सीढ़ियों से नहीं, रोपवे से जाइए बजरंग बली की जन्मस्थली, कर्नाटक सरकार की बड़ी पहल
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अपने पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध अंजनाद्रीपहाड़ी हनुमान की जन्मस्थली के रूप में भी प्रसिद्ध है. हालांकि, पहाड़ी पर हनुमानजी की एक झलक पाने के लिए भक्तों को काफी कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है. बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए पहाड़ पर चढ़ना और दर्शन करना सबसे कठिन है. इन सब परेशानियों को देखते हुए प्रशासन ने रोपवे के निर्माण को मंजूरी दे दी है.
देश-विदेश से हजारों भक्त प्रतिदिन कर्नाटक के कोप्पल जिले की अंजनाद्री पहाड़ी पर हनुमानजी के दर्शन के लिए आते हैं. यह अंजनाद्रीपहाड़ी रामायण के हनुमान की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है. इसलिए अधिकतर भक्त अंजनाद्री आते हैं. हालांकि, अंजनाद्रीपहाड़ी पर चढ़ने और हनुमानजी के दर्शन करने के लिए पहाड़ी पर 575 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. वर्तमान में सीढ़ियों के अलावा पहाड़ी पर चढ़ने का कोई अन्य रास्ता नहीं है.
हार्ट अटैक से हुई थी कईयों की मौत
पहाड़ी पर हनुमानजी के दर्शन करने के लिए भक्तों सीढ़ी चढ़नी पड़ती है, जो कि काफी मुश्किल काम है. बुजुर्गों, बच्चों और स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त लोगों को पहाड़ पर चढ़ने में काफी परेशानी हो रही थी. पहाड़ी पर चढ़ते हुए ऐसी भी घटनाएं हुई हैं, जहां कई लोगों की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. इस कारण पहाड़ पर चढ़ने के लिए रोपवे के निर्माण की जोरदार मांग हो रही थी. पिछले कई सालों से अधिकारी और जनप्रतिनिधि रोपवे निर्माण को लेकर आश्वासन दे रहे थे.
अंजनाद्रीपहाड़ी पर रोपवे के निर्माण को मिली मंजूरी
वह कह रहे थे कि जल्द रोपवे का निर्माण होगा, जिससे आपकी समस्या कम होगी. रोपवे निर्माण का प्रस्ताव पास न होने के कारण लोगों ने कई बार विरोध प्रदर्शन किया था, लेकिन अब भक्त का की मांग को सरकार ने मान लिया है. रोपवे प्रस्तवा को मंजूरी मिल गई है. योजना के अनुसार, अंजनाद्रीपहाड़ी तक एक-दो नहीं बल्कि तीन रोपवे बनाने की योजना को क्रियान्वित किया जा चुका है और पहले चरण में एक रोपवे के निर्माण के लिए सभी तैयारियां कर ली गई हैं.
कहां होगा बेस स्टेशन?
कर्नाटक राज्य पर्यटन विभाग के अधिकारियों और केंद्रीय राइट इंस्टीट्यूट के अधिकारियों ने अंजनाद्रीहिल्स का दौरा किया और निरीक्षण किया. उन्होंने यह निर्धारित करने के लिए स्थल निरीक्षण भी किया है कि रोपवे का निर्माण कहां किया जाना चाहिए और इसके क्या फायदे और नुकसान हैं. फिलहाल राज्य पर्यटन विभाग की योजना अंजनांद्री पहाड़ी के बाईं ओर एक बेस स्टेशन तैयार करने और पहाड़ी पर एक छोटी झील के पास लैंडिंग स्टेशन बनाने की है.
450 मीटर लंबा होगा रोपवे
कुल 450 मीटर लंबा रोपवे बनाया जाएगा, जिसमें प्रति घंटे आठ सौ श्रद्धालुओं को आने-जाने की अनुमति होगी. सुबह 6 बजे से रात तक दर्शन की व्यवस्था की गई है. यह कार्य अगले 45 दिनों में शुरू होगा और एक साल के अंदर पूरा हो जाएगा. इसके अलावा दो और रोपवे बनाने की योजना है.
Mar 30 2025, 20:50