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भाजपा ने राजधानी रांची सहित सभी मंडलों में मनाया हूल दिवस*

भाजपा द्वारा अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत अमर शहीद स्थल भोगनाडीह, राजधानी रांची स्थित मोराबादी के सिदो कान्हू पार्क, प्रदेश कार्यालय सहित राज्य के सभी मंडलों में हूल क्रांति के अमर शहीद महानायक सिदो-कान्हो, चांद-भैरव, फूलो-झानो की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी एवं पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने मोराबादी स्थित सिदो कान्हू पार्क में सिदो-कान्हो की प्रतिमा पर श्रंद्धाजलि अर्पित कर जनजातीय अस्मिता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए उनके अद्वितीय योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। जबकि प्रदेश कार्यालय में 'हूल क्रांति' के महानायकों के बलिदान दिवस पर प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

इसके अलावा भोगनाडीह सहित राज्य के सभी मंडलों में हूल क्रांति के महानायकों को पार्टी के विभिन्न नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा श्रद्धांजलि दी गई।

इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि हूल दिवस, जनजातीय समुदाय के कड़े संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है। आजादी की लड़ाई में झारखंड के जनजातीय समुदाय के महानायकों की उल्लेखनीय और अग्रणी भूमिका रही है। हूल दिवस केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि स्वाभिमान, साहस और स्वतंत्रता का अमर प्रतीक है। 30 जून 1855 को भोगनाडीह की धरती से वीर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो के नेतृत्व में हजारों संथालों ने ब्रिटिश शासन, शोषण और अन्याय के विरुद्ध 'हूल' का शंखनाद किया। सिदो-कान्हो, चांद-भैरव, फूलो-झानो सहित हजारों सपूतों ने अपनी कुर्बानी दी है। यह जनआंदोलन जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा के लिए लड़ा गया, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। हूल क्रांति के महानायकों के अद्वितीय शौर्य, त्याग, बलिदान और मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए उनके संघर्ष को कभी भूलाया और बिसराया नहीं जा सकता है। भारतीय जनता पार्टी ने ऐसे तमाम आजादी के मतवालों और नायकों को उचित सम्मान देने का काम किया है जबकि विपक्षी पार्टियों ने उनका उपहास उड़ाने का काम किया है। प्रधान, मानकी, मुंडा को जो सुविधाएं भाजपा सरकार द्वारा दी गई, राज्य सरकार द्वारा उस अधिकार से उन्हें वंचित कर अपनी मानसिकता जाहिर करने का काम किया गया है।

भोगनाडीह में सरकार की तानाशाही रवैए पर भड़के आदित्य साहू

भोगनाडीह में राज्य सरकार के तानाशाही रवैए पर प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए इसे प्रशासन का अनावश्यक हस्तक्षेप बताया है। कहा कि क्या अब आदिवासियों को अपने ही पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सरकार और प्रशासन की अनुमति लेनी होगी और बॉन्ड भरना पड़ेगा ? झारखंड सरकार का यह रवैया अंग्रेजी मानसिकता और हिटलरशाही नहीं तो क्या है?

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सूचना मिल रही है कि भोगनाडीह को पुलिस छावनी में तब्दील कर 50 से अधिक मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं। यह आदिवासियों को डराने का प्रयास नहीं तो क्या है। पिछले साल भी हूल दिवस के अवसर पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आंसू गैस चलाए गए थे। उन्होंने कहा कि अधिक अहंकार होना पतन का कारण बनता है। झारखंड सरकार उसी राह पर है। जनजातीय संस्कृति एवं विरासत को मिटाने का सपना देखने वालों की जनता जल्द ही पूरी तरह अस्तित्व खत्म कर देगी। जो स्थिति है उससे तो यही लगता है कि झारखंड में एक और हूल क्रांति की आवश्यकता है।

इस दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि संथाल परगना की वीरभूमि से वर्ष 1855 में ब्रिटिश शासन की दमनकारी और शोषणकारी नीतियों के विरुद्ध हूल आंदोलन का ऐतिहासिक बिगुल फूंका गया। सिदो मुर्मु, कान्हू मुर्मु, चांद मुर्मु, भैरव मुर्मु तथा वीरांगनाएं फूलो मुर्मु और झानो मुर्मु के नेतृत्व में संथाल समाज ने जल, जंगल, जमीन और अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए अभूतपूर्व संघर्ष का परिचय दिया। अंग्रेजी सत्ता को चुनौती देने वाला यह आंदोलन स्वतंत्रता, स्वाभिमान और अधिकारों के लिए जनजागरण का प्रतीक बना। हूल दिवस के अवसर पर उन सभी अमर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि, जिनका त्याग, पराक्रम और राष्ट्रभाव आज भी हम सभी को अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने की प्रेरणा देता है।

श्री मरांडी ने कहा कि 1855 के हूल उलगुलान के माध्यम से सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष कर उन्हें अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य किया था। इसके बाद संताल परगना क्षेत्र में भूमि बंदोबस्ती की जिम्मेदारी स्थानीय प्रधान व्यवस्था को सौंपने की परंपरा स्थापित हुई, जो लंबे समय से चली आ रही है। लेकिन दुर्भाग्यवश, पिछले कुछ वर्षों में कथित अबुआ सरकार के कार्यकाल में आदिवासी भूमि को लूटा जा रहा हैं। घुसपैठियों को राज्य सरकार का संरक्षण मिल रहा है। रिम्स-2 के नाम पर आदिवासियों की उपजाऊ भूमि अधिग्रहण के प्रयास कर सरकार अंग्रेजों वाली मानसिकता का परिचय दे रही है।

वहीं पाकुड़ जिला में संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने हूल दिवस पर हूल क्रांति के नायकों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। उन्होंने मौके पर कहा कि 30 जून 1855 को अंग्रेजी हुकूमत और ज़मींदारों के खिलाफ प्रथम आदिवासी विद्रोह का बिगुल फूंकने वाले#सिद्धो और #कान्हू के बलिदान दिवस #हुल_दिवस का अपना ऐतिहासिक महत्व है। यह पावन तिथि हम सबों को अपने राष्ट और अपनी मिट्टी की रक्षा के लिए मर-मिट जाने की प्रेरणा देती है।

इधर सिदो-कान्हो पार्क रांची में इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल, पूर्व विधायक राम कुमार पाहन, महानगर अध्यक्ष वरुण साहू सहित भारतीय जनता पार्टी के जिला पदाधिकारी, मंडल पदाधिकारी, वरिष्ठ कार्यकर्तागणों ने भी वीर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किया।

इस दौरान प्रदेश कार्यालय में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश और मुख्य सचेतक नवीन जयसवाल सहित वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

वहीं पाकुड़ में श्रंद्धाजलि कार्यक्रम के अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष बालमुकुंद सहाय, प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी, जिलाध्यक्ष सरिता मुर्मू सहित कई भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

देवघर-30 जून 2026 हुल दिवस पर अमर शहीद सिद्धू कान्हु की प्रतिमा पर इंटक, महिला एवं देवघर जिला कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग द्वारा माल्यार्पण।

देवघर: हुल दिवस के अवसर पर देवघर झारखंड प्रदेश इंटक के प्रदेश सचिव अजय कुमार, देवघर जिला इंटक के जिला अध्यक्ष अनंत मिश्रा, देवघर जिला महिला कांग्रेस की अध्यक्ष प्रमिला देवी, देवघर जिला कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष नित्यानंद सेवक, कांग्रेस नेता तुलसी पोद्दार, विष्णु हेंब्रम, शिवनाथ मुर्मू, अनिल पंडित, मनोरंजन सिंह, महिला कांग्रेस की संगीता शर्मा, देवघर जिला इंटक के सचिव अभिषेक सिंह, कोषाध्यक्ष आशीष कुमार ने देवघर प्रखंड के बदलाडीह में सिद्धू कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। झारखंड प्रदेश इंटक के प्रदेश सचिव कांग्रेस अजय कुमार ने हुल दिवस पर अमर शहीद सिद्धू कान्हु को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हुल दिवस झारखंड के इतिहास में एक अमर क्रांति व अंग्रेजों के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई की याद दिलाता है। संथाल विद्रोह के प्रणेता सिद्धू- कान्हू ,चांद -भैरव जैसे महान सपूतों ने जल, जंगल, जमीन एवं महाजनों के शोषण व अत्याचार के खिलाफ अपनी कुर्बानी दी। इन दोनों महान सपूतों के अलावा और कई हजार लोगों ने जनजातीय परंपरा व मातृभूमि की रक्षा के लिए अपनी शहादत दी थी। जरूरत है इन सबों की शहादत को इतिहास में समुचित स्थान दिलाने की। देवघर जिला इंटक के जिला अध्यक्ष अनंत मिश्रा ने कहा कि यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं की संथाल विद्रोह के नायक सिद्दू- कान्हू, चांद- भैरव चार भाइयों ने हुल क्रांति की शुरुआत की थी। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे योद्धा थे जिन्होंने अंग्रेजों से जमकर लोहा लिया और अंग्रेजी सत्ता की चूल हिला दी थी। अभिषेक सिंह सचिव देवघर जिला इंटक
देवघर-भारतीय जनता पार्टी देवघर जिला के द्वारा स्थानीय टावर चौक पर मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया गया।
देवघर: भारतीय जनता पार्टी देवघर जिला के द्वारा स्थानीय टावर चौक पर भोगनाडीह में हुई घटना हुल दिवस के अवसर पर सिद्धू कानून के वंशजों पर हेमंत सोरेन के पुलिसिया लाठी चार्ज और आंसू गैस छोड़े गए ।निर्दोष आदिवासियों को वह पिटा गया ।र्इसको लेकर हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया गया। मौके पर जिला अध्यक्ष सचिन रवानी ने कहा कि भोगनाडीह की घटना हेमंत सोरेन की आदिवासियों के प्रति दिखावा सच सामने आ गई। जिस तरह हेमंत सोरेन ने अपने पुलिसिया गुंडे के द्वारा निर्दोषआदिवासियों को पिटवाया गया ,सिद्ध कानू के वंशजों को अपमानित किया गया, उसे पिटा गया,उसे पूजा और कार्यक्रम करने से रोका गया और पुलिस की पिटाई से कई आदिवासी घायल हो गए। सिद्धू कानू ने इस देश में अपनी बलिदानी देकर देश को आजादी देने का काम किया उसका वंशज के साथ ऐसा व्यवहार करना बड़ा ही दुखद है। सिद्धू कानू के वंशज को सम्मान पूर्वक पूजा और कार्यक्रम करने का अनुमति देना चाहिए ना की बर्बरता पूर्ण लाठी चार्ज करवाना चाहिए। राज्य सरकार के तथाकथित विकास के सच को उजागर होने के डर से यह सरकार घबरा गई है आखिरकार अपनी हताशा और विफलता को छुपाने के लिए सरकार ने दमन का रास्ता चुना और निर्दोष आदिवासियों पर लाठी बरसाये। इस कार्यक्रम के मौके पर जिला महामंत्री अधीर चंद्र भैया ,संतोष उपाध्याय ,रीता चौरसिया, नवल राय, युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष आशीष दुबे ,एसटीमोर्चा जिला अध्यक्ष संतोष मुर्मू महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष रूपा केसरी, ओबीसी जिला अध्यक्ष सौरभ सुमन, बलराम पोद्दार विजया सिंह धनंजय तिवारी धनंजय खवाड़े सौरव पाठक गौतम राय पंकज सिंह भदोरिया संजय राय ईश्वर रायअमरजीत दुबे अलका सोनी रमेश राय सोना धारी झा संजय गुप्ता उमाशंकर प्रजापति पवन पांडे विजय मिश्रा आदि कार्यकर्ता मौजूद थे।
हूल दिवस के अवसर पर तिसरी में याद किए गए सिद्धो-कान्हो, किया गया माल्यार्पण

तिसरी प्रखंड के अंतर्गत दलपतदीह रोड में लॉरेंस गंगा राम टुडु, चांद किशोर हांसदा, ओम प्रकाश मुर्मू,अरविंद हेंब्रोम की अगुवाई में सोमवार को आदिवासी ससुर बेसी के बैनर तले सिंधु कान्हु की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित के साथ माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई साथ ही सिंधु कान्हु, फूलों झानो अमर रहे का नारा लगाया गया। चांद किशोर मुर्मू ने कहा हुल का मतलब होता है विद्रोह जिसको संथाली में हुल कहते है 1855 56 में महादानी प्रथा सह अंग्रेजों के विरुद्ध जो लड़ाई लड़ा जिसमे सिंधु कान्हु और फूलों झुनो शहीद हुए यह आज दुख का दिन है ससुर बेसी ने आज उन बीर लोगो को याद कर शत शत नमन करती है। लॉरेंस गंगा राम टुडु ने भारत के तमाम वाशियो को हुल दिवस की शुभ कामना देते हुए कहा आज ही के दिन 30 जून को हुल दिवस मनाने का शुभारंभ किया गया था साथ ही हुल दिवस में मंथन करने का दिन है हम सब आदिवासि शोषित है और शोषण भी किया जा रहा है। आज तक भारत सरकार और झारखंड सरकार के द्वारा हमलोग को धार्मिक दर्जा नहीं दी गई है।हम सरकार से यह मांग करते है हमे आदिवासी की धार्मिक का दर्जा मिले।अरविंद मुर्मू ने कहा 30 जून को हर वर्ष हूल दिवस मनाया जाता है. यह दिवस समर्पित है उन वीर संताल आदिवासियों को जिन्होंने अपनी जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र आंदोलन किया. संताल आदिवासियों का हूल अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आह्वान किया था, जिसमें दावा किया जाता है कि 50 से 60 हजार संताल आदिवासी जुट गए थे और अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध की घोषणा की थी. आदिवासियों ने कभी भी अंग्रेजों की गुलामी को स्वीकार नहीं किया। मौके पर चांद किशोर मुर्मू, लॉरेंस गंगा राम टुडु,अरविंद हेमब्रोम, ओम प्रकाश मुर्मू होडिंग गुरु गणेश टुडु,मुकेश हंसदा,युवा कालब अध्यक्ष अविनाश टुडु,रिंकी सोरेन,बसंती हेमब्रोम,सुशील मुर्मू,वैसी मराया,बासुदेव मुर्मू, सँझला मरांडी,कृष्ण किस्कू आदि लोग उपस्थित हुए।
*एशोसिऐशन ने हाई स्कूल टापर अदीबा खुर्शीद को किया सम्मानित*
हुसैनी शिया वेलफेयर एशोसिऐशन सुलतानपुर के अध्यक्ष हैदर अब्बास खाॅ की अगुवाई में रविवार को हसनपुर में अदीबा खुर्शीद को हुसैनी शिया वेलफेयर के पदाधिकारी मोहम्मद सकलैन खान एम एच खान गौरी एडवोकेट गुलाम अब्बास खाॅ मुबश्शिर हुसैन उर्फ गुड्डू मौलाना जीशान हैदर खान फसी हुल हसन औन अब्बास ने सम्मानित कर बधाई दी और उनके पिता खुर्शीद अहमद ने सभी का आभार ब्यक्त किया ।इसकी जानकारी हैदर अब्बास खाॅ अध्यक्ष हुसैनी शिया वेलफेयर एसो सिऐशन ने दी है।
सरहुल मिलन (बाहा) पर्व एवं आदिवासी समाज ससुरबैसी के बैनर तले अलग अलग जगहों पर मिलन का कार्यक्रम किया गया


तिसरी गिरिडीह तिसरी प्रखंड मुख्यालय भंडारी मुख्यमार्ग में आदिवासी कल्याण समिति ने सरहुल पूजा का आयोजन किया और सिंधु कान्हु के प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के उपरांत महिलाएं मांदर की थाप पर नृत्य किया । वहीं दूसरी तरफ गांधी मैदान तिसरी में आदिवासी संथाल समाज ने भी सरहुल पूजा का आयोजन कर संबोधन एवं नृत्य किया । कल्याण समिति के सरहुल पूजा में बतौर मुख्य अतिथि तिसरी सीओ अखिलेश प्रसाद मौजूद थे । उन्होंने कहा सरहुल झारखंड में मनाए जाने वाले एक महत्वपूर्ण त्योहार के रूप में जाना जाता है । जिसे पूरे राज्य में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन आदिवासी समुदाय नए साल का स्वागत करते हैं। सरहुल के अवसर पर प्रकृति अपने नए स्वरूप में नजर आती है । इस समय पेड़ों पर नए फूल और पत्ते खिलने लगते हैं । ‘सरहुल’ नाम दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘सर’, जिसका अर्थ है सखुआ या साल का फूल, और ‘हुल’, जिसका अर्थ है क्रांति. इसे सखुआ फूल की क्रांति का पर्व भी कहा जाता है । यह त्योहार चैत्र महीने की अमावस्या के तीसरे दिन मनाया जाता है, हालांकि कुछ गांवों में इसे पूरे महीने भर मनाने की परंपरा है । इस दिन लोग अखाड़े में नृत्य और गायन करते हैं और पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं।मौके पर रामी मरांडी ,राधे मरांडी , सुकेज हेंब्रम ,सोनू हेंब्रम ,एनसीएस हेंब्रम ,बिक्रम मुर्मू , समेल मुर्मू समेत दर्जनों मांझी हड़म शामिल थे । वहीं गांधी मैदान तिसरी में आदिवासी संथाल सुसरवेसी तिसरी के अरविंद मुरमू ,दीपक मुरमू ,किशोर हंसदा ,गंगाराम टुडू समेत दर्जनों लोग सामिल थे ।
गाजियाबाद में आग लगने से एक महिला और तीन बच्चाें की जलकर माैत
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के लोनी में रविवार की सुबह चार मंजिला मकान में आग लग गई। सूचना पर लोनी और साहिबाबाद फायर स्टेशन से तीन गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। फायर यूनिट ने मकान में फंसे दम्पत्ति और उनके बेटे को गम्भीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया है। घटना में एक महिला और तीन बच्चों की मौत हो गई।

मुख्यमंत्री याेगी ने हादसे काे लिया संज्ञान, अधिकारियाें काे दिए निर्देश

मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) रा‌हुल पाल ने बताया गली संकरी होने के कारण फायर यूनिट को ऑपरेशन को अंजाम देने में काफी परेशानी आई। दीवार तोड़कर आग बुझाई गई। टीम ने दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। हादसे में चार लोगों की मौत हुई है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद में आग लगने से हुए हादसे का संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। साथ ही घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर जिला प्रशासन के अधिकारियों को उनके समुचित उपचार के निर्देश दिए हैं।

राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।सीएफओ राहुल पाल ने बताया कि चार खंभा रोड पर गली नंबर-पांच (कंचन पार्क) के चार मंजिला मकान में आग लगी थी। आग ने दूसरे और तीसरे तल को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया था। गली संकरी होने के कारण फायर टेंडर मौके पर जाने की स्थिति नहीं थी। ऐसे में फायर टेंडर बाहर खड़े करके बराबर के मकानों छह हौज पाइप डाले गए।

दीवार तोड़ी गई और उसके बाद आग पर काबू पाया गया

बराबर के मकान पर चढ़कर दीवार तोड़ी गई और उसके बाद आग पर काबू पाया गया। जीना संकरा होने के कारण टीम को ऊपर तक जाने में बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ा। संकरे जीने में सामान भी रखा हुआ था और धुआं भर गया था। फायर टीम ने मुश्किल परिस्थितियों के खुद बचाते हुए मकान में फंसे लोगों को बाहर निकाला और स्थानीय लोगों व पुलिस के सहयोग से अस्पताल पहुंचाया।

फायर यूनिट ने आग को शांत कर तुरंत अंदर प्रवेश किया

मौके पर मौजूद पड़ोसियों ने बताया कि मकान में परिवार फंसा हुआ है। फायर यूनिट ने आग को शांत कर तुरंत अंदर प्रवेश किया गया और फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। इनमें महिला 32 वर्षीय गुलबहार पत्नी शाहनवाज, पुत्र आठ वर्षीय शान, नौ वर्षीय जान पुत्र शाहनवाज और जीशान पुत्र शमसाद बेहोशी के हालत में पाए गए। सभी को स्थानीय पुलिस व जनसमूह द्वारा हॉस्पिटल भर्ती कराया गया। घटना में गुलबहार, जीशान, अयान और शान की मौत हो गई।

आग से सिलाई मशीने और कपड़े जल गए

चार लोग मकान की छत पर फंसे थे। इनमें 30 वर्षीय आयशा पत्नी शमसाद, महिला का बेटा चार वर्ष का बच्चा अयान झुलसे पाए गए। दो लोगों 30 वर्षीय शाहनवाज और शमसाद को सुरक्षित छत से उतारा गया। मकान में द्वितीय तल पर सिलाई का काम होता है। आग से सिलाई मशीने और कपड़े जल गए हैं।
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने राज्य के सरकारी तथा सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए वर्ष 2025 की वार्षिक अवकाश तालिका की जारी


झा. डेस्क 

नया साल 2025 बस आने वाला है। हर कोई नये साल का बेसब्री से इंतजार रहा है। लोगों की उत्सुकता इस बात में रहती है कि नये साल में कितने दिन छुट्टियां रहेगी। किस किस त्योहार पर कब कब स्कूल बंद रहेंगे। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने राज्य के सरकारी तथा सहायता प्राप्त (अल्पसंख्यक सहित) स्कूलों के लिए वर्ष 2025 की एकीकृत वार्षिक अवकाश तालिका जारी कर दी है।

2025 में 60 दिन रहेगी छुट्टी 

विभाग की तरफ से दी गयी जानकारी के मुताबिक विशेष परिस्थिति में अवकाश घोषित होने पर उसकी क्षतिपूर्ति रविवार या अन्य अवकाश के दिन की जाएगी। विभाग द्वारा अधिसूचित उर्दू स्कूलों में रविवार की जगह शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा। छुट्टियों की लिस्ट सभी श्रेणी के स्कूलों अर्थात प्राथमिक, माध्यमिक तथा प्लस टू स्कूलों में लागू होगी। इसके तहत स्कूलों में वर्ष 2025 में 60 दिनों का अवकाश रहेगा।

इन छुट्टियों में हो सकेगा 

विभाग की तरफ से दी गयी जानकारी के मुताबिक विशेष परिस्थिति में अवकाश घोषित होने पर उसकी क्षतिपूर्ति रविवार या अन्य अवकाश के दिन की जाएगी। विभाग द्वारा अधिसूचित उर्दू स्कूलों में रविवार की जगह शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा। छुट्टियों की लिस्ट सभी श्रेणी के स्कूलों अर्थात प्राथमिक, माध्यमिक तथा प्लस टू स्कूलों में लागू होगी। इसके तहत स्कूलों में वर्ष 2025 में 60 दिनों का अवकाश रहेगा।

इन छुट्टियों में हो सकेगा बदलाव 

इनमें पांच दिनों के वैसे अवकाश भी सम्मिलित हैं, जो स्थानीय स्तर पर वहां के पर्व त्योहार या अन्य आवश्यकता को ध्यान में रखकर जिला स्तर पर तय किए जाएंगे। चांद दिखने के अनुसार मुस्लिम त्योहारों के अवकाश में परिवर्तन हो सकेगा। राष्ट्रीय पर्व का आयोजन स्कूल में अनिवार्य रूप से होगा। अन्य कोई अवसर पर बच्चे परेड या रैली में सम्मिलित नहीं होंगे। केंद्र या विभाग के निर्देश पर कोई कार्यक्रम या समारोह होने पर उसका आयोजन शाम तीन बजे के बाद होगा।

झारखंड: शिक्षकों की समस्याओं पर शिक्षा मंत्री गंभीर, बोले, कोई अधिकारी बरगला नहीं सकते, हर समस्याओं का होगा निदान, इन मांगों से मंत्री को कराया अवगत

इन स्कूलों पर नहीं लागू होगा नियम 

यह अवकाश तालिका आवासीय स्कूलों पर लागू नहीं होगी।विभाग द्वारा जारी अवकाश तालिका के तहत सरकारी व सहायता प्राप्त स्कूलों में एक से पांच जनवरी तक शीतकालीन अवकाश रहेगा। वहीं, 22 मई से दो जून तक ग्रीष्माकालीन अवकाश रहेगा। इसके बाद 28 दिसंबर से 31 दिसंबर तक शीतकालीन अवकाश रहेगा।

इसमें कहा गया है कि मौसम की स्थिति के अनुसार, विभागीय सचिव तथा उपायुक्त द्वारा शीतकालीन व ग्रीष्मकालीन अवकाश में संशोधन किया जा सकेगा तथा अतिरिक्त अवकाश का निर्णय लिया जा सकेगा।

स्कूलों में छुट्टी की पूरी लिस्ट

सरकारी स्कूलों में घोषित अवकाश (2025)

• एक से पांच जनवरी : शीतकालीन अवकाश

• 14 जनवरी : मकर संक्रांति

• 23 जनवरी : नेताजी सुभाषचंद्र बोस जयंती

• 26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (रविवार)

• दो फरवरी : बसंत पंचमी (रविवार)

• 12 फरवरी : रविदास जयंती

• 26 फरवरी : महाशिवरात्रि

• 13 मार्च : होलिका दहन

• 14 मार्च : हाेली

• 31 मार्च : ईद-उल-फितर

• एक अप्रैल : सरहुल

• दो अप्रैल : सरहुल फुलखोंसी

• छह अप्रैल : रामनवमी (रविवार)

• 10 अप्रैल : महावीर जयंती

• 14 अप्रैल : आंबेडकर जयंती

• 18 अप्रैल : गुड फ्राइडे

• एक मई : मजदूर दिवस

• 12 मई : बुद्ध पूर्णिमा

• 22 मई-दो जून : ग्रीष्मकालीन अवकाश

• सात जून : बकरीद/ईद उल जुहा

• 27 जून : रथ यात्रा

• 30 जून : हुल दिवस

• छह जुलाई : मुहर्रम (रविवार)

• नौ अगस्त : विश्व आदिवासी दिवस, रक्षा बंधन

• 15 अगस्त : स्वतंत्रता दिवस

• 16 अगस्त : जन्माष्टमी

• 27 अगस्त : गणेश चतुर्थी

• तीन सितंबर : करमा

• चार सितंबर : करमा फूलखोंसी

पांच सितंबर : मिलाद उन नबी

• 17 सितंबर : विश्वकर्मा पूजा

• 22 सितंबर : शारदीय नवरात्र, कलश स्थापन

• 29 सितंबर-दो अक्टूबर : दशहरा (दो अक्टूबर-गांधी जयंती)

• 20 अक्टूबर : दीपावली

• 22 अक्टूबर : गोवर्द्धन पूजा

• 23 अक्टूबर : भैया दूज, चित्रगुप्त पूजा

• 27 अक्टूबर : सूर्य षष्ठी डाला छठ (सायं अर्ध्य)

• 28 अक्टूबर : सूर्य षष्ठी डाला छठ (प्रात: अर्ध्य)

• पांच नवंबर : गुरुनानक जयंती

• 15 नवंबर : राज्य स्थापना दिवस

• 25 दिसंबर : क्रिसमस

• 28-31 दिसंबर : शीतकालीन अवकाश

झारखंड विधानसभा चुनाव 2024: क्या गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में पड़ने वाले पोड़ैयाहाट विधानसभा सीट पर प्रदीप यादव का किला इस बार ध्वस्त होगा...?*

*आइये अवलोकन करते हैं इस सीट का इतिहास और प्राप्त मतदान के आकड़ों का...!* झारखंड डेस्क चुनाव आयोग टीम की झारखंड दौरा और सभी राजनितिक दलों के प्रतिनिधि से मुलाक़ात के बाद विधानसभा चुनाव की आहट शुरू हो गयी है.इस बीच सभी सीटों पर राजनितिक दलों द्वारा अपने प्रत्याशी उतारने और जीत सुनिश्चित करने के लिए दाव-पेंच भी शुरू हो गया है.झारखंड में 81 विधान सभा सीट है जिसमे 80 सीटों पर चुनाव के जरिये विधायकों का चुनाव होता है और एक सीट पर मनोनयन के द्वारा. हर सीट का अपना अपना गणित है.परिरस्थिति भी है. आइये आज हम झारखंड के गोड्डा जिले का पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र की बात करते हैं यह सीट राज्य के हाई प्रोफाइल सीटों में शुमार है. इस क्षेत्र से प्रदीप यादव पार्टी बदल बदल कर लगातार पांच बार से विधायक निर्वाचित होते रहे हैं. इस बार गोड्डा से वे लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन निशिकांत ने उन्हें मात दे दिया. अब उनका इस सीट से विधानसभा चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है. वे वर्ष 2000 से इस सीट पर पहले भाजपा, फिर जेवीएम और अब कांग्रेस से चुनाव लड़ते रहे हैं.और जीतते रहे हैं. इनका झामुमो, भाजपा और अन्य के बीच मुकाबला होता रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इस क्षेत्र में कांग्रेस से बढ़त लेकर आगामी विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र के वर्तमान विधायक प्रदीप यादव के गढ़ को ध्वस्त करने का संकेत दिया है. *पोड़ैयाहाट विधानसभा में है 40 प्रतिशत आदिवासी-मुस्लिम वोटर* पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट, दुमका जिले के सरैयाहाट प्रखंड के साथ गोड्डा प्रखंड के कुछ पंचायतों तक फैला है। पूर्व के एक आंकड़ों के मुताबिक इस क्षेत्र में आदिवासी मतदाताओं की आबादी 30 प्रतिशत, मुस्लिम 10, यादव 25, दलित 15, ब्राह्मण 5, और अन्य पिछड़ी जातियों की आबादी लगभग 14 प्रतिशत है। *प्रदीप यादव ने यहां से 5 बार विधायक चुने गए* अगर बात करें पोड़ैयाहाट विधानसभा सीट की to वर्ष 2000 से 2019 तक प्रदीप यादव पार्टी बदल बदल कर लगातार पांच बार इस क्षेत्र की जनता का आशीर्वाद बटोरते रहे हैं. 2024 के जून में सम्पन्न गोड्डा लोकसभा क्षेत्र से जुड़े पोड़ैयाहाट क्षेत्र में भी भाजपा के निशिकांत दूबे कांग्रेस प्रत्याशी और इस क्षेत्र के विधायक प्रदीप यादव से मात्र लगभग 9,540 अधिक वोट हासिल करने में सफल हुए और चौथी बार गोड्डा से सांसद चुने गए. इससे भाजपा ने पिछले पांच चुनावों से लगतार इस सीट पर जीत दर्ज करने वाले कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव की चैन उड़ा दी है. ऐसे भी गोड्डा के भाजपा सांसद डा. निशिकांत दुबे और पोड़ैयाहाट के विधायक प्रदीप यादव के बीच अडानी पावर प्लांट, गोड्डा में रेल सेवा शुरू करने सहित कई मुद्दों को लेकर तल्ख बयानबाजी होते रहे हैं. इसलिए लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा का चुनाव हर चुनाव में पोड़ैयाहाट सुर्खियों में रहा है. *खरगे से नजदीकियां बढ़ने से टिकट मिलना तय है* लोकसभा चुनाव में भाजपा से गहरी शिकस्त खाने के बावजूद हाल के वर्षों में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से नजदीकियां बढ़ने की वजह से प्रदीप यादव को इस बार भी यहां से कांग्रेस का टिकट मिलना तय माना जा रहा है.कांग्रेस इंडिया गठबंधन में शामिल हैं और राज्य में झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के अति करीबी होने की वजह से संभव है कि इस बार इंडिया गठबंधन प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए झामुमो, कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप यादव के पक्ष में इस सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारे.जिससे भाजपा के बढ़ते कद को रोका जा सके. कांग्रेस के प्रदीप यादव के पक्ष में बने माहौल के बावजूद कांग्रेस के कुछ पुराने कार्यकर्ता भी पार्टी का टिकट हासिल करने के लिए रांची और दिल्ली की दौड़ लगा रहे और कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की परिक्रमा कर रहे हैं. वहीं राजद की ओर से भी इस सीट पर दावा ठोकने की चर्चा है.जबकि भाजपा में टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है. पार्टी प्रत्याशी चयन को लेकर विभिन्न स्तरों पर बैठकों का सिलसिला जारी है. *यहां बीजेपी के आधा दर्जन से अधिक हैं दावेदार* पोड़ैयाहाट विधानसभा सीट पर चर्चा है कि भाजपा कार्यकताओं से रायशुमारी के क्रम में आये पांच सम्भावित प्रत्याशियों की सूची तैयार कर प्रदेश और केन्द्रीय नेतृत्व को भेजा दिया गया है. लोकसभा चुनाव के दौरान पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को मिली बढ़त के आधार पर भाजपा के टिकट के प्रबल दावेदारों में गोड्डा के बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे व प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के करीबी समाजसेवी सीताराम पाठक, विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी बजरंगी प्रसाद यादव, जिला परिषद के सदस्य रवीन्द्र कुमार सिंह, पूर्व विधायक प्रशांत कुमार की पत्नी ममता देवी, उनके पुत्र, पूर्व प्रत्याशी गजेन्द्र सिंह, देवेन्द्र सिंह सरीखे कई अन्य नामों की चर्चा है. लेकिन राज्य में चुनिंदा हाईप्रोफाइल हॉट सीटों में शुमार गोड्डा जिले के इस सामान्य सीट पर भाजपा किसे अपना प्रत्याशी बनाती है यह तो आने वाला समय तय करेगा. इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा. लेकिन इतना तो तय है कि इस सीट पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही होगा. *इस सीट से जीत कर प्रदीप यादव बाबूलाल की सरकार में बने थे मंत्री* ज़ब बिहार से अलग होकर 15 नवम्बर 2000 को झारखंड राज्य बना और बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में सरकार बनी तो पहली बार इस क्षेत्र से विधायक चुने गये प्रदीप यादव को मंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. वर्ष 2005 में भी भाजपा के टिकट पर प्रदीप यादव लगातार दूसरी बार यहां जीत दर्ज की. 2006 में भाजपा में अंदरुनी विवाद बढ़ जाने की बजह से बाबूलाल मरांडी ने भाजपा और कोडरमा के सांसद से इस्तीफा दे दिया. झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक के नाम से नया दल बनाया. इसी क्रम में प्रदीप यादव सरीखे कई दिग्गज विधायकों ने भाजपा से किनारा कर लिया और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की पार्टी जेवीएम में शामिल हो गये. इसके बाद प्रदीप यादव 2009, 2014 और 2019 तक पार्टी बदल-बदल कर चुनाव मैदान में उतरकर लगातार पांच बार इस क्षेत्र से विधायक चुने गये. 2019 के चुनाव में जेवीएम के टिकट पर पार्टी सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी, प्रदीप यादव और बंधु टिर्की समेत तीन विधायक निर्वाचित हुए. राज्य में हेमंत सोरेन की सरकार गठन के बाद 2020 में बाबूलाल मरांडी ने भाजपा में जेवीएम का विलय कर दिया. जबकि प्रदीप यादव और बंधु तिर्की कांग्रेस में शामिल हो गए. बाद में प्रदीप यादव इंडिया गठबंधन में शामिल कांग्रेस पार्टी ने 2024 में सम्पन्न लोकसभा चुनाव में गोड्डा से अपना प्रत्याशी बनाया. लेकिन इस लोकसभा चुनाव में भाजपा के निशिकांत दुबे ने पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस से 9 हजार से अधिक वोट लाकर कांग्रेस के सम्भावित उम्मीदवार प्रदीप यादव के समक्ष बड़ी चुनौती पेश कर दी है. *इस बार जयराम महतो की पार्टी की उपस्थिति से बिगाड़ेगी यहां खेल* हालांकि अभी तक विधानसभा चुनाव के तिथि की घोषणा नहीं हुई है.बहरहाल चुनाव की घोषणा के बाद पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र के चुनावी मैदान में विभिन्न दलों के प्रत्याशियों के उतरने पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगा. इस बीच हाल के दिनों में झारखंड में खतियान के आधार पर सरकारी रिक्त पदों पर नियुक्ति और स्थानीय युवाओं को सभी क्षेत्र में प्राथमिकता देने की व्यवस्था को लागू करने आदि मुद्दों को लेकर संघर्ष करने वाले जयराम महतो की पार्टी की सक्रियता इस क्षेत्र में भी बढ़ी है.ऐसे में जयराम महतो की पार्टी जेकेबीकेस ने भूईंया, घटवाल,खैतौरी और कुड़मी समुदाय से इस क्षेत्र में अपना उम्मीदवार उतार दिया तो कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के समक्ष मुसीबत खड़ा कर दे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा. फिलहाल लोग चुनाव के तिथि के साथ एनडीए में शामिल भाजपा और इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के प्रत्याशियों की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं. इन दलों से कौन प्रत्याशी मैदान में आता है यह देखना दिलचस्प होगा. 2024 के गोड्डा लोकसभा क्षेत्र से जुड़े पोड़ैयाहाट विधानसभा की वोट की स्थिति प्रत्याशी -पार्टी - प्राप्त मत निशिकांत दुबे - भाजपा- 1,07,082 प्रदीप यादव- कांग्रेस- 93,136 वर्ष 2019 में विधानसभा चुनाव परिणाम प्रत्याशी- पार्टी- प्राप्त मत प्रदीप यादव- जेवीएम -77,358 गजाधर सिंह- बीजेपी- 63,761 अशोक कुमार- जेएमएम- 34,745 *वर्ष 2019 में विधानसभा चुनाव परिणाम* प्रत्याशी- पार्टी- प्राप्त मत प्रदीप यादव- जेवीएम -77,358 गजाधर सिंह- बीजेपी- 63,761 अशोक कुमार- जेएमएम- 34,745 वर्ष 2014 में विधानसभा चुनाव परिणाम प्रत्याशी - पार्टी - प्राप्त मत प्रदीप यादव- जेवीएम -64,036 देवेन्द्र सिंह -बीजेपी -52,878 अशोक कुमार-जेएमएम- 44,737 पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास पर गौर करें तो 1952 में बिहार विधानसभा के प्रथम चुनाव में पोड़ैयाहाट-सह-जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र के नाम से था.जहां से दो सदस्यों के चुनाव का प्रावधान किया गया था. इस चुनाव में दो सदस्यीय इस सीट पर सामान्य जाति से कांग्रेस के जगदीश नारायण मंडल और अजजा से झारखंड पार्टी के चुनका हेम्ब्रम विधायक चुने गए. वहीं 1957 में पोड़ैयाहाट को गोड्डा विधानसभा क्षेत्र से जोड़ दिया गया.इस चुनाव में भी दो सदस्यों के चुनाव का प्रावधान किया गया. जिसमें सामान्य सीट से झारखंड पार्टी के टिकट पर मणिलाल यादव और अजजा से निर्दलीय चुनका हेम्ब्रम विधायक चुने गए. 1962 में अजजा के लिए सुरक्षित एक सदस्यीय पोड़ैयाहाट अलग विधानसभा क्षेत्र के रूप में अस्तित्व में आया और 1972 तक अजजा के एक सदस्य के लिए सुरक्षित रहा. 1977 में इस सीट को अनारक्षित कर दिया गया. इसके बाद इस क्षेत्र में दो उपचुनाव सहित विधानसभा के लिये 16 चुनाव हुए.इसमें जेएमएम 6,जेवीएम 3, कांग्रेस 2 बार, जनसंघ, जनता पार्टी और प्रजातांत्रिक हुल झारखंड पार्टी के प्रत्याशियों ने एक एक बार इस सीट पर जीत दर्ज की.कांग्रेस से कभी दिग्विजय नेता रहे बिहार विधान परिषद के पूर्व सभापति पृथ्वी चन्द्र किस्कू के साथ जननायक कर्पूरी ठाकुर के अति करीबी और उनके मंत्रिमंडल में संसदीय सचिव के रूप में शामिल संताल परगना में 1974 छात्र आंदोलन की अलख जगाने वाले कमला कांत प्रसाद सिन्हा उर्फ लालू दा भी 1977 में इसी सीट से जनता पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए थे. इसके बाद इस क्षेत्र का राजनीतिक समीकरण बदल गया. शिबू सोरेन के नेतृत्व में संताल परगना में झारखंड अलग राज्य का आंदोलन परवान चढ़ा.झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के कभी दाहिना हाथ कहलाने तथा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के मुख्यमंत्रित्व काल में सेडो छाया मुख्यमंत्री समझा जाने वाले सूरज मंडल ने 1980 में इस क्षेत्र पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली. 1980, 1985, 1990 में झामुमो के टिकट पर सूरज मंडल इस क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक चुने गये. 1991 में सूरज मंडल गोड्डा लोकसभा सीट से झामुमो के टिकट पर सांसद चुने गये.इसके बाद 1992 में इस सीट पर उपचुनाव कराया गया। जिसमें सूरज मंडल को अपना राजनीतिक गुरु समझने वाले प्रशांत कुमार झामुमो के टिकट पर पहली बार इस क्षेत्र से विधायक चुने गए. 1995 में भी झामुमो के टिकट पर प्रशांत कुमार ही विधायक निर्वाचित हुए.लेकिन 2000 में पासा पलटा और कभी बाबूलाल मरांडी के किचन कैबिनेट में शामिल रहे प्रदीप यादव ने दूसरे प्रयास में झामुमो को इस क्षेत्र में गहरी शिकस्त दी और भाजपा के टिकट पर पोड़ैयाहाट में पहली बार कमल खिलाने में सफल हुए. 1952-2019 के बीच पोड़ैयाहाट के निर्वाचित विधायकों की सूची वर्ष- प्रत्याशी- पार्टी 1952- चुनका हेम्ब्रम (अजजा.) -झापा 1952 जगदीश ना. मंडल(सामा.) कांग्रेस 1957 चुनका हेम्ब्रम (अजजा) निर्दलीय 1957 मणिलाल यादव (सामा.) झापा 1962 यदुनंदन मुर्मू कांग्रेस 1967 एम मुर्मू जनसंघ 1969 एडवर्ड मरांडी पीएचजे 1972 पृथ्वी चंद्र किस्कू कांग्रेस 1977 कमला कांत सिन्हा ज.पा. 1980 सूरज मंडल जेएमएम 1985 सूरज मंडल जेएमएम 1990 सूरज मंडल जेएमएम 1992 प्रशांत कुमार जेएमएम 1995 प्रशांत कुमार जेएमएम 2000 प्रदीप यादव बीजेपी 2003 प्रशांत कुमार जेएमएम 2005 प्रदीप यादव बीजेपी 2009 प्रदीप यादव जेवीएम 2014 प्रदीप यादव जेवीएम 2019 प्रदीप यादव जेवीएम अपने द्वारा पिछले 25 वर्षों में किये गए विकास कार्यों पर प्रदीप यादव को है भरोसा प्रदीप यादव वर्ष 2000 से पहले भाजपा, फिर जेवीएम के टिकट पर विधानसभा में लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले वर्तमान विधायक प्रदीप यादव और उनकी पार्टी के समर्थकों का दावा है कि इस क्षेत्र में वर्तमान विधायक ने अपने 25 वर्ष के कार्यकाल में सड़क और पुल पुलिया का जाल बिछाकर लगभग सभी गांवों को सड़कों से जोड़ा है. जिससे लोगों के लिए आवागमन सुगम हो गया है. वहीं इस क्षेत्र के अधिकांश गांवों में पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य की समुचित व्यवस्था की गयी है. राज्य सरकार द्वारा राज्य के किसानों के बकाया 50 हजार रुपए के कृषि ऋण माफी योजना के माध्यम से इस क्षेत्र के अनेकों किसानों को ऋण से मुक्ति मिली है. इसके साथ ही हाल में राज्य सरकार ने आम लोगों के दो लाख तक के बैंक ऋण माफी की घोषणा की है. इस घोषणा से बैंक ऋण की समस्या से परेशान किसान और हजारों गरीब निर्धन परिवारों को ऋण से निजात मिलने की उम्मीद है. जबकि राज्य सरकार ने 18 से 50 वर्ष तक की बहू बेटियों के लिए मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना को चालू करने का ऐतिहासिक साहसिक फैसला लिया है जिससे इस क्षेत्र की आर्थिक रूप से कमजोर बेसहारा हजारों माता-बहनें लाभान्वित हुई हैं. जबकि सरकार ने राज्य में सर्वजन पेंशन नामक महत्वाकांक्षी योजना शुरू कर 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के बेसहारा व वृद्धों को सहारा दिया है. जिससे लाखों बेसहारा लोगों को नयी ज़िन्दगी मिली है. *बीजेपी भ्रष्टाचार और बेरोजगारी को बनायेगी मुद्दा* सिंचाई योजनाओं के कार्यान्वयन में शिथिलता बरतने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के बदले बढ़ावा देने का भी आरोप लगाते रहे हैं. जिससे क्षेत्र का विकास अवरूद्ध हो गया है. इस वजह से इस बार इस क्षेत्र की जनता इंडिया गठबंधन के वर्तमान विधायक कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप यादव को सबक सिखाने के लिए तैयार है. हाल में सम्पन्न लोकसभा के चुनाव में इस क्षेत्र की जनता ने विधानसभा चुनाव के पहले ही अपना फैसला दे दिया है. स्थानीय लोगों की मानें तो पिछले 25 वर्षों में इस क्षेत्र के किसान की समस्याओं का समाधान नहीं हो सका है.फलस्वरूप एक फसला धान की खेती पर निर्भर यहां के किसान पूरी तरह बरसा के भरोसे खेती करने को विवश हैं। इस क्षेत्र में न कोई फैक्ट्री है और न ही कोई उद्योग है.इस वजह से इस क्षेत्र के हजारों लोग रोजी- रोजगार के सिलसिले में मजदूरी करने दिल्ली, मुम्बई और अन्य दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं.आजादी के 75 साल बाद भी इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए कोई बेहतर शिक्षण संस्थान स्थापित नहीं किया जा सका है. इस कारण यहां के बच्चे उच्च शिक्षा के लिए हर दिन देवघर, गोड्डा और दुमका तक का सफर करने को विवश हैं. जबकि लोकसभा हो या विधानसभा प्रत्येक चुनाव में कांग्रेस, भाजपा, झामुमो और अन्य दलों के प्रत्याशी इस क्षेत्र में सिंचाई, शिक्षा स्वास्थ्य,शुद्ध पेयजल आदि सुविधा को बेहतर बनाने के वायदे पर जनता का आशीर्वाद मांगते रहे हैं. लेकिन इस क्षेत्र में न तो कोई उद्योग लगा,न ही अच्छे शिक्षण संस्थान खोले गए.
झारखंड विधानसभा चुनाव 2024: क्या गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में पड़ने वाले पोड़ैयाहाट विधानसभा सीट पर प्रदीप यादव का किला इस बार ध्वस्त होगा...?

आइये अवलोकन करते हैं इस सीट का इतिहास और प्राप्त मतदान के आकड़ों का...!

झारखंड डेस्क 

चुनाव आयोग टीम की झारखंड दौरा और सभी राजनितिक दलों के प्रतिनिधि से मुलाक़ात के बाद विधानसभा चुनाव की आहट शुरू हो गयी है.इस बीच सभी सीटों पर राजनितिक दलों द्वारा अपने प्रत्याशी उतारने और जीत सुनिश्चित करने के लिए दाव-पेंच भी शुरू हो गया है.झारखंड में 81 विधान सभा सीट है जिसमे 80 सीटों पर चुनाव के जरिये विधायकों का चुनाव होता है और एक सीट पर मनोनयन के द्वारा.

हर सीट का अपना अपना गणित है.परिरस्थिति भी है.

आइये आज हम झारखंड के गोड्डा जिले का पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र की बात करते हैं 

यह सीट राज्य के हाई प्रोफाइल सीटों में शुमार है. इस क्षेत्र से प्रदीप यादव पार्टी बदल बदल कर लगातार पांच बार से विधायक निर्वाचित होते रहे हैं. इस बार गोड्डा से वे लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन निशिकांत ने उन्हें मात दे दिया. अब उनका इस सीट से विधानसभा चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है.

वे वर्ष 2000 से इस सीट पर पहले भाजपा, फिर जेवीएम और अब कांग्रेस से चुनाव लड़ते रहे हैं.और जीतते रहे हैं.

इनका झामुमो, भाजपा और अन्य के बीच मुकाबला होता रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इस क्षेत्र में कांग्रेस से बढ़त लेकर आगामी विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र के वर्तमान विधायक प्रदीप यादव के गढ़ को ध्वस्त करने का संकेत दिया है.

पोड़ैयाहाट विधानसभा में है 40 प्रतिशत आदिवासी-मुस्लिम वोटर

पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट, दुमका जिले के सरैयाहाट प्रखंड के साथ गोड्डा प्रखंड के कुछ पंचायतों तक फैला है। पूर्व के एक आंकड़ों के मुताबिक इस क्षेत्र में आदिवासी मतदाताओं की आबादी 30 प्रतिशत, मुस्लिम 10, यादव 25, दलित 15, ब्राह्मण 5, और अन्य पिछड़ी जातियों की आबादी लगभग 14 प्रतिशत है।

प्रदीप यादव ने यहां से 5 बार विधायक चुने गए

अगर बात करें पोड़ैयाहाट विधानसभा सीट की to वर्ष 2000 से 2019 तक प्रदीप यादव पार्टी बदल बदल कर लगातार पांच बार इस क्षेत्र की जनता का आशीर्वाद बटोरते रहे हैं. 2024 के जून में सम्पन्न गोड्डा लोकसभा क्षेत्र से जुड़े पोड़ैयाहाट क्षेत्र में भी भाजपा के निशिकांत दूबे कांग्रेस प्रत्याशी और इस क्षेत्र के विधायक प्रदीप यादव से मात्र लगभग 9,540 अधिक वोट हासिल करने में सफल हुए और चौथी बार गोड्डा से सांसद चुने गए. इससे भाजपा ने पिछले पांच चुनावों से लगतार इस सीट पर जीत दर्ज करने वाले कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव की चैन उड़ा दी है. ऐसे भी गोड्डा के भाजपा सांसद डा. निशिकांत दुबे और पोड़ैयाहाट के विधायक प्रदीप यादव के बीच अडानी पावर प्लांट, गोड्डा में रेल सेवा शुरू करने सहित कई मुद्दों को लेकर तल्ख बयानबाजी होते रहे हैं. इसलिए लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा का चुनाव हर चुनाव में पोड़ैयाहाट सुर्खियों में रहा है.

खरगे से नजदीकियां बढ़ने से टिकट मिलना तय है

लोकसभा चुनाव में भाजपा से गहरी शिकस्त खाने के बावजूद हाल के वर्षों में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से नजदीकियां बढ़ने की वजह से प्रदीप यादव को इस बार भी यहां से कांग्रेस का टिकट मिलना तय माना जा रहा है.कांग्रेस इंडिया गठबंधन में शामिल हैं और राज्य में झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के अति करीबी होने की वजह से संभव है कि इस बार इंडिया गठबंधन प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए झामुमो, कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप यादव के पक्ष में इस सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारे.जिससे भाजपा के बढ़ते कद को रोका जा सके. कांग्रेस के प्रदीप यादव के पक्ष में बने माहौल के बावजूद कांग्रेस के कुछ पुराने कार्यकर्ता भी पार्टी का टिकट हासिल करने के लिए रांची और दिल्ली की दौड़ लगा रहे और कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की परिक्रमा कर रहे हैं. वहीं राजद की ओर से भी इस सीट पर दावा ठोकने की चर्चा है.जबकि भाजपा में टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है. पार्टी प्रत्याशी चयन को लेकर विभिन्न स्तरों पर बैठकों का सिलसिला जारी है.

यहां बीजेपी के आधा दर्जन से अधिक हैं दावेदार

पोड़ैयाहाट विधानसभा सीट पर चर्चा है कि भाजपा कार्यकताओं से रायशुमारी के क्रम में आये पांच सम्भावित प्रत्याशियों की सूची तैयार कर प्रदेश और केन्द्रीय नेतृत्व को भेजा दिया गया है. लोकसभा चुनाव के दौरान पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को मिली बढ़त के आधार पर भाजपा के टिकट के प्रबल दावेदारों में गोड्डा के बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे व प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के करीबी समाजसेवी सीताराम पाठक, विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी बजरंगी प्रसाद यादव, जिला परिषद के सदस्य रवीन्द्र कुमार सिंह, पूर्व विधायक प्रशांत कुमार की पत्नी ममता देवी, उनके पुत्र, पूर्व प्रत्याशी गजेन्द्र सिंह, देवेन्द्र सिंह सरीखे कई अन्य नामों की चर्चा है. लेकिन राज्य में चुनिंदा हाईप्रोफाइल हॉट सीटों में शुमार गोड्डा जिले के इस सामान्य सीट पर भाजपा किसे अपना प्रत्याशी बनाती है यह तो आने वाला समय तय करेगा. इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा. लेकिन इतना तो तय है कि इस सीट पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही होगा.

इस सीट से जीत कर प्रदीप यादव बाबूलाल की सरकार में बने थे मंत्री

ज़ब बिहार से अलग होकर 15 नवम्बर 2000 को झारखंड राज्य बना और बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में सरकार बनी तो पहली बार इस क्षेत्र से विधायक चुने गये प्रदीप यादव को मंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ.

वर्ष 2005 में भी भाजपा के टिकट पर प्रदीप यादव लगातार दूसरी बार यहां जीत दर्ज की. 2006 में भाजपा में अंदरुनी विवाद बढ़ जाने की बजह से बाबूलाल मरांडी ने भाजपा और कोडरमा के सांसद से इस्तीफा दे दिया. झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक के नाम से नया दल बनाया. इसी क्रम में प्रदीप यादव सरीखे कई दिग्गज विधायकों ने भाजपा से किनारा कर लिया और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की पार्टी जेवीएम में शामिल हो गये. इसके बाद प्रदीप यादव 2009, 2014 और 2019 तक पार्टी बदल-बदल कर चुनाव मैदान में उतरकर लगातार पांच बार इस क्षेत्र से विधायक चुने गये. 2019 के चुनाव में जेवीएम के टिकट पर पार्टी सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी, प्रदीप यादव और बंधु टिर्की समेत तीन विधायक निर्वाचित हुए. राज्य में हेमंत सोरेन की सरकार गठन के बाद 2020 में बाबूलाल मरांडी ने भाजपा में जेवीएम का विलय कर दिया. जबकि प्रदीप यादव और बंधु तिर्की कांग्रेस में शामिल हो गए. बाद में प्रदीप यादव इंडिया गठबंधन में शामिल कांग्रेस पार्टी ने 2024 में सम्पन्न लोकसभा चुनाव में गोड्डा से अपना प्रत्याशी बनाया. लेकिन इस लोकसभा चुनाव में भाजपा के निशिकांत दुबे ने पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस से 9 हजार से अधिक वोट लाकर कांग्रेस के सम्भावित उम्मीदवार प्रदीप यादव के समक्ष बड़ी चुनौती पेश कर दी है.

इस बार जयराम महतो की पार्टी की उपस्थिति से बिगाड़ेगी यहां खेल

हालांकि अभी तक विधानसभा चुनाव के तिथि की घोषणा नहीं हुई है.बहरहाल चुनाव की घोषणा के बाद पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र के चुनावी मैदान में विभिन्न दलों के प्रत्याशियों के उतरने पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगा. इस बीच हाल के दिनों में झारखंड में खतियान के आधार पर सरकारी रिक्त पदों पर नियुक्ति और स्थानीय युवाओं को सभी क्षेत्र में प्राथमिकता देने की व्यवस्था को लागू करने आदि मुद्दों को लेकर संघर्ष करने वाले जयराम महतो की पार्टी की सक्रियता इस क्षेत्र में भी बढ़ी है.ऐसे में जयराम महतो की पार्टी जेकेबीकेस ने भूईंया, घटवाल,खैतौरी और कुड़मी समुदाय से इस क्षेत्र में अपना उम्मीदवार उतार दिया तो कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के समक्ष मुसीबत खड़ा कर दे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा. फिलहाल लोग चुनाव के तिथि के साथ एनडीए में शामिल भाजपा और इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के प्रत्याशियों की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं. इन दलों से कौन प्रत्याशी मैदान में आता है यह देखना दिलचस्प होगा.

2024 के गोड्डा लोकसभा क्षेत्र से जुड़े पोड़ैयाहाट विधानसभा की वोट की स्थिति 

प्रत्याशी  -पार्टी   - प्राप्त मत

निशिकांत दुबे - भाजपा- 1,07,082

प्रदीप यादव- कांग्रेस- 93,136

वर्ष 2019 में विधानसभा चुनाव परिणाम

प्रत्याशी-  पार्टी-    प्राप्त मत

प्रदीप यादव- जेवीएम -77,358

गजाधर सिंह- बीजेपी- 63,761

अशोक कुमार- जेएमएम- 34,745

वर्ष 2019 में विधानसभा चुनाव परिणाम

प्रत्याशी-  पार्टी-    प्राप्त मत

प्रदीप यादव- जेवीएम -77,358

गजाधर सिंह- बीजेपी- 63,761

अशोक कुमार- जेएमएम- 34,745

वर्ष 2014 में विधानसभा चुनाव परिणाम

प्रत्याशी - पार्टी   - प्राप्त मत

प्रदीप यादव- जेवीएम -64,036

देवेन्द्र सिंह -बीजेपी -52,878

अशोक कुमार-जेएमएम- 44,737

 पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास 

पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास पर गौर करें तो 1952 में बिहार विधानसभा के प्रथम चुनाव में पोड़ैयाहाट-सह-जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र के नाम से था.जहां से दो सदस्यों के चुनाव का प्रावधान किया गया था. इस चुनाव में दो सदस्यीय इस सीट पर सामान्य जाति से कांग्रेस के जगदीश नारायण मंडल और अजजा से झारखंड पार्टी के चुनका हेम्ब्रम विधायक चुने गए. वहीं 1957 में पोड़ैयाहाट को गोड्डा विधानसभा क्षेत्र से जोड़ दिया गया.इस चुनाव में भी दो सदस्यों के चुनाव का प्रावधान किया गया. जिसमें सामान्य सीट से झारखंड पार्टी के टिकट पर मणिलाल यादव और अजजा से निर्दलीय चुनका हेम्ब्रम विधायक चुने गए. 1962 में अजजा के लिए सुरक्षित एक सदस्यीय पोड़ैयाहाट अलग विधानसभा क्षेत्र के रूप में अस्तित्व में आया और 1972 तक अजजा के एक सदस्य के लिए सुरक्षित रहा.

1977 में इस सीट को अनारक्षित कर दिया गया. इसके बाद इस क्षेत्र में दो उपचुनाव सहित विधानसभा के लिये 16 चुनाव हुए.इसमें जेएमएम 6,जेवीएम 3, कांग्रेस 2 बार, जनसंघ, जनता पार्टी और प्रजातांत्रिक हुल झारखंड पार्टी के प्रत्याशियों ने एक एक बार इस सीट पर जीत दर्ज की.कांग्रेस से कभी दिग्विजय नेता रहे बिहार विधान परिषद के पूर्व सभापति पृथ्वी चन्द्र किस्कू के साथ जननायक कर्पूरी ठाकुर के अति करीबी और उनके मंत्रिमंडल में संसदीय सचिव के रूप में शामिल संताल परगना में 1974 छात्र आंदोलन की अलख जगाने वाले कमला कांत प्रसाद सिन्हा उर्फ लालू दा भी 1977 में इसी सीट से जनता पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए थे.

 इसके बाद इस क्षेत्र का राजनीतिक समीकरण बदल गया. शिबू सोरेन के नेतृत्व में संताल परगना में झारखंड अलग राज्य का आंदोलन परवान चढ़ा.झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के कभी दाहिना हाथ कहलाने तथा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के मुख्यमंत्रित्व काल में सेडो छाया मुख्यमंत्री समझा जाने वाले सूरज मंडल ने 1980 में इस क्षेत्र पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली.

 1980, 1985, 1990 में झामुमो के टिकट पर सूरज मंडल इस क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक चुने गये. 1991 में सूरज मंडल गोड्डा लोकसभा सीट से झामुमो के टिकट पर सांसद चुने गये.इसके बाद 1992 में इस सीट पर उपचुनाव कराया गया। जिसमें सूरज मंडल को अपना राजनीतिक गुरु समझने वाले प्रशांत कुमार झामुमो के टिकट पर पहली बार इस क्षेत्र से विधायक चुने गए.

1995 में भी झामुमो के टिकट पर प्रशांत कुमार ही विधायक निर्वाचित हुए.लेकिन 2000 में पासा पलटा और कभी बाबूलाल मरांडी के किचन कैबिनेट में शामिल रहे प्रदीप यादव ने दूसरे प्रयास में झामुमो को इस क्षेत्र में गहरी शिकस्त दी और भाजपा के टिकट पर पोड़ैयाहाट में पहली बार कमल खिलाने में सफल हुए.

1952-2019 के बीच पोड़ैयाहाट के निर्वाचित विधायकों की सूची

वर्ष-     प्रत्याशी-    पार्टी

1952- चुनका हेम्ब्रम (अजजा.) -झापा

1952 जगदीश ना. मंडल(सामा.) कांग्रेस

1957 चुनका हेम्ब्रम (अजजा) निर्दलीय

1957 मणिलाल यादव (सामा.) झापा

1962 यदुनंदन मुर्मू कांग्रेस

1967 एम मुर्मू जनसंघ

1969 एडवर्ड मरांडी पीएचजे

1972 पृथ्वी चंद्र किस्कू कांग्रेस

1977 कमला कांत सिन्हा ज.पा.

1980 सूरज मंडल जेएमएम

1985 सूरज मंडल जेएमएम

1990 सूरज मंडल जेएमएम

1992 प्रशांत कुमार जेएमएम

1995 प्रशांत कुमार जेएमएम

2000 प्रदीप यादव बीजेपी

2003 प्रशांत कुमार जेएमएम

2005 प्रदीप यादव बीजेपी

2009 प्रदीप यादव जेवीएम

2014 प्रदीप यादव जेवीएम

2019 प्रदीप यादव जेवीएम

अपने द्वारा पिछले 25 वर्षों में किये गए विकास कार्यों पर प्रदीप यादव को है भरोसा

प्रदीप यादव वर्ष 2000 से पहले भाजपा, फिर जेवीएम के टिकट पर विधानसभा में लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले वर्तमान विधायक प्रदीप यादव और उनकी पार्टी के समर्थकों का दावा है कि इस क्षेत्र में वर्तमान विधायक ने अपने 25 वर्ष के कार्यकाल में सड़क और पुल पुलिया का जाल बिछाकर लगभग सभी गांवों को सड़कों से जोड़ा है.

जिससे लोगों के लिए आवागमन सुगम हो गया है. वहीं इस क्षेत्र के अधिकांश गांवों में पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य की समुचित व्यवस्था की गयी है. राज्य सरकार द्वारा राज्य के किसानों के बकाया 50 हजार रुपए के कृषि ऋण माफी योजना के माध्यम से इस क्षेत्र के अनेकों किसानों को ऋण से मुक्ति मिली है. इसके साथ ही हाल में राज्य सरकार ने आम लोगों के दो लाख तक के बैंक ऋण माफी की घोषणा की है.

 इस घोषणा से बैंक ऋण की समस्या से परेशान किसान और हजारों गरीब निर्धन परिवारों को ऋण से निजात मिलने की उम्मीद है.

जबकि राज्य सरकार ने 18 से 50 वर्ष तक की बहू बेटियों के लिए मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना को चालू करने का ऐतिहासिक साहसिक फैसला लिया है जिससे इस क्षेत्र की आर्थिक रूप से कमजोर बेसहारा हजारों माता-बहनें लाभान्वित हुई हैं.

 जबकि सरकार ने राज्य में सर्वजन पेंशन नामक महत्वाकांक्षी योजना शुरू कर 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के बेसहारा व वृद्धों को सहारा दिया है. जिससे लाखों बेसहारा लोगों को नयी ज़िन्दगी मिली है.

बीजेपी भ्रष्टाचार और बेरोजगारी को बनायेगी मुद्दा

सिंचाई योजनाओं के कार्यान्वयन में शिथिलता बरतने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के बदले बढ़ावा देने का भी आरोप लगाते रहे हैं. जिससे क्षेत्र का विकास अवरूद्ध हो गया है. इस वजह से इस बार इस क्षेत्र की जनता इंडिया गठबंधन के वर्तमान विधायक कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप यादव को सबक सिखाने के लिए तैयार है. हाल में सम्पन्न लोकसभा के चुनाव में इस क्षेत्र की जनता ने विधानसभा चुनाव के पहले ही अपना फैसला दे दिया है. स्थानीय लोगों की मानें तो पिछले 25 वर्षों में इस क्षेत्र के किसान की समस्याओं का समाधान नहीं हो सका है.फलस्वरूप एक फसला धान की खेती पर निर्भर यहां के किसान पूरी तरह बरसा के भरोसे खेती करने को विवश हैं। इस क्षेत्र में न कोई फैक्ट्री है और न ही कोई उद्योग है.इस वजह से इस क्षेत्र के हजारों लोग रोजी- रोजगार के सिलसिले में मजदूरी करने दिल्ली, मुम्बई और अन्य दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं.आजादी के 75 साल बाद भी इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए कोई बेहतर शिक्षण संस्थान स्थापित नहीं किया जा सका है. इस कारण यहां के बच्चे उच्च शिक्षा के लिए हर दिन देवघर, गोड्डा और दुमका तक का सफर करने को विवश हैं. जबकि लोकसभा हो या विधानसभा प्रत्येक चुनाव में कांग्रेस, भाजपा, झामुमो और अन्य दलों के प्रत्याशी इस क्षेत्र में सिंचाई, शिक्षा स्वास्थ्य,शुद्ध पेयजल आदि सुविधा को बेहतर बनाने के वायदे पर जनता का आशीर्वाद मांगते रहे हैं. लेकिन इस क्षेत्र में न तो कोई उद्योग लगा,न ही अच्छे शिक्षण संस्थान खोले गए.

भाजपा ने राजधानी रांची सहित सभी मंडलों में मनाया हूल दिवस*

भाजपा द्वारा अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत अमर शहीद स्थल भोगनाडीह, राजधानी रांची स्थित मोराबादी के सिदो कान्हू पार्क, प्रदेश कार्यालय सहित राज्य के सभी मंडलों में हूल क्रांति के अमर शहीद महानायक सिदो-कान्हो, चांद-भैरव, फूलो-झानो की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी एवं पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने मोराबादी स्थित सिदो कान्हू पार्क में सिदो-कान्हो की प्रतिमा पर श्रंद्धाजलि अर्पित कर जनजातीय अस्मिता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए उनके अद्वितीय योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। जबकि प्रदेश कार्यालय में 'हूल क्रांति' के महानायकों के बलिदान दिवस पर प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

इसके अलावा भोगनाडीह सहित राज्य के सभी मंडलों में हूल क्रांति के महानायकों को पार्टी के विभिन्न नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा श्रद्धांजलि दी गई।

इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि हूल दिवस, जनजातीय समुदाय के कड़े संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है। आजादी की लड़ाई में झारखंड के जनजातीय समुदाय के महानायकों की उल्लेखनीय और अग्रणी भूमिका रही है। हूल दिवस केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि स्वाभिमान, साहस और स्वतंत्रता का अमर प्रतीक है। 30 जून 1855 को भोगनाडीह की धरती से वीर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो के नेतृत्व में हजारों संथालों ने ब्रिटिश शासन, शोषण और अन्याय के विरुद्ध 'हूल' का शंखनाद किया। सिदो-कान्हो, चांद-भैरव, फूलो-झानो सहित हजारों सपूतों ने अपनी कुर्बानी दी है। यह जनआंदोलन जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा के लिए लड़ा गया, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। हूल क्रांति के महानायकों के अद्वितीय शौर्य, त्याग, बलिदान और मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए उनके संघर्ष को कभी भूलाया और बिसराया नहीं जा सकता है। भारतीय जनता पार्टी ने ऐसे तमाम आजादी के मतवालों और नायकों को उचित सम्मान देने का काम किया है जबकि विपक्षी पार्टियों ने उनका उपहास उड़ाने का काम किया है। प्रधान, मानकी, मुंडा को जो सुविधाएं भाजपा सरकार द्वारा दी गई, राज्य सरकार द्वारा उस अधिकार से उन्हें वंचित कर अपनी मानसिकता जाहिर करने का काम किया गया है।

भोगनाडीह में सरकार की तानाशाही रवैए पर भड़के आदित्य साहू

भोगनाडीह में राज्य सरकार के तानाशाही रवैए पर प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए इसे प्रशासन का अनावश्यक हस्तक्षेप बताया है। कहा कि क्या अब आदिवासियों को अपने ही पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सरकार और प्रशासन की अनुमति लेनी होगी और बॉन्ड भरना पड़ेगा ? झारखंड सरकार का यह रवैया अंग्रेजी मानसिकता और हिटलरशाही नहीं तो क्या है?

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सूचना मिल रही है कि भोगनाडीह को पुलिस छावनी में तब्दील कर 50 से अधिक मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं। यह आदिवासियों को डराने का प्रयास नहीं तो क्या है। पिछले साल भी हूल दिवस के अवसर पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आंसू गैस चलाए गए थे। उन्होंने कहा कि अधिक अहंकार होना पतन का कारण बनता है। झारखंड सरकार उसी राह पर है। जनजातीय संस्कृति एवं विरासत को मिटाने का सपना देखने वालों की जनता जल्द ही पूरी तरह अस्तित्व खत्म कर देगी। जो स्थिति है उससे तो यही लगता है कि झारखंड में एक और हूल क्रांति की आवश्यकता है।

इस दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि संथाल परगना की वीरभूमि से वर्ष 1855 में ब्रिटिश शासन की दमनकारी और शोषणकारी नीतियों के विरुद्ध हूल आंदोलन का ऐतिहासिक बिगुल फूंका गया। सिदो मुर्मु, कान्हू मुर्मु, चांद मुर्मु, भैरव मुर्मु तथा वीरांगनाएं फूलो मुर्मु और झानो मुर्मु के नेतृत्व में संथाल समाज ने जल, जंगल, जमीन और अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए अभूतपूर्व संघर्ष का परिचय दिया। अंग्रेजी सत्ता को चुनौती देने वाला यह आंदोलन स्वतंत्रता, स्वाभिमान और अधिकारों के लिए जनजागरण का प्रतीक बना। हूल दिवस के अवसर पर उन सभी अमर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि, जिनका त्याग, पराक्रम और राष्ट्रभाव आज भी हम सभी को अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने की प्रेरणा देता है।

श्री मरांडी ने कहा कि 1855 के हूल उलगुलान के माध्यम से सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष कर उन्हें अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य किया था। इसके बाद संताल परगना क्षेत्र में भूमि बंदोबस्ती की जिम्मेदारी स्थानीय प्रधान व्यवस्था को सौंपने की परंपरा स्थापित हुई, जो लंबे समय से चली आ रही है। लेकिन दुर्भाग्यवश, पिछले कुछ वर्षों में कथित अबुआ सरकार के कार्यकाल में आदिवासी भूमि को लूटा जा रहा हैं। घुसपैठियों को राज्य सरकार का संरक्षण मिल रहा है। रिम्स-2 के नाम पर आदिवासियों की उपजाऊ भूमि अधिग्रहण के प्रयास कर सरकार अंग्रेजों वाली मानसिकता का परिचय दे रही है।

वहीं पाकुड़ जिला में संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने हूल दिवस पर हूल क्रांति के नायकों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। उन्होंने मौके पर कहा कि 30 जून 1855 को अंग्रेजी हुकूमत और ज़मींदारों के खिलाफ प्रथम आदिवासी विद्रोह का बिगुल फूंकने वाले#सिद्धो और #कान्हू के बलिदान दिवस #हुल_दिवस का अपना ऐतिहासिक महत्व है। यह पावन तिथि हम सबों को अपने राष्ट और अपनी मिट्टी की रक्षा के लिए मर-मिट जाने की प्रेरणा देती है।

इधर सिदो-कान्हो पार्क रांची में इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल, पूर्व विधायक राम कुमार पाहन, महानगर अध्यक्ष वरुण साहू सहित भारतीय जनता पार्टी के जिला पदाधिकारी, मंडल पदाधिकारी, वरिष्ठ कार्यकर्तागणों ने भी वीर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किया।

इस दौरान प्रदेश कार्यालय में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश और मुख्य सचेतक नवीन जयसवाल सहित वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

वहीं पाकुड़ में श्रंद्धाजलि कार्यक्रम के अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष बालमुकुंद सहाय, प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी, जिलाध्यक्ष सरिता मुर्मू सहित कई भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

देवघर-30 जून 2026 हुल दिवस पर अमर शहीद सिद्धू कान्हु की प्रतिमा पर इंटक, महिला एवं देवघर जिला कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग द्वारा माल्यार्पण।

देवघर: हुल दिवस के अवसर पर देवघर झारखंड प्रदेश इंटक के प्रदेश सचिव अजय कुमार, देवघर जिला इंटक के जिला अध्यक्ष अनंत मिश्रा, देवघर जिला महिला कांग्रेस की अध्यक्ष प्रमिला देवी, देवघर जिला कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष नित्यानंद सेवक, कांग्रेस नेता तुलसी पोद्दार, विष्णु हेंब्रम, शिवनाथ मुर्मू, अनिल पंडित, मनोरंजन सिंह, महिला कांग्रेस की संगीता शर्मा, देवघर जिला इंटक के सचिव अभिषेक सिंह, कोषाध्यक्ष आशीष कुमार ने देवघर प्रखंड के बदलाडीह में सिद्धू कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। झारखंड प्रदेश इंटक के प्रदेश सचिव कांग्रेस अजय कुमार ने हुल दिवस पर अमर शहीद सिद्धू कान्हु को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हुल दिवस झारखंड के इतिहास में एक अमर क्रांति व अंग्रेजों के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई की याद दिलाता है। संथाल विद्रोह के प्रणेता सिद्धू- कान्हू ,चांद -भैरव जैसे महान सपूतों ने जल, जंगल, जमीन एवं महाजनों के शोषण व अत्याचार के खिलाफ अपनी कुर्बानी दी। इन दोनों महान सपूतों के अलावा और कई हजार लोगों ने जनजातीय परंपरा व मातृभूमि की रक्षा के लिए अपनी शहादत दी थी। जरूरत है इन सबों की शहादत को इतिहास में समुचित स्थान दिलाने की। देवघर जिला इंटक के जिला अध्यक्ष अनंत मिश्रा ने कहा कि यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं की संथाल विद्रोह के नायक सिद्दू- कान्हू, चांद- भैरव चार भाइयों ने हुल क्रांति की शुरुआत की थी। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे योद्धा थे जिन्होंने अंग्रेजों से जमकर लोहा लिया और अंग्रेजी सत्ता की चूल हिला दी थी। अभिषेक सिंह सचिव देवघर जिला इंटक
देवघर-भारतीय जनता पार्टी देवघर जिला के द्वारा स्थानीय टावर चौक पर मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया गया।
देवघर: भारतीय जनता पार्टी देवघर जिला के द्वारा स्थानीय टावर चौक पर भोगनाडीह में हुई घटना हुल दिवस के अवसर पर सिद्धू कानून के वंशजों पर हेमंत सोरेन के पुलिसिया लाठी चार्ज और आंसू गैस छोड़े गए ।निर्दोष आदिवासियों को वह पिटा गया ।र्इसको लेकर हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया गया। मौके पर जिला अध्यक्ष सचिन रवानी ने कहा कि भोगनाडीह की घटना हेमंत सोरेन की आदिवासियों के प्रति दिखावा सच सामने आ गई। जिस तरह हेमंत सोरेन ने अपने पुलिसिया गुंडे के द्वारा निर्दोषआदिवासियों को पिटवाया गया ,सिद्ध कानू के वंशजों को अपमानित किया गया, उसे पिटा गया,उसे पूजा और कार्यक्रम करने से रोका गया और पुलिस की पिटाई से कई आदिवासी घायल हो गए। सिद्धू कानू ने इस देश में अपनी बलिदानी देकर देश को आजादी देने का काम किया उसका वंशज के साथ ऐसा व्यवहार करना बड़ा ही दुखद है। सिद्धू कानू के वंशज को सम्मान पूर्वक पूजा और कार्यक्रम करने का अनुमति देना चाहिए ना की बर्बरता पूर्ण लाठी चार्ज करवाना चाहिए। राज्य सरकार के तथाकथित विकास के सच को उजागर होने के डर से यह सरकार घबरा गई है आखिरकार अपनी हताशा और विफलता को छुपाने के लिए सरकार ने दमन का रास्ता चुना और निर्दोष आदिवासियों पर लाठी बरसाये। इस कार्यक्रम के मौके पर जिला महामंत्री अधीर चंद्र भैया ,संतोष उपाध्याय ,रीता चौरसिया, नवल राय, युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष आशीष दुबे ,एसटीमोर्चा जिला अध्यक्ष संतोष मुर्मू महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष रूपा केसरी, ओबीसी जिला अध्यक्ष सौरभ सुमन, बलराम पोद्दार विजया सिंह धनंजय तिवारी धनंजय खवाड़े सौरव पाठक गौतम राय पंकज सिंह भदोरिया संजय राय ईश्वर रायअमरजीत दुबे अलका सोनी रमेश राय सोना धारी झा संजय गुप्ता उमाशंकर प्रजापति पवन पांडे विजय मिश्रा आदि कार्यकर्ता मौजूद थे।
हूल दिवस के अवसर पर तिसरी में याद किए गए सिद्धो-कान्हो, किया गया माल्यार्पण

तिसरी प्रखंड के अंतर्गत दलपतदीह रोड में लॉरेंस गंगा राम टुडु, चांद किशोर हांसदा, ओम प्रकाश मुर्मू,अरविंद हेंब्रोम की अगुवाई में सोमवार को आदिवासी ससुर बेसी के बैनर तले सिंधु कान्हु की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित के साथ माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई साथ ही सिंधु कान्हु, फूलों झानो अमर रहे का नारा लगाया गया। चांद किशोर मुर्मू ने कहा हुल का मतलब होता है विद्रोह जिसको संथाली में हुल कहते है 1855 56 में महादानी प्रथा सह अंग्रेजों के विरुद्ध जो लड़ाई लड़ा जिसमे सिंधु कान्हु और फूलों झुनो शहीद हुए यह आज दुख का दिन है ससुर बेसी ने आज उन बीर लोगो को याद कर शत शत नमन करती है। लॉरेंस गंगा राम टुडु ने भारत के तमाम वाशियो को हुल दिवस की शुभ कामना देते हुए कहा आज ही के दिन 30 जून को हुल दिवस मनाने का शुभारंभ किया गया था साथ ही हुल दिवस में मंथन करने का दिन है हम सब आदिवासि शोषित है और शोषण भी किया जा रहा है। आज तक भारत सरकार और झारखंड सरकार के द्वारा हमलोग को धार्मिक दर्जा नहीं दी गई है।हम सरकार से यह मांग करते है हमे आदिवासी की धार्मिक का दर्जा मिले।अरविंद मुर्मू ने कहा 30 जून को हर वर्ष हूल दिवस मनाया जाता है. यह दिवस समर्पित है उन वीर संताल आदिवासियों को जिन्होंने अपनी जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र आंदोलन किया. संताल आदिवासियों का हूल अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आह्वान किया था, जिसमें दावा किया जाता है कि 50 से 60 हजार संताल आदिवासी जुट गए थे और अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध की घोषणा की थी. आदिवासियों ने कभी भी अंग्रेजों की गुलामी को स्वीकार नहीं किया। मौके पर चांद किशोर मुर्मू, लॉरेंस गंगा राम टुडु,अरविंद हेमब्रोम, ओम प्रकाश मुर्मू होडिंग गुरु गणेश टुडु,मुकेश हंसदा,युवा कालब अध्यक्ष अविनाश टुडु,रिंकी सोरेन,बसंती हेमब्रोम,सुशील मुर्मू,वैसी मराया,बासुदेव मुर्मू, सँझला मरांडी,कृष्ण किस्कू आदि लोग उपस्थित हुए।
*एशोसिऐशन ने हाई स्कूल टापर अदीबा खुर्शीद को किया सम्मानित*
हुसैनी शिया वेलफेयर एशोसिऐशन सुलतानपुर के अध्यक्ष हैदर अब्बास खाॅ की अगुवाई में रविवार को हसनपुर में अदीबा खुर्शीद को हुसैनी शिया वेलफेयर के पदाधिकारी मोहम्मद सकलैन खान एम एच खान गौरी एडवोकेट गुलाम अब्बास खाॅ मुबश्शिर हुसैन उर्फ गुड्डू मौलाना जीशान हैदर खान फसी हुल हसन औन अब्बास ने सम्मानित कर बधाई दी और उनके पिता खुर्शीद अहमद ने सभी का आभार ब्यक्त किया ।इसकी जानकारी हैदर अब्बास खाॅ अध्यक्ष हुसैनी शिया वेलफेयर एसो सिऐशन ने दी है।
सरहुल मिलन (बाहा) पर्व एवं आदिवासी समाज ससुरबैसी के बैनर तले अलग अलग जगहों पर मिलन का कार्यक्रम किया गया


तिसरी गिरिडीह तिसरी प्रखंड मुख्यालय भंडारी मुख्यमार्ग में आदिवासी कल्याण समिति ने सरहुल पूजा का आयोजन किया और सिंधु कान्हु के प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के उपरांत महिलाएं मांदर की थाप पर नृत्य किया । वहीं दूसरी तरफ गांधी मैदान तिसरी में आदिवासी संथाल समाज ने भी सरहुल पूजा का आयोजन कर संबोधन एवं नृत्य किया । कल्याण समिति के सरहुल पूजा में बतौर मुख्य अतिथि तिसरी सीओ अखिलेश प्रसाद मौजूद थे । उन्होंने कहा सरहुल झारखंड में मनाए जाने वाले एक महत्वपूर्ण त्योहार के रूप में जाना जाता है । जिसे पूरे राज्य में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन आदिवासी समुदाय नए साल का स्वागत करते हैं। सरहुल के अवसर पर प्रकृति अपने नए स्वरूप में नजर आती है । इस समय पेड़ों पर नए फूल और पत्ते खिलने लगते हैं । ‘सरहुल’ नाम दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘सर’, जिसका अर्थ है सखुआ या साल का फूल, और ‘हुल’, जिसका अर्थ है क्रांति. इसे सखुआ फूल की क्रांति का पर्व भी कहा जाता है । यह त्योहार चैत्र महीने की अमावस्या के तीसरे दिन मनाया जाता है, हालांकि कुछ गांवों में इसे पूरे महीने भर मनाने की परंपरा है । इस दिन लोग अखाड़े में नृत्य और गायन करते हैं और पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं।मौके पर रामी मरांडी ,राधे मरांडी , सुकेज हेंब्रम ,सोनू हेंब्रम ,एनसीएस हेंब्रम ,बिक्रम मुर्मू , समेल मुर्मू समेत दर्जनों मांझी हड़म शामिल थे । वहीं गांधी मैदान तिसरी में आदिवासी संथाल सुसरवेसी तिसरी के अरविंद मुरमू ,दीपक मुरमू ,किशोर हंसदा ,गंगाराम टुडू समेत दर्जनों लोग सामिल थे ।
गाजियाबाद में आग लगने से एक महिला और तीन बच्चाें की जलकर माैत
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के लोनी में रविवार की सुबह चार मंजिला मकान में आग लग गई। सूचना पर लोनी और साहिबाबाद फायर स्टेशन से तीन गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। फायर यूनिट ने मकान में फंसे दम्पत्ति और उनके बेटे को गम्भीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया है। घटना में एक महिला और तीन बच्चों की मौत हो गई।

मुख्यमंत्री याेगी ने हादसे काे लिया संज्ञान, अधिकारियाें काे दिए निर्देश

मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) रा‌हुल पाल ने बताया गली संकरी होने के कारण फायर यूनिट को ऑपरेशन को अंजाम देने में काफी परेशानी आई। दीवार तोड़कर आग बुझाई गई। टीम ने दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। हादसे में चार लोगों की मौत हुई है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद में आग लगने से हुए हादसे का संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। साथ ही घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर जिला प्रशासन के अधिकारियों को उनके समुचित उपचार के निर्देश दिए हैं।

राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।सीएफओ राहुल पाल ने बताया कि चार खंभा रोड पर गली नंबर-पांच (कंचन पार्क) के चार मंजिला मकान में आग लगी थी। आग ने दूसरे और तीसरे तल को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया था। गली संकरी होने के कारण फायर टेंडर मौके पर जाने की स्थिति नहीं थी। ऐसे में फायर टेंडर बाहर खड़े करके बराबर के मकानों छह हौज पाइप डाले गए।

दीवार तोड़ी गई और उसके बाद आग पर काबू पाया गया

बराबर के मकान पर चढ़कर दीवार तोड़ी गई और उसके बाद आग पर काबू पाया गया। जीना संकरा होने के कारण टीम को ऊपर तक जाने में बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ा। संकरे जीने में सामान भी रखा हुआ था और धुआं भर गया था। फायर टीम ने मुश्किल परिस्थितियों के खुद बचाते हुए मकान में फंसे लोगों को बाहर निकाला और स्थानीय लोगों व पुलिस के सहयोग से अस्पताल पहुंचाया।

फायर यूनिट ने आग को शांत कर तुरंत अंदर प्रवेश किया

मौके पर मौजूद पड़ोसियों ने बताया कि मकान में परिवार फंसा हुआ है। फायर यूनिट ने आग को शांत कर तुरंत अंदर प्रवेश किया गया और फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। इनमें महिला 32 वर्षीय गुलबहार पत्नी शाहनवाज, पुत्र आठ वर्षीय शान, नौ वर्षीय जान पुत्र शाहनवाज और जीशान पुत्र शमसाद बेहोशी के हालत में पाए गए। सभी को स्थानीय पुलिस व जनसमूह द्वारा हॉस्पिटल भर्ती कराया गया। घटना में गुलबहार, जीशान, अयान और शान की मौत हो गई।

आग से सिलाई मशीने और कपड़े जल गए

चार लोग मकान की छत पर फंसे थे। इनमें 30 वर्षीय आयशा पत्नी शमसाद, महिला का बेटा चार वर्ष का बच्चा अयान झुलसे पाए गए। दो लोगों 30 वर्षीय शाहनवाज और शमसाद को सुरक्षित छत से उतारा गया। मकान में द्वितीय तल पर सिलाई का काम होता है। आग से सिलाई मशीने और कपड़े जल गए हैं।
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने राज्य के सरकारी तथा सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए वर्ष 2025 की वार्षिक अवकाश तालिका की जारी


झा. डेस्क 

नया साल 2025 बस आने वाला है। हर कोई नये साल का बेसब्री से इंतजार रहा है। लोगों की उत्सुकता इस बात में रहती है कि नये साल में कितने दिन छुट्टियां रहेगी। किस किस त्योहार पर कब कब स्कूल बंद रहेंगे। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने राज्य के सरकारी तथा सहायता प्राप्त (अल्पसंख्यक सहित) स्कूलों के लिए वर्ष 2025 की एकीकृत वार्षिक अवकाश तालिका जारी कर दी है।

2025 में 60 दिन रहेगी छुट्टी 

विभाग की तरफ से दी गयी जानकारी के मुताबिक विशेष परिस्थिति में अवकाश घोषित होने पर उसकी क्षतिपूर्ति रविवार या अन्य अवकाश के दिन की जाएगी। विभाग द्वारा अधिसूचित उर्दू स्कूलों में रविवार की जगह शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा। छुट्टियों की लिस्ट सभी श्रेणी के स्कूलों अर्थात प्राथमिक, माध्यमिक तथा प्लस टू स्कूलों में लागू होगी। इसके तहत स्कूलों में वर्ष 2025 में 60 दिनों का अवकाश रहेगा।

इन छुट्टियों में हो सकेगा 

विभाग की तरफ से दी गयी जानकारी के मुताबिक विशेष परिस्थिति में अवकाश घोषित होने पर उसकी क्षतिपूर्ति रविवार या अन्य अवकाश के दिन की जाएगी। विभाग द्वारा अधिसूचित उर्दू स्कूलों में रविवार की जगह शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा। छुट्टियों की लिस्ट सभी श्रेणी के स्कूलों अर्थात प्राथमिक, माध्यमिक तथा प्लस टू स्कूलों में लागू होगी। इसके तहत स्कूलों में वर्ष 2025 में 60 दिनों का अवकाश रहेगा।

इन छुट्टियों में हो सकेगा बदलाव 

इनमें पांच दिनों के वैसे अवकाश भी सम्मिलित हैं, जो स्थानीय स्तर पर वहां के पर्व त्योहार या अन्य आवश्यकता को ध्यान में रखकर जिला स्तर पर तय किए जाएंगे। चांद दिखने के अनुसार मुस्लिम त्योहारों के अवकाश में परिवर्तन हो सकेगा। राष्ट्रीय पर्व का आयोजन स्कूल में अनिवार्य रूप से होगा। अन्य कोई अवसर पर बच्चे परेड या रैली में सम्मिलित नहीं होंगे। केंद्र या विभाग के निर्देश पर कोई कार्यक्रम या समारोह होने पर उसका आयोजन शाम तीन बजे के बाद होगा।

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इन स्कूलों पर नहीं लागू होगा नियम 

यह अवकाश तालिका आवासीय स्कूलों पर लागू नहीं होगी।विभाग द्वारा जारी अवकाश तालिका के तहत सरकारी व सहायता प्राप्त स्कूलों में एक से पांच जनवरी तक शीतकालीन अवकाश रहेगा। वहीं, 22 मई से दो जून तक ग्रीष्माकालीन अवकाश रहेगा। इसके बाद 28 दिसंबर से 31 दिसंबर तक शीतकालीन अवकाश रहेगा।

इसमें कहा गया है कि मौसम की स्थिति के अनुसार, विभागीय सचिव तथा उपायुक्त द्वारा शीतकालीन व ग्रीष्मकालीन अवकाश में संशोधन किया जा सकेगा तथा अतिरिक्त अवकाश का निर्णय लिया जा सकेगा।

स्कूलों में छुट्टी की पूरी लिस्ट

सरकारी स्कूलों में घोषित अवकाश (2025)

• एक से पांच जनवरी : शीतकालीन अवकाश

• 14 जनवरी : मकर संक्रांति

• 23 जनवरी : नेताजी सुभाषचंद्र बोस जयंती

• 26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (रविवार)

• दो फरवरी : बसंत पंचमी (रविवार)

• 12 फरवरी : रविदास जयंती

• 26 फरवरी : महाशिवरात्रि

• 13 मार्च : होलिका दहन

• 14 मार्च : हाेली

• 31 मार्च : ईद-उल-फितर

• एक अप्रैल : सरहुल

• दो अप्रैल : सरहुल फुलखोंसी

• छह अप्रैल : रामनवमी (रविवार)

• 10 अप्रैल : महावीर जयंती

• 14 अप्रैल : आंबेडकर जयंती

• 18 अप्रैल : गुड फ्राइडे

• एक मई : मजदूर दिवस

• 12 मई : बुद्ध पूर्णिमा

• 22 मई-दो जून : ग्रीष्मकालीन अवकाश

• सात जून : बकरीद/ईद उल जुहा

• 27 जून : रथ यात्रा

• 30 जून : हुल दिवस

• छह जुलाई : मुहर्रम (रविवार)

• नौ अगस्त : विश्व आदिवासी दिवस, रक्षा बंधन

• 15 अगस्त : स्वतंत्रता दिवस

• 16 अगस्त : जन्माष्टमी

• 27 अगस्त : गणेश चतुर्थी

• तीन सितंबर : करमा

• चार सितंबर : करमा फूलखोंसी

पांच सितंबर : मिलाद उन नबी

• 17 सितंबर : विश्वकर्मा पूजा

• 22 सितंबर : शारदीय नवरात्र, कलश स्थापन

• 29 सितंबर-दो अक्टूबर : दशहरा (दो अक्टूबर-गांधी जयंती)

• 20 अक्टूबर : दीपावली

• 22 अक्टूबर : गोवर्द्धन पूजा

• 23 अक्टूबर : भैया दूज, चित्रगुप्त पूजा

• 27 अक्टूबर : सूर्य षष्ठी डाला छठ (सायं अर्ध्य)

• 28 अक्टूबर : सूर्य षष्ठी डाला छठ (प्रात: अर्ध्य)

• पांच नवंबर : गुरुनानक जयंती

• 15 नवंबर : राज्य स्थापना दिवस

• 25 दिसंबर : क्रिसमस

• 28-31 दिसंबर : शीतकालीन अवकाश

झारखंड विधानसभा चुनाव 2024: क्या गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में पड़ने वाले पोड़ैयाहाट विधानसभा सीट पर प्रदीप यादव का किला इस बार ध्वस्त होगा...?*

*आइये अवलोकन करते हैं इस सीट का इतिहास और प्राप्त मतदान के आकड़ों का...!* झारखंड डेस्क चुनाव आयोग टीम की झारखंड दौरा और सभी राजनितिक दलों के प्रतिनिधि से मुलाक़ात के बाद विधानसभा चुनाव की आहट शुरू हो गयी है.इस बीच सभी सीटों पर राजनितिक दलों द्वारा अपने प्रत्याशी उतारने और जीत सुनिश्चित करने के लिए दाव-पेंच भी शुरू हो गया है.झारखंड में 81 विधान सभा सीट है जिसमे 80 सीटों पर चुनाव के जरिये विधायकों का चुनाव होता है और एक सीट पर मनोनयन के द्वारा. हर सीट का अपना अपना गणित है.परिरस्थिति भी है. आइये आज हम झारखंड के गोड्डा जिले का पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र की बात करते हैं यह सीट राज्य के हाई प्रोफाइल सीटों में शुमार है. इस क्षेत्र से प्रदीप यादव पार्टी बदल बदल कर लगातार पांच बार से विधायक निर्वाचित होते रहे हैं. इस बार गोड्डा से वे लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन निशिकांत ने उन्हें मात दे दिया. अब उनका इस सीट से विधानसभा चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है. वे वर्ष 2000 से इस सीट पर पहले भाजपा, फिर जेवीएम और अब कांग्रेस से चुनाव लड़ते रहे हैं.और जीतते रहे हैं. इनका झामुमो, भाजपा और अन्य के बीच मुकाबला होता रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इस क्षेत्र में कांग्रेस से बढ़त लेकर आगामी विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र के वर्तमान विधायक प्रदीप यादव के गढ़ को ध्वस्त करने का संकेत दिया है. *पोड़ैयाहाट विधानसभा में है 40 प्रतिशत आदिवासी-मुस्लिम वोटर* पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट, दुमका जिले के सरैयाहाट प्रखंड के साथ गोड्डा प्रखंड के कुछ पंचायतों तक फैला है। पूर्व के एक आंकड़ों के मुताबिक इस क्षेत्र में आदिवासी मतदाताओं की आबादी 30 प्रतिशत, मुस्लिम 10, यादव 25, दलित 15, ब्राह्मण 5, और अन्य पिछड़ी जातियों की आबादी लगभग 14 प्रतिशत है। *प्रदीप यादव ने यहां से 5 बार विधायक चुने गए* अगर बात करें पोड़ैयाहाट विधानसभा सीट की to वर्ष 2000 से 2019 तक प्रदीप यादव पार्टी बदल बदल कर लगातार पांच बार इस क्षेत्र की जनता का आशीर्वाद बटोरते रहे हैं. 2024 के जून में सम्पन्न गोड्डा लोकसभा क्षेत्र से जुड़े पोड़ैयाहाट क्षेत्र में भी भाजपा के निशिकांत दूबे कांग्रेस प्रत्याशी और इस क्षेत्र के विधायक प्रदीप यादव से मात्र लगभग 9,540 अधिक वोट हासिल करने में सफल हुए और चौथी बार गोड्डा से सांसद चुने गए. इससे भाजपा ने पिछले पांच चुनावों से लगतार इस सीट पर जीत दर्ज करने वाले कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव की चैन उड़ा दी है. ऐसे भी गोड्डा के भाजपा सांसद डा. निशिकांत दुबे और पोड़ैयाहाट के विधायक प्रदीप यादव के बीच अडानी पावर प्लांट, गोड्डा में रेल सेवा शुरू करने सहित कई मुद्दों को लेकर तल्ख बयानबाजी होते रहे हैं. इसलिए लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा का चुनाव हर चुनाव में पोड़ैयाहाट सुर्खियों में रहा है. *खरगे से नजदीकियां बढ़ने से टिकट मिलना तय है* लोकसभा चुनाव में भाजपा से गहरी शिकस्त खाने के बावजूद हाल के वर्षों में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से नजदीकियां बढ़ने की वजह से प्रदीप यादव को इस बार भी यहां से कांग्रेस का टिकट मिलना तय माना जा रहा है.कांग्रेस इंडिया गठबंधन में शामिल हैं और राज्य में झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के अति करीबी होने की वजह से संभव है कि इस बार इंडिया गठबंधन प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए झामुमो, कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप यादव के पक्ष में इस सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारे.जिससे भाजपा के बढ़ते कद को रोका जा सके. कांग्रेस के प्रदीप यादव के पक्ष में बने माहौल के बावजूद कांग्रेस के कुछ पुराने कार्यकर्ता भी पार्टी का टिकट हासिल करने के लिए रांची और दिल्ली की दौड़ लगा रहे और कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की परिक्रमा कर रहे हैं. वहीं राजद की ओर से भी इस सीट पर दावा ठोकने की चर्चा है.जबकि भाजपा में टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है. पार्टी प्रत्याशी चयन को लेकर विभिन्न स्तरों पर बैठकों का सिलसिला जारी है. *यहां बीजेपी के आधा दर्जन से अधिक हैं दावेदार* पोड़ैयाहाट विधानसभा सीट पर चर्चा है कि भाजपा कार्यकताओं से रायशुमारी के क्रम में आये पांच सम्भावित प्रत्याशियों की सूची तैयार कर प्रदेश और केन्द्रीय नेतृत्व को भेजा दिया गया है. लोकसभा चुनाव के दौरान पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को मिली बढ़त के आधार पर भाजपा के टिकट के प्रबल दावेदारों में गोड्डा के बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे व प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के करीबी समाजसेवी सीताराम पाठक, विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी बजरंगी प्रसाद यादव, जिला परिषद के सदस्य रवीन्द्र कुमार सिंह, पूर्व विधायक प्रशांत कुमार की पत्नी ममता देवी, उनके पुत्र, पूर्व प्रत्याशी गजेन्द्र सिंह, देवेन्द्र सिंह सरीखे कई अन्य नामों की चर्चा है. लेकिन राज्य में चुनिंदा हाईप्रोफाइल हॉट सीटों में शुमार गोड्डा जिले के इस सामान्य सीट पर भाजपा किसे अपना प्रत्याशी बनाती है यह तो आने वाला समय तय करेगा. इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा. लेकिन इतना तो तय है कि इस सीट पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही होगा. *इस सीट से जीत कर प्रदीप यादव बाबूलाल की सरकार में बने थे मंत्री* ज़ब बिहार से अलग होकर 15 नवम्बर 2000 को झारखंड राज्य बना और बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में सरकार बनी तो पहली बार इस क्षेत्र से विधायक चुने गये प्रदीप यादव को मंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. वर्ष 2005 में भी भाजपा के टिकट पर प्रदीप यादव लगातार दूसरी बार यहां जीत दर्ज की. 2006 में भाजपा में अंदरुनी विवाद बढ़ जाने की बजह से बाबूलाल मरांडी ने भाजपा और कोडरमा के सांसद से इस्तीफा दे दिया. झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक के नाम से नया दल बनाया. इसी क्रम में प्रदीप यादव सरीखे कई दिग्गज विधायकों ने भाजपा से किनारा कर लिया और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की पार्टी जेवीएम में शामिल हो गये. इसके बाद प्रदीप यादव 2009, 2014 और 2019 तक पार्टी बदल-बदल कर चुनाव मैदान में उतरकर लगातार पांच बार इस क्षेत्र से विधायक चुने गये. 2019 के चुनाव में जेवीएम के टिकट पर पार्टी सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी, प्रदीप यादव और बंधु टिर्की समेत तीन विधायक निर्वाचित हुए. राज्य में हेमंत सोरेन की सरकार गठन के बाद 2020 में बाबूलाल मरांडी ने भाजपा में जेवीएम का विलय कर दिया. जबकि प्रदीप यादव और बंधु तिर्की कांग्रेस में शामिल हो गए. बाद में प्रदीप यादव इंडिया गठबंधन में शामिल कांग्रेस पार्टी ने 2024 में सम्पन्न लोकसभा चुनाव में गोड्डा से अपना प्रत्याशी बनाया. लेकिन इस लोकसभा चुनाव में भाजपा के निशिकांत दुबे ने पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस से 9 हजार से अधिक वोट लाकर कांग्रेस के सम्भावित उम्मीदवार प्रदीप यादव के समक्ष बड़ी चुनौती पेश कर दी है. *इस बार जयराम महतो की पार्टी की उपस्थिति से बिगाड़ेगी यहां खेल* हालांकि अभी तक विधानसभा चुनाव के तिथि की घोषणा नहीं हुई है.बहरहाल चुनाव की घोषणा के बाद पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र के चुनावी मैदान में विभिन्न दलों के प्रत्याशियों के उतरने पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगा. इस बीच हाल के दिनों में झारखंड में खतियान के आधार पर सरकारी रिक्त पदों पर नियुक्ति और स्थानीय युवाओं को सभी क्षेत्र में प्राथमिकता देने की व्यवस्था को लागू करने आदि मुद्दों को लेकर संघर्ष करने वाले जयराम महतो की पार्टी की सक्रियता इस क्षेत्र में भी बढ़ी है.ऐसे में जयराम महतो की पार्टी जेकेबीकेस ने भूईंया, घटवाल,खैतौरी और कुड़मी समुदाय से इस क्षेत्र में अपना उम्मीदवार उतार दिया तो कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के समक्ष मुसीबत खड़ा कर दे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा. फिलहाल लोग चुनाव के तिथि के साथ एनडीए में शामिल भाजपा और इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के प्रत्याशियों की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं. इन दलों से कौन प्रत्याशी मैदान में आता है यह देखना दिलचस्प होगा. 2024 के गोड्डा लोकसभा क्षेत्र से जुड़े पोड़ैयाहाट विधानसभा की वोट की स्थिति प्रत्याशी -पार्टी - प्राप्त मत निशिकांत दुबे - भाजपा- 1,07,082 प्रदीप यादव- कांग्रेस- 93,136 वर्ष 2019 में विधानसभा चुनाव परिणाम प्रत्याशी- पार्टी- प्राप्त मत प्रदीप यादव- जेवीएम -77,358 गजाधर सिंह- बीजेपी- 63,761 अशोक कुमार- जेएमएम- 34,745 *वर्ष 2019 में विधानसभा चुनाव परिणाम* प्रत्याशी- पार्टी- प्राप्त मत प्रदीप यादव- जेवीएम -77,358 गजाधर सिंह- बीजेपी- 63,761 अशोक कुमार- जेएमएम- 34,745 वर्ष 2014 में विधानसभा चुनाव परिणाम प्रत्याशी - पार्टी - प्राप्त मत प्रदीप यादव- जेवीएम -64,036 देवेन्द्र सिंह -बीजेपी -52,878 अशोक कुमार-जेएमएम- 44,737 पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास पर गौर करें तो 1952 में बिहार विधानसभा के प्रथम चुनाव में पोड़ैयाहाट-सह-जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र के नाम से था.जहां से दो सदस्यों के चुनाव का प्रावधान किया गया था. इस चुनाव में दो सदस्यीय इस सीट पर सामान्य जाति से कांग्रेस के जगदीश नारायण मंडल और अजजा से झारखंड पार्टी के चुनका हेम्ब्रम विधायक चुने गए. वहीं 1957 में पोड़ैयाहाट को गोड्डा विधानसभा क्षेत्र से जोड़ दिया गया.इस चुनाव में भी दो सदस्यों के चुनाव का प्रावधान किया गया. जिसमें सामान्य सीट से झारखंड पार्टी के टिकट पर मणिलाल यादव और अजजा से निर्दलीय चुनका हेम्ब्रम विधायक चुने गए. 1962 में अजजा के लिए सुरक्षित एक सदस्यीय पोड़ैयाहाट अलग विधानसभा क्षेत्र के रूप में अस्तित्व में आया और 1972 तक अजजा के एक सदस्य के लिए सुरक्षित रहा. 1977 में इस सीट को अनारक्षित कर दिया गया. इसके बाद इस क्षेत्र में दो उपचुनाव सहित विधानसभा के लिये 16 चुनाव हुए.इसमें जेएमएम 6,जेवीएम 3, कांग्रेस 2 बार, जनसंघ, जनता पार्टी और प्रजातांत्रिक हुल झारखंड पार्टी के प्रत्याशियों ने एक एक बार इस सीट पर जीत दर्ज की.कांग्रेस से कभी दिग्विजय नेता रहे बिहार विधान परिषद के पूर्व सभापति पृथ्वी चन्द्र किस्कू के साथ जननायक कर्पूरी ठाकुर के अति करीबी और उनके मंत्रिमंडल में संसदीय सचिव के रूप में शामिल संताल परगना में 1974 छात्र आंदोलन की अलख जगाने वाले कमला कांत प्रसाद सिन्हा उर्फ लालू दा भी 1977 में इसी सीट से जनता पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए थे. इसके बाद इस क्षेत्र का राजनीतिक समीकरण बदल गया. शिबू सोरेन के नेतृत्व में संताल परगना में झारखंड अलग राज्य का आंदोलन परवान चढ़ा.झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के कभी दाहिना हाथ कहलाने तथा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के मुख्यमंत्रित्व काल में सेडो छाया मुख्यमंत्री समझा जाने वाले सूरज मंडल ने 1980 में इस क्षेत्र पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली. 1980, 1985, 1990 में झामुमो के टिकट पर सूरज मंडल इस क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक चुने गये. 1991 में सूरज मंडल गोड्डा लोकसभा सीट से झामुमो के टिकट पर सांसद चुने गये.इसके बाद 1992 में इस सीट पर उपचुनाव कराया गया। जिसमें सूरज मंडल को अपना राजनीतिक गुरु समझने वाले प्रशांत कुमार झामुमो के टिकट पर पहली बार इस क्षेत्र से विधायक चुने गए. 1995 में भी झामुमो के टिकट पर प्रशांत कुमार ही विधायक निर्वाचित हुए.लेकिन 2000 में पासा पलटा और कभी बाबूलाल मरांडी के किचन कैबिनेट में शामिल रहे प्रदीप यादव ने दूसरे प्रयास में झामुमो को इस क्षेत्र में गहरी शिकस्त दी और भाजपा के टिकट पर पोड़ैयाहाट में पहली बार कमल खिलाने में सफल हुए. 1952-2019 के बीच पोड़ैयाहाट के निर्वाचित विधायकों की सूची वर्ष- प्रत्याशी- पार्टी 1952- चुनका हेम्ब्रम (अजजा.) -झापा 1952 जगदीश ना. मंडल(सामा.) कांग्रेस 1957 चुनका हेम्ब्रम (अजजा) निर्दलीय 1957 मणिलाल यादव (सामा.) झापा 1962 यदुनंदन मुर्मू कांग्रेस 1967 एम मुर्मू जनसंघ 1969 एडवर्ड मरांडी पीएचजे 1972 पृथ्वी चंद्र किस्कू कांग्रेस 1977 कमला कांत सिन्हा ज.पा. 1980 सूरज मंडल जेएमएम 1985 सूरज मंडल जेएमएम 1990 सूरज मंडल जेएमएम 1992 प्रशांत कुमार जेएमएम 1995 प्रशांत कुमार जेएमएम 2000 प्रदीप यादव बीजेपी 2003 प्रशांत कुमार जेएमएम 2005 प्रदीप यादव बीजेपी 2009 प्रदीप यादव जेवीएम 2014 प्रदीप यादव जेवीएम 2019 प्रदीप यादव जेवीएम अपने द्वारा पिछले 25 वर्षों में किये गए विकास कार्यों पर प्रदीप यादव को है भरोसा प्रदीप यादव वर्ष 2000 से पहले भाजपा, फिर जेवीएम के टिकट पर विधानसभा में लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले वर्तमान विधायक प्रदीप यादव और उनकी पार्टी के समर्थकों का दावा है कि इस क्षेत्र में वर्तमान विधायक ने अपने 25 वर्ष के कार्यकाल में सड़क और पुल पुलिया का जाल बिछाकर लगभग सभी गांवों को सड़कों से जोड़ा है. जिससे लोगों के लिए आवागमन सुगम हो गया है. वहीं इस क्षेत्र के अधिकांश गांवों में पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य की समुचित व्यवस्था की गयी है. राज्य सरकार द्वारा राज्य के किसानों के बकाया 50 हजार रुपए के कृषि ऋण माफी योजना के माध्यम से इस क्षेत्र के अनेकों किसानों को ऋण से मुक्ति मिली है. इसके साथ ही हाल में राज्य सरकार ने आम लोगों के दो लाख तक के बैंक ऋण माफी की घोषणा की है. इस घोषणा से बैंक ऋण की समस्या से परेशान किसान और हजारों गरीब निर्धन परिवारों को ऋण से निजात मिलने की उम्मीद है. जबकि राज्य सरकार ने 18 से 50 वर्ष तक की बहू बेटियों के लिए मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना को चालू करने का ऐतिहासिक साहसिक फैसला लिया है जिससे इस क्षेत्र की आर्थिक रूप से कमजोर बेसहारा हजारों माता-बहनें लाभान्वित हुई हैं. जबकि सरकार ने राज्य में सर्वजन पेंशन नामक महत्वाकांक्षी योजना शुरू कर 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के बेसहारा व वृद्धों को सहारा दिया है. जिससे लाखों बेसहारा लोगों को नयी ज़िन्दगी मिली है. *बीजेपी भ्रष्टाचार और बेरोजगारी को बनायेगी मुद्दा* सिंचाई योजनाओं के कार्यान्वयन में शिथिलता बरतने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के बदले बढ़ावा देने का भी आरोप लगाते रहे हैं. जिससे क्षेत्र का विकास अवरूद्ध हो गया है. इस वजह से इस बार इस क्षेत्र की जनता इंडिया गठबंधन के वर्तमान विधायक कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप यादव को सबक सिखाने के लिए तैयार है. हाल में सम्पन्न लोकसभा के चुनाव में इस क्षेत्र की जनता ने विधानसभा चुनाव के पहले ही अपना फैसला दे दिया है. स्थानीय लोगों की मानें तो पिछले 25 वर्षों में इस क्षेत्र के किसान की समस्याओं का समाधान नहीं हो सका है.फलस्वरूप एक फसला धान की खेती पर निर्भर यहां के किसान पूरी तरह बरसा के भरोसे खेती करने को विवश हैं। इस क्षेत्र में न कोई फैक्ट्री है और न ही कोई उद्योग है.इस वजह से इस क्षेत्र के हजारों लोग रोजी- रोजगार के सिलसिले में मजदूरी करने दिल्ली, मुम्बई और अन्य दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं.आजादी के 75 साल बाद भी इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए कोई बेहतर शिक्षण संस्थान स्थापित नहीं किया जा सका है. इस कारण यहां के बच्चे उच्च शिक्षा के लिए हर दिन देवघर, गोड्डा और दुमका तक का सफर करने को विवश हैं. जबकि लोकसभा हो या विधानसभा प्रत्येक चुनाव में कांग्रेस, भाजपा, झामुमो और अन्य दलों के प्रत्याशी इस क्षेत्र में सिंचाई, शिक्षा स्वास्थ्य,शुद्ध पेयजल आदि सुविधा को बेहतर बनाने के वायदे पर जनता का आशीर्वाद मांगते रहे हैं. लेकिन इस क्षेत्र में न तो कोई उद्योग लगा,न ही अच्छे शिक्षण संस्थान खोले गए.
झारखंड विधानसभा चुनाव 2024: क्या गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में पड़ने वाले पोड़ैयाहाट विधानसभा सीट पर प्रदीप यादव का किला इस बार ध्वस्त होगा...?

आइये अवलोकन करते हैं इस सीट का इतिहास और प्राप्त मतदान के आकड़ों का...!

झारखंड डेस्क 

चुनाव आयोग टीम की झारखंड दौरा और सभी राजनितिक दलों के प्रतिनिधि से मुलाक़ात के बाद विधानसभा चुनाव की आहट शुरू हो गयी है.इस बीच सभी सीटों पर राजनितिक दलों द्वारा अपने प्रत्याशी उतारने और जीत सुनिश्चित करने के लिए दाव-पेंच भी शुरू हो गया है.झारखंड में 81 विधान सभा सीट है जिसमे 80 सीटों पर चुनाव के जरिये विधायकों का चुनाव होता है और एक सीट पर मनोनयन के द्वारा.

हर सीट का अपना अपना गणित है.परिरस्थिति भी है.

आइये आज हम झारखंड के गोड्डा जिले का पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र की बात करते हैं 

यह सीट राज्य के हाई प्रोफाइल सीटों में शुमार है. इस क्षेत्र से प्रदीप यादव पार्टी बदल बदल कर लगातार पांच बार से विधायक निर्वाचित होते रहे हैं. इस बार गोड्डा से वे लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन निशिकांत ने उन्हें मात दे दिया. अब उनका इस सीट से विधानसभा चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है.

वे वर्ष 2000 से इस सीट पर पहले भाजपा, फिर जेवीएम और अब कांग्रेस से चुनाव लड़ते रहे हैं.और जीतते रहे हैं.

इनका झामुमो, भाजपा और अन्य के बीच मुकाबला होता रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इस क्षेत्र में कांग्रेस से बढ़त लेकर आगामी विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र के वर्तमान विधायक प्रदीप यादव के गढ़ को ध्वस्त करने का संकेत दिया है.

पोड़ैयाहाट विधानसभा में है 40 प्रतिशत आदिवासी-मुस्लिम वोटर

पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट, दुमका जिले के सरैयाहाट प्रखंड के साथ गोड्डा प्रखंड के कुछ पंचायतों तक फैला है। पूर्व के एक आंकड़ों के मुताबिक इस क्षेत्र में आदिवासी मतदाताओं की आबादी 30 प्रतिशत, मुस्लिम 10, यादव 25, दलित 15, ब्राह्मण 5, और अन्य पिछड़ी जातियों की आबादी लगभग 14 प्रतिशत है।

प्रदीप यादव ने यहां से 5 बार विधायक चुने गए

अगर बात करें पोड़ैयाहाट विधानसभा सीट की to वर्ष 2000 से 2019 तक प्रदीप यादव पार्टी बदल बदल कर लगातार पांच बार इस क्षेत्र की जनता का आशीर्वाद बटोरते रहे हैं. 2024 के जून में सम्पन्न गोड्डा लोकसभा क्षेत्र से जुड़े पोड़ैयाहाट क्षेत्र में भी भाजपा के निशिकांत दूबे कांग्रेस प्रत्याशी और इस क्षेत्र के विधायक प्रदीप यादव से मात्र लगभग 9,540 अधिक वोट हासिल करने में सफल हुए और चौथी बार गोड्डा से सांसद चुने गए. इससे भाजपा ने पिछले पांच चुनावों से लगतार इस सीट पर जीत दर्ज करने वाले कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव की चैन उड़ा दी है. ऐसे भी गोड्डा के भाजपा सांसद डा. निशिकांत दुबे और पोड़ैयाहाट के विधायक प्रदीप यादव के बीच अडानी पावर प्लांट, गोड्डा में रेल सेवा शुरू करने सहित कई मुद्दों को लेकर तल्ख बयानबाजी होते रहे हैं. इसलिए लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा का चुनाव हर चुनाव में पोड़ैयाहाट सुर्खियों में रहा है.

खरगे से नजदीकियां बढ़ने से टिकट मिलना तय है

लोकसभा चुनाव में भाजपा से गहरी शिकस्त खाने के बावजूद हाल के वर्षों में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से नजदीकियां बढ़ने की वजह से प्रदीप यादव को इस बार भी यहां से कांग्रेस का टिकट मिलना तय माना जा रहा है.कांग्रेस इंडिया गठबंधन में शामिल हैं और राज्य में झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के अति करीबी होने की वजह से संभव है कि इस बार इंडिया गठबंधन प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए झामुमो, कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप यादव के पक्ष में इस सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारे.जिससे भाजपा के बढ़ते कद को रोका जा सके. कांग्रेस के प्रदीप यादव के पक्ष में बने माहौल के बावजूद कांग्रेस के कुछ पुराने कार्यकर्ता भी पार्टी का टिकट हासिल करने के लिए रांची और दिल्ली की दौड़ लगा रहे और कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की परिक्रमा कर रहे हैं. वहीं राजद की ओर से भी इस सीट पर दावा ठोकने की चर्चा है.जबकि भाजपा में टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है. पार्टी प्रत्याशी चयन को लेकर विभिन्न स्तरों पर बैठकों का सिलसिला जारी है.

यहां बीजेपी के आधा दर्जन से अधिक हैं दावेदार

पोड़ैयाहाट विधानसभा सीट पर चर्चा है कि भाजपा कार्यकताओं से रायशुमारी के क्रम में आये पांच सम्भावित प्रत्याशियों की सूची तैयार कर प्रदेश और केन्द्रीय नेतृत्व को भेजा दिया गया है. लोकसभा चुनाव के दौरान पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को मिली बढ़त के आधार पर भाजपा के टिकट के प्रबल दावेदारों में गोड्डा के बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे व प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के करीबी समाजसेवी सीताराम पाठक, विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी बजरंगी प्रसाद यादव, जिला परिषद के सदस्य रवीन्द्र कुमार सिंह, पूर्व विधायक प्रशांत कुमार की पत्नी ममता देवी, उनके पुत्र, पूर्व प्रत्याशी गजेन्द्र सिंह, देवेन्द्र सिंह सरीखे कई अन्य नामों की चर्चा है. लेकिन राज्य में चुनिंदा हाईप्रोफाइल हॉट सीटों में शुमार गोड्डा जिले के इस सामान्य सीट पर भाजपा किसे अपना प्रत्याशी बनाती है यह तो आने वाला समय तय करेगा. इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा. लेकिन इतना तो तय है कि इस सीट पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही होगा.

इस सीट से जीत कर प्रदीप यादव बाबूलाल की सरकार में बने थे मंत्री

ज़ब बिहार से अलग होकर 15 नवम्बर 2000 को झारखंड राज्य बना और बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में सरकार बनी तो पहली बार इस क्षेत्र से विधायक चुने गये प्रदीप यादव को मंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ.

वर्ष 2005 में भी भाजपा के टिकट पर प्रदीप यादव लगातार दूसरी बार यहां जीत दर्ज की. 2006 में भाजपा में अंदरुनी विवाद बढ़ जाने की बजह से बाबूलाल मरांडी ने भाजपा और कोडरमा के सांसद से इस्तीफा दे दिया. झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक के नाम से नया दल बनाया. इसी क्रम में प्रदीप यादव सरीखे कई दिग्गज विधायकों ने भाजपा से किनारा कर लिया और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की पार्टी जेवीएम में शामिल हो गये. इसके बाद प्रदीप यादव 2009, 2014 और 2019 तक पार्टी बदल-बदल कर चुनाव मैदान में उतरकर लगातार पांच बार इस क्षेत्र से विधायक चुने गये. 2019 के चुनाव में जेवीएम के टिकट पर पार्टी सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी, प्रदीप यादव और बंधु टिर्की समेत तीन विधायक निर्वाचित हुए. राज्य में हेमंत सोरेन की सरकार गठन के बाद 2020 में बाबूलाल मरांडी ने भाजपा में जेवीएम का विलय कर दिया. जबकि प्रदीप यादव और बंधु तिर्की कांग्रेस में शामिल हो गए. बाद में प्रदीप यादव इंडिया गठबंधन में शामिल कांग्रेस पार्टी ने 2024 में सम्पन्न लोकसभा चुनाव में गोड्डा से अपना प्रत्याशी बनाया. लेकिन इस लोकसभा चुनाव में भाजपा के निशिकांत दुबे ने पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस से 9 हजार से अधिक वोट लाकर कांग्रेस के सम्भावित उम्मीदवार प्रदीप यादव के समक्ष बड़ी चुनौती पेश कर दी है.

इस बार जयराम महतो की पार्टी की उपस्थिति से बिगाड़ेगी यहां खेल

हालांकि अभी तक विधानसभा चुनाव के तिथि की घोषणा नहीं हुई है.बहरहाल चुनाव की घोषणा के बाद पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र के चुनावी मैदान में विभिन्न दलों के प्रत्याशियों के उतरने पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगा. इस बीच हाल के दिनों में झारखंड में खतियान के आधार पर सरकारी रिक्त पदों पर नियुक्ति और स्थानीय युवाओं को सभी क्षेत्र में प्राथमिकता देने की व्यवस्था को लागू करने आदि मुद्दों को लेकर संघर्ष करने वाले जयराम महतो की पार्टी की सक्रियता इस क्षेत्र में भी बढ़ी है.ऐसे में जयराम महतो की पार्टी जेकेबीकेस ने भूईंया, घटवाल,खैतौरी और कुड़मी समुदाय से इस क्षेत्र में अपना उम्मीदवार उतार दिया तो कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के समक्ष मुसीबत खड़ा कर दे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा. फिलहाल लोग चुनाव के तिथि के साथ एनडीए में शामिल भाजपा और इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के प्रत्याशियों की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं. इन दलों से कौन प्रत्याशी मैदान में आता है यह देखना दिलचस्प होगा.

2024 के गोड्डा लोकसभा क्षेत्र से जुड़े पोड़ैयाहाट विधानसभा की वोट की स्थिति 

प्रत्याशी  -पार्टी   - प्राप्त मत

निशिकांत दुबे - भाजपा- 1,07,082

प्रदीप यादव- कांग्रेस- 93,136

वर्ष 2019 में विधानसभा चुनाव परिणाम

प्रत्याशी-  पार्टी-    प्राप्त मत

प्रदीप यादव- जेवीएम -77,358

गजाधर सिंह- बीजेपी- 63,761

अशोक कुमार- जेएमएम- 34,745

वर्ष 2019 में विधानसभा चुनाव परिणाम

प्रत्याशी-  पार्टी-    प्राप्त मत

प्रदीप यादव- जेवीएम -77,358

गजाधर सिंह- बीजेपी- 63,761

अशोक कुमार- जेएमएम- 34,745

वर्ष 2014 में विधानसभा चुनाव परिणाम

प्रत्याशी - पार्टी   - प्राप्त मत

प्रदीप यादव- जेवीएम -64,036

देवेन्द्र सिंह -बीजेपी -52,878

अशोक कुमार-जेएमएम- 44,737

 पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास 

पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास पर गौर करें तो 1952 में बिहार विधानसभा के प्रथम चुनाव में पोड़ैयाहाट-सह-जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र के नाम से था.जहां से दो सदस्यों के चुनाव का प्रावधान किया गया था. इस चुनाव में दो सदस्यीय इस सीट पर सामान्य जाति से कांग्रेस के जगदीश नारायण मंडल और अजजा से झारखंड पार्टी के चुनका हेम्ब्रम विधायक चुने गए. वहीं 1957 में पोड़ैयाहाट को गोड्डा विधानसभा क्षेत्र से जोड़ दिया गया.इस चुनाव में भी दो सदस्यों के चुनाव का प्रावधान किया गया. जिसमें सामान्य सीट से झारखंड पार्टी के टिकट पर मणिलाल यादव और अजजा से निर्दलीय चुनका हेम्ब्रम विधायक चुने गए. 1962 में अजजा के लिए सुरक्षित एक सदस्यीय पोड़ैयाहाट अलग विधानसभा क्षेत्र के रूप में अस्तित्व में आया और 1972 तक अजजा के एक सदस्य के लिए सुरक्षित रहा.

1977 में इस सीट को अनारक्षित कर दिया गया. इसके बाद इस क्षेत्र में दो उपचुनाव सहित विधानसभा के लिये 16 चुनाव हुए.इसमें जेएमएम 6,जेवीएम 3, कांग्रेस 2 बार, जनसंघ, जनता पार्टी और प्रजातांत्रिक हुल झारखंड पार्टी के प्रत्याशियों ने एक एक बार इस सीट पर जीत दर्ज की.कांग्रेस से कभी दिग्विजय नेता रहे बिहार विधान परिषद के पूर्व सभापति पृथ्वी चन्द्र किस्कू के साथ जननायक कर्पूरी ठाकुर के अति करीबी और उनके मंत्रिमंडल में संसदीय सचिव के रूप में शामिल संताल परगना में 1974 छात्र आंदोलन की अलख जगाने वाले कमला कांत प्रसाद सिन्हा उर्फ लालू दा भी 1977 में इसी सीट से जनता पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए थे.

 इसके बाद इस क्षेत्र का राजनीतिक समीकरण बदल गया. शिबू सोरेन के नेतृत्व में संताल परगना में झारखंड अलग राज्य का आंदोलन परवान चढ़ा.झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के कभी दाहिना हाथ कहलाने तथा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के मुख्यमंत्रित्व काल में सेडो छाया मुख्यमंत्री समझा जाने वाले सूरज मंडल ने 1980 में इस क्षेत्र पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली.

 1980, 1985, 1990 में झामुमो के टिकट पर सूरज मंडल इस क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक चुने गये. 1991 में सूरज मंडल गोड्डा लोकसभा सीट से झामुमो के टिकट पर सांसद चुने गये.इसके बाद 1992 में इस सीट पर उपचुनाव कराया गया। जिसमें सूरज मंडल को अपना राजनीतिक गुरु समझने वाले प्रशांत कुमार झामुमो के टिकट पर पहली बार इस क्षेत्र से विधायक चुने गए.

1995 में भी झामुमो के टिकट पर प्रशांत कुमार ही विधायक निर्वाचित हुए.लेकिन 2000 में पासा पलटा और कभी बाबूलाल मरांडी के किचन कैबिनेट में शामिल रहे प्रदीप यादव ने दूसरे प्रयास में झामुमो को इस क्षेत्र में गहरी शिकस्त दी और भाजपा के टिकट पर पोड़ैयाहाट में पहली बार कमल खिलाने में सफल हुए.

1952-2019 के बीच पोड़ैयाहाट के निर्वाचित विधायकों की सूची

वर्ष-     प्रत्याशी-    पार्टी

1952- चुनका हेम्ब्रम (अजजा.) -झापा

1952 जगदीश ना. मंडल(सामा.) कांग्रेस

1957 चुनका हेम्ब्रम (अजजा) निर्दलीय

1957 मणिलाल यादव (सामा.) झापा

1962 यदुनंदन मुर्मू कांग्रेस

1967 एम मुर्मू जनसंघ

1969 एडवर्ड मरांडी पीएचजे

1972 पृथ्वी चंद्र किस्कू कांग्रेस

1977 कमला कांत सिन्हा ज.पा.

1980 सूरज मंडल जेएमएम

1985 सूरज मंडल जेएमएम

1990 सूरज मंडल जेएमएम

1992 प्रशांत कुमार जेएमएम

1995 प्रशांत कुमार जेएमएम

2000 प्रदीप यादव बीजेपी

2003 प्रशांत कुमार जेएमएम

2005 प्रदीप यादव बीजेपी

2009 प्रदीप यादव जेवीएम

2014 प्रदीप यादव जेवीएम

2019 प्रदीप यादव जेवीएम

अपने द्वारा पिछले 25 वर्षों में किये गए विकास कार्यों पर प्रदीप यादव को है भरोसा

प्रदीप यादव वर्ष 2000 से पहले भाजपा, फिर जेवीएम के टिकट पर विधानसभा में लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले वर्तमान विधायक प्रदीप यादव और उनकी पार्टी के समर्थकों का दावा है कि इस क्षेत्र में वर्तमान विधायक ने अपने 25 वर्ष के कार्यकाल में सड़क और पुल पुलिया का जाल बिछाकर लगभग सभी गांवों को सड़कों से जोड़ा है.

जिससे लोगों के लिए आवागमन सुगम हो गया है. वहीं इस क्षेत्र के अधिकांश गांवों में पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य की समुचित व्यवस्था की गयी है. राज्य सरकार द्वारा राज्य के किसानों के बकाया 50 हजार रुपए के कृषि ऋण माफी योजना के माध्यम से इस क्षेत्र के अनेकों किसानों को ऋण से मुक्ति मिली है. इसके साथ ही हाल में राज्य सरकार ने आम लोगों के दो लाख तक के बैंक ऋण माफी की घोषणा की है.

 इस घोषणा से बैंक ऋण की समस्या से परेशान किसान और हजारों गरीब निर्धन परिवारों को ऋण से निजात मिलने की उम्मीद है.

जबकि राज्य सरकार ने 18 से 50 वर्ष तक की बहू बेटियों के लिए मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना को चालू करने का ऐतिहासिक साहसिक फैसला लिया है जिससे इस क्षेत्र की आर्थिक रूप से कमजोर बेसहारा हजारों माता-बहनें लाभान्वित हुई हैं.

 जबकि सरकार ने राज्य में सर्वजन पेंशन नामक महत्वाकांक्षी योजना शुरू कर 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के बेसहारा व वृद्धों को सहारा दिया है. जिससे लाखों बेसहारा लोगों को नयी ज़िन्दगी मिली है.

बीजेपी भ्रष्टाचार और बेरोजगारी को बनायेगी मुद्दा

सिंचाई योजनाओं के कार्यान्वयन में शिथिलता बरतने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के बदले बढ़ावा देने का भी आरोप लगाते रहे हैं. जिससे क्षेत्र का विकास अवरूद्ध हो गया है. इस वजह से इस बार इस क्षेत्र की जनता इंडिया गठबंधन के वर्तमान विधायक कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप यादव को सबक सिखाने के लिए तैयार है. हाल में सम्पन्न लोकसभा के चुनाव में इस क्षेत्र की जनता ने विधानसभा चुनाव के पहले ही अपना फैसला दे दिया है. स्थानीय लोगों की मानें तो पिछले 25 वर्षों में इस क्षेत्र के किसान की समस्याओं का समाधान नहीं हो सका है.फलस्वरूप एक फसला धान की खेती पर निर्भर यहां के किसान पूरी तरह बरसा के भरोसे खेती करने को विवश हैं। इस क्षेत्र में न कोई फैक्ट्री है और न ही कोई उद्योग है.इस वजह से इस क्षेत्र के हजारों लोग रोजी- रोजगार के सिलसिले में मजदूरी करने दिल्ली, मुम्बई और अन्य दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं.आजादी के 75 साल बाद भी इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए कोई बेहतर शिक्षण संस्थान स्थापित नहीं किया जा सका है. इस कारण यहां के बच्चे उच्च शिक्षा के लिए हर दिन देवघर, गोड्डा और दुमका तक का सफर करने को विवश हैं. जबकि लोकसभा हो या विधानसभा प्रत्येक चुनाव में कांग्रेस, भाजपा, झामुमो और अन्य दलों के प्रत्याशी इस क्षेत्र में सिंचाई, शिक्षा स्वास्थ्य,शुद्ध पेयजल आदि सुविधा को बेहतर बनाने के वायदे पर जनता का आशीर्वाद मांगते रहे हैं. लेकिन इस क्षेत्र में न तो कोई उद्योग लगा,न ही अच्छे शिक्षण संस्थान खोले गए.