रूप से बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया है। इससे आंदोलनरत छात्रों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार के साथ होने वाली वार्ता सकारात्मक नहीं रही, तो 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। आंदोलन अब तक पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। प्रदर्शन स्थल पर राष्ट्रभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्र अपनी बात रख रहे हैं।

छात्रों की प्रमुख मांगें हैं

-वर्ष 2019 से अब तक JPSC और JSSC की सभी विवादित परीक्षाओं की CBI जांच।

-जिन परीक्षाओं में अनियमितता साबित हो, उन्हें रद्द कर दोबारा परीक्षा कराई जाए।

-दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों, बिचौलियों और लाभार्थियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

-भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।

-भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।

9 अगस्त को धूमधाम से मनेगा झारखंड आदिवासी महोत्सव, शिबू सोरेन को समर्पित होगा कार्यक्रम

#jharkhandtribalfestival_meetin

झारखंड आदिवासी महोत्सव का आयोजन 9 अगस्त से किया जा रहा है। यह दो दिवसीय महोत्सव 9 अगस्त से 10 अगस्त तक रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में आयोजित किया जा रहा है। इसमें झारखंड के अलावा देश के 11 अलग-अलग राज्य शामिल होंगे। यह भव्य आयोजन दिशोम गुरु शिबू सोरेन को समर्पित होगा।

इस आयोजन की खास बात आदिवासी कला, लोक परंपरा, हस्तशिल्प, खान-पान और जीवनशैली के साथ आधुनिक तकनीक को भी महोत्सव का हिस्सा बनाया जाएगा। राज्य सरकार की तैयारियों के मुताबिक, राजधानी रांची के अलावा राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में भी विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

मोरहाबादी से बिरसा चौक तक निकलेगी आदिवासी जतरा

महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण मोरहाबादी मैदान से बिरसा चौक तक निकलने वाली भव्य आदिवासी जतरा होगी। इसमें बड़ी संख्या में कलाकार और प्रतिभागी शामिल होंगे। इस जतरा के जरिए झारखंड की जनजातीय संस्कृति, लोक परंपरा और सामुदायिक जीवन की झलकी दिखाई जाएगी।

देशभर के आदिवासी कलाकारों का होगा जुटान

इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से 5 हजार से अधिक आदिवासी कलाकार, लोक कलाकार और सांस्कृतिक दल अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इसके जरिए अलग-अलग जनजातीय समुदायों की कला और सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर लाने की कोशिश होगी।

आदिवासी सांस्कृतिक की मिलेगी झलक

कार्यक्रम में आदिवासी सांस्कृतिक के तहत प्रसिद्ध छऊ नृत्य शैली, ट्राइबल फैशन शो, डांस तथा नागपुरी गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके साथ ही आदिवासी पारंपरिक व्यंजन एवं ट्राइबल मेला का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें स्थानीय संस्कृति एवं पारंपरिक खान-पान की झलक देखने को मिलेगी।