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28 जून को आयोजित होगा विशेष बूथ दिवस, 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को अवश्य पिलाएं पोलियो की दो बूंद
*पोलियो उन्मूलन में जनसहयोग सबसे बड़ी शक्ति, एक भी बच्चा न छूटे : जिलाधिकारी शैलेष कुमार*

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के अंतर्गत 28 जून को आयोजित होने वाले विशेष बूथ दिवस के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं जनजागरूकता के उद्देश्य से शनिवार को जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूली बच्चों की जन-जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली में बच्चों ने "दो बूंद जिंदगी की", "पांच साल से कम उम्र, पोलियो की दवा है जरूरी" तथा "एक भी बच्चा न छूटे" जैसे प्रेरक नारों के माध्यम से आमजन को अभियान में सहभागिता के लिए जागरूक किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने कहा कि भारत वर्ष वर्ष 2014 से पोलियो मुक्त है तथा पिछले 12 वर्षों में देश में पोलियो का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। हालांकि पड़ोसी देशों अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान में समय-समय पर पोलियो के मामले पाए जाने के कारण सतर्कता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पोलियो वायरस से बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक अभियान में शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद में 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 2.82 लाख बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 28 जून को विशेष बूथ दिवस आयोजित किया जाएगा, जिसके अंतर्गत जनपद में 643 बूथों पर पोलियो की दवा पिलाई जाएगी। अभियान की निगरानी के लिए 450 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। उन्होंने बताया कि 29 जून से 3 जुलाई तक स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाएंगी। इसके उपरांत 6 जुलाई को बी-टीम के माध्यम से विशेष गतिविधियां संचालित कर ऐसे बच्चों को भी पोलियो की दवा पिलाई जाएगी, जो किसी कारणवश पूर्व चरणों में छूट गए हों। जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील करते हुए कहा कि 0 से 5 वर्ष तक का कोई भी बच्चा पोलियो की दवा पीने से वंचित न रहे। उन्होंने सभी अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को नजदीकी पोलियो बूथ पर अवश्य लेकर जाएं तथा स्वास्थ्य विभाग की टीमों का पूरा सहयोग करें। उन्होंने कहा कि पोलियो उन्मूलन अभियान केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे समाज का जनआंदोलन है। जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों, आशा बहुओं, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा आमजन के सहयोग से ही जनपद को पूर्णतः पोलियो सुरक्षित बनाए रखा जा सकता है।
इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, शिक्षक, स्वास्थ्यकर्मी एवं बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुरियावां में 101 क्षय रोगियों को पोषण पोटली का वितरण
*जनप्रतिनिधियों एवं जनसहयोग से टीबी मुक्त अभियान को मिली नई गति*


नितेश श्रीवास्तव


भदोही। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत शनिवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुरियावां में आयोजित कार्यक्रम में 101 क्षय (टीबी) रोगियों को पोषण पोटली वितरित की गई। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, पूर्व विधायक रवीन्द्र नाथ त्रिपाठी, जिलाधिकारी शैलेष कुमार एवं पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी ने संयुक्त रूप से टीबी रोगियों को पोषण पोटली प्रदान कर उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने कहा कि जनपदवासियों, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, निक्षय मित्रों एवं समाज के विभिन्न वर्गों के सक्रिय सहयोग से अब तक 2,200 से अधिक पोषण पोटलियों का वितरण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इसी जनसहयोग, सहभागिता और स्वास्थ्य विभाग के समर्पित प्रयासों के परिणामस्वरूप जनपद ने इस अभियान में प्रदेश स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है। जिलाधिकारी ने बताया कि वर्तमान में जनपद में 1,440 टीबी रोगियों का उपचार चल रहा है। टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत बलगम की नियमित जांच के माध्यम से रोगियों की शीघ्र पहचान कर उन्हें निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही प्रत्येक पात्र रोगी को भारत सरकार द्वारा प्रतिमाह ₹1,000 की पोषण सहायता भी प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि टीबी एक पूर्णतः उपचार योग्य बीमारी है। यदि रोगी समय पर जांच कराकर चिकित्सकों के परामर्श के अनुसार नियमित रूप से दवाओं का सेवन करे, तो वह पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। उन्होंने बताया कि वर्ष में तीन बार संचालित होने वाले संचारी रोग नियंत्रण अभियान एवं दस्तक अभियान के दौरान संभावित टीबी रोगियों का चिन्हीकरण कर उनकी जांच एवं उपचार भी सुनिश्चित कराया जाता है। जिलाधिकारी ने टीबी रोगियों से प्रोटीन एवं पौष्टिक आहार का अधिकाधिक सेवन करने तथा उपचार बीच में न छोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता का एक व्यापक जनआंदोलन है। सभी के सहयोग से ही टीबी मुक्त जनपद एवं टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य साकार किया जा सकता है। उन्होंने अभियान में सहयोग देने वाले सभी जनप्रतिनिधियों, निक्षय मित्रों, समाजसेवियों एवं जनपदवासियों का आभार व्यक्त किया।
जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी ने कहा कि टीबी रोगियों के पोषण एवं उपचार में समाज की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से निक्षय मित्र बनकर इस मानवीय अभियान में सहयोग करने का आह्वान किया।
पूर्व विधायक रवीन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा कि टीबी के प्रति जागरूकता, समय पर जांच, नियमित उपचार एवं संतुलित पोषण से इस बीमारी को पूर्णतः समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल जांच कराने की अपील की।
पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी ने कहा कि टीबी रोगियों का मनोबल बढ़ाना, उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना तथा उन्हें समाज का सहयोग उपलब्ध कराना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। जनसहयोग से ही टीबी मुक्त समाज का सपना साकार होगा।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी संतोष चक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक, जनप्रतिनिधि, निक्षय मित्र, आशा कार्यकर्त्रियाँ तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
या हुसैन सदाओं के बीच दफनाए गए सभी ताजिये
रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव


भदोही। शहीदाने कर्बला की याद में मनाया जाने वाला चेहल्लुम का जुलूस , चांद की दसवीं तारीख यानी शुक्रवार को अकीदत व एहतराम के साथ निकाला गया। नगर के बालीपुर से निकले ताजिया जूलुस में शामिल लोग या हुसैन व नारा ए तकबीर की सदा बुलंद करते हुए पाल तिराहे होते हुए मुखर्जी पार्क के पास स्थित इमाम चौक पर ताजिये को लेकर कोतवाली, पुरानी बाजार लालानर मोड़ से फकिरान बस्ती और भुड़की के ताजियों को शामिल कर वापस प्रोफेसर कालोनी,कारागार, दुर्गागंज मार्ग होते हुए लाठी डंडों, तलवार,भाला आदि के विभिन्न करतबों को दिखाते हुए कर्बला तक पहुंचे।जहां ताजियों को ठंडा किया गया। भारी भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे।
नगर के विभिन्न मोहल्ले के ताजिये दोपहर दो बजे तक मेन रोड पर आ गए थे। लगभग ढाई बजे ताजिया जुलूस परंपरागत रास्तों से या हुसैन की सदायें बुलंद करते हुए, पुरानी तहसील प्रोफेसर कालोनी मार्ग होते हुए मुख्य मार्ग से नथईपुर तिराहे से कर्बला की ओर रवाना हुआ। जुलूस में छोटे-बड़े लगभग तीन दर्जन से अधिक ताजिये शामिल थे। अधिकांश तो छोटे छोटे ताजिया थे जो बच्चों ने पूरे उत्साह व अकीदत से तैयार किया था। जहां देवगजितपुर और पसड़ियापुर के ताजिये शाम लगभग साढ़े छह बजे तक  कर्बला पहुंच गए थे। इस दौरान सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे।
पुलिस सुरक्षा व्यवस्था में पूलिस अधीक्षक अभिनव के नेतृत्व में अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल सीओ चमन सिंह चावड़ा उपस्थित रहे।
अब वास्तु के हिसाब से अस्पताल के बेड पर बिछेगी चादरें

*सातों दिन अलग-अलग रंग बिछाई जाएंगी चादरें, नकारात्मक ऊर्जा से मिलेगी मुक्ति*

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव


भदोही। जिले के 29 स्वास्थ्य केंद्रों पर अब वास्तु के हिसाब से चादर बिछाई जाएगी। हर दिन अलग-अलग रंग की चादर बेड पर बिछाई जाएगी। विभाग का मानना है कि इससे मरीजों को सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी और उनका मानसिक तनाव दूर होगा। इसके अलावा हर दिन चादर बदलने से चादरों की सफाई व्यवस्था भी दुरूस्त हो सकेगी। बेड पर सात दिन सात रंगों के चादर बिछाई जाएगी।
अस्पताल आने वाले मरीजों को सफेद चादर ही मिलती है। कई बार चादर गंदा होने के बाद भी नहीं बदले जाते हैं। इसकी शिकायत भी अस्पताल प्रशासन को नियमित मिलती रहती है। माना जाता है कि अस्पतालों में दर्द में रह रहे मरीजों के कारण उनके परिजन भी परेशान रहते हैं। ऐसे में अस्पतालों में नकारात्मक उर्जा का असर भी होता है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय, महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय, सौ शय्या अस्पताल सहित छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 20 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर यह व्यवस्था लागू की गई है। अब यहां आने वाले मरीजों को हर दिन अलग-अलग रंग के बेड पर दिखाई देंगे।


सात की चादर की खरीद पर 13 लाख रुपये होंगे खर्च
हर दिन अलग-अलग रंगों का चादर बिछाने के लिए चार क्रय किए जाएंगे। इस पर करीब 13 लाख रुपये खर्च होंगे। जिला अस्पताल व एमबीएम में 100-100 हैं। वहीं छह सीएचसी पर 30-30 बेड और 20 पीएचसी पर चार के हिसाब से कुल 80 बेड है। इसके अलावा सौ शय्या में 16 बेड लगे हैं। कुल 476 बेड हैं।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एक बेड के चादर की अनुमानित कीमत 400 रुपये है। ऐसे में सात दिन के लिए कुल 3332 चादर खरीदी जाएंगी। इतने बेड की खरीद पर 13 लाख 32 हजार 800 रुपये खर्च होंगे।
किस दिन कौन से रंग की चादर
सोमवार - सफेद
मंगलवार - नारंगी
बुधवार - हरा
बृहस्पतिवार - पीला
शुक्रवार- पिंक
शनिवार - गहरा नीला, बैंगनी
रविवार - लाल
रंगों का मानसिकता पर गहरा प्रभाव, अलग-अलग रंग का अपना महत्व
मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव पांडेय ने बताया कि रंगों का प्रभाव मानसिकता पर बहुत तेजी से पड़ता है। जैसे सफेद रंग शांति, बीपी कंट्रोल के लिए माना जाता है। इसी तरह नारंगी रंग अधिक बोलना, कमजोरी दूर करना, हरा रंग सकून, पीला रंग खुशी, आसमानी रंग ठंडक, गुलाबी हार्मोन को बैलेंस करना आदि है। वहीं भिदिऊरा के ज्योतिष्याचार्य आचार्य गणेश पांडेय ने बताया कि हिंदू परंपरानुसार के हर रंगों का अपना एक महत्व है। रंगों से मरीजों को सकारात्मक उर्जा मिलती है। रंगों से ग्रह नक्षत्र शांत होते हैं। ग्रह शांत होने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। सफेद रंग से चंद्रमा, शुक्र ग्रह की शांति होती है। इसी तरह से नारंगी पीला से बृहस्पति, हरा से बुध, गुलाबी से सूर्य, लाल से मंगल, नीला व बैंंगनी से शनि ग्रह की शांत रहते हैं।
सातों दिन अलग अलग रंग के चादर अस्पताल के बेड़ पर बिछ़ाया जाएगा। इससे सफाई व्यवस्था बेहतर होगी। इसके अलावा कलरफुल बेड से मरीजों को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होगी। माॅनीटरिंग के दौरान जहां पर खामियां मिलेगी, तो सख्त कार्रवाही भी की जाएगी। - डॉ. एसके चक, सीएमओ भदोही
पैतृक संपत्ति विवाद में भाई की हत्या:गोपीगंज पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, हथियार बरामद


रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। भदोही के गोपीगंज थाना क्षेत्र में पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर हुए विवाद में छोटे भाई की हत्या कर दी गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
यह घटना 25 जून 2026 की रात को हुई। पैतृक मकान के कमरों के बंटवारे को लेकर बड़े भाइयों राजेंद्र उर्फ गोली और ललऊ का छोटे भाई संजय सरोज से लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते कहासुनी और मारपीट हुई।
मारपीट के दौरान आरोपियों ने सूकर मारने वाली लोहे की नुकीली रॉड (हिकनी) से संजय सरोज के सीने पर वार कर दिया। गंभीर रूप से घायल संजय सरोज को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
मृतक की पत्नी की तहरीर पर थाना गोपीगंज में मुकदमा अपराध संख्या 258/26, धारा 105 (हत्या), 351(3), 352 भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
पुलिस अधीक्षक भदोही  अभिनव त्यागी के निर्देश पर अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल के पर्यवेक्षण में पुलिस टीम ने कार्रवाई की। घटना को अंजाम देने के बाद फरार हुए नामजद आरोपियों में से पति-पत्नी सहित दो लोगों को संसारपुर मेन रोड से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त आला कत्ल एक लोहे की हिकनी और एक लोहे की हसिया बरामद की है।
गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान ललऊ सरोज (45 वर्ष) पुत्र मेहीलाल सरोज और चंदा सरोज (43 वर्ष) पत्नी ललऊ सरोज, निवासी संसारपुर, थाना गोपीगंज, जनपद भदोही के रूप में हुई है।
गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में निरीक्षक  विजय प्रताप सिंह, उपनिरीक्षक विनोद तिवारी, आरक्षी सोनू और महिला आरक्षी ज्योति राम शामिल थे।
फर्जी सर्टिफिकेट गिरोह का वांछित अभियुक्त झांसी से गिरफ्तार: मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए बनाए थे जाली प्रमाण पत्र


रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। भदोही पुलिस ने फर्जी सर्टिफिकेट गिरोह के एक अंतर्जनपदीय वांछित अभियुक्त को झांसी से गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी राजकीय/स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित श्रेणी के तहत फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर दाखिला दिलाने के मामले में हुई है। गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान सुरेशचन्द्र (65) के रूप में हुई है।

पुलिस अधीक्षक भदोही अभिनव त्यागी और अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल के निर्देश पर स्वाट टीम और थाना ज्ञानपुर पुलिस ने बृहस्पतिवार को मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई की। सुरेशचन्द्र पर चिकित्सा स्नातक (एमबीबीएस) में पैसे लेकर जाली प्रमाण पत्रों के जरिए दाखिला कराने का आरोप है। उसे झांसी के नवाबाद थाना क्षेत्र स्थित उसके वर्तमान पते से गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ थाना ज्ञानपुर में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है।

इस मामले की शुरुआत 20 सितंबर 2025 को हुई थी, जब शिकायतकर्ता शाहिद अली ने ज्ञानपुर थाने में एक प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें बताया गया था कि राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में स्वतंत्रता सेनानी के आश्रितों के लिए प्रस्तुत किए गए प्रमाण पत्र संदिग्ध और कूटरचित प्रतीत होते हैं। प्रारंभिक जांच के बाद, अन्तर्राज्यीय ठग गिरोह के सदस्य शुभम सिंह (27) को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

उपनिरीक्षक रमेश कुमार की विवेचना में फर्जी सर्टिफिकेट प्राप्त करने वाले छात्रों के परिजनों से पूछताछ के दौरान गिरोह के सरगना संजय दुबे (48) का नाम सामने आया, जिसे बाद में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। पुलिस के अनुसार, इस मामले में अन्य वांछितों के खिलाफ भी जांच जारी है और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।


*गिरफ्तारी करने वाली टीम:-**
उ0नि0 राजकुमार पाण्डेय प्रभारी स्वाट/सर्विलांस सेल, हे0कां0 राधेश्याम कुशवाहा, हे0कां0 धीरेन्द्र श्रीवास्तव, हे0कां0 बृजेश सूर्यवंशी,हे0कां0 नागेन्द्र यादव, कां0 गोपाल खरवार, कां0 नीरज यादव, कां0 राघवेन्द्र कुशवाहा,कां0 मन्नू सिंह, कां0 सुनील पाल, कां0 सुनील कन्नौजिया,कां0 हिमांशु सिंह, कां0 दीपक यादव, कां0 प्रत्युष पाठक समस्त सर्विलांस/स्वाट टीम।
प्राथमिक चिकित्सा का किया जाए इंतजाम

नितेश श्रीवास्तव

भदोही। जिला विद्यालय निरीक्षक अंशुमान ने बताया कि कोचिंग संचालक पंजीयन कराने के साथ ही छात्रों की सुविधा का भी विशेष ख्याल रखें। सेंटर पर शुद्ध पेयजल, शौचालय संग साफ-सफाई का उचित इंतजाम कराएं। सीसीटीवी कैमरा लगवाने के साथ ही फर्स्ट एंड किट प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्थित होना जरूरी है। कोचिंग सेंटर की नियमित जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस ने राम मंदिर दान घोटाले की जांच की मांग की:दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए
नितेश श्रीवास्तव

भदोही। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय के निर्देश पर जिला कांग्रेस कमेटी भदोही ने अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में कथित दान/चढ़ावा घोटाले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस संबंध में बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी भदोही के माध्यम से उत्तर प्रदेश की राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोऑर्डिनेटर एवं भदोही प्रभारी दयाशंकर पांडेय ने कहा कि श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। उन्होंने जोर दिया कि यदि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान और चढ़ावे में किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। पांडेय ने कहा कि आस्था के नाम पर किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और दोषियों को कानून के दायरे में लाकर कठोर दंड दिया जाना चाहिए।

जिला कांग्रेस कमेटी भदोही के अध्यक्ष वसीम अंसारी ने इस मामले को केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था और विश्वास से जुड़ा एक गंभीर विषय बताया। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र कुमार दुबे ‘राजन’ ने कहा कि धार्मिक संस्थाओं और जनआस्था से जुड़े मामलों में पूर्ण पारदर्शिता आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितता हुई है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों को किसी भी प्रकार का संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई अनिवार्य है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी जनभावनाओं और आस्था से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर लगातार संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने सत्य सामने लाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

इस अवसर पर दीनानाथ दूबे, प्रेमबिहारी उपाध्याय,राजेश्वर दूबे, सुरेश गौतम, त्रिलोकी नाथ बिंद, संतोष सिंह बघेल, अवधेश पाठक, राजेन्द्र प्रसाद मौर्य, नाजिम अली,शमशीर अहमद ,सुरेश चौहान, जिला दूबे,राजाराम दुबे,रमाशंकर बिंद, मृत्युंजय सिंह टोनी, अजय प्रजापति,शक्ति मिश्र, राकेश पाल, विशाल गौतम, धीरज पाल, सचिन मिश्र, नितिन सिंह, विमलेश पाल, मोनीश अंसारी, मकोई लाल बिंद आदि लोग उपस्थित रहें.
काशी नरेश विश्वविद्यालय में नए परीक्षा नियंत्रक नियुक्त:केश लाल ने पदभार संभाला, कुलपति ने दी शुभकामनाएं

नितेश श्रीवास्तव


भदोही। भदोही के काशी नरेश विश्वविद्यालय में बुधवार को केश लाल ने परीक्षा नियंत्रक का पदभार विधिवत ग्रहण किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर उमा श्रीवास्तव, कुलसचिव डॉ. महेश कुमार, वित्त अधिकारी बृजेश सिंह और उप कुलसचिव शिरीष कुमार उपस्थित रहे।

पदभार ग्रहण करने के उपरांत विश्वविद्यालय प्रशासन की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसमें विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित करने, परीक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने तथा विद्यार्थियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।

कुलपति प्रोफेसर उमा श्रीवास्तव ने केश लाल को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रगति एवं उत्कृष्ट परीक्षा प्रणाली के लिए समन्वित रूप से कार्य करने का आह्वान किया। बैठक में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों को गति प्रदान करने तथा आगामी शैक्षणिक सत्र की तैयारियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

विश्वविद्यालय परिवार ने केश लाल के सफल कार्यकाल की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके अनुभव एवं नेतृत्व से परीक्षा प्रणाली और अधिक सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनेगी।
जिले के 90+ कोचिंग सेंटर में से सिर्फ 12 के पास फायर एनओसी: मानकों की अनदेखी, बच्चों की सुरक्षा पर सवाल

जिले भर में 90 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हैं, लेकिन डीआईओएस कार्यालय में सिर्फ 15 पंजीकृत हैं। इनमें से केवल 12 कोचिंग सेंटरों ने अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिया है। लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में हुए हादसे के बाद जिले में कोचिंग सेंटरों के संचालन और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

शासन ने कोचिंग सेंटरों के संचालन के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित किए हैं। इनमें पंजीकरण, अग्निशमन एनओसी, अग्निशमन उपकरण, योग्य शिक्षक, उचित बैठने की व्यवस्था, शौचालय, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग और स्वच्छता जैसे मानक शामिल हैं। इसके बावजूद, जिले के कई सेंटरों पर इन मानकों की अनदेखी देखी गई।

लखनऊ हादसे के बाद एक टीम ने जिले भर में कोचिंग सेंटरों की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कई सेंटर तंग गलियों या बेसमेंट में संचालित होते मिले। कुछ सेंटरों में तीन से चार कमरों में कई शिफ्टों में कक्षाएं चल रही थीं।

ज्ञानपुर में मिश्रा मार्केट के पीछे संकरी गली और भदोही में ज्ञानदेवी स्कूल के पास बेसमेंट में कोचिंग सेंटर संचालित पाए गए, जहां एक शिफ्ट में 100 से 125 बच्चे पढ़ते हैं। गोपीगंज के वार्ड नंबर एक स्थित महात्मा गांधी लिंक मार्ग पर भी सुरक्षा व्यवस्था का अभाव दिखा।

भदोही के रजपुरा फेज-टू, चौरी रोड, औराई रोड, मूंसीलाटपुर और स्टेशन रोड स्थित कोचिंग सेंटरों के तीन से चार कमरों में बच्चे पढ़ते मिले। जमुनीपुर में एक शटर के भीतर कोचिंग संचालित होती दिखी। नईबाजार के उत्तरा फाटक, आजादनगर और चांदनी चौक में भी ऐसे सेंटर मिले, जहां केवल एक निकास द्वार था और अग्निशमन व्यवस्था नदारद थी।

डीआईओएस अंशुमान ने बताया कि जिले की तीनों तहसीलों में दो सदस्यीय टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें जिले भर में कोचिंग सेंटरों की जांच करेंगी। मानक के अनुरूप न मिलने पर उन्हें बंद कराया जाएगा और जिनका पंजीकरण नहीं हुआ है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।


फीस मोटी, लेकिन व्यवस्थाएं शून्य
बच्चों का भविष्य संवारने के नाम पर कोचिंग संचालक विद्यार्थियों से मोटी फीस वसूल रहे हैं। गणित, साइंस और अन्य महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई के लिए संचालक 500 से एक हजार रुपये तक शुल्क ले रहे हैं, लेकिन सेंटरों पर व्यवस्थाएं शून्य हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

एक माह पहले पंजीकरण के लिए दी थी चेतावनी
जिला विद्यालय निरीक्षक अंशुमान ने बताया कि एक माह पहले सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी संचालकों को पंजीकरण कराने का निर्देश दिया गया था, लेकिन केवल 15 कोचिंग सेंटरों ने पंजीकरण कराया। इसी प्रकार अग्निशमन विभाग ने गर्मी शुरू होने से पहले सभी को एनओसी के लिए पत्र जारी किया था, लेकिन केवल 12 ने एनओसी ली।

कोचिंग खोलने के लिए ये मानक अनिवार्य
पार्किंग की सुचारु व्यवस्था होनी चाहिए।
कोचिंग में उतने ही बच्चों को बैठाया जाए, जितनी सीटें उपलब्ध हों।
लड़के एवं लड़कियों के लिए अलग-अलग वॉशरूम होने चाहिए।
इमरजेंसी अलार्म का होना आवश्यक है।
यदि कोचिंग क्लास बेसमेंट में है, तो वहां दो दरवाजे होना जरूरी है।
प्रत्येक कमरे में दो दरवाजे और सीसीटीवी कैमरा होना चाहिए।




जिले में संचालित कोचिंग सेंटरों की जांच के लिए टीम गठित हो चुकी है। दो टीमें जिले भर के कोचिंग सेंटरों पर पहुंचकर उनकी फायर सेफ्टी की जानकारी लेंगी। ओम प्रकाश, प्रभारी अग्निशमन अधिकारी