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अब किराएदारों पर भी केजरीवाल मेहरबान, फ्री बिजली और पानी देने की घोषणा

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दिल्ली में विधानसभा चुनाव 2025 के लिए सियासी सरगर्मी तेज है और पार्टियों के बड़े-बड़े वादे चर्चा का केंद्र बन चुके हैं। इस बार किरायेदारों को फ्री बिजली और पानी देने का मुद्दा खासा सुर्खियां बटोर रहा है। आम आदमी पार्टी (आप) ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी सरकार दोबारा सत्ता में आती है, तो किरायेदारों को भी मुफ्त बिजली-पानी की सुविधा दी जाएगी। दिल्ली के पूर्व सीएम और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आप सरकार दिल्ली में किराएदारों को फ्री बिजली और पानी देगी।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद दिल्ली के लाखों किराएदारों को भी बिजली और पानी मुफ्त में मिलेगा। केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि चुनाव के बाद हमारी सरकार बनने के बाद ऐसा सिस्टम बनाएंगे कि किराएदारों को भी फ्री बिजली और पानी मिले।

केजीरावाल ने कहा कि दिल्ली में ज्यादातर किराए पर पुर्वांचल के लोग रहते हैं। एक एक मकान में 100/100 किराएदार बहुत गरीबी में रहते उनको इन चीजों का फायदा मिलना चाहिए। मैं दिल्ली में जगह जगह घूम रहा हूं लोग कह रहे हैं कि हमें आपके मोहल्ला क्लिनिक, स्कूल, अस्पताल सभी सुविधाओं का लाभ मिल रहा है लेकिन मुफ्त बिजली और पानी का नहीं।

किरायेदारों के लिए बड़ा मुद्दा

दिल्ली में लगभग 40% आबादी किरायेदारों के रूप में रहती है। ऐसे में यह घोषणा चुनाव का गेम-चेंजर साबित हो सकती है। किरायेदारों का कहना है कि अगर यह वादा सच में लागू होता है, तो इससे उनके मासिक खर्च में काफी कमी आएगी।

कई बड़े वादे कर चुकी है आप

बता दें कि केजरीवाल इससे पहले दिल्ली की जनता से कई वादे कर चुके हैं। महिला सम्मान योजना के तहत महिलाओं के लिए पहले हर महीने 2100 रुपये देने का वादा किया है। महिलाओं को डीटीसी की बसों में मुफ्त यात्रा जारी रखने की बात भी कही गई है। आम आदमी पार्टी ने बुजुर्गों के लिए संजीवनी योजना का एलान किया है। इसके तहत 60 वर्षों के ऊपर के सभी बुजुर्गों को निजी और सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा का एलान। इतना ही नहीं बुजुर्गों के लिए अलग से पेंशन की व्यवस्था करने का भी वादा किया गया है। आम आदमी पार्टी ने इस क्षेत्र में संजीवनी योजना का एलान किया है। हालांकि, इसके तहत अभी फिलहाल बुजुर्गों को ही मुफ्त इलाज का लाभ देने का प्रावधान रखा गया है। संजीवनी योजना के अंतर्गत दिल्ली में 60 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों के इलाज के लिए खर्च की सीमा को तय नहीं की गई है। इलाज के दौरान जितना खर्चा होगा, वह पूरा खर्च सरकार वहन करेगी।

20 मिनट लेट होती तो...' हसीना बोलीं- रची गई थी मेरी हत्या की साजिश

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बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने पिछले साल उनके सरकारी आवास पर हुए आंदोलनकारियों के हमले को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पहली बार अपना दर्द बयां किया है। हसीना ने एक ऑडियो टेप जारी कर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर मैं अपनी बहन के साथ उस दिन 20 मिनट पहले अपने सरकारी आवास से नहीं निकलती तो वो दिन हमारा आखिर दिन हो सकता था। बता दें कि बीते साल पांच अगस्त को समय शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर देश छोड़कर अपनी जान बचाकर भारत जाना पड़ा था।

शेख हसीना का ये ऑडियो बांग्लादेश अवामी लीग पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट किए गया। इस ऑडियो में शेख हसीना अल्लाह का शुक्रिया अदा करते भी दिख रही हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों पर उन्हें मारने की साजिश रचने का आरोप भी लगाया है। शेख हसीना ने शुक्रवार रात को फेसबुक पर अपनी पार्टी बांग्लादेश अवामी लीग के पेज पर एक ऑडियो संदेश में यह बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा, रेहाना और मैं बच गए, हम केवल 20-25 मिनट के अंतराल से मौत से बच गए।

हसीना ने दावा किया है कि उनकी हत्या की कई बार साजिशें रची गई थीं। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि 21 अगस्त को हुई हत्याओं से बचना, कोटालीपारा में हुए विशाल बम विस्फोट से बचना या पांच अगस्त 2024 को जीवित बचना अल्लाह की इच्छा है। अल्लाह का हाथ ही होगा। अगर अल्लाह की इच्छा न होती, तो मैं अब तक जिंदा नहीं बची होती। उन्होंने कहा, 'आपने बाद में देखा कि कैसे मुझे मारने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, अल्लाह की दया है कि मैं अभी भी जिंदा हूं क्योंकि अल्लाह चाहता है कि मैं कुछ और करूं।

आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही भारत ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वीजा अवधि को बड़ा दिया था। वह पिछले साल अगस्त से भारत में रह रही हैं। इस बीच खबर ये भी आई थी कि बांग्लादेश ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया है। हालांकि वीजा अवधि बढ़ने से हसीना के लिए अधिक समय तक भारत में रहने का रास्ता साफ हो गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार, भारत से पूर्व पीएम के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है।

क्या तलाक ले रहे बराक-मिशेल ओबामा?जानें क्यों उठ रहे सवाल

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा के बीच तलाक की खबरें हैं। सोशल मीडिया पर इस तरह की अफवाहें चल रही हैं कि दोनों के बीच रिश्ते ठीक नहीं हैं और हालात तलाक तक पहुंच गए हैं। इन अफवाहों तब और हवा मिल गई जब मिशेल ओबामा ने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह से दूरी बनाने का ऐलान कर दिया। हालांकि मिशेल ओबामा शपथ ग्रहण समारोह में क्यों शामिल नहीं हो रही हैं, इसे लेकर उनके कार्यालय ने कोई विशेष स्पष्टीकरण नहीं दिया है।

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप 20 जनवरी को राष्‍ट्रपति पद की शपथ लेने जा रहे हैं। अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला मिशेल ओबामा देश के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होंगी। अमेरिकी इतिहास में बीते 150 सालों में ये पहला मौका है जब पूर्व राष्ट्रपति और उनके पति या पत्नी इस समारोह में भाग नहीं ले रहे हैं।

दरअसल, बराक और मिशेल ओबामा के ऑफिस की तरफ से जारी किए गए एक बयान में कहा गया है कि पूर्व राष्ट्रपति शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। इसमें साफ किया गया है कि मिशेल ओबामा इस समारोह में शामिल नहीं होंगी। गौर करने वाली बात यह भी है कि बराक और मिशेल ने राष्ट्रपति और फर्स्ट लेडी के रूप में दो कार्यकाल व्हाइट हाउस में बिताए हैं।

इससे पहले कार्टर के अंतिम संस्कार में भी मिशेल ओबामा अपने पति बराक के साथ नहीं पहुंची थीं। इस तरह एक ही महीने में 2 बार मिशेल की इतने महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम में अपने पति के साथ ना होने से इन अफवाहों को और हवा मिल रही है। जबकि नवनिर्वाचित राष्‍ट्रपति के शपथ ग्रहण में पूर्व राष्‍ट्रपति और पूर्व फर्स्‍ट लेडी का आना परंपरा का हिस्‍सा रहा है। इस समारोह में आमतौर पर पूर्व राष्ट्रपति और उनकी पत्नी शामिल होते ही हैं। हालांकि इन मिशेल के इन समारोहों में शामिल न होने को तलाक की तरह नहीं देखा जा सकता लेकिन इनसे सोशल मीडिया पर तलाक की चर्चा शुरू हो गई है।

हिंद महासागर में मजबूत नौसेना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता”, राजनाथ सिंह ने कहा- चीन की बढ़ती मौजूदगी चिंताजनक

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केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी को भारत के लिए चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक समृद्धि हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा से जुड़ी हुई है। साथ ही कहा कि नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। रक्षमंत्री ने कहा, हम दुनिया भर के विभिन्न क्षेत्रों में संघर्ष और युद्ध देख रहे हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए, हमें अपनी सुरक्षा के लिए योजना, संसाधन और बजट की आवश्यकता है।

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हिंद महासागर महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी पर चिंता जताते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की आर्थिक समृद्धि सीधे तौर पर हिंद महासागर क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा से जुड़ी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि यह बहुत जरूरी है कि हम अपने समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखें और अपने समुद्र तटों की रक्षा करें।

रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रमुख नौसैनिक शक्तियों ने हाल के सालों में हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति कम कर दी है, जबकि भारतीय नौसेना ने इसे बढ़ाया है। उन्होंने कहा, अदन की खाड़ी, लाल सागर और पूर्वी अफ्रीकी देशों से लगे समुद्री क्षेत्रों में खतरे बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए भारतीय नौसेना अपनी उपस्थिति को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 2024 को नौसेना नागरिक वर्ष के रूप में मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान सिंह ने आगे कहा कि दुनियाभर में हो रही उथल-पुथल और संघर्षों के मद्देनजर भारत की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आक्रामक और रक्षा संबंधी प्रक्रियाओं पर बल देने की आवश्यकता है। उन्होंने सशस्त्र बलों के सामने बढ़ती जटिलताओं का जिक्र करते हुए देश की रक्षा क्षमता को जल्द बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तनावपूर्ण भू-राजनीतिक सुरक्षा परिदृश्य के मद्देनजर सशस्त्र बलों के लिए बढ़ती जटिलताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, अगर हम रक्षा और सुरक्षा के नजरिए से पूरे दशक का आकलन करें तो हम कह सकते हैं कि यह एक उतार-चढ़ाव भरा दशक रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में हिंद महासागर में जल की रक्षा करना, नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना और समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखना आवश्यक है।

गाजा संघर्ष विराम को इजराइली कैबिनेट की मंजूरी, नेतन्याहू ने की घोषणा, अगवा बंधक होंगे रिहा

#israel_cabinet_approves_deal_with_hamasfor_ceasefire_gaza_conflict

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इजरायल-हमास युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान गाजा को हुआ। यहां पूरे युद्ध के समय मौत का तांडव होता रहा। अब युद्धविराम को लेकर इजरायल और हमास में डील हो गई है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने इस डील पर मुहर लगा दी है। यह घोषणा नेतन्याहू के कार्यालय द्वारा यह कहे जाने के एक दिन बाद की गई कि गाजा में युद्ध विराम और फलस्तीनी कैदियों की रिहाई के बदले बंधकों को मुक्त करने के लिए वार्ता में अंतिम समय में रुकावटें आईं।

इजरायल के प्रधानमंत्री के एक्स अकाउंट पर लिखा गया, 'वार्ता दल ने प्रधानमंत्री को बताया है कि बंधकों की रिहाई के लिए समझौते पर सहमति बन गई है। बंधकों और लापता लोगों के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय के प्राधिकरण ने बंधकों के परिवारों को इस बारे में जानकारी दे दी है। बंधकों की रिहाई के लिए रूपरेखा रविवार, 19 जनवरी, 2025 को लागू होगी।

इससे पहले मध्यस्थ कतर और अमेरिका ने बुधवार को युद्ध विराम की घोषणा की। यह समझौता एक दिन से अधिक समय तक अधर में लटका रहा। क्योंकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि अंतिम समय में कुछ जटिलताएं थीं। इसके लिए उन्होंने हमास आतंकवादी समूह को जिम्मेदार ठहराया। नेतन्याहू के इस तरह की प्रतिक्रिया से साफ समझा जा सकता है कि गाजा में तो युद्धविराम हो गया है लेकिन हमास और इजरायल के बीच तकरार बनी हुई है और आगे भी बनी रहेगी।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने समझौता मंजूरी में देरी के लिए हमास के साथ अंतिम समय में हुए विवाद को जिम्मेदार ठहराया, क्योंकि नेतन्याहू की सरकार के गठबंधन में बढ़ते तनाव ने समझौते के कार्यान्वयन में संकट पैदा कर दिया था। एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रमुख मध्यस्थ कतर ने घोषणा की थी कि समझौता पूरा हो गया है।

डॉक्टर बिटिया को मिलेगा इंसाफ, कोलकाता आरजी कर रेप और मर्डर केस में कोर्ट आज सुनाएगा फैसला

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आरजी कर मेडिकल कॉलेज कोलकाता मामले में फैसला शनिवार को सुनाया जाएगा। सीबीआई ने संजय रॉय के लिए मृत्युदंड की मांग की है। अदालत में सीबीआई ने यह भी कहा कि रॉय इस अपराध का एकमात्र गुनाहगार है। वहीं, अदालत का फैसला आने से एक दिन मृत ट्रेनी महिला डॉक्टर के माता-पिता ने जांच को आधा-अधूरा बताया। उनका आरोप है कि इस अपराध में शामिल अन्य लोग खुलेआम घूम रहे हैं। माता-पिता ने कहा कि जब तक उनकी बेटी को इंसाफ नहीं मिल जाता, तब तक वे लड़ाई जारी रखेंगे।

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पिछले वर्ष अगस्त महीने में ड्यूटी पर तैनात एक महिला चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या के मामले में सियालदह अदालत के न्यायाधीश 18 जनवरी यानी आज फैसला सुनाएंगे। ऑन-ड्यूटी पीजीटी इंटर्न के साथ 9 अगस्त को अस्पताल परिसर में बेरहमी से बलात्कार और हत्या कर दी गई थी। पहले डॉक्टर के आत्महत्या करने की सूचना बाहर आई। कुछ देर बाद पता चला कि ट्रेनी डॉक्टर की लाश अस्पताल के सेमिनार हॉल की तीसरी मंजिल पर अर्ध-नग्न मिली है। मामले में रेप के बाद हत्या किए जाने का ऐंगल सामने आया

13 अगस्त को कोलकाता पुलिस से मामला संभालना। घटना के अगले दिन 10 अगस्त कोलकाता पुलिस ने आरोपी संजय रॉय को हिरासत में ले लिया। संजय रॉय घटना की रात को मेडिकल कॉलेज परिसर में जाते हुए नजर आया और कुछ घंटे बाद वह घबराहट में बाहर निकला। संजय राउत का हेडफोन भी डॉक्टर की लाश के पास मिला था। कहा गया कि संजय रॉय ने नशे की हालत में डॉक्टर का रेप किया और पकड़े जाने के डर से उसकी हत्या कर दी।

सीबीआई के वकील ने इस घटना को अमानवीयता की सीमा को पार करना बताया है। जांच के दौरान, एक बहु-संस्थागत मेडिकल बोर्ड द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट ने भी पुष्टि की कि पीड़िता की मौत हाथ से गला घोंटने के बाद हुई थी। ट्रेनी डॉक्टर ने जब खुद को बचाने की कोशिश की तो उसका चश्मा टूट गया था। पीड़िता के साथ निर्दयता इतनी गंभीर थी कि उसकी आंख, मुंह और गुप्तांगों से लगातार खून बह रहा था। पीड़िता की गर्दन और होठों पर चोट के निशान पाए गए थे।

केंद्रीय एजेंसी ने 120 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए। 66 दिनों तक इस केस में कैमरा ट्रायल चला। सीबीआई के वकील ने संजय रॉय को इस घटना के अपराधी साबित करने के लिए (एलवीए) के अलावा जैविक साक्ष्य भी पेश किए, जिनमें डीएनए नमूने, विसरा आदि शामिल हैं। एजेंसी ने दावा किया कि पीड़िता ने रेप और उसे जान से मारने के समय खुद को बचाने के लिए काफी देर तक संघर्ष किया था। इसी में उसने संजय रॉय के शरीर पर पांच बार घाव किए थे, जो रिपोर्ट में सामने आए हैं।

*8वें वेतन आयोग की मंजूरी का दांव, दिल्ली विधानसभा चुनाव पर कितना होगा असर?

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दिल्ली में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा हाई है। एक तरफ आम आदमी पार्टी तीसरी बार सत्ता वापसी के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। वहीं, बीजेपी 26 साल के सियासी सूखे को खत्म करने की जद्दोजहद में है। इस सियासी तपिश के बीच केंद्र की मोदी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को साधने के लिए बड़ा दांव चला है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को आठवें वेतन आयोग के गठन को अपनी मंजूरी दे दी। नए वेतन आयोग के गठन और उसकी सिफारिशों के आने के बाद सरकारी कर्मचारियों तथा पेशनरों को वेतन में सीधा लाभ मिलेगा। इसे दिल्ली चुनाव के लिए पीएम मोदी का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है, क्योंकि दिल्ली में लाखों की संख्या में सरकारी कर्मचारी हैं और यहां की सियासत में अहम भूमिका भी तय करते हैं?

7वें वेतन आयोग का गठन 2016 में किया गया था और इसकी अवधि 2026 में समाप्त हो रही है। दिल्ली में 5 फरवरी को चुनाव होने वाला है। दिल्ली चुनाव के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है। सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन और पेंशनभोगियों के भत्तों में संशोधन के लिए 8वें वेतन आयोग के गठन का निर्णय लिया। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8वें वेतन आयोग के गठन का निर्णय लिया है। ऐसे में केंद्र के इस फैसले को चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

जानकारों की मानें तो केंद्र सरकार ने बीजेपी के लिए काफी अहम माने जा रहे चुनाव से पहले बड़ा फैसला लिया है। जानकारों के अनुसार दिल्ली में केंद्रीय कर्मचारियों की अच्छी खासी संख्या है। ऐसे में इस घोषणा से पार्टी चुनाव में निश्चित रूप से इस घोषणा के वोट में बदलने की उम्मीद लगा रही है।

केवल दिल्ली में 4 लाभ से ज्यादा कर्मचारियों पर निगाहें

आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन और उसकी सिफारिशें स्वीकार होने पर लगभग 49 लाख सरकारी कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनभोगियों के वेतन पर इसका सीधा असर पड़ेगा। एक आंकड़े के मुताबिक, अकेले दिल्ली में रक्षा और दिल्ली सरकार के कर्मचारियों सहित लगभग 4 लाख ऐसे कर्मचारी है, जिन्हें सीधे तौर पर इसका फायदा मिलेगा। राष्ट्रीय राजधानी में नई दिल्ली नगर निगम, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), पुलिस और डिफेंस के साथ ही लॉ एंड ऑर्डर सहित कई ऐसे डिपार्टमेंट हैं, जो केंद्र सरकार के अंतर्गत हैं। आठवां वेतन आयोग लागू होने के साथ ही केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है।

दिल्ली की तीन विधानसभा काफी अहम

केंद्रीय कर्मचारियों के लिहाज से दिल्ली की तीन विधानसभा काफी अहम है। इसमें नई दिल्ली, दिल्ली कैंट और आरके पुरम सीट शामिल हैं। इन इलाकों में केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के अलग-अलग कर्मचारी रहते हैं। सरकारी कर्मचारी वाली ज्यादातर सीटों पर आम आदमी पार्टी का ही कब्जा है। उदाहरण के तौर पर 2024 के लोकसभा चुनाव के वोटिंग पैटर्न को देखें तो नई दिल्ली लोकसभा सीट के तहत 10 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें से पांच सीटों पर सरकारी कर्मचारी बड़ी संख्या में रहते हैं। बीजेपी ने नई दिल्ली लोकसभा सीट जरूर जीतने में कामयाब रही थी, लेकिन सरकारी कर्मचारियों वाली नई दिल्ली, दिल्ली कैंट और आरके पुरम जैसी अहम सीट पर आम आदमी पार्टी से पिछड़ गई थी।

बीजेपी ने बदली अपनी रणनीति

बीजेपी ने इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपनी रणनीति बदली है। बीजेपी ने दिल्ली के मतदाताओं को सिर्फ एक प्लेटफार्म से नहीं लुभा रही है बल्कि इसके लिए अलग-अलग रणनीति भी तैयार की है। विभिन्न वर्गों के बीच कौन से केंद्रीय मंत्री और बीजेपी शासित राज्य के मुख्यमंत्री पहुंचेंगे, इसका अलग से खाका तैयार किया गया है। हर विधानसभा क्षेत्र में किसी बड़े नेता के नेतृत्व में एक समूह तैयार किया गया। इसी तर्ज पर बीजेपी ने दिल्ली के रह रहे केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों को साधने के लिए रणनीति बनाई है। मोदी सरकार के द्वारा आठवें वेतन आयोग की घोषणा, इसी दिशा में एक कदम बताया जा रहा है।

क्या खत्म होगा बीजेपी का वनवास?

दिल्ली की सियासत में बीजेपी सिर्फ एक बार ही सत्ता पर विराजमान हो सकी है और पिछले 27 साल से वनवास झेल रही है। बीजेपी सिर्फ 1993 में ही दिल्ली को फतह करने में कामयाब रही थी. 1998 में उसके हाथों से सत्ता चली गई तो फिर वापसी नहीं हो सकी। पहले 15 साल तक शीला दीक्षित की अगुवाई में कांग्रेस के सामने खड़ी नहीं हो सकी। शीला दीक्षित के बाद से 11 साल से आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के आगे पस्त नजर आई है। बीजेपी 2025 में होने वाले विधानसभा में हर हाल में दिल्ली में कमल खिलाना चाहती है, जिसके लिए पूरी ताकत झोंक रखी है।

पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान को 14 साल और बुशरा बीबी को 7 साल की सजा, जानें पूरा मामला

#former_pm_imran_khan_and_his_wife_bushra_bibi_guilty_in_corruption_case

पाकिस्तान की भ्रष्टाचार रोधी अदालत ने भ्रष्टाचार मामले में पूर्व पीएम इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को दोषी करार दिया है। पूर्व पीएम इमरान खान को 14 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। जबकि उनकी पत्नी बुशरा बीबी को सात साल की सजा सुनाई गई है। इमरान खान पर 10 लाख रुपये और उनकी पत्नी पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अगर वे दोनों जुर्माना नहीं भर पाते हैं तो पूर्व प्रधानमंत्री को छह महीने और बुशरा को तीन महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।

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अल-कादिर ट्रस्ट मामले में रावलपिंडी की अडियाला जेल में बनी अस्थायी अदालत में कड़ी सुरक्षा के बीच जज नासिर जावेद राणा ने यह फैसला सुनाया। इमरान खान पिछले 18 महीने से अडियाला जेल में बंद हैं। फैसला सुनाए जाने के बाद बुशरा बीबी को भी अदालत से ही गिरफ्तार कर लिया गया।

पाक अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला बह्रिया टाउन से जुड़ी जमीन और पैसे के लेन-देन से जुड़ा है, जिसमे इमरान खान पर भ्रष्टाचार का आरोप है। यह इमरान खान के पीएम कार्यकाल के दौरान हुआ था। इमरान खान और बुशरा बीबी पर आरोप लगा था कि उन्होंने बह्रिया टाउन लिमिटेड से अरबों रुपये और सैकड़ों कनाल जमीन हासिल की। अदालत ने इन आरोपों को ठीक पाते हुए इमरान और बुशरा को दोषी ठहराया।

भ्रष्टाचार रोधी अदालत के जज नासिर जावेद राणा ने 18 दिसंबर को ही इस मामले पर सुनवाई पूरी कर ली थी। इस मामले में पहले वे तीन बार फैसला टाल चुके हैं। फैसले का एलान होते ही पुलिस बुशरा बीबी को हिरासत में ले लिया। फैसले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को भ्रष्ट आचरण और अधिकार के दुरुपयोग का दोषी ठहराया गया है। जबकि बुशरा बीबी को अवैध गतिविधियों में शामिल होने का दोषी माना गया। न्यायाधीश ने अधिकारियों को अल-कादिर ट्रस्ट विवि को सरकार को सौंपने के निर्देश दिए। फैसले के बाद अदियाला जेल की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

इमरान और बुशरा के खिलाफ यह मामला दिसंबर, 2023 में शुरू हुआ था, जब एनएबी (नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो) ने इमरान और उनकी पत्नी के खिलाफ अल-कादिर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट से जुड़े भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। दोनों पर ब्लैक मनी का बह्रिया टाउन, कराची की जमीन के भुगतान के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया। इमरान और बुशरा बीबी ने कथित तौर बहरिया टाउन लिमिटेड से अरबों रुपए और सैकड़ों कनाल की जमीन हासिल की ताकि 50 अरब रुपए को वैध बनाया जा सके।

इस बार बजट में बढ़ने वाला है इनकम टैक्स? जानें क्या कह रहे एक्सपर्ट्स

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बजट की तारीख नजदीक आ रही है। बजट के नाम के साथ ही सबसे पहले दिमाग में अगर कोई चीज आती है तो वो है इनकम टैक्स। हर बार बजट से लोगों की उम्मीदें जुड़ी होती है कि वित्त मंत्री इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव कर टैक्स से कुछ राहत देंगी, लेकिन ये आस बजट घोषणाओं के साथ ही टूट जाता है। इस बार भी बजट 2025 के ऐलान से पहले लोगों ने कई उम्मीदें लगा रखी है।

बजट ऐसे समय में पेश हो रहा है, जब केन्द्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग को मंजूरी दे दी। इससे साफ हो गया है कि अगले साल से सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और रिटायर कर्मचारियों की पेंशन में बड़ा इजाफा होने वाला है। फैसला आने के बाद से सरकारी कर्मचारियों में खुशी की लहर भी है, लेकिन एक सवाल यह भी उठता है कि इस फैसले से सरकारी खजाने पर बढ़ने वाले बोझ को कम करने के लिए क्‍या बजट में नया बोझ डाला जा सकता है।

2 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्‍त बोझ कैसे सहेगी सरकार?

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 8वें वेतन आयोग के बाद सरकारी खजाने पर करीब 2 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्‍त बोझ आएगा, क्‍योंकि केंद्र सरकार के ही करीब 1.10 करोड़ कर्मचारी और पेंशनधारक इसके लाभार्थी होंगे। उनके अलावा राज्‍यों के भी करोड़ों कर्मचारियों को 8वें वेतन आयोग का लाभ देना पड़ेगा। जाहिर है कि सैलरी और पेंशन में मोटा इजाफा होने के साथ ही सरकारी खजाने पर भी बंपर बोझ बढ़ेगा। वैसे ही सरकार के पास खर्च करने के लिए पैसों की कमी है, जिसके लिए बाजार उधारी बढ़ती जा रही है। ऐसे में इस बोझ से निपटने के लिए सरकार को कुछ तो करना पड़ेगा।

क्या आम आदमी से करेगी सरकारी खजाने पर बढ़े बोझ की भरपाई?

बाजार विश्‍लेषकों का मानना है कि 8वें वेतन आयोग के बाद सरकारी खजाने पर बढ़ने वाले बोझ की भरपाई के लिए आम आदमी को तैयार रहना होगा। बहुत संभावना है कि सरकार एक बार फिर टैक्‍स को लेकर कुछ नया फैसला कर सकती है।बाजार विश्‍लेषकों का मानना है कि इनकम टैक्‍स बढ़ाने से सरकार का काम नहीं चलने वाला।

बोझ की भरपाई कॉरपोरेट टैक्‍स से?

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार पर अभी जीडीपी ग्रोथ को बढ़ाने के लिए निजी खपत को बढ़ावा देना और मिडिल क्‍लास के हाथ में ज्‍यादा पैसे देने का दबाव है। लिहाजा आम आदमी पर बोझ डालने के बजाय राहत देने का फैसला हो सकता है। सरकार अपने बोझ की भरपाई कॉरपोरेट टैक्‍स से कर सकती है। दरअसल, पिछले दिनों मुख्‍य आर्थिक सलाहकार और उद्योग संगठनों ने भी यह मुद्दा उठाया था कि कॉरपोरेट टैक्‍स घटने के बाद कंपनियों का मुनाफा तो 4 गुना बढ़ गया है, लेकिन उन्‍होंने कर्मचारियों की सैलरी में 1 फीसदी से भी कम का इंक्रीमेंट किया है। ऐस में माना जा रहा है कि सरकार कंपनियों पर टैक्‍स का बोझ बढ़ा सकती है।

मध्य वर्ग की नाराजगी भांप रही सरकार

यही नहीं, पिछले दिनों एक दिलचस्प कदम के तहत केंद्र सरकार ने फैसला किया कि जीएसटी कलेक्शन का हर महीने का डेटा जारी नहीं किया जाएगा। यह भी तय किया गया कि बाकी टैक्स कलेक्शन से जुड़े डेटा को बड़े पैमाने पर प्रचारित नहीं किया जाएगा। दरअसल, सरकार को सूचना मिली कि हर महीने बढ़ते टैक्स का गलत संदेश जा रहा था और लोगों को लग रहा था कि सरकार सिर्फ टैक्स वसूल रही है। पिछले कुछ सालों से चाहे जीएसटी टैक्स कलेक्शन का मामला हो, या इनकम टैक्स कलेक्शन का, इसमें वृद्धि को सरकार ने अपनी बड़ी सफलता के रूप में पेश किया। लेकिन अब उसने इससे परहेज करने का फैसला किया है। खासकर मध्य वर्ग में इस बात को लेकर नाराजगी सामने आ रही है कि सरकार टैक्स कलेक्शन पर पूरा फोकस करती है, लेकिन उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिलता है।

हाल के समय में आई तमाम रिपोर्टों ने इस बात की ओर संकेत किया कि मध्य वर्ग की खर्च करने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है और महंगाई के मुकाबले उसकी कमाई बिल्कुल नहीं बढ़ी है। यही कारण है कि इस बार के बजट में इनकम टैक्स में बड़ी राहत देने की उम्मीद लगाई जा रही है।

बढ़ता ही जा रहा है युनूस का पाकिस्तान प्रेम, बांग्लादेश के टॉप जनरल का रावलपिंडी दौरा

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बांग्लादेश के मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार की पाकिस्तान के साथ दोस्ती बढ़ रही है। बांग्लादेश और पाकिस्तान तेजी से एक-दूसरे के साथ रक्षा संबंधों में विस्तार कर रहे हैं। अब मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की सेना के एक हाई रैंक के अधिकारी को पाकिस्तान के दौरे पर भेजा। बांग्लादेश के एक टॉप जनरल लेफ्टिनेंट जनरल एसएम कमरुल हसन ने रावलपिंडी में पाकिस्तान आर्मी चीफ आसिफ मुनीर से मुलाकात की। यह दो पुराने दुश्मनों के बीच नए रिश्ते की शुरुआत है।

बांग्लादेश सशस्त्र बल डिविजन के प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर (पीएसओ) लेफ्टिनेंट जनरल एस एम कमरुल हसन की इस मुलाकात के बाद पाकिस्तान सेना की मीडिया मामलों की शाखा आईएसपीआर ने बयान जारी किया। बयान के मुताबिक, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के साथ अपने संबंधों में लचीलापन लाने पर जोर दिया, साथ ही दोनों अधिकारियों ने रक्षा संबंधों पर भी चर्चा की।

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के साथ मुलाकात के दौरान बांग्लादेशी लेफ्टिनेंट जनरल कमरुल हसन ने पाकिस्तान सेना की तारीफ की, जो एक ऐसा कदम था जिसके कुछ समय पहले तक बांग्लादेश में कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। बांग्लादेशी लेफ्टिनेंट ने उस पाकिस्तानी सेना की तारीफ भी की, जिसने मुक्ति संग्राम के समय लोगों पर कभी न भुला पाने वाले अत्याचार किए थे। यही वजह है कि पाकिस्तानी मीडिया भी बांग्लादेश सेना के सीनियर अधिकारी की इस यात्रा को 'दुर्लभ' बता रहा है।

आज भी बांग्लादेश के लोग पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों को भूले नहीं है। इसी पाकिस्तान की सेना के साथ 20वीं सदी के सबसे खूनी युद्धों में से एक के बाद बांग्लादेश ने 1971 में आजादी पाई थी। पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश बनने के बाद ढाका और इस्लामाबाद के बीच संबंध हमेशा तनाव भरे रहे हैं। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि बांग्लादेश में इस्लामिक कट्टरपंथियों के समर्थन वाली मोहम्मद यूनुस की अंतिम सरकार इसे मिटाने के काम पर लग गई है।

भारत के साथ घनिष्ठ दोस्ती रखने वाली पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सरकार के तख्तापलट के बाद पाकिस्तान-बांग्लादेश के रिश्तों ने नई करवट ली है। बीते साल, 5 अगस्त, 2024 को बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शन के बाद शेख हसीना पीएम पद से इस्तीफा देकर भारत आ गईं थीं और तब से वह भारत में ही रह रहीं हैं। शेख हसीना की सत्ता गिरने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के रिश्ते पाकिस्तान के साथ काफी मजबूत हुए हैं।