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अपराधी कितना भी डीपफेक का आवरण ओढ़े, उसे खोज निकालेंगे: योगी आदित्यनाथ

- एआई मददगार हो, निर्णायक नहीं, तकनीक का संचालन मानव विवेक से होना चाहिए: मुख्यमंत्री

- अंतरराष्ट्रीय ‘टेक संगम 2026’ के दूसरे दिन का मुख्यमंत्री योगी ने किया शुभारंभ

- देश के पहले 'LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' का शुभारंभ, क्वांटम तकनीक और कानून के समन्वय को मिलेगी गति

लखनऊ, 24 अक्टूबर 2026।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीपफेक जैसी तकनीकों के दौर में अपराधी कितना भी तकनीक का आवरण ओढ़ ले, उत्तर प्रदेश की वैज्ञानिक और विधिक क्षमता उसे खोज निकालेगी। एआई हमारे लिए मददगार हो सकता है, लेकिन उसे निर्णायक नहीं बनना चाहिए। तकनीक का संचालन मानव विवेक से होना चाहिए, न कि मनुष्य तकनीक के विवेक पर निर्भर हो जाए। पूरी तरह एआई पर निर्भरता भविष्य में संकट बन सकती है। वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच और आधुनिक तकनीक के समन्वय से अपराध अनुसंधान को प्रभावी बनाने के साथ न्याय मिलने में होने वाली देरी को भी कम किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री शनिवार को लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'टेक संगम 2026' के दूसरे दिन के कार्यक्रम का उद्घाटन कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने क्वांटम फॉरेंसिक्स और विधिक अनुपालन के क्षेत्र में कार्य करने वाले 'LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' का शुभारंभ किया। साथ ही कंसेंट मैनेजमेंट पोर्टल लॉन्च किया, 'अभेद्य' परियोजना की आधारशिला रखी और 'एआई इन कंस्ट्रक्शन' पुस्तक का अनावरण किया। सम्मेलन में साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्ष्य, क्वांटम तकनीक, फॉरेंसिक विज्ञान और एआई के न्यायिक व प्रशासनिक उपयोग पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।

- भू-माफिया से मुक्त कराई गई जमीन पर बना विश्वस्तरीय संस्थान

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए बताया कि जिस करीब 100 एकड़ जमीन पर आज विश्वस्तरीय फॉरेंसिक संस्थान खड़ा है, उस पर कभी लखनऊ के एक बड़े भू-माफिया का कब्जा था। उस समय पुलिस भी इस मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रही थी। वर्ष 2017 में पुलिस अधिकारियों से इसकी जानकारी मिलने के बाद जांच कराई गई और भू-माफिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। दूसरी एफआईआर दर्ज होते ही उसने आत्मसमर्पण कर जमीन छोड़ दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक दशक पहले लखनऊ में साइबर फॉरेंसिक और क्वांटम तकनीक जैसे विषयों पर चर्चा करना भी सपने जैसा लगता था। आज उसी जमीन पर बना संस्थान प्रदेश में वैज्ञानिक जांच, आधुनिक अपराध अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा को नई दिशा दे रहा है।

- 'सीआईडी' सीरियल की ‘रील लाइफ’ अब यूपी में रियल लाइफ

फॉरेंसिक विज्ञान की उपयोगिता समझाते हुए मुख्यमंत्री ने लोकप्रिय टीवी सीरियल 'सीआईडी' का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पहले लोग टेलीविजन पर देखते थे कि एक बाल या फिंगरप्रिंट के आधार पर अपराधी तक कैसे पहुंचा जाता है। अब फॉरेंसिक विज्ञान और आधुनिक तकनीक की मदद से ऐसी जांच वास्तविक जीवन में संभव हो रही है। न्याय मिलने में देरी का उल्लेख करते हुए उन्होंने एक माफिया के मामले का जिक्र किया, जिसने वर्ष 1980 में पहला अपराध किया था, लेकिन साक्ष्यों के अभाव और डीएनए सैंपल नष्ट होने के कारण उसे वर्ष 2022 में, यानी 42 साल बाद सजा मिल सकी। यह उदाहरण बताता है कि अपराध की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्य कितने महत्त्वपूर्ण हैं और समय पर साक्ष्य जुटाना न्याय प्रक्रिया के लिए क्यों जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि नए आपराधिक कानूनों के तहत सात वर्ष से अधिक की सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की सभी 18 पुलिस रेंजों में फॉरेंसिक लैब विकसित की जा रही हैं। इनमें 12 लैब तैयार हो चुकी हैं, जबकि छह अन्य अंतिम चरण में हैं। इसके अतिरिक्त 150 से अधिक फॉरेंसिक वैन तैनात की गई हैं, जिससे घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाने और जांच को गति देने में मदद मिलेगी। उद्देश्य है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर विवेचना मजबूत हो और न्यायालयों में मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी कम हो।

- 'लॉ विद लैब्स' की अवधारणा को आगे बढ़ाएगा LEXQ सेंटर

मुख्यमंत्री ने UPSIFS की 'लॉ विद लैब्स' यानी कानून और प्रयोगशाला के समन्वय की अवधारणा को महत्त्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विज्ञान और कानून को एक-दूसरे का पूरक बनना होगा। वैज्ञानिक जांच की विश्वसनीयता और विधिक प्रक्रिया के अनुरूप साक्ष्यों का उपयोग न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाता है। इसी उद्देश्य से शुरू किया गया LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्वांटम तकनीक को कानून, सुरक्षा और फॉरेंसिक विज्ञान से जोड़ेगा। इसमें 'LEX' का संबंध कानून और 'Q' का संबंध क्वांटम से है। सेंटर के माध्यम से क्वांटम फॉरेंसिक्स, विधिक अनुपालन, अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे कानून और आधुनिक विज्ञान के बीच सहयोग के नए अवसर विकसित होंगे।

- 2030 तक पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान दौर में डेटा और तकनीक विकास के प्रमुख आधार बन चुके हैं। उन्होंने डेटा को नया तेल बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश एआई और डेटा सेंटर के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्रदेश में पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना है। इसके लिए पांच बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। उन्होंने नोएडा में उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब यूनिट स्थापित किए जाने का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और एआई जैसे क्षेत्रों में निवेश से प्रदेश की तकनीकी क्षमता बढ़ेगी और नए अवसर पैदा होंगे।

- 2017 के बाद प्रदेश में लगे 35 हजार नए उद्योग

औद्योगिक विकास और निवेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 से 2017 तक उत्तर प्रदेश में करीब 14 हजार उद्योग स्थापित हुए थे, जबकि 2017 के बाद 35 हजार नए उद्योग लगे हैं। उन्होंने इस बदलाव का संबंध बेहतर कानून-व्यवस्था और निवेश के अनुकूल माहौल से जोड़ा। मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश के पास करीब 75 हजार एकड़ का लैंड बैंक है और 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। लखनऊ स्थित एचसीएल सेंटर का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में वहां करीब 100 कर्मचारी काम करते थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 12,600 हो गई है। उन्होंने कहा कि महिलाएं भी रात की शिफ्ट में काम कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने इसे सुरक्षा के माहौल में आए बदलाव और महिलाओं की बढ़ती कार्यभागीदारी के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

- अयोध्या से एक्सप्रेसवे नेटवर्क तक विकास का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत और शहर में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में वहां बिजली की उपलब्धता सीमित थी। अब अयोध्या को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है और वहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा है। प्रदेश में पांच अंतरराष्ट्रीय और 17 घरेलू हवाई अड्डे होने का भी उन्होंने उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, बुनियादी ढांचे के विस्तार और निवेश के अनुकूल वातावरण से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और उत्तर प्रदेश देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है।

- संस्थान ने पांच हजार से अधिक अधिकारियों को दिया प्रशिक्षण

UPSIFS के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने संस्थान की स्थापना और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक अगस्त 2021 को संस्थान की आधारशिला रखी थी। संस्थान में डीएनए, साइबर और डिजिटल फॉरेंसिक्स सहित आधुनिक तकनीकी प्रयोगशालाएं विकसित की गई हैं। यहां एआई, रोबोटिक्स और अन्य उभरती तकनीकों के माध्यम से अपराध अनुसंधान को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। डॉ. गोस्वामी के अनुसार, संस्थान अब तक पुलिस, रक्षा बलों और प्रशासन से जुड़े पांच हजार से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दे चुका है। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने सम्मेलन में साइबर बुलिंग और डिजिटल एविडेंस जैसे विषयों पर हो रहे विमर्श का उल्लेख किया। उन्होंने अपराध स्थल प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों के प्रशिक्षण और आधुनिक फॉरेंसिक क्षमता विकसित करने में संस्थान की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

- 'यूपी के छात्र भारत का भविष्य लिखेंगे': प्रो. तनुजा सिंह

यूनिवर्सिटी ऑफ इंडियानापोलिस, अमेरिका की प्रेसिडेंट प्रो. तनुजा सिंह ने उत्तर प्रदेश में एआई और साइबर तकनीक के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश इन क्षेत्रों में केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर नेतृत्व करने की क्षमता विकसित कर रहा है। प्रदेश के छात्र देश के भविष्य को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

- राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ शिक्षा, तकनीक और फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में एमओयू

टेक संगम 2026 के दौरान शिक्षा, तकनीक, फॉरेंसिक विज्ञान एवं कौशल विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें यूनिवर्सिटी ऑफ इंडियानापोलिस (अमेरिका), जीवाजी यूनिवर्सिटी (ग्वालियर, मध्य प्रदेश), सैन्स इंस्टीट्यूट (अमेरिका), उत्तर प्रदेश स्किल डेवलपमेंट मिशन (लखनऊ), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (नई दिल्ली), डायरेक्टरेट ऑफ फॉरेंसिक साइंस सर्विसेज (नई दिल्ली), डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (नई दिल्ली), सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (नई दिल्ली) और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक, नई दिल्ली) शामिल हैं।

- कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित

नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर, यूनिवर्सिटी ऑफ इंडियानापोलिस की प्रेसिडेंट प्रो. तनुजा सिंह, रक्षा साइबर एजेंसी के महानिदेशक रियर एडमिरल संजय सचदेवा, प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, सरोजनी नगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह और उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी सहित देश-विदेश से आए साइबर एवं फॉरेंसिक विशेषज्ञ, शिक्षाविद और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

26 अक्टूबर को धूमधाम से महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाएगी योगी सरकार

-  यूपी के 75 जिलों में गूंजेगा रामायण पाठ, सैकड़ों मंदिरों में होंगे भजन-कीर्तन, दीपदान व सांस्कृतिक आयोजन
-  रामायण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाएगी योगी सरकार, लव-कुश प्रसंग से जीवंत होगी विरासत
-  जनपद, तहसील व विकासखंड स्तर पर कराए जाएंगे कार्यक्रम, जनप्रतिनिधियों की भागीदारी व जनसहभागिता होगी सुनिश्चित

लखनऊ, 23 अक्टूबर 2026। योगी सरकार 26 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में धूमधाम से वाल्मीकि जयंती मनाएगी। इस अवसर पर आस्था, भक्ति और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का व्यापक उत्सव मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में सैकड़ों महर्षि वाल्मीकि मंदिरों और रामायण से जुड़े प्रमुख स्थलों पर दीपदान, रामायण पाठ, भजन और भक्तिमय सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जाएंगे। इन आयोजनों के जरिए आदि कवि महर्षि वाल्मीकि की कालजयी रचना ‘रामायण’ में निहित मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी है। महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली चित्रकूट में वृहद कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी योगी सरकार स्थानीय कलाकारों को आध्यात्मिक मंच देगी।
-  यूपी के सभी जनपदों में होंगे आयोजन, लवकुश प्रसंग भी होगा
योगी सरकार के निर्देशानुसार 26 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में वाल्मीकि जयंती मनाई जाएगी। सभी देव मंदिरों, महर्षि वाल्मीकि से संबंधित स्थलों आदि पर दीप प्रज्ज्वलन, दीपदान के साथ-साथ रामायण पाठ कराए जाएंगे। यह कार्यक्रम जनपद, तहसील व विकास खंड स्तर पर होंगे। सीएम योगी ने हर आयोजन स्थल पर साफ-सफाई, पेयजल, ध्वनि, प्रकाश व सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था का निर्देश दिया है। आयोजन में पूजन-हवन के साथ लवकुश प्रसंग समेत अन्य कार्यक्रम भी होंगे। इसके अलावा तुलसीदास आश्रम राजापुर चित्रकूट, वाल्मीकि आश्रम बिठूर कानपुर, वाल्मीकि आश्रम श्रावस्ती, अयोध्या, प्रयागराज समेत पूरे प्रदेश में आयोजन होगा।
- महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली लालापुर (चित्रकूट) में होगा वृहद आयोजन
चित्रकूट के क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा ने बताया कि योगी सरकार के निर्देशानुसार महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली लालापुर में जिला प्रशासन की ओर से वृहद कार्यक्रम होंगे। यहां रामलीला का मंचन, वाल्मीकि रामायण पाठ, भजन संध्या और स्थानीय कलाकारों द्वारा भजन आदि की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके अलावा नदी के घाट पर वाल्मीकि आरती भी होगी। इसमें हजारों श्रद्दालु शामिल होंगे।
-  स्थानीय कलाकारों को आध्यात्मिक मंच देगी योगी सरकार
योगी सरकार देव मंदिरों में होने वाले रामायण पाठ समेत अन्य कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों को आध्यात्मिक मंच उपलब्ध कराएगी। जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा जनपद में चयनित मंदिरों व स्थलों पर कार्यक्रम के लिए कलाकारों का चयन किया गया है। इसका समन्वय संस्कृति विभाग, सूचना-जनसंपर्क विभाग, जिला पर्यटन व संस्कृति परिषद द्वारा किया जाएगा। हर जनपद में आयोजन के लिए नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं। योगी सरकार का कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ जनसहभागिता पर जोर है।
-  पिछले वर्ष 600 से ज्यादा मंदिरों में हुए थे कार्यक्रम
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण भारतीय साहित्य और संस्कृति की महत्वपूर्ण कृति है। इसमें वर्णित अनेक स्थलों को राम-जानकी मार्ग और राम वन गमन मार्ग के रूप में जाना जाता है। देशभर में ऐसे करीब 280 स्थल मौजूद हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के भी कई महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं। उन्होंने बताया इन स्थलों की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को सामने लाने के लिए मंदिरों में दीप प्रज्ज्वलन और दीपदान के साथ 8, 12 या 24 घंटे तक अनवरत वाल्मीकि रामायण पाठ कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही श्रीराम, हनुमान और रामायण से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मंदिरों में भी भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। उन्होंने बताया पिछले वर्ष प्रदेश के 600 से ज्यादा मंदिरों में कार्यक्रम हुए थे। इस वर्ष भी वृहद आयोजन होगा।
आजम खां के इस हाल के लिए अखिलेश यादव जिम्मेदार: अनिल राजभर

-जनता को पैरों की धूल समझने वालों को योगी सरकार ने उनकी असली स्थिति का एहसास कराया: अनिल राजभर

- चुनाव के लिए अखिलेश ने ओढ़ा रामभक्ति का चोला, सपा का इतिहास सनातन विरोधी: राकेश त्रिपाठी

लखनऊ, 22 अक्टूबर 2026। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और आजम खान की मुलाकात पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा हमला बोला है। कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही अखिलेश यादव को आजम खान की याद आने लगी है। जबकि आजम खान के इस हाल के लिए कोई और नहीं बल्कि खुद सपा प्रमुख ही जिम्मेदार हैं। वहीं, भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर सपा पर निशाना साधा। 

- आजम को आगे कर रामपुर की जमीनों पर कब्जा किया गया: अनिल राजभर

कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि आज आजम खान का जो हाल है उसके लिए कोई और नहीं बल्कि सपा और उसके मुखिया अखिलेश यादव ही जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने सरकार में रहते हुए आजम खान को आगे करके रामपुर की जनता की जमीनों पर कब्जा किया। अखिलेश ने ही पर्दे के पीछे रहकर भ्रष्टाचार किया और आजम खान के जेल पहुंचने का रास्ता साफ किया। राजभर ने कहा कि सपा को अपने कृत्यों की जिम्मेदारी भाजपा पर नहीं डालनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग जनता को अपने पैरों की धूल समझते थे, उन्हें योगी सरकार ने उनकी असली स्थिति का एहसास कराया है। राजभर ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी में नेतृत्व का अवसर एक ही परिवार तक सीमित है।

- जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर राकेश त्रिपाठी ने अखिलेश को घेरा

जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा उठाते हुए बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि यूनिवर्सिटी के नाम पर सपा ने सरकारी जमीनों के साथ-साथ गरीबों और विधवाओं की जमीनों पर कब्जे किए। उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी इस बात का उदाहरण है कि सत्ता में रहते सपा कैसे भ्रष्टाचार करती है। राकेश त्रिपाठी ने कहा कि सपा का पूरा इतिहास ही राम मंदिर और अयोध्या के विरोध का रहा है। लेकिन आज चुनाव नजदीक आते ही अखिलेश यादव को अचानक भगवान राम की याद आने लगी है। लेकिन उनके इस दोहरे रवैये को यूपी की जनता देख रही है।

मिशन कर्मयोगी से यूपी में लोक सेवकों की कार्यक्षमता को मिली नई रफ्तार: सीएम योगी

- मुख्यमंत्री ने कहा--19.26 लाख से अधिक कर्मचारी iGOT पोर्टल से जुड़े

- 23-24 अक्टूबर को लखनऊ में होगी साधना श्रृंखला की क्षेत्रीय कार्यशाला, योगी करेंगे उद्घाटन

- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिशन कर्मयोगी में यूपी के प्रदर्शन और उपलब्धियों का किया उल्लेख

- 3.86 करोड़ से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे कर यूपी ने क्षमता विकास में दर्ज की उल्लेखनीय उपलब्धि

-लोक सेवाओं को अधिक सक्षम, संवेदनशील और पारदर्शी बनाने पर मुख्यमंत्री योगी का जोर

- तकनीक, एआई और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय से तैयार होंगे भविष्य के कुशल लोक सेवक

 लखनऊ, 22 अक्टूबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन कर्मयोगी के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि लोक सेवाओं को अधिक सक्षम, संवेदनशील, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाना समय की आवश्यकता है। बदलती तकनीक और जनता की बढ़ती अपेक्षाओं के अनुरूप प्रशासनिक व्यवस्था को दक्ष, जवाबदेह और नवाचार के लिए तैयार करना होगा। मिशन कर्मयोगी के तहत उत्तर प्रदेश में क्षमता विकास के प्रयासों को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश के 19.26 लाख से अधिक कर्मचारी iGOT पोर्टल से जुड़ चुके हैं और 3.86 करोड़ से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं।

-प्रशिक्षण के जरिए प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने मिशन कर्मयोगी को लोक सेवकों की कार्यक्षमता और कार्यसंस्कृति में सुधार का महत्त्वपूर्ण माध्यम बताया। इसका उद्देश्य केवल कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उनमें अपने दायित्वों को बेहतर ढंग से निभाने की क्षमता विकसित करना है। प्रशासनिक दक्षता के साथ संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना भी इस पहल का अहम पक्ष है। बदलते समय में शासन की चुनौतियां और नागरिकों की अपेक्षाएं लगातार बदल रही हैं। ऐसे में लोक सेवकों को नई तकनीक, बेहतर कार्यप्रणाली और नवाचार से जोड़ना आवश्यक है, ताकि सरकारी सेवाएं अधिक प्रभावी और आम नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप बन सकें।

- यूपी में 19.26 लाख से अधिक कर्मचारी iGOT पोर्टल से जुड़े

मिशन कर्मयोगी के तहत उत्तर प्रदेश में डिजिटल प्रशिक्षण को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया गया है। प्रदेश के 19.26 लाख से अधिक कर्मचारी iGOT पोर्टल से जुड़ चुके हैं। इनके माध्यम से 3.86 करोड़ से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे किए गए हैं। यह प्रयास सरकारी कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप ज्ञान, कौशल और दक्षताओं से लैस करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रशिक्षण की उपलब्धता बढ़ने से कर्मचारियों को अपनी जरूरतों के अनुसार सीखने के अवसर मिलते हैं। इससे कार्यस्थल पर दक्षता बढ़ाने और प्रशासनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की संभावनाएं मजबूत होती हैं।

- 334 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़े

प्रदेश में क्षमता विकास को संस्थागत रूप देने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के 334 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़ चुके हैं। इस पहल के माध्यम से प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित करने से लोक सेवकों की क्षमता बढ़ाने के लिए अधिक व्यवस्थित और प्रभावी व्यवस्था तैयार की जा सकती है। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण को प्रशासनिक जिम्मेदारियों और नागरिकों की अपेक्षाओं से जोड़ना है।

- प्रशासनिक व्यवस्था में दक्षता, संवेदनशीलता, जवाबदेही को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने सुशासन की अवधारणा को साकार करने में सक्षम लोक सेवाओं की भूमिका को महत्त्वपूर्ण बताया। प्रशासनिक व्यवस्था में दक्षता, संवेदनशीलता, जवाबदेही और नवाचार को बढ़ावा देकर सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ नागरिकों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है। मिशन कर्मयोगी का व्यापक उद्देश्य न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन की भावना को मजबूत करना और अंत्योदय के संकल्प को आगे बढ़ाना है। सक्षम और नागरिक-केंद्रित प्रशासन विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

- 23 और 24 अक्टूबर को लखनऊ में होगी साधना श्रृंखला की क्षेत्रीय कार्यशाला

क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) की ओर से 23 और 24 अक्टूबर, 2026 को लखनऊ में साधना श्रृंखला 2026 की तीसरी क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यशाला का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। इसमें केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी उपस्थित रहेंगे। कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य मिशन कर्मयोगी के तहत सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक, दक्षता-आधारित क्षमता विकास संस्थानों में बदलने की दिशा में विचार-विमर्श करना है। इसमें संस्थागत प्रशासन एवं नेतृत्व, प्रशिक्षण संस्थानों की कार्यक्षमता, आपसी सहयोग, संकाय सदस्यों की दक्षता और प्रशिक्षण में डिजिटल तकनीक तथा एआई के उपयोग जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

कार्यशाला में उन्नति पोर्टल, कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम और दक्षता मॉडल के माध्यम से प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसमें उत्तर प्रदेश सहित बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड के साथ-साथ चंडीगढ़, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के प्रतिनिधियों की सहभागिता प्रस्तावित है। इस क्षेत्रीय विमर्श का उद्देश्य प्रशिक्षण संस्थानों के अनुभव साझा करना, उनकी क्षमताओं को मजबूत करना और लोक सेवकों को भविष्य की प्रशासनिक चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में सहयोग बढ़ाना है।

श्रद्धा दुबे, बहन और ड्राइवर को कोर्ट में किया पेश, पुलिस को 10 दिन की रिमांड
- सिविल अस्पताल में मेडिकल परीक्षण के बाद अदालत में पेश किए गए तीनों आरोपी
लखनऊ। व्यापारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में आरोपी श्रद्धा दुबे, उसकी बहन और ड्राइवर को पुलिस ने अदालत में पेश किया। कोर्ट ने पुलिस को तीनों की 10 दिन की रिमांड दे दी। इससे पहले तीनों का सिविल अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया था।
पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से मामले के संबंध में पूछताछ किए जाने और जांच से जुड़े अहम तथ्यों की पड़ताल किए जाने की संभावना है। पुलिस आरोपियों के संपर्कों, कथित मददगारों और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
सर्वाेदय विद्यालयों में एआई से आसान हो रही पढ़ाई, बच्चों को मिल रही नई दिशा
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता से कठिन विषयों को समझने और सवालों का हल खोजने में मिल रही मदद
- डिजिटल तकनीक से विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और तार्किक समझ को मिल रहा बढ़ावा
लखनऊ: 22 अक्टूबर, 2026। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित सर्वाेदय विद्यालयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विद्यार्थियों की पढ़ाई को सरल और रोचक बनाने में मददगार साबित हो रही है। एआई आधारित साधनों से विद्यार्थी कठिन सवालों के हल समझने, विषयों से जुड़ी जिज्ञासाओं का समाधान पाने और अपनी समझ को बेहतर बनाने में सहायता ले रहे हैं। तकनीक के उपयोग से पढ़ाई के नए तरीके सीखने के साथ विद्यार्थियों में डिजिटल समझ और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता भी विकसित हो रही है।
एआई की मदद से गणित के सवालों को चरणबद्ध तरीके से समझना, विज्ञान के कठिन सिद्धांतों को उदाहरणों के जरिए जानना और भाषा संबंधी समस्याओं का समाधान खोजना आसान हो रहा है। विद्यार्थी अपनी जरूरत के अनुसार अभ्यास सामग्री प्राप्त कर विषयों की तैयारी बेहतर कर सकते हैं। इससे उन्हें किसी विषय को दोहराने, अपनी गलतियों को समझने और सीखने की गति बढ़ाने में मदद मिलती है। शिक्षकों के मार्गदर्शन में एआई का उपयोग विद्यार्थियों की पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक है।
समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि तकनीक का सही उपयोग शिक्षा को अधिक सरल और प्रभावी बनाता है। एआई विद्यार्थियों को नई चीजें सीखने, अपनी क्षमताओं को निखारने और बदलते समय की चुनौतियों के लिए तैयार होने में मदद कर रहा है। इसका उपयोग सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से किया जाना जरूरी है।
विकसित भारत–जी राम जी योजना से ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को मिल रही गति
लखनऊ: 22 अक्टूबर, 2026। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि विकसित भारत–जी राम जी योजना के अंतर्गत अनुमन्य ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, सामुदायिक विकास और ग्रामीण जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इन कार्यों के माध्यम से गांवों में आवश्यक सार्वजनिक सुविधाओं को मजबूत करने के साथ ग्रामीण परिवारों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। पंचायत भवन ग्रामीण जनजीवन में संवाद, सामुदायिक सहभागिता और विकास संबंधी गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बन रहे हैं। पंचायत भवन के माध्यम से ग्रामीणों को सामूहिक चर्चा, स्थानीय विकास की योजनाओं और विभिन्न सामुदायिक गतिविधियों के लिए उपयोगी स्थान उपलब्ध हो रहा है। वहीं, आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण से बच्चों की देखभाल, पोषण और स्वस्थ बचपन को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास में सहायता मिलेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के समुचित विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी।
श्री मौर्य ने कहा कि ग्रामीण विकास का उद्देश्य केवल भौतिक संसाधनों का निर्माण करना नहीं, बल्कि गांवों में शिक्षा, पोषण, सामुदायिक सहभागिता और जनसुविधाओं को बेहतर बनाना भी है। योजना के अंतर्गत अनुमन्य कार्यों से गांवों में आवश्यक परिसंपत्तियों का विकास होगा और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
विकसित भारत–जी राम जी योजना के अंतर्गत ग्रामीण सरकारी विद्यालयों में भी आधारभूत शैक्षिक सुविधाओं के विकास के लिए विभिन्न कार्य अनुमन्य हैं। इनमें  अतिरिक्त कक्षा-कक्षों का निर्माण, शौचालय, खेल मैदान, रसोई शेड, प्रयोगशाला तथा विद्यालय परिसर की दीवार का निर्माण शामिल है। इन सुविधाओं के विकास से विद्यालयों में अध्ययन-अध्यापन के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने और विद्यार्थियों को आवश्यक शैक्षिक संसाधन उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सुविधायुक्त विद्यालय बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। अतिरिक्त कक्षा-कक्षों से शिक्षण के लिए स्थान उपलब्ध होगा, प्रयोगशालाओं से व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ावा मिलेगा तथा खेल मैदान बच्चों के शारीरिक विकास और खेल गतिविधियों के लिए उपयोगी होंगे। विद्यालयों में शौचालय, रसोई शेड और परिसर की दीवार जैसी आधारभूत सुविधाएं भी शैक्षिक वातावरण को व्यवस्थित बनाने में योगदान देंगी।
उन्होंने कहा कि पंचायत भवन, आंगनवाड़ी केंद्र और सरकारी विद्यालय जैसी ग्रामीण परिसंपत्तियां गांवों की आवश्यकताओं से सीधे जुड़ी हैं। विकसित भारत–जी राम जी योजना के अंतर्गत अनुमन्य कार्यों के माध्यम से इन सुविधाओं के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक गतिविधियों, बच्चों के पोषण और शिक्षा से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। इससे गांवों में आधारभूत सुविधाओं के विकास और ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में प्रगति को गति मिलेगी।
एग्रीवोल्टाइक से किसान बनेंगे ‘अन्नदाता’ के साथ ‘ऊर्जादाता’, यूपी ने पेश किया स्वच्छ ऊर्जा का विजन
- ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने वैश्विक मंच से निवेशकों को दिया उत्तर प्रदेश में निवेश का न्योता
- 2030 तक 32 गीगावाट और 2047 तक 150 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य
- एडीबी से एग्रीवोल्टाइक के लिए तकनीकी सहायता पाने वाला देश का पहला राज्य बना यूपी, वाराणसी में 100 किलोवाट का पायलट प्रोजेक्ट प्रस्तावित
लखनऊ/नई दिल्ली, 22 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश खेती और स्वच्छ ऊर्जा के समन्वय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी में है। प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित सातवें एग्रीवोल्टाइक वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस-2026 के ‘स्टेट मिनिस्टेरियल पिच’ सत्र में प्रदेश का नवीकरणीय ऊर्जा विजन और एग्रीवोल्टाइक रणनीति प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का प्रमुख कृषि उत्पादक राज्य होने के साथ स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी बड़ा केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि किसान अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता भी बनें और खेती की जमीन का उपयोग किए बिना कृषि तथा बिजली उत्पादन, दोनों को बढ़ावा मिले।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सौर ऊर्जा का तेजी से विस्तार हुआ है। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और पीएम-कुसुम जैसी योजनाओं के माध्यम से घरों की छतों से लेकर खेतों तक सौर ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहन मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश भी स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, किसानों के सशक्तीकरण और निवेश के नए अवसरों के सृजन की दिशा में काम कर रहा है।
- एक ही खेत से अनाज और बिजली
एग्रीवोल्टाइक तकनीक को कृषि और ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि इस मॉडल में ऊंचाई पर सोलर पैनल लगाए जाते हैं, ताकि उनके नीचे या आसपास उपयुक्त फसलों की खेती जारी रखी जा सके। इससे एक ही भूमि से खाद्यान्न और बिजली, दोनों का उत्पादन संभव हो सकता है। यह व्यवस्था खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़ाने में मददगार बन सकती है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में लगभग तीन करोड़ किसान खेती पर निर्भर हैं और 80 प्रतिशत से अधिक कृषि जोत एक हेक्टेयर से छोटी हैं। ऐसे में सीमित कृषि भूमि का बेहतर उपयोग करना जरूरी है। प्रदेश ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में 22 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया है। एग्रीवोल्टाइक मॉडल के जरिए खेती और ऊर्जा उत्पादन के बीच संतुलन स्थापित करने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।
- वाराणसी में 100 किलोवाट का पायलट प्रोजेक्ट
मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश एग्रीवोल्टाइक क्षेत्र में एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) से तकनीकी सहायता प्राप्त करने वाला देश का पहला राज्य बना है। इस पहल के तहत वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईआईवीआर) में 100 किलोवाट क्षमता का पायलट एग्रीवोल्टाइक प्रोजेक्ट स्थापित करने की तैयारी है। परियोजना की व्यवहार्यता संबंधी अध्ययन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब यह क्रियान्वयन के चरण में है।
इस परियोजना के माध्यम से कृषि और सौर ऊर्जा के संयुक्त उपयोग की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा। इसके परिणाम भविष्य में इस मॉडल को प्रदेश के अन्य कृषि क्षेत्रों में विस्तार देने की रणनीति तैयार करने में सहायक हो सकते हैं।
- सौर ऊर्जा और बायो-एनर्जी में यूपी की प्रगति
ऊर्जा मंत्री ने सम्मेलन में प्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा संबंधी उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पीएम सूर्य घर योजना के तहत उत्तर प्रदेश में लगभग नौ लाख घरों में 3,018 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इस योजना में प्रदेश देश में पहले स्थान पर है और आवंटित लक्ष्य का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
पीएम-कुसुम योजना के कंपोनेंट-सी1 के तहत 8,896 कृषि पंपों को 76.2 मेगावाट सौर क्षमता से जोड़ा गया है। वहीं, कंपोनेंट-सी2 के अंतर्गत 581 सब-स्टेशनों पर 1,708 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए विद्युत खरीद समझौते (पीपीए) किए गए हैं।यूटिलिटी स्तर की सौर परियोजनाओं में 3,098 मेगावाट क्षमता चालू है, जबकि 6,295 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं क्रियान्वयन के अधीन हैं। इनमें 3,310 मेगावाट क्षमता के सोलर पार्क भी शामिल हैं।बायो-एनर्जी के क्षेत्र में प्रदेश में 353 टन प्रतिदिन (टीपीडी) की कुल क्षमता वाले 42 संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) संयंत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश की अग्रणी स्थिति रेखांकित की।
- ग्रीन हाइड्रोजन पर भी जोर
मंत्री ने बताया कि गोरखपुर और रामपुर में स्थापित पायलट संयंत्रों से प्रति घंटे 31.5 किलोग्राम ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जा रहा है। इसके अलावा आईआईटी कानपुर, आईआईटी (बीएचयू) और मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के साथ ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में दो उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन पहलों का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा तकनीक के विकास, अनुसंधान और औद्योगिक उपयोग को प्रोत्साहित करना है।
- निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं प्रदेश की नीतियां
उत्तर प्रदेश की सौर ऊर्जा नीति-2022, बायो-एनर्जी नीति-2022 और ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत निवेशकों को विभिन्न प्रोत्साहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इनमें निजी डेवलपर्स के लिए 15,000 रुपये प्रति एकड़ प्रतिवर्ष की दर से भूमि उपलब्ध कराने, 100 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी छूट और सौर परियोजनाओं में 10 वर्ष तक विद्युत शुल्क से छूट जैसे प्रावधान शामिल हैं।
ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं के लिए 10 से 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी तथा सुपर मेगा परियोजनाओं के लिए 35 से 40 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान बताया गया। वहीं, सीबीजी परियोजनाओं के लिए 75 लाख रुपये प्रति टन प्रतिदिन क्षमता के हिसाब से सब्सिडी की व्यवस्था का उल्लेख किया गया। मंत्री ने वैश्विक निवेशकों, परियोजना डेवलपर्स और विशेषज्ञों को उत्तर प्रदेश में निवेश करने तथा प्रदेश के स्वच्छ ऊर्जा मिशन का भागीदार बनने के लिए आमंत्रित किया।
- 2047 तक 150 गीगावाट ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य
मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि ‘विकसित यूपी-2047’ के लक्ष्य के तहत प्रदेश ने वर्ष 2030 तक 32 गीगावाट और वर्ष 2047 तक 150 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। उन्होंने एग्रीवोल्टाइक तकनीक को कृषि भूमि के बेहतर उपयोग, किसानों की आय बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का प्रयास है कि नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार से किसानों को नए आर्थिक अवसर मिलें, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो और प्रदेश विकसित भारत के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे।
धान खरीद व्यवस्था होगी और सरल व पारदर्शी, राइस मिलर्स की समस्याओं के समाधान के निर्देश
- खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने राइस मिलर्स संघों के साथ की बैठक, प्रोत्साहन राशि बढ़ाने समेत कई मांगों पर हुआ मंथन
- हाइब्रिड धान की रिकवरी, मिलों के संबद्धीकरण, सीएमआर की आपूर्ति और लंबित भुगतान के मुद्दे उठे
लखनऊ, 22 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीद व्यवस्था को सुचारु, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में राइस मिलर्स की समस्याओं के समाधान पर जोर दिया है। खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने गुरुवार को बापू भवन स्थित अपने कार्यालय में मान्यताप्राप्त राइस मिलर्स संघों के प्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को सभी मांगों का नियमानुसार परीक्षण कर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में धान मिलिंग की प्रोत्साहन राशि, चावल की रिकवरी, मिलों के ऑनलाइन संबद्धीकरण, कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के सम्प्रदान, भंडारण, परिवहन, होल्डिंग चार्ज और लंबित भुगतान सहित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा और धान खरीद की सुचारु व्यवस्था सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के साथ राइस मिलर्स की वास्तविक समस्याओं का समाधान भी जरूरी है।
- प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की मांग
बैठक में राइस मिलर्स संघों ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समाप्त की गई प्रोत्साहन राशि को फिर से लागू करने और उसमें वृद्धि करने की मांग उठाई। प्रतिनिधियों ने प्रोत्साहन राशि 35 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 50 रुपये और 100 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने के अलग-अलग प्रस्ताव प्रस्तुत किए। मंत्री ने अधिकारियों को इन प्रस्तावों का वित्तीय एवं नीतिगत आधार पर परीक्षण करने के निर्देश दिए।
हाइब्रिड धान की कुटाई के दौरान चावल की रिकवरी में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का मुद्दा भी उठाया गया। मिलर्स ने मौजूदा 1.5 प्रतिशत की छूट बढ़ाकर दो प्रतिशत करने और क्षतिपूर्ति संबंधी प्रावधानों की समीक्षा करने का अनुरोध किया। इस पर मंत्री ने निर्धारित मानकों और प्रचलित नीतियों के अनुरूप प्रस्तावों की जांच करने को कहा।
- मिलों के संबद्धीकरण की प्रक्रिया होगी सरल
राइस मिलर्स ने मिलों के ऑनलाइन संबद्धीकरण की प्रक्रिया को अधिक सरल और व्यावहारिक बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने स्वचालित संबद्धीकरण के साथ स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार मैनुअल संबद्धीकरण का विकल्प उपलब्ध कराने की मांग की। मंत्री ने अधिकारियों से इस व्यवस्था का परीक्षण करने और संबद्धीकरण की प्रक्रिया के कारण धान खरीद कार्य प्रभावित नहीं होने देने को कहा।
बैठक में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों में जगह की कमी, फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) और बोरियों की अनुपलब्धता तथा अन्य व्यवस्थागत कारणों से कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के सम्प्रदान में हुई देरी का मुद्दा भी उठा। मिलर्स ने ऐसे मामलों में लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने तथा होल्डिंग चार्ज और अन्य कटौतियों से राहत देने की मांग की।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभागीय व्यवस्थाओं से जुड़ी कठिनाइयों का निष्पक्ष परीक्षण किया जाए। जिन मामलों में राइस मिलर्स की ओर से कोई त्रुटि नहीं पाई जाती, उनमें नियमानुसार उचित समाधान की कार्रवाई की जाए।
- किसानों के पंजीकरण और भुगतान पर भी चर्चा
बैठक में 10 प्रतिशत ब्रोकन राइस और 15 प्रतिशत खंडा चावल के सम्प्रदान एवं भंडारण की व्यवस्था, क्रय एजेंसियों से लंबित भुगतान, बारदाने और गनी यूजेज चार्जेज तथा मिलिंग से संबंधित अन्य समस्याओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।
इसके अलावा किसान पंजीकरण पोर्टल और एग्री स्टैक के आंकड़ों में विसंगतियों, पंजीकरण के दौरान गाटा विवरण में त्रुटियों तथा धान खरीद केंद्रों के संबद्धीकरण से जुड़ी दिक्कतों पर चर्चा की गई। मंत्री ने स्पष्ट किया कि तकनीकी या प्रक्रियागत समस्याओं के कारण पात्र किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को किसान पंजीकरण, धान की तौल, उपज के उठान, परिवहन और भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए। धान खरीद केंद्रों पर अनियमितता या अनावश्यक हस्तक्षेप की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने को भी कहा।
- किसानों और मिलर्स के हितों में संतुलन पर जोर
मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा कि धान खरीद व्यवस्था को सफल बनाने के लिए किसानों, राइस मिलर्स, क्रय एजेंसियों और विभागीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। सभी पक्षों को पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को राइस मिलर्स संघों के साथ समन्वय बनाकर उनकी मांगों का परीक्षण करने तथा शासन स्तर पर निर्णय की आवश्यकता वाले मामलों में नियमानुसार प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि अन्नदाता किसानों की समृद्धि और प्रदेश के चावल उद्योग का सुदृढ़ीकरण एक-दूसरे के पूरक हैं। सरकार का प्रयास है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले और राइस मिलर्स को भी सुचारु रूप से काम करने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो।
बैठक में प्रमुख सचिव एवं आयुक्त, खाद्य एवं रसद विभाग अनिल कुमार, विशेष सचिव अनीता वर्मा सिंह, अपर आयुक्त कामता प्रसाद, अपर आयुक्त सत्यदेव, आरएफसी मुख्यालय के अशोक कुमार पाल सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न राइस मिलर्स संघों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय साइंस टेक्नो फेस्टिवल में प्रतिभा दिखाएंगे पूर्वांचल के विद्यार्थी, 31 सदस्यीय टीम गुजरात रवाना
-  गोरखपुर, बस्ती, कुशीनगर, महराजगंज और सिद्धार्थनगर के 23 विद्यार्थी व आठ शिक्षक-मेंटर होंगे शामिल
-  डे एंड नाइट स्पेस फाउंडेशन की पहल, अंकलेश्वर में 24-25 अक्टूबर को आयोजित होगा छठवां भारतीय साइंस टेक्नो फेस्टिवल
गोरखपुर। पूर्वांचल के विद्यार्थियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के राष्ट्रीय मंच से जोड़ने की दिशा में डे एंड नाइट स्पेस फाउंडेशन (DANSF), गोरखपुर की पहल रंग ला रही है। गुजरात के अंकलेश्वर में 24 और 25 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाले छठवें भारतीय साइंस टेक्नो फेस्टिवल में प्रतिभाग करने के लिए पूर्वांचल के पांच जिलों के 23 विद्यार्थियों और आठ शिक्षकों एवं मेंटर्स की 31 सदस्यीय टीम गुजरात रवाना हो गई। टीम को लैब सॉल्यूशन्स के निदेशक संजीव कुमार, निगमा नंद अग्रहरि, दिनेश यादव, बृजेश यादव, अंजनी मिश्रा, आलोक साहनी, आकाश साहनी, राजेंद्र कुमार सहित अन्य सहयोगियों और नवापार के ग्रामीणों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस राष्ट्रीय आयोजन में पूर्वांचल के विद्यार्थी अपनी वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नवाचार से जुड़ी गतिविधियों को प्रस्तुत करेंगे। फेस्टिवल के माध्यम से उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्यार्थियों, शिक्षकों और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ संवाद करने तथा अपने ज्ञान और अनुभव को विस्तार देने का अवसर मिलेगा। आयोजन में रमन साइंस एंड टेक्नोलॉजी फाउंडेशन, एपीजे अब्दुल कलाम नेशनल काउंसिल ऑफ यंग साइंटिस्ट, नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर्स साइंटिस्ट और संकल्प दीप ट्रस्ट सहित कई संस्थाओं का सहयोग है।
- पांच जिलों के विद्यार्थियों का चयन
फेस्टिवल के लिए चयनित विद्यार्थियों में गोरखपुर से आदित्य यादव और अंशिका यादव, कुशीनगर से श्याम जी और अभिनव कुमार तथा महराजगंज से शुभम यादव, अमित विश्वकर्मा, काजल निषाद, कोमल जायसवाल, श्रेयांशी रौनियार और अंकित श्रीवास्तव शामिल हैं। इसी तरह बस्ती से दिव्यांश चौधरी, अमरमणि पांडे, आदित्य सोनी, अनंत पांडे, अरुण, तेजस राठौर और कृष्णा वर्मा का चयन हुआ है। सिद्धार्थनगर से दीपक कुमार, अवंतिका, शिवांगी, अनुज कुमार, आंचल, बिंद्रावती और नेहा को अवसर मिला है। चयनित विद्यार्थियों में आरपीआईसी, महराजगंज सहित पूर्वांचल के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के छात्र-छात्राएं शामिल हैं।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर
फाउंडेशन की संस्थापक प्रिया यादव और सह-संस्थापक सरोज के नेतृत्व में विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक क्षमता और नवाचार की भावना विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। संस्था का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की प्रतिभाओं को समान अवसर उपलब्ध कराना तथा उन्हें विज्ञान एवं अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। इस पहल में डे एंड नाइट स्पेस इनोवेशन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड, कुरत्रिम स्पेस टेक एलएलपी, भारत विज्ञान यात्रा, आरपीआईसी महराजगंज, कासिम इंटर कॉलेज सिद्धार्थनगर, स्मार्ट स्टडी क्लासेज कुशीनगर, प्रैक्सिस विद्यापीठ बस्ती, क्रिस्तुराजा पब्लिक जूनियर हाईस्कूल गोरखपुर, एसआरएल अकादमी सिद्धार्थनगर, लैब सॉल्यूशन्स हरियाणा, स्पेस टू स्पेस, कलाग्रह मध्य प्रदेश, इंडोप्लैनेटएक्स स्पेस वॉल्ट एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड रुड़की, ए.डब्ल्यू. इंटरप्राइजेज तमिलनाडु और केपी टेक्नो लाइफ अमरावती, महाराष्ट्र सहित विभिन्न संस्थाओं का सहयोग रहा है।
- वैज्ञानिकों ने दी शुभकामनाएं
टीम की गुजरात रवानगी पर विज्ञान एवं खगोल विज्ञान से जुड़े अनेक विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। शुभकामना देने वालों में डॉ. चंद्रमौली जोशी, डॉ. जे.जे. रावल, डॉ. दिलीप भट्ट, डॉ. ए.सी. माथुर, डॉ. आलोक माथुर, डॉ. एस.पी. व्यास, इंजीनियर जयंत पी. जोशी, प्रो. हरिओम वत्स, प्रो. चंद्रमौली सोलंकी, प्रो. मुकेश कुमार, इंजीनियर वी.एन. राव रेड्डी, डॉ. राजेश ठाकुर, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. दुर्गेश शाही, जय प्रकाश ओझा, मनीषा सिंह, आनंदमई पांडे, शोभा चौहान, शालिनी त्रिपाठी और खगोलविद अमर पाल सिंह सहित कई अन्य लोग शामिल रहे।
फाउंडेशन के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन में भागीदारी से विद्यार्थियों को नई तकनीकों और वैज्ञानिक गतिविधियों को समझने, अपने विचार साझा करने तथा नवाचार के प्रति रुचि विकसित करने का अवसर मिलेगा। संस्था को उम्मीद है कि यह अनुभव पूर्वांचल के विद्यार्थियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगा।