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यूपी कैबिनेट के 22 बड़े फैसले: इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग को मिलेगी रफ्तार

* बस स्टेशनों के आधुनिकीकरण से लेकर नए विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज और पुल निर्माण तक कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी

लखनऊ। योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट बैठक में राज्य के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए 22 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों का उद्देश्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना तथा औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देना है।

सबसे प्रमुख निर्णयों में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के बस स्टेशनों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत आधुनिक बनाने की योजना शामिल है। पहले चरण में 54 और दूसरे चरण में 49 बस स्टेशनों का कायाकल्प किया जाएगा, जहां होटल, रेस्टोरेंट, मल्टीलेवल पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित होंगी।

परिवहन क्षेत्र में गोरखपुर के खजांची चौराहा और हरदोई के शाहाबाद लिंक पर नए अत्याधुनिक बस स्टेशनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। वहीं कन्नौज और हरदोई के बीच गंगा नदी पर पुल तथा उन्नाव-शुक्लागंज मार्ग पर नारायणी नदी पर नए पुल के निर्माण से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

युवा सशक्तिकरण की दिशा में स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत 25 लाख टैबलेट वितरण का निर्णय लिया गया है। सरकार अब तक लगभग 60 लाख डिजिटल उपकरण वितरित कर चुकी है, जिससे डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा मिल रहा है।

औद्योगिक विकास के तहत उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास नीति-2022 के अंतर्गत 10 बड़ी कंपनियों को विशेष प्रोत्साहन पैकेज देने और निवेश मित्र पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही औद्योगिक इकाइयों के लिए सब्सिडी और टैक्स छूट की प्रक्रिया को और सरल बनाया गया है। एक ऐतिहासिक फैसले में पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच और गोंडा के 5070 वनटांगिया परिवारों को जमीन का मालिकाना हक देने की मंजूरी दी गई है, जिससे दशकों पुरानी समस्या का समाधान होगा।

शिक्षा क्षेत्र में ‘एक मंडल-एक विश्वविद्यालय’ नीति के तहत नए राज्य विश्वविद्यालय खोलने का निर्णय लिया गया है। साथ ही गोरखपुर में “उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्योगिक विश्वविद्यालय” की स्थापना को भी स्वीकृति दी गई है, जो पर्यावरण, वानिकी और तकनीकी शिक्षा पर केंद्रित होगा।

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए श्रावस्ती में नए मेडिकल कॉलेज के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिसकी लागत लगभग ₹437 करोड़ होगी। यह परियोजना प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत विकसित की जाएगी।

ग्रामीण विकास के तहत 403 ग्राम पंचायतों में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए ₹403 करोड़ की योजना को मंजूरी दी गई है, जिससे स्थानीय रोजगार सृजन और पलायन रोकने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा कानपुर देहात में विस्थापित परिवारों के पुनर्वास, राज्य मार्ग-29 के चौड़ीकरण, विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन और मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए स्वायत्त सोसाइटी गठन जैसे कई अहम फैसले भी लिए गए। सरकार का कहना है कि ये सभी निर्णय उत्तर प्रदेश को बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे और राज्य के समग्र विकास को गति देंगे।

प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता खत्म, अब उपभोक्ता खुद चुनेंगे भुगतान का तरीका
लखनऊ । बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। Central Electricity Authority ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। अब सभी नए कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर तो लगाए जाएंगे, लेकिन प्रीपेड या पोस्टपेड मोड का चयन पूरी तरह उपभोक्ताओं की इच्छा पर निर्भर होगा।यह संशोधित आदेश 1 अप्रैल 2026 से लागू कर दिया गया है। इससे पहले कई राज्यों में, खासकर उत्तर प्रदेश में, नए बिजली कनेक्शन पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य रूप से लगाए जा रहे थे, जिसे लेकर उपभोक्ताओं के बीच असंतोष था।
प्रदेश में अब तक करीब 78 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें लगभग 70 लाख प्रीपेड मीटर शामिल हैं। इस व्यवस्था का लगातार विरोध भी हो रहा था।इस मुद्दे को संसद में भी उठाया गया था, जिस पर केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने स्पष्ट किया था कि प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं है और उपभोक्ताओं को विकल्प मिलना चाहिए।
नई अधिसूचना के अनुसार, जिन क्षेत्रों में संचार नेटवर्क उपलब्ध है, वहां सभी बिजली कनेक्शन स्मार्ट मीटर के रूप में दिए जाएंगे। हालांकि, प्रीपेड मोड अब अनिवार्य नहीं रहेगा और उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार पोस्टपेड या प्रीपेड विकल्प चुन सकेंगे।वहीं, राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस फैसले को उपभोक्ताओं की बड़ी जीत बताया है। उनका कहना है कि लंबे समय से इस मुद्दे पर संघर्ष किया जा रहा था और अब जाकर उपभोक्ताओं को राहत मिली है।
कुसम्ही जंगल में 4.84 करोड़ से बनेगा ईको पार्क, पूर्वांचल को मिलेगा नया पर्यटन केंद्र

* योगी सरकार की पहल से गोरखपुर बनेगा इको-टूरिज्म हब, पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित होंगी

लखनऊ/ गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ अब इको-टूरिज्म को भी तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत जनपद गोरखपुर के कुसम्ही जंगल में 4.84 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक ईको पार्क विकसित किया जा रहा है। परियोजना के लिए पहली किस्त के रूप में 50 लाख रुपये जारी कर दिए गए हैं।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि सरकार प्रदेश में पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए लगातार प्रयासरत है। गोरखपुर को पूर्वांचल के प्रमुख पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। कुसम्ही जंगल में बनने वाला यह ईको पार्क पूर्वांचल की नई पहचान बनेगा।
इस आधुनिक ईको पार्क में पर्यटकों के लिए कई आकर्षक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। लगभग 15.58 लाख रुपये की लागत से भव्य प्रवेश द्वार, 28.45 लाख रुपये से इंटरप्रिटेशन सेंटर और एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से स्विस कॉटेज बनाए जाएंगे। इसके अलावा 32.77 लाख रुपये से कैफेटेरिया का उन्नयन, 30.88 लाख रुपये से ट्री हाउस और टेंट कैंपिंग की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
पर्यटकों के स्वास्थ्य और मानसिक शांति को ध्यान में रखते हुए 41.86 लाख रुपये की लागत से योग केंद्र भी बनाया जाएगा। साथ ही बायो टॉयलेट, सुरक्षा फेंसिंग, सोलर सबमर्सिबल, पार्किंग और बैठने की व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
गोरखपुर से कुशीनगर मार्ग पर स्थित कुसम्ही जंगल, गोरखपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर है। इसी मार्ग पर गोरखपुर एयरपोर्ट और भगवान बुद्ध से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थल भी स्थित हैं, जिससे यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म बोर्ड के गठन के बाद प्रदेश के जंगलों, नदियों और झीलों को संरक्षित रखते हुए उन्हें पर्यटन के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इस पहल से न केवल पर्यटकों को नए गंतव्य मिलेंगे, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
नगर निगम के खिलाफ सपा का जोरदार प्रदर्शन, विधायक रविदास मेहरोत्रा के नेतृत्व में घेराव
* जनसमस्याओं को लेकर हजारों लोगों का प्रदर्शन, 30 दिन में समाधान न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के लखनऊ मध्य विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने सोमवार को नगर निगम के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए घेराव किया। आंदोलन का नेतृत्व रविदास मेहरोत्रा ने किया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर अपनी समस्याओं को मुखर रूप से उठाया।
प्रदर्शन के दौरान नगर निगम के अपर नगर आयुक्त को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं को विस्तार से रखा गया। इनमें टूटी सड़कों, पेयजल संकट, खराब सफाई व्यवस्था, नालों की नियमित सफाई का अभाव, भवन एवं जल कर में बढ़ोतरी और अन्य आवश्यक जनसुविधाओं की कमी शामिल हैं।
इस मौके पर विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि “स्मार्ट सिटी के नाम पर जनता से लगातार टैक्स वसूला जा रहा है, लेकिन बदले में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं। यह पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।” उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 30 दिनों के भीतर समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो सड़क से लेकर सदन तक उग्र आंदोलन किया जाएगा।
प्रदर्शन में शामिल लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे और किसी भी हाल में पीछे नहीं हटेंगे।
आईआईएम लखनऊ में अधिकारियों को ‘बिज़नेस ट्रेनिंग’, निवेश बढ़ाने को इन्वेस्ट यूपी की पहल

* जिलास्तर पर निवेश प्रोत्साहन को रफ्तार देने के लिए पाँच दिवसीय क्षमता-विकास कार्यशाला शुरू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने और जिलास्तरीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से इन्वेस्ट यूपी ने भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) लखनऊ में पाँच दिवसीय ‘क्षमता-विकास कार्यशाला’ का आयोजन शुरू किया है। कार्यक्रम के पहले बैच का शुभारंभ सोमवार को हुआ, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
इस प्रशिक्षण में जिला उद्योग केंद्रों (DIC) के उपायुक्त, संयुक्त आयुक्त, क्षेत्रीय प्रबंधक और औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के नोडल अधिकारी शामिल हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य जिला स्तर पर निवेश प्रोत्साहन प्रणाली को अधिक प्रभावी, परिणामोन्मुख और निवेशक-हितैषी बनाना है।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए आलोक कुमार (अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास) ने कहा कि प्रदेश के विकास में जिलास्तरीय नेतृत्व की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों को आधुनिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अपनाने और निवेशकों को सुगम वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को लीडरशिप, रणनीतिक सोच, वित्तीय साक्षरता और प्रभावी संवाद कौशल जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही प्रशासनिक कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग पर भी विशेष फोकस रखा गया है।
इस अवसर पर इन्वेस्ट यूपी की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रेरणा शर्मा, आईआईएम लखनऊ के डीन प्रो. संजय सिंह और कार्यक्रम निदेशक प्रो. क्षितिज अवस्थी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 1 मई 2026 तक तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा, जिसमें कुल 122 अधिकारी प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। कार्यक्रम से उम्मीद है कि राज्य में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को और मजबूती मिलेगी और निवेश आकर्षित करने में तेजी आएगी।
गौशालाओं में बायोगैस को बढ़ावा, न्यूनतम 10 कुंतल भूसा भंडारण अनिवार्य
* मंत्री धर्मपाल सिंह ने दिया—निःशुल्क बोरिंग, हरे चारे की व्यवस्था और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने राज्य में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए गौशालाओं में गोबर गैस (बायोगैस) के उपयोग को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि गोबर से निर्मित बायोगैस सस्ता और स्वच्छ ईंधन होने के साथ पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है।
मंत्री ने निर्देश दिए कि सभी गौशालाओं में गोबर का समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जाए तथा गर्मी को देखते हुए पानी, हरा चारा, भूसा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने प्रत्येक गौशाला में निःशुल्क बोरिंग कराकर पानी की कमी दूर करने पर भी जोर दिया।
विधान भवन में आयोजित बैठक में धर्मपाल सिंह ने बताया कि प्रदेश की हर गौशाला में न्यूनतम 10 कुंतल भूसे का आरक्षित भंडार रखना अनिवार्य होगा। 15 अप्रैल से शुरू हो रहे विशेष भूसा संग्रह अभियान के तहत दान और क्रय दोनों माध्यमों से भंडारण सुनिश्चित किया जाएगा। स्थानीय किसानों से 400 से 650 रुपये प्रति कुंतल की दर से भूसा खरीदने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि 15 मई तक गोचर भूमि पर हाईब्रिड नेपियर घास की रोपाई सुनिश्चित की जाए। इसके लिए रूटस्लीप फार्मों से पौध सामग्री उपलब्ध कराकर किसानों और गोआश्रय स्थलों तक पहुंचाई जाएगी, जिससे पूरे वर्ष हरे चारे की आपूर्ति बनी रहे।
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में 7416 गोआश्रय स्थलों में 12.37 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। 2500 से अधिक गोशालाओं में बीमार और कमजोर पशुओं के लिए आइसोलेशन कक्ष बनाए गए हैं। कई जनपदों में लापरवाही पाए जाने पर स्पष्टीकरण और कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गौशालाओं में बर्मीकम्पोस्ट तैयार किया जाए और गोबर व गोमूत्र से पंचगव्य आधारित उत्पाद—अगरबत्ती, धूपबत्ती, गोकाष्ट, गोअर्क आदि का निर्माण किया जाए। इससे गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। महिला स्वयं सहायता समूहों को भी इस कार्य से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
अपर मुख्य सचिव पशुधन एवं दुग्ध विकास मुकेश मेश्राम ने आश्वस्त किया कि गौशालाओं में पाई गई कमियों को शीघ्र दूर किया जाएगा और चारा व भूसे की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि गोवंश संरक्षण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मंत्री ए.के. शर्मा के प्रयासों से मऊ जिला अस्पताल को बड़ी सौगात, 62 लाख से विकसित होंगी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं
* एनटीपीसी के सहयोग से अत्याधुनिक उपकरणों की स्थापना, स्थानीय स्तर पर मिलेगा बेहतर इलाज

लखनऊ/ मऊ। उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा के प्रयासों से जनपद मऊ में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। उनके विशेष प्रयासों के फलस्वरूप NTPC Limited के सहयोग से जिला अस्पताल मऊ में 62.10 लाख रुपये की लागत से अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इस योजना के तहत अस्पताल में इको मशीन, सी-आर्म मशीन, लेप्रोस्कोपी उपकरण और वेंटिलेटर सहित कई आधुनिक चिकित्सा उपकरण स्थापित किए जाएंगे। इन सुविधाओं के उपलब्ध होने से मरीजों को अब जटिल ऑपरेशन और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण उपचार मिलने से समय और धन दोनों की बचत होगी, साथ ही मरीजों को त्वरित राहत भी मिल सकेगी।
मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता हर नागरिक को सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने विश्वास जताया कि मऊ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की यह पहल मील का पत्थर साबित होगी और आमजन को सीधा लाभ पहुंचाएगी।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय को इस उपलब्धि का प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि इसी के चलते जनकल्याणकारी योजनाएं धरातल पर उतर रही हैं। एनटीपीसी द्वारा दिया गया सहयोग सामाजिक दायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती देगा।
मंत्री श्री शर्मा ने इस कार्य के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा एनटीपीसी प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन और सहयोग से ही इस प्रकार के विकास कार्य संभव हो पा रहे हैं, जो आम जनता के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में सहायक हैं।
योगी आदित्यनाथ बोले— रंगमंच समाज का दर्पण, राष्ट्रनायकों पर नाटक से बढ़ेगी जनचेतना
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रंगमंच समाज का दर्पण होता है और यह जनचेतना जगाकर समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। उन्होंने कलाकारों से राष्ट्रभक्ति से जुड़े नाटकों के मंचन पर जोर देते हुए कहा कि संवाद, संगीत, स्क्रिप्ट और शब्दों का चयन प्रभावशाली होना चाहिए, ताकि समाज को जोड़ा जा सके।
मुख्यमंत्री रविवार को भारतेंदु नाट्य अकादमी में 5 से 12 अप्रैल तक आयोजित स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह का शुभारंभ कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अकादमी के विकास के लिए छात्रावास निर्माण सहित अन्य प्रस्तावों पर सकारात्मक आश्वासन दिया।
सीएम ने कहा कि आनंदमठ जैसे साहित्यिक कार्य राष्ट्रभक्ति और ऐतिहासिक चेतना को जागृत करते हैं। उन्होंने बंगाल अकाल और स्पेनिश फ्लू जैसी त्रासदियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संवेदनशील सरकार ही संकटों से प्रभावी ढंग से निपट सकती है।
उन्होंने कहा कि एक समय समाज में गलत चरित्रों को नायक के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसका दुष्प्रभाव पड़ा। अब समय है कि महाराज सुहेलदेव, रानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आजाद जैसे राष्ट्रनायकों पर आधारित नाटकों को बढ़ावा दिया जाए।
सीएम योगी ने कहा कि भारतीय समाज अपनी परंपरा और संस्कृति का सम्मान करना जानता है, जिसका उदाहरण रामायण की लोकप्रियता है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से वीर-वीरांगनाओं की गाथाओं को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की।
उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी का प्रणेता बताते हुए उनके नाटकों और साहित्यिक योगदान को जनजागरण का सशक्त माध्यम बताया। साथ ही रामधारी सिंह दिनकर की रचनाओं पर 24 अप्रैल से लखनऊ में होने वाले त्रिदिवसीय आयोजन की जानकारी भी दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से नई और पुरानी पीढ़ी को जोड़ने की आवश्यकता है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके।
यूपी बोर्ड का सख्त फैसला: अब सिर्फ अधिकृत किताबों से होगी पढ़ाई, अनधिकृत पुस्तकों पर कार्रवाई तय

* सत्र 2026-27 से नई व्यवस्था लागू, सभी स्कूलों के लिए आदेश अनिवार्य

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और एकरूप बनाने के लिए यूपी बोर्ड ने बड़ा निर्णय लिया है। सत्र 2026-27 से प्रदेश के सभी राजकीय, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों में केवल अधिकृत पुस्तकों से ही पढ़ाई कराई जाएगी। अनधिकृत पुस्तकों के उपयोग पर सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं।
यह आदेश इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम के तहत जारी किया गया है, जिसके अंतर्गत जिला एवं मंडल स्तर के अधिकारियों को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नई व्यवस्था के अनुसार, कक्षा 9 और 10 के लिए अंग्रेजी, गणित और विज्ञान विषयों की निर्धारित किताबें अनिवार्य कर दी गई हैं। वहीं कक्षा 11 और 12 के लिए 36 विषयों की अधिकृत पुस्तकें लागू होंगी। इसके साथ ही राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की 70 किताबें पूरे प्रदेश में प्रचलन में लाई गई हैं। हिंदी, संस्कृत और उर्दू की 12 चयनित पुस्तकों को भी इस सूची में शामिल किया गया है।
छात्रों और अभिभावकों को जागरूक करने के लिए सभी विद्यालयों में पुस्तक जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, छात्रों को ये किताबें सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाएगी।
पुस्तकों के मुद्रण और वितरण के लिए तीन एजेंसियों को अधिकृत किया गया है, जिससे समय पर और सुगम आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अखिलेश यादव का सरकार पर बड़ा हमला: ‘प्रीपेड भुगतान के बाद भी नहीं मिल रही बिजली’
* किरायेदारों और गरीबों की मुश्किलें बढ़ीं, गैस संकट के बीच बिजली व्यवस्था पर उठाए सवाल

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बिजली व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए आम जनता की परेशानियों को उजागर किया।
अखिलेश यादव ने कहा कि प्रीपेड भुगतान करने के बावजूद लोगों को बिजली के लिए भटकना पड़ रहा है, जो व्यवस्था की बड़ी विफलता को दर्शाता है। उन्होंने खास तौर पर किरायेदारों की समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें पहले से ही बिजली का भुगतान एडवांस में करना पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि बिजली न मिलने के कारण गरीब वर्ग को वैकल्पिक साधनों पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो रही है।
अखिलेश यादव ने गैस संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे समय में बिजली की कमी होना सरकार की बड़ी नाकामी है। उन्होंने प्रदेश सरकार से इस समस्या का जल्द समाधान करने की मांग की है, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।