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*सीएम हेमंत सोरेन को मिला रावण दहन कार्यक्रम का न्योता, पंजाबी हिंदू बिरादरी और अरगोड़ा दुर्गा पूजा समिति ने किया सपरिवार आमंत्रित

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से कांके रोड रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में पंजाबी हिन्दू बिरादरी, (दशहरा कमेटी-2026) राँची एवं श्री दूर्गा पूजा एवं रावण दहन समिति, अरगोड़ा के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी आगामी 20 अक्टूबर को मोरहाबादी मैदान एवं अरगोड़ा मंडा मैदान में आयोजित "रावण दहन" कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सपरिवार सम्मिलित होने हेतु सादर आमंत्रित किया। मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने पंजाबी हिन्दू बिरादरी, (दशहरा कमेटी-2026) राँची एवं श्री दूर्गा पूजा एवं रावण दहन समिति, अरगोड़ा के प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों से "रावण दहन" कार्यक्रम के तैयारियों की विस्तृत जानकारी ली तथा कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल..

मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में पंजाबी हिन्दू बिरादरी, (दशहरा कमेटी-2026) राँची के अध्यक्ष श्री कुणाल अजमानी सहित श्री राजेश मेहरा, श्री सौरभ खन्ना, श्री सुनील कालरा, श्री हैप्पी फिंगर, श्री राहुल माकन, श्री राकेश गिरधर, श्री रणदीप आनंद तथा श्री दूर्गा पूजा एवं रावण दहन समिति, अरगोड़ा के अध्यक्ष श्री प्रकाश साहू सहित श्री जय प्रसाद साहू, श्री वीरेंद्र प्रसाद साहू, श्री मुनेश्वर साहू, श्री सुभाष प्रसाद साहू, श्री युवराज साहू, श्री सुमित साहू सहित अन्य उपस्थित रहे।

CEC ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ दौरा क्यों टला? पहले भी रद्द हो चुके हैं कई कार्यक्रम

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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के अन्य अधिकारियों का दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा अचानक रद हो गया है। यह दौरा 7 और 8 अक्टूबर को प्रस्तावित था, लेकिन चुनाव आयोग ने इसे टाल दिया है। इससे पहले उनका कुछ और राज्यों का दौरा भी इसी तरह से टल चुका है।

एसआईआर को लेकर घिरे सीईसी ज्ञानेश कुमार

सीईसी ज्ञानेश कुमार एसआईआर को लेकर घिरे हुए हैं। विपक्ष उनके खिलाफ सड़कों पर है। विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन के सांसद मंगलवार को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली की सड़कों पर उतरे। इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी को भी हिरासत में लिया गया। जब दिल्ली की सड़कों पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ रार बढ़ रही है, इसी बीच उनका दो दिन का छत्तीसगढ़ दौरा रद्द हो गया है। ज्ञानेश कुमार को 7 और 8 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ जाना था। लेकिन अब उनका यह दौरा टाल दिया गया है।

छत्तीसगढ़ में यहां था सीईसी का कार्यक्रम

जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ यात्रा के दौरान सीईसी ज्ञानेश कुमार चुनाव से जुड़े कार्यक्रमों के साथ-साथ कुछ प्रसिद्ध स्थानों पर भी जाने वाले थे। सीईसी का दंतेवाड़ा में दंतेश्वरी माता मंदिर, बस्तर में चित्रकोट वॉटरफॉल और कबीरधाम जिले में भोरमदेव मंदिर के दौरे का कार्यक्रम था।

पहले भी टल चुका है कई कार्यक्रम

ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ दौरा रद्द होना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पहले उनके कुछ और तय कार्यक्रम टल चुके हैं, जो काफी चर्चा में भी रहा है। छत्तीसगढ़ से पहले उनकी यूपी में मेरठ और वाराणसी का कार्यक्रम रद्द हो चुका है। इसके अलावा उनका उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख का कार्यक्रम भी टल चुका है।

क्यों टला सीईसी का कार्यक्रम?

सवाल उठ रहा है कि आखिर चुनाव आयोग ने यह फैसला क्यों लिया? सीईसी का यह दौरा ऐसे समय पर टला है जब चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार खुद एक बड़े प्रशासनिक और कानूनी विवाद के केंद्र में हैं। आरोप है कि आयोग के तीन सदस्यीय ढांचे में सीईसी ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की असहमति के बावजूद कई अहम फैसले लिए। दावा किया जा रहा है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दोनों आयुक्तों ने कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। सबसे बड़ा विवाद नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन वाले 'फॉर्म-6' में कथित तौर पर बिना उचित प्रक्रिया के बदलाव करने को लेकर है।

2026 में भौतिक विज्ञान के नोबेल पुरस्कार पर विशेष विज्ञान लेख



*भौतिकी का नोबेल 2026: फ्रांसिस हाल्जेन और 'भूतिया कणों' की खोज।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 6 अक्टूबर 2026 को रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने भौतिकी का नोबेल पुरस्कार बेल्जियम मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को घोषित किया है। उन्हें यह सम्मान "आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में निर्णायक योगदान और ब्रह्मांडीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज" के लिए दिया गया है।
नोबेल समिति ने इन न्यूट्रिनो कणों को "अंतरिक्ष से आने वाले भूतिया संदेश" (Ghostly messages from space) करार दिया है,जो ब्रह्मांड के सबसे रौद्र और रहस्यमयी हिस्सों से सीधी सूचना लेकर आते हैं।

*विजेता और पुरस्कार का कारण क्या है।* खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार फ्रांसिस हाल्जेन वर्तमान में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन में प्रोफेसर हैं। उनका जन्म 1944 में बेल्जियम के टिएनेन शहर में हुआ था एवं
आधिकारिक घोषणा के अनुसार, हाल्जेन को यह पुरस्कार उनके उस अभूतपूर्व विचार और वैज्ञानिक नेतृत्व के लिए मिला है जिसके तहत उन्होंने दक्षिणी ध्रुव (अंटार्कटिका) की बर्फ का उपयोग न्यूट्रिनो कणों को पकड़ने के लिए किया।  नोबेल समिति के अध्यक्ष मार्क पियर्स ने कहा, "फ्रांसिस हाल्जेन ने शोधकर्ताओं और इंजीनियरों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम का नेतृत्व किया है जिसने हमें एक शानदार उपकरण दिया है। उनकी दृढ़ता और वैज्ञानिक दृष्टि ने एक नए प्रकार के खगोल विज्ञान का मार्ग प्रशस्त किया है।" और इस वर्ष भौतिकी की नोबेल पुरस्कार राशि 12 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (लगभग 1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर) है, जो पूरी तरह से हाल्जेन को दी जाएगी क्योंकि इस वर्ष यह पुरस्कार केवल एक ही वैज्ञानिक को दिया गया है।
*क्या होते हैं,न्यूट्रिनो: ब्रह्मांड के 'भूतिया कण'।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो, ब्रह्मांड के सबसे बुनियादी और रहस्यमयी उप-परमाणु कणों में से एक हैं। इन्हें 'घोस्ट पार्टिकल्स' (Ghost Particles या भूतिया कण) भी कहा जाता है क्योंकि इन पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता और इनका द्रव्यमान लगभग न के बराबर होता है।
ये कण सुदूर अंतरिक्ष में होने वाली भीषण घटनाओं (जैसे सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल, सक्रिय आकाशगंगाओं के केंद्र) से पैदा होते हैं और प्रकाश की गति से यात्रा करते हैं। चूंकि ये सामान्य पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं, या कुछ यूं कहें कि बिल्कुल भी नहीं के बराबर प्रतिक्रिया करते हैं इसलिए ये बिना रुके पृथ्वी, इंसानों, चट्टानों,पहाड़ों और ग्रहों आदि के पार निकल जाते हैं। और यह तक भी पता नहीं चलता कि कब यह कण उनको पार कर रहे हैं। और यह भी जानना ज़रूरी है कि हर सेकंड अरबों-खरबों न्यूट्रिनो हमारे शरीर और पृथ्वी से होकर गुजरते रहते हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश बिना किसी क्रिया के निकल जाते हैं, इसी वजह से इन्हें सामान्य टेलिस्कोप से देख पाना या पकड़ पाना नामुमकिन था।
*क्या है,आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी: बर्फ का विशाल दूरबीन* ।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति के अनुसार फ्रांसिस हाल्जेन ने 1988 में एक अभूतपूर्व विचार रखा कि अंतरिक्ष से आने वाले इन रहस्यमयी कणों को पकड़ने के लिए दक्षिणी ध्रुव (South Pole, अंटार्कटिका) की विशाल बर्फ का उपयोग किया जा सकता है।उनके इसी दृष्टिकोण के कारण अंटार्कटिका की गहराई में बर्फ के नीचे 1 क्यूबिक किलोमीटर के दायरे में दुनिया का पहला विशालकाय न्यूट्रिनो डिटेक्टर बनाया गया, जिसे आइसक्यूब (IceCube) कहा जाता है। *आइसक्यूब कैसे काम करता है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी की आधिकारिक सूची के अनुसार आइसक्यूब में बर्फ के अंदर हजारों बेहद संवेदनशील लाइट सेंसर्स (प्रकाश डिटेक्टर या Digital Optical Modules) लगाए गए हैं, जिन्हें लगभग 1,450 से 2,450 मीटर की गहराई पर बर्फ में लगाया गया है।
जब कोई,उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो बर्फ के परमाणुओं से टकराता है, तो एक हल्की नीली रोशनी जिसे खगोलविज्ञान में (Cherenkov radiation) चेरेनकोव विकिरण कहा जाता है। यह तब उत्पन्न होता है जब कोई आवेशित कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) किसी माध्यम (जैसे पानी या काँच) में लगभग प्रकाश की गति से यात्रा करता है। इसके कारण आमतौर पर पानी के भीतर एक चमकदार नीली रोशनी दिखाई देती है,(Cherenkov radiation) पैदा होती है, जिसे ये सेंसर रिकॉर्ड कर लेते हैं। फिर वैज्ञानिक उस सिग्नल से पता लगाते हैं कि कण कहाँ से आया, उसकी दिशा क्या थी, उसकी ऊर्जा कितनी थी और संभवतः वह किस खगोलीय स्रोत से आया। साथ ही यह भी जानना ज़रूरी है कि दक्षिणी ध्रुव की बर्फ का उपयोग करने के कई फायदे हैं जैसे कि यह बर्फ विभिन्न प्रकार के हस्तक्षेप से मुक्त है और यह क्षेत्र भूगर्भीय रूप से स्थिर है, यहाँ कोई भूकंप नहीं आते। अगर हम इस आइसक्यूब के निर्माण की बात करें तो पाते हैं कि आइसक्यूब का निर्माण दिसंबर 2010 में पूरा हुआ था और इसकी कुल लागत लगभग 279 मिलियन डॉलर थी।
*2013 की ऐतिहासिक खोज और महत्व क्या है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला (IceCube Neutrino Observatory)  की आधिकारिक विश्व वैज्ञानिक समुदाय की पुष्टि के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक 2013 में उच्च-ऊर्जा खगोलीय न्यूट्रिनो (high-energy astrophysical neutrinos) का पहली बार स्पष्ट अवलोकन था।
इनमें कुछ न्यूट्रिनो की ऊर्जा पेटाइलेक्ट्रॉनवोल्ट Petaelectronvolt (PeV) स्तर तक थी,(पेटाइलेक्ट्रॉनवोल्ट (Petaelectronvolt) ऊर्जा को मापने की एक अत्यंत विशाल इकाई (यूनिट) है)।अर्थात अत्यंत विशाल ऊर्जा। इस खोज ने यह प्रमाणित किया कि हमारे ब्रह्मांड में ऐसे प्राकृतिक स्रोत मौजूद हैं जो अत्यधिक ऊर्जावान न्यूट्रिनो उत्पन्न करते हैं। *इस खोज का विज्ञान की दुनिया में क्या महत्व है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि फ्रांसिस हाल्जेन के इस काम ने खगोल विज्ञान (Astronomy) के एक बिल्कुल नए युग की शुरुआत की है। इस खोज से आगे आने वाले समय में ब्रह्मांड के कई अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठ सकता है क्योंकि न्यूट्रिनो अंतरिक्ष के उन सुदूर और रौद्र एवं अज्ञात कोनों की जानकारी लाते हैं, जहाँ से प्रकाश भी बाहर नहीं आ पाता (जैसे कि एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लिआई या विशाल ब्लैक होल)। अब अगर हम बात करें पारंपरिक दूरबीनों एवं अन्य विधाओं की तो पाते हैं कि उनसे न्यूट्रिनों को पूरी तरीके से समझना आसान नहीं था या इसको और भी आसान भाषा में समझने की कोशिश करें तो पाते हैं कि अछूते ब्रह्मांड को देखने के साथ ही पारंपरिक टेलिस्कोप केवल प्रकाश या इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणों को देख सकते हैं, लेकिन आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी की मदद से वैज्ञानिक अब उन अनदेखी घटनाओं का अध्ययन कर पा रहे हैं जो अरबों प्रकाश वर्ष दूर उस काले घने अंधकारमय ब्रह्मांडीय गुफाओं में घटित हो रही हैं। साथ ही इसे मल्टी-मैसेंजर एस्ट्रोनॉमी के व्यापक विकास के संदर्भ में भी देखा जा सकता है,जहाँ प्रकाश, गुरूत्वीय तरंगें ( gravitational waves), कॉस्मिक रेज (cosmic rays)और न्यूट्रिनों (neutrinos) जैसे अलग-अलग ब्रह्मांडीय संदेशबाहकों (cosmic messengers) से ब्रह्मांड की जानकारी प्राप्त की जाती है। साथ ही यह भी ज्ञात हो कि 2018 में,आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी ने एक अत्यंत उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो को TXS 0506+056 नामक ब्लेज़र (blazar) तक ट्रेस किया,जो ओरायन तारामंडल की दिशा में 3.7 अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। यह पहली बार था जब किसी न्यूट्रिनो को उसके विशिष्ट खगोलीय स्रोत से जोड़ा गया।
*क्यों इतना अनोखा है, न्यूट्रिनो और इन्हें खोजना भी इतना मुश्किल क्यों था* ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो,ब्रह्मांड के सबसे बुनियादी और रहस्यमयी उप-परमाणु कणों (Subatomic particles) में से एक हैं। इन्हें 'घोस्ट पार्टिकल्स' (Ghost Particles या भूतिया कण) भी कहा जाता है, इन कणों पर कोई विद्युत आवेश (Charge) नहीं होता और इनका द्रव्यमान (Mass) लगभग न के बराबर ही होता है या कुछ यूं कहें कि लगभग कोई द्रव्यमान नहीं है और ये कण सुदूर अंतरिक्ष में होने वाली उग्र घटनाओं (जैसे सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल आदि) से पैदा होते हैं और प्रकाश की गति से यात्रा करते हैं चूंकि ये सामान्य पदार्थ के साथ कोई प्रतिक्रिया भी प्रदर्शित नहीं करते हैं इसलिए ये बिना रुके पृथ्वी, इंसानों, चट्टानों ,पहाड़ों और ग्रहों आदि के पार निकल जाते हैं, इसी वजह से इन्हें सामान्य टेलिस्कोप से देख पाना या पकड़ पाना नामुमकिन था, इसलिए इसमें बर्फ के अंदर हजारों बेहद संवेदनशील लाइट सेंसर्स (प्रकाश डिटेक्टर) लगाए गए हैं। जब कोई उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो बर्फ के परमाणुओं से टकराता है, तो एक हल्की नीली रोशनी पैदा होती है, जिसे ये सेंसर रिकॉर्ड कर लेते हैं। इसीलिए इन उच्च ऊर्जा यूट्रिनो को खोजना इतना अनोखा और इतना मुश्किल एवं चुनौतीपूर्ण था। और यही कार्य एवं इनकी खोज करने के लिए बर्ष 2026 का भौतिकी (फिजिक्स) का नोबेल पुरस्कार वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को अंतरिक्षीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो (high-energy neutrinos of astrophysical origin) की खोज और आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी (IceCube Neutrino Observatory) में उनके निर्णायक योगदान के लिए देने की घोषणा की गई है। उन्होंने अंतरिक्ष से धरती तक आने वाले बेहद ताकतवर और मायावी कणों न्यूट्रिनो को पकड़ने और उनका पता लगाने का तरीका खोजा है एवं आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी जहां उन्होंने दक्षिण ध्रुव (Antarctic) की गहरी बर्फ में हजारों लाइट सेंसर लगाकर दुनिया की पहली विशाल न्यूट्रिनो वेधशाला की नींव रखी, जिससे ब्रह्मांड की ऊर्जावान प्रक्रियाओं का अध्ययन संभव हुआ। साथ ही नई प्रकार की खगोल विज्ञान को भी जन्म दिया है या कुछ यूं कहें कि इस खोज ने खगोल विज्ञान (Astronomy) की एक बिल्कुल नई विधा का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे दूरस्थ आकाशगंगाओं और ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में मदद मिलती है।

*क्या है न्यूट्रिनो (Neutrino) कण की कहानी ? ।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो (Neutrino) कण का सबसे पहले सैद्धांतिक अनुमान वर्ष 1930 में वोल्फगैंग पाउली (Wolfgang Pauli) ने लगाया था,जबकि वर्ष 1956 में क्लाइड कोवान (Clyde Cowan) और फ्रेडरिक रेइन्स (Frederick Reines) ने इसका प्रयोगात्मक रूप से पता लगाया (खोज की) अब अगर हम बात करें न्यूट्रिनो से जुड़े मुख्य तथ्य सैद्धांतिक प्रस्ताव की तो पाते हैं कि 1930 में वोल्फगैंग पाउली ने बीटा क्षय (beta decay) में ऊर्जा संरक्षण के नियम को समझाने के लिए इस काल्पनिक कण का सुझाव दिया था एवं इसके नामकरण की बात करें तो पाते हैं कि इसका नामकरण एक इतालवी भौतिक विज्ञानी एनरिको फर्मी ने इस कण का नाम 'न्यूट्रिनो' रखा, जिसका अर्थ "छोटा उदासीन कण" है। साथ ही इसके प्रयोगात्मक खोज की बात करें तो पाते हैं कि 1956 में क्लाइड कोवान और फ्रेडरिक रेइन्स ने परमाणु रिएक्टर का उपयोग करके पहली बार न्यूट्रिनो का प्रायोगिक प्रमाण प्राप्त किया। इस खोज के लिए फ्रेडरिक रेइन्स को 1995 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला  और अब वर्ष 2026 की बात करें तो पाते हैं कि 2026 का भौतिकी (फिजिक्स) का नोबेल पुरस्कार वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को अंतरिक्षीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो (high-energy neutrinos of astrophysical origin) की खोज और आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी (IceCube Neutrino Observatory) में उनके निर्णायक योगदान के लिए दिया गया है,क्योंकि उन्होंने अंतरिक्ष से धरती तक आने वाले बेहद ताकतवर और मायावी कणों जिन्हें न्यूट्रिनो कहा जाता है को पकड़ने और उनका पता लगाने का तरीका खोजा।

*भारत के शोधकर्ताओं के लिए इस खोज का क्या महत्व हो सकता है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए यह खोज विशेष महत्व रखती है क्योंकि यह दर्शाती है कि कैसे एक साधारण विचार (दक्षिणी ध्रुव की बर्फ का उपयोग) और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों को सुलझाया जा सकता है।
आइसक्यूब एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग है, जिसमें लगभग 450 भौतिक विज्ञानी, 58 संस्थान और 14 देश शामिल हैं। साथ ही अंटार्कटिका के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित IceCube Neutrino Observatory (आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला) के संदर्भ में भारत का महत्व भी कुछ मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है। जैसा कि हम जानते हैं कि आइसक्यूब एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजना है, लेकिन वैसे तो भारत का इस वेधशाला से प्रत्यक्ष या सीधे तौर पर संबंध नहीं है, लेकिन भारतीय वैज्ञानिक, शोधकर्ता और संस्थान वैश्विक स्तर पर इस प्रयोग के डेटा विश्लेषण, कोडिंग और इसके माध्यम से की जाने वाली ब्रह्मांडीय खोजों (जैसे "घोस्ट पार्टिकल्स" या न्यूट्रिनो की पहचान) में अनुसंधान के ओपन-सोर्स डेटा का विश्लेषण करते हैं।और साथ में यह भी जानना आवश्यक है कि भारत भी अपना न्यूट्रिनो प्रोजेक्ट  INO (India-based Neutrino Observatory) बनाने के लिए प्रयास कर रहा है इसीलिए जब भी विज्ञान में आइस क्यूब ऑब्जर्वेटरी (IceCube Observatory) की बात होती है, तो उसके समानांतर भारत के अपने प्रोजेक्ट INO (इंडिया-बेस्ड न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी) की चर्चा जरूर होती है। लेकिन दोनों में अंतर क्या है? यह भी जानना ज़रूरी है,जहाँ आइस क्यूब अंटार्कटिका की गहरी बर्फ (Ice) के नीचे न्यूट्रिनो ढूंढता है, वहीं भारत का आई०एन० ओ०,(INO)  प्रोजेक्ट तमिलनाडु के थेनी जिले की बोदी पश्चिम पहाड़ियों में जमीन के नीचे एक विशाल प्रयोगशाला बनाने की योजना है एवं इसके लोकेशन के महत्व की बात करें तो पाते हैं कि भारत की भौगोलिक स्थिति भूमध्य रेखा (Equator) के पास है,यहाँ बनाई जाने वाली ऑब्जर्वेटरी से वैज्ञानिकों को उन न्यूट्रिनो कणों का भी अध्ययन करने में मदद मिल मिलेगी जो पृथ्वी के कोर (केंद्र) से होकर गुजरते हैं साथ ही यह डेटा,आइस क्यूब जैसी ध्रुवीय (Polar) ऑब्जर्वेटरी के पूरक के रूप में काम आ सकता है। लेकिन अभी तो इस प्रोजेक्ट की संपूर्ण स्थापना को कई चुनौतियों से निबटना बाकी है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अब हम पुनः संक्षेप में फ्रांसिस हाल्जेन एवं आइस क्यूब ऑब्जर्वेटरी की बात करें तो पाते हैं कि फ्रांसिस हाल्जेन ने अंटार्कटिका की बर्फ को एक अनोखी विशाल दूरबीन में बदल दिया, जिसने विज्ञान को ब्रह्मांड के उन सबसे रहस्यमयी 'भूतिया कणों' को पकड़ने और समझने की शक्ति दी,जो अब तक इंसान की पहुंच से पूरी तरह बाहर थे। इसीलिए यह भी समझना ज़रूरी है कि यह नोबेल पुरस्कार केवल किसी एक व्यक्ति द्वारा अकेले किए गए प्रयोग के लिए नहीं है बल्कि हाल्जेन का सम्मान उनके निर्णायक वैज्ञानिक योगदान, दृष्टि और आइसक्यूब के नेतृत्व तथा उच्च-ऊर्जा खगोलीय न्यूट्रिनो की खोज से जुड़ा है। जो निश्चित तौर पर यह दर्शाता है कि अगर टीम भावना से एवं समग्र रूप से दृढ़ संकल्प और सकारात्मकता से लगातार कोई भी कार्य किया जाता है तो एक दिन उन अच्छे कार्यों का फल और किसी भी समस्या का हल भी अवश्य ही प्राप्त होता है।और इसी को सार्थक होता हुआ देख सकते है कि नोबेल पुरस्कार समिति द्वारा 2026 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार को देने की घोषणा, फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को की गई है।
मुख्यमंत्री योगी ने पूरी की तीन दशक पुरानी मांग, गंगा पर सेतु से सीधे जुड़ेंगे भदोही-प्रयागराज

सीतामढ़ी-धनतुलसी-डेंगुरपुर घाट पर 1.32 किमी लंबे सेतु का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया शिलान्यास

₹300 करोड़ से अधिक की परियोजना से पांच जिलों की राह होगी आसान, मध्य प्रदेश की ओर भी सफर होगा सुगम

पीपा पुल और नाव पर निर्भरता होगी खत्म, कोनिया और मांडा क्षेत्र की सवा लाख से अधिक आबादी को मिलेगी राहत

सीतामढ़ी आने वाले श्रद्धालुओं को होगी सहूलियत, कालीन कारोबार के लिए भी खुलेगा बेहतर रास्ता

 संत रविदास नगर भदोही। गंगा पर पक्के पुल के लिए तीन दशक से अधिक समय से इंतजार कर रहे कोनिया क्षेत्र के लोगों की बड़ी मांग रविवार को पूरी हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीतामढ़ी-धनतुलसी-डेंगुरपुर घाट पर ₹300 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाले 1.32 किमी लंबे सेतु का शिलान्यास किया। इसके साथ पहुंच मार्ग और सुरक्षात्मक कार्य भी कराए जाएंगे। पुल तैयार होने पर भदोही के धनतुलसी से प्रयागराज के मांडा क्षेत्र स्थित डेंगुरपुर तक सीधा सड़क संपर्क हो जाएगा।

इस पुल से भदोही और प्रयागराज के साथ मिर्जापुर, वाराणसी और जौनपुर की राह भी आसान होगी। इस तरह उत्तर प्रदेश के पांच जिलों को इसका लाभ मिलेगा। मिर्जापुर के रास्ते मध्य प्रदेश की ओर जाने वालों को भी सहूलियत होगी।

बरसात में खत्म होगी बड़ी परेशानी

धनतुलसी-डेंगुरपुर घाट पर अभी गंगा पार करने के लिए पीपा पुल और नाव का सहारा लेना पड़ता है। बरसात में गंगा का जलस्तर बढ़ते ही पीपा पुल हटा दिया जाता है। ऐसे में लोगों की मुश्किल बढ़ जाती है। पक्का पुल बनने के बाद कोनिया और मांडा क्षेत्र की सवा लाख से अधिक आबादी को पूरे साल गंगा पार करने का रास्ता मिलेगा। पढ़ाई, इलाज, बाजार और रोजमर्रा के दूसरे कामों के लिए भी लोगों को राहत मिलेगी।

सीतामढ़ी आने वाले श्रद्धालुओं को भी राहत

गंगा किनारे स्थित सीता समाहित स्थल सीतामढ़ी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी पुल अहम होगा। प्रयागराज की ओर से आने वालों को सीधा रास्ता मिलेगा। इसका फायदा आसपास के बाजार और छोटे कारोबारियों को भी होगा।

कालीन कारोबार की राह भी होगी आसान

भदोही के कालीन कारोबार के लिए भी यह पुल महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रयागराज की ओर सीधा सड़क संपर्क होने से माल लाने-ले जाने में आसानी होगी। कारोबारियों का कहना है कि पुल से व्यापार के लिए नए क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी।

 

अंजनी कारपेट, खमरिया के पीयूष कुमार बरनवाल ने कहा, “इस पुल का बहुत लंबे समय से इंतजार था। अब काम शुरू होने जा रहा है तो क्षेत्र के लोगों में खुशी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बहुत-बहुत धन्यवाद।”

 

त्रिवेणी रग इंडस्ट्रीज, छतमी गोपीगंज के शाश्वत पांडेय ने कहा, “पुल हमारे कालीन कारोबार के लिए काफी काम आएगा। प्रयागराज की तरफ संपर्क बेहतर होने से व्यापार को भी फायदा होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार।”

 

कालीन निर्यात संवर्धन परिषद की प्रशासनिक समिति के पूर्व सदस्य राजेंद्र कुमार मिश्र ने कहा, “भदोही का कालीन दुनिया भर में जाता है। यह पुल कारोबार के लिए नए रास्ते खोलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्षेत्र की बड़ी जरूरत पूरी की है।”

पुल बनने से परिवारों की परेशानी होगी कम

गृहिणी एवं समाजसेवी सरिता गुप्ता ने कहा, “बरसात के दिनों में गंगा पार करना बड़ी परेशानी बन जाता है। पक्का पुल बनने से बच्चों की पढ़ाई से लेकर इलाज और रोजमर्रा के काम तक आसान होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद।”

आज जंतर मंतर पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, 11 मेट्रो स्टेशन बंद, बढ़ाई गई सुरक्षा

#protestsagainstcecgyaneshkumaratjantar_mantar

दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज से कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने गांधी जयंती के मौके पर जंतर मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी है। प्रदर्शन से पहले ही जंतर-मंतर को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। जंतर मंतर की ओर जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों पर बैरिकेड लगाए हैं। बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आज जंतर मंतर पर प्रदर्शन होना है। सीजेपी के साथ ही AISA, SFI और DYFI से जुड़े छात्र संगठनों ने चुनाव आयोग के काम करने के तरीके और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन बुलाया है। पुलिस सूत्रों ने अनुमान जताया है कि प्रदर्शन में करीब 3,000 से 4,000 लोग जुट सकते हैं। इस प्रदर्शन का सीधा फोकस एसआईआर और चुनावी मतदाता सूचियों को लेकर उठ रहे सवालों पर है। आम आदमी पार्टी की नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने भी लोगों से सुबह 10 बजे जंतर मंतर पहुंचने की अपील की है।

छात्र संगठन निकालेंगे मार्च

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर तक मार्च निकालेंगे और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करेंगे। संगठन के एक सदस्य ने बताया कि प्रस्तावित मार्च के लिए दोनों संगठनों को अनुमति नहीं मिली है। इसके बावजूद वे बड़ी संख्या में जंतर-मंतर की ओर बढ़ेंगे। मार्च में करीब 1,500 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

पुलिस के साथ सीएपीएफ भी तैनात

इस दौरान किसी भी संभावित भीड़ से निपटने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों को भी तैनात किया गया है। जंतर मंतर को चारों तरफ बैरिकेडिंग की गई है। आसपास के मेट्रो स्टेशन पर भी जवानों को तैनात किया गया है। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरे से भी पूरे नई दिल्ली इलाके में नजर रखी जाएगी। पुलिस कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरे से भी लगातार निगरानी की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस की कोशिश होगी कि प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर पर आने से पहले ही रोक लिया जाए।

11 मेट्रो स्टेशन बंद

जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो ने शुक्रवार को 11 स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और बाहर निकलने पर रोक लगा दी है। डीएमारसी के मुताबिक, अगले आदेश तक जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, आईएनए, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर एंट्री-एग्जिट बंद रहेगी. हालांकि राजीव चौक, मंडी हाउस, नई दिल्ली और केंद्रीय सचिवालय स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

CEC ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा', इंडिया गठबंधन की बैठक में बोले खरगे

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दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बुधवार को हुई विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की बैठक खत्म हो गई है। बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए। खरगे ने दो टूक कहा कि पूरे देश में नागरिक और राजनीतिक दल चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर चिंताएं जता रहे हैं। आज हमारे मुख्य चुनाव आयुक्त की असलियत सबके सामने आ गई है। उनके दो साथी सदस्यों ने 10 महीनों में 14 बार पत्र लिखे हैं। इससे उनकी ईमानदारी और इरादों पर सवाल उठता है। इसलिए, उन्हें उनके पद से हटा दिया जाना चाहिए।

2 से 8 अक्‍टूबर कर चलेगा अभियान

कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर बताया कि बैठक में 20 पार्टियों ने हिस्‍सा लिया और सभी ने अपने विचार रखे। खरगे ने कहा कि हम लोकतंत्र और युवाओं के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। खरगे ने बताया कि ज्ञानेश कुमार इस समय मोदी सरकार की कठपुतली बने हुए हैं। इसलिए हम देशभर में उनके खिलाफ अभियान चलाएंगे। चुनाव आयोग वोटों की गड़बड़ी में शामिल है। ज्ञानेश कुमार कठपुतली बने हुए हैं। इसके खिलाफ हम 2 से 8 अक्‍टूबर तक हम अभियान चलाएंगे। 6 तरीख को चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे। विपक्षी नेता राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मिलेंगे और अपनी बात रखेंगे। खरगे ने बताया कि हम देशभर में 5 बड़ी रैलियां करेंगे। ये रैलियां अक्‍टूबर और नंवबर के महीने में होंगी।

शिकायतों को स्वीकार करने के बजाय एसआईआर शुरू की

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष लंबे समय से ईवीएम और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाता रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने शिकायतों को स्वीकार करने के बजाय एसआईआर प्रक्रिया शुरू की। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग एसआईआर को मतदाता सूची को अपडेट और व्यवस्थित करने की प्रक्रिया बताता है, लेकिन यदि इससे बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित होते हैं तो वास्तविक मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित न किया जाए, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी व्यवस्था की होनी चाहिए।

बैलट पेपर से वोटिंग कराने की मांग

खरगे ने कहा कि आगामी चुनावों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले की मतदाता सूची का इस्तेमाल होना चाहिए और ईवीएम के स्थान पर मत पत्र से मतदान कराया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की बैठक में यह भी कहा कि एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य भारत के लोकतंत्र की बुनियाद है और इसे कमजोर नहीं होने दिया जा सकता।

पितृपक्ष मेले में अर्श हॉस्पिटल का निःशुल्क चिकित्सा शिविर और एंबुलेंस सेवा का शुभारंभ

गयाजी। विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला में देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आर्षेय हरिहंत फाउंडेशन के तत्वावधान में एपी कॉलोनी स्थित अर्श सुपर मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल की ओर से विष्णुपद मंदिर के समीप निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाया गया है। शिविर में पितृपक्ष मेला के दौरान आने वाले तीर्थयात्रियों को चिकित्सीय परामर्श एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही तीर्थयात्रियों के लिए निःशुल्क एंबुलेंस सेवा भी उपलब्ध रहेगी।

निःशुल्क चिकित्सा शिविर का उद्घाटन शनिवार को गया नगर निगम के मेयर वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान, नगर आयुक्त डॉ. गगन कुमार, पूर्व डिप्टी मेयर सह सशक्त स्थायी समिति के सदस्य अखौरी ओंकार नाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव, शांति निकेतन एकेडमी के निदेशक हरि प्रपन्ना उर्फ पप्पू जी, चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रमोद भदानी एवं अर्श हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. नवनीत निश्चल ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। इस अवसर पर हॉस्पिटल के मार्केटिंग हेड अमर पांडेय ने अतिथियों का माला पहनाकर स्वागत किया।

मेयर गणेश पासवान ने कहा कि पितृपक्ष मेला में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गयाजी आते हैं। ऐसे में तीर्थयात्रियों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए अर्श हॉस्पिटल की ओर से लगाया गया यह शिविर सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि गयाजी आने वाला प्रत्येक तीर्थयात्री यहां से बेहतर अनुभव लेकर जाए, इसके लिए सेवा और सुविधा दोनों महत्वपूर्ण हैं। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में इस तरह की पहल तीर्थयात्रियों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। उन्होंने अर्श हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. नवनीत निश्चल एवं उनकी पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

सशक्त स्थायी समिति के सदस्य मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि पितृपक्ष मेला गयाजी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों के साथ ही विदेशों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे समय में तीर्थयात्रियों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सेवा का महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने कहा कि गयाजी आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा में सामाजिक संस्थाओं और निजी संस्थानों की भागीदारी से सेवा भावना और मजबूत होती है। अर्श हॉस्पिटल की यह पहल तीर्थयात्रियों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के समय तत्काल सहायता उपलब्ध कराने में उपयोगी होगी।

अर्श हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. नवनीत निश्चल ने कहा कि शिविर में हॉस्पिटल के चिकित्सकों की ओर से प्रतिदिन तीर्थयात्रियों को निःशुल्क चिकित्सीय परामर्श दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यदि किसी तीर्थयात्री को प्राथमिक उपचार से अधिक चिकित्सा की आवश्यकता होती है, तो उसके लिए शिविर स्थल पर निःशुल्क एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। जरूरत पड़ने पर मरीज को अस्पताल ले जाकर वहां भी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।

उन्होंने कहा कि इस चिकित्सा शिविर का उद्देश्य पितृपक्ष मेला में देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों की ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना के साथ सेवा करना है। गयाजी आने वाले श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य संबंधी किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो, इसके लिए हॉस्पिटल की टीम पूरी तत्परता के साथ सेवा में जुटी रहेगी। इसके अलावा निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा भी उपलब्ध रहेगी। इस अवसर पर रमेश कुमार, मार्केटिंग हेड अमर पांडेय, अमित कुमार, जदयू नेत्री भारती प्रियदर्शनी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

वयस्क होने के बाद भी शारीरिक रूप से दिव्यांग बेटे की जिम्मेदारी पिता की ही: हाई कोर्ट*
*कोलकाता:* संतान के वयस्क हो जाने के बाद भी यदि वह गंभीर शारीरिक रूप से दिव्यांग है और अपनी दिव्यांगता के कारण खुद कमाकर अपना भरण-पोषण, रहना, खाना और इलाज नहीं कर पाता है, तो उस दिव्यांग बेटे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पिता की ही रहेगी। शारीरिक रूप से दिव्यांग एक बेटे के भरण-पोषण से जुड़े मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है।

फैसला सुनाते हुए जस्टिस उदय कुमार ने कहा कि सिर्फ वयस्क हो जाने से पिता की भरण-पोषण की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती।

मामले की शुरुआत 2005 में हुई थी। समित प्रमाणिक के खिलाफ उनकी पत्नी टुम्पा प्रमाणिक और उनके नाबालिग बेटे सुदीप्त प्रमाणिक ने भरण-पोषण की मांग को लेकर मुकदमा किया था। 2012 में ट्रायल कोर्ट ने मां के व्यक्तिगत भरण-पोषण की मांग को खारिज कर दिया था, लेकिन दिव्यांग बेटे के लिए हर महीने 3 हजार रुपये भरण-पोषण का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ पिता की याचिका को भी हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। बाद में पुनर्विचार याचिका पर फिर से हाई कोर्ट में मामला दायर हुआ।

उस याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने निचली अदालत के 2022 और 2023 के आदेश को बरकरार रखा है। साथ ही, बकाया भरण-पोषण से जुड़ी कार्यवाही को जल्द पूरा करने के लिए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है।

फैसले में जस्टिस उदय कुमार ने कहा कि 70 से 75 प्रतिशत शारीरिक दिव्यांगता से पीड़ित वयस्क संतान यदि अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ है, तो उस पर CrPC की धारा 125(1)(C) की सुरक्षा लागू हो सकती है। साथ ही धारा 127 के तहत पहले के भरण-पोषण के आदेश को जारी रखने या परिस्थिति के अनुसार बदलने की गुंजाइश है।

अदालत ने यह भी कहा कि दिव्यांग वयस्क संतान के अधिकारों की रक्षा के लिए मां या करीबी रिश्तेदार अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इसलिए मां की तरफ से आवेदन करने के अधिकार को लेकर पिता की आपत्ति को भी अदालत ने खारिज कर दिया।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भरण-पोषण की जिम्मेदारी किसी भी हालत में स्थायी नहीं है। भविष्य में यदि दिव्यांग संतान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो जाता है, तो इसे रद्द करने के लिए आवेदन किया जा सकता है।

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सीईसी ज्ञानेश कुमार को लेकर के खिलाफ साथ आए दो 'दुश्मन', इंडिया ब्लॉक और विपक्ष एकजुट

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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर इन दिनों देश की सियासत गरमाई हुई है। इंडियन एक्सप्रेस के खुलासे के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठ रहे हैं। इस एक मुद्दे ने पूरे विपक्ष को एक बार फिर से एकजुट कर दिया है। इस बीच, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से लेकर अपने ‘कट्टर दुश्मन’ सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी से फोन पर बातचीत की है।

इंडिया ब्लॉक की बैठक बुलाने की अपील

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमलावर विपक्ष अब उनके खिलाफ एकजुट नजर आ रहा है। उन्हें हटाने की मांग कर रहे विपक्षी इंडिया गठबंधन के बड़े नेता संपर्क में हैं। अगले सप्ताह गठबंधन की बैठक और साझा प्रेस कॉन्फ़्रेंस की योजना बनाई जा रही है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का नोटिस तैयार किया जा रहा है। इस बारे में ममता ने राहुल गांधी से बात की है। ममता बनर्जी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से आग्रह किया कि वो इंडिया ब्लॉक की बैठक तुरंत बुलाएं। उन्होंने कहा कि अगर संभव हो तो अगले सप्ताह सोमवार या मंगलवार को बैठक बुलाई जाए ताकि सीईसली के खिलाफ एक संयुक्त रणनीति बनाई जा सके।

दशकों पुराने मतभेद को भूले दोनों नेता

इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में दशकों से एक-दूसरे की कट्टर प्रतिद्वंद्वी रहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और सीपीआई (एम) ने एसआआर को लेकर चल रहे विवाद को लेकर बात की। दशकों पुराने मतभेदों को दरकिनार करते हुए ममता बनर्जी ने सीपीआई (एम) के महासचिव एमए बेबी से बात की। इस दौरान दोनों नेता चुनाव आयोग (ईसी) की घटती विश्वसनीयता के मुद्दे पर चर्चा की। ये दोनों पार्टियां विपक्षी इंडिया गठबंधन की संस्थापक सदस्य हैं, लेकिन अब तक इन्होंने किसी भी तरह का औपचारिक संवाद या संपर्क नहीं किया था। बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी और एमए बेबी ने बात की और चुनाव आयोग, चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र की विश्वसनीयता की रक्षा के लिए विपक्षी दलों के एकजुट होकर अभियान चलाने की आवश्यकता पर चर्चा की।

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में इंडियन एक्सप्रेस की वह रिपोर्ट है। उसमें दावा किया गया कि चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर कई बार आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों की ओर से 10 महीने में कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की गईं। यह बात सामने आते ही विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसके भीतर फैसले लेने के तरीके पर सवाल उठाए।

*यूपीआई पर नए शुल्क के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन*

यूपीआई पर शुल्क थोपना व्यापारियों पर आर्थिक बोझ डालने की साजिश : अभिषेक सिंह राणा

सुल्तानपुर। केंद्र सरकार द्वारा यूपीआई भुगतान व्यवस्था पर नए शुल्क लागू किए जाने के विरोध में शुक्रवार को जिला/शहर कांग्रेस कमेटी ने विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष अभिषेक सिंह राणा के नेतृत्व एवं शहर अध्यक्ष शकील अंसारी की मौजूदगी में कांग्रेसियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन भेजकर नए शुल्क को तत्काल वापस लेने की मांग की। केंद्र सरकार के नए ढांचे के अनुसार 2,000 रुपये से अधिक के कुछ P2M यानी व्यक्ति-से-व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया जाना है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष अभिषेक सिंह राणा ने कहा कि यूपीआई देश की जनता की सुविधा और डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बन चुका है। कांग्रेस किसी भी ऐसे शुल्क या व्यवस्था का विरोध करेगी, जिससे छोटे दुकानदारों, व्यापारियों और आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका हो। केंद्र सरकार को डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के नाम पर ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए, जो व्यापारियों में असमंजस और अतिरिक्त लागत की चिंता पैदा करे।कांग्रेस साफ कहना चाहती है कि जनता को सुविधाएं देने के बजाय शुल्क का नया ढांचा थोपना स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार को तत्काल पुनर्विचार करते हुए इस व्यवस्था को वापस लेना चाहिए। यदि जनता और व्यापारियों की आवाज नहीं सुनी गई तो कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष और तेज करेगी। शहर अध्यक्ष शकील अंसारी ने कहा कि यूपीआई के माध्यम से रोजमर्रा के छोटे-बड़े लेनदेन करने वाले करोड़ों लोगों पर नए शुल्क का असर पड़ सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि आम जनता और छोटे कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए नए शुल्क के फैसले को तत्काल वापस लिया जाए। इस अवसर पर उप्र कांग्रेस कमेटी में मीडिया पैनलिस्ट राजेश तिवारी, आरबी पांडे, ममनून आलम, सुरेशचंद्र मिश्र, जाकिर हसन, रब्बन हाशमी, मोहित तिवारी, सुरेंद्र शुक्ला, आजाद अहमद, गुड्डू आदि लोग कार्यक्रम में शामिल रहे।

*सीएम हेमंत सोरेन को मिला रावण दहन कार्यक्रम का न्योता, पंजाबी हिंदू बिरादरी और अरगोड़ा दुर्गा पूजा समिति ने किया सपरिवार आमंत्रित

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से कांके रोड रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में पंजाबी हिन्दू बिरादरी, (दशहरा कमेटी-2026) राँची एवं श्री दूर्गा पूजा एवं रावण दहन समिति, अरगोड़ा के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी आगामी 20 अक्टूबर को मोरहाबादी मैदान एवं अरगोड़ा मंडा मैदान में आयोजित "रावण दहन" कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सपरिवार सम्मिलित होने हेतु सादर आमंत्रित किया। मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने पंजाबी हिन्दू बिरादरी, (दशहरा कमेटी-2026) राँची एवं श्री दूर्गा पूजा एवं रावण दहन समिति, अरगोड़ा के प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों से "रावण दहन" कार्यक्रम के तैयारियों की विस्तृत जानकारी ली तथा कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल..

मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में पंजाबी हिन्दू बिरादरी, (दशहरा कमेटी-2026) राँची के अध्यक्ष श्री कुणाल अजमानी सहित श्री राजेश मेहरा, श्री सौरभ खन्ना, श्री सुनील कालरा, श्री हैप्पी फिंगर, श्री राहुल माकन, श्री राकेश गिरधर, श्री रणदीप आनंद तथा श्री दूर्गा पूजा एवं रावण दहन समिति, अरगोड़ा के अध्यक्ष श्री प्रकाश साहू सहित श्री जय प्रसाद साहू, श्री वीरेंद्र प्रसाद साहू, श्री मुनेश्वर साहू, श्री सुभाष प्रसाद साहू, श्री युवराज साहू, श्री सुमित साहू सहित अन्य उपस्थित रहे।

CEC ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ दौरा क्यों टला? पहले भी रद्द हो चुके हैं कई कार्यक्रम

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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के अन्य अधिकारियों का दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा अचानक रद हो गया है। यह दौरा 7 और 8 अक्टूबर को प्रस्तावित था, लेकिन चुनाव आयोग ने इसे टाल दिया है। इससे पहले उनका कुछ और राज्यों का दौरा भी इसी तरह से टल चुका है।

एसआईआर को लेकर घिरे सीईसी ज्ञानेश कुमार

सीईसी ज्ञानेश कुमार एसआईआर को लेकर घिरे हुए हैं। विपक्ष उनके खिलाफ सड़कों पर है। विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन के सांसद मंगलवार को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली की सड़कों पर उतरे। इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी को भी हिरासत में लिया गया। जब दिल्ली की सड़कों पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ रार बढ़ रही है, इसी बीच उनका दो दिन का छत्तीसगढ़ दौरा रद्द हो गया है। ज्ञानेश कुमार को 7 और 8 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ जाना था। लेकिन अब उनका यह दौरा टाल दिया गया है।

छत्तीसगढ़ में यहां था सीईसी का कार्यक्रम

जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ यात्रा के दौरान सीईसी ज्ञानेश कुमार चुनाव से जुड़े कार्यक्रमों के साथ-साथ कुछ प्रसिद्ध स्थानों पर भी जाने वाले थे। सीईसी का दंतेवाड़ा में दंतेश्वरी माता मंदिर, बस्तर में चित्रकोट वॉटरफॉल और कबीरधाम जिले में भोरमदेव मंदिर के दौरे का कार्यक्रम था।

पहले भी टल चुका है कई कार्यक्रम

ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ दौरा रद्द होना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पहले उनके कुछ और तय कार्यक्रम टल चुके हैं, जो काफी चर्चा में भी रहा है। छत्तीसगढ़ से पहले उनकी यूपी में मेरठ और वाराणसी का कार्यक्रम रद्द हो चुका है। इसके अलावा उनका उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख का कार्यक्रम भी टल चुका है।

क्यों टला सीईसी का कार्यक्रम?

सवाल उठ रहा है कि आखिर चुनाव आयोग ने यह फैसला क्यों लिया? सीईसी का यह दौरा ऐसे समय पर टला है जब चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार खुद एक बड़े प्रशासनिक और कानूनी विवाद के केंद्र में हैं। आरोप है कि आयोग के तीन सदस्यीय ढांचे में सीईसी ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की असहमति के बावजूद कई अहम फैसले लिए। दावा किया जा रहा है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दोनों आयुक्तों ने कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। सबसे बड़ा विवाद नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन वाले 'फॉर्म-6' में कथित तौर पर बिना उचित प्रक्रिया के बदलाव करने को लेकर है।

2026 में भौतिक विज्ञान के नोबेल पुरस्कार पर विशेष विज्ञान लेख



*भौतिकी का नोबेल 2026: फ्रांसिस हाल्जेन और 'भूतिया कणों' की खोज।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 6 अक्टूबर 2026 को रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने भौतिकी का नोबेल पुरस्कार बेल्जियम मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को घोषित किया है। उन्हें यह सम्मान "आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में निर्णायक योगदान और ब्रह्मांडीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज" के लिए दिया गया है।
नोबेल समिति ने इन न्यूट्रिनो कणों को "अंतरिक्ष से आने वाले भूतिया संदेश" (Ghostly messages from space) करार दिया है,जो ब्रह्मांड के सबसे रौद्र और रहस्यमयी हिस्सों से सीधी सूचना लेकर आते हैं।

*विजेता और पुरस्कार का कारण क्या है।* खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार फ्रांसिस हाल्जेन वर्तमान में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन में प्रोफेसर हैं। उनका जन्म 1944 में बेल्जियम के टिएनेन शहर में हुआ था एवं
आधिकारिक घोषणा के अनुसार, हाल्जेन को यह पुरस्कार उनके उस अभूतपूर्व विचार और वैज्ञानिक नेतृत्व के लिए मिला है जिसके तहत उन्होंने दक्षिणी ध्रुव (अंटार्कटिका) की बर्फ का उपयोग न्यूट्रिनो कणों को पकड़ने के लिए किया।  नोबेल समिति के अध्यक्ष मार्क पियर्स ने कहा, "फ्रांसिस हाल्जेन ने शोधकर्ताओं और इंजीनियरों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम का नेतृत्व किया है जिसने हमें एक शानदार उपकरण दिया है। उनकी दृढ़ता और वैज्ञानिक दृष्टि ने एक नए प्रकार के खगोल विज्ञान का मार्ग प्रशस्त किया है।" और इस वर्ष भौतिकी की नोबेल पुरस्कार राशि 12 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (लगभग 1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर) है, जो पूरी तरह से हाल्जेन को दी जाएगी क्योंकि इस वर्ष यह पुरस्कार केवल एक ही वैज्ञानिक को दिया गया है।
*क्या होते हैं,न्यूट्रिनो: ब्रह्मांड के 'भूतिया कण'।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो, ब्रह्मांड के सबसे बुनियादी और रहस्यमयी उप-परमाणु कणों में से एक हैं। इन्हें 'घोस्ट पार्टिकल्स' (Ghost Particles या भूतिया कण) भी कहा जाता है क्योंकि इन पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता और इनका द्रव्यमान लगभग न के बराबर होता है।
ये कण सुदूर अंतरिक्ष में होने वाली भीषण घटनाओं (जैसे सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल, सक्रिय आकाशगंगाओं के केंद्र) से पैदा होते हैं और प्रकाश की गति से यात्रा करते हैं। चूंकि ये सामान्य पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं, या कुछ यूं कहें कि बिल्कुल भी नहीं के बराबर प्रतिक्रिया करते हैं इसलिए ये बिना रुके पृथ्वी, इंसानों, चट्टानों,पहाड़ों और ग्रहों आदि के पार निकल जाते हैं। और यह तक भी पता नहीं चलता कि कब यह कण उनको पार कर रहे हैं। और यह भी जानना ज़रूरी है कि हर सेकंड अरबों-खरबों न्यूट्रिनो हमारे शरीर और पृथ्वी से होकर गुजरते रहते हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश बिना किसी क्रिया के निकल जाते हैं, इसी वजह से इन्हें सामान्य टेलिस्कोप से देख पाना या पकड़ पाना नामुमकिन था।
*क्या है,आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी: बर्फ का विशाल दूरबीन* ।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति के अनुसार फ्रांसिस हाल्जेन ने 1988 में एक अभूतपूर्व विचार रखा कि अंतरिक्ष से आने वाले इन रहस्यमयी कणों को पकड़ने के लिए दक्षिणी ध्रुव (South Pole, अंटार्कटिका) की विशाल बर्फ का उपयोग किया जा सकता है।उनके इसी दृष्टिकोण के कारण अंटार्कटिका की गहराई में बर्फ के नीचे 1 क्यूबिक किलोमीटर के दायरे में दुनिया का पहला विशालकाय न्यूट्रिनो डिटेक्टर बनाया गया, जिसे आइसक्यूब (IceCube) कहा जाता है। *आइसक्यूब कैसे काम करता है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी की आधिकारिक सूची के अनुसार आइसक्यूब में बर्फ के अंदर हजारों बेहद संवेदनशील लाइट सेंसर्स (प्रकाश डिटेक्टर या Digital Optical Modules) लगाए गए हैं, जिन्हें लगभग 1,450 से 2,450 मीटर की गहराई पर बर्फ में लगाया गया है।
जब कोई,उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो बर्फ के परमाणुओं से टकराता है, तो एक हल्की नीली रोशनी जिसे खगोलविज्ञान में (Cherenkov radiation) चेरेनकोव विकिरण कहा जाता है। यह तब उत्पन्न होता है जब कोई आवेशित कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) किसी माध्यम (जैसे पानी या काँच) में लगभग प्रकाश की गति से यात्रा करता है। इसके कारण आमतौर पर पानी के भीतर एक चमकदार नीली रोशनी दिखाई देती है,(Cherenkov radiation) पैदा होती है, जिसे ये सेंसर रिकॉर्ड कर लेते हैं। फिर वैज्ञानिक उस सिग्नल से पता लगाते हैं कि कण कहाँ से आया, उसकी दिशा क्या थी, उसकी ऊर्जा कितनी थी और संभवतः वह किस खगोलीय स्रोत से आया। साथ ही यह भी जानना ज़रूरी है कि दक्षिणी ध्रुव की बर्फ का उपयोग करने के कई फायदे हैं जैसे कि यह बर्फ विभिन्न प्रकार के हस्तक्षेप से मुक्त है और यह क्षेत्र भूगर्भीय रूप से स्थिर है, यहाँ कोई भूकंप नहीं आते। अगर हम इस आइसक्यूब के निर्माण की बात करें तो पाते हैं कि आइसक्यूब का निर्माण दिसंबर 2010 में पूरा हुआ था और इसकी कुल लागत लगभग 279 मिलियन डॉलर थी।
*2013 की ऐतिहासिक खोज और महत्व क्या है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला (IceCube Neutrino Observatory)  की आधिकारिक विश्व वैज्ञानिक समुदाय की पुष्टि के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक 2013 में उच्च-ऊर्जा खगोलीय न्यूट्रिनो (high-energy astrophysical neutrinos) का पहली बार स्पष्ट अवलोकन था।
इनमें कुछ न्यूट्रिनो की ऊर्जा पेटाइलेक्ट्रॉनवोल्ट Petaelectronvolt (PeV) स्तर तक थी,(पेटाइलेक्ट्रॉनवोल्ट (Petaelectronvolt) ऊर्जा को मापने की एक अत्यंत विशाल इकाई (यूनिट) है)।अर्थात अत्यंत विशाल ऊर्जा। इस खोज ने यह प्रमाणित किया कि हमारे ब्रह्मांड में ऐसे प्राकृतिक स्रोत मौजूद हैं जो अत्यधिक ऊर्जावान न्यूट्रिनो उत्पन्न करते हैं। *इस खोज का विज्ञान की दुनिया में क्या महत्व है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि फ्रांसिस हाल्जेन के इस काम ने खगोल विज्ञान (Astronomy) के एक बिल्कुल नए युग की शुरुआत की है। इस खोज से आगे आने वाले समय में ब्रह्मांड के कई अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठ सकता है क्योंकि न्यूट्रिनो अंतरिक्ष के उन सुदूर और रौद्र एवं अज्ञात कोनों की जानकारी लाते हैं, जहाँ से प्रकाश भी बाहर नहीं आ पाता (जैसे कि एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लिआई या विशाल ब्लैक होल)। अब अगर हम बात करें पारंपरिक दूरबीनों एवं अन्य विधाओं की तो पाते हैं कि उनसे न्यूट्रिनों को पूरी तरीके से समझना आसान नहीं था या इसको और भी आसान भाषा में समझने की कोशिश करें तो पाते हैं कि अछूते ब्रह्मांड को देखने के साथ ही पारंपरिक टेलिस्कोप केवल प्रकाश या इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणों को देख सकते हैं, लेकिन आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी की मदद से वैज्ञानिक अब उन अनदेखी घटनाओं का अध्ययन कर पा रहे हैं जो अरबों प्रकाश वर्ष दूर उस काले घने अंधकारमय ब्रह्मांडीय गुफाओं में घटित हो रही हैं। साथ ही इसे मल्टी-मैसेंजर एस्ट्रोनॉमी के व्यापक विकास के संदर्भ में भी देखा जा सकता है,जहाँ प्रकाश, गुरूत्वीय तरंगें ( gravitational waves), कॉस्मिक रेज (cosmic rays)और न्यूट्रिनों (neutrinos) जैसे अलग-अलग ब्रह्मांडीय संदेशबाहकों (cosmic messengers) से ब्रह्मांड की जानकारी प्राप्त की जाती है। साथ ही यह भी ज्ञात हो कि 2018 में,आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी ने एक अत्यंत उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो को TXS 0506+056 नामक ब्लेज़र (blazar) तक ट्रेस किया,जो ओरायन तारामंडल की दिशा में 3.7 अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। यह पहली बार था जब किसी न्यूट्रिनो को उसके विशिष्ट खगोलीय स्रोत से जोड़ा गया।
*क्यों इतना अनोखा है, न्यूट्रिनो और इन्हें खोजना भी इतना मुश्किल क्यों था* ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो,ब्रह्मांड के सबसे बुनियादी और रहस्यमयी उप-परमाणु कणों (Subatomic particles) में से एक हैं। इन्हें 'घोस्ट पार्टिकल्स' (Ghost Particles या भूतिया कण) भी कहा जाता है, इन कणों पर कोई विद्युत आवेश (Charge) नहीं होता और इनका द्रव्यमान (Mass) लगभग न के बराबर ही होता है या कुछ यूं कहें कि लगभग कोई द्रव्यमान नहीं है और ये कण सुदूर अंतरिक्ष में होने वाली उग्र घटनाओं (जैसे सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल आदि) से पैदा होते हैं और प्रकाश की गति से यात्रा करते हैं चूंकि ये सामान्य पदार्थ के साथ कोई प्रतिक्रिया भी प्रदर्शित नहीं करते हैं इसलिए ये बिना रुके पृथ्वी, इंसानों, चट्टानों ,पहाड़ों और ग्रहों आदि के पार निकल जाते हैं, इसी वजह से इन्हें सामान्य टेलिस्कोप से देख पाना या पकड़ पाना नामुमकिन था, इसलिए इसमें बर्फ के अंदर हजारों बेहद संवेदनशील लाइट सेंसर्स (प्रकाश डिटेक्टर) लगाए गए हैं। जब कोई उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो बर्फ के परमाणुओं से टकराता है, तो एक हल्की नीली रोशनी पैदा होती है, जिसे ये सेंसर रिकॉर्ड कर लेते हैं। इसीलिए इन उच्च ऊर्जा यूट्रिनो को खोजना इतना अनोखा और इतना मुश्किल एवं चुनौतीपूर्ण था। और यही कार्य एवं इनकी खोज करने के लिए बर्ष 2026 का भौतिकी (फिजिक्स) का नोबेल पुरस्कार वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को अंतरिक्षीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो (high-energy neutrinos of astrophysical origin) की खोज और आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी (IceCube Neutrino Observatory) में उनके निर्णायक योगदान के लिए देने की घोषणा की गई है। उन्होंने अंतरिक्ष से धरती तक आने वाले बेहद ताकतवर और मायावी कणों न्यूट्रिनो को पकड़ने और उनका पता लगाने का तरीका खोजा है एवं आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी जहां उन्होंने दक्षिण ध्रुव (Antarctic) की गहरी बर्फ में हजारों लाइट सेंसर लगाकर दुनिया की पहली विशाल न्यूट्रिनो वेधशाला की नींव रखी, जिससे ब्रह्मांड की ऊर्जावान प्रक्रियाओं का अध्ययन संभव हुआ। साथ ही नई प्रकार की खगोल विज्ञान को भी जन्म दिया है या कुछ यूं कहें कि इस खोज ने खगोल विज्ञान (Astronomy) की एक बिल्कुल नई विधा का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे दूरस्थ आकाशगंगाओं और ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में मदद मिलती है।

*क्या है न्यूट्रिनो (Neutrino) कण की कहानी ? ।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो (Neutrino) कण का सबसे पहले सैद्धांतिक अनुमान वर्ष 1930 में वोल्फगैंग पाउली (Wolfgang Pauli) ने लगाया था,जबकि वर्ष 1956 में क्लाइड कोवान (Clyde Cowan) और फ्रेडरिक रेइन्स (Frederick Reines) ने इसका प्रयोगात्मक रूप से पता लगाया (खोज की) अब अगर हम बात करें न्यूट्रिनो से जुड़े मुख्य तथ्य सैद्धांतिक प्रस्ताव की तो पाते हैं कि 1930 में वोल्फगैंग पाउली ने बीटा क्षय (beta decay) में ऊर्जा संरक्षण के नियम को समझाने के लिए इस काल्पनिक कण का सुझाव दिया था एवं इसके नामकरण की बात करें तो पाते हैं कि इसका नामकरण एक इतालवी भौतिक विज्ञानी एनरिको फर्मी ने इस कण का नाम 'न्यूट्रिनो' रखा, जिसका अर्थ "छोटा उदासीन कण" है। साथ ही इसके प्रयोगात्मक खोज की बात करें तो पाते हैं कि 1956 में क्लाइड कोवान और फ्रेडरिक रेइन्स ने परमाणु रिएक्टर का उपयोग करके पहली बार न्यूट्रिनो का प्रायोगिक प्रमाण प्राप्त किया। इस खोज के लिए फ्रेडरिक रेइन्स को 1995 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला  और अब वर्ष 2026 की बात करें तो पाते हैं कि 2026 का भौतिकी (फिजिक्स) का नोबेल पुरस्कार वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को अंतरिक्षीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो (high-energy neutrinos of astrophysical origin) की खोज और आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी (IceCube Neutrino Observatory) में उनके निर्णायक योगदान के लिए दिया गया है,क्योंकि उन्होंने अंतरिक्ष से धरती तक आने वाले बेहद ताकतवर और मायावी कणों जिन्हें न्यूट्रिनो कहा जाता है को पकड़ने और उनका पता लगाने का तरीका खोजा।

*भारत के शोधकर्ताओं के लिए इस खोज का क्या महत्व हो सकता है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए यह खोज विशेष महत्व रखती है क्योंकि यह दर्शाती है कि कैसे एक साधारण विचार (दक्षिणी ध्रुव की बर्फ का उपयोग) और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों को सुलझाया जा सकता है।
आइसक्यूब एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग है, जिसमें लगभग 450 भौतिक विज्ञानी, 58 संस्थान और 14 देश शामिल हैं। साथ ही अंटार्कटिका के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित IceCube Neutrino Observatory (आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला) के संदर्भ में भारत का महत्व भी कुछ मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है। जैसा कि हम जानते हैं कि आइसक्यूब एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजना है, लेकिन वैसे तो भारत का इस वेधशाला से प्रत्यक्ष या सीधे तौर पर संबंध नहीं है, लेकिन भारतीय वैज्ञानिक, शोधकर्ता और संस्थान वैश्विक स्तर पर इस प्रयोग के डेटा विश्लेषण, कोडिंग और इसके माध्यम से की जाने वाली ब्रह्मांडीय खोजों (जैसे "घोस्ट पार्टिकल्स" या न्यूट्रिनो की पहचान) में अनुसंधान के ओपन-सोर्स डेटा का विश्लेषण करते हैं।और साथ में यह भी जानना आवश्यक है कि भारत भी अपना न्यूट्रिनो प्रोजेक्ट  INO (India-based Neutrino Observatory) बनाने के लिए प्रयास कर रहा है इसीलिए जब भी विज्ञान में आइस क्यूब ऑब्जर्वेटरी (IceCube Observatory) की बात होती है, तो उसके समानांतर भारत के अपने प्रोजेक्ट INO (इंडिया-बेस्ड न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी) की चर्चा जरूर होती है। लेकिन दोनों में अंतर क्या है? यह भी जानना ज़रूरी है,जहाँ आइस क्यूब अंटार्कटिका की गहरी बर्फ (Ice) के नीचे न्यूट्रिनो ढूंढता है, वहीं भारत का आई०एन० ओ०,(INO)  प्रोजेक्ट तमिलनाडु के थेनी जिले की बोदी पश्चिम पहाड़ियों में जमीन के नीचे एक विशाल प्रयोगशाला बनाने की योजना है एवं इसके लोकेशन के महत्व की बात करें तो पाते हैं कि भारत की भौगोलिक स्थिति भूमध्य रेखा (Equator) के पास है,यहाँ बनाई जाने वाली ऑब्जर्वेटरी से वैज्ञानिकों को उन न्यूट्रिनो कणों का भी अध्ययन करने में मदद मिल मिलेगी जो पृथ्वी के कोर (केंद्र) से होकर गुजरते हैं साथ ही यह डेटा,आइस क्यूब जैसी ध्रुवीय (Polar) ऑब्जर्वेटरी के पूरक के रूप में काम आ सकता है। लेकिन अभी तो इस प्रोजेक्ट की संपूर्ण स्थापना को कई चुनौतियों से निबटना बाकी है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अब हम पुनः संक्षेप में फ्रांसिस हाल्जेन एवं आइस क्यूब ऑब्जर्वेटरी की बात करें तो पाते हैं कि फ्रांसिस हाल्जेन ने अंटार्कटिका की बर्फ को एक अनोखी विशाल दूरबीन में बदल दिया, जिसने विज्ञान को ब्रह्मांड के उन सबसे रहस्यमयी 'भूतिया कणों' को पकड़ने और समझने की शक्ति दी,जो अब तक इंसान की पहुंच से पूरी तरह बाहर थे। इसीलिए यह भी समझना ज़रूरी है कि यह नोबेल पुरस्कार केवल किसी एक व्यक्ति द्वारा अकेले किए गए प्रयोग के लिए नहीं है बल्कि हाल्जेन का सम्मान उनके निर्णायक वैज्ञानिक योगदान, दृष्टि और आइसक्यूब के नेतृत्व तथा उच्च-ऊर्जा खगोलीय न्यूट्रिनो की खोज से जुड़ा है। जो निश्चित तौर पर यह दर्शाता है कि अगर टीम भावना से एवं समग्र रूप से दृढ़ संकल्प और सकारात्मकता से लगातार कोई भी कार्य किया जाता है तो एक दिन उन अच्छे कार्यों का फल और किसी भी समस्या का हल भी अवश्य ही प्राप्त होता है।और इसी को सार्थक होता हुआ देख सकते है कि नोबेल पुरस्कार समिति द्वारा 2026 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार को देने की घोषणा, फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को की गई है।
मुख्यमंत्री योगी ने पूरी की तीन दशक पुरानी मांग, गंगा पर सेतु से सीधे जुड़ेंगे भदोही-प्रयागराज

सीतामढ़ी-धनतुलसी-डेंगुरपुर घाट पर 1.32 किमी लंबे सेतु का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया शिलान्यास

₹300 करोड़ से अधिक की परियोजना से पांच जिलों की राह होगी आसान, मध्य प्रदेश की ओर भी सफर होगा सुगम

पीपा पुल और नाव पर निर्भरता होगी खत्म, कोनिया और मांडा क्षेत्र की सवा लाख से अधिक आबादी को मिलेगी राहत

सीतामढ़ी आने वाले श्रद्धालुओं को होगी सहूलियत, कालीन कारोबार के लिए भी खुलेगा बेहतर रास्ता

 संत रविदास नगर भदोही। गंगा पर पक्के पुल के लिए तीन दशक से अधिक समय से इंतजार कर रहे कोनिया क्षेत्र के लोगों की बड़ी मांग रविवार को पूरी हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीतामढ़ी-धनतुलसी-डेंगुरपुर घाट पर ₹300 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाले 1.32 किमी लंबे सेतु का शिलान्यास किया। इसके साथ पहुंच मार्ग और सुरक्षात्मक कार्य भी कराए जाएंगे। पुल तैयार होने पर भदोही के धनतुलसी से प्रयागराज के मांडा क्षेत्र स्थित डेंगुरपुर तक सीधा सड़क संपर्क हो जाएगा।

इस पुल से भदोही और प्रयागराज के साथ मिर्जापुर, वाराणसी और जौनपुर की राह भी आसान होगी। इस तरह उत्तर प्रदेश के पांच जिलों को इसका लाभ मिलेगा। मिर्जापुर के रास्ते मध्य प्रदेश की ओर जाने वालों को भी सहूलियत होगी।

बरसात में खत्म होगी बड़ी परेशानी

धनतुलसी-डेंगुरपुर घाट पर अभी गंगा पार करने के लिए पीपा पुल और नाव का सहारा लेना पड़ता है। बरसात में गंगा का जलस्तर बढ़ते ही पीपा पुल हटा दिया जाता है। ऐसे में लोगों की मुश्किल बढ़ जाती है। पक्का पुल बनने के बाद कोनिया और मांडा क्षेत्र की सवा लाख से अधिक आबादी को पूरे साल गंगा पार करने का रास्ता मिलेगा। पढ़ाई, इलाज, बाजार और रोजमर्रा के दूसरे कामों के लिए भी लोगों को राहत मिलेगी।

सीतामढ़ी आने वाले श्रद्धालुओं को भी राहत

गंगा किनारे स्थित सीता समाहित स्थल सीतामढ़ी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी पुल अहम होगा। प्रयागराज की ओर से आने वालों को सीधा रास्ता मिलेगा। इसका फायदा आसपास के बाजार और छोटे कारोबारियों को भी होगा।

कालीन कारोबार की राह भी होगी आसान

भदोही के कालीन कारोबार के लिए भी यह पुल महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रयागराज की ओर सीधा सड़क संपर्क होने से माल लाने-ले जाने में आसानी होगी। कारोबारियों का कहना है कि पुल से व्यापार के लिए नए क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी।

 

अंजनी कारपेट, खमरिया के पीयूष कुमार बरनवाल ने कहा, “इस पुल का बहुत लंबे समय से इंतजार था। अब काम शुरू होने जा रहा है तो क्षेत्र के लोगों में खुशी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बहुत-बहुत धन्यवाद।”

 

त्रिवेणी रग इंडस्ट्रीज, छतमी गोपीगंज के शाश्वत पांडेय ने कहा, “पुल हमारे कालीन कारोबार के लिए काफी काम आएगा। प्रयागराज की तरफ संपर्क बेहतर होने से व्यापार को भी फायदा होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार।”

 

कालीन निर्यात संवर्धन परिषद की प्रशासनिक समिति के पूर्व सदस्य राजेंद्र कुमार मिश्र ने कहा, “भदोही का कालीन दुनिया भर में जाता है। यह पुल कारोबार के लिए नए रास्ते खोलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्षेत्र की बड़ी जरूरत पूरी की है।”

पुल बनने से परिवारों की परेशानी होगी कम

गृहिणी एवं समाजसेवी सरिता गुप्ता ने कहा, “बरसात के दिनों में गंगा पार करना बड़ी परेशानी बन जाता है। पक्का पुल बनने से बच्चों की पढ़ाई से लेकर इलाज और रोजमर्रा के काम तक आसान होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद।”

आज जंतर मंतर पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, 11 मेट्रो स्टेशन बंद, बढ़ाई गई सुरक्षा

#protestsagainstcecgyaneshkumaratjantar_mantar

दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज से कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने गांधी जयंती के मौके पर जंतर मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी है। प्रदर्शन से पहले ही जंतर-मंतर को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। जंतर मंतर की ओर जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों पर बैरिकेड लगाए हैं। बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आज जंतर मंतर पर प्रदर्शन होना है। सीजेपी के साथ ही AISA, SFI और DYFI से जुड़े छात्र संगठनों ने चुनाव आयोग के काम करने के तरीके और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन बुलाया है। पुलिस सूत्रों ने अनुमान जताया है कि प्रदर्शन में करीब 3,000 से 4,000 लोग जुट सकते हैं। इस प्रदर्शन का सीधा फोकस एसआईआर और चुनावी मतदाता सूचियों को लेकर उठ रहे सवालों पर है। आम आदमी पार्टी की नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने भी लोगों से सुबह 10 बजे जंतर मंतर पहुंचने की अपील की है।

छात्र संगठन निकालेंगे मार्च

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर तक मार्च निकालेंगे और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करेंगे। संगठन के एक सदस्य ने बताया कि प्रस्तावित मार्च के लिए दोनों संगठनों को अनुमति नहीं मिली है। इसके बावजूद वे बड़ी संख्या में जंतर-मंतर की ओर बढ़ेंगे। मार्च में करीब 1,500 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

पुलिस के साथ सीएपीएफ भी तैनात

इस दौरान किसी भी संभावित भीड़ से निपटने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों को भी तैनात किया गया है। जंतर मंतर को चारों तरफ बैरिकेडिंग की गई है। आसपास के मेट्रो स्टेशन पर भी जवानों को तैनात किया गया है। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरे से भी पूरे नई दिल्ली इलाके में नजर रखी जाएगी। पुलिस कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरे से भी लगातार निगरानी की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस की कोशिश होगी कि प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर पर आने से पहले ही रोक लिया जाए।

11 मेट्रो स्टेशन बंद

जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो ने शुक्रवार को 11 स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और बाहर निकलने पर रोक लगा दी है। डीएमारसी के मुताबिक, अगले आदेश तक जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, आईएनए, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर एंट्री-एग्जिट बंद रहेगी. हालांकि राजीव चौक, मंडी हाउस, नई दिल्ली और केंद्रीय सचिवालय स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

CEC ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा', इंडिया गठबंधन की बैठक में बोले खरगे

#mallikarjunkhargesayscecexposedsirprocess

दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बुधवार को हुई विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की बैठक खत्म हो गई है। बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए। खरगे ने दो टूक कहा कि पूरे देश में नागरिक और राजनीतिक दल चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर चिंताएं जता रहे हैं। आज हमारे मुख्य चुनाव आयुक्त की असलियत सबके सामने आ गई है। उनके दो साथी सदस्यों ने 10 महीनों में 14 बार पत्र लिखे हैं। इससे उनकी ईमानदारी और इरादों पर सवाल उठता है। इसलिए, उन्हें उनके पद से हटा दिया जाना चाहिए।

2 से 8 अक्‍टूबर कर चलेगा अभियान

कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर बताया कि बैठक में 20 पार्टियों ने हिस्‍सा लिया और सभी ने अपने विचार रखे। खरगे ने कहा कि हम लोकतंत्र और युवाओं के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। खरगे ने बताया कि ज्ञानेश कुमार इस समय मोदी सरकार की कठपुतली बने हुए हैं। इसलिए हम देशभर में उनके खिलाफ अभियान चलाएंगे। चुनाव आयोग वोटों की गड़बड़ी में शामिल है। ज्ञानेश कुमार कठपुतली बने हुए हैं। इसके खिलाफ हम 2 से 8 अक्‍टूबर तक हम अभियान चलाएंगे। 6 तरीख को चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे। विपक्षी नेता राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मिलेंगे और अपनी बात रखेंगे। खरगे ने बताया कि हम देशभर में 5 बड़ी रैलियां करेंगे। ये रैलियां अक्‍टूबर और नंवबर के महीने में होंगी।

शिकायतों को स्वीकार करने के बजाय एसआईआर शुरू की

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष लंबे समय से ईवीएम और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाता रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने शिकायतों को स्वीकार करने के बजाय एसआईआर प्रक्रिया शुरू की। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग एसआईआर को मतदाता सूची को अपडेट और व्यवस्थित करने की प्रक्रिया बताता है, लेकिन यदि इससे बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित होते हैं तो वास्तविक मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित न किया जाए, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी व्यवस्था की होनी चाहिए।

बैलट पेपर से वोटिंग कराने की मांग

खरगे ने कहा कि आगामी चुनावों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले की मतदाता सूची का इस्तेमाल होना चाहिए और ईवीएम के स्थान पर मत पत्र से मतदान कराया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की बैठक में यह भी कहा कि एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य भारत के लोकतंत्र की बुनियाद है और इसे कमजोर नहीं होने दिया जा सकता।

पितृपक्ष मेले में अर्श हॉस्पिटल का निःशुल्क चिकित्सा शिविर और एंबुलेंस सेवा का शुभारंभ

गयाजी। विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला में देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आर्षेय हरिहंत फाउंडेशन के तत्वावधान में एपी कॉलोनी स्थित अर्श सुपर मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल की ओर से विष्णुपद मंदिर के समीप निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाया गया है। शिविर में पितृपक्ष मेला के दौरान आने वाले तीर्थयात्रियों को चिकित्सीय परामर्श एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही तीर्थयात्रियों के लिए निःशुल्क एंबुलेंस सेवा भी उपलब्ध रहेगी।

निःशुल्क चिकित्सा शिविर का उद्घाटन शनिवार को गया नगर निगम के मेयर वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान, नगर आयुक्त डॉ. गगन कुमार, पूर्व डिप्टी मेयर सह सशक्त स्थायी समिति के सदस्य अखौरी ओंकार नाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव, शांति निकेतन एकेडमी के निदेशक हरि प्रपन्ना उर्फ पप्पू जी, चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रमोद भदानी एवं अर्श हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. नवनीत निश्चल ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। इस अवसर पर हॉस्पिटल के मार्केटिंग हेड अमर पांडेय ने अतिथियों का माला पहनाकर स्वागत किया।

मेयर गणेश पासवान ने कहा कि पितृपक्ष मेला में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गयाजी आते हैं। ऐसे में तीर्थयात्रियों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए अर्श हॉस्पिटल की ओर से लगाया गया यह शिविर सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि गयाजी आने वाला प्रत्येक तीर्थयात्री यहां से बेहतर अनुभव लेकर जाए, इसके लिए सेवा और सुविधा दोनों महत्वपूर्ण हैं। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में इस तरह की पहल तीर्थयात्रियों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। उन्होंने अर्श हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. नवनीत निश्चल एवं उनकी पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

सशक्त स्थायी समिति के सदस्य मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि पितृपक्ष मेला गयाजी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों के साथ ही विदेशों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे समय में तीर्थयात्रियों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सेवा का महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने कहा कि गयाजी आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा में सामाजिक संस्थाओं और निजी संस्थानों की भागीदारी से सेवा भावना और मजबूत होती है। अर्श हॉस्पिटल की यह पहल तीर्थयात्रियों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के समय तत्काल सहायता उपलब्ध कराने में उपयोगी होगी।

अर्श हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. नवनीत निश्चल ने कहा कि शिविर में हॉस्पिटल के चिकित्सकों की ओर से प्रतिदिन तीर्थयात्रियों को निःशुल्क चिकित्सीय परामर्श दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यदि किसी तीर्थयात्री को प्राथमिक उपचार से अधिक चिकित्सा की आवश्यकता होती है, तो उसके लिए शिविर स्थल पर निःशुल्क एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। जरूरत पड़ने पर मरीज को अस्पताल ले जाकर वहां भी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।

उन्होंने कहा कि इस चिकित्सा शिविर का उद्देश्य पितृपक्ष मेला में देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों की ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना के साथ सेवा करना है। गयाजी आने वाले श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य संबंधी किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो, इसके लिए हॉस्पिटल की टीम पूरी तत्परता के साथ सेवा में जुटी रहेगी। इसके अलावा निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा भी उपलब्ध रहेगी। इस अवसर पर रमेश कुमार, मार्केटिंग हेड अमर पांडेय, अमित कुमार, जदयू नेत्री भारती प्रियदर्शनी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

वयस्क होने के बाद भी शारीरिक रूप से दिव्यांग बेटे की जिम्मेदारी पिता की ही: हाई कोर्ट*
*कोलकाता:* संतान के वयस्क हो जाने के बाद भी यदि वह गंभीर शारीरिक रूप से दिव्यांग है और अपनी दिव्यांगता के कारण खुद कमाकर अपना भरण-पोषण, रहना, खाना और इलाज नहीं कर पाता है, तो उस दिव्यांग बेटे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पिता की ही रहेगी। शारीरिक रूप से दिव्यांग एक बेटे के भरण-पोषण से जुड़े मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है।

फैसला सुनाते हुए जस्टिस उदय कुमार ने कहा कि सिर्फ वयस्क हो जाने से पिता की भरण-पोषण की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती।

मामले की शुरुआत 2005 में हुई थी। समित प्रमाणिक के खिलाफ उनकी पत्नी टुम्पा प्रमाणिक और उनके नाबालिग बेटे सुदीप्त प्रमाणिक ने भरण-पोषण की मांग को लेकर मुकदमा किया था। 2012 में ट्रायल कोर्ट ने मां के व्यक्तिगत भरण-पोषण की मांग को खारिज कर दिया था, लेकिन दिव्यांग बेटे के लिए हर महीने 3 हजार रुपये भरण-पोषण का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ पिता की याचिका को भी हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। बाद में पुनर्विचार याचिका पर फिर से हाई कोर्ट में मामला दायर हुआ।

उस याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने निचली अदालत के 2022 और 2023 के आदेश को बरकरार रखा है। साथ ही, बकाया भरण-पोषण से जुड़ी कार्यवाही को जल्द पूरा करने के लिए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है।

फैसले में जस्टिस उदय कुमार ने कहा कि 70 से 75 प्रतिशत शारीरिक दिव्यांगता से पीड़ित वयस्क संतान यदि अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ है, तो उस पर CrPC की धारा 125(1)(C) की सुरक्षा लागू हो सकती है। साथ ही धारा 127 के तहत पहले के भरण-पोषण के आदेश को जारी रखने या परिस्थिति के अनुसार बदलने की गुंजाइश है।

अदालत ने यह भी कहा कि दिव्यांग वयस्क संतान के अधिकारों की रक्षा के लिए मां या करीबी रिश्तेदार अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इसलिए मां की तरफ से आवेदन करने के अधिकार को लेकर पिता की आपत्ति को भी अदालत ने खारिज कर दिया।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भरण-पोषण की जिम्मेदारी किसी भी हालत में स्थायी नहीं है। भविष्य में यदि दिव्यांग संतान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो जाता है, तो इसे रद्द करने के लिए आवेदन किया जा सकता है।

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सीईसी ज्ञानेश कुमार को लेकर के खिलाफ साथ आए दो 'दुश्मन', इंडिया ब्लॉक और विपक्ष एकजुट

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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर इन दिनों देश की सियासत गरमाई हुई है। इंडियन एक्सप्रेस के खुलासे के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठ रहे हैं। इस एक मुद्दे ने पूरे विपक्ष को एक बार फिर से एकजुट कर दिया है। इस बीच, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से लेकर अपने ‘कट्टर दुश्मन’ सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी से फोन पर बातचीत की है।

इंडिया ब्लॉक की बैठक बुलाने की अपील

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमलावर विपक्ष अब उनके खिलाफ एकजुट नजर आ रहा है। उन्हें हटाने की मांग कर रहे विपक्षी इंडिया गठबंधन के बड़े नेता संपर्क में हैं। अगले सप्ताह गठबंधन की बैठक और साझा प्रेस कॉन्फ़्रेंस की योजना बनाई जा रही है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का नोटिस तैयार किया जा रहा है। इस बारे में ममता ने राहुल गांधी से बात की है। ममता बनर्जी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से आग्रह किया कि वो इंडिया ब्लॉक की बैठक तुरंत बुलाएं। उन्होंने कहा कि अगर संभव हो तो अगले सप्ताह सोमवार या मंगलवार को बैठक बुलाई जाए ताकि सीईसली के खिलाफ एक संयुक्त रणनीति बनाई जा सके।

दशकों पुराने मतभेद को भूले दोनों नेता

इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में दशकों से एक-दूसरे की कट्टर प्रतिद्वंद्वी रहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और सीपीआई (एम) ने एसआआर को लेकर चल रहे विवाद को लेकर बात की। दशकों पुराने मतभेदों को दरकिनार करते हुए ममता बनर्जी ने सीपीआई (एम) के महासचिव एमए बेबी से बात की। इस दौरान दोनों नेता चुनाव आयोग (ईसी) की घटती विश्वसनीयता के मुद्दे पर चर्चा की। ये दोनों पार्टियां विपक्षी इंडिया गठबंधन की संस्थापक सदस्य हैं, लेकिन अब तक इन्होंने किसी भी तरह का औपचारिक संवाद या संपर्क नहीं किया था। बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी और एमए बेबी ने बात की और चुनाव आयोग, चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र की विश्वसनीयता की रक्षा के लिए विपक्षी दलों के एकजुट होकर अभियान चलाने की आवश्यकता पर चर्चा की।

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में इंडियन एक्सप्रेस की वह रिपोर्ट है। उसमें दावा किया गया कि चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर कई बार आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों की ओर से 10 महीने में कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की गईं। यह बात सामने आते ही विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसके भीतर फैसले लेने के तरीके पर सवाल उठाए।

*यूपीआई पर नए शुल्क के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन*

यूपीआई पर शुल्क थोपना व्यापारियों पर आर्थिक बोझ डालने की साजिश : अभिषेक सिंह राणा

सुल्तानपुर। केंद्र सरकार द्वारा यूपीआई भुगतान व्यवस्था पर नए शुल्क लागू किए जाने के विरोध में शुक्रवार को जिला/शहर कांग्रेस कमेटी ने विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष अभिषेक सिंह राणा के नेतृत्व एवं शहर अध्यक्ष शकील अंसारी की मौजूदगी में कांग्रेसियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन भेजकर नए शुल्क को तत्काल वापस लेने की मांग की। केंद्र सरकार के नए ढांचे के अनुसार 2,000 रुपये से अधिक के कुछ P2M यानी व्यक्ति-से-व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया जाना है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष अभिषेक सिंह राणा ने कहा कि यूपीआई देश की जनता की सुविधा और डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बन चुका है। कांग्रेस किसी भी ऐसे शुल्क या व्यवस्था का विरोध करेगी, जिससे छोटे दुकानदारों, व्यापारियों और आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका हो। केंद्र सरकार को डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के नाम पर ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए, जो व्यापारियों में असमंजस और अतिरिक्त लागत की चिंता पैदा करे।कांग्रेस साफ कहना चाहती है कि जनता को सुविधाएं देने के बजाय शुल्क का नया ढांचा थोपना स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार को तत्काल पुनर्विचार करते हुए इस व्यवस्था को वापस लेना चाहिए। यदि जनता और व्यापारियों की आवाज नहीं सुनी गई तो कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष और तेज करेगी। शहर अध्यक्ष शकील अंसारी ने कहा कि यूपीआई के माध्यम से रोजमर्रा के छोटे-बड़े लेनदेन करने वाले करोड़ों लोगों पर नए शुल्क का असर पड़ सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि आम जनता और छोटे कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए नए शुल्क के फैसले को तत्काल वापस लिया जाए। इस अवसर पर उप्र कांग्रेस कमेटी में मीडिया पैनलिस्ट राजेश तिवारी, आरबी पांडे, ममनून आलम, सुरेशचंद्र मिश्र, जाकिर हसन, रब्बन हाशमी, मोहित तिवारी, सुरेंद्र शुक्ला, आजाद अहमद, गुड्डू आदि लोग कार्यक्रम में शामिल रहे।