/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/_noavatar_user.gif StreetBuzz आपदा की घड़ी में हर पीड़ित के साथ भाजपा सरकार: मुख्यमंत्री योगी uttar pradesh
आपदा की घड़ी में हर पीड़ित के साथ भाजपा सरकार: मुख्यमंत्री योगी
- *तमकुहीराज में बाढ़ की स्थिति का मुख्यमंत्री योगी ने लिया जायजा, बेदूपार इंटर कॉलेज में अपने हाथों से परिवारों को बांटी राहत सामग्री*
- *जनहानि पर चार लाख की सहायता, क्षतिग्रस्त मकान पर पीएम या सीएम आवास योजना से मिलेगा आवास*
- *फसल नुकसान का होगा सर्वे, पीड़ित किसानों को 10 दिन के भीतर मुआवजा देने के निर्देश*
- *नारायणी में अचानक साढ़े पांच लाख क्यूसेक पहुंचा पानी, तटबंध टूटा और कई घरों में आया पानी*
- *एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की दो-दो टीमें और पीएसी की चार यूनिट राहत-बचाव में तैनात*

कुशीनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को बाढ़ प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि आपदा की इस घड़ी में भाजपा सरकार उनके साथ खड़ी है। जनहानि पर परिवार को चार लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। क्षतिग्रस्त मकान पर प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास मिलेगा, जबकि आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत के लिए धनराशि दी जाएगी। फसल नुकसान का सर्वे कराकर पीड़ित किसानों को 10 दिन के भीतर मुआवजा देने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने विधानसभा क्षेत्र तमकुहीराज में नारायणी नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण उत्पन्न बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद बेदूपार इंटर कॉलेज के प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में बाढ़ प्रभावित परिवारों से भेंट की और अपने हाथों से कुछ परिवारों को राहत सामग्री वितरित की। उन्होंने राहत और बचाव कार्यों की जानकारी लेने के साथ जनप्रतिनिधियों से प्रशासन का सहयोग करने की अपील की। - *साढ़े पांच लाख क्यूसेक पहुंचा पानी*
मुख्यमंत्री ने कहा कि चार दिनों तक लगातार भारी बारिश के बाद प्रदेश के साथ देश के विभिन्न क्षेत्रों में अतिवृष्टि से लोगों को त्रासदी का सामना करना पड़ा। नेपाल में भी अतिवृष्टि से बड़े पैमाने पर जलजमाव हुआ और वहां का पानी नीचे आ रहा है। सामान्य दिनों में नारायणी नदी से तीन से चार लाख क्यूसेक पानी प्रवाहित होता था, जो पिछले दिनों अचानक साढ़े पांच लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। इससे तटबंध टूटा और कई घरों में पानी आया। सरकार सोमवार से स्थिति पर नजर रखे हुए थी। अब मौसम साफ है।
राहत और बचाव के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की दो-दो टीमें तथा पीएसी की चार यूनिट तैनात की गई हैं। जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीमें भी सोमवार से काम में जुटी हैं। जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह सोमवार रात ही प्रभावित क्षेत्र में पहुंच गए थे। क्षेत्र के सांसद और विधायक भी लगातार सहयोग कर रहे हैं।
- *पांच हजार पैकेट में खाद्य सामग्री*
बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए पांच हजार पैकेट में खाद्य सामग्री की व्यवस्था की गई है। इनमें 10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 10 किलो आलू, दो किलो दाल के साथ चना, तेल, मसाले, नमक और अन्य सामग्री शामिल है। मुख्यमंत्री ने राहत कार्य में लगी टीमों को प्रभावित लोगों को तत्काल राहत शिविरों में पहुंचाने और वहां रोशनी की व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। - *सड़क और तटबंध की होगी मरम्मत*
मुख्यमंत्री ने फसलों के नुकसान का सर्वे कर पीड़ित किसानों को 10 दिनों के भीतर मुआवजा देने के निर्देश दिए। इसके साथ ही बाढ़ से प्रभावित सड़कों और तटबंध की मरम्मत कराने को कहा। सिंचाई विभाग को ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, जिससे किसानों के खेतों को नुकसान न हो।
- *प्रभावित क्षेत्रों में लगेंगे स्वास्थ्य शिविर*
मुख्यमंत्री ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश दिए। अस्पतालों में सांप या जंगली जानवर के काटने पर तत्काल वैक्सीन उपलब्ध कराने को कहा, ताकि उपचार में देरी न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि संकट की इस घड़ी में पूरी टीम प्रभावित लोगों के सहयोग के लिए खड़ी है। जनप्रतिनिधि भी राहत और बचाव कार्य में प्रशासन का सहयोग करें। - *ये रहे मौजूद*
इस दौरान जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह समेत क्षेत्र के सांसद, विधायक, जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
जन प्रकृति सेवा ट्रस्ट ने थाना प्रभारी विजय कुमार शुक्ला को किया सम्मानित
वाराणसी। जन प्रकृति सेवा ट्रस्ट की ओर से चौक थाना प्रभारी विजय कुमार शुक्ला जी को उनके सराहनीय कार्य एवं जनसेवा के प्रति समर्पण के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में ट्रस्ट के संस्थापक, रघुवंश उपाध्याय, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ज्योतिका उपाध्याय, कार्यकारिणी सदस्य, रेखा यादव, सीमा यादव सहित ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। सम्मान समारोह के दौरान ट्रस्ट की ओर से विजय कुमार शुक्ला जी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा गया कि कानून व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने तथा अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने में पुलिस प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका है। ट्रस्ट ने उनके कर्तव्यनिष्ठ एवं जनहित से जुड़े कार्यों की प्रशंसा की और समाज में शांति एवं सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इस अवसर पर संस्थापक, रघुवंश उपाध्याय ने विजय कुमार शुक्ला जी को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जन प्रकृति सेवा ट्रस्ट समाज सेवा, राष्ट्र सेवा और जनहित के कार्यों के लिए सदैव प्रशासन एवं समाज के सकारात्मक प्रयासों के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि समाज में अपराध और असामाजिक गतिविधियों के विरुद्ध जागरूकता एवं सहयोग की भावना को मजबूत करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान ट्रस्ट के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने विजय कुमार शुक्ला जी का सम्मान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य एवं निरंतर जनसेवा की शुभकामनाएं दीं।
प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने के लिए पर्यटन की अहम भूमिका : जयवीर सिंह

- *डेलायट संस्था द्वारा तैयार की गयी कार्ययोजना को धरातल पर उतारने का हरसंभव प्रयास किया जाए : अवनीश कुमार अवस्थी*
- *वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के संकल्प को पूरा करने के लिए समीक्षा बैठक सम्पन्न*

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर बनाने के लिए कार्य कर रही डेलॉयट के प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि जो भी कार्ययोजना तैयार की गई है, उसका परिणाम धरातल पर दिखना चाहिए। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले लगभग 02 वर्षों में संस्था द्वारा संतोषजनक प्रगति नहीं की गई है। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि प्रस्तावित कार्ययोजनाओं पर यथाशीघ्र कार्य शुरू हो जाना चाहिए।
पर्यटन मंत्री ने डेलायट संस्था के प्रतिनिधियों को निर्देशित किया कि नैमिषारण्य सहित आसपास के अन्य तीर्थ स्थलों पर नाइट विजन कैमरे लगाये जाए। इसके अलावा विन्ध्याचल धाम व चित्रकूट के तीर्थ स्थलों पर कैमरे स्थापित किये जाये, इन कैमरों को 15 नवम्बर तक स्थापित करके दिसम्बर तक चालू स्थिति में लाये जाने का हरसंभव प्रयास किये जाये। इससे पर्यटकों के आगमन की तथ्यात्मक गणना हो सकेगी। इसके अलावा प्रदेश में रेस्टोरेन्ट एवं ढ़ाबों की संख्या भी एकत्रित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के 14 सर्किट के अंतर्गत 60 जनपदों के वास्तविक आंकड़ें तथा पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी के बारे में तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
पर्यटन मंत्री आज यहां गोमतीनगर स्थित पर्यटन भवन के सभागार में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लिए संस्था द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना एवं भविष्य की रणनीतियों पर व्यापक विचार-विमर्श कर रहे थे। इस समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी तथा वरिष्ठ विभागीय अधिकारी मौजूद थे। उन्होंने डेलॉयट संस्था को निर्देशित किया कि काशी, विध्यांचल धाम तथा नैमिषारण्य में निवेश एवं पर्यटन संसाधनों के प्रचार के लिए कार्ययोजना तैयार की जाये। उन्होंने यह भी कहा कि कार्ययोजना बनाने के साथ ही उसके क्रियान्वयन पर विशेष फोकस करें।
जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पर्यटन सेक्टर में काफी बदलाव आये हैं। कानून व्यवस्था के साथ ही कनेक्टिविटी बेहतर की गई है। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि उत्तर प्रदेश में पर्यटन के 14 परिपथ मौजूद हैं। इस सर्किट से जुड़े स्थलों का सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों तथा रोड-शो के माध्यम से प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें। डेलॉयट संस्था ने बताया कि शीघ्र ही विंध्याचलधाम तथा नैमिषारण्य में पर्यटकों के आगमन तथा उनके अनुभव पर आधारित अभियान चलाया जायेगा। मा0 मंत्री जी ने कहा कि पर्यटकों के गिनती के आंकड़े वास्तविक होने चाहिए।
प्रदेश में मेडिकल सेक्टर पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। राजधानी सहित अन्य बड़े जनपदों में मेडिकल टूरिज्म बढ़ रहा है, इसमें विदेशियों की संख्या भी काफी है। डेलायट कम्पनी ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 1000 होटलों के मानचित्र स्वीकृत हुए हैं। इन होटलों के अस्तित्व में आने से पर्यटकों का ठहराव बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। संस्था ने यह भी बताया कि महिन्द्रा हॉलीडेज ने वाराणसी और अयोध्या में 500 करोड़ रूपये के निवेश का प्रस्ताव किया है। इसी प्रकार इमैजिका वर्ल्ड इंटरटेनमेंट लि0 ग्रेटर नोयडा में 400 करोड़ रूपये, टक्साल थियेटर वाराणसी में 295 करोड़ रूपये, राजदीप इन्फ्रा एण्ड सेल्स लखनऊ में 200 करोड़ रूपये तथा आईटीसी होटल्स लखनऊ में 350-400 करोड़ रूपये सेवा सेक्टर में निवेश के लिए प्रस्ताव किया है।
इसके अलावा उपलब्ध होटलों में पर्यटकों के ठहरने के लिए कक्षों की संख्या बढ़ाने की रणनीति बनाई जाए। बैठक में बताया गया कि अयोध्या, लखनऊ तथा मथुरा में सर्वाधिक निवेश प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य को प्राप्त करने में पर्यटन एक मजबूत ग्रोथ इंजन की तरह कार्य कर रहा है। इसके लिए बुनियादी ढांचे के विस्तार, निजी निवेश बढ़ाने और पर्यटन सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। नई पर्यटन नीति प्रस्तावित की गई है। उसकों शीघ्र ही अंतिम रूप दे दिया जायेगा।
डेलायट संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि पर्यटकों का आगमन एवं जीएसटी के मद मंे प्राप्त राजस्व सकारात्मक हैं। इसी प्रकार बड़े स्तरों से जुड़ी सेवाओं तथा पर्यटकों का सहयोग काफी उत्साहवर्धक है। प्रयागराज, अयोध्या, वाराणसी, मथुरा तथा चित्रकूट में सर्वाधिक पर्यटकों का आगमन हुआ, जिसकी वजह से होटलों में ठहरने वाले पर्यटकों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से जून, 2026 तक 58 करोड़ पर्यटक प्रदेश का भ्रमण किये। प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने के लिए डेलायट पर्यटन सेक्टर को नयी रणनीति के साथ तैयार कर रही है।
मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने डेलॉयट संस्था को निर्देशित किया कि कार्ययोजना के क्रियान्वयन की गति बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों के आगमन के आंकड़ें तथ्यपरक होने चाहिए। उन्होंने अयोध्या, चित्रकूट, विन्ध्याचल धाम तथा नैमिषारण्य को लेकर भी बहुमूल्य सुझाव दिये। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का संकल्प है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में पर्यटन विभाग की बड़ी भूमिका होगी। अपर मुख्य सचिव पर्यटन एवं संस्कृति तथा धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात ने निर्देशित किया कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाये गये कदमों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। बैठक में एमडी उप्र पर्यटन विकास निगम आशीष कुमार, उपसचिव पर्यटन चन्दन रावत, पर्यटन सलाहकार जेपी सिंह सहित डेलॉयट संस्था के कार्तिक एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
जानकारी से प्रशिक्षित करने पर जोर दिया, ताकि प्रति पशु दुग्ध उत्पादकता बढ़ाई जा सके।
 
उन्होंने पशुधन विभाग के अधिकारियों से लम्पी रोग की रोकथाम की तैयारियों की भी जानकारी ली और जनपदों में भेजे गए नोडल अधिकारियों को लगातार स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि पशुओं के लिए वैक्सीन और दवाओं की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। नकली या प्रभावहीन दवाओं के इस्तेमाल पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
 
- *किसानों और पशुपालकों का हित सरकार की प्राथमिकता : कृष्णा पासवान*
 
पशुधन एवं दुग्ध विकास राज्यमंत्री कृष्णा पासवान ने कहा कि किसानों और पशुपालकों का हित राज्य सरकार की प्राथमिकता है। दुग्ध समितियों की संख्या बढ़ने से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी, जिससे किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ेगी तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। उन्होंने पराग के बूथों की संख्या बढ़ाने और महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया।
 
विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने अधिकारियों को आश्वस्त किया कि किसानों और पशुपालकों को दुग्ध मूल्य भुगतान में अनावश्यक विलंब नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर लंबित भुगतान करने और दुग्ध समितियों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए।
 
बैठक में दुग्ध विकास विभाग के विशेष सचिव राम सहाय यादव, पीसीडीएफ के प्रबंध निदेशक प्रकाश बिंदु, सभी दुग्ध संघों के अध्यक्ष एवं इकाई प्रभारी, पशुपालन निदेशालय की निदेशक (रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र) डॉ. संगीता तिवारी, निदेशक प्रशासन एवं विकास डॉ. राजेंद्र प्रसाद सहित पीसीडीएफ और शासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
निवेशकों के बीच भरोसे से बना उत्तर प्रदेश का क्रेडिट: नंदी
- *बोले- प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में बदली प्रदेश की औद्योगिक पहचान*
- *अब निवेशकों के उद्योग लगने तक होगी हैंडहोल्डिंग*
- *भारत की सामरिक आत्मनिर्भरता में उद्यमियों की भूमिका है महत्वपूर्ण*
- *उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के ‘फ्रॉम योर फैक्ट्री टू द फ्रंट लाइन’ नॉलेज सेशन को मंत्री नन्दी ने किया संबोधित*

ग्रेटर नोएडा/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता 'नन्दी’ ने कहा कि प्रदेश ने निवेशकों के बीच अपना क्रेडिट और भरोसा संवाद, सुविधा और निरंतर सहयोग के माध्यम से बनाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में ऐसा औद्योगिक वातावरण विकसित किया जा रहा है, जहां निवेशकों को केवल निवेश के लिए आमंत्रित करने तक सीमित न रहकर उद्योग स्थापित होने तक आवश्यक सहयोग और हैंडहोल्डिंग उपलब्ध कराई जा रही है।
ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे दिन उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के ‘फ्रॉम योर फैक्ट्री टू द फ्रंट लाइन’ नॉलेज सेशन को संबोधित करते हुए मंत्री नन्दी ने कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों और प्रमुख शहरों में किए गए रोड शो तथा निवेशकों के साथ लगातार संवाद का परिणाम है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश के प्रति भरोसा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में विभिन्न देशों की भागीदारी भी इसी बढ़ते संवाद और विश्वास को दर्शाती है।
मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने बताया कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड लखनऊ, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़ और आगरा में अब तक लगभग 40,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं तथा करीब 1,142 हेक्टेयर भूमि विभिन्न उद्योगों को आवंटित की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें निवेशक को फाइल लेकर एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। निवेशक के प्रदेश में आने के बाद उसकी जरूरतों को समझकर संबंधित विभागों और अधिकारियों के साथ समन्वय कर समाधान उपलब्ध कराया जाए।
- *‘निवेशक आए तो उद्योग लगने तक साथ खड़ी रहे सरकार’*
नंदी ने कहा कि निवेशक के लिए केवल जमीन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। उसे नीति, कनेक्टिविटी, आधारभूत ढांचे, टेस्टिंग, तकनीकी सुविधाओं और अन्य आवश्यक अनुमतियों के संबंध में भी सहयोग मिलना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से निवेशक सुविधा को कार्यालय की कार्यप्रणाली और व्यवहार से जोड़ने पर जोर दिया।
- *रक्षा सप्लाई चेन में एमएसएमई और स्टार्टअप के लिए अवसर*
उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र का मतलब केवल टैंक, मिसाइल या विमान बनाना नहीं है। प्रिसीजन कंपोनेंट, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, सेंसर, बैटरी, विशेष केबल, सॉफ्टवेयर, तकनीकी टेक्सटाइल, एडवांस मटेरियल, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स सहित पूरी सप्लाई चेन में उद्योगों के लिए अवसर हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लखनऊ, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़ और आगरा नोड में रक्षा विनिर्माण का इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। इसका लाभ बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई, स्टार्टअप, कंपोनेंट निर्माता और टेक्नोलॉजी कंपनियां भी उठा सकती हैं।
- *कनेक्टिविटी, कानून-व्यवस्था और भरोसा निवेश की बुनियाद*
मंत्री ने कहा कि निवेश के लिए तीन चीजें महत्वपूर्ण हैं- कनेक्टिविटी, कानून-व्यवस्था और भरोसा। बेहतर एक्सप्रेसवे एवं परिवहन नेटवर्क, एयर कनेक्टिविटी और औद्योगिक आधारभूत ढांचे से प्रदेश में कारोबार के अवसर बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास कारोबारी प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने और अनावश्यक कानूनी जटिलताओं को कम करने का है। उद्योग और सरकार के बीच संबंध सहयोग और साझेदारी पर आधारित होने चाहिए। नंदी ने निवेशकों से उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और यूपीडा से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती जरूरतों के साथ प्रदेश के उद्योगों के लिए नई संभावनाएं बन रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों के साथ कदम-दर-कदम खड़ी है और उनका निवेश सुरक्षित वातावरण में उत्पादन, रोजगार और तकनीकी क्षमता के विस्तार से जुड़ सके, इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
- *रक्षा क्षेत्र की मांग सुनिश्चित, सप्लाई चेन में हर उद्योग के लिए अवसर*
मंत्री नन्दी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में अवसर केवल टैंक, मिसाइल और विमान बनाने वाली बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रिसीजन इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, बैटरी, स्पेशल केबल, सॉफ्टवेयर, एडवांस मटेरियल, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स सहित विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग रक्षा सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र की मांग सामान्य बाजार की तरह अनुमान आधारित नहीं, बल्कि सशस्त्र बलों की निर्धारित आवश्यकताओं पर आधारित है, इसलिए स्वदेशी निर्माण के लिए बाजार की स्पष्ट संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने उद्योगों से अपनी मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का आकलन कर यह पहचानने का आह्वान किया कि वे रक्षा क्षेत्र की किस आवश्यकता को पूरा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में भूमि, टेस्टिंग सुविधाओं, आरएंडडी और निवेशक सुविधा के साथ ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसमें बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई और स्टार्टअप भी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ सकें।
इस अवसर पर यूपीडा के एडीएम संजय यादव, डिफेंस कॉरिडोर के सीजीएम कर्नल संजय सिंह, इन्वेस्ट यूपी के जीएम अनिरुद्ध, डीजीएम ब्रह्मोस रोहन मिश्रा, डेटम ग्रुप से तन्मय तिवारी, रॉयल सेल्स से अभिषेक जिंदल और यूएएस टेस्टिंग फाउंडेशन के सीईओ अनिमेष मिश्रा सहित रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि एवं रक्षा विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं : केशव प्रसाद मौर्य
- *उप मुख्यमंत्री ने कहा, किसानों की आय बढ़ाने के साथ खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और निर्यात पर दिया जाए विशेष जोर*
- *महिला उद्यमियों को सोलर ऊर्जा आधारित खाद्य प्रसंस्करण इकाई लगाने पर 90 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान*
- *2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को साकार करने में उद्यमियों की महत्वपूर्ण भूमिका*

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने गौतम बुद्ध नगर में आयोजित यू.पी. इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के खाद्य प्रसंस्करण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। प्रदेश सरकार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है और इसी उद्देश्य से खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023 लागू की गई है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कृषि एवं बागवानी उत्पादों की प्रचुरता है। आवश्यकता इस बात की है कि किसानों को केवल कच्चे उत्पाद के विक्रेता के रूप में न देखा जाए, बल्कि उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक उन्हें पूरी मूल्य श्रृंखला से जोड़ा जाए। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
उन्होंने गौतम बुद्ध नगर क्षेत्र में आधुनिक तकनीक से गाजर उत्पादन एवं उसके विपणन का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि अलग-अलग जिलों में इसी प्रकार के उत्पाद-विशेष क्लस्टर विकसित किए जाएं तो कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाले कृषि उत्पादों की देश की विभिन्न मंडियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मांग बढ़ाई जा सकती है। इससे कृषि उपज की बर्बादी को कम करने और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने में मदद मिलेगी।
श्री मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश के उद्यमी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। शहद उत्पादन एवं मधुमक्खी पालन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता वाला हो तो यूरोप, अमेरिका और कनाडा जैसे बाजारों में भी उसकी मांग बनाई जा सकती है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे मधुमक्खी पालन, शहद उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण सहित विभिन्न क्षेत्रों में नए उद्यम स्थापित करने के लिए आगे आएं।
उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश करने के इच्छुक उद्यमियों के लिए प्रदेश सरकार की नीति में विभिन्न प्रकार की सुविधाएं और प्रोत्साहन उपलब्ध हैं। यदि कोई उद्यमी खाद्य प्रसंस्करण इकाई में बिजली की आवश्यकता को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करता है तो पुरुष उद्यमियों को सोलर ऊर्जा के लिए 50 प्रतिशत तथा महिला उद्यमियों को 90 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है। उन्होंने उद्यमियों से अपील की कि वे प्रदेश सरकार की नीतियों और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाएं।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में डिस्ट्रिक्ट रिसोर्स पर्सन के माध्यम से संभावित उद्यमियों की पहचान करने और उन्हें उद्यम स्थापित करने में सहयोग देने का कार्य किया जा रहा है। बैंकों के साथ भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि उद्यमियों को अनावश्यक रूप से बैंक के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें योजनाओं का लाभ समय से मिल सके।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान को उद्यमी अपना अधिकार समझें, लेकिन यह अधिकार वास्तविक रूप से तभी सार्थक होगा, जब उद्यमी स्वयं भी अपनी इकाई स्थापित करने और उसे सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे आएं। सरकार की योजनाओं का उद्देश्य केवल अनुदान देना नहीं, बल्कि टिकाऊ और रोजगारपरक उद्यम खड़े करना है।
श्री मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज औद्योगिक विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक समय औद्योगिक विकास के लिए महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों का उदाहरण दिया जाता था, लेकिन आज उद्यमियों और निवेशकों के सहयोग से उत्तर प्रदेश भी देश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश गंतव्यों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि यह अभी शुरुआत है; वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को साकार करने के लिए अभी लंबा सफर तय करना है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश के प्रत्येक ग्राम सभा स्तर तक विभिन्न प्रकार की स्थानीय इकाइयों और उद्यमों को स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए। स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित होने से किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलेगा, युवाओं को रोजगार मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
उप मुख्यमंत्री ने यू.पी. इंटरनेशनल ट्रेड शो के माध्यम से प्रदेश के उद्यमियों को वैश्विक बाजार से जुड़ने का अवसर मिलने की बात कही। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विदेशी निवेश और विदेशी उत्पादों का विरोधी नहीं है, लेकिन प्रदेश की प्राथमिकता यह है कि विदेशी कंपनियां भारत और उत्तर प्रदेश में निवेश करें, यहां उत्पादन करें और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बन रहे गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए सरकार उद्यमियों के साथ खड़ी है।
उन्होंने उद्यमियों से आह्वान किया कि वे खाद्य प्रसंस्करण सहित विभिन्न क्षेत्रों में नई तकनीक, बेहतर गुणवत्ता, आधुनिक पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाते हुए आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि उद्यमियों की ऊर्जा, नवाचार और सरकार की नीतियों का समन्वय उत्तर प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उप मुख्यमंत्री ने यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो- 2026 के अंतर्गत Presentation on 'Food Processing Policy- 2023' के कार्यक्रम में स्टालों का निरीक्षण किया। इस दौरान खाद्य प्रसंस्करण के लाभार्थियों को डेमो चेक व स्वयं सहायता समूह की बहनों को प्रशस्ति पत्र आदि वितरित किए।
कार्यक्रम में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कुमार कश्यप,राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग बी एल मीणा, विशेष सचिव  श्री राजकमल यादव, उप निदेशक एम पी सिंह, खाद्य प्रसंस्करण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, उद्यमियों एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
कचरे की समस्या से समाधान तक: सर्वाेदय विद्यालयों के विद्यार्थी साझा करेंगे अपने नवाचार और अनुभव
- *TCS IMF के सहयोग से 6 अक्टूबर को होगा ऑनलाइन इनोवेशन कार्यक्रम*

लखनऊ। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वाेदय विद्यालयों के विद्यार्थियों में पर्यावरण जागरूकता, नवाचार और समस्या-समाधान की सोच विकसित करने के उद्देश्य से  TCS IMF के सहयोग से ऑनलाइन इनोवेशन सेलिब्रेशन इवेंट का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम 6 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 से 4 बजे तक होगा, जिसमें विद्यार्थी ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान कचरा प्रबंधन विषय पर किए गए सर्वेक्षण, अध्ययन, अनुभव और समाधान आधारित विचार साझा करेंगे।
कार्यक्रम में सहारनपुर पुवारका, मुरादाबाद स्वच्छकार, सिरसिया हेतिमपुर और निदौरी स्थित सर्वाेदय विद्यालयों के विद्यार्थी अपने सर्वेक्षण और समाधान आधारित सुझाव प्रस्तुत करेंगे। वहीं परासिया, मिर्जापुर और रायबरेली रैन स्थित विद्यालयों के आईएमएफ शिक्षक ग्रीष्मकालीन अवकाश गृहकार्य गतिविधि के संचालन और विद्यार्थियों की सहभागिता का अनुभव साझा करेंगे।
- *शिक्षक साझा करेंगे नवाचार और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अनुभव*
बदनौरा, बुलंदशहर स्थित सर्वाेदय विद्यालय के आईएमएफ शिक्षक सीटीआईएस सम्मेलन में किए गए पोस्टर प्रस्तुतीकरण का अनुभव बताएंगे। कार्यक्रम में टीसीएस के कचरा प्रबंधन विषय विशेषज्ञ कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े व्यावहारिक उपायों की जानकारी भी देंगे। समाज कल्याण उपनिदेशक श्री जे राम ने बताया कि इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के बारे में सोचने का अवसर मिल रहा है। इससे उनमें पर्यावरण के प्रति जागरूकता के साथ-साथ रचनात्मक सोच, टीमवर्क और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित हो रही है।
सही, समयबद्ध और सत्यापित डेटा प्रभावी नीति निर्माण का आधार: योगेन्द्र उपाध्याय
- *राज्य स्तरीय AISHE कार्यशाला में उच्च शिक्षा मंत्री ने डेटा की शुद्धता और समयबद्धता पर दिया जोर*
- *डेटा कलेक्शन को औपचारिकता नहीं, नीति एवं योजना निर्माण की जिम्मेदारी मानें: उच्च शिक्षा मंत्री*

लखनऊ। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि उच्च शिक्षा से संबंधित सही, समयबद्ध और सत्यापित डेटा केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि प्रभावी नीति निर्माण, योजनाओं के निर्धारण और उच्च शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को समझने का महत्वपूर्ण आधार है। डेटा के आधार पर ही तय किया जा सकता है कि कहां नए संस्थानों की आवश्यकता है, कहां शिक्षकों एवं संसाधनों की जरूरत है और विकास के लिए किन क्षेत्रों में विशेष कार्य किए जाने चाहिए। अर्थात भावी कार्यक्रम, योजनाएं और नीतियों का उचित निर्धारण डाटा पर ही निर्भर करता है।
उच्च शिक्षा मंत्री सोमवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय AISHE (All India Survey on Higher Education) कार्यशाला में विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला का आयोजन उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के समन्वय से किया गया। इसमें डेटा संग्रहण, सत्यापन, सबमिशन, विश्लेषण तथा संस्थागत व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई।
मंत्री उपाध्याय ने कहा कि डेटा समाज और उच्च शिक्षा व्यवस्था का दर्पण है। भारत सरकार और प्रदेश सरकार अनेक महत्वपूर्ण निर्णय उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर लेती हैं। इसलिए डेटा कलेक्शन को नियमित प्रक्रिया न मानकर नीति एवं योजना निर्माण की जिम्मेदारी के रूप में लिया जाए। यदि डेटा सही होगा तो योजनाएं भी अधिक प्रभावी बनेंगी।
उन्होंने विश्वविद्यालयों द्वारा संबद्ध महाविद्यालयों एवं संस्थानों के AISHE डेटा को नियमित अपडेट करने पर जोर दिया। कहा कि कई संस्थान AISHE कोड प्राप्त करने के बाद समय पर डेटा नहीं देते, जिससे उनका स्टेटस निष्क्रिय हो सकता है और इसका असर विद्यार्थियों पर पड़ता है। नोडल अधिकारी नियमित समीक्षा करें। पोर्टल खुलने के बाद अंतिम तिथि की प्रतीक्षा की प्रवृत्ति से बचें, समय रहते डेटा प्राप्त कर परीक्षण सुनिश्चित करें। नामांकन, रिक्तियों, पाठ्यक्रमों, परीक्षा, परिणाम, आधारभूत संरचना की सूचनाएं मूल अभिलेखों से सत्यापित कर ही दर्ज की जाएं। केवल डेटा भरना पर्याप्त नहीं, उसकी शुद्धता और प्रमाणिकता भी सुनिश्चित हो।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि नोडल अधिकारियों की भूमिका केवल कलेक्शन तक सीमित न रहे। अंतिम अनुमोदन से पहले क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाए, आवश्यकता अनुसार रैंडम वेरिफिकेशन कर अभिलेखों और AISHE डेटा की वास्तविकता जांची जाए और संस्थानों को तकनीकी-प्रशासनिक सहयोग भी दिया जाए। प्रदेश का प्रयास जीरो पेंडेंसी की दिशा में होना चाहिए। कोई भी पात्र एवं कार्यशील संस्थान प्रशासनिक लापरवाही से सर्वे से बाहर न रहे। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में सही सूचना, सही समय पर उपलब्ध होना आवश्यक है। आंकड़ों से भविष्य की आवश्यकताओं की पहचान कर नए संस्थानों, फैकल्टी और विभागों पर बेहतर योजना बन सकती है। डेटा प्लानिंग को औपचारिकता नहीं, पॉलिसी प्लानिंग की जिम्मेदारी मानना चाहिए।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा अमित कुमार घोष ने कहा कि AISHE के लिए डेटा प्रबंधन केवल नोडल अधिकारी की नहीं, पूरे संस्थान की जिम्मेदारी है। डेटा प्रवेश, परीक्षा सहित विभिन्न अनुभागों से आता है, इसलिए विश्वसनीयता के लिए संस्थागत व्यवस्था आवश्यक है। कार्यशाला के सुझावों के आधार पर एसओपी तैयार कर अनुमोदन के लिए प्रस्तुत की जाएगी। उन्होंने विश्वविद्यालय रिकॉर्ड और AISHE रिकॉर्ड में एकरूपता, एफिलिएशन सूची के रीकन्सिलिएशन, गलत रिपोर्टिंग और डबल रिपोर्टिंग से बचने के लिए प्रामाणिक अभिलेखों की जांच तथा असामान्य बदलाव पर गहराई से समीक्षा पर जोर दिया। डेटा अपलोड करना प्रक्रिया है, लेकिन उसका विश्लेषण और गैप एनालिसिस अधिक महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला में निदेशक उच्च शिक्षा प्रो. मोनिका सिंह ने आंकड़ों के व्यवस्थित संकलन और गुणवत्ता पर विचार रखे। कार्यशाला में RMLNLU के कुलपति प्रो. डॉ. अमर पाल सिंह, निदेशक AISHE की अपर महानिदेशक संगीता नर्मदेश्वर, रजिस्ट्रार केशव कुमार, राज्य नोडल अधिकारी AISHE प्रो. दिनेश चंद्र शर्मा, उच्च शिक्षा परिषद के अपर सचिव डॉ. दिनेश के. राजपूत सहित अन्य अधिकारी एवं प्रदेश के विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारी उपस्थित रहे। तकनीकी सत्रों में DCF और AISHE पोर्टल से संबंधित जानकारी दी गई और विश्वविद्यालय-विशिष्ट समस्याओं पर चर्चा हुई।
बकाया दुग्ध मूल्य भुगतान में लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई : धर्मपाल सिंह
- *लखनऊ, मेरठ और मुरादाबाद के जीएम को जल्द भुगतान के निर्देश, हर माह किसानों को समय से भुगतान सुनिश्चित करने को कहा*

लखनऊ, 28 सितंबर। प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने किसानों और पशुपालकों के बकाया दुग्ध मूल्य भुगतान को लेकर कड़ी नाराजगी जताते हुए लखनऊ, मेरठ और मुरादाबाद के महाप्रबंधकों (जीएम) को लंबित भुगतान तत्काल कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों को हर माह नियमित रूप से दुग्ध मूल्य का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। भुगतान में लापरवाही या शून्य भुगतान की स्थिति सामने आने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पीसीडीएफ सभागार में प्रदेश के सभी दुग्ध संघों के अध्यक्षों और महाप्रबंधकों के साथ हुई समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि शासन से बकाया भुगतान के लिए उपलब्ध कराई जा रही धनराशि का इस्तेमाल किसी अन्य मद में न किया जाए। यह राशि केवल किसानों के दुग्ध मूल्य भुगतान पर ही खर्च की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी योजना के लक्ष्य की प्राप्ति में लापरवाही या अनावश्यक विलंब होने पर संबंधित अधिकारी का वेतन रोकने की कार्रवाई भी की जाएगी।
- *इस वर्ष 25 हजार ग्राम पंचायतों में गठित होंगी दुग्ध समितियां*
मंत्री ने अधिकारियों को इस वर्ष 25 हजार ग्राम पंचायतों में एक-एक दुग्ध समिति का गठन करने का लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दुग्ध समितियों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ निष्क्रिय समितियों को फिर से सक्रिय किया जाए। वर्तमान में संचालित समितियां किसी भी स्थिति में बंद नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी महाप्रबंधकों को मार्केटिंग पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए कहा कि पराग के उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए प्रभावी मार्केटिंग रणनीति तैयार की जाए। साथ ही दुग्ध संग्रहण के लिए व्यवस्थित रूट तैयार किए जाएं। उन्होंने कहा कि उचित मार्केटिंग के बिना दुग्ध संघों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकेगा।
- *दुग्ध उपार्जन में 13 प्रतिशत की वृद्धि*
बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेश में दुग्ध सहकारी समितियों के गठन और दुग्ध उपार्जन में प्रगति हुई है। प्रदेश में वर्तमान में 7,667 कार्यरत दुग्ध समितियां हैं। जिला योजना के तहत निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष 220 समितियों का गठन किया गया है। वहीं, नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत 1,750 के लक्ष्य के सापेक्ष 1,819 समितियां गठित की जा चुकी हैं।
दोनों योजनाओं के तहत कुल 3,748 समितियों के लक्ष्य के सापेक्ष 2,039 समितियों का गठन पूरा किया गया है। इसके अलावा 450 समितियों के पुनर्गठन के लक्ष्य के सापेक्ष 407 समितियों का पुनर्गठन किया जा चुका है।
दुग्ध उपार्जन में भी 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में औसत दुग्ध उपार्जन 4.08 लाख किलोग्राम प्रतिदिन है, जबकि औसत तरल दुग्ध बिक्री में 5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह 2.12 लाख लीटर प्रतिदिन पहुंच गई है।
- *किसानों का विश्वास बनाए रखना जरूरी*
धर्मपाल सिंह ने कहा कि किसानों का विश्वास आज भी पराग के साथ है। इसे बनाए रखने के लिए दुग्ध समितियों का गठन, किसानों को समय से भुगतान और पशुपालकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को पूरी गंभीरता से संचालित करना होगा। उन्होंने पशुपालकों को दुग्ध उत्पादन की नई तकनीकों और आधुनिक जानकारी से प्रशिक्षित करने पर जोर दिया, ताकि प्रति पशु दुग्ध उत्पादकता बढ़ाई जा सके।
उन्होंने पशुधन विभाग के अधिकारियों से लम्पी रोग की रोकथाम की तैयारियों की भी जानकारी ली और जनपदों में भेजे गए नोडल अधिकारियों को लगातार स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि पशुओं के लिए वैक्सीन और दवाओं की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। नकली या प्रभावहीन दवाओं के इस्तेमाल पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- *किसानों और पशुपालकों का हित सरकार की प्राथमिकता : कृष्णा पासवान*
पशुधन एवं दुग्ध विकास राज्यमंत्री कृष्णा पासवान ने कहा कि किसानों और पशुपालकों का हित राज्य सरकार की प्राथमिकता है। दुग्ध समितियों की संख्या बढ़ने से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी, जिससे किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ेगी तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। उन्होंने पराग के बूथों की संख्या बढ़ाने और महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया।
विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने अधिकारियों को आश्वस्त किया कि किसानों और पशुपालकों को दुग्ध मूल्य भुगतान में अनावश्यक विलंब नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर लंबित भुगतान करने और दुग्ध समितियों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए।
बैठक में दुग्ध विकास विभाग के विशेष सचिव राम सहाय यादव, पीसीडीएफ के प्रबंध निदेशक प्रकाश बिंदु, सभी दुग्ध संघों के अध्यक्ष एवं इकाई प्रभारी, पशुपालन निदेशालय की निदेशक (रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र) डॉ. संगीता तिवारी, निदेशक प्रशासन एवं विकास डॉ. राजेंद्र प्रसाद सहित पीसीडीएफ और शासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
रेबीज उन्मूलन के लिए व्यापक जन-जागरूकता जरूरी : मेश्राम
- *रेबीज मुक्त उत्तर प्रदेश की दिशा में अहम पहल, पशुपालन विभाग और Jhpiego ने ‘One Health’ पर किया मंथन*

लखनऊ, 28 सितंबर। विश्व रेबीज दिवस 2026 के अवसर पर उत्तर प्रदेश को रेबीज मुक्त बनाने की दिशा में पशुपालन विभाग और अंतरराष्ट्रीय संस्था Jhpiego की ओर से महत्वपूर्ण पहल की गई। दोनों संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में ‘One Health Consultation on Rabies Prevention and Elimination in Uttar Pradesh’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में रेबीज की रोकथाम, प्रभावी टीकाकरण और मानव-पशु स्वास्थ्य के बीच बेहतर समन्वय को लेकर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया।
पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि मानव और पशु स्वास्थ्य का एक-दूसरे से गहरा संबंध है। रेबीज जैसी घातक बीमारी के उन्मूलन के लिए एकीकृत रणनीति के साथ व्यापक जन-जागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि पशुपालन विभाग प्रदेश को सुरक्षित और रेबीज मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
- *2030 तक रेबीज उन्मूलन की रणनीति पर मंथन*
परामर्श कार्यक्रम में ‘One Health’ दृष्टिकोण के तहत प्रदेश में रेबीज की प्रभावी रोकथाम, श्वानों का शत-प्रतिशत एंटी रेबीज टीकाकरण तथा मानव और पशु स्वास्थ्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा हुई। वर्ष 2030 तक रेबीज के पूर्ण उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आवश्यक रणनीतियों और कार्ययोजना पर भी विस्तार से विचार किया गया। कार्यक्रम में निदेशक (प्रशासन एवं विकास) डॉ. राजेंद्र प्रसाद, निदेशक (रोग नियंत्रण एवं फार्म) डॉ. संगीता तिवारी, विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विषय विशेषज्ञ तथा Jhpiego के वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद रहे।
- *प्रदेशभर में लगाए गए निःशुल्क एंटी रेबीज टीकाकरण शिविर*
पशुपालन विभाग की ओर से ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत प्रदेश के सभी जनपदों में विशेष निःशुल्क एंटी रेबीज टीकाकरण शिविर भी आयोजित किए गए। अभियान का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में श्वानों तथा अन्य पशुओं में रेबीज के संक्रमण को रोकने के साथ आमजन को इस जानलेवा बीमारी के प्रति जागरूक करना रहा। शिविरों में पशुचिकित्सा विभाग की विशेषज्ञ टीमों ने पशुपालकों और स्थानीय नागरिकों के श्वानों का निःशुल्क एंटी रेबीज टीकाकरण किया। इस दौरान पशुपालकों को बताया गया कि रेबीज गंभीर और जानलेवा विषाणुजनित बीमारी है, लेकिन समय पर टीकाकरण, सावधानी और उचित प्रबंधन के माध्यम से इसके संक्रमण को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
- *पालतू श्वानों का समय से कराएं टीकाकरण*
पशुपालन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अपने पालतू श्वानों का समय से नियमित एंटी रेबीज टीकाकरण अवश्य कराएं। किसी पशु के काटने की स्थिति में बिना देरी किए चिकित्सकीय सलाह लेने की भी अपील की गई है। विभाग ने आवारा श्वानों के संबंध में भी लोगों से जिम्मेदार और सुरक्षित व्यवहार अपनाने को कहा है। अभियान के दौरान विभागीय पशुचिकित्साधिकारी, पैरावेट कर्मचारी और बड़ी संख्या में पशुपालक मौजूद रहे। विभाग की ओर से आगामी दिनों में भी प्रदेशभर में रेबीज की रोकथाम, पशु टीकाकरण और सुरक्षित पशु-व्यवहार को लेकर जागरूकता कार्यक्रम जारी रखने की बात कही गई है।