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10 हजार करोड़ से संवारी 3 लाख से ज्यादा संरचनाएं, सीएम डॉ. मोहन बोले- जल संरक्षण में एमपी नंबर-1

•⁠ ⁠'जल गंगा संवर्धन अभियान-2026' का समापन

•⁠ ⁠राजगढ़ को दी 352.65 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

•⁠ ⁠जल के बिना नहीं की जा सकती जीवन की कल्पना

भोपाल/राजगढ़। 'कपिल मुनि की तपोस्थली राजगढ़ जिला जल संचय के कार्यों में अग्रणी बना है। यह जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के अंतर्गत श्रेष्ठ कार्य करने वाले 6 जिलों में शामिल है। राज्य सरकार ने 19 मार्च से 30 जून तक 100 दिन के अभियान में कुएं, बावड़ी, तालाब, नदियों, अमृत सरोवर और प्राचीन जल स्त्रोतों के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया। यह प्रसन्नता का विषय है कि जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 में लगभग 10 हजार करोड़ लागत से 3 लाख 62 हजार के अधिक जल स्त्रोतों का पुनरोद्धार किया गया है। उन्होंने कहा कि इन्हीं प्रयासों से देश के बड़े राज्यों में मध्यप्रदेश जल संरक्षण कार्यों में अग्रणी बना है।' यह बात मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कही। सीएम डॉ. यादव 30 जून को राजगढ़ में आयोजित 'जल गंगा संवर्धन अभियान-2026' के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांगों को ट्राय साइकिल और महिलाओं को स्कूटी की चाबी दी। इस दौरान राजगढ़ जिले के पर्यटन विकास पर केंद्रित कॉफी टेबल बुक का अनावरण भी हुआ। समारोह में राजगढ़ के 405 स्व-सहायता समूहों को 20 करोड़ की सहायता राशि सहित अन्य हितग्राहियों को हितलाभ वितरण किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अब वर्षा जल के संचयन, नालों की सफाई और नदियों के पुनर्जीवन की दिशा में यह अभियान आगे बढ़ रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 में राजगढ़ जिले में 341 करोड़ से अधिक लागत के 30 से अधिक विकास कार्य किए गए। आज 247 करोड़ 40 लाख के 14 भूमि-पूजन और 100 करोड़ से 17 विकास कार्यों का लोकार्पण हुआ है, जिसमें जीरापुर का सांदीपनि विद्यालय भी शामिल है। आज इस जिले में 30 करोड़ की लागत से निर्मित पुल का लोकार्पण हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद से जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के अंतर्गत देशभर में जल संरक्षण के लिए अनेक कार्य हुए हैं। जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जल ही पृथ्वी पर प्रकृति और जीवन का आधार है। पंच तत्वों में जल ऐसा तत्व है, जिसका सनातन संस्कृति में जल का विशेष महत्व है। हमारे शरीर में 70 प्रतिशत से अधिक जल की मात्रा है। इसीलिए नदी, तालाब, कुएं, बावड़ी सहित सभी जल रचनाएं आनंदित करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की पार्वती, चंबल, कालीसिंध और क्षिप्रा आगे जाकर पवित्र गंगा नदी में मिलती हैं। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने जल संचयन के इस अभियान को जल गंगा नाम दिया। यह गंगा बेसिन का क्षेत्र है।  

भावी पीढ़ियों के लिए बचाना है जल 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता सभी के लिए मिसाल है। इससे सीख लेकर हमें कठिन समय में मित्र की सहायता करें, लेकिन एहसान नहीं जताना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने लगातार तीसरे वर्ष जल संरक्षण अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस साल अलनीनो के प्रभाव से कम वर्षा का अनुमान है, इसीलिए प्रदेश में अमृत सरोवर, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, नदी संरक्षण जैसे जल स्त्रोतों के संरक्षण कार्य निरंतर जारी रहेंगे। आज जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 का समापन हो रहा है, लेकिन हमें भावी पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए पानी की बूंद-बूंद का संरक्षण करने का संकल्प लेना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भव्य सांदीपनि विद्यालयों का निर्माण किया जा रहा है। राज्य सरकार ने गेहूं उत्पादक किसानों को उपज का पूरा लाभ दिया और 100 लाख से अधिक मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन कर अन्नदाताओं को 2625 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान किया है। वर्ष 2023 में राज्य में सिंचित भूमि का रकबा 44 लाख हेक्टेयर था, जो अब बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। बीते 3 साल में ही राजगढ़ जिले में सिंचाई का रकबा 50 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर ढाई लाख हेक्टेयर हो चुका है। राजगढ़ में पालायन रुक गया और युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिलने लगा है। राज्य सरकार हम महीने लाड़ली बहनों को 1500 रुपए भेजकर रक्षाबंधन मना रही है। किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि और स्कूली बच्चों को नि:शुल्क ड्रेस, कॉपी, किताबें, साइकिलें प्रदान कर रही है। हमारी सरकार हर वर्ग के कल्याण के लिए काम कर रही है। 

सिंहस्थ-2028 की भव्य तैयारियां जोरों पर

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में सिहस्थ-2028 के भव्य आयोजन के लिए बाबा महाकाल की कृपा से सभी तरह के प्रबंधन किए जा रहे हैं। सिंहस्थ में लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के उज्जैन आने का अनुमान है। श्रद्धालुओं के लिए आवागमन के मार्ग, भोपाल से राजगढ़, उज्जैन, मंदसौर तक नई सड़क परियोजनाओं पर काम चल रहा है। सिंहस्थ भारत ही नहीं दुनिया का सबसे बड़ा मेला है। ऐसे में उज्जैन में सभी प्रकार के प्रबंधन हो रहे हैं। इससे विपक्षी दल नाखुश है। लेकिन हमारी सरकार विकास यात्रा को जारी रखने में किसी से डरने और दबने वाली नहीं है। हमारी सरकार सभी प्रकार के विकास कार्यों पर काम करती रहेगी।

सीएम डॉ. यादव ने कीं ये घोषणाएं

इस मौके पर सीएम डॉ. यादव ने द्वारिका योजना के अंतर्गत सारंगपुर और पचोर सहित राजगढ़ की सभी नगरपालिकाओं में सड़क विकास के कार्यों की घोषणा की। उन्होंने भैंसवामाता के भव्य-दिव्य लोक निर्माण के लिए प्रस्ताव मंजूर करने की भी घोषणा की। इसके अलावा उन्होंने इसके प्रथम चरण के लिए 20 करोड़ की राशि भी प्रदान कर दी।

एक-एक बूंद करें संचित

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान में अब तक हुए सभी कार्यों को सरकार प्रमाणित करती है। राजगढ़ ऐसा जिला है, जहां पानी की कमी है और यह जिला बाहर के पानी का संचय कर अपनी जरूरतों को पूरा करता है। इस साल बारिश के मौसम में कम वर्षा का अनुमान है। नदियों के उद्गम स्थल सूखे हैं। हम सभी को पानी की एक-एक बूंद संचित कर भावी पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित करना है। कम वर्षा से डरने की जरूरत नहीं है। राज्य सरकार और सभी अधिकारी-कर्मचारी जनभागीदारी से जल संरक्षण के प्रयास कर रहे हैं।

अली बाबा, चालीस चोर वाली मंडली, इस जनपद पंचायत में मचा है भ्रष्टाचार का घमासान

उमरबन में भ्रष्ट पंचायत सचिवों को सीईओ का वृहदहस्त

खान अशु 

भोपाल। एक, दो, पांच नहीं बल्कि पूरा का पूरा घान ही भ्रष्टाचार की कढ़ाई में गोते खाता नजर आ रहा है। इनकी उड़ती पतंग को हवा देने के वह जिम्मेदार बैठे हैं, जिनको इनकी निगरानी के लिए पाबंद किया गया था। 

मामला धार जिले के उमरबन ब्लॉक का है। यहां पंचायत अधिनियम की सिरे से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। थोकबंद सचिवों ने सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया और जिम्मेदार इनका कवच बन गए। सूत्र इसके पीछे अधिकारियों का भी भ्रष्टाचार मामले में बराबर का शरीक होना बताते हैं।

चला ऐसा चक्र

सूत्रों का कहना है कि उमरबन जनपद पंचायत की करीब 61 ग्राम पंचायत के अधिकांश सचिव लगातार भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। एक बड़े भ्रष्टाचार में यह साबित भ्रष्टाचारी यह पाए गए। पंचायत अधिनियम की धारा 40 और 92 के मुताबिक इन करीब 22 लोगों का निलंबन होना था, साथ ही इनके वित्तीय अधिकार पर भी पाबंदी लगना थी। सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2011 से 2015 के बीच हुए इस मामले को तत्कालीन अधिकारियों ने बेइमानी की बिना पर छिपा दिया। बताया जाता है कि खानापूर्ति की कार्यवाही में इन सभी भ्रष्ट सचिवों को जनपद में ही दूसरी पंचायतों में ट्रांसफर कर दिया गया। साथ ही भ्रष्टाचार गंगा बहती गंगा को बहते रहने के लिए इन सभी को वित्तीय अधिकार भी सौंप दिए गए। नतीजा यह है कि हालात जस के तस बने हुए हैं और पंचायत राज की खिल्ली उड़ाई जा रही है।

नई घोड़ी, नया दाम

उमरबन जनपद पंचायत में नए सीईओ के रूप में रोहित पचौरी नाम अधिकारी पदस्थ हो गए हैं। तमाम पिछले कारनामों से वाकिफ पचौरी ने सभी सचिवों को काली कमाई का खुला ऑफर दे दिया है। 

नपेंगे पचौरी भी

जानकारों का कहना है कि सरकारी व्यवस्था के तहत पदभार संभालते ही वर्तमान अधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी उस मामले की रिपोर्टिंग और जांच में सहयोग करना होती है। यदि वर्तमान अधिकारी को अपने पूर्ववर्ती कार्यकाल में हुए घोटालों या वित्तीय अनियमितताओं का पता चलता है, तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 संशोधन 2018 के तहत उनका कर्तव्य बनता है कि वे इसकी लिखित रिपोर्ट तुरंत अपने उच्च अधिकारियों, केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) या राज्य सतर्कता आयोग/एसीबी को दें। लेकिन सूत्र बताते हैं कि पिछले कार्यकाल में हुए घोटालेबाजी को पचौरी ने न तो उच्च अधिकारियों को सूचित किया, और न ही भ्रष्ट सचिवों के खिलाफ कोई एक्शन लिया।

नियमानुसार उन्हें जांच एजेंसियों को इस बारे में सूचित करना था। साथ ही सरकारी नियमावली के अनुसार, वर्तमान अधिकारी को घोटाले वाले प्रोजेक्ट्स का विशेष ऑडिट करवाने की सिफारिश भी करना थी। बताया जा रहा है कि वर्तमान सीईओ पचौरी पर घोटाले को जानबूझकर छुपाने, साक्ष्य नष्ट करने, और अपने पूर्ववर्ती को बचाने की कार्यवाही ही सकती है। जिसके लिए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम या भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत षड्यंत्रकर्ता या सबूत नष्ट करने का दोषी मानकर कार्यवाही की जा सकती है।

फ़ारूक़ और मरियम से अदनान की नई उड़ान

रंगमंच से वेब सीरीज़ तक... अभिनय, लेखन और निर्देशन का अनवरत सफ़र

खान आशु

भोपाल। रानी कुबरी गणेश, ओरछा के राम, दारा शिकोह और काहिलों की जमात जैसे चर्चित नाटकों से अपनी पहचान बनाने वाले युवा रंगकर्मी अदनान आज अभिनय के साथ-साथ लेखन और निर्देशन के क्षेत्र में भी अपनी अलग छाप छोड़ रहे हैं।

दो दर्जन से अधिक नाटकों में अभिनय करते-करते कब उनका रुझान लेखन और निर्देशन की ओर बढ़ गया, इसका एहसास उन्हें स्वयं भी नहीं हुआ। रंगमंच के प्रति उनका समर्पण और निरंतर सीखने की ललक उन्हें नए मुकामों की ओर ले जा रही है।

एक डायलॉग जिसने बदल दी ज़िंदगी

"टक से मौत को छूकर दो मिनट में वापस आ जाता हूँ..."

फिल्म अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का यह चर्चित संवाद अदनान के जीवन में निर्णायक मोड़ बनकर आया। इस संवाद की मिमिक्री और अभिनय ने उन्हें रंगमंच की दुनिया में कदम रखने का आत्मविश्वास दिया और अगले ही दिन वे मंच की प्रतिष्ठित शख्सियत राजीव बाबा के सान्निध्य में पहुँच गए।

तनवीर और मरहूम इरफान साहब जैसे मार्गदर्शकों से सीखते हुए उनका सफर आगे बढ़ा और फिर प्रदीप अहिरवार के साथ रंगकर्म की नई दिशाएँ खुलती चली गईं।

दिल्ली से मुंबई तक, मंच से वेब सीरीज़ तक

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, इलाहाबाद समेत अनेक शहरों में रंगमंच, टीवी धारावाहिकों और वेब सीरीज़ के अनुभवों ने अदनान की कला को परिपक्व बनाया। उनकी लेखनी पर मरहूम हाजी अनवर साहब और मशहूर शायर डॉ. राहत इंदौरी की साहित्यिक विरासत की छाप स्पष्ट दिखाई देती है। लेखन के प्रति उनकी समझ और संवेदनशीलता उन्हें समकालीन युवा रचनाकारों में अलग पहचान दिलाती है।

'फ़ारूक़ और मरियम' — सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता

आज अदनान अपनी नई वेब सीरीज़ "फ़ारूक़ और मरियम" के साथ सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म्स पर मौजूद हैं। दर्शकों के बीच इस सीरीज़ को लगातार सराहना मिल रही है और इसकी कहानी को लेकर उत्सुकता बढ़ती जा रही है।

अदनान के बारे में 

वर्टिकल ड्रामा सीरीज "नाटक जारी है" के निर्माता, लेखक और निर्देशक अदनान खान रंगमंच की दुनिया से जुड़े एक बेहद प्रतिभाशाली फिल्ममेकर और थिएटर आर्टिस्ट हैं। वे मुंबई के मनोरंजन उद्योग में सक्रिय हैं और मुख्य रूप से उर्दू एडॉप्टेशन, स्क्रीन राइटिंग और डायलॉग स्पेशलिस्ट के रूप में जाने जाते हैं। अदनान खान लंबे समय से ग्राउंड थिएटर और नाटकों से जुड़े रहे हैं। यही वजह है कि "नाटक जारी है" में उन्होंने रिहर्सल और बैकस्टेज की बारीकियों को इतने असली और मजेदार ढंग से दिखाया है। वे नाटकों के उर्दू रूपांतरण और गहरे संवाद लिखने में माहिर हैं। अदनान ने इस सीरीज को पूरी तरह एक स्वतंत्र प्रोजेक्ट के रूप में खुद लिखा और निर्देशित किया है। उन्होंने मोबाइल दर्शकों की नब्ज को पहचानते हुए पारंपरिक थिएटर को आधुनिक रील्स/वर्टिकल वीडियो फॉर्मेट (9:16 आस्पेक्ट रेशियो) में ढालकर पेश किया है। अदनान खान अपने काम और सीरीज के सभी नए एपिसोड्स को मुख्य रूप से अपने सोशल मीडिया हैंडल्स जैसे Adnan Khan Facebook और इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर रिलीज करते हैं। 

अदनान का मानना है कि उनकी यात्रा अभी शुरुआत भर है। मंज़िल से अधिक उन्हें सफ़र पर भरोसा है, क्योंकि रुकना और ठहर जाना उनकी शब्दावली का हिस्सा नहीं है।

फ़ारूक़ और मरियम से अदनान की नई उड़ान

रंगमंच से वेब सीरीज़ तक... अभिनय, लेखन और निर्देशन का अनवरत सफ़र

खान आशु

भोपाल। रानी कुबरी गणेश, ओरछा के राम, दारा शिकोह और काहिलों की जमात जैसे चर्चित नाटकों से अपनी पहचान बनाने वाले युवा रंगकर्मी अदनान आज अभिनय के साथ-साथ लेखन और निर्देशन के क्षेत्र में भी अपनी अलग छाप छोड़ रहे हैं।

दो दर्जन से अधिक नाटकों में अभिनय करते-करते कब उनका रुझान लेखन और निर्देशन की ओर बढ़ गया, इसका एहसास उन्हें स्वयं भी नहीं हुआ। रंगमंच के प्रति उनका समर्पण और निरंतर सीखने की ललक उन्हें नए मुकामों की ओर ले जा रही है।

एक डायलॉग जिसने बदल दी ज़िंदगी

"टक से मौत को छूकर दो मिनट में वापस आ जाता हूँ..."

फिल्म अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का यह चर्चित संवाद अदनान के जीवन में निर्णायक मोड़ बनकर आया। इस संवाद की मिमिक्री और अभिनय ने उन्हें रंगमंच की दुनिया में कदम रखने का आत्मविश्वास दिया और अगले ही दिन वे मंच की प्रतिष्ठित शख्सियत राजीव बाबा के सान्निध्य में पहुँच गए।

तनवीर और मरहूम इरफान साहब जैसे मार्गदर्शकों से सीखते हुए उनका सफर आगे बढ़ा और फिर प्रदीप अहिरवार के साथ रंगकर्म की नई दिशाएँ खुलती चली गईं।

दिल्ली से मुंबई तक, मंच से वेब सीरीज़ तक

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, इलाहाबाद समेत अनेक शहरों में रंगमंच, टीवी धारावाहिकों और वेब सीरीज़ के अनुभवों ने अदनान की कला को परिपक्व बनाया। उनकी लेखनी पर मरहूम हाजी अनवर साहब और मशहूर शायर डॉ. राहत इंदौरी की साहित्यिक विरासत की छाप स्पष्ट दिखाई देती है। लेखन के प्रति उनकी समझ और संवेदनशीलता उन्हें समकालीन युवा रचनाकारों में अलग पहचान दिलाती है।

'फ़ारूक़ और मरियम' — सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता

आज अदनान अपनी नई वेब सीरीज़ "फ़ारूक़ और मरियम" के साथ सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म्स पर मौजूद हैं। दर्शकों के बीच इस सीरीज़ को लगातार सराहना मिल रही है और इसकी कहानी को लेकर उत्सुकता बढ़ती जा रही है।

अदनान के बारे में 

वर्टिकल ड्रामा सीरीज "नाटक जारी है" के निर्माता, लेखक और निर्देशक अदनान खान रंगमंच की दुनिया से जुड़े एक बेहद प्रतिभाशाली फिल्ममेकर और थिएटर आर्टिस्ट हैं। वे मुंबई के मनोरंजन उद्योग में सक्रिय हैं और मुख्य रूप से उर्दू एडॉप्टेशन, स्क्रीन राइटिंग और डायलॉग स्पेशलिस्ट के रूप में जाने जाते हैं। अदनान खान लंबे समय से ग्राउंड थिएटर और नाटकों से जुड़े रहे हैं। यही वजह है कि "नाटक जारी है" में उन्होंने रिहर्सल और बैकस्टेज की बारीकियों को इतने असली और मजेदार ढंग से दिखाया है। वे नाटकों के उर्दू रूपांतरण और गहरे संवाद लिखने में माहिर हैं। अदनान ने इस सीरीज को पूरी तरह एक स्वतंत्र प्रोजेक्ट के रूप में खुद लिखा और निर्देशित किया है। उन्होंने मोबाइल दर्शकों की नब्ज को पहचानते हुए पारंपरिक थिएटर को आधुनिक रील्स/वर्टिकल वीडियो फॉर्मेट (9:16 आस्पेक्ट रेशियो) में ढालकर पेश किया है। अदनान खान अपने काम और सीरीज के सभी नए एपिसोड्स को मुख्य रूप से अपने सोशल मीडिया हैंडल्स जैसे Adnan Khan Facebook और इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर रिलीज करते हैं। 

अदनान का मानना है कि उनकी यात्रा अभी शुरुआत भर है। मंज़िल से अधिक उन्हें सफ़र पर भरोसा है, क्योंकि रुकना और ठहर जाना उनकी शब्दावली का हिस्सा नहीं है।

भोपाल में वाहन चेकिंग पॉइंट बनाम ठोस कानून: क्या वाकई सड़कों पर पहरेदारी से थमेगा अपराध?

पूर्व डीआईजी का फरमान सही था या कमिश्नरी के नए आदेश

खान अशु 

​भोपाल। राजधानी में कानून व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। बहस का मुख्य मुद्दा है-शहर के चौराहों पर लगने वाले भारी-भरकम 'वाहन चेकिंग पॉइंट'। एक तरफ जहां कुछ समय पहले तक पुलिस प्रशासन का मानना था कि सड़कों पर बेवजह की चेकिंग से जनता परेशान होती है, वहीं अब शहर की रणनीति बिल्कुल उलट नजर आ रही है।

​-अतीत और वर्तमान: दो अलग-अलग रणनीतियां

​भोपाल की कानून व्यवस्था में पिछले कुछ सालों में दो बेहद अलग दृष्टिकोण देखने को मिले हैं: ​इरशाद वली (तत्कालीन आईजी) का दृष्टिकोण: अपने कार्यकाल के दौरान तत्कालीन भोपाल आईजी इरशाद वली ने शहर की सड़कों पर होने वाली रूटीन वाहन चेकिंग को बंद करने के कड़े आदेश जारी किए थे। उनका मानना था कि सड़कों पर गाड़ियां रोककर कागजात जांचने से आम नागरिकों को बेवजह की मानसिक और शारीरिक परेशानी होती है, ट्रैफिक जाम लगता है और पुलिस का ध्यान मुख्य अपराधों से भटकता है। उन्होंने 'विजिबल पुलिसिंग' (पुलिस की मौजूदगी) और खुफिया तंत्र पर ज्यादा जोर दिया था।

​वर्तमान पुलिस कमिश्नर प्रणाली का रुख: इसके विपरीत, वर्तमान पुलिस कमिश्नरी सिस्टम के तहत शहर के लगभग हर प्रमुख चौराहे और एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स पर कड़े 'चेकिंग पॉइंट' (बैरिकेट्स) लगा दिए गए हैं। पुलिस का तर्क है कि इससे संदिग्धों की आवाजाही पर रोक लगती है और अपराधियों में डर पैदा होता है।

​अपराध ग्राफ और नागरिकों की परेशानी

​दावों से इतर, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। आंकड़ों और स्थानीय निवासियों के अनुभव बताते हैं कि इन चेकिंग पॉइंट्स के बावजूद अपराधों में अपेक्षित कमी नहीं आई है, बल्कि कुछ क्षेत्रों में ग्राफ बढ़ा ही है। जहां पीक ऑवर्स (दफ्तर और स्कूल के समय) में चेकिंग के कारण लंबे ट्रैफिक जाम लगते हैं। एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन गाड़ियां भी कई बार बैरिकेट्स में फंस जाती हैं।

वहीं सड़कों पर पुलिस खड़ी होने के बावजूद गलियों में चेन स्नैचिंग, सूने मकानों में चोरियां और देर रात की चाकूबाजी की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं। नशीले पदार्थों की खरीद बिक्री भी जोरों पर है। अपराधी मुख्य सड़कों के बजाय वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर निकल जाते हैं। इससे पुलिस बल का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ हेलमेट, तीन सवारी और गाड़ी के कागजात चेक करने में व्यस्त रहता है, जिससे गंभीर अपराधों की तफ्तीश और गश्त प्रभावित होती है।

चेकिंग पॉइंट जरूरी या ठोस कानून?

विशेषज्ञों और आम जनता के बीच अब यह सवाल बड़ा हो गया है कि अपराध रोकने का सही तरीका क्या है? क्या सड़कों को ब्लॉक करना काफी है या हमें सिस्टम में गहरे सुधार की जरूरत है?

वरिष्ठ पत्रकार फरहान खान कहते हैं कि सड़कों पर चेकिंग केवल 'निवारक' कदम हो सकती है, वह भी बेहद सीमित। इससे केवल वही अपराधी पकड़े जा सकते हैं जो अनजाने में उस रास्ते पर आ जाएं। पेशेवर अपराधी इन पॉइंट्स से बचना बखूबी जानते हैं। यह व्यवस्था कानून का पालन करने वाले आम नागरिकों के लिए ज्यादा असुविधाजनक साबित होती है। सेवानिवृत्त एसीपी नागेन्द्र पटैरिया का मानना है कि अपराध को जड़ से खत्म करने के लिए नाकों पर खड़े होने के बजाय 'स्मार्ट और सख्त' रवैये की जरूरत है। वे कहते हैं कि कानून का डर तब पैदा होता है, जब अपराधी को पता हो कि वह बचेगा नहीं। इसके लिए मजबूत इन्वेस्टिगेशन (जांच) और कोर्ट में ठोस पैरवी की जरूरत है ताकि सजा की दर बढ़े। इस मामले को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक बुंदेले कहते हैं कि सड़कों पर इंसानों को खड़ा करने के बजाय AI-इनेबल्ड CCTV कैमरे, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल होना चाहिए। इससे बिना ट्रैफिक रोके संदिग्ध गाड़ियों को ट्रैक किया जा सकता है। उनका कहना है कि मुख्य सड़कों पर बैरिकेड लगाने से ज्यादा जरूरी है कि पुलिस पीसीआर और चीता मोबाइल रात के समय कॉलोनियों और अंदरूनी रास्तों पर गश्त करें, जहां असल में वारदातें होती हैं।

सुरक्षा भी चाहिए, सम्मान भी

 शहर की जनता का कहना है कि सड़कों पर बैरिकेट्स लगाकर हर नागरिक को संदिग्ध नजर से देखना और ट्रैफिक में परेशान करना सुरक्षा का स्थाई समाधान नहीं है। वे कहते हैं कि सरकार और पुलिस प्रशासन को तत्कालीन आईजी इरशाद वली के 'नागरिक-अनुकूल' नजरिए और वर्तमान सुरक्षा आवश्यकताओं के बीच एक संतुलन बनाना होगा। अपराध तब रुकेंगे जब पुलिस का खुफिया तंत्र मजबूत होगा, कानून का शिकंजा कड़ा होगा और न्याय प्रक्रिया तेज होगी, न कि सिर्फ चौराहों पर चालान काटने से।

एक अधूरे मिसरे से शुरू हुई कहानी बन गई महाग्रंथ...

आठ एपिसोड की उर्दू-अदबी वर्टिकल सीरीज़ ‘फ़ारूक़ और मरियम’ आज होगी स्ट्रीम

भोपाल। डिजिटल दौर में जहां तेज़ रफ्तार मनोरंजन का चलन बढ़ता जा रहा है, वहीं लेखक-निर्देशक अदनान खान एक अलग और संवेदनशील कहानी लेकर आ रहे हैं। उनकी नई उर्दू-अदबी वर्टिकल सीरीज़ ‘फ़ारूक़ और मरियम’ का आधिकारिक ट्रेलर 13 जून को रिलीज़ कर दिया गया है, जिसे दर्शकों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। आठ एपिसोड में प्रस्तुत यह श्रृंखला मुख्य रूप से एक ही कमरे में घटित होने वाली कहानी है, लेकिन अपने संवादों, भावनाओं और साहित्यिक वातावरण के माध्यम से एक विस्तृत भावनात्मक संसार रचती है।

कहानी एक लेखक फ़ारूक़ और उसकी लेखनी की प्रशंसक मरियम के इर्द-गिर्द घूमती है। एक अधूरे मिसरे से शुरू हुई यह मुलाक़ात धीरे-धीरे शब्दों, किताबों और एहसासों की दुनिया में प्रवेश करती है। जहाँ एक ओर फ़ारूक़ अपनी लेखनी के माध्यम से लोगों के दिलों तक पहुँचता है, वहीं मरियम उसके शब्दों में अपने जज़्बातों की परछाईं तलाशने लगती है। दोनों के बीच मौजूद अहमद इस कहानी का एक महत्वपूर्ण किरदार है, जो कई बार दर्शकों की तरह घटनाओं को देखता और समझता है।

सीरीज़ में फ़ारूक़ की भूमिका सदाशिव राव, मरियम की भूमिका आस्था जैन, तथा अहमद की भूमिका अदनान खान निभा रहे हैं। अदनान खान ने ही इस श्रृंखला का लेखन और निर्देशन भी किया है।

‘फ़ारूक़ और मरियम’ को पारंपरिक प्रेम कहानी के बजाय शब्दों, अदब, गलतफ़हमियों और भावनात्मक परतों की कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। टीम का मानना है कि यह सीरीज़ उन दर्शकों को विशेष रूप से पसंद आएगी जो साहित्य, ग़ज़ल, शायरी और संवाद प्रधान कथाओं में रुचि रखते हैं।

यह आठ एपिसोड की वर्टिकल सीरीज़ 18 जून 2026 से Instagram तथा Adnan Khan के आधिकारिक Facebook अकाउंट पर स्ट्रीम होना शुरू होगी।

सीरीज़ का आधिकारिक ट्रेलर फिलहाल सोशल मीडिया पर उपलब्ध है और दर्शकों को इसके प्रसारण का इंतज़ार है।

अब न्याय किससे मांगा जाए : पुलिस ने ही रच डाली युवती की बदनामी की कहानी...?

सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर से मिलकर रची साजिश, तोड़े नियम

भोपाल। एक झूठी और कपोल कल्पित कहानी को सच के करीब लाने के लिए एक साजिश रच दी गई। एक बुजुर्ग NRI और पुलिस की मिलीभगत से रची गई साजिश में तीसरा एंगल सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर को बनाया गया। नियम, कायदे, गवाह, सुबूत को इंसाफ की दुहाई देने वाली पुलिस ने इस त्रिकोण से एक शिक्षित लड़की को बदनाम करने की योजना को अंजाम दे दिया। 

मामला राजधानी भोपाल के कोलार थाने का बताया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि बुजुर्ग NRI डॉ. नरेश शर्मा अपने सगे भांजे की साजिशों और दोगलेपन से आहत थे। अपनी पारिवारिक खींचतान का कोई ठोस निराकरण पाने के लिए उन्होंने कोलार थाने में शिकायत दर्ज कराई। सूत्रों का कहना है कि इस बीच बुजुर्गियत और NRI की हैसियत देखते हुए कई बातें तय हुईं थीं।

दोगले के साथ दोस्तों पर भी वार

सूत्रों का कहना है कि NRI डॉ. नरेश शर्मा ने अपने भांजे एडवोकेट नीतीश त्रिपाठी को सबक सिखाने और अपने बीच के मतभेद को निपटाने के लिए उनके साथियों को भी घेरे में ले लिया गया। थाना कोलार में की गई शिकायत में उन्होंने एडवोकेट नीतीश त्रिपाठी की जूनियर और इंटर्न रही एडवोकेट प्रगति श्रीवास्तव को भी सहयोगी आरोपी बना दिया। जबकि प्रगति इस मामले की इतनी दोषी थी कि वह निशीथ त्रिपाठी को एक वकील और सीनियर के रूप में जानती थी और इस नाते निशीथ के NRI मामा की उनके विभिन्न कामों में मदद किया करती थी।

फिर बनी यह कहानी

सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने इस मामले को अधिक पुख्ता बनाने के लिए प्रगति श्रीवास्तव पर ही कई झूठे और मनगढंत आरोप लगा दिए। इसको तूल देने के लिए उसके साथ मीडिया तो नहीं आ पाया, लेकिन एक सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर को आधार बना लिया। इस सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर ने भी संविधान, कानून, प्रचलित व्यवस्था और नियमों से बाहर जाकर मनगढ़ंत पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल कर दी। इस दौरान उन्होंने प्रगति के फोटो और विडियो को भी सार्वजनिक कर उन्हें सामाजिक बदनामी में धकेल दिया। सूत्रों का कहना है कि इस सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर की धमकी यह है कि वह भविष्य में इस तरह की पोस्ट से प्रगति की और बदनामी कर सकता है।

- अब मामले में शिकायत 

सूत्रों का कहना है कि प्रगति श्रीवास्तव इस मामले को साइबर थाने की शरण में पहुंची है। नियम और मीडिया संविधान के विपरीत सोशल मीडिया खबर में उनके फोटो इस्तेमाल करने पर उन्होंने ऐतराज उठाया है। आगे चलकर वे इस सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर के खिलाफ मानहानि का मामला भी दर्ज करने वाली हैं।

वक्फ जमीन का करोड़ों का सौदा !

- कूटरचित दस्तावेजों से बिकी दरगाह-इमामबाड़े की भूमि

- मामला ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट पहुंचेगा, प्रशासन पर लीपापोती के आरोप

खान आशु |

भोपाल | 16 जून 2026। नरसिंहपुर जिले में वक्फ संपत्ति की कथित अवैध बिक्री का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि दरगाह जहांगीर शाह एवं इमामबाड़े की करोड़ों रुपये मूल्य की कृषि भूमि को कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर निजी संपत्ति बताकर बेच दिया गया। इतना ही नहीं, सौदे के तुरंत बाद रजिस्ट्री भी कर दी गई। अब यह मामला भोपाल वक्फ ट्रिब्यूनल और जबलपुर हाईकोर्ट तक पहुंचने की तैयारी में है।

वक्फ हितैषियों का आरोप है कि जिला प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए मामले में लीपापोती कर रहा है तथा भूमि को निजी बताने के प्रयास किए जा रहे हैं। पूरे घटनाक्रम पर सामाजिक संगठनों, मुस्लिम समाज और राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।

₹1.24 करोड़ में हुआ सौदा

मामला नरसिंहपुर के नेहरू वार्ड स्थित वक्फ दरगाह जहांगीर शाह एवं इमामबाड़े से जुड़ी खसरा नंबर 35/1 और 35/2 की कृषि भूमि का है। आरोप है कि सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में पर्याप्त जांच-पड़ताल किए बिना उक्त भूमि की रजिस्ट्री 1 करोड़ 24 लाख रुपये में कर दी गई। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से जुड़े हुसैन पठान ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड से की। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए वक्फ बोर्ड ने कलेक्टर नरसिंहपुर को पत्र भेजकर नामांतरण पर रोक लगाने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

नामांतरण रोकने के निर्देश, फिर भी प्रक्रिया जारी !

वक्फ बोर्ड के पत्र क्रमांक 42/आर/नरसिंहपुर/2026/1421 दिनांक 22 मई 2026 में स्पष्ट रूप से नामांतरण रोकने की बात कही गई है। इसके बावजूद सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत के जवाब में तहसीलदार कार्यालय द्वारा नामांतरण प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है, जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं।

भाजपा शासन में कांग्रेसियों का दबदबा ?

सूत्रों के अनुसार इस कथित सौदे में कुछ कांग्रेस नेताओं की भूमिका की चर्चा है। आरोप है कि प्रशासन निष्पक्ष जांच करने के बजाय दोषियों को बचाने की दिशा में काम कर रहा है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर अभी तक किसी का नाम सामने नहीं आया है।

22 साल के युवक के नाम पर ही क्यों हुआ सौदा ?

सूत्रों का दावा है कि पूरे प्रकरण में एक 22 वर्षीय युवक को सामने रखकर दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की गई। जानकारों का मानना है कि भविष्य में किसी कानूनी या सामाजिक विवाद की स्थिति में वास्तविक लाभार्थियों को बचाने के लिए ऐसा किया गया हो सकता है।

सांप्रदायिक सौहार्द पर भी मंडरा रहा खतरा

दरगाह और इमामबाड़े से जुड़ी भूमि के विवादित सौदे को लेकर क्षेत्र में असंतोष बढ़ रहा है। मुहर्रम का समय निकट होने के कारण स्थानीय स्तर पर तनाव की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। समाज के कई जिम्मेदार लोगों ने प्रशासन से तत्काल और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

प्रमुख बिंदु

वक्फ संपत्ति की कथित अवैध बिक्री का मामला

▪ कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप

▪ ₹1.24 करोड़ में हुई रजिस्ट्री

▪ वक्फ बोर्ड ने नामांतरण रोकने के निर्देश दिए

▪ मामला ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट तक पहुंचेगा

▪ प्रशासन पर लीपापोती और दोषियों को बचाने के आरोप

▪ सांप्रदायिक तनाव की आशंका से इनकार नहीं

मोदी सरकार के सफल 12 वर्ष पूर्ण होने पर निजामुद्दीन दरगाह में विशेष दुआ

मुस्लिम भाजपाइयों ने प्रधानमंत्री मोदी की दीर्घायु और देश की तरक्की के लिए मांगी दुआएं

भोपाल/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देश की राजधानी दिल्ली स्थित ऐतिहासिक हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह में विशेष दुआ और चादरपोशी का आयोजन किया गया। पसमांदा मुस्लिम समाज उत्थान समिति (पंजीकृत) के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य तथा भारत की निरंतर प्रगति और समृद्धि के लिए सामूहिक दुआ की गई।

कार्यक्रम के दौरान देश में शांति, सौहार्द, भाईचारा और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की भी प्रार्थना की गई। समिति के मुख्य संरक्षक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता इरफ़ान अहमद तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष एहसान अब्बासी के नेतृत्व में दरगाह पर चादर और अकीदत के फूल पेश किए गए।

जनकल्याणकारी योजनाओं को बताया विकास की आधारशिला

इस अवसर पर आयोजित पत्रकार वार्ता में वक्ताओं ने केंद्र सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल को विकास, सुशासन और जनकल्याण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया। मुख्य संरक्षक इरफ़ान अहमद ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार की अनेक योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जनधन योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुद्रा योजना, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना जैसी पहल ने गरीब, पिछड़े और वंचित वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है। उन्होंने दावा किया कि इन योजनाओं के माध्यम से करोड़ों लोगों को बैंकिंग, स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छता, रोजगार, पेयजल और खाद्यान्न जैसी मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिला है। साथ ही पसमांदा मुस्लिम समाज की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार भी व्यक्त किया गया।

अनेक गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित

कार्यक्रम में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य मुन्नव्वरी बेगम, अकरम हाशमी, बिलाल जै़दी, गुलाम निज़ाम निज़ामी, इकबाल खान, फुरकान सलमानी, बाबर निज़ामी, मजाहिर हुसैन सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।

मुख्य बिंदु:-

- हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया दरगाह में विशेष दुआ का आयोजन।

- प्रधानमंत्री मोदी की दीर्घायु और देश की उन्नति के लिए प्रार्थना।

- पसमांदा मुस्लिम समाज उत्थान समिति द्वारा चादरपोशी।

- केंद्र सरकार की 12 वर्षों की उपलब्धियों पर चर्चा।

- शांति, सौहार्द और राष्ट्रीय एकता का संदेश।

मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का निधन, 91 वर्ष की उम्र में भोपाल में ली अंतिम सांस

‘दुश्मनी जमकर करो लेकिन…’ जैसे अमर शेरों से बनाई खास पहचान

भोपाल। उर्दू अदब की दुनिया के मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का गुरुवार को 91 वर्ष की उम्र में भोपाल में निधन हो गया। वे लंबे समय से डिमेंशिया बीमारी से पीड़ित थे और पिछले कुछ समय से उनकी याददाश्त भी काफी कमजोर हो चुकी थी। उनके निधन से साहित्य और शायरी जगत में शोक की लहर है।

सरल, संवेदनशील और दिलों को छू लेने वाली शायरी के लिए पहचाने जाने वाले डॉ. बशीर बद्र ने हिंदी और उर्दू साहित्य को कई यादगार ग़ज़लें दीं। उनके कई ग़ज़ल संग्रह प्रकाशित हुए और उनकी रचनाओं ने देश-विदेश में बड़ी लोकप्रियता हासिल की। उनकी शायरी का पंजाबी, बंगाली, नेपाली और रूसी भाषाओं में अनुवाद की तैयारी भी चल रही थी।

बशीर बद्र का मशहूर शेर —

दुश्मनी जमकर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे,

जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिंदा न हों…”

आज भी अदब प्रेमियों की जुबान पर रहता है। उनकी शायरी में मोहब्बत, रिश्ते, तन्हाई, इंसानी एहसास और सामाजिक सरोकारों की गहरी झलक मिलती थी। अपने सहज अंदाज और असरदार अल्फाज की वजह से उन्होंने आम पाठकों से लेकर साहित्यिक जगत तक खास पहचान बनाई। डॉ. बशीर बद्र के इंतकाल के साथ उर्दू शायरी का एक महत्वपूर्ण दौर जैसे थम सा गया है।